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5 August 2026 The Hindu Notes In Hindi Pdf

5 August 2026 The Hindu Notes In Hindi Pdf के इस अंक में हमने दैनिक समाचार पत्र ‘द हिंदू’ के सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों का विश्लेषण शामिल किया है। इनमें अरुणाचल की ग्लाव झील का 101वां रामसर स्थल बनना, ESIC वेतन सीमा पर ट्रेड यूनियनों की माँग, सुप्रीम कोर्ट का थर्ड-पार्टी मोटर बीमा पर बड़ा आदेश, J&K में अनुच्छेद 370 निरसन के 7 वर्ष, कराधान संशोधन विधेयक 2026 और ग्लोबल वॉर्मिंग में तेज़ी जैसे ज्वलंत विषय शामिल हैं।

वेतन सीमा में वृद्धि की माँग (Wage Ceiling Increase)

  • वर्तमान वेतन सीमा: ₹21,000 प्रति माह।
  • प्रस्तावित वेतन सीमा: ट्रेड यूनियनों (कर्मचारी प्रतिनिधियों) ने मांग की है कि इसे बढ़ाकर कम से कम 30,000 प्रति माह किया जाए।
  • संभावित प्रभाव: यदि सरकार इस सीमा को बढ़ाती है, तो वर्तमान में बीमित 3.8 करोड़ कर्मचारियों के अलावा 50 लाख से अधिक अतिरिक्त श्रमिकों को ESIC का सामाजिक सुरक्षा दायरा मिलेगा।

2. प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) के साथ समझौते पर विवाद

  • प्रस्ताव: ESIC ने बीमित श्रमिकों के इलाज के लिए राज्यों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHCs) के साथ अनुबंध

करने का प्रस्ताव रखा था।

  • ट्रेड यूनियनों का विरोध: यूनियन नेताओं ने इसका विरोध करते हुए तर्क दिया कि PHC जनता के लिए पहले से ही उपलब्ध हैं। सरकार और ESIC को दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय बीमित श्रमिकों के लिए अपने स्वयं के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का विस्तार करने पर ध्यान देना चाहिए।

कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ESIC)

भारत सरकार के श्रम और रोजगार मंत्रालय के तहत एक वैधानिक निकाय है। यह कर्मचारी राज्य बीमा (ESI) अधिनियम, 1948 द्वारा शासित होता है और असंगठित व संगठित क्षेत्र के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा व चिकित्सा लाभ प्रदान करता है।  

मुख्य विशेषताएं और वित्तपोषण (Funding)

  • कवरेज सीमा: यह योजना आमतौर पर उन कर्मचारियों पर लागू होती है जिनका मासिक वेतन ₹21,000 तक है (दिव्यांग कर्मचारियों के लिए सीमा ₹25,000 है)।  
  • अंशदान दर (Contribution Rate): कुल अंशदान 4% है, जिसमें नियोक्ता (Employer) का योगदान 3.25% और कर्मचारी (Employee) का योगदान 0.75% होता है।  
  • प्रयोज्यता: यह 10 या अधिक कर्मचारियों वाले कारखानों और चुनिंदा प्रतिष्ठानों पर अनिवार्य रूप से लागू होती है।  

प्रमुख लाभ (Benefits)

  • चिकित्सा लाभ (Medical Benefit): कर्मचारी और उसके परिवार को पूर्ण चिकित्सा देखभाल मिलती है।
  • बीमारी लाभ (Sickness Benefit): प्रमाणित बीमारी के दौरान नकद मुआवजा (साल में 91 दिनों तक)।
  • मातृत्व लाभ (Maternity Benefit): गर्भवती महिलाओं को मातृत्व अवकाश के दौरान भुगतान।
  • विकलांगता लाभ (Disablement Benefit): काम के दौरान चोट लगने पर अस्थायी या स्थायी विकलांगता पर मुआवजा।
  • आश्रित लाभ (Dependent Benefit): रोजगार के दौरान मृत्यु होने पर परिवार को मासिक पेंशन।  

