27 August 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत चीनी क्षेत्र के आर्थिक गतिशीलता को दर्शाने वाले भारतीय चीनी उद्योग: मूल्य श्रृंखला, एथेनॉल संलयन और हालिया मूल्य वृद्धि, वैश्विक मंच पर जल संरक्षण की सफलता प्रस्तुत करने वाले वर्ल्ड वॉटर वीक 2026 (ग्रामीण जल सुरक्षा में भारत का प्रदर्शन), एमएसएमई और ग्रामीण वित्तीय बुनियादी ढांचे को मजबूती देने वाली SIDBI-RRB सह-ऋण देने की व्यवस्था (Co-Lending Mechanism), अंतर्राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन व तटीय सुरक्षा से जुड़े नेपाल फ्लैश फ्लड संकट: सीमावर्ती भारतीय राज्यों पर प्रभाव और राहत उपाय, एयरोस्पेस क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को गति देने वाले CSIR-NAL स्वदेशी माइक्रो और स्मॉल गैस टर्बाइन इंजन, तथा भारतीय एनीमेशन, गेमिंग व फिल्म उद्योग को वैश्विक मंच प्रदान करने वाली IICT-नेटफ्लिक्स स्कॉलरशिप पहल और भारत की ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
भारतीय चीनी उद्योग: मूल्य श्रृंखला, एथेनॉल संलयन और हालिया मूल्य वृद्धि
- प्रारंभिक परीक्षा: एफआरपी (FRP), एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP), कृषि उत्पादन आंकड़े, यूनीक बीमारियां (Red Rot, Top Borer)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): कृषि अर्थव्यवस्था – फसल विविधीकरण, कृषि आधारित उद्योग, एथेनॉल मिश्रण, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, खाद्य एवं पोषण सुरक्षा।
चर्चा में क्यों?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में जुलाई से अगस्त 2026 के बीच चीनी की खुदरा कीमतों में 15.6% की अल्पकालिक बढ़ोतरी (₹48.18 से ₹55.70 प्रति किग्रा) दर्ज की गई है। सरकार ने जमाखोरी पर रोक लगाने, स्टॉक सीमा लागू करने और 10 लाख मीट्रिक टन कच्चे चीनी (Raw Sugar) के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति देकर बाजार को नियंत्रित करने की दिशा में कदम उठाए हैं।
चीनी क्षेत्र का परिदृश्य और उत्पादन आंकड़े
1. उत्पादन एवं क्षेत्रफल (2025-26)
- वैश्विक स्थिति: भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक देश है।
- उत्पादन: 2025-26 (तृतीय अग्रिम अनुमान) में गन्ना उत्पादन 500 MMT तक पहुंच गया, जो 2015-16 (348.44 MMT) की तुलना में 43.5% अधिक है।
- क्षेत्रफल: गन्ने का रकबा 49.27 लाख हेक्टेयर (2015-16) से बढ़कर 58.87 लाख हेक्टेयर (2025-26) हो गया।
- शीर्ष उत्पादक राज्य: उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र।
- निर्यात: वर्ष 2025-26 में 8 लाख मीट्रिक टन चीनी का निर्यात हुआ। मुख्य गंतव्य – श्री लंका, पश्चिम एशिया और पूर्वी अफ्रीका।
2. उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP)
- चीनी सत्र 2026-27 (अक्टूबर-सितंबर) के लिए FRP ₹365/कुंतल (रिकवरी दर 10.25%) निर्धारित किया गया है।

- यह 2016-17 के FRP (₹230/कुंतल) से ₹135 अधिक है।
चीनी उद्योग और एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम (EBP)
- डाइवर्टेड चीनी का घटता शेयर: एथेनॉल के लिए चीनी का विचलन (Diversion) 2022-23 के 12% से घटकर 2025-26 में ~9% रह गया।
- अनाज पर शिफ्ट: भारत के कुल एथेनॉल उत्पादन का लगभग 3/4 हिस्सा अब मक्के जैसे अनाजों से आ रहा है, जिससे चीनी की घरेलू आपूर्ति प्रभावित नहीं होती।
- वित्तीय स्वास्थ्य में सुधार: भारत में वार्षिक चीनी उत्पादन 300-340 लाख मीट्रिक टन होता है, जबकि घरेलू खपत 280-290 लाख मीट्रिक टन है। अधिशेष चीनी को एथेनॉल में बदलने से मिलों का नकदी संकट दूर हुआ है।

- किसानों का बकाया भुगतान: 20 अगस्त 2026 तक सत्र 2025-26 के लिए गन्ने के 97% बकाए का भुगतान किया जा चुका है।
