1 September 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत स्थायी कृषि और जैव-अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वाले ‘ग्रीन फोर्ज’ परिसर और BioE3 नीति, सेवा क्षेत्र की वास्तविक वृद्धि दरों को मापने हेतु सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP – जून 2026), अपशिष्ट प्रबंधन और स्वच्छता के क्षेत्र में मिसाल बने ‘मिशन ज़ीरो’ (देपालपुर मॉडल), काकेशस क्षेत्र में भारत की कूटनीतिक पकड़ मजबूत करने वाली भारत-आर्मेनिया द्विपक्षीय बैठक, सोन नदी जल बंटवारा समझौता (बिहार और झारखंड), लक्षद्वीप क्षेत्र में आजीविका व समुद्री पारिस्थितिकी को गति देने वाले अगत्ती मत्स्य आउटरीच कार्यक्रम और मिशन रंगीन मछली 2031, UPI के उज़्बेकिस्तान में विस्तार (NIPL व NIPC समझौता) का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
‘ग्रीन फोर्ज’ परिसर और BioE3 नीति: कृषि-बायोटेक में भारत की नई क्रांति
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्त्व की वैज्ञानिक घटनाएँ, जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) और जीएम फसलें (GM Crops)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; प्रौद्योगिकी का देशीकरण और नई तकनीकों का विकास; कृषि में जैव प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने पंजाब के मोहाली में ‘राष्ट्रीय कृषि-खाद्य और जैव-विनिर्माणी संस्थान’ (BRIC-NABI) में अपनी तरह के पहले ‘ग्रीन फोर्ज’ परिसर का उद्घाटन किया। यह सुविधा BioE3 (Biotechnology for Economy, Environment and Employment) राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान शुरू की गई। इसे जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फसलों के अनुसंधान और जलवायु-लचीली कृषि के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है।
मुख्य बिंदु: ग्रीन फोर्ज, BioE3 नीति और बायो-इकोनॉमी
1. ‘ग्रीन फोर्ज’ परिसर क्या है?
- नियंत्रित सिमुलेशन: यह एक ऐसी आधुनिक लैब है जहाँ प्रकाश की तीव्रता, आर्द्रता (Humidity) और तापमान को नियंत्रित करके विभिन्न पर्यावरणीय स्थितियाँ बनाई जा सकती हैं।
- जीएम फसलों का परीक्षण: वैज्ञानिक किसी जीएम फसल को खेतों में ले जाने से पहले लैब के भीतर ही यह जाँच सकते हैं कि वह अलग-अलग जलवायु परिस्थितियों में कैसा प्रदर्शन करेगी।
- AI और बायोटेक का संगम: इसमें आर्टिफिशिअल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके फसलों के विकास का सटीक विश्लेषण किया जाएगा, जिससे शोध का समय और लागत दोनों कम होंगे।
2. BioE3 नीति और बायोफैंड्री नेटवर्क
- 22 मैन्युफैक्चरिंग हब: स्टार्टअप्स, एमएसएमई (SME) और शोधकर्ताओं को बढ़ावा देने के लिए 22 विनिर्माण हब विकसित किए जा रहे हैं।
- 8 विशेष बायोफाउंड्री: राष्ट्रीय बायो-फाउंड्री नेटवर्क के तहत 8 विशेषज्ञ सुविधाएं स्थापित की जा रही हैं जो बायोटेक उत्पादों के व्यावसायिक उत्पादन को गति देंगी।

- कार्बन कैप्चर एंड यूटिलाइजेशन (CCU): जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) सीमेंट और स्टील जैसे भारी उद्योगों से निकलने वाले उत्सर्जन को कम करने के लिए लगभग 38 CCU परियोजनाओं का समर्थन कर रहा है।
3. भारत की बायो-इकोनॉमी और कृषि अपशिष्ट प्रबंधन
- बायो-इकोनॉमी का विस्तार: भारत की जैव-अर्थव्यवस्था 10 अरब डॉलर से बढ़कर 200 अरब डॉलर के स्तर पर पहुँच गई है।
- वेस्ट-टू-वेल्थ: BRIC-NABI संस्थान कृषि अवशेषों (Crop Residues) को न्यूट्रास्यूटिकल्स और उच्च मूल्य वाले बायो-मटेरियल्स में बदलने की तकनीक पर काम कर रहा है।
- स्पेस बायोटेक सहयोग: ISRO के साथ मिलकर अंतरिक्ष में जीवन विज्ञान से जुड़े प्रयोग (जैसे मायोजेनेसिस और सायनोबैक्टीरिया वृद्धि) किए जा रहे हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| सुविधा का नाम | ग्रीन फोर्ज परिसर |
| स्थान | BRIC-NABI, मोहाली (पंजाब) |
| मूल नीति/पहल | BioE3 नीति (Biotechnology for Economy, Environment and Employment) |
| तकनीकी विशेषताएं | नियंत्रित पर्यावरण सिमुलेशन, AI इंटीग्रेशन, GM फसल परीक्षण |
| भारत की बायो-इकोनॉमी | 200 बिलियन डॉलर |
सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP) जून 2026: आर्थिक वृद्धि का नया पैमाना
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्त्व की आर्थिक घटनाएँ, भारतीय अर्थव्यवस्था और सांख्यिकी।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था, योजना, संसाधनों को जुटाने, संवृद्धि, विकास और रोज़गार से संबंधित मुद्दे; सेवा क्षेत्र का योगदान।
चर्चा में क्यों?
