31 August 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतगर्त सजावटी मत्स्य पालन को बढ़ावा देकर तटीय आजीविका को सशक्त बनाने वाले मिशन रंगीन मछली 2031 (सजावटी मत्स्य पालन और ‘ब्लू इकोनॉमी’ की नई दिशा), ‘विकास भी, विरासत भी’ के संकल्प को दर्शाने वाले आारणमुला उथ्रिटाथी वल्लमकली, एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली (iFMS – डेटा-संचालित उर्वरक प्रबंधन), मध्य एशियाई क्षेत्र में भारत की कूटनीतिक पहुंच को मजबूत करने वाले ‘ओलीय दरजाली दोस्ती’ पुरस्कार और भारत-उज्बेकिस्तान संयुक्त वक्तव्य 2026 (द्विपक्षीय संबंधों का नया अध्याय), तथा सूक्ष्म सिंचाई के माध्यम से कृषि जल दक्षता बढ़ाने वाले प्रति बूंद अधिक फसल (PDMC – Per Drop More Crop) कार्यक्रम का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
मिशन रंगीन मछली 2031: सजावटी मत्स्य पालन और ‘ब्लू इकोनॉमी’ की नई दिशा
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत का भूगोल, पारिस्थितिकी एवं जैव विविधता, आर्थिक विकास (मत्स्य क्षेत्र)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था – कृषि व संबद्ध क्षेत्र (मत्स्य पालन), खाद्य प्रसंस्करण, नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy), और द्वीप विकास।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय द्वारा अगाती (लक्षद्वीप) में एक विशेष आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर भारत के उपराष्ट्रपति ने सजावटी मत्स्य पालन क्षेत्र के सतत और वैज्ञानिक विकास के लिए “मिशन रंगीन मछली 2031” रणनीतिक कार्य योजना का शुभारंभ किया। इस पहल का मुख्य उद्देश्य भारत के विशाल समुद्री व द्वीप संसाधनों का उपयोग कर सजावटी मत्स्य पालन में मानकीकृत SOPs, जैव-सुरक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण लागू करना है।
मुख्य बिंदु: मिशन रंगीन मछली 2031 और नीली अर्थव्यवस्था
1. मिशन रंगीन मछली 2031 की मुख्य विशेषताएं
- वैज्ञानिक प्रबंधन व मानक: इस मिशन का उद्देश्य सजावटी मछली पालन में वैज्ञानिक प्रबंधन, जैव-सुरक्षा (biosecurity), गुणवत्ता आश्वासन और व्यापारिक नियमों का एक समान ढांचा तैयार करना है।
- SOPs और ट्रेसिबिलिटी: यह योजना प्रजनन (breeding), हैचरी संचालन, संगरोध (quarantine), परिवहन, और एक्वेरियम प्रबंधन के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs) तय करती है।
- वैश्विक निर्यात: भारत के सजावटी मत्स्य क्षेत्र को संगठित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना, ताकि निर्यात और तटीय आजीविका में वृद्धि हो सके।
2. लक्षद्वीप का रणनीतिक महत्त्व और क्लस्टर मॉडल
- सीवीड क्लस्टर: केंद्र सरकार ने क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण के तहत लक्षद्वीप को एक समर्पित ‘सीवीड क्लस्टर’ के रूप में अधिसूचित किया है, जिससे समुद्री शैवाल की खेती, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन (value addition) को बढ़ावा मिलेगा।
- ट्यूना संसाधन: लक्षद्वीप का अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) लगभग 4 लाख वर्ग किमी है (भारत के कुल EEZ का ~17%)। यहाँ येलोफिन ट्यूना और स्किपजैक ट्यूना जैसी उच्च मूल्य वाली मछलियों की प्रचुरता है।
3. भारत का समुद्री मत्स्य परिदृश्य
- व्यापक समुद्री संसाधन: भारत की तटरेखा 11,099 किमी है। देश का कुल EEZ 2.2 से 2.4 मिलियन वर्ग किमी (22-24 लाख वर्ग किमी) है।
