26 August 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत वैश्विक भूमि व जल संकट से निपटने के लिए UNCCD COP17 में भारत के ‘Drought Resilience’ विजन, देश में कैशलेस अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाले UPI के 10 सफल वर्षों के सफर, नौसेना की गहरे समुद्र में अभियानों की क्षमता बढ़ाने वाले स्वदेशी डाइंग सपोर्ट वेसल ‘निपुण’ (DSV), द्विपक्षीय आर्थिक व औद्योगिक संबंधों को सुदृढ़ करने वाली भारत-जापान निवेश साझेदारी (टोक्यो बैठक), संस्कृत साहित्य के महान ध्वजवाहक पर आधारित ‘कहो कालिदास!’ पुस्तक विमोचन व कालिदास के साहित्यिक योगदान, तथा अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र के मूल्य दबावों को मापने हेतु सेवा उत्पादक मूल्य सूचकांक (Service PPI) का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
UNCCD COP17: सूखे के संकट से निपटने के लिए भारत का ‘Drought Resilience’ विजन
- प्रारंभिक परीक्षा: संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय (UNCCD), COP17 (उलानबटार), कैचमेंट एवं रिवरस्केप वानिकी, वाटरशेड प्रबंधन, फसल बीमा।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): पर्यावरण एवं आपदा प्रबंधन – सूखा जोखिम न्यूनीकरण, जलवायु अनुकूलता, जल सुरक्षा, पारिस्थितिकी तंत्र बहाली।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने मंगोलिया की राजधानी उलानबटार में आयोजित UNCCD COP17 के मंत्रिस्तरीय संवाद को संबोधित किया। भारत ने वैश्विक समुदाय से सूखे के प्रबंधन के तरीके में बड़ा बदलाव लाने का आह्वान किया। भारत का मुख्य संदेश है: सूखे को हर बार आने वाली अचानक आपदा मानने के बजाय एक पूर्वानुमान योग्य और रोकने योग्य जोखिम (Predictable & Preventable Risk) माना जाए।
मुख्य बिंदु: वैश्विक आह्वान एवं भारत का बहु-संस्थगत मॉडल
1. दृष्टिकोण में बदलाव: 3 मुख्य सिद्धांत
भारत ने वैश्विक मंच पर तीन बुनियादी सिद्धांतों पर जोर दिया:
- प्रतिक्रिया से पहले तैयारी।
- संकट प्रबंधन से पहले रोकथाम।
- अस्थायी राहत से पहले दीर्घकालिक सहनशीलता।
2. जल और भूमि का एकीकृत संबंध
- “Restore the Forest, Before the Flow”: भारत ने नदियों के जलग्रहण क्षेत्रों (Catchment Areas) और रिवरस्केप वानिकी पर ध्यान केंद्रित किया है, जिससे मिट्टी का कटाव रुकता है और भूजल रीचार्ज होता है।
- पारंपरिक जल निकाय: नदियों के पुनरुद्धार और पारंपरिक जल स्रोतों के जीर्णोद्धार के जरिए ग्रामीण जल सुरक्षा मजबूत की जा रही है।
3. त्रिस्तरीय रणनीति (3-Level Action Strategy)
- सामुदायिक स्तर (Hills & Plains): पहाड़ी क्षेत्रों में सोतों (Springs) का संरक्षण और मैदानी इलाकों में ‘रिज-टू-वैली’ वाटरशेड मॉडल। इसे मनरेगा जैसी ग्रामीण रोजगार योजनाओं के साथ जोड़ा गया है।
- घरेलू स्तर (Households): संकट के समय भी पेयजल की सुनिश्चित आपूर्ति, स्थानीय स्तर पर जल गुणवत्ता जांच और संवेदनशील क्षेत्रों को प्राथमिकता देना।
- कृषि स्तर (Farmers): जलवायु-सक्षम फसलें और सब्सिडी वाले प्रीमियम पर तकनीक-आधारित फसल बीमा। इससे सूखे के नुकसान की भरपाई पारदर्शी और तेज तरीके से होती है।
4. तकनीक और प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली
- वर्षा की रीयल-टाइम निगरानी और उपग्रह (Satellite)-आधारित सूखा मूल्यांकन।
- राज्यों और मंत्रालयों के स्तर पर अग्रिम तैयारी, ताकि कम वर्षा की स्थिति तुरंत आपदा में न बदले।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजन एवं स्थल | UNCCD COP17, उलानबटार (मंगोलिया) |
| भारतीय प्रतिनिधि | श्री भूपेंद्र यादव (पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री) |
| मंत्रिस्तरीय संवाद का विषय | ‘Accelerating Drought Resilience’ |
| भारत का प्रमुख नारा | “Restore the forest, before the flow” |
डिजिटल वित्तीय क्रांति: UPI के 10 सफल वर्ष
- प्रारंभिक परीक्षा: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI), NPCI, डिजिटल इंडिया, वित्तीय समावेशन।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था, समावेशी विकास, वित्तीय समावेशन में डिजिटल प्रौद्योगिकी की भूमिका, कैशलेस अर्थव्यवस्था।
चर्चा में क्यों?