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने जून 2026 के लिए 19 उप-क्षेत्रों (Sub-sectors) का उप-क्षेत्रीय प्रायोगिक सेवा उत्पादन सूचकांक (Sub-Sectoral Trial Index of Services Production – ISP) जारी किया है। इस सूचकांक का आधार वर्ष (Base Year) 2024–25 तय किया गया है। यह डेटा भारत के सेवा क्षेत्र की मासिक प्रगति को ट्रैक करने में मदद करता है।
मुख्य बिंदु: ISP जून 2026 के प्रमुख निष्कर्ष और संरचना
1. विकास दर के प्रमुख आँकड़े
- व्यापक वृद्धि: कुल 19 उप-क्षेत्रों में से 18 क्षेत्रों में धनात्मक वृद्धि (Positive Growth) दर्ज की गई।
- दोहरे अंकों की वृद्धि (Double-Digit Growth): 19 में से 8 उप-क्षेत्रों ने जून 2025 की तुलना में दोहरे अंकों में वृद्धि दर्ज की।
- एकमात्र गिरावट वाला क्षेत्र: हवाई परिवहन (Air Transport) में -6.0% की नकारात्मक वृद्धि देखी गई।
2. सबसे तेज़ बढ़ने वाले शीर्ष उप-क्षेत्र
- रियल एस्टेट: सबसे अधिक 24.7% की वृद्धि।
- खुदरा व्यापार (Retail Trade): 18.0% की वृद्धि।
- थोक व्यापार (Wholesale Trade): 15.1% की वृद्धि।
- प्रशासनिक एवं सहायता सेवाएँ: 14.4% की वृद्धि।
- IT एवं कंप्यूटर संबंधी सेवाएँ: 13.5% की वृद्धि।
3. प्रयोग के आधार पर प्रकाशन
- MoSPI वर्तमान में इन मासिक आँकड़ों को प्रायोगिक (Trial) आधार पर प्रकाशित कर रहा है।
- इसका उद्देश्य डेटा की गुणवत्ता और स्थिरता की जाँच करना तथा हितधारकों से प्रतिक्रिया (Feedback) प्राप्त करना है।
- रेलवे, बैंकिंग और बीमा जैसे क्षेत्रों के सूचकांक अनंतिम (Provisional) डेटा पर आधारित हैं, जिन्हें वार्षिक आधार पर संशोधित किया जाएगा।
सेवा उत्पादन सूचकांक (ISP): प्रदर्शन तालिका (जून 2026)
| उप-क्षेत्र (Broad Sub-Sector) | ISP जून 2026 | वार्षिक वृद्धि (%) |
| रियल एस्टेट | 119.0 | 24.7% |
| खुदरा व्यापार | 138.0 | 18.0% |
| थोक व्यापार | 122.8 | 15.1% |
| प्रशासनिक व सहायता सेवाएँ | 121.7 | 14.4% |
| IT एवं कंप्यूटर सेवाएँ | 130.8 | 13.5% |
| भंडारण (Warehousing) | 128.3 | 11.8% |
| बैंकिंग | 121.3 | 11.4% |
| आवास एवं भोजन (Accommodation & Food) | 141.2 | 10.2% |
| हवाई परिवहन (Air Transport) | 91.2 | -6.0% |
‘मिशन ज़ीरो’: देपालपुर ने लिगेसी वेस्ट से पाई मुक्ति
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्त्व की समसामयिक घटनाएँ, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, स्वच्छ भारत मिशन।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन; ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management)।
चर्चा में क्यों?
