NCERT Notes Class 7 Social science (Geography) Chapter 12: Understanding Markets के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के बाजारों—जैसे साप्ताहिक बाजार (Weekly Markets), मोहल्ले की दुकानें, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स/मॉल और ऑनलाइन बाजार—की कार्यप्रणाली और उनकी विशिष्टताओं को स्पष्ट करता है। और यह खेतों या कारखानों में बनने वाले सामान के उपभोक्ता तक पहुँचने के सफर यानी ‘बाजार की श्रृंखला’ (Chain of Markets) को समझाता है।तथा थोक व्यापारियों (Wholesalers), खुदरा व्यापारियों (Retailers) और मध्यस्थों (Intermediaries) की भूमिका के साथ-साथ यह भी उजागर किया गया है कि किस प्रकार इस पूरी व्यवस्था में बड़े व्यापारियों और किसानों/कारीगरों के बीच अवसरों और मुनाफे की भारी असमानता (Inequality in Markets) पाई जाती है।
बाजार क्या है? (What is a Market?)
बाजार वह स्थान है जहाँ वस्तुओं और सेवाओं का क्रय-विक्रय (खरीद और बिक्री) होता है।
- क्षेत्रीय नाम: इसे भाषा और क्षेत्र के अनुसार बाजार, बाजार, हाट (हिंदी) और मारुकट्टे (कन्नड़) कहा जाता है।
- बाजार के प्रकार:
- भौतिक बाजार (Physical Market): जहाँ ग्राहक और विक्रेता प्रत्यक्ष रूप से आमने-सामने मिलते हैं।
- ऑनलाइन बाजार: इंटरनेट के माध्यम से डिजिटल रूप से चलने वाले आधुनिक बाजार।
- प्रमुख भूमिका:
- व्यक्तियों, परिवारों और व्यवसायों तक वस्तुओं व सेवाओं की पहुँच सुनिश्चित करना।
- आवश्यकताओं और इच्छाओं (Needs & Wants) की पूर्ति करना।
- केवल आर्थिक लेन-देन ही नहीं, बल्कि लोगों, परंपराओं और विचारों को जोड़ना।
शब्दावली
- व्यापार (Trade): व्यक्तियों, क्षेत्रों या देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं की खरीद-बिक्री या विनिमय (Exchange)।
- मूल्य (Price): वह राशि जिस पर खरीदार खरीदने और विक्रेता बेचने के लिए सहमत होते हैं। यह लेन-देन को पूरा करने का मुख्य आधार है।
- मोलभाव (Negotiation/Bargaining): सर्वस्वीकार्य मूल्य तक पहुँचने के लिए क्रेता और विक्रेता के बीच होने वाली चर्चा।
विजयनगर साम्राज्य का प्रसिद्ध हम्पी बाजार
हम्पी बाजार विजयनगर साम्राज्य का एक अत्यंत समृद्ध और फलता-फूलता व्यापारिक केंद्र था।
- भौगोलिक स्थिति: यह बाजार विरूपक्ष मंदिर के ठीक सामने स्थित था।
- प्रमुख वस्तुएँ: खाद्यान्न, बीज, दूध, तेल, रेशम, सूती कपड़े, घास-पूस, जीव-जंतु (गाय, खरगोश, घोड़े), पक्षी (बटेर, तीतर), और सोने के गहने, माणिक (Rubies), हीरे, मोती तथा मूल्यवान रत्न।
विदेशी यात्रियों के विवरण
विजयनगर साम्राज्य के बाजारों की समृद्धि का वर्णन पुर्तगाली यात्रियों ने अपने यात्रा वृत्तांतों में किया है:
- डोमिंगोस पायस:
- हम्पी को “विश्व का सबसे समृद्ध और सर्वोत्तम संसाधनों वाला शहर” (The best-provided city in the world) कहा।
- बाजार में मिलने वाली विविधता — अनाज, पशु-पक्षी, तेल, रेशम आदि का विस्तृत वर्णन किया।
- फर्नाओ नुनिज़:
- गलियों में काम करने वाले कारीगरों, सोने-जवाहरात, हीरे, मोती और सूती वस्त्रों की प्रचुरता का उल्लेख किया।
- एक शुष्क/बंजर क्षेत्र होने के बावजूद हम्पी में हर वस्तु की इस अत्यधिक प्रचुरता को एक “रहस्य” (Mystery) बताया।
बाजार के अनिवार्य तत्व
| तत्व | विवरण |
| क्रेता और विक्रेता (Buyer & Seller) | लेन-देन प्रक्रिया के दो मुख्य पक्ष। |