हालिया मूल्य वृद्धि के कारण और भ्रम बनाम तथ्य
मूल्य वृद्धि के 5 मुख्य कारण
- उत्पादन में गिरावट: कीट संक्रमण (Red Rot और Top Borer बीमारी) और अत्यधिक बारिश से जलभराव के कारण उत्पादन अनुमान 343 LMT से घटकर 306 LMT रह गया।
- आगामी त्यौहारी मांग: त्यौहारों के मौसम के कारण बाजार में मांग का बढ़ना।
- वैश्विक कमी: 2026-27 में वैश्विक चीनी घाटा ~33 लाख मीट्रिक टन अनुमानित है। अंतरराष्ट्रीय कीमतें 474 से बढ़कर 552/टन (+16%) हो गईं।
- सट्टेबाजी और जमाखोरी: मिलों और व्यापारियों द्वारा कृत्रिम कमी पैदा करना।
- अल्पकालिक प्रकृति: अगस्त 2024 से जुलाई 2026 के बीच कीमतें केवल 3% वार्षिक दर से बढ़ी थीं, इसलिए यह वृद्धि अल्पकालिक आपूर्ति संकट है।
भ्रम बनाम तथ्य
| भ्रम | तथ्य |
| एथेनॉल डाइवर्जन से कीमतें बढ़ीं। | एथेनॉल के लिए चीनी का डाइवर्जन 12% से घटकर 9% हो गया है। |
| एथेनॉल उपभोक्ताओं का हक मार रहा है। | 3/4 एथेनॉल का उत्पादन अब मक्के/अनाज से हो रहा है। |
| देश में चीनी की भारी कमी है। | नए पेराई सत्र तक घरेलू मांग पूरा करने के लिए पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध है। |
| कीमतें लगातार अनियंत्रित रूप से बढ़ रही हैं। | दीर्घकालिक मूल्य वृद्धि अगस्त 2024 से जुलाई 2026 के बीच केवल ~3% वार्षिक रही। |
वर्ल्ड वॉटर वीक 2026: ग्रामीण जल सुरक्षा में भारत का वैश्विक प्रदर्शन
- प्रारंभिक परीक्षा: स्टॉकहोम इंटरनेशनल वॉटर इंस्टीट्यूट (SIWI), वर्ल्ड वॉटर वीक 2026, जल जीवन मिशन (JJM), NIWS, ‘युक्तधारा’ पोर्टल, E-Jal ऐप।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): ग्रामीण विकास, जल सुरक्षा, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), आपदा जोखिम न्यूनीकरण, सतत विकास लक्ष्य (SDG 6 – स्वच्छ जल एवं स्वच्छता)।
चर्चा में क्यों?
स्टॉकहोम (स्वीडन) में आयोजित वर्ल्ड वॉटर वीक 2026 में भारत के ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भाग लिया। भारतीय प्रतिनिधिमंडल (संयुक्त सचिव रोहिणी आर. भाजीभाकरे) ने ‘नेशनल इनिशिएटिव ऑन वॉटर सिक्योरिटी’ (NIWS) और ‘वाटर विजन @2047’ के तहत भारत की सामुदायिक जल सुरक्षा, तकनीक-संचालित योजना और सतत ग्रामीण विकास की उपलब्धियों को वैश्विक मंच पर रखा।
मुख्य बिंदु: वैश्विक मंच पर भारत का जल सुरक्षा मॉडल
1. अंतर्राष्ट्रीय सत्र और भारतीय नेतृत्व
- सत्र 1: “National Initiative on Water Security: Translating National Water Visions to Reality: What Works?” (GIZ और IWMI द्वारा आयोजित)।
- सत्र 2 (उच्च स्तरीय पैनल): “Financing Water Resilience and Prosperity” (UN 2026 वाटर कॉन्फ्रेंस की तैयारी के संदर्भ में)।
- मुख्य विजन: ‘विकसित भारत @2047’ से संरेखित ‘वाटर विजन @2047’ के तहत जल को ग्रामीण समृद्धि, जनस्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और जलवायु अनुकूलता का मुख्य आधार बनाया गया है।
2. प्रमुख राष्ट्रीय पहलें और जल सुरक्षा ढांचा
- जल जीवन मिशन (JJM): ग्रामीण क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल की आपूर्ति सुनिश्चित करना।
- नेशनल इनिशिएटिव ऑन वॉटर सिक्योरिटी (NIWS): ब्लॉक-स्तरीय भूजल स्थिति के आधार पर वैज्ञानिक व डेटा-आधारित जल संरक्षण, भूजल रीचार्ज और जल संचयन परिसंपत्तियों का निर्माण करना।
- VB-G RAM G Act, 2025: विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) के तहत रोजगार सृजन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और स्थायी संपत्तियों के निर्माण का अभिसरण (Convergence)।
3. डिजिटल तकनीक और डेटा-संचालित नियोजन
- युक्तधारा: GIS और रिमोट सेंसिंग पर आधारित भू-स्थानिक (Geospatial) नियोजन प्लेटफॉर्म, जो सबूत-आधारित विकास कार्यों की योजना बनाता है।