मध्य प्रदेश का देपालपुर नगर परिषद ‘स्वच्छ शहर जोड़ी’ (Swachh Shehar Jodi) पहल के तहत “ज़ीरो लिगेसी वेस्ट” का लक्ष्य हासिल करने वाला देश का पहला शहर बन गया है। इंदौर नगर निगम की देखरेख और मार्गदर्शन में देपालपुर ने 5 वर्षों से जमा 1,250 मीट्रिक टन पुराने कचरे (Legacy Waste) का 100% वैज्ञानिक उपचार किया।
मुख्य बिंदु: स्वच्छ शहर जोड़ी और देपालपुर मॉडल
1. स्वच्छ शहर जोड़ी (Swachh Shehar Jodi) पहल क्या है?
- मॉडल: यह पहल ‘ईच वन टीच वन’ मॉडल पर आधारित 100-दिवसीय मेंटरशिप ढांचा है। इसे स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 (SBM-U 2.0) के तहत ‘स्वच्छता ही सेवा 2025’ के दौरान लॉन्च किया गया था।
- संरचना: इसमें 72 मेंटर शहरों को 200 मेंटी शहरों के साथ जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य सर्वोत्तम प्रथाओं का हस्तांतरण और अपशिष्ट प्रबंधन क्षमता का निर्माण करना है।
- सफलता: इंदौर (मेंटर) और देपालपुर (मेंटी) ने इस जोड़ी के तहत एक साथ काम किया।
2. अपशिष्ट प्रबंधन और लिगेसी वेस्ट प्रोसेसिंग
- 4-बिन पृथक्करण: देपालपुर में डोर-टू-डोर संग्रह और कचरे को 4 श्रेणियों में छांटने की प्रणाली लागू की गई।
- वैज्ञानिक उपचार: 1,250 मीट्रिक टन लिगेसी वेस्ट का साइट पर ही पृथक्करण किया गया:
- पुनर्चक्रण (Recycling): 4.5 टन प्लास्टिक, धातु और कांच को रिसाइकलर्स को बेचा गया।
- आरडीएफ (Refuse Derived Fuel): 50-60 टन RDF को इंदौर के NEPRA प्लांट में प्रोसेस करके सीमेंट कारखानों को सह-प्रसंस्करण (Co-processing) के लिए भेजा गया।

- स्थल का कायाकल्प: कचरे के ढेर वाली जगह को साफ़ करके 200 पौधे लगाए गए और इसे एक हरे-भरे सार्वजनिक स्थल/खेल के मैदान में बदल दिया गया।
3. अन्य संबद्ध पहलें
- सूरजकुंड बावड़ी का पुनरुद्धार: ऐतिहासक बावड़ी का जीर्णोद्धार किया गया।
- प्लास्टिक मुक्त क्षेत्र: शहर में प्लास्टिक-फ्री ज़ोन बनाए गए।
- बस्ती बेमिसाल अभियान: इंदौर द्वारा स्लम बस्तियों के कायाकल्प के लिए चलाया गया जमीनी अभियान।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| पहला ज़ीरो लिगेसी वेस्ट शहर | देपालपुर (मध्य प्रदेश) |
| प्रमुख पहल | स्वच्छ शहर जोड़ी (Swachh Shehar Jodi) |
| मूल योजना | स्वच्छ भारत मिशन – शहरी 2.0 (SBM-U 2.0) |
| मेंटरशिप मॉडल | ‘ईच वन टीच वन’ (72 मेंटर + 200 मेंटी शहर) |
| मंत्रालय | आवास और शहरी मामलों का मंत्रालय (MoHUA) |
| RDF का उपयोग | सीमेंट कारखानों में ईंधन (Co-processing) के रूप में |
भारत-आर्मेनिया द्विपक्षीय बैठक: मध्य एशिया और काकेशस क्षेत्र में नई साझेदारी
- प्रारंभिक परीक्षा: अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की समसामयिक घटनाएँ, वैश्विक मानचित्रण (काकेशस क्षेत्र)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह, भारत के हितों पर विकसित व विकासशील देशों की नीतियों का प्रभाव।
चर्चा में क्यों?