| वस्तुएँ/सेवाएँ (Goods & Services) | विनिमय की जाने वाली सामग्रियाँ। |
| मूल्य (Price) | वह राशि जिस पर दोनों पक्ष सहमत होते हैं। |
| मोलभाव (Bargaining) | अंतिम मूल्य तय करने की वार्ता प्रक्रिया। |
कीमतें और बाजार (Prices and Markets)
बाजार में कीमत का निर्धारण केवल विक्रेता नहीं करता। यह खरीदार और विक्रेता के बीच की बातचीत और आपसी सहमति से तय होता है।
- मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया (Price Determination):
- विक्रेता की इच्छा: शुरुआत में विक्रेता लाभ कमाने के लिए उच्च कीमत (उदा. ₹80/किग्रा) तय कर सकता है।
- खरीदार की प्रतिक्रिया: यदि कीमत बहुत अधिक लगती है, तो खरीदार कम कीमत की पेशकश करता है।
- मोलभाव (Negotiation): दोनों पक्ष तब तक मोलभाव करते हैं जब तक कि एक परस्पर सहमत मूल्य न मिल जाए।
- सौदा (Transaction): यदि सहमत मूल्य बन जाता है, तो लेन-देन पूरा होता है। सहमति न बनने पर सौदा नहीं होता।
मूल्य निर्धारण के तीन परिदृश्य
- परिदृश्य 1: जब कीमत बहुत अधिक हो (उदा. ₹80/किग्रा)
- परिणाम: खरीदार खरीदने से हिचकिचाएंगे या मना कर देंगे।
- बाजार स्थिति: बिक्री कम होगी, माल बिना बिका रह जाएगा।
- परिदृश्य 2: जब कीमत बहुत कम हो (उदा. ₹20/किग्रा)
- परिणाम: खरीदार तो खुश होंगे, लेकिन विक्रेता को नुकसान होगा या लाभ नहीं मिलेगा।
- बाजार स्थिति: विक्रेता इतनी कम कीमत पर बेचने को तैयार नहीं होगा।
- परिदृश्य 3: संतुलित/सही कीमत (उदा. ₹40/किग्रा)
- परिणाम: यह कीमत खरीदार के लिए बहुत महंगी नहीं है और विक्रेता के लिए नुकसानदेह नहीं है।
- बाजार स्थिति: लेन-देन आसानी से पूरा हो जाता है।
माँग और पूर्ति का नियम
- बाजार संतुलन (Market Equilibrium):
- समय के साथ, विक्रेता बाजार में खरीदारों की आवश्यकता (माँग) का अनुमान लगाता है।
- खरीदारों द्वारा मांगी गई मात्रा (Demand) और विक्रेताओं द्वारा लाई गई मात्रा (Supply) मिलकर सही कीमत तय करती हैं।
- सही कीमत वह है जो विक्रेता के लिए पर्याप्त रूप से अधिक हो और खरीदार के लिए पर्याप्त रूप से कम हो।
हमारे आस-पास के बाजार
भौतिक और ऑनलाइन बाजार
- भौतिक बाजार (Physical Market):
- क्रेता और विक्रेता का प्रत्यक्ष रूप से सामने मिलना आवश्यक।
- उदाहरण: साप्ताहिक बाजार, हाट, स्थानीय दुकानें, स्ट्रीट वेंडर्स, मल्टी-स्टोरी शॉपिंग मॉल्स।
- ऑनलाइन बाजार:
- क्रेता-विक्रेता का प्रत्यक्ष मिलना अनिवार्य नहीं।
- हजारों किलोमीटर दूर से मोबाइल ऐप्स या वेबसाइट्स द्वारा लेन-देन।
- सुविधा: वस्तुएँ (किताबें, कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स, उत्पादन हेतु कच्चा माल) व सेवाएँ (ऑनलाइन कक्षाएं) घर तक पहुँचाई जाती हैं।
- अन्य बाजार प्रकार:
- शेयर या स्टॉक मार्केट: यहाँ सामान्य वस्तुओं/सेवाओं के बजाय कंपनियों के शेयरों का व्यापार होता है।
शब्दावली
- उत्पादन के साधन (Inputs for production): वे सामग्री/संसाधन जिनका उपयोग वस्तु या सेवा के उत्पादन में होता है।
- निर्माता (Manufacturer): बिक्री हेतु वस्तुएँ बनाने वाला व्यक्ति या कंपनी।
- निर्यात (Export): अपने देश में बनी वस्तुओं या सेवाओं को दूसरे देश के खरीदार को बेचना।
- आयात (Import): अन्य देशों में निर्मित वस्तुओं या सेवाओं को खरीदकर अपने देश में लाना।
घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजार
- घरेलू बाजार (Domestic Market):
- देश की भौगोलिक सीमाओं के भीतर होने वाला व्यापार।
- उदाहरण: भारत में छपने वाली पुस्तक के लिए भारतीय पेपर मिलों से कागज खरीदना।

- अंतर्राष्ट्रीय बाजार (International Market):
- देश की राष्ट्रीय सीमाओं के बाहर होने वाला व्यापार।
- इसमें दो या अधिक देशों के बीच आयात (Import) और निर्यात (Export) शामिल है।
भारत का वैश्विक व्यापार
| क्षेत्र/महाद्वीप | भारत के प्रमुख निर्यात (India’s Exports) | भारत के प्रमुख आयात (India’s Imports) |
| उत्तरी अमेरिका | आउटसोर्स्ड सेवाएँ (उदा. सॉफ्टवेयर) | हवाई जहाज और उनके उपकरण |
| दक्षिण अमेरिका | रासायनिक उत्पाद (Chemical products) | खनिज अयस्क (उदा. ताँबा/Copper) |
| अफ्रीका | दवाइयाँ (Pharmaceuticals) | हीरे (Diamonds) |
| यूरोप | इंजीनियरिंग उत्पाद (खाद्य प्रसंस्करण मशीनरी, बॉयलर्स) | इलेक्ट्रिकल उपकरण |
| पश्चिम एशिया | परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पाद (Refined Petroleum) | कच्चा तेल (Crude Petroleum), उर्वरक (Fertilizers) |
| दक्षिण-पूर्व एशिया | — | वनस्पति तेल (Vegetable Oils) |
थोक और खुदरा बाजार (Wholesale and Retail Markets)
बाजारों में भौतिक वस्तुओं का प्रवाह
भौतिक बाजारों में वस्तुओं का प्रवाह एक निश्चित श्रृंखला में होता है:
कच्चा माल / इनपुट – उत्पादक / निर्माता – गोदाम / डिस्ट्रीब्यूटर्स – मंडियाँ / थोक बाजार – थोक विक्रेता (Wholesalers) – खुदरा विक्रेता (Retailers) – अंतिम उपभोक्ता (Consumers)
थोक बाजार (Wholesale Markets)
- विशेषताएँ:
- थोक विक्रेता उत्पादकों या खेतों से बड़ी मात्रा (Large Quantities) में माल खरीदते हैं।
- माल को बड़े गोदामों (Godowns/Warehouses) में भंडारित किया जाता है।
- कोल्ड स्टोरेज: जल्द खराब होने वाली वस्तुओं (Perishables – फल, सब्जी) को संरक्षित करने के लिए कम तापमान वाले विशेष गोदाम।
- प्रमुख भारतीय थोक बाजार (उदाहरण):
- खारी बावली (पुरानी दिल्ली): मसालों और सूखे मेवों का बाजार।
- फ्लावर मार्केट (बेंगलुरु): फूलों का थोक बाजार।
- जोहरी बाजार (जयपुर): रत्न और आभूषण (Gems & Jewellery)।
खुदरा विक्रेता, वितरक और एग्रीगेटर (Retailers, Distributors & Aggregators)
- खुदरा विक्रेता (Retailers):
- थोक विक्रेताओं से माल खरीदकर अंतिम उपभोक्ता को छोटी मात्रा (Smaller Quantities) में बेचते हैं।
- उत्पाद पुनः बिक्री के लिए नहीं, बल्कि उपभोग (Consumption) के लिए होते हैं।
- उदाहरण: पास की किराना दुकान, सलून, सिनेमा हॉल, रेस्तरां, मॉल।

- वितरक (Distributors):
- भौगोलिक दूरी या कठिन इलाके के कारण जब थोक विक्रेता खुदरा विक्रेताओं तक नहीं पहुँच पाते, तब वितरक इस अंतर को पाटते हैं।
- ऑनलाइन बाजार / एग्रीगेटर:
- ऑनलाइन मॉडल में आपूर्ति श्रृंखला अलग होती है।
- निर्माता अपना माल ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के गोदामों में भेजते हैं।
- एग्रीगेटर: ऐसी वेबसाइट या मोबाइल ऐप जो विभिन्न विक्रेताओं के प्रस्तावों को एक जगह जोड़ती है, ऑर्डर पैक करती है और सीधे उपभोक्ता तक पहुँचाती है।
शब्दावली
- कोल्ड स्टोरेज: खराब होने वाले सामान को सुरक्षित रखने के लिए कम तापमान बनाए रखने वाले विशेष गोदाम।