- E-Jal एप्लीकेशन: ग्राम पंचायत स्तर पर जल संसाधनों, वर्षा, भूजल और जनसंख्या डेटा को जोड़कर सटीक वॉटर बजटिंग की सुविधा देता है।

- E-Saksham प्लेटफॉर्म: क्षमता निर्माण और ज्ञान प्रसार हेतु ई-लर्निंग टूल।
- डिजिटल डैशबोर्ड (VBGRAMG Soft, SECURE, BhuGRAM): रियल-टाइम कार्यान्वयन, वित्तीय प्रबंधन, निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करते हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजन का नाम | वर्ल्ड वॉटर वीक 2026 |
| आयोजक संस्था | स्टॉकहोम इंटरनेशनल वॉटर इंस्टीट्यूट (SIWI) |
| आयोजन स्थल | स्टॉकहोम, स्वीडन |
| भारतीय प्रतिनिधि | सुश्री रोहिणी आर. भाजीभाकरे (संयुक्त सचिव, ग्रामीण विकास मंत्रालय) |
| मुख्य डिजिटल उपकरण | युक्तधारा (GIS), E-Jal App, E-Saksham, BhuGRAM, SECURE |
| वैश्विक लक्ष्य संबंध | SDG 6 (स्वच्छ जल और स्वच्छता) तथा UN 2026 वाटर कॉन्फ्रेंस |
SIDBI-RRB सह-ऋण देने की व्यवस्था (Co-Lending Mechanism)
- प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI), क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRB), सह-ऋण मॉडल (Co-Lending Model), NABARD।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था – समावेशी विकास, वित्तीय समावेशन, MSME क्षेत्र को ऋण सहायता, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर।
चर्चा में क्यों?
नई दिल्ली में भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) के अध्यक्षों के सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य SIDBI और RRBs के बीच MSME Co-Lending (सह-ऋण) व्यवस्था का विस्तार करना है। इसमें वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS) के सचिव श्री संजय लोहिया, SIDBI के चेयरमैन मनोज मित्तल और देश के सभी 28 RRBs के अध्यक्ष शामिल हुए।
मुख्य बिंदु: रणनीतिक जुड़ाव और डिजिटल प्लेटफॉर्म
1. SIDBI और RRBs का तालमेल
- रणनीतिक जुड़ाव: सिडबी के पास MSME क्षेत्र की ऋण जरूरतों का विशेषज्ञ ज्ञान है। दूसरी तरफ RRBs के पास ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में मजबूत नेटवर्क है।
- पोर्टफोलियो विविधीकरण: इस व्यवस्था से RRBs को अपने ऋण पोर्टफोलियो में विविधता लाने और केवल कृषि ऋण पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
- नियम-आधारित अंडरराइटिंग: ऑटोमेटेड रूल इंजन (Rule engine-based underwriting) से ऋण जोखिम कम होगा और बैंकों की संपत्ति गुणवत्ता (Asset Quality) बनी रहेगी।
2. डिजिटल को-लेंडिंग ओरिजिनेशन प्लेटफॉर्म
- सिडबी द्वारा विकसित: सिडबी ने एक एंड-टू-एंड पूरी तरह से डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया है।
- कागज रहित प्रक्रिया: यह पूरी तरह से डिजिटल और पेपरलेस क्रेडिट यात्रा प्रदान करता है। इससे ऋण की स्वीकृति और संवितरण (Disbursement) बहुत तेज होता है।
- त्वरित सैद्धांतिक स्वीकृति: आवेदन पोर्टल पर विवरण दर्ज करते ही बहुत कम समय में इन-प्रिंसिपल अप्रूवल मिल जाता है।
- सीधा बैंक खाता हस्तांतरण: ग्राहकों को शाखाओं के चक्कर नहीं काटने पड़ते। लोन की राशि सीधे उनके खाते में ट्रांसफर हो जाती है।
- पायलट प्रोजेक्ट: 3 RRBs में पायलट परीक्षण सफल रहा है। अब इसे सभी RRBs में लागू किया जा रहा है।
3. एमएसएमई क्लस्टर और रोजगार प्रोत्साहन
- क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण: MSME क्लस्टर डेटा का उपयोग करके अधिक से अधिक सूक्ष्म एवं लघु इकाइयों तक पहुंचने की योजना है।
- मैन्युफैक्चरिंग हब: RRBs देश को ‘नेक्स्ट-जेनरेशन मैन्युफैक्चरिंग हब’ बनाने में योगदान देंगे।