किर्गिज़ गणराज्य के बिश्केक में आयोजित 26वें शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के इतर, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पाशिनयान के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। जून में आर्मेनिया में हुए आम चुनावों के बाद प्रधानमंत्री पाशिनयान के पुनर्नियुक्त होने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली मुलाकात थी।
मुख्य बिंदु: बैठक के प्रमुख आयाम और सहयोग के क्षेत्र
1. द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार
- रक्षा एवं सुरक्षा: दोनों नेताओं ने बढ़ते रक्षा और रणनीतिक सहयोग पर संतोष व्यक्त किया।
- व्यापार एवं आर्थिक क्षेत्र: फार्मास्यूटिकल्स (दवा उद्योग), खनन (Mining), शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में साझेदारी बढ़ाने पर सहमति बनी।
- विशेष सौहार्द: दोनों देशों ने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता जताई।
2. क्षेत्रीय व वैश्विक मुद्दे
- पश्चिम एशिया (West Asia) की स्थिति: प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए निरंतर संवाद (Dialogue) और कूटनीति (Diplomacy) पर जोर दिया।
- आर्मेनिया-अजरबैजान शांति समझौता: प्रधानमंत्री पाशिनयान ने आर्मेनिया-अजरबैजान शांति समझौते के कार्यान्वयन की वर्तमान स्थिति से भारत को अवगत कराया।
भारत-आर्मेनिया संबंध:
| सहयोग क्षेत्र | मुख्य तथ्य / विवरण |
| रणनीतिक स्थान | दक्षिण काकेशस क्षेत्र (भू-राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्त्वपूर्ण) |
| रक्षा निर्यात | भारत आर्मेनिया को पिनाका रॉकेट सिस्टम और आकाश एयर डिफेंस सप्लाई करता है |
| कनेक्टिविटी | अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारा (INSTC) का संभावित मार्ग |
| कूटनीतिक रुख | आर्मेनिया ने कश्मीर मुद्दे पर हमेशा भारत के रुख का समर्थन किया है |
सोन नदी जल बंटवारा समझौता: बिहार और झारखंड के बीच अंतर-राज्यीय जल विवाद का समाधान
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, भारत का भूगोल (नदी प्रणालियाँ), अंतर-राज्यीय जल विवाद।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): संघ एवं राज्यों के कार्य व उत्तरदायित्व, अंतर-राज्यीय संबंध, सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism), अंतर-राज्यीय परिषद।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में बिहार और झारखंड के बीच सोन नदी के पानी के बंटवारे को लेकर एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते ने दोनों राज्यों के बीच लगभग 25 वर्ष पुराने जल विवाद को समाप्त कर दिया है। यह इस वर्ष (2026 में) अंतर-राज्यीय परिषद (Inter-State Council) की पहल पर सुलझाया गया चौथा बड़ा जल विवाद है।
मुख्य बिंदु: सोन नदी जल समझौते और हालिया अंतर-राज्यीय जल विवादों का विश्लेषण
1. बिहार-झारखंड सोन जल समझौता
- प्रभावित क्षेत्र:
- बिहार: भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, अरवल, गया और पटना जिले।
- झारखंड: पलामू, गढ़वा और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र।
- मुख्य लाभ: दोनों राज्यों के लाखों किसानों को सिंचाई का पानी मिलेगा और वृहद ग्रामीण आबादी के लिए पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
- संस्थागत ढांचा: यह समझौता अंतर-राज्यीय परिषद (Inter-State Council) और केंद्रीय गृह मंत्रालय के समन्वय से संभव हुआ।
2. वर्ष 2026 में सुलझे अन्य 3 ऐतिहासिक जल विवाद
- सरदार सरोवर/नर्मदा अवॉर्ड समझौता (7 जुलाई 2026): महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश के बीच लागत-साझाकरण (Cost-sharing) के बकाया भुगतानों का एकमुश्त समाधान (One-time Settlement) हुआ।
- यमुना जल परियोजना (29 जून 2026): राजस्थान और हरियाणा के बीच समझौता। इसके तहत पश्चिमी यमुना नहर से 3 भूमिगत पाइपलाइनों के माध्यम से लगभग 580 MCM पानी राजस्थान के शुष्क क्षेत्रों में भेजा जाएगा (1994 के ऊपरी यमुना बेसिन समझौते के तहत)।
- किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना (16 जून 2026): 6 राज्यों (हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, यूपी, हरियाणा और राजस्थान) के बीच सहमति बनी।
- जल घटक की 90% फंडिंग केंद्र सरकार देगी, जबकि 10% राज्य देंगे।
- हिमाचल प्रदेश अपना आवंटित जल बिजली घटक की लागत साझा करने के एवज में दिल्ली और राजस्थान को देगा।
वर्ष 2026 के प्रमुख अंतर-राज्यीय जल समझौते
| समझौता / परियोजना | सहभागी राज्य | मुख्य उद्देश्य / समाधान |
| सोन नदी जल समझौता | बिहार और झारखंड | 25 साल पुराने विवाद का अंत; सिंचाई व पेयजल आपूर्ति |
| नर्मदा अवॉर्ड settlement | महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, MP | सरदार सरोवर परियोजना बकाया लागत का एकमुश्त समाधान |
| यमुना जल परियोजना | राजस्थान और हरियाणा | 580 MCM पानी भूमिगत पाइपलाइन से राजस्थान भेजना |
| किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना | HP, UK, दिल्ली, UP, HR, राजस्थान | 90:10 केंद्र-राज्य फंडिंग पैटर्न पर जल व ऊर्जा बंटवारा |
ब्लू इकोनॉमी को बढ़ावा: अगत्ती में मत्स्य आउटरीच कार्यक्रम और मिशन रंगीन मछली 2031
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत का भूगोल (द्वीप और EEZ), पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, आर्थिक विकास।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): ब्लू इकोनॉमी, मत्स्य पालन व पशुपालन क्षेत्र, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता।
चर्चा में क्यों?