- वितरक: निर्माताओं/थोक विक्रेताओं से खुदरा विक्रेताओं तक सामान पहुँचाने वाले मध्यस्थ।
- एग्रीगेटर: विभिन्न विक्रेताओं के सामान को एक डिजिटल मंच पर लाकर उपभोक्ता को बेचने वाला प्लेटफॉर्म।
सूरत टेक्सटाइल मार्केट: आपूर्ति श्रृंखला
सूरत (गुजरात) एशिया का सबसे पुराना कपड़ा बाजार और भारत का प्रमुख टेक्सटाइल हब है।
- कच्चे माल की आपूर्ति: महाराष्ट्र और गुजरात के अन्य जिलों (जैसे अमरेली, भावनगर, सुरेंद्रनगर) से सूती मंडियों के माध्यम से कच्ची कपास (Raw Cotton) सूरत आती है।
- प्रसंस्करण चरण: पावरलूम पर बुनाई – डाइंग (रंगाई) – तैयार कपड़ा या वस्त्र (साड़ियाँ, रेडीमेड कपड़े)।
- थोक विक्रेताओं की भूमिका: वे तैयार कपड़ों को देश-विदेश के खुदरा विक्रेताओं तक पहुँचाते हैं और माँग का सही अनुमान लगाकर स्टॉक बनाए रखते हैं।
सूरत: हीरा और कपड़ा उद्योग
- हीरा उद्योग (Diamond Industry):
- सूरत विश्व के सबसे बड़े हीरा तराशने और पॉलिश करने वाले उद्योगों का घर है।
- लगभग 15 लाख (1.5 Million) कारीगर हीरा कटिंग और पॉलिशिंग में लगे हैं।

- ऐतिहासिक व भौगोलिक महत्व:
- 16वीं शताब्दी से ही सूरत में व्यापार समृद्ध रहा है।
- भारत के पश्चिमी तट (West Coast) पर स्थिति, बंदरगाह, सड़क व रेल नेटवर्क ने इसे वैश्विक व्यापारिक केंद्र बनाया।
लोगों के जीवन में बाजारों की भूमिका (The Role of Markets in People’s Lives)
बाजार केवल व्यापार का माध्यम नहीं हैं। यह हमारी अर्थव्यवस्था और समाज दोनों की रीढ़ हैं।
- आर्थिक महत्व:
- उत्पादकों और उपभोक्ताओं के बीच लेन-देन आसान बनाना।
- उन वस्तुओं और सेवाओं तक पहुँच देना जिन्हें लोग खुद नहीं बना सकते।
- बाजार का अभाव (Market Absence):
- यदि बाजार न हों, तो किसान उपज नहीं बेच पाएंगे और सूरत के कपड़ा उत्पादक कच्चा माल (कपास) नहीं खरीद सकेंगे।
बाजार समाज को कैसे लाभ पहुँचाते हैं
- 1. उपभोक्ता माँग से नवाचार (Consumer Demand & Innovation):
- जब उपभोक्ता बिजली बचाने वाले फ्रिज की माँग करते हैं, तो उत्पादकों को इसका संकेत (Signal) मिलता है।
- परिणाम: ऊर्जा-कुशल (Energy-efficient) उत्पादों का निर्माण होता है, जिससे समाज और पर्यावरण दोनों को लाभ मिलता है।
- 2. गैर-आर्थिक व सामाजिक महत्व (Non-Economic Significance):
- बाजार केवल पैसे के लेन-देन तक सीमित नहीं हैं। यहाँ पीढ़ियों पुराने विश्वास के रिश्ते बनते हैं।
- उदाहरण: स्थानीय दर्जी, जौहरी, डॉक्टर से दशकों पुराना संबंध या स्थानीय किराना स्टोर में महीने के अंत में हिसाब चुकता करने का खाता।
इमा कैथल और सामाजिक परंपराएँ
- इमा कैथल (Mother’s Market):
- स्थान: इम्फाल, मणिपुर।
- विशेषता: मैतेई भाषा में इसका अर्थ ‘माँ का बाजार’ है।
- महिला सशक्तिकरण: लगभग 3,000 महिलाएँ इस बाजार की सभी दुकानों को चलाती और उनका स्वामित्व रखती हैं।
- बिक्री वस्तुएँ: सब्जियाँ, पारंपरिक मणिपुरी पोशाकें, हथकरघा (Handloom), हस्तशिल्प और रोजमर्रा का सामान।
- सांस्कृतिक महत्व: यह आजीविका का साधन होने के साथ-साथ विविध समुदायों का सांस्कृतिक संगम (Melting pot of cultures) है।
- दक्षिण भारत की सांस्कृतिक परंपरा:
- हल्दी और कुमकुम के विक्रेता खरीदार को शुभकामना और मंगल भावना के प्रतीक के रूप में मुफ्त में थोड़ा अतिरिक्त हल्दी-कुमकुम देते हैं।
बाजार के दोहरे आयाम
| पहलू | आर्थिक भूमिका (Economic Role) | सामाजिक व सांस्कृतिक भूमिका (Social Role) |