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के सफल 10 वर्ष पूरे होने पर देश की डिजिटल वित्तीय यात्रा की सराहना की। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से कहा कि ‘यूपीआई ने भारतीय अर्थव्यवस्था और दैनिक जीवन में क्रांतिकारी बदलाव लाया है, जिससे आज हर भारतीय का मोबाइल फोन ही उसका बटुआ (Wallet) बन चुका है।’
मुख्य बिंदु: डिजिटल भुगतान क्रांति और समाज पर प्रभाव
1. कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर बड़ा बदलाव
- दैनिक जीवन में सरलता: पहले जहां नकद रखना अनिवार्य था, वहीं अब चाय की दुकान से लेकर कॉलेज कैंटीन, गांव और बड़े व्यवसायों तक भुगतान कुछ सेकंड में संभव हो गया है।
- शून्य रुकावट (Zero Hassle): आसान इंटरफेस और त्वरित लेनदेन ने कागजी मुद्रा पर निर्भरता को काफी कम कर दिया है।
2. वित्तीय समावेशन और जमीनी प्रभाव
- समावेशी पहुंच: यूपीआई ने देश के ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर शहरी अर्थव्यवस्था तक को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ला खड़ा किया है।
- महिलाओं व सूक्ष्म उद्यमियों का सशक्तिकरण: छोटे व्यापारी, रेहड़ी-पटरी वाले और महिलाएं बिना किसी बैंकिंग जटिलता के वित्तीय मुख्यधारा से जुड़ पाई हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| प्रौद्योगिकी का नाम | यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) |
| विकासकर्ता संस्था | भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) |
| नियमन निकाय | भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) |
| मूल तकनीक आधार | IMPS (Immediate Payment Service) इंफ्रास्ट्रक्चर |
| शुरुआत / मील का पत्थर | 10 वर्ष की सफल यात्रा पूरी |
| मुख्य उद्देश्य | 24×7 इंटरऑपरेबल और तत्काल डिजिटल भुगतान सुविधा |
स्वदेशी सुरक्षा ढांचा: नौसेना बेड़े में शामिल होगा ‘निपुण’ (DSV Nipun)
- प्रारंभिक परीक्षा: निस्तार-क्लास, डाइविग सपोर्ट वेसल (DSV निपुण), हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL), पनडुब्बी बचाव प्रणाली (Submarine Rescue)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, स्वदेशीकरण, मेक इन इंडिया, समुद्री सुरक्षा और भारत की नौसैन्य क्षमताएं।
चर्चा में क्यों?
