2 September 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत वैश्विक परमाणु जोखिम को कम करने वाली सेमीपलाटिंस्क संधि (अंतर्राष्ट्रीय परमाणु परीक्षण विरोधी दिवस और CANWFZ), क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने वाले 26वें SCO शिखर सम्मेलन 2026 (बिश्केक घोषणापत्र एवं भारत का दृष्टिकोण), जलवायु कार्रवाई को गति प्रदान करने वाले चतुर्थ भारत-जर्मनी पर्यावरण मंच 2026 (द्विपक्षीय जलवायु सहयोग एवं आर्द्रभूमि समझौता, कृषि उत्पादकता और किसानों की आय बढ़ाने हेतु प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PM-DDKY) की प्रगति समीक्षा, सार्वजनिक प्रशासन में नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने हेतु राजधर्म और सुशासन (EPFO अधिकारियों के लिए नैतिक ढांचा), तथा वरिष्ठ नागरिकों व युवाओं के बीच सामाजिक समरसता के लिए सामाजिक न्याय मंत्रालय और रामकृष्ण मिशन के बीच MoU का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
सेमीपलाटिंस्क संधि: अंतर्राष्ट्रीय परमाणु परीक्षण विरोधी दिवस और CANWFZ
- प्रारंभिक परीक्षा: अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की समसामयिक घटनाएँ, अंतर्राष्ट्रीय संधियाँ व संगठन।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): अंतर्राष्ट्रीय संबंध, द्विपक्षीय और क्षेत्रीय समूह, विश्व शांति एवं निरस्त्रीकरण (Disarmament) संधियाँ।
चर्चा में क्यों?
29 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित ‘अंतर्राष्ट्रीय परमाणु परीक्षण विरोधी दिवस’ (International Day Against Nuclear Tests) के अवसर पर सेमीपलाटिंस्क संधि चर्चा में रही। वर्ष 2026 में 8 सितंबर को इस ऐतिहासिक संधि के हस्ताक्षर की 20वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है।
सेमीपलाटिंस्क संधि (CANWFZ) के मुख्य पहलू
1. क्या है यह संधि?
- आधिकारिक नाम: ‘मध्य एशियाई परमाणु-हथियार-मुक्त क्षेत्र संधि’ (CANWFZ – Central Asian Nuclear-Weapon-Free Zone Treaty)।
- हस्ताक्षर एवं लागू होना: इस संधि पर 8 सितंबर 2006 को कज़ाकिस्तान के सेमीपलाटिंस्क (अब सेमे) में हस्ताक्षर किए गए थे और यह 21 मार्च 2009 को लागू हुई।
- हस्ताक्षरकर्ता देश (5 मध्य एशियाई राष्ट्र): कज़ाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज़्बेकिस्तान।
2. संधि का मुख्य उद्देश्य
- यह संधि कानूनी रूप से सभी पांचों सदस्य देशों को परमाणु हथियारों के विकास, परीक्षण, निर्माण, अधिग्रहण, संचयन या अपने क्षेत्र में परमाणु हथियारों की तैनाती पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए बाध्य करती है।
3. संधि की अनोखी संरचनात्मक विशेषताएं
- उत्तरी गोलार्द्ध में पहला क्षेत्र: यह पूर्ण रूप से उत्तरी गोलार्द्ध (Northern Hemisphere) में स्थापित पहला परमाणु-हथियार-मुक्त क्षेत्र (NWFZ) है।
- परमाणु इतिहास से ग्रस्त क्षेत्र: यह एकमात्र ऐसा क्षेत्र है जहाँ पूर्व में 456 सोवियत परमाणु परीक्षण हुए थे और भारी मात्रा में सैन्य यूरेनियम खनन हुआ था।
- IAEA अतिरिक्त प्रोटोकॉल अनिवार्य: यह पहली ऐसी संधि है जो अपने सदस्यों को नागरिक सुरक्षा संपत्तियों के लिए IAEA (अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) के ‘अतिरिक्त प्रोटोकॉल’ को लागू करने के लिए कानूनी रूप से बाध्य करती है।