| मुख्य कार्य | वस्तु व सेवा का क्रय-विक्रय | सामाजिक संबंध व विश्वास का निर्माण |
| प्रभाव | रोजगार सृजन, आय व आपूर्ति श्रृंखला | सांस्कृतिक आदान-प्रदान, महिला सशक्तिकरण |
| उदाहरण | उत्पादकों को माँग का संकेत मिलना | इमा कैथल (मणिपुर), स्थानीय उधारी खाता system |
बाजार में सरकार की भूमिका (Government’s Role in the Market)
खरीदारों और विक्रेताओं की सुरक्षा हेतु मूल्य नियंत्रण
- अधिकतम मूल्य सीमा (Price Ceiling): आवश्यक वस्तुओं और जीवनरक्षक दवाओं (Lifesaving Drugs) की अधिकतम कीमत तय करना ताकि आम जनता का शोषण न हो।
- न्यूनतम मूल्य सीमा (Price Floor / MSP): किसानों को नुकसान से बचाने के लिए गेहूं, धान और मक्का जैसे कृषि उत्पादों हेतु न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) तय करना।
- न्यूनतम मजदूरी (Minimum Wages): श्रमिकों के अधिकारों की सुरक्षा और शोषण रोकने हेतु न्यूनतम मजदूरी दर निर्धारित करना।
- संतुलन की आवश्यकता: अत्यधिक कम मूल्य से उत्पादकों का उत्साह गिरता है, जबकि अत्यधिक मूल्य से उपभोक्ताओं का नुकसान होता है।
गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करना
- औषधि नियमन (Drug Regulation): दवाओं की मंजूरी प्रक्रिया तय करना और सैंपल टेस्टिंग के जरिए गुणवत्ता की जाँच करना।
- माप-तौल नियंत्रण (Weights & Measures): पैकेट पर अंकित वजन (Net Quantity) और माप का नियमन करना।
- कौटिल्य का अर्थशास्त्र: कौटिल्य ने घी विक्रेताओं के लिए मानस्राव (1/50 वां अतिरिक्त भाग) देने का निर्देश दिया था ताकि बर्तन में चिपकने के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई ग्राहक को हो सके।
बाजार के बाहरी दुष्प्रभावों को कम करना
- पर्यावरणीय प्रभाव: कारखानों से होने वाले प्रदूषण और पर्यावरण नुकसान को नियंत्रित करना।
- सिंगल-यूज प्लास्टिक: स्वास्थ्य और पर्यावरण जोखिमों को कम करने के लिए कड़े नियम व प्रतिबंध लागू करना।
सार्वजनिक वस्तुओं की प्रावधान-व्यवस्था
- सार्वजनिक वस्तुएँ (Public Goods): ऐसी वस्तुएँ या सेवाएँ जो समाज के सभी सदस्यों के लिए उपलब्ध होती हैं और जिनके उपयोग से किसी अन्य के लिए उनकी उपलब्धता कम नहीं होती।
- विशेषता: इनमें निजी क्षेत्र का लाभ (Profit) नहीं होता।

- उदाहरण: सार्वजनिक पार्क, सड़कें, पुलिस सुरक्षा, राष्ट्रीय रक्षा।
उपभोक्ता गुणवत्ता का आकलन कैसे करें?
प्रमुख सरकारी प्रमाणन चिह्न
| मार्क / मानक | पूर्ण रूप / जारीकर्ता | संबंधित उत्पाद | मुख्य उद्देश्य |
| FSSAI | भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण | प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ (Food Packets) | खाद्य सुरक्षा और उपभोग हेतु परीक्षण |
| ISI Mark | भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) | इलेक्ट्रिकल उपकरण, निर्माण सामग्री, टायर, कागज | सुरक्षा और न्यूनतम गुणवत्ता की गारंटी |
| AGMARK | कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय | कृषि उत्पाद (फल, सब्जियाँ, दालें, मसाले, शहद) | कृषि उत्पादों की श्रेणी व शुद्धता |
| BEE Star Rating | ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (Bureau of Energy Efficiency) | इलेक्ट्रॉनिक उपकरण (TV, AC, लैपटॉप) | ऊर्जा दक्षता; अधिक स्टार = कम बिजली खप |