13 August 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा के माध्यम से राशन सब्सिडी वितरण को सुव्यवस्थित करने वाले CBDC-आधारित डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT), आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम, जैविक आपात स्थितियों से निपटने के लिए जारी जैविक खतरों और जैव-सुरक्षा हेतु NDMA के राष्ट्रीय तैयारी ढांचे, देश के युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में दक्ष बनाने वाली राष्ट्रीय AI कौशल पहल, आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने वाली भारत की पहली राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी नीति एवं रणनीति ‘प्रहार’, विश्व हाथी दिवस पर एशियाई हाथियों के संरक्षण व मानव-हाथी संघर्ष प्रबंधन के प्रयासों, तथा कैंसर निदान में क्रांति लाने वाले AI फ्रेमवर्क (ACSCeND & OncoMark) द्वारा कैंसर स्टेम सेल की पहचान का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
CBDC-आधारित डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT): राशन सब्सिडी में डिजिटल क्रांति
- प्रारंभिक परीक्षा: केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC), ई-रुपया, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): ई-गवर्नेंस, खाद्य सुरक्षा (PMGKAY), सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में सुधार, पारदर्शिता, बैंकिंग सुधार और भारतीय अर्थव्यवस्था।
चर्चा में क्यों?
भारत सरकार दो केंद्र शासित प्रदेशों—चंडीगढ़ और दादरा एवं नगर हवेली में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत CBDC-आधारित DBT की शुरुआत करने जा रही है। इस पहल का शुभारंभ केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी तथा पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक श्री गुलाब चंद कटारिया की गरिमामयी उपस्थिति में होगा। यह पहला अवसर है जब किसी केंद्रीय कल्याणकारी योजना में पूर्ण स्तर पर डिजिटल रुपये का उपयोग सब्सिडी बांटने के लिए किया जा रहा है।
मुख्य बिंदु: CBDC-DBT मॉडल, कार्यप्रणाली और लाभ
1. यह मॉडल कैसे काम करेगा?
- डिजिटल वॉलेट में सीधी सब्सिडी: PMGKAY के पात्र लाभार्थियों को पारंपरिक बैंक खातों के बजाय उनके CBDC वॉलेट (e-Rupee Wallet) में खाद्य सब्सिडी टोकन सीधे प्राप्त होंगे।
- प्रोग्रामेबल ई-रुपया (CBDC): यह मुद्रा प्रोग्रामेबल होगी। इसका अर्थ है कि प्राप्त सब्सिडी का उपयोग केवल सूचीबद्ध व्यापारियों (Empanelled Merchants) से खाद्यान्न खरीदने के लिए ही किया जा सकेगा।
- सुरक्षित व वास्तविक समय भुगतान: लाभार्थी अपने वॉलेट के माध्यम से सुरक्षित, पारदर्शी और रियल-टाइम डिजिटल भुगतान कर सकेंगे।
2. योजना का दायरा और पूर्व अनुभव
- प्रथम पूर्ण संतृप्ति क्षेत्र: चंडीगढ़ और दादरा व नगर हवेली देश के पहले ऐसे केंद्र शासित प्रदेश बनेंगे, जहाँ सभी पात्र PMGKAY लाभार्थियों को 100% CBDC आधारित सब्सिडी मिलेगी।
- पायलट प्रोजेक्ट का विस्तार: इससे पहले पुडुचेरी और गुजरात में इसके सफल पायलट परीक्षण किए जा चुके हैं।
3. प्रमुख प्रशासनिक व आर्थिक लाभ
- रिसाव (Leakage) और विचलन पर रोक: पारंपरिक नकद या सामान्य बैंक ट्रांसफर में होने वाली गड़बड़ियों, बिचौलियों और फर्जीवाड़े को पूरी तरह खत्म किया जा सकेगा।