अनिवार्य थर्ड-पार्टी बीमा अवधि में विस्तार

  • नया जनादेश: सुप्रीम कोर्ट ने नए वाहनों के लिए अनिवार्य थर्ड-पार्टी मोटर बीमा (Third-Party Insurance) की अवधि में 1 वर्ष का विस्तार कर दिया है।
    • चार-पहिया वाहन (New Cars): अब 3 साल के बजाय 4 साल की बीमा अवधि अनिवार्य होगी।
    • दो-पहिया वाहन (New Two-Wheelers): अब 5 साल के बजाय 6 साल की बीमा अवधि अनिवार्य होगी।
  • पीठ की टिप्पणी: IRDAI और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल (GIC) द्वारा अवधि न बढ़ाने की सिफारिश के बावजूद, पीठ ने सड़क सुरक्षा और पीड़ितों के हितों को सर्वोपरि मानते हुए यह फैसला सुनाया।
  • पुराना नियम (2018): इससे पहले ‘एस. राजशेखरन बनाम भारत संघ (2018)’ मामले में शीर्ष अदालत ने कारों के लिए 3 वर्ष और दो-पहिया वाहनों के लिए 5 वर्ष का थर्ड-पार्टी बीमा अनिवार्य किया था।

रियल-टाइम इंफोर्समेंट के लिए डेटा इंटीग्रेशन

अदालत ने बिना बीमा चल रहे वाहनों की पहचान करने और चालान काटने के लिए डेटा एकीकरण का निर्देश दिया:

  • ANPR कैमरों का एकीकरण: सड़कों/हाइवे पर लगे ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन (ANPR) कैमरों को IIB (इंश्योरेंस इंफॉर्मेशन ब्यूरो ऑफ इंडिया) और VAHAN (वाहन पंजीकरण पोर्टल) के डेटा के साथ जोड़ा जाएगा।
  • पुलिस के लिए मोबाइल ऐप: राज्य पुलिस कर्मियों को IIB और VAHAN डेटाबेस से जुड़े मोबाइल ऐप्स से लैस किया जाएगा ताकि वे मौके पर ही वाहन बीमा की जांच कर चालान जारी कर सकें।

पेट्रोल पंपों पर ईंधन न देने का प्रस्ताव

  • सुप्रीम कोर्ट ने बिना वैध बीमा (Valid Insurance) के चलने वाले वाहनों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन (Fuel) न देने की व्यवस्था लागू करने का भी प्रस्ताव रखा है।

अध्ययन का निष्कर्ष

  • पत्रिका: Geophysical Research Letters में प्रकाशित एक नए अध्ययन के अनुसार ग्लोबल वॉर्मिंग (वैश्विक तापमान वृद्धि) की दर में तेज़ी आ रही है।
  • शुरुआत: रिकॉर्ड के अनुसार पिछले दशक में पृथ्वी किसी भी अन्य दशक की तुलना में सबसे तेज़ी से गर्म हुई है। यह तेज़ी मुख्य रूप से वर्ष 2015 के आसपास शुरू हुई।
  • सांख्यिकीय निश्चितता: शोधकर्ता 98% से अधिक आश्वस्त हैं कि यह वृद्धि कोई आकस्मिक या अल्पकालिक उतार-चढ़ाव नहीं, बल्कि एक वास्तविक बदलाव है।

अनुसंधान पद्धति (Methodology)

  • प्राकृतिक शोर (Noise) को हटाना: अतीत में वर्ष-दर-वर्ष होने वाले प्राकृतिक परिवर्तनों (जैसे ज्वालामुखी विस्फोट और सौर गतिविधियों में बदलाव) के कारण तापमान में वृद्धि की गति को साबित करना कठिन था।
  • डेटा विश्लेषण: शोधकर्ताओं ने तापमान के 5 प्रमुख वैश्विक डेटासेट का विश्लेषण किया और सांख्यिकीय तरीकों का उपयोग करके इन प्राकृतिक कारकों के प्रभाव को घटाकर/हटाकर वास्तविक रुझान का पता लगाया।