- मत्स्य क्षमता: भारत के EEZ की कुल समुद्री मत्स्य क्षमता लगभग 5.31 से 5.86 मिलियन मीट्रिक टन (MT) अनुमानित है।
- आर्थिक योगदान: FY 2025-26 के दौरान भारत ने लगभग ₹73,890 करोड़ मूल्य के समुद्री खाद्य उत्पादों (seafood) का निर्यात किया। यह क्षेत्र लगभग 50 लाख मछुआरों की आजीविका का आधार है।
- गहरे समुद्र में मछली पकड़ना (Deep-Sea Fishing): वर्तमान में मछली पकड़ने की गतिविधियां तट से 40-50 समुद्री मील (nautical miles) तक सीमित हैं। उच्च समुद्र (High Seas) में भारतीय ध्वज वाले जहाजों के लिए ‘हाई सीज़ गाइडलाइंस 2025’ जारी की गई हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| नया मिशन | मिशन रंगीन मछली 2031 (सजावटी मत्स्य क्षेत्र हेतु) |
| शुभारंभ स्थल | अगाती (Agatti), लक्षद्वीप |
| भारत की तटरेखा | ~11,099 किमी |
| भारत का कुल EEZ | ~2.2 से 2.4 मिलियन वर्ग किमी |
| लक्षद्वीप का EEZ व लैगून क्षेत्र | EEZ: ~4 लाख वर्ग किमी (भारत के कुल EEZ का 17%) | लैगून: 4,200 वर्ग किमी |
| सीवीड क्लस्टर | लक्षद्वीप को समर्पित सीवीड क्लस्टर घोषित किया गया है |
| प्रमुख मछली प्रजातियां (लक्षद्वीप) | येलोफिन ट्यूना, स्किपजैक ट्यूना |
| सीफूड निर्यात (FY 2025-26) | ₹73,890 करोड़ |
आारणमुला उथ्रिटाथी वल्लमकली: केरल की सांस्कृतिक विरासत और ‘विकास भी, विरासत भी’ की भावना
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत की संस्कृति, प्रमुख त्योहार, पारंपरिक नौका दौड़ (Boat Races), हस्तशिल्प और भौगोलिक संकेत (GI Tag)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 1): भारतीय संस्कृति के मुख्य पहलू, प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला रूप और साहित्य तथा स्थापत्य कला।
चर्चा में क्यों?
भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने केरल में पम्पा नदी के तट पर आयोजित ऐतिहासिक आरणमुला उथ्रिटाथी वल्लमकली नौका दौड़ का आधिकारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह उत्सव केरल की जीवंत परंपराओं, समर्पण, सामूहिक भावना और देश के ‘विकास भी, विरासत भी’ के दृष्टिकोण को प्रदर्शित करता है।
मुख्य बिंदु: सांस्कृतिक महत्त्व और प्रमुख परंपराएं
1. आरणमुला वल्लमकली (नौका दौड़) का महत्त्व
- ओणम और वल्लासद्या: यह पारंपरिक नौका दौड़ ओणम उत्सव का एक अभिन्न अंग है। इसका सीधा संबंध प्रसिद्ध ‘वल्लासद्या’ दावत और आध्यात्मिक अनुष्ठानों से है।
- पल्लीयोडम: इस दौड़ में विशेष रूप से सजाई गई ‘पल्लीयोडम’ नाम की सर्प नौकाओं (Snake Boats) का उपयोग किया जाता है। प्रत्येक नौका में 100 से अधिक नाविक एक साथ तालमेल और अनुशासन के साथ चप्पू चलाते हैं।
2. पम्पा नदी और श्री पार्थसारथी मंदिर
- पम्पा नदी का आध्यात्मिक महत्त्व: पम्पा नदी केरल की एक पवित्र नदी है। यह सबरीमाला तीर्थयात्रा का एक प्रमुख मार्ग और आस्था का केंद्र है।
- श्री पार्थसारथी मंदिर: आरणमुला का प्राचीन श्री पार्थसारथी मंदिर (भगवान कृष्ण को समर्पित) इस नौका उत्सव का मुख्य केंद्र बिंदु है।
3. आरणमुला कन्नडी (Aranmula Kannadi – GI Tag)
- विशेष धातु दर्पण: आरणमुला अपनी हस्तनिर्मित धातु के दर्पणों ‘आरणमुला कन्नडी’ के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
- GI टैग: इसे भौगोलिक संकेत (GI Tag) प्राप्त है। यह कांच के बजाय विशेष तांबे और टिन के मिश्रधातु से बनने वाला एक दुर्लभ कला रूप है।
4. राज्य का नामकरण और सांस्कृतिक एकता