- एंड-टू-एंड ट्रेसेबिलिटी: सरकारी धन के उपयोग का वास्तविक समय (Real-time) में पता लगाया जा सकेगा कि पैसा किस उद्देश्य से और कहाँ खर्च हुआ।
- वित्तीय समावेशन: बिना जटिल बैंकिंग प्रक्रियाओं के, साधारण मोबाइल वॉलेट आधारित लेनदेन से आम नागरिकों को जोड़ा जाएगा।
- भविष्य के लिए स्केलेबल टेम्पलेट: यह रोल-आउट पूरे देश के लिए एक मॉडल के रूप में काम करेगा। आने वाले समय में अन्य राज्य भी इसे अपना सकेंगे।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | विवरण / तथ्य |
| प्रारंभ की तिथि | 14 अगस्त 2026। |
| प्रथम राज्य/UTs | चंडीगढ़ और दादरा एवं नगर हवेली। |
| संबंधित योजना | प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY)। |
| तकनीकी माध्यम | CBDC (सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी) / ई-रुपया वॉलेट। |
| जारीकर्ता संस्था | भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI – CBDC का नियामक)। |
| नोडल मंत्रालय | उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय। |
आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय नीतियां, पंचायती राज संस्थाएं (PRIs), स्थानीय स्वशासन और विकास योजनाएं।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): स्थानीय स्तर पर शक्तियों और वित्त का हस्तांतरण, पंचायती राज संस्थाएं, वित्तीय स्वायत्तता और 16वां वित्त आयोग।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने राज्यसभा में ‘आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम’ की प्रगति पर एक लिखित उत्तर प्रस्तुत किया। यह 4-वर्षीय पहल पंचायतों को वित्तीय रूप से स्वायत्त बनाने और उन्हें केवल सरकारी अनुदानों पर निर्भर रहने के बजाय अपने स्वयं के राजस्व स्रोतों (OSR – Own Source Revenue) को बढ़ाने में सक्षम बनाने के लिए शुरू की गई है। 4 अगस्त 2026 तक इस कार्यक्रम के डिजिटल पोर्टल पर 28 पंचायतों से 30 प्रस्ताव प्राप्त हो चुके हैं।
मुख्य बिंदु: कार्यक्रम का ढांचा, पात्रता और कार्यान्वयन
1. योजना का ढांचा और चयन प्रक्रिया
- 4-वर्षीय पहल: इसके तहत अप्रयुक्त स्थानीय परिसंपत्तियों (Local Assets) का व्यावसायिक उपयोग कर स्थायी आय पैदा की जाएगी।
- ओपन चैलेंज सिस्टम: राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर खुली प्रतिस्पर्धात्मक प्रणाली के तहत प्रस्ताव चुने जाएंगे।
- परियोजना लक्ष्य:
- प्रथम वर्ष: 50 परियोजनाएं
- अगले 3 वर्ष: प्रतिवर्ष 100-100 परियोजनाएं
2. पात्रता मापदंड
- कार्यकाल की शर्त: केवल निर्वाचित ग्राम और ब्लॉक पंचायतें, जिनका न्यूनतम 3 वर्ष का कार्यकाल शेष या पूरा हो।
- OSR की सीमा (Own Source Revenue):
- ग्राम पंचायत: न्यूनतम ₹50 लाख का OSR।
- ब्लॉक पंचायत: न्यूनतम ₹1 करोड़ का OSR।
- (नोट: पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों के लिए पात्रता मानदंडों में ढील दी गई है।)
3. कार्यान्वयन, फंडिंग और तकनीकी सहायता
- बैंक योग्य प्रोजेक्ट्स (Bankable Concepts): सरकार सीधा वित्तीय अनुदान देने के बजाय विचार को विस्तृत और बैंक योग्य व्यावसायिक मॉडल में बदलने के लिए तकनीकी सहायता देगी।
- फंडिंग के साधन: पीपीपी (PPP) मॉडल, सीएसआर (CSR) फंड, विभिन्न योजनाओं का अभिसरण (Convergence) और संस्थागत ऋण।