- वित्तीय जागरूकता: राज्य सरकारों के रोजगार मेलों में भाग लेकर उद्यमियों के बीच वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा दिया जाएगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजन संस्था | SIDBI (भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक) |
| नोडल विभाग | वित्तीय सेवाएं विभाग (DFS), वित्त मंत्रालय |
| भारत में कुल RRBs की संख्या | 28 (सभी 28 अध्यक्ष सम्मेलन में उपस्थित) |
| तकनीकी प्लेटफॉर्म | Co-Lending Origination Platform (SIDBI द्वारा निर्मित) |
| मुख्य लक्षित क्षेत्र | ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों के सूक्ष्म और लघु उद्योग (MSMEs) |
| पायलट परीक्षण | 3 RRBs में सफलतापूर्वक संपन्न |
नेपाल फ्लैश फ्लड संकट: सीमावर्ती भारतीय राज्यों पर प्रभाव और राहत उपाय
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, गंडक नदी, त्रिशूली नदी, GLOF (ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): आपदा प्रबंधन – बाढ़ नियंत्रण, GLOF जोखिम, भारत-नेपाल संबंध और ट्रांस-बाउंड्री नदी प्रबंधन।
चर्चा में क्यों?
नेपाल-चीन सीमा के पास फ्लैश फ्लड / GLOF (Glacial Lake Outburst Flood) गतिविधि के कारण नेपाल की त्रिशूली नदी के जलस्तर में अचानक भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इस घटना के बाद भारत सरकार के गृह मंत्रालय (MHA) ने बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और स्थानीय प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा है।
मुख्य बिंदु: सीमापार आपदा और भारत की प्रतिक्रिया
1. घटना की उत्पत्ति और संभावित प्रभाव
- स्थान: भारतीय सीमा से लगभग 160 किमी दूर नेपाल के फुरके खोला में त्रिशूली नदी का जलस्तर अचानक बढ़ा।
- कारण: नेपाल-चीन सीमा के समीप ग्लेशियर झील के फटने (GLOF) या अचानक बाढ़ (Flash Flood) की आशंका।
- प्रभावित नदियां: त्रिशूली नदी का बहाव downstream की ओर भारत की गंडक नदी को प्रभावित करने की संभावना है।
2. केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा उठाए गए कदम
- अंतर-मंत्रालयी निगरानी: गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय (MEA), जल शक्ति मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।
- सीडब्ल्यूसी (CWC) का आंकलन: केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, नेपाल की ओर जलाशयों में जलस्तर अब घट रहा है। स्थिति नियंत्रण में है और घबराहट जैसी स्थिति नहीं है।
- तटीय सुरक्षा उपाय: बिहार और उत्तर प्रदेश सरकारों ने सीमावर्ती भारतीय समुदायों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित (Evacuation) करने के निर्देश जारी किए हैं।
3. फंसे हुए नागरिकों के लिए सहायता
- नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों और पर्यटकों की सहायता के लिए काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर (+977 9851316807 और +977 9709107500) जारी किए हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आपदा का प्रकार | GLOF (ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड) / फ्लैश फ्लड |
| प्रभावित नदियां | त्रिशूली नदी (नेपाल) एवं गंडक नदी (भारत) |
| मुख्य सीमावर्ती भारतीय राज्य | बिहार और उत्तर प्रदेश |
| केंद्रीय नोडल निकाय (जल निगरानी) | केंद्रीय जल आयोग (Central Water Commission – CWC) |
CSIR-NAL स्वदेशी माइक्रो और स्मॉल गैस टर्बाइन इंजन
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की वैज्ञानिक एवं रक्षा प्रौद्योगिकी घटनाएं, स्वदेशी प्रोपल्शन सिस्टम (Gas Turbine Engines), CSIR-NAL।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी – स्वदेशी तकनीक का विकास, ‘आत्मनिर्भर भारत’, रक्षा क्षेत्र में UAV, ड्रोन और मिसाइल पारिस्थितिकी तंत्र।
चर्चा में क्यों?