- दो परमाणु शक्तियों से सीमा: यह क्षेत्र दो सक्रिय परमाणु-सशस्त्र राज्यों (रूस और चीन) के साथ अपनी भूमि सीमा साझा करता है।
29 अगस्त: अंतर्राष्ट्रीय परमाणु परीक्षण विरोधी दिवस
| पहलू | विवरण |
| प्रारंभकर्ता | कज़ाकिस्तान के प्रस्ताव पर संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा 2009 में घोषित। |
| महत्व | 29 अगस्त 1991 को कज़ाकिस्तान में सोवियत संघ के सेमीपलाटिंस्क परमाणु परीक्षण स्थल को आधिकारिक रूप से बंद किया गया था। |
| उद्देश्य | परमाणु हथियारों के परीक्षणों के हानिकारक प्रभावों के प्रति जागरूकता फैलाना और वैश्विक निरस्त्रीकरण को बढ़ावा देना। |
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| संधि का स्थान | सेमे (पूर्व नाम- सेमीपलाटिंस्क), कज़ाकिस्तान |
| सदस्य देश | 5 मध्य एशियाई देश (C5: कज़ाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, उज़्बेकिस्तान) |
| 2026 अध्यक्षता | कज़ाकिस्तान (CANWFZ की घूर्णी अध्यक्षता) |
| वैश्विक स्थिति | उत्तरी गोलार्द्ध का पहला परमाणु-मुक्त क्षेत्र |
| संबंधित अन्य संधि | CTBT (व्यापक परमाणु-परीक्षण-प्रतिबंध संधि – 1996) |
26वां SCO शिखर सम्मेलन 2026: बिश्केक घोषणापत्र एवं भारत का दृष्टिकोण
- प्रारंभिक परीक्षा: अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की समसामयिक घटनाएँ, अंतर्राष्ट्रीय संगठन (SCO)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह, भारत के हित एवं प्रभाव, अंतर्राष्ट्रीय संबंध।
चर्चा में क्यों?
भारतीय प्रधानमंत्री ने 31 अगस्त से 1 सितंबर 2026 के दौरान बिश्केक (किर्गिज़ गणराज्य) में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के राष्ट्राध्यक्षों की परिषद की 26वीं बैठक में भाग लिया। वर्ष 2026 में SCO की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ मनाई गई। इस अवसर पर सदस्य देशों ने अगले 25 वर्षों के लिए क्षेत्रीय शांति, सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि का रोडमैप तैयार किया।
मुख्य बिंदु: सम्मेलन के प्रमुख पहलू और भारत का पक्ष
1. सुरक्षा और आतंकवाद पर सख्त रुख
- ‘सुरक्षा, कनेक्टिविटी और अवसर’ का विज़न: भारत ने अपने तीन मुख्य स्तंभों—Security, Connectivity, and Opportunity को रेखांकित किया।
- दोहरे मापदंड का विरोध: प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि आतंकवाद से लड़ाई में किसी भी प्रकार का दोहरा मापदंड (Double Standards) स्वीकार्य नहीं है।
- आतंकी पारिस्थितिकी तंत्र का अंत: आतंकी वित्तपोषण, कट्टरपंथ, भर्ती और सुरक्षित ठिकानों (Safe Havens) को पूरी तरह समाप्त करने का आह्वान किया।
- संवाद और कूटनीति: भारत ने दोहराया कि संघर्षों का समाधान युद्ध के मैदान में नहीं, बल्कि केवल कूटनीति और निरंतर वार्ता के माध्यम से संभव है।
2. संप्रभुता-आधारित कनेक्टिविटी और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर
- क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान: भारत ने उन कनेक्टिविटी पहलों का समर्थन किया जो व्यापार और बाज़ारों को जोड़ती हैं, बशर्ते वे सदस्य देशों की संप्रभुता (Sovereignty) और क्षेत्रीय अखंडता (Territorial Integrity) का सम्मान करें।
- युवा और नवाचार: किर्गिज़स्तान की अध्यक्षता में प्रौद्योगिकी, स्टार्ट-अप्स, उद्यमिता और युवा जुड़ाव पर विशेष बल दिया गया।