प्रमुख परिणाम और भविष्य की चेतावनी

  • 1.5°C का लक्ष्य खतरे में: तापमान में धीमी वृद्धि की दर के आधार पर वैज्ञानिकों को उम्मीद थी कि दुनिया के पास ग्लोबल वॉर्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस के भीतर रखने के लिए अधिक समय होगा।
  • 2030 तक सीमा पार: नई और त्वरित गति के कारण पृथ्वी 2030 तक 1.5 डिग्री सेल्सियस की वॉर्मिंग सीमा को पार कर जाएगी।

तापमान वृद्धि में तेज़ी के मुख्य कारण

  • ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन: ग्रीनहाउस गैसों का बढ़ता उत्सर्जन ही इस तापमान वृद्धि का मुख्य कारण है।
  • वायु प्रदूषण में कमी का प्रभाव (Aerosol Effect):
    • वायु प्रदूषण (विशेष रूप से एरोसोल कण) सूर्य की किरणों को परावर्तित करके एक शीतलन प्रभाव (Cooling Effect) पैदा करते थे जो तापमान वृद्धि को छिपाए रखता था।
    • जैसे-जैसे हवा साफ़ हुई (प्रदूषण घटा), यह कूलिंग प्रभाव समाप्त हो गया और ग्लोबल वॉर्मिंग का पूर्ण प्रभाव सामने आने लगा।

पृष्ठभूमि और सुरक्षा उपाय

  • 7 वर्ष पूरे: 5 अगस्त को जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे (अनुच्छेद 370) के निरसन और 9 अगस्त को राज्य का दर्जा (Statehood) छीनकर केंद्र शासित प्रदेश बनाने के 7 वर्ष पूरे हो गए हैं।
  • आपातकालीन उपाय: इस प्रक्रिया के दौरान संचार नाकाबंदी, कर्फ्यू, भारी सैन्य बल की तैनाती और 5,000 से अधिक नेताओं व कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था।

सुरक्षा और हिंसा की स्थिति

  • अशांत क्षेत्र का विस्तार: सरकार के हिंसा-मुक्त क्षेत्र के दावों के विपरीत हिंसा जारी रही और पुंछ-राजौरी जैसे शांत क्षेत्रों में भी फैल गई (जैसे पहलगाम और दिल्ली के लाल किले पर हमले)।
  • कठोर कानूनों का प्रयोग: सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम (PSA) और UAPA जैसे कड़े कानूनों का व्यापक उपयोग, सामूहिक सम्मन, और 2019 के बाद से देश में सबसे अधिक इंटरनेट/संचार ब्लैकआउट दर्ज किए गए।

आर्थिक और सामाजिक स्थिति

  • प्रति व्यक्ति आय में गिरावट: J&K आर्थिक सर्वेक्षण 2025-2026 के अनुसार, राष्ट्रीय औसत की तुलना में क्षेत्र की प्रति व्यक्ति आय अनुपात 2013-14 के 79.9% से घटकर 76.6% हो गया है।
  • बेरोजगारी दर: बेरोजगारी राष्ट्रीय औसत से लगभग दोगुनी बनी हुई है, जहाँ स्नातकों (Graduates) में बेरोजगारी दर 23.9% तक पहुँच गई है।

प्रशासनिक ढाँचा और शक्तियाँ

  • उपराज्यपाल (L-G) का नियंत्रण: हालाँकि दो वर्ष पूर्व चुनाव आयोजित किए गए थे, लेकिन 2024 के बिजनेस ट्रांजैक्शन रूल्स के तहत वास्तविक शक्तियाँ (प्रशासन, पुलिस, अभियोजक और दूरसंचार आपातकालीन शक्तियाँ) उपराज्यपाल के पास केंद्रित हैं।
  • जवाबदेही की कमी: एक मनोनीत/अधिरोपित पद होने के कारण उपराज्यपाल जनता के प्रति सीधे तौर पर जवाबदेह नहीं हैं।

संवैधानिक और न्यायिक पहलू

  • संवैधानिक उल्लंघन: राज्य का दर्जा छीनना और कार्यकारी आदेशों (Executive Fiat) के जरिए बदलाव करना भारत के संवैधानिक सिद्धांतों और संघ के मूल ढाँचे का उल्लंघन माना गया।
  • सुप्रीम कोर्ट का रुख: अदालत ने चार वर्षों तक सॉलिसिटर जनरल के तर्कों को सुना और केवल राज्य का दर्जा जल्द बहाल करने की सलाह दी, लेकिन बहाली के लिए कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं की।