नई दिल्ली स्थित CSIR मुख्यालय में CSIR-राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशालाओं (CSIR-NAL) ने तीन स्वदेशी माइक्रो और स्मॉल गैस टर्बाइन इंजनों (NJ-05, NJ-50, NJ-100) का अनावरण किया। यह विकास भारत को उन्नत रक्षा और एयरोस्पेस प्रोपल्शन तकनीकों में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
मुख्य बिंदु: तकनीकी क्षमताएं और रक्षा अनुप्रयोग
1. इंजनों के वेरिएंट और थ्रस्ट क्षमता
- NJ-05: 5 किग्रा थ्रस्ट क्षमता (माइक्रो प्लेटफॉर्म और छोटे ड्रोनों के लिए)।
- NJ-50: 50 किग्रा थ्रस्ट क्षमता (मध्यम श्रेणी के मानवरहित हवाई वाहनों हेतु)।
- NJ-100: 100 किग्रा थ्रस्ट क्षमता (सामरिक UAVs और क्रूज/कॉम्पैक्ट मिसाइल प्रणालियों हेतु)।
2. मुख्य सामरिक अनुप्रयोग
- सामरिक UAVs (Tactical UAVs): सैन्य निगरानी और टोह लेने वाले ड्रोनों को उच्च गति प्रदान करना।
- ड्रोन इंटरसेप्टर: दुश्मन के ड्रोनों को हवा में ही नष्ट करने वाले प्रणालियों का संचालन।
- कॉम्पेक्ट मिसाइल सिस्टम: छोटे आकार की क्रूज मिसाइलों और सटीक हथियारों के लिए प्रोपल्शन।
3. स्वदेशी वैज्ञानिक प्रगति
- हाई-RPM टरबोमशीनरी: उच्च घूर्णन गति पर काम करने वाली उन्नत टरबाइन डिजाइन।

- उच्च-तापमान दहन (High-Temperature Combustion): अत्यधिक तापमान को सहन करने वाली कंबशन चैंबर तकनीक।
- स्टार्टअप्स के साथ साझेदारी: CSIR-NAL भारतीय एयरोस्पेस स्टार्टअप्स और निजी उद्योगों को शामिल करके इन इंजनों का बड़े पैमाने पर स्वदेशी निर्माण (Mass Manufacturing) सुनिश्चित करेगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| विकासकर्ता संस्थान | CSIR-राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशालाएं (CSIR-NAL), बेंगलुरु |
| निर्मित इंजन श्रृंखला | NJ-05 (5 kg), NJ-50 (50 kg), NJ-100 (100 kg) |
| तकनीकी आधार | High-RPM Turbomachinery & High-Temperature Combustion |
| नोडल मंत्रालय | विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय (CSIR/DSIR) |
| मुख्य लक्ष्य | विदेशी जेट इंजनों पर निर्भरता घटाना व सैन्य आत्मनिर्भरता पाना |
IICT-नेटफ्लिक्स स्कॉलरशिप पहल और भारत की ‘ऑरेंज इकोनॉमी’
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, अवसंरचना विकास, AVGC-XR क्षेत्र एवं संबंधित पहलें।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था – औद्योगिक नीति, रोजगार सृजन, सेवा क्षेत्र, अवसंरचना (डिजिटल/सॉफ्टवेयर) और सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP Model)।
चर्चा में क्यों?