3. सांस्कृतिक विनिमय और भारत की प्रमुख पहलें
- SCO सभ्यतागत संवाद मंच (Civilisation Dialogue Forum): भारत इस वर्ष के अंत में इसके प्रथम संस्करण की मेज़बानी करेगा।
- भारत द्वारा समर्थित अन्य पहलें:
- SCO चार्टर में अंग्रेज़ी को आधिकारिक भाषा के रूप में शामिल करना।
- यंग साइंटिस्ट फोरम।
- यंग ऑथर्स कॉन्क्लेव।
सम्मेलन के प्रमुख परिणाम
- बिश्केक घोषणापत्र: सभी प्रमुख निर्णयों को शामिल करते हुए अंगीकृत किया गया।
- दस्तावेज़ एवं समझौते: जलवायु परिवर्तन, परमाणु सुरक्षा, ऊर्जा संरक्षण और नशीली दवाओं की रोकथाम जैसे क्षेत्रों में 4 समझौता ज्ञापनों (MoUs) तथा 20 से अधिक निर्णयों/वक्तव्यों को मंज़ूरी दी गई।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजन तिथि एवं स्थान | 31 अगस्त – 1 सितंबर 2026, बिश्केक (किर्गिज़स्तान) |
| आयोजन की विशेषता | SCO स्थापना की 25वीं वर्षगांठ |
| SCO का मुख्य अंग | काउंसिल ऑफ हेड्स ऑफ स्टेट (सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था) |
| मुख्यालय / सचिवालय | बीजिंग (चीन) |
| आतंकवाद विरोधी संस्था | RATS (Regional Anti-Terrorist Structure) – ताशकंद (उज़्बेकिस्तान) |
चतुर्थ भारत-जर्मनी पर्यावरण मंच 2026: द्विपक्षीय जलवायु सहयोग एवं आर्द्रभूमि समझौता
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की समसामयिक घटनाएँ, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): द्विपक्षीय और क्षेत्रीय समूह/समझौते (भारत-जर्मनी), पर्यावरण संरक्षण, अक्षय ऊर्जा, सर्कुलर इकोनॉमी एवं सतत विकास।
चर्चा में क्यों?
नई दिल्ली में चौथे भारत-जर्मनी पर्यावरण मंच (4th Indo-German Environment Forum – IGEF) का आयोजन किया गया। इस बैठक की सह-अध्यक्षता भारत के केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और जर्मनी के पर्यावरण मंत्री कार्सटन श्नाइडर ने की। इस मंच का मुख्य विषय “Together For More Resilience” (अधिक लचीलेपन के लिए एक साथ) था। इस वर्ष भारत और जर्मनी अपने राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष भी पूरे कर रहे हैं।
मुख्य बिंदु: मंच के प्रमुख पहलू और महत्वपूर्ण समझौते
1. आर्द्रभूमि संरक्षण पर संयुक्त घोषणा पत्र (JDI on Wetlands)
- समझौते पर हस्ताक्षर: दोनों देशों ने अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की आर्द्रभूमियों (Wetlands) के संरक्षण और विवेकपूर्ण उपयोग के लिए एक संयुक्त घोषणा पत्र (Joint Declaration of Intent – JDI) पर हस्ताक्षर किए।
- प्रमुख उद्देश्य: वैज्ञानिक समझ को मजबूत करना, आर्द्रभूमि प्रबंधन में सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना, पारिस्थिकी पुनर्परिवर्तन (Restoration) के तरीके विकसित करना और स्थानीय समुदायों की भागीदारी बढ़ाना।
2. सर्कुलर इकोनॉमी और आर्थिक क्षमता
- 2 ट्रिलियन का अवसर: भारत में सर्कुलर इकोनॉमी के तहत वर्ष 2050 तक 2 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर का बाज़ार मूल्य विकसित करने और 1 करोड़ (10 मिलियन) रोज़गार सृजित करने की क्षमता है।
- G20 पहल का उल्लेख: भारत की G20 अध्यक्षता के दौरान स्थापित ‘संसाधन दक्षता एवं सर्कुलर इकोनॉमी उद्योग गठबंधन’ (RECEIC) की सराहना की गई।
3. भारी उद्योगों का डीकार्बोनाइजेशन