- ग्राम सभा की अनिवार्य स्वीकृति: भागीदारी योजना सुनिश्चित करने के लिए ग्राम सभा की स्पष्ट मंजूरी अनिवार्य है।
- डिजिटल पोर्टल: पूरी चयन प्रक्रिया समर्पित डिजिटल पोर्टल के जरिए पारदर्शी तरीके से होगी। NABARD और HUDCO जैसे संस्थान तकनीकी व वित्तीय सलाह देंगे।
16वें वित्त आयोग की सिफारिशों से जुड़ाव
यह कार्यक्रम 16वें वित्त आयोग की प्राथमिकताओं के सीधे अनुकूल है:
- वित्त आयोग ने ग्रामीण स्थानीय निकायों को मिलने वाले ‘परफॉर्मेंस ग्रैंट’ को OSR में मापने योग्य वृद्धि से जोड़ने पर जोर दिया है।
- यह पहल पंचायतों को संरचनात्मक सहायता देकर अपनी आय बढ़ाने और परफॉर्मेंस-लिंक्ड ग्रांट के योग्य बनने में मदद करेगी।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| कार्यक्रम का नाम | आत्मनिर्भर पंचायत कार्यक्रम। |
| अवधि | 4 वर्ष (कुल 350 परियोजनाएं)। |
| नोडल मंत्रालय | पंचायती राज मंत्रालय (MoPR)। |
| न्यूनतम OSR शर्त | ग्राम पंचायत (₹50 लाख), ब्लॉक पंचायत (₹1 करोड़)। |
| फंडिंग मॉडल | PPP, CSR, बैंक क्रेडिट (सीधा अनुदान नहीं)। |
| वित्तीय सलाहकार | NABARD, HUDCO आदि। |
जैविक खतरों और जैव-सुरक्षा के लिए NDMA का राष्ट्रीय तैयारी ढांचा
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल (NDRF), जैविक आपदाएं और संबंधित सरकारी योजनाएं।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): आपदा प्रबंधन (Disaster Management), जैव-सुरक्षा (Biosecurity), CBRN (रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल, परमाणु) खतरे और आंतरिक सुरक्षा।
चर्चा में क्यों?
गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में जैविक आपदाओं और जैव-सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए भारत की राष्ट्रीय तैयारियों का ब्योरा दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश किसी भी जैविक हमले या महामारी से निपटने के लिए NDMA के 2008 के दिशा-निर्देशों और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (NDMP) 2019 के बहु-स्तरीय ढांचे के साथ पूरी तरह तैयार है। इसके तहत स्वास्थ्य मंत्रालय नोडल एजेंसी के रूप में कार्य कर रहा है, जिसे ICMR के 150 से अधिक VRDLs और 2 मोबाइल BSL-3 प्रयोगशालाओं का मजबूत नेटवर्क प्राप्त है।
मुख्य बिंदु: नीतिगत ढांचा, नोडल तंत्र और तैयारियां
1. नीतिगत और संस्थागत ढांचा
- NDMA दिशा-निर्देश (2008): ‘जैविक आपदा प्रबंधन गाइडलाइन्स 2008’ जोखिम प्रबंधन, जैव-सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य तैयारियों का मुख्य ढांचा प्रदान करती हैं।
- राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (NDMP 2019): इसमें जैविक और सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों को व्यापक स्तर पर शामिल किया गया है।
- नोडल मंत्रालय: स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW) को जैविक आपदाओं के लिए मुख्य नोडल मंत्रालय बनाया गया है।
- राज्य की भूमिका: स्वास्थ्य संविधान के तहत राज्य का विषय है। अतः केंद्र सरकार राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को तकनीकी और वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
2. निगरानी, त्वरित अनुक्रिया और प्रयोगशाला नेटवर्क