- संसद में विधेयक: उपराष्ट्रपति ने राज्यसभा के सभापति के रूप में हाल के सत्र में राज्य पुनर्गठन/नाम परिवर्तन प्रक्रिया का उल्लेख किया।
- विविधता में एकता: भारत की सांस्कृतिक विविधता देश को बांटती नहीं, बल्कि इसे आंतरिक शक्ति प्रदान करती है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| उत्सव का नाम | आरणमुला उथ्रिटाथी वल्लमकली (नौका दौड़) |
| स्थान व नदी | आरणमुला, पम्पा नदी (केरल) |
| पारंपरिक नौकाएं | पल्लीयोडम (स्नेक बोट्स) |
| संबद्ध मंदिर | श्री पार्थसारथी मंदिर (भगवान कृष्ण) |
| प्रसिद्ध हस्तशिल्प | आरणमुला कन्नडी (धातु का दर्पण – GI Tag प्राप्त) |
| राष्ट्रीय दृष्टिकोण | ‘विकास भी, विरासत भी’ (PM का विज़न) |
एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली (iFMS): डेटा-संचालित उर्वरक प्रबंधन का नया चरण
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत का भूगोल, कृषि, शासन में ICT के अनुप्रयोग और प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता (Subsidies), ई-प्रौद्योगिकी (e-technology) का किसानों की सेवा में प्रयोग, और आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन (Supply Chain Management)।
Why in News? (चर्चा में क्यों?
रासायनिक एवं उर्वरक मंत्रालय के उर्वरक विभाग ने एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली (iFMS) को अधिक पारदर्शी और डेटा-संचालित बनाने के लिए नई डिजिटल पहलों की शुरुआत की है। iFMS का हरियाणा के ‘मेरी फसल मेरा ब्योरा’ (MFMB) और राष्ट्रीय स्तर के ‘AgriStack’ प्लेटफॉर्म के साथ एकीकरण किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य नकली मांग को रोकना और किसानों को उनकी भूमि व फसल की आवश्यकता के आधार पर उर्वरक उपलब्ध कराना है।
मुख्य बिंदु: iFMS का नया स्वरूप और प्रमुख डिजिटल पहलें
1. iFMS का व्यापक विस्तार और क्षमता
- तकनीकी डेवलपर: iFMS को राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) द्वारा उर्वरक विभाग के लिए विकसित और संचालित किया गया है।
- व्यापक पहुंच: यह प्रणाली भारत में 14 करोड़ से अधिक आधार-लिंक्ड खरीदारों, 2.5 लाख से अधिक रिटेलरों और प्रतिवर्ष लगभग 7 करोड़ मीट्रिक टन उर्वरक बिक्री लेनदेन को जोड़ती है।
- सब्सिडी प्रशासन: यह प्रतिवर्ष लगभग ₹2 लाख करोड़ की उर्वरक सब्सिडी के पारदर्शी प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
2. उर्वरक बिक्री ढांचा (Framework for Fertilizer Sale – FFS)
- मोबाइल ऐप आधारित बुकिंग: FFS के तहत किसान AgriStack में बनी अपनी डिजिटल पहचान (Farmer ID) के माध्यम से अपनी भूमि और फसल के आधार पर आवश्यक उर्वरक बुक कर सकते हैं।
- QR-कोड आधारित सत्यापन: बुकिंग के बाद एक QR-कोड उत्पन्न होता है, जिसे पॉइंट ऑफ सेल (PoS) डिवाइस पर स्कैन करके सत्यापन किया जाता है। इससे सही किसान को उसकी वास्तविक आवश्यकता के अनुसार ही उर्वरक मिलता है।
3. वाहन स्थान ट्रैकिंग प्रणाली (VLTS)
- आपूर्ति श्रृंखला में पारदर्शिता: वाहनों में VLTS तकनीक जोड़कर उर्वरक के परिवहन (Goods-in-Transit) की रियल-टाइम ट्रैकिंग की जा रही है।

- कालाबाज़ारी और रुकावट पर रोक: कारखाने या बंदरगाह से लेकर रिटेलर तक उर्वरक के पहुंचने की हर स्थिति पर नज़र रखी जाती है, जिससे अनावश्यक देरी और कालाबाज़ारी को रोका जा सके।
4. इलेक्ट्रॉनिक सब्सिडी प्रसंस्करण (e-Bill & PFMS)
- DBT और PoS एकीकरण: सब्सिडी का भुगतान सीधे PoS मशीनों पर दर्ज वास्तविक बिक्री के आधार पर होता है।