- औद्योगिक परिवर्तन: दोनों देशों ने स्टील, सीमेंट और रसायन जैसे ऊर्जा-गहन भारी उद्योगों में कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए हरित हाइड्रोजन, नई तकनीकों और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग पर बल दिया।
4. हरित संक्रमण में व्यापारिक सहयोग
- इंडो-जर्मन बिजनेस फोरम: पर्यावरण मंच के दौरान अक्षय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण, ग्रीन हाइड्रोजन, टिकाऊ निर्माण (Sustainable Manufacturing) और हरित कौशल में द्विपक्षीय निवेश बढ़ाने पर चर्चा हुई।

मंच की संरचना एवं कार्य समूह
- स्थापना: IGEF भारत और जर्मनी के बीच पर्यावरण नीति पर सर्वोच्च द्विपक्षीय मंच है, जिसकी शुरुआत वर्ष 2008 में हुई थी।
- आयोजक निकाय: भारत का पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) और जर्मनी का BMUKN, FICCI तथा जर्मन व्यवसाय की एशिया-प्रशांत समिति (APA) के सहयोग से।
- सक्रिय संयुक्त कार्य समूह (Joint Working Groups):
- जलवायु परिवर्तन (Climate Change)
- जैव विविधता (Biodiversity)
- सर्कुलर इकोनॉमी
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| मंच का नाम | 4th Indo-German Environment Forum (IGEF) 2026 |
| आयोजन का विषय (Theme) | Together For More Resilience |
| नया द्विपक्षीय समझौता | JDI on Conservation and Wise Use of Wetlands |
| सर्कुलर इकोनॉमी लक्ष्य | 2050 तक 2 Trillion बाज़ार मूल्य एवं 10 Million नए जॉब्स |
| द्विपक्षीय संबंधों का मील का पत्थर | भारत-जर्मनी रणनीतिक एवं राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष |
| IGEF की शुरुआत | वर्ष 2008 |
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PM-DDKY): प्रगति समीक्षा एवं प्रमुख निष्कर्ष
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्त्व की समसामयिक घटनाएँ, कृषि, सरकारी योजनाएँ एवं नीतियाँ।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था एवं कृषि से संबंधित मुद्दे, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता, मुख्य फसलें, सिंचाई प्रणाली, कृषि ऋण और अभिसरण (Convergence) नीतियाँ।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली के कृषि भवन में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PM-DDKY) की प्रगति की समीक्षा की। अक्टूबर 2026 में यह योजना अपने क्रियान्वयन का 1 वर्ष पूरा करने जा रही है। समीक्षा में देखा गया कि चिन्हित 100 जिलों का औसत प्रदर्शन स्कोर अप्रैल 2026 के 22.54 से बढ़कर जुलाई 2026 में 38.85 हो गया है।
मुख्य बिंदु: योजना का क्रियान्वयन और प्रगति
1. योजना का उद्देश्य और आधार
- चयनित जिले: कम कृषि उत्पादकता, कम फसल सघनता (Cropping Intensity) और कम कृषि ऋण वितरण वाले 100 पिछड़े जिलों को इसमें शामिल किया गया है।
- 6 मुख्य स्तंभ:
- कृषि उत्पादकता में वृद्धि।
- फसल विविधीकरण एवं टिकाऊ कृषि।
- कटाई-बाद (Post-harvest) भंडारण क्षमता का विकास।
- सिंचाई अवसंरचना में सुधार।
- अल्पकालिक व दीर्घकालिक कृषि ऋण तक पहुँच।
- सुशासन एवं सेवा वितरण।
2. 36 योजनाओं का अभिसरण
- मंत्रालयी समन्वय: 11 मंत्रालयों व विभागों की 36 केंद्रीय योजनाओं, राज्य योजनाओं और निजी क्षेत्र की पहलों का एकीकरण।
- CSR भागीदारी: सार्वजनिक उद्यम विभाग ने CPSEs द्वारा 2026-27 और 2027-28 के लिए CSR गतिविधियों हेतु धन-धान्य जिलों को गोद लेने की व्यवस्था की है।