भारतीय नौसेना 31 अगस्त 2026 को मुंबई स्थित नवल डॉकयार्ड में अपने दूसरे स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट वेसल (DSV) ‘निपुण’ को बेड़े में शामिल (Commission) करने जा रही है। यह निस्तार-क्लास का दूसरा जहाज़ है। इसे हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL), विशाखापत्तनम ने डिजाइन और निर्मित किया है। 30 जुलाई 2026 को सभी समुद्री परीक्षणों के बाद इसे नौसेना को सौंपा गया था।
मुख्य बिंदु: तकनीकी क्षमताएं और रणनीतिक महत्व
1. आधुनिक तकनीक और स्टेशन कीपिंग
- सटीक संचालन: इसमें अत्याधुनिक नेविगेशन, प्लेटफॉर्म प्रबंधन और डायनेमिक स्टेशन-कीपिंग सिस्टम लगे हैं।
- गहरे समुद्र में सहायता: यह गहरे समुद्र में गोताखोरी और कठिन समुद्री परिस्थितियों में गोताखोरों को दीर्घकालिक सहायता प्रदान करता है।
2. पनडुब्बी बचाव में भूमिका
- रेस्क्यू सपोर्ट: यह जहाज़ भारतीय नौसेना के सबमरीन रेस्क्यू ऑपरेशन्स (पनडुब्बी बचाव अभियानों) की क्षमता को कई गुना मजबूत करेगा।
- एकीकृत मंच: इसमें चिकित्सा सहायता, डाइविंग उपकरण और अंडरवॉटर इंटरवेंशन सिस्टम एक ही स्थान पर उपलब्ध हैं।
3. ‘मेक इन इंडिया’ और स्वदेशीकरण
- स्थानीय विनिर्माण: विशाखापत्तनम स्थित HSL द्वारा निर्मित यह पोत भारत के रक्षा पोत निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र (Defence Shipbuilding Ecosystem) की क्षमता को दर्शाता है।
- आत्मनिर्भरता: यह पोत भारत की विदेशी प्लेटफार्मों पर निर्भरता कम करेगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| पोत का नाम | DSV निपुण |
| श्रेणी / क्लास | निस्तार-क्लास का दूसरा DSV |
| निर्माता संस्था | हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL), विशाखापत्तनम |
| कमीशनिंग तिथि व स्थल | 31 अगस्त 2026 (नवल डॉकयार्ड, मुंबई) |
| प्राथमिक भूमिका | गहरा समुद्री गोताखोरी (Deep-sea diving) और पनडुब्बी बचाव अभियान |
भारत-जापान निवेश साझेदारी: टोक्यो बैठक और रणनीतिक सहयोग
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत-जापान द्विपक्षीय संबंध, GIFT City, भारत सेमीकंडक्टर मिशन, 10 ट्रिलियन येन निवेश लक्ष्य।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): भारत के द्विपक्षीय संबंध, एफडीआई (FDI) प्रवाह, अवसंरचना विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और आर्थिक वृद्धि।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने टोक्यो में जापान के प्रमुख वित्तीय और निवेश संस्थानों के वरिष्ठ नेताओं के साथ उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य भारत में दीर्घकालिक जापानी संस्थागत पूंजी (Institutional Capital) के प्रवाह को बढ़ाना, निवेश साझेदारी को गहरा करना और अगले दशक में भारत में 10 ट्रिलियन येन के जापानी निजी निवेश के लक्ष्य को गति देना है।
मुख्य बिंदु: निवेश क्षेत्र, जापानी संस्थानों का विजन और सुधार
1. भारत के विकास आधार और प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्र
- आर्थिक मजबूती: भारत की 7.7% की हालिया वृद्धि दर, मजबूत बैंकिंग क्षेत्र, कम NPA और वर्ष 2047 तक 30 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य रेखांकित किया गया।
- प्रमुख उभरते क्षेत्र: सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेंटर, ग्रीन हाइड्रोजन, नवीकरणीय ऊर्जा और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग।
- GIFT City की भूमिका: गुजरात स्थित GIFT City को अंतरराष्ट्रीय पूंजी और भारत-जापान सीमा पार निवेश के प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में प्रस्तुत किया गया।
2. जापानी वित्तीय संस्थानों का भारत में विज़न
- MUFG: श्रीराम फाइनेंस में 4 बिलियन का निवेश और नवीकरणीय ऊर्जा में विस्तार।
- Development Bank of Japan (DBJ): रियल एस्टेट, वेंचर कैपिटल और दीर्घकालिक संपत्तियों में समर्पित रणनीति।