- डिजिटल नियंत्रण: 1 जनवरी 2026 से सब्सिडी बिलों का डिजिटल प्रसंस्करण e-Bill और सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (PFMS) के माध्यम से शुरू किया गया है, जिससे मानवीय हस्तक्षेप कम हुआ है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| प्रणाली का नाम | एकीकृत उर्वरक प्रबंधन प्रणाली (iFMS) |
| तकनीकी भागीदार | राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) |
| वार्षिक सब्सिडी कवरेज | लगभग ₹2 लाख करोड़ |
| वार्षिक बिक्री मात्रा | लगभग 7 करोड़ मीट्रिक टन |
| प्रमुख डिजिटल एकीकरण | Meri Fasal Mera Byora (हरियाणा), AgriStack, PFMS/e-Bill |
‘ओलीय दरजाली दोस्ती’ पुरस्कार: भारत-उज्बेकिस्तान संबंध और रणनीतिक साझेदारी
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की समसामयिक घटनाएँ, भारत और उसके पड़ोसी/मध्य एशियाई संबंध।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह, भारत के हितों पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों का प्रभाव, मध्य एशिया नीति।
चर्चा में क्यों?
उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्ज़ियोयेव ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ओलीय दरजाली दोस्ती’ ऑर्डर से सम्मानित किया। यह पुरस्कार दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों, रणनीतिक साझेदारी और ऐतिहासिक दोस्ती को मजबूत करने में उनके असाधारण योगदान के लिए दिया गया है।
मुख्य बिंदु: भारत-उज्बेकिस्तान संबंध और पुरस्कार का महत्त्व
1. पुरस्कार का महत्त्व
- सर्वोच्च सम्मान: ‘ओलीय दरजाली दोस्ती’ विदेशी नेताओं को दिया जाने वाला उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान (Order of Highest Friendship) है।
- सर्मपण: भारतीय प्रधानमंत्री ने इस सम्मान को भारत की 1.4 अरब जनता और दोनों देशों की प्राचीन सभ्यतागत मित्रता को समर्पित किया।
- ग्लोबल साउथ: यह पुरस्कार विकासशील देशों (Global South) के साझा हितों और मानवता के कल्याण के लिए साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
2. द्विपक्षीय और रणनीतिक जुड़ाव
- व्यापक रणनीतिक साझेदारी: यह सम्मान भारत और उज्बेकिस्तान के बीच लगातार मजबूत हो रही ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ (Comprehensive Strategic Partnership) का प्रतीक है।
- मध्य एशिया नीति: उज्बेकिस्तान भारत की ‘कनेक्ट सेंट्रल एशिया’ नीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। यह क्षेत्र सुरक्षा, व्यापार और ऊर्जा की दृष्टि से रणनीतिक महत्त्व रखता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| पुरस्कार का नाम | ‘ओलीय दरजाली दोस्ती’ ऑर्डर |
| प्रदान करने वाला देश | उज्बेकिस्तान (राष्ट्रपति: शौकत मिर्ज़ियोयेव) |
| प्राप्तकर्ता | भारत के प्रधानमंत्री |
| पुरस्कार की श्रेणी | विदेशी नेताओं हेतु उज्बेकिस्तान का सर्वोच्च सम्मान |
| साझेदारी का प्रकार | व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) |
भारत-उज्बेकिस्तान संयुक्त वक्तव्य 2026: द्विपक्षीय संबंधों का नया अध्याय
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की समसामयिक घटनाएँ, भारत और उसके पड़ोसी/मध्य एशियाई संबंध।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह, भारत के हितों पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों का प्रभाव, मध्य एशिया नीति।
चर्चा में क्यों?