- IDSP का सुदृढ़ीकरण: ‘एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम’ (Integrated Disease Surveillance Programme) के तहत बहु-विषयक रैपिड रिस्पॉन्स टीमों (RRTs) को प्रशिक्षित किया गया है।
- ICMR प्रयोगशाला नेटवर्क:
- देश भर में 150 से अधिक ‘वायरल रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लैबोरेटरीज’ (VRDLs) का संचालन।
- दूरदराज के क्षेत्रों में तत्काल जांच के लिए ICMR ने 2 मोबाइल BSL-3 (बायोसेफ्टी लेवल-3) प्रयोगशालाएं विकसित की हैं।
3. दीर्घकालिक अवसंरचना और NDRF की भूमिका
- PM-ABHIM योजना: ‘प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन’ का उद्देश्य प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक स्वास्थ्य प्रणालियों को नए और उभरते रोगों की पहचान एवं प्रबंधन के लिए सक्षम बनाना है।
- NDRF की CBRN क्षमताएं:
- राष्ट्रीय आपदा अनुक्रिया बल (NDRF) की बटालियनों को CBRN (रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु) आपात स्थितियों के लिए प्रशिक्षित किया गया है।
- NDRF टीमें बचाव, पहचान, निगरानी और संदूषण मुक्त करने (Decontamination) के उपकरणों से लैस हैं।
- मॉक ड्रिल और IRS: अंतर-एजेंसी समन्वय सुधारने के लिए NDRF, SDRF, CAPF, पुलिस और स्वास्थ्य विभागों के साथ मॉक ड्रिल आयोजित की जाती हैं। ये प्रक्रियाएं इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम (IRS) और SOPs के तहत संचालित होती हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| जैविक आपदा हेतु नोडल मंत्रालय | स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW)। |
| CBRN ट्रेनिंग | NDRF बटालियनों को जैविक/परमाणु/रासायनिक हमलों के लिए विशेष प्रशिक्षण। |
| मोबाइल BSL-3 लैब्स | ICMR द्वारा ऑन-साइट जांच हेतु निर्मित 2 मोबाइल लैब। |
| निगरानी प्रणाली | एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (IDSP)। |
| स्वास्थ्य अवसंरचना योजना | PM-ABHIM (भविष्य की महामारियों से निपटने हेतु समर्पित)। |
राष्ट्रीय AI कौशल पहल (National AI Skilling Initiative)
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय नीतियां, सूचना प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और संबंधित सरकारी पहल।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): ई-गवर्नेंस, शिक्षा और कौशल विकास, प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग, जनसांख्यिकी लाभांश का उपयोग और रोजगार सृजन।
चर्चा में क्यों?
सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने लोकसभा में राष्ट्रीय AI कौशल पहल की प्रगति का ब्योरा दिया। इस पहल के तहत पहले चरण (Phase-I) में अब तक कुल 60,253 अभ्यर्थियों ने अपना नामांकन कराया है। 33 घंटे की अवधि वाले इस चरण के 4 प्रमुख मॉड्यूल में से 4,620 प्रतिभागियों ने शुरुआती 2 मॉड्यूल और 552 ने सभी चारों मॉड्यूल सफलतापूर्वक पूरे कर लिए हैं। भारतीय सृजनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (IICT) और निजी क्षेत्र के साझेदारों के सहयोग से संचालित यह कार्यक्रम देश में युवाओं को उद्योग-अनुकूल AI कौशल से सशक्त बना रहा है।
मुख्य बिंदु: कार्यक्रम का ढांचा, मॉड्यूल और कार्यान्वयन मॉडल
1. पाठ्यक्रम संरचना और वितरण
- अवधि: चरण-I के तहत 33 घंटे की कुल अवधि वाले 4 मॉड्यूल शामिल हैं।
- प्लेटफ़ॉर्म 1 (प्रारंभिक दक्षता):