- Mizuho: भारतीय परिचालन की लाभप्रदता में सुधार और पुणे में ‘ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर’ का विस्तार।
- Morgan Stanley: भारत में 19,000 से अधिक कर्मचारियों के साथ उच्च मूल्य वाली वित्तीय सेवाओं का संचालन।
- Nomura & Nippon Life: एआई, साइबर सुरक्षा में सहयोग और भारत में ‘पेशेंट कैपिटल’ (दीर्घकालिक निवेश) से उच्च रिटर्न पर बल।
3. निवेशकों की मुख्य चिंताएं और सरकारी आश्वासन
- मुनाफे की वापसी (Profit Repatriation): जापानी निवेशकों ने लाभ वापस भेजने की प्रक्रिया के सरलीकरण, पूंजी बाजार तक आसान पहुंच और नियामक पूर्वानुमान (Regulatory Predictability) की मांग की।
- सरकारी रुख: सरकार ने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाने और प्रक्रियाओं को सुगम बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| बैठक का स्थल | टोक्यो, जापान |
| मुख्य निवेश लक्ष्य | अगले 10 वर्षों में 10 ट्रिलियन येन का जापानी निजी निवेश जुटाना |
| प्रतिभागी प्रमुख संस्थाएं | MUFG, DBJ, Mizuho, Morgan Stanley, Nomura, Nippon Life |
| अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्र | GIFT City (गुजरात) को मुख्य कैपिटल गेटवे के रूप में बढ़ावा |
| लक्षित तकनीकी मिशन | भारत सेमीकंडक्टर मिशन |
महाकवि कालिदास और उनका साहित्य: ‘कहो कालिदास!’ पुस्तक विमोचन
- प्रारंभिक परीक्षा: प्राचीन भारतीय साहित्य, कालिदास की रचनाएं (अभिज्ञानशाकुंतलम्, मेघदूतम् आदि), इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 1): भारतीय संस्कृति – प्राचीन काल से आधुनिक काल तक कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने नई दिल्ली स्थित IGNCA में युगुल जोशी द्वारा लिखित पुस्तक ‘कहो कालिदास!’ का विमोचन किया। इस पुस्तक का प्रकाशन मंजुल पब्लिशिंग हाउस द्वारा किया गया है। यह रचना कालिदास के व्यक्तिगत जीवन, प्रेम, विरह, प्रकृति और विशेष रूप से उनकी कृतियों में नारी पात्रों की गरिमा पर प्रकाश डालती है।
मुख्य बिंदु: कालिदास का साहित्यिक एवं सांस्कृतिक दृष्टिकोण
1. कालिदास की कृतियों में नारी चित्रण
- चेतना और गरिमा: कालिदास की रचनाओं में स्त्रियां केवल सौंदर्य का विषय नहीं हैं। वे चेतना, स्वाभिमान, गरिमा और निश्छल प्रेम का प्रतीक हैं।
- संवेदनशीलता: इतिहास जहां केवल घटनाओं की तारीखें बताता है, वहीं साहित्य मानव मन की संवेदनाओं को उजागर करता है।
2. राष्ट्रीय विरासत और सार्वभौमिकता
- सर्वव्यापी पहचान: कालिदास को उज्जैन, मिथिला और उत्तराखंड समेत पूरे भारत में अपना माना जाता है। वे किसी एक क्षेत्र के नहीं, बल्कि पूरे राष्ट्र के महाकवि हैं।

- गैटे का कथन: प्रसिद्ध जर्मन लेखक गैटे ने कहा था कि ‘यदि स्वर्ग और मर्त्यलोक को एक साथ देखना हो, तो वह केवल कालिदास के अभिज्ञानशाकुंतलम् में संभव है।’
कालिदास की प्रमुख रचनाएं
| वर्ग | रचनाएं |
| नाटक | अभिज्ञानशाकुंतलम्, मालविकाग्निमित्रम्, विक्रमोर्वशीयम् |
| महाकाव्य | रघुवंशम्, कुमारसंभवम् |
| खंडकाव्य / गीतिकाव्य | मेघदूतम्, ऋतुसंहारम् |
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| मापदंड / पहलू | महत्वपूर्ण तथ्य |
| नई पुस्तक का नाम | ‘कहो कालिदास!’ |
| लेखक एवं प्रकाशक | लेखक: युगुल जोशी | प्रकाशक: मंजुल पब्लिशिंग हाउस |
| आयोजन स्थल | इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA), नई दिल्ली |
| ऐतिहासिक काल | गुप्त काल (चंद्रगुप्त द्वितीय ‘विक्रमादित्य’ के नवरत्नों में से एक) |
| भाषा | संस्कृत |
भारत में सेवा क्षेत्र की मुद्रास्फीति: सेवा उत्पादक मूल्य सूचकांक (Service PPI)
- प्रारंभिक परीक्षा: सेवा उत्पादक मूल्य सूचकांक (Service PPI), WPI बनाम CPI, मुद्रास्फीति (Inflation), आधार वर्ष (Base Year)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था – मुद्रास्फीति का मापन, सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन, आर्थिक रुझान और मौद्रिक नीति में सूचकांकों का महत्व।
चर्चा में क्यों?