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्बेकिस्तान की आधिकारिक राजकीय यात्रा (State Visit) की। इस दौरान राष्ट्रपति शौकत मिर्ज़ियोयेव और प्रधानमंत्री मोदी के बीच द्विपक्षीय वार्ता हुई। दोनों देशों ने अपने संबंधों को मजबूत करते हुए एक विस्तृत संयुक्त वक्तव्य (Joint Statement) जारी किया और रणनीतिक साझेदारी को नए आयाम देने पर सहमति व्यक्त की।
मुख्य बिंदु: भारत-उज्बेकिस्तान संयुक्त वक्तव्य के प्रमुख स्तंभ
1. राजनीतिक व सुरक्षा सहयोग
- उच्च स्तरीय तंत्र: समझौतों के त्वरित कार्यान्वयन की निगरानी के लिए दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के नेतृत्व में एक नया समन्वय तंत्र स्थापित होगा।
- आतंकवाद पर ज़ीरो टॉलरेंस: दोनों देशों ने सीमा पार आतंकवाद, आतंकवाद की फंडिंग और सुरक्षित ठिकानों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की वकालत की।
- रक्षा अभ्यास ‘दस्तलिक’: अप्रैल 2026 में उज्बेकिस्तान के नमंगन क्षेत्र में आयोजित संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘दस्तलिक’ की सफलता को रेखांकित किया गया।
2. व्यापार, निवेश व संपर्क (Trade & Connectivity)
- गैर-टैरिफ बाधाएं: व्यापारिक रुकावटों को दूर करने के लिए एक ‘संयुक्त कार्य समूह’ (Joint Working Group) का गठन किया जाएगा।
- वरीयता प्राप्त व्यापार समझौता (PTA): भारत-उज्बेकिस्तान PTA के लिए संयुक्त व्यवहार्यता अध्ययन (Feasibility Study) पूरा हो चुका है, अब आगे की कार्रवाई समयबद्ध होगी।
- WTO समर्थन: भारत ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) में उज्बेकिस्तान के प्रवेश का समर्थन किया।
3. ऊर्जा, क्रिटिकल मिनरल्स व डिजिटल तकनीक
- महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals): भूवैज्ञानिक अन्वेषण, खनन और क्रिटिकल मिनरल्स की आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) मजबूत करने के लिए साझेदारी होगी।
- IT Park व AI: ताशकंद में भारतीय मॉडल (STPI) पर बने IT Park की सफलता के बाद अब एआई (AI), साइबर सुरक्षा और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ेगा।
4. स्वास्थ्य, पर्यावरण व सांस्कृतिक संबंध
- अरल सागर पुनर्वास: भारत अपने अनुदान सहायता (Grant-in-Aid) के तहत अरल सागर क्षेत्र के पारिस्थितिक पुनर्वास के लिए 1 मिलियन डॉलर (10 लाख USD) प्रदान करेगा।
- सांस्कृतिक आदान-प्रदान: वर्ष 2026-2030 के लिए सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम (CEP) पर हस्ताक्षर किए गए। प्राचीन बौद्ध स्थलों (फायाज तेपा और कराटेपा) के संरक्षण पर सहमति बनी।
- वैश्विक पहलों का समर्थन: उज्बेकिस्तान ने इंटरनेशनल बिग कैट एलायंस (IBCA) और अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) में शामिल होने की इच्छा जताई।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| संयुक्त सैन्य अभ्यास | दस्तलिक – भारत और उज्बेकिस्तान |
| ताशकंद IT Park मॉडल | Software Technology Parks of India (STPI) के सहयोग से विकसित |
| अरल सागर पुनर्वास सहायता | भारत द्वारा 1 मिलियन डॉलर (Grant-in-Aid) |
| संरक्षित बौद्ध स्थल | फायाज तेपा और कराटेपा |
| उज्बेकिस्तान का संसद नाम | ओलीय मज्लिस |
प्रति बूंद अधिक फसल (PDMC): जल-कुशल कृषि और सूक्ष्म सिंचाई क्रांति
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत का भूगोल, कृषि, सिंचाई प्रणालियां और जल संसाधन प्रबंधन।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): देश के विभिन्न भागों में सिंचाई के प्रकार एवं सिंचाई प्रणाली, कृषि उत्पाद, और प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष कृषि सहायता (Subsidies)।
चर्चा में क्यों?