- मॉड्यूल 1 (AI Essentials): डेटा संश्लेषण, सामग्री निर्माण और दैनिक उत्पादकता बढ़ाने के लिए व्यावहारिक कौशल।
- मॉड्यूल 2 (Prompting Essentials): पेशेवर प्रॉम्प्ट लिखने का एक संरचित ढांचा।
- प्लेटफ़ॉर्म 2 (उन्नत जेनेरेटिव AI):
- मॉड्यूल 3 (Introduction to Generative AI): लार्ज लैंग्वेज मॉडल (LLM) के मूलभूत सिद्धांत और जिम्मेदार AI दिशा-निर्देश।
- मॉड्यूल 4 (Generative AI Leader): वर्कफ़्लो ऑटोमेशन और रणनीतिक संगठनात्मक परिवर्तन।
2. संस्थागत ढांचा और पीपीपी मॉडल
- सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP): इसका पाठ्यक्रम भारतीय सृजनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (IICT) तथा निजी क्षेत्र के वैश्विक साझेदारों (जैसे गूगल व यूट्यूब) के संयुक्त प्रयास से तैयार किया गया है।
- संयुक्त प्रमाणन (Joint Certification): उन्नत कौशल घटकों का संचालन IICT द्वारा किया जाता है, जो योग्य छात्रों को साझा प्रमाणपत्र प्रदान करता है।
- सरकार की भूमिका: केंद्र सरकार का मुख्य कार्य नीतिगत दिशा प्रदान करना और IICT के माध्यम से कार्यान्वयन को आसान बनाना है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| नोडल मंत्रालय | सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (MIB)। |
| मुख्य कार्यान्वयन संस्था | भारतीय सृजनात्मक प्रौद्योगिकी संस्थान (IICT)। |
| निजी भागीदार | उद्योग विशेषज्ञ, गूगल और यूट्यूब। |
| चरण-I की अवधि | कुल 33 घंटे (4 मॉड्यूल दो लर्निंग प्लेटफ़ॉर्म पर)। |
| मुख्य उद्देश्य | मीडिया, मनोरंजन और तकनीकी क्षेत्रों में AI साक्षरता बढ़ाना। |
प्रहार: भारत की पहली राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी नीति एवं रणनीति
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय सुरक्षा नीतियां, गृह मंत्रालय (MHA) की पहल और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी शब्दावली।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): आतंकवाद और उग्रवाद से उत्पन्न चुनौतियां, मनी लॉन्ड्रिंग और टेरर फाइनेंसिंग, साइबर सुरक्षा, तथा सुरक्षा बलों की भूमिका।
चर्चा में क्यों?
गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में ‘प्रहार’ नीति के कार्यान्वयन की जानकारी दी। गृह मंत्रालय ने 23 फरवरी 2026 को भारत की पहली व्यापक ‘राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी नीति और रणनीति’ (PRAHAAR) का अनावरण किया था। यह नीति भारत के सुरक्षा ढांचे को केवल प्रतिक्रियात्मक (Reactive) के बजाय एक अग्रसक्रिय (Proactive) दृष्टिकोण में बदलती है। इसका मुख्य उद्देश्य ‘समग्र सरकार’ (Whole of Government) और ‘समग्र समाज’ (Whole of Society) मॉडल के तहत आतंकवाद और कट्टरपंथ को जड़ से खत्म करना है।
मुख्य बिंदु: 7 प्रमुख स्तंभ, रणनीतिक बदलाव और कार्यान्वयन
1. ‘प्रहार’ के 7 रणनीतिक स्तंभ
यह नीति 7 मुख्य स्तंभों पर आधारित है, जो भारत के आतंकवाद विरोधी उद्देश्यों को पूरा करते हैं:
- P – Prevention (रोकथाम): खुफिया जानकारी के आधार पर आतंकी खतरों को पैदा होने से पहले ही नाकाम करना।
- R – Responses (त्वरित अनुक्रिया): खतरे के अनुपात में तेज और सटीक जवाबी कार्रवाई करना।
- A – Aggregating (क्षमता एकत्रीकरण): सभी सरकारी एजेंसियों और विभागों की आंतरिक क्षमताओं में तालमेल बिठाना।