आगे की राह (Way Forward)

  • पूर्ण राज्यत्व की बहाली: लोकतन्त्र और प्रशासनिक जवाबदेही (Accountability) को बहाल करने के लिए जम्मू और कश्मीर को उसका राज्य का दर्जा (Statehood) वापस दिया जाना अत्यंत आवश्यक है।
  • चुनी हुई सरकार को शक्तियाँ: नागरिक समाज और लोकतांत्रिक संस्थाओं को प्रभावी ढंग से काम करने के लिए चुनी हुई सरकार को पूर्ण प्रशासनिक अधिकार दिए जाने चाहिए।

संदर्भ (Context): 1949 में उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (NATO) की स्थापना के बाद पहली बार अमेरिका (वाशिंगटन) यूरोप से न केवल रक्षा खर्च बढ़ाने बल्कि अपनी सुरक्षा की प्राथमिक जिम्मेदारी स्वयं उठाने की मांग कर रहा है। यह ट्रांसअटलांटिक गठबंधन (Transatlantic Compact) में एक ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक है।

अमेरिकी नीति में बदलाव (America’s Strategic Rebalancing)

  • राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति (नवंबर 2025):
    • अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि वह यूरोप के प्राथमिक सुरक्षा गारंटर के रूप में अपनी भूमिका समाप्त कर रहा है।
    • नया रक्षा खर्च मानक (Benchmark): जीडीपी का 5% (5% of GDP)।
    • अमेरिका अब केवल एक रणनीतिक सक्षमतादाता (Strategic Enabler), परमाणु गारंटर और राजनीतिक संयोजक की भूमिका निभाएगा।
    • उद्देश्य: अमेरिका का मुख्य ध्यान अब इंडो-पैसिफिक (Indo-Pacific) क्षेत्र पर केंद्रित करना है।
  • सैन्य उपस्थिति में कटौती:
    • यूक्रेन युद्ध के समय बढ़ाए गए 1,00,000 सैनिकों के स्तर को घटाकर 75,000–80,000 पर लाया गया है (जर्मनी से 5,000 सैनिक वापस बुलाए गए और पोलैंड में 4,000 सैनिकों की तैनाती रद्द की गई)।
  • अंकारा शिखर सम्मेलन (जुलाई 2026):
    • अनुच्छेद 5 (Article 5) के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई।
    • यूक्रेन को 2026 में €70 बिलियन की सहायता देने और यूरोप द्वारा लंबी दूरी की सटीक स्ट्राइक क्षमताओं के विकास पर सहमति बनी।

NATO के विकास के तीन चरण (Three Phases of NATO’s Evolution)

1. NATO 1.0 (1949–1991)

  • यह चरण शीत युद्ध के दौर को निरूपित करता है।
  • अमेरिकी निर्भरता: सोवियत संघ के किसी भी संभावित आक्रमण को रोकने के लिए यूरोप पूरी तरह से अमेरिकी सैन्य और परमाणु शक्ति पर निर्भर था।

2. NATO 2.0 (1991–2022)

  • सोवियत संघ के विघटन के बाद की अवधि।
  • पूर्वी विस्तार: पूर्व वॉरसॉ पैक्ट (Warsaw Pact) देशों को शामिल करते हुए नाटो का पूर्व की ओर विस्तार हुआ।
  • वैश्विक अभियान: बाल्कन क्षेत्रों और अफगानिस्तान में सैन्य अभियानों का संचालन किया गया।
  • यूरोपीय निर्भरता: इस दौरान अमेरिकी सैन्य पारिस्थितिकी तंत्र (Military Ecosystem) पर यूरोपीय देशों की निर्भरता और बढ़ गई।

3. NATO 3.0 (2022 से वर्तमान)

  • रूस-यूक्रेन संघर्ष के शुरू होने के बाद का चरण।
  • यूरोपीय स्वायत्तता: यूरोप अब अपनी पारंपरिक रक्षा (Conventional Defense) की प्राथमिक जिम्मेदारी खुद संभाल रहा है।
  • अमेरिका की भूमिका: अमेरिका अब एक मुख्य योद्धा के बजाय केवल एक रणनीतिक सक्षमतादाता (Strategic Enabler) की भूमिका निभा रहा है।