3. डेटा-आधारित निगरानी ढांचा
- इंडिकेटर्स: कुल 121 इंडिकेटर्स (74 आउटपुट और 47 आउटकम) के माध्यम से डैशबोर्ड पर ट्रैकिंग।
- डैशबोर्ड मॉड्यूल्स: 31 अगस्त 2026 को ‘वित्तीय प्रगति मॉड्यूल’ शुरू किया गया, जबकि ‘लाभार्थी प्रगति मॉड्यूल’ सितंबर 2026 के मध्य तक लागू होगा।
- जिला कार्य योजना: सभी 100 जिलों ने अपनी ‘डिस्ट्रिक्ट एक्शन प्लान’ (DAP) अपलोड कर दी है।
4. क्षमता निर्माण एवं विस्तार सेवाएँ
- जनवरी से जुलाई 2026 तक 6.9 लाख से अधिक किसानों और 88,961 विस्तार कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित किया गया।
- प्राकृतिक खेती (Natural Farming) में 2.2 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण मिला।
- कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) इस योजना में तकनीकी भागीदार (Technical Partners) के रूप में कार्य कर रहे हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| योजना का नाम | प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना (PM-DDKY) |
| मंत्रालय | कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय |
| कैबिनेट स्वीकृति एवं लॉन्च | स्वीकृति: 16 जुलाई 2025 | औपचारिक शुभारंभ: 11 अक्टूबर 2025 |
| कवरेज | देश के 100 कृषि-पिछड़े जिले |
| अभिसरण (Convergence) | 11 मंत्रालयों की 36 योजनाएँ |
| निगरानी मानक | 121 इंडिकेटर्स (74 आउटपुट + 47 आउटकम) |
राजधर्म और सुशासन: EPFO अधिकारियों के लिए मार्गदर्शन एवं नैतिक ढांचा
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएँ, सुशासन (Governance), संवैधानिक एवं प्रशासनिक मूल्य।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 4): शासन व्यवस्था, पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रशासन, नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण (Citizen-Centric Governance)। लोक प्रशासन में मानवीय मूल्य, राजधर्म, सत्यनिष्ठा (Integrity), सहानुभूति (Empathy), लोक सेवकों की निष्पक्षता और गैर-भेदभाव।
चर्चा में क्यों?
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) द्वारा पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी (PDUNASS) के तत्त्वावधान में “Reimagining Governance: Discourse for Excellence (RGDE)” सत्र आयोजित किया गया। इस व्याख्यान में केरल के राज्यपाल श्री आरिफ मोहम्मद खान ने सार्वजनिक पदों पर आसीन अधिकारियों के लिए ‘राजधर्म’ को एक निरंतर चलने वाली नैतिक जिम्मेदारी बताया।
मुख्य बिंदु: राजधर्म, सामाजिक सुरक्षा और समकालीन शासन
1. राजधर्म की अवधारणा और लोक सेवक का आचरण
- सार्वजनिक सत्ता की जिम्मेदारी: राजधर्म का मुख्य ध्येय सार्वजनिक अधिकारों का नैतिक और निष्पक्ष उपयोग है। अधिकार केवल शासन जताने के लिए नहीं, बल्कि सेवा भाव के लिए हैं।
- आंतरिक अनुशासन: अधिकारी का व्यवहार सत्यनिष्ठा, ईमानदारी, आत्म-संयम और इस भावना से संचालित होना चाहिए कि प्रशासनिक पदों के नैतिक आयाम होते हैं।
- गैर-भेदभाव: लोक जीवन में बिना किसी भेदभाव के हर नागरिक के साथ निष्पक्ष और गरिमापूर्ण व्यवहार सुनिश्चित करना अनिवार्य है।
2. प्रौद्योगिकी और मानवीय मूल्यों में संतुलन
- सिस्टम बनाम मानवीय मूल्य: नियम, तकनीक और प्रणालियाँ सहायक उपकरण मात्र हैं। वे उस मानवीय सहानुभूति का स्थान नहीं ले सकते जो किसी नागरिक के प्रशासनिक अनुभव को तय करती है।