- H – Human Rights (मानवाधिकार व कानून का शासन): सभी अभियानों में कानूनी सुरक्षा उपायों और मानवाधिकारों का पालन सुनिश्चित करना।
- A – Attenuating (कट्टरपंथ में कमी): समुदाय के सहयोग से डी-रेडिकलाइजेशन चलाना और कट्टरपंथ पैदा करने वाले कारणों को दूर करना।
- A – Aligning (अंतर्राष्ट्रीय समन्वय): कूटनीति के जरिए सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक सहयोग को मजबूत करना।
- R – Recovery & Resilience (पुनर्प्राप्ति एवं लचीलापन): आतंकी घटना के बाद प्रभावित क्षेत्रों में जनजीवन को तेजी से सामान्य बनाना।
2. इंटेलिजेंस, अत्याधुनिक तकनीक और सुरक्षा बल
- रीयल-टाइम इंटेलिजेंस: मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) के जरिए केंद्र और राज्य एजेंसियों के बीच तुरंत खुफिया जानकारी साझा की जाएगी।
- त्वरित कमांड चेन: राज्य पुलिस और एनएसजी (NSG) जैसे विशेष केंद्रीय बलों के बीच सीधा और त्वरित समन्वय स्थापित किया गया है।
- क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा: ऊर्जा, रेलवे, विमानन, अंतरिक्ष और परमाणु क्षेत्रों को साइबर व तकनीकी खतरों से सुरक्षित रखा जाएगा।
3. टेरर फाइनेंसिंग (आतंकवादी वित्तपोषण) पर डिजिटल हमला
- डिजिटल ट्रैकिंग: क्रिप्टो वॉलेट्स की ट्रैकिंग करना और डार्क वेब के जरिए होने वाले क्राउडफंडिंग नेटवर्क को ठप करना।
- संपत्ति जब्ती: केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से आतंकी नेटवर्क की संपत्तियों को जब्त करना।
- अंतर्राष्ट्रीय मानक: FATF (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) के नियमों और अंतर्राष्ट्रीय संधियों के तहत सीमा पार से प्रायोजित फंडिंग को पूरी तरह रोकना।
4. निगरानी तंत्र और ‘एंटी-टेरर कॉन्फ्रेंस’ (ATC)
- चरणबद्ध कार्यान्वयन: इस नीति को संस्थागत सुधारों और बहु-स्तरीय समीक्षा तंत्र के साथ चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है।
- वार्षिक समीक्षा (ATC): राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) गृह मंत्रालय के तत्वावधान में प्रतिवर्ष ‘एंटी-टेरर कॉन्फ्रेंस’ (ATC) आयोजित करती है।
- उद्देश्य: इस सम्मेलन में पुलिस अधिकारी, कानून विशेषज्ञ और नीति निर्माता मिलकर सुरक्षा तंत्र में प्रशासनिक व कानूनी सुधारों की समीक्षा करते हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| नीति का नाम | प्रहार (PRAHAAR – National Counter Terrorism Policy)। |
| अनावरण तिथि | 23 फरवरी 2026 (गृह मंत्रालय द्वारा जारी)। |
| मूल दृष्टिकोण | Whole of Government & Whole of Society। |
| खुफिया समन्वय संस्था | मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC)। |
| वार्षिक समीक्षा प्लेटफॉर्म | NIA द्वारा आयोजित ‘वार्षिक एंटी-टेरर कॉन्फ्रेंस’ (ATC)। |
| वित्तीय कार्रवाई मानक | FATF (Financial Action Task Force) के अनुरूप। |
विश्व हाथी दिवस: भारत में एशियाई हाथियों का संरक्षण और प्रबंधन
- प्रारंभिक परीक्षा: पर्यावरण और जैव विविधता, प्रोजेक्ट एलिफेंट, हाथी रिजर्व, हाथी गलियारे (Elephant Corridors), वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन, मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict)।
चर्चा में क्यों?