लॉर्ड इस्मे (NATO के प्रथम महासचिव) का कथन बनाम आज की स्थिति:

  • शीत युद्ध कालीन सूत्र: “Keep the Russians out, the Americans in, and the Germans down”
  • आधुनिक 3.0 सूत्र: “Keep Russia deterred(रोकना), America engaged, and Europe prepared”

यूरोप के सामने प्रमुख चुनौतियाँ (Europe’s Core Dilemmas)

  • जीडीपी प्रतिबद्धता: हेग शिखर सम्मेलन (2025) में 2035 तक मूल रक्षा खर्च को कम से कम जीडीपी का 3.5% करने का लक्ष्य तय किया गया है।
  • अमेरिकी इकोसिस्टम का स्थान लेना कठिन:
    • केवल सैन्य बजट या सेना का आकार बढ़ाना पर्याप्त नहीं है; यूरोप अभी भी खुफिया (Intelligence), उपग्रह सहायता (Satellite Support), कमांड एंड कंट्रोल (C2), स्ट्रैटेजिक एयरलिफ्ट, मिसाइल डिफेंस और परमाणु छत्र (Nuclear Umbrella) के लिए अमेरिका पर अत्यधिक निर्भर है।

भारत के लिए रणनीतिक आयाम (Strategic Implications for India)

  1. इंडो-पैसिफिक पर अमेरिकी ध्यान: यूरोप द्वारा अपनी सुरक्षा खुद संभालने से अमेरिका अपने राजनयिक, सैन्य और तकनीकी संसाधनों को इंडो-पैसिफिक में चीन के आक्रामक रवैये का मुकाबला करने में लगा सकेगा।
  2. नई रक्षा व तकनीकी साझेदारियाँ: एक अधिक सक्षम और आत्मनिर्भर यूरोप भारत के लिए रक्षा विनिर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर और अंतरिक्ष क्षेत्र में एक बड़ा भागीदार बन सकता है।
  3. रणनीतिक स्वायत्तता (Strategic Autonomy): NATO का यह पुनर्संतुलन भारत को किसी गठबंधन का हिस्सा बने बिना अमेरिका और यूरोपीय संघ दोनों के साथ बहुध्रुवीय दुनिया में द्विपक्षीय जुड़ाव बढ़ाने का अवसर देता है।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न (Mains Practice Question)

“NATO का ‘3.0 चरण’ केवल यूरोपीय सुरक्षा ढाँचे का पुनर्संतुलन नहीं है, बल्कि यह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिकी रणनीतिक ध्यान के पुनर्गठन का संकेत भी है।” इस कथन का परीक्षण कीजिए और बताइए कि यह बदलाव भारत के लिए किस प्रकार रणनीतिक अवसर उत्पन्न करता है? (250 शब्द, 15 अंक)

संदर्भ (Context): जंतर-मंतर पर युवाओं और छात्रों का हालिया आंदोलन भारत में बढ़ते युवा असंतोष, उच्च शिक्षित बेरोजगारी, शिक्षा बजट में कटौती और केंद्रीय प्रवेश परीक्षाओं (NTA/CUET) की संरचनात्मक कमियों को उजागर करता है।

जनसांख्यिकी लाभांश का संकट (Crisis of Demographic Dividend)

  • विपरीत जनसांख्यिकी लाभांश: भारत में इस समय दुनिया की सबसे युवा आबादी (15–64 वर्ष) है, लेकिन रोजगार सृजन की कमी के कारण यह संभावित लाभांश व्यर्थ होने के जोखिम में है।
  • बेरोजगारी दर के आंकड़े (Unemployment Disparities):
    • युवाओं (15–29 वर्ष) में बेरोजगारी की दर समग्र राष्ट्रीय बेरोजगारी दर से 3 गुना अधिक है।
    • महिलाओं के मामले में यह 4 गुना अधिक है; शहरी क्षेत्रों में रोजगार तलाश रही लगभग 5 में से 1 महिला (20%) बेरोजगार है।
  • मांग पक्ष की समस्या (Demand-side Problem):
    • शिक्षा का स्तर बढ़ने के साथ बेरोजगारी की दर बढ़ रही है। यह स्पष्ट करता है कि समस्या ‘कुशल/शिक्षित युवाओं की आपूर्ति’ की नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था में ‘पर्याप्त नौकरियों की मांग न होने’ की है।