‘प्रति बूंद अधिक फसल’ (Per Drop More Crop – PDMC) योजना के तहत भारत में 115 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को सूक्ष्म सिंचाई (Micro-Irrigation) के दायरे में लाया जा चुका है। सरकार ने राज्यों को योजना के ‘अन्य हस्तक्षेप’ (Other Interventions) घटक के तहत डिग्गी और फार्म पॉन्ड जैसे जल संरक्षण ढांचों के लिए फंडिंग सीमाओं की शर्त को हटाकर अधिक लचीलापन प्रदान किया है।
मुख्य बिंदु: PDMC योजना का विकास, संरचना और लाभ
1. योजना की पृष्ठभूमि और विकासक्रम
- शुरुआत (2006): यह योजना जनवरी 2006 में ‘सूक्ष्म सिंचाई पर केंद्र प्रायोजित योजना’ के रूप में शुरू हुई। 2010-11 में इसे ‘नेशनल मिशन ऑन माइक्रो इरीगेशन’ (NMMI) बनाया गया।
- PMKSY से PM-RKVY तक: वर्ष 2015-16 से यह ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ (PMKSY) का मुख्य घटक रही। वित्त वर्ष 2022-23 से इसे ‘प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना’ (PM-RKVY) के तहत लागू किया जा रहा है।
- अंब्रेला योजना में एकीकरण: अक्टूबर 2024 में पुनर्गठित PM-RKVY के तहत 9 योजनाओं का विलय किया गया, जिसमें PDMC एक प्रमुख घटक है।
2. वित्तीय सहायता और आवंटन
- वित्तीय सहायता स्वरूप: छोटे और सीमांत किसानों को 55% तथा अन्य किसानों को 45% की वित्तीय सहायता (सब्सिडी) अधिकतम 5 हेक्टेयर तक दी जाती है।
- फंडिंग का लचीलापन: राज्य अब अपनी स्थानीय आवश्यकताओं के अनुसार जल संग्रहण ढांचों (जैसे डिग्गी/फार्म पॉन्ड) पर बिना किसी 20% या 40% की सीमा के फंड खर्च कर सकते हैं।
3. सूक्ष्म सिंचाई के प्रकार और Fertigation
- ड्रिप सिंचाई (Drip Irrigation):
- On-line Drip: असमान अंतराल वाली फसलों के लिए उपयुक्त।
- In-line Drip: समान अंतराल वाली फसलों के लिए।
- स्प्रिंकलर सिंचाई (Sprinkler Irrigation): पोर्टेबल, माइक्रो, मिनी, सेमी-परमानेंट और रेन-गन के माध्यम से घनी फसलों (अनाज, दलहन) की सिंचाई।

- फर्टिगेशन: सिंचाई जल के साथ सीधे पौधों की जड़ों तक उर्वरक पहुँचाना, जिससे उर्वरक की बचत होती है और उत्पादन बढ़ता है।
4. प्रभाव और मूल्यांकन (NITI Aayog व Economic Survey डेटा)
- जल और लागत बचत: जल उपयोग में 20% से 48% की बचत, श्रम लागत में 30% से 40% की कमी, तथा उर्वरक उपयोग में 11% से 19% की कमी।
- उत्पादकता और आय वृद्धि: फसल की पैदावार में 20% से 38% की वृद्धि और किसानों की आय में 10% से 69% तक का सुधार।
- शीर्ष प्रदर्शनकर्ता राज्य (2025-26): महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात और राजस्थान।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| योजना का नाम | प्रति बूंद अधिक फसल (Per Drop More Crop – PDMC) |
| वर्तमान मूल योजना | प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) |
| सब्सिडी दर | छोटे/सीमांत किसान: 55%, अन्य: 45% (अधिकतम 5 हेक्टेयर) |
| कुल आच्छादित क्षेत्र | 115 लाख हेक्टेयर (शुद्ध बोए गए क्षेत्र का ~8.11%) |