विश्व हाथी दिवस (12 अगस्त 2026) के अवसर पर केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने भारत में हाथियों के संरक्षण की रिपोर्ट जारी की है। भारत वैश्विक स्तर पर जंगली एशियाई हाथियों की लगभग 60% आबादी का घर है। देश में आधुनिक तकनीक, डीएनए-आधारित जनगणना, कानूनी सुधारों और समुदाय-आधारित प्रयासों से हाथियों के संरक्षण को नई गति मिली है।
मुख्य बिंदु: भारत में हाथी संरक्षण का वर्तमान परिदृश्य
1. जनसांख्यिकी और भौगोलिक विस्तार
- कुल आबादी: ‘अखिल भारतीय हाथी जनसंख्या अनुमान (SAIEE) 2021-25’ के अनुसार भारत में जंगली हाथियों की संख्या 22,446 है।
- संरक्षित नेटवर्क: देश भर में कुल 33 हाथी रिजर्व (Elephant Reserves) और 150 चिन्हित हाथी गलियारे (Elephant Corridors) हैं।

- क्षेत्रीय वितरण (गलियारे):
- पूर्वी-मध्य क्षेत्र: 52 गलियारे
- उत्तर-पूर्वी क्षेत्र: 48 गलियारे
- दक्षिणी क्षेत्र: 32 गलियारे
- उत्तरी क्षेत्र: 18 गलियारे
- पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक (26) गलियारे हैं (राष्ट्रीय कुल का 17% से अधिक)। नेटवर्क में 19 अंतर-राज्यीय और 6 भारत-नेपाल अंतर-सीमा (Transboundary) गलियारे शामिल हैं।
2. प्रमुख तकनीकी और वैज्ञानिक पहलें
- डीएनए-आधारित जनगणना (DNA Sampling): SAIEE 2021-25 में पहली बार गोबर के नमूनों के डीएनए फिंगरप्रिंटिंग का उपयोग करके हाथियों की व्यक्तिगत पहचान की गई।
- रेलमार्ग सुरक्षा में गिरावट: ऑप्टिकल फाइबर-आधारित डिस्ट्रीब्यूटेड ध्वनिक सेंसिंग (DAS), एआई तकनीक और थर्मल कैमरों के उपयोग से ट्रेनों की टक्कर से होने वाली मौतों में 50% से अधिक की कमी आई है (2013 में 26 मौतों से घटकर 2024 में 12 मौतों पर)।

- गज सूचना मोबाइल ऐप: पंजीकृत पालतू (Captive) हाथियों के डीएनए प्रोफाइल, शारीरिक विशेषताओं और स्वामित्व का राष्ट्रीय जेनेटिक डेटाबेस तैयार करता है।
3. नीतिगत ढांचा और मानव-हाथी संघर्ष प्रबंधन
- प्रबंध प्रभावशीलता मूल्यांकन (MEE-ER): हाथी रिजर्व के लिए 2023 में MEE फ्रेमवर्क शुरू किया गया, जिसे CAMPA फंड से संचालित किया जा रहा है।
- पालतू हाथी (स्थानांतरण या परिवहन) नियम, 2024: पालतू हाथियों के अंतर-राज्यीय स्थानांतरण की जांच हेतु सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर गठित उच्च-स्तरीय समिति (High-Powered Committee) की सिफारिशें लागू की गईं।

- अनुग्रह राशि (Ex-gratia) सहायता: मानव-हाथी संघर्ष में मृत्यु या स्थायी विकलांगता पर ₹10 लाख, गंभीर चोट पर ₹2 लाख और फसल/संपत्ति के नुकसान पर राज्य मानकों के अनुसार मुआवजा दिया जाता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| संरक्षण स्थिति (IUCN) | एशियाई हाथी: संकटग्रस्त (Endangered)। |
| CITES स्थिति | परिशिष्ट I (Appendix I)। |
| WPA 1972 स्थिति | अनुसूची I (Schedule I)। |
| राष्ट्रीय विरासत पशु | 2010 में भारत का ‘राष्ट्रीय विरासत पशु’ घोषित। |
| प्रोजेक्ट एलिफेंट | 1992 में शुरू की गई केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme)। |
| सर्वाधिक गलियारों वाला राज्य | पश्चिम बंगाल (26 गलियारे)। |
कैंसर स्टेम सेल पहचान हेतु AI फ्रेमवर्क (ACSCeND & OncoMark)
- प्रारंभिक परीक्षा: जैव प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), कैंसर अनुसंधान, ऑनकोमार्क और ACSCeND फ्रेमवर्क।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां, प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण, बायोटेक्नोलॉजी और स्वास्थ्य क्षेत्र में AI का अनुप्रयोग।
चर्चा में क्यों?