भारत के उपराष्ट्रपति ने लक्षद्वीप के अगत्ती (Agatti) द्वीप में आयोजित राष्ट्रीय ‘मत्स्य आउटरीच कार्यक्रम’ में शिरकत की। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लक्षद्वीप के समृद्ध समुद्री संसाधनों, विशेषकर टुना मछली और सीवीड के सतत दोहन के माध्यम से नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy) को मजबूती प्रदान करना था। इसी अवसर पर केंद्र सरकार ने देश भर में सजावटी मत्स्य पालन को बढ़ावा देने और मछुआरों की आय में वृद्धि करने के लिए ‘मिशन रंगीन मछली 2031’ रणनीतिक कार्य योजना भी औपचारिक रूप से जारी की।
मुख्य बिंदु: लक्षद्वीप, ब्लू इकोनॉमी और नई नीतियां
1. लक्षद्वीप का रणनीतिक महत्त्व और संसाधन
- EEZ का विशाल क्षेत्र: लक्षद्वीप का स्थल क्षेत्र भले ही छोटा हो, लेकिन इसका लगून क्षेत्र 4,200 वर्ग किमी है। इसका अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) लगभग 4 लाख वर्ग किमी है (भारत के कुल EEZ का 17%)।
- टुना मछली क्षमता: लक्षद्वीप की अनुमानित मत्स्य क्षमता 1 लाख टन से अधिक है, जिसमें 94,000 टन केवल टुना (मुख्यतः Yellowfin और Skipjack Tuna) है।
- वर्तमान दोहन vs क्षमता: 1 लाख टन क्षमता के मुकाबले वर्तमान में केवल 15,000 मीट्रिक टन का ही दोहन हो पा रहा है।
2. प्रमुख घोषणाएं एवं स्वीकृत परियोजनाएं
- PMMSY के तहत फंड: लक्षद्वीप के लिए 62 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।
- गहरे समुद्र में मछली पकड़ने वाले जहाज (DSFVs): पारंपरिक मछुआरों के लिए 1.2 करोड़ रुपये प्रति जहाज की लागत वाले 16 गहरे समुद्री जहाजों (Deep-Sea Fishing Vessels) को मंजूरी दी गई।
- सीवीड क्लस्टर: लक्षद्वीप को सीवीड क्लस्टर के रूप में अधिसूचित किया गया है। ICAR-CMFRI के सहयोग से एक ‘सीवीड बैंक’ स्वीकृत हुआ है, जिससे महिलाओं और स्व-सहायता समूहों को रोज़गार मिलेगा।
- सजावटी मत्स्य पालन (Ornamental Fisheries): अगत्ती में एक सजावटी मछली हैचरी की स्थापना की गई है।
3. नए नियम और भारत का मत्स्य उत्पादन
- नए दिशा-निर्देश (2025): सरकार ने EEZ और हाई सी (High Seas) में सतत मत्स्य दोहन के लिए EEZ नियम 2025 और हाई सी दिशानिर्देश 2025 लागू किए हैं।

- राष्ट्रीय उत्पादन एवं निर्यात (2024-26): भारत का मछली उत्पादन 2013-14 के 95.7 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में 197.75 लाख टन हो गया। वर्ष 2025-26 में सीफूड निर्यात 73,890 करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा।
समुद्री संसाधन:
| मापदंड / सूचकांक | राष्ट्रीय स्तर | लक्षद्वीप द्वीप समूह |
| तटरेखा (Coastline) | लगभग 11,099 किमी | द्वीपीय संरचना |
| अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) | लगभग 24 लाख वर्ग किमी | लगभग 4 लाख वर्ग किमी (~17%) |
| मत्स्य क्षमता (Potential) | 58.6 लाख मीट्रिक टन | > 1 लाख मीट्रिक टन |
| मुख्य प्रजातियाँ | वाणिज्यिक और तटीय प्रजातियाँ | येलोफिन व स्किपजैक टुना, सजावटी मछलियाँ |
UPI का उज़्बेकिस्तान में विस्तार: NIPL और NIPC के बीच समझौता
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की समसामयिक घटनाएँ, आर्थिक और सामाजिक विकास, डिजिटल बैंकिंग व भुगतान प्रणाली।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह, भारत के हित; भारतीय अर्थव्यवस्था (इलेक्ट्रॉनिक फंड ट्रांसफर, फिनटेक और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर)।
चर्चा में क्यों?