भारतीय रचनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (IICT), मुंबई और वैश्विक ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स (Netflix) ने 100 विद्यार्थियों और पेशेवरों के लिए संयुक्त छात्रवृत्ति कार्यक्रम की घोषणा की है। यह पहल भारत के AVGC-XR (एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी) पारिस्थितिकी तंत्र में योग्य प्रतिभाओं को निखारने और भारत को वैश्विक कंटेंट क्रिएशन हब बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई है।
मुख्य बिंदु: छात्रवृत्ति ढांचा और ‘ऑरेंज इकोनॉमी’
1. छात्रवृत्ति का स्वरूप एवं पाठ्यक्रम
- वित्तीय सहायता: 6 अलग-अलग व्यावसायिक पाठ्यक्रमों के लिए चुने गए छात्रों को 80% तक की वित्तीय मदद दी जाएगी।
- पात्रता: यह छात्रवृत्ति भारत भर के नए विद्यार्थियों और सेवारत पेशेवरों दोनों के लिए खुली है।
- पाठ्यक्रम का विवरण:
- 2 डिप्लोमा कार्यक्रम (1 वर्ष):
- इंटरएक्टिव कॉमिक्स एंड सीक्वेंशियल आर्ट्स
- विजुअल इफेक्ट्स मास्टरी
- 4 सर्टिफिकेट कार्यक्रम (6 माह):
- वर्चुअल आर्ट डिपार्टमेंट कंटेंट क्रिएशन
- मीडिया टेक वर्कफ्लो
- आर्ट ऑफ कैरेक्टर एनिमेशन
- ई-स्पोर्ट्स एंड गेमिंग मैनेजमेंट
- 2 डिप्लोमा कार्यक्रम (1 वर्ष):
- उद्योग संरेखण: ‘विजुअल इफेक्ट्स मास्टरी’ और ‘मीडिया टेक वर्कफ्लो’ का पाठ्यक्रम नेटफ्लिक्स के वैश्विक इनपुट के साथ उद्योग की आधुनिक कार्यप्रणाली के अनुसार तैयार किया गया है।
2. पृष्ठभूमि: ‘नेटफ्लिक्स इंडिया स्टोरीटेलिंग इनिशिएटिव’
- 5 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और नेटफ्लिक्स के सह-सीईओ टेड सारान्डोस (Ted Sarandos) के बीच हुई बैठक के बाद इस पहल की नींव रखी गई।
- उद्देश्य: भारत की समृद्ध कथा-वाचन (Storytelling) परंपरा को तकनीक से जोड़कर देश को ग्लोबल कंटेंट हब बनाना।
- ऑरेंज इकोनॉमी: AVGC सेक्टर भारत की ‘ऑरेंज इकोनॉमी’ (कला, संस्कृति और रचनात्मकता पर आधारित अर्थव्यवस्था) का एक प्रमुख चालक (Key Driver) है।
3. IICT का संस्थागत स्वरूप
- प्रकृति: यह AVGC-XR क्षेत्र के लिए भारत का राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र (National Centre of Excellence – NCoE) है।
- मॉडल: यह सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB) द्वारा महाराष्ट्र सरकार, FICCI और CII के साथ मिलकर PPP (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मॉडल पर स्थापित है।
- कैंपस: वर्तमान में यह NFDC कॉम्प्लेक्स, पेडर रोड (मुंबई) से संचालित हो रहा है, जबकि इसका 10 एकड़ का स्थायी परिसर फिल्म सिटी, गोरेगांव में विकसित किया जा रहा है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| संस्थान (IICT) | Indian Institute of Creative Technologies (मुंबई) |
| नोडल मंत्रालय | सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (Ministry of I&B) |
| भागीदार संगठन | महाराष्ट्र सरकार, FICCI, CII और नेटफ्लिक्स |
| AVGC-XR का अर्थ | Animation, Visual Effects, Gaming, Comics and Extended Reality |
| ऑरेंज इकोनॉमी | कला, संस्कृति, मीडिया और रचनात्मकता पर आधारित अर्थव्यवस्था |
| छात्रवृत्ति कवरेज | 100 मेधावी छात्रों/पेशेवरों को 80% तक वित्तीय सहायता |