- सहानुभूतिपूर्ण निर्णय: दैनिक प्रशासनिक निर्णयों में नियमों के पालन के साथ-साथ नागरिकों की व्यावहारिक समस्याओं के प्रति संवेदनशीलता होना आवश्यक है।
3. सामाजिक सुरक्षा के संदर्भ में राजधर्म
- EPFO की भूमिका: लाखों श्रमिकों, पेंशनभोगियों और उनके परिवारों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने में कानूनी अनुपालन के साथ-साथ नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण की आवश्यकता है।
- निःस्वार्थ सेवा: पेंशन, दावों (Claims) और शिकायतों के निपटारे में मानवीय दृष्टिकोण अपनाना ही सच्चा राजधर्म है।
4. सभ्यतागत ज्ञान और आधुनिक प्रशासन
- चित्रकूट का भारत-मिलाप प्रसंग: राम-भरत मिलाप का उदाहरण देते हुए बताया गया कि भगवान राम द्वारा भरत को चरण पादुका सौंपना और दिया गया उपदेश आज भी धर्मपरायण राज्य-व्यवस्था (Righteous Statecraft) का आधार है।
- RGDE का उद्देश्य: प्राचीन सभ्यतागत ज्ञान, संस्थागत अनुभव और आधुनिक प्रशासनिक प्रथाओं को एक साथ लाकर लोक सेवा को सुदृढ़ बनाना।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| कार्यक्रम का नाम | Reimagining Governance: Discourse for Excellence (RGDE) |
| आयोजक संस्था | EPFO एवं PDUNASS |
| PDUNASS का पूर्ण रूप | पंडित दीनदयाल उपाध्याय राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा अकादमी |
| प्रमुख वक्ता | श्री आरिफ मोहम्मद खान |
| संबोधन का मुख्य विषय | राजधर्म, लोक प्रशासन में सत्यनिष्ठा, निष्पक्षता और सहानुभूति |
| सभ्यतागत संदर्भ | रामायण का भारत-मिलाप प्रसंग (चित्रकूट) – धर्मपरायण राज्य-व्यवस्था |
पीढ़ीगत संबंधों को सुदृढ़ बनाना: सामाजिक न्याय मंत्रालय और रामकृष्ण मिशन के बीच MoU
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्त्व की समसामयिक घटनाएँ, सामाजिक न्याय और सरकारी योजनाएँ।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): सामाजिक न्याय, जनसांख्यिकी और वरिष्ठ नागरिकों का कल्याण, संवेदनशील वर्गों के संरक्षण हेतु सरकारी नीतियाँ और हस्तक्षेप।
चर्चा में क्यों?
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग (DoSJE) ने रामकृष्ण मठ एवं रामकृष्ण मिशन (RKM) के साथ एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य देश भर के स्कूलों में ‘अंतर-पीढ़ीगत संबंधों का निर्माण’ (Creating Intergenerational Bonding) नामक राष्ट्रव्यापी पहल को लागू करना है। यह पहल बच्चों, माता-पिता और दादा-दादी/नाना-नानी के बीच भावनात्मक व सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करेगी।
मुख्य बिंदु: पहल की रूपरेखा और व्यावहारिक अनुप्रयोग
1. 200 पायलट स्कूलों में क्रियान्वयन
- पायलट चरण: देश भर के 200 चयनित स्कूलों में इस मॉडल को लागू किया जाएगा।
- सह-शिक्षा खेल (Co-Learning Games): खेल आधारित गतिविधियों और व्यावहारिक अनुभवों के ज़रिए विभिन्न पीढ़ियों के बीच दूरी को कम किया जाएगा।
- द्विभाषी पोर्टल एवं शिक्षक प्रमाणन: शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण देने के साथ-साथ एक द्विभाषी रिसोर्स सेंटर वेबसाइट विकसित की जाएगी।
2. ‘सबका साथ, सबका विकास’ का पीढ़ीगत विस्तार
- वरिष्ठ नागरिकों के अनुभव का लाभ: यह पहल वरिष्ठ नागरिकों को अपने जीवन के अनुभव और नैतिक मूल्