NPCI की अंतर्राष्ट्रीय शाखा NPCI International Payments Ltd. (NIPL) और उज़्बेकिस्तान के National Interbank Processing Centre JSC (NIPC – HUMO ऑपरेटर) के बीच 30 अगस्त 2026 को एक व्यावसायिक समझौता हुआ। इस साझेदारी के बाद अब भारतीय पर्यटक, व्यवसायी और छात्र उज़्बेकिस्तान के राष्ट्रीय क्यूआर कोड UZQR को अपने UPI ऐप से स्कैन करके आसानी से मर्चेंट भुगतान कर सकेंगे। यह घोषणा भारतीय प्रधानमंत्री की उज़्बेकिस्तान की द्विपक्षीय यात्रा के दौरान की गई।
मुख्य बिंदु: समझौते के प्रमुख पहलू और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर
1. अंतर्राष्ट्रीय मर्चेंट स्वीकृति
- सर्वव्यापी पहुँच: उज़्बेकिस्तान के सेंट्रल बैंक (CBU) द्वारा अनिवार्य Unified National QR इंफ्रास्ट्रक्चर (UZQR) से एकीकरण के बाद UPI यूज़र्स को खुदरा (retail), आतिथ्य (hospitality) और सेवा क्षेत्रों में तुरंत भुगतान की सुविधा मिलेगी।
- नियामक मंज़ूरी: इस समझौते को भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और सेंट्रल बैंक ऑफ उज़्बेकिस्तान (CBU) से औपचारिक मंज़ूरी मिल चुकी है। CBU ने ‘HUMO’ को NIPL का अधिकृत भागीदार घोषित किया है।
2. भारतीय यात्रियों और अर्थव्यवस्था के लिए लाभ
- कैशलेस यात्रा: भारतीय यात्री अपने भारतीय बैंक खाते से सीधे Person-to-Merchant (P2M) भुगतान कर सकेंगे।
- मुद्रा विनिमय झंझट से मुक्ति: इससे फॉरेन एक्सचेंज मार्कअप (Forex Markup) और कैश/अंतर्राष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड पर निर्भरता पूरी तरह समाप्त होगी।
- द्विपक्षीय संबंध: यह समझौता भारत और उज़्बेकिस्तान के बीच डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) में सहयोग को नई दिशा देगा।
UPI की वैश्विक उपस्थिति
वर्तमान में उज़्बेकिस्तान से पहले विश्व के 10 देशों में UPI भुगतान पहले से स्वीकृत है:
- सिंगापुर
- संयुक्त अरब अमीरात (UAE)
- फ्रांस
- मॉरीशस
- नेपाल
- भूटान
- कतर
- श्रीलंका
- कंबोडिया
- ग्रीस
(उज़्बेकिस्तान इस सूची में जुड़ने वाला नया मध्य एशियाई देश बन गया है।)
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| भारतीय एजेंसी | NPCI International Payments Ltd. (NIPL) |
| उज़्बेकिस्तान भागीदार | NIPC (HUMO पेमेंट सिस्टम ऑपरेटर) |
| क्यूआर कोड नाम | UZQR (उज़्बेकिस्तान का राष्ट्रीय इंटरऑपरेबल QR) |
| नियामक निकाय | RBI (भारत) और CBU (सेंट्रल बैंक ऑफ उज़्बेकिस्तान) |
| भुगतान का प्रकार | P2M (Person-to-Merchant) |