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1: अप्रैल-जून 2026) के लिए सेवा उत्पादक मूल्य सूचकांक (Service PPI) के अनंतिम अनुमान (Provisional Estimates) जारी किए हैं। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही (Q4) के अंतिम आंकड़े भी जारी किए गए हैं। सूचकांक का आधार वर्ष 2022-23 निर्धारित किया गया है।
मुख्य बिंदु: रुझान, डेटा और तकनीकी पहलू
1. सेवा PPI क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
- मूल अवधारणा: यह सूचकांक उत्पादकों द्वारा बेची जाने वाली सेवाओं की कीमतों में बदलाव को मापता है।
- WPI और CPI से अंतर: थोक मूल्य सूचकांक (WPI) केवल वस्तुओं की कीमतों को मापता है, उसमें सेवाएं शामिल नहीं होतीं। Service PPI सेवा क्षेत्र में मूल्य वृद्धि का सटीक अंदाजा देता है।
- आधार वर्ष 2022-23: उप-सेवा स्तर पर भार (Weights) तय करने के लिए वित्त वर्ष 2022-23 के आंकड़ों का प्रयोग किया गया है। हालांकि, पूरे सेवा क्षेत्र को कवर न करने के कारण अभी तक सेवा स्तर पर अलग से ओवरऑल वेटेज नहीं दिया गया है।
2. Q1 (FY 2026-27) के मुख्य आंकड़े और रुझान
- हवाई यात्रा में भारी उछाल: एयर पैसेंजर सर्विस प्राइस इंडेक्स में सबसे बड़ा उछाल दर्ज किया गया। इसका सूचकांक 126.4 पर पहुंचा, जबकि वार्षिक (YoY) आधार पर इसमें 31.94% की तेज वृद्धि देखी गई।
- पेंशन फंड प्रबंधन: पेंशन फंड प्रबंधन सेवाओं का सूचकांक Q4 के 103.8 से बढ़कर Q1 में 113.3 हो गया। इसमें सालाना आधार पर 5.20% की बढ़ोतरी हुई।
- बैंकिंग सेवाएं: बैंकिंग सेवा मूल्य सूचकांक 100.9 रहा, जिसमें सालाना आधार पर -3.35% का संकुचन देखा गया। हालांकि, ‘बैंकिंग सेवा योगदान सूचकांक’ बढ़कर 134.8 (6.90% YoY) हो गया।
- प्रतिभूति और अन्य सेवाएं: सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन सूचकांक गिरकर 89.9 पर आ गया (-1.32% YoY)। दूसरी तरफ बीमा (102.9) और दूरसंचार (112.2) की कीमतें स्थिर बनी रहीं।
- रेलवे सेवाएं: रेलवे सूचकांक 103.4 रहा। इसमें यात्री सेवाओं का सूचकांक 103.5 (3.50% YoY) पर स्थिर रहा।
सेवा उत्पादक मूल्य सूचकांक (Base Year 2022-23) – मुख्य आंकड़े
| सेवा क्षेत्र (Service Sector) | Q4: 2025-26 (अंतिम) | Q1: 2026-27 (अनंतिम) | YoY मुद्रास्फीति (%) |
| प्रतिभूति लेनदेन सेवाएं (Securities) | 91.7 | 89.9 | -1.32% |
| बैंकिंग सेवाएं (Banking Services) | 100.5 | 100.9 | -3.35% |
| बैंकिंग सेवा योगदान (Contribution Index) | 131.5 | 134.8 | +6.90% |
| पेंशन फंड प्रबंधन (Pension Management) | 103.8 | 113.3 | +5.20% |
| बीमा सेवाएं (Insurance) | 102.9 | 102.9 | +0.98% |
| दूरसंचार सेवाएं (Telecom) | 112.2 | 112.2 | +0.72% |
| रेलवे सेवाएं (कुल) (Railways Total) | 103.3 | 103.4 | +1.27% |
| └ रेलवे माल ढुलाई (Freight) | 103.2 | 103.3 | +0.10% |
| └ रेलवे यात्री (Passenger) | 103.5 | 103.5 | +3.50% |
| हवाई यात्री सेवाएं (Air Passenger) | 106.9 | 126.4 | +31.94% |