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के तहत एस. एन. बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साइंसेज (SNBNCBS) के वैज्ञानिकों ने एक नया AI-आधारित ढांचा ACSCeND विकसित किया है। यह फ्रेमवर्क ट्यूमर में छिपी दुर्लभ कैंसर स्टेम सेल (CSCs) की सटीक पहचान करता है। ये सेल कैंसर के दोबारा उभरने, फैलने और दवाओं के बेअसर होने के लिए जिम्मेदार होते हैं।
मुख्य बिंदु: ACSCeND की तकनीक, कार्यप्रणाली और लाभ
1. कैंसर स्टेम सेल (CSCs) की चुनौती
- ट्यूमर की पुनरावृत्ति: आधुनिक उपचार लाखों कैंसर कोशिकाओं को नष्ट कर देते हैं। लेकिन ये दुर्लभ स्टेम सेल जीवित बच जाते हैं।
- पहचान में कठिनाई: ये कोशिकाएं बहुत कम संख्या में होती हैं। ये लगातार अपना रूप बदलती हैं, जिससे पारंपरिक जांच से बच निकलती हैं।
2. ACSCeND की कार्यप्रणाली
- तीन अलग-अलग अवस्थाएं: ACSCeND ट्यूमर को केवल एक ‘स्टेमनेस’ स्कोर देने के बजाय उसकी तीन जैविक अवस्थाओं की पहचान करता है:
- प्लुरिपोटेंट-लाइक
- मल्टीपोटेंट-लाइक
- यूनिपोटेंट-लाइक
- डीप लर्निंग तकनीक: यह सिंगल-सेल सीक्वेंसिंग और डीप लर्निंग को मिलाकर सामान्य ‘बल्क ट्यूमर RNA सीक्वेंसिंग’ डेटा का विश्लेषण करता है। इससे महंगे टेस्ट के बिना भी रोगी के नमूनों की जांच संभव होती है।
3. प्रमुख निष्कर्ष और लाभ
- ऑनकोमार्क पर आधारित: यह ढांचा शोधकर्ताओं के पुराने AI प्लेटफॉर्म ‘OncoMark’ पर बना है, जो 99% से अधिक सटीकता से कैंसर की प्रगति का अनुमान लगाता है।
- सटीक इलाज (Precision Medicine): जिन ट्यूमर में ‘प्लुरिपोटेंट-लाइक’ कोशिकाएं अधिक होती हैं, वहां मरीज के बचने की संभावना कम और इम्यूनोथेरेपी के विफल होने का जोखिम अधिक रहता है।
- नए ड्रग टारगेट: यह मॉडल कैंसर कोशिकाओं को प्रतिरक्षा प्रणाली से बचाने वाले आणविक तंत्र को उजागर करता है। इससे लक्षित दवाओं के विकास में मदद मिलेगी।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| पहलू / शब्द | महत्वपूर्ण तथ्य |
| ACSCeND | AI-बेस्ड कैंसर स्टेम-लाइक सेल प्रोफाइलर एंड नियोप्लाज्म डीकनवोल्यूटर। |
| विकासकर्ता संस्था | SNBNCBS (कोलकाता) और अशोका यूनिवर्सिटी। |
| नोडल विभाग | विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST)। |
| OncoMark | कैंसर जैविक हॉलमार्क्स की भविष्यवाणी करने वाला स्वदेशी AI मॉडल। |
| मुख्य उपयोग | ट्यूमर की पुनरावृत्ति रोकना और प्रिसिजन मेडिसिन को बढ़ावा देना। |