शिक्षा क्षेत्र में बजटीय और संरचनात्मक संकट (Education Sector Crisis)

  • बजटीय आवंटन में गिरावट:
    • राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 में शिक्षा पर खर्च बढ़ाने की सिफारिश के बावजूद, कुल सरकारी बजट में शिक्षा का प्रतिशत हिस्सा लगातार घटा है।
    • हालिया बजट में शिक्षा क्षेत्र में बजटीय आवंटन की तुलना में 6,701 करोड़ का कम खर्च (Shortfall) देखा गया।
  • सीटों की कमी और अस्थिर नीतियां:
    • आवेदकों की संख्या बढ़ने के मुकाबले उच्च शिक्षण संस्थानों में सीटों की संख्या स्थिर है।
    • प्रवेश परीक्षाओं और मूल्यांकन पद्धतियों में बार-बार बदलाव (जैसे कभी बोर्ड अंक, तो कभी CBT अंक) से छात्रों में अनिश्चितता बढ़ी है।

केंद्रीकृत परीक्षाओं का प्रभाव: Common University Entrance Test (CUET) और NTA (Impact of Centralised Testing)

  • कोचिंग संस्कृति को बढ़ावा (Mushrooming Coaching): MCQ-आधारित परीक्षण प्रणाली के कारण स्कूली शिक्षा की महत्ता कमजोर हुई है और कोचिंग संस्कृति को बढ़ावा मिला है।
  • शैक्षणिक सत्रों में देरी (Delayed Academic Sessions): NTA की तकनीकी और प्रणालीगत खराबी के कारण प्रवेश प्रक्रिया आधी मियाद (सत्र के काफी समय) तक खिंच जाती है, जिससे सत्र में देरी होती है।
  • अकादमिक अखंडता प्रभावित: स्कूली और स्नातक स्तर की सतत व व्यापक पढ़ाई के बजाय छात्रों का ध्यान केवल MCQ पास करने की ट्रिक्स पर केंद्रित हो गया है।
  • प्रशासनिक गड़बड़ियां: राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से परीक्षा संचालन में बार-बार विफलता देखने को मिली है।

आगे की राह (Way Forward)

  1. शिक्षा बजट में वृद्धि: जीडीपी के 6% (NEP 2020 के लक्ष्य) के अनुरूप शिक्षा बजट का वास्तविक और समयबद्ध आवंटन सुनिश्चित किया जाए।
  2. रोजगार-सघन क्षेत्रों को बढ़ावा: विनिर्माण (Manufacturing) और सेवा क्षेत्र में उच्च-गुणवत्ता वाले पदों का सृजन कर शिक्षित बेरोजगारी को दूर किया जाए।
  3. परीक्षा प्रणाली का सरलीकरण: प्रवेश परीक्षाओं को अति-केंद्रीकृत बनाने के बजाय राज्यों और विश्वविद्यालयों को स्वायत्तता दी जाए ताकि कोचिंग निर्भरता कम हो।
  4. विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता व स्वायत्तता: केवल नए भवन/संस्थान बनाने के बजाय योग्य शिक्षकों की नियुक्ति और राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त अकादमिक माहौल तैयार किया जाए।

मुख्य परीक्षा हेतु अभ्यास प्रश्न (Mains Practice Question)

“भारत का जनसांख्यिकी लाभांश (Demographic Dividend) केवल जनसांख्यिकी के बल पर स्वतः प्राप्त नहीं हो सकता, इसके लिए मजबूत शिक्षा प्रणाली और पर्याप्त रोजगार सृजन की आवश्यकता है।” हालिया शिक्षा संकट और उच्च शिक्षित बेरोजगारी के संदर्भ में इस कथन का समालोचनात्मक विश्लेषण कीजिए। (250 शब्द, 15 अंक)

विधेयक का परिचय और उद्देश्य

  • पेश किया गया: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 [Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026] पेश किया।
  • मुख्य उद्देश्य:
    • विदेशी पूंजी (Foreign Capital) को आकर्षित करना।
    • भारत में व्यापार करने को आसान बनाना (Ease of Doing Business)।
    • ‘मेक इन इंडिया’ (Make in India) मिशन को गति देना।
  • संशोधित होने वाले कानून: यह विधेयक पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट (2007), आयकर अधिनियम (2025), और वित्त अधिनियम (2026) में संशोधन करेगा।

डेटा केंद्रों (Data Centres) के लिए कर छूट

  • सशर्त छूट में ढील: भारतीय डेटा केंद्रों का उपयोग करने वाली विदेशी क्लाउड कंपनियों को पहले कर छूट पाने के लिए कई स्तरों की सरकारी सूचनाओं और स्वीकृतियों की आवश्यकता होती थी, जिसे अब हटाने का प्रस्ताव है।
  • लीज्ड आधार की अनुमति: अब भारतीय डेटा केंद्रों को केवल प्रत्यक्ष स्वामित्व (Direct Ownership) के बजाय लीज (Leased basis) पर चलाने की भी अनुमति होगी।

विदेशी फंड मैनेजरों (Fund Managers) के लिए नए नियम

  • शर्तों की सूची में कटौती: पहले कड़े नियमों के डर से विदेशी फंड मैनेजर भारत में बसने से कतराते थे, ताकि पूरा विदेशी फंड भारत में कर योग्य न हो जाए।
  • भारत में ट्रांसफर आसान: प्रस्तावित नियमों के तहत, दुरुपयोग और राउंड-ट्रिपिंग (Round-tripping) रोकने वाले जरूरी नियमों को छोड़कर बाकी शर्तें हटा दी गई हैं। अब फंड मैनेजर विदेशी फंड पर अतिरिक्त टैक्स के जोखिम के बिना भारत स्थानांतरित हो सकते हैं।

REITs और InvITs के लाभांश (Dividends) पर कर छूट

  • छूट की बहाली: रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) और इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (InvITs) द्वारा निवेशकों को दिए जाने वाले लाभांश पर पहले केवल पुरानी कर व्यवस्था (Old Tax Regime) के तहत छूट मिलती थी।
  • नया संशोधन: चूंकि कंपनियां नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) की ओर बढ़ रही हैं, इसलिए निवेशकों के लाभ को बनाए रखने के लिए विधेयक में इस कर छूट (Tax Exemption) को बहाल करने का प्रस्ताव रखा गया है।
  • 101वां रामसर स्थल: अरुणाचल प्रदेश की ग्लाव झील (Glaw Lake) को भारत का 101वां अंतर्राष्ट्रीय महत्व का आर्द्रभूमि (रामसर स्थल) घोषित किया गया है।
  • अरुणाचल प्रदेश के लिए उपलब्धि: ग्लाव झील अरुणाचल प्रदेश का पहला रामसर स्थल बन गई है।

ग्लाव झील की भौगोलिक और पारिस्थितिक विशेषताएँ

  • अवस्थिति: यह पूर्वी हिमालय में कमलांग टाइगर रिजर्व और वन्यजीव अभ्यारण्य (Kamlang Tiger Reserve & Wildlife Sanctuary) के भीतर स्थित एक मीठे पानी की झील (Freshwater Lake) है।
  • जल स्रोत: यह बारहमासी पहाड़ी धाराओं से पोषित होती है।
  • जैव विविधता:
    • यहाँ 150 से अधिक वृक्ष प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
    • यहाँ 49 ऑर्किड प्रजातियाँ (Orchid species) मौजूद हैं, जो इसके समृद्ध पारिस्थितिक महत्व को दर्शाती हैं।

भारत में रामसर स्थलों का विस्तार

  • नेटवर्क में वृद्धि: 2014 में भारत में केवल 26 रामसर स्थल थे, जो बढ़कर अब 101 हो गए हैं।
  • महत्व: भारत ने रामसर स्थलों को नामित करने के मामले में 100 का आंकड़ा पार कर लिया है, जो देश में आर्द्रभूमि संरक्षण (Wetland Conservation), जैव विविधता और जल व जलवायु सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

कमलांग टाइगर रिजर्व (Kamlang Tiger Reserve)

यह अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिले में स्थित पूर्वी हिमालय का एक अत्यंत समृद्ध पारिस्थितिक क्षेत्र है। यह भारत का 50वां टाइगर रिजर्व है, जो अपनी विविध स्थलाकृति और जैव विविधता के लिए जाना जाता है।

भौगोलिक विशेषताएं (Geographical Features)

  • स्थिति (Location): अरुणाचल प्रदेश का लोहित (Lohit) जिला। यह प्रसिद्ध ‘मिशमी पहाड़ियों’ (Mishmi Hills) का हिस्सा है।
  • समीपवर्ती संरक्षित क्षेत्र: यह उत्तर-पूर्व दिशा में नामदफा राष्ट्रीय उद्यान से सटा हुआ है।
  • जल निकाय (Water Bodies):
    • कमलांग नदी: इस रिजर्व का नाम ‘कमलांग नदी’ के नाम पर रखा गया है, जो इसके बीच से बहती है और ब्रह्मपुत्र की सहायक नदी (लोहित नदी) में मिलती है।
    • ग्लाव झील (Glaw Lake): यह इस रिजर्व के भीतर स्थित एक प्रमुख मीठे पानी की पहाड़ी झील है, जिसे भारत का 101वां रामसर स्थल घोषित किया गया है।

पारिस्थितिक और वनस्पति विशेषताएं (Ecological & Floral Features)

  • ऊंचाई में अंतर (Elevation Gradient): यह समुद्र तल से लगभग 200 मीटर से लेकर 4,000 मीटर से अधिक की ऊंचाई तक फैला है, जिससे यहाँ विभिन्न प्रकार के सूक्ष्म-जलवायु (Micro-climates) पाए जाते हैं।
  • वनस्पति के प्रकार (Vegetation Types):
    • उष्णकटिबंधीय आर्द्र सदाबहार वन (Tropical Wet Evergreen Forests)
    • उप-उष्णकटिबंधीय और समशीतोष्ण वन (Sub-tropical & Temperate Forests)
    • अल्पाइन वनस्पति (Alpine Vegetation – ऊपरी ऊंचाइयों पर)

वन्यजीव एवं जैव विविधता (Faunal Diversity)

श्रेणीप्रमुख प्रजातियाँ
बड़ी बिल्लियाँ (Big Cats)बाघ (Bengal Tiger), तेंदुआ (Leopard), क्लाउडेड तेंदुआ (Clouded Leopard), और हिम तेंदुआ (Snow Leopard – ऊपरी क्षेत्रों में)।
स्तनधारी (Mammals)मिशमी तकिन (Mishmi Takin – राज्य पशु), हूलॉक गिब्बन (Hoolock Gibbon – भारत का एकमात्र कपि), स्लो लोरिस, कस्तूरी मृग (Musk Deer)।
पक्षी (Avifauna)ग्रेट इंडियन हॉर्नबिल, व्हाइट-विंग्ड वुड डक (White-winged Wood Duck), और विभिन्न दुर्लभ हिमालयी पक्षी।

4. रणनीतिक एवं संरक्षण महत्व (Conservation Significance)

  • जैव विविधता हॉटस्पॉट: यह इंडो-बर्मा जैव विविधता हॉटस्पॉट का हिस्सा है।
  • कॉरिडोर कनेक्टिविटी: नामदफा नेशनल पार्क के साथ मिलकर यह वन्यजीवों (विशेष रूप से बाघों और हाथियों) की आवाजाही के लिए एक अबाध जैविक गलियारा (Biological Corridor) प्रदान करता है।
  • स्थानीय समुदाय: इस क्षेत्र के आसपास ‘मिशमी’ (Mishmi) जनजाति के लोग रहते हैं, जो पारंपरिक रूप से इस जंगल के संरक्षण से जुड़े रहे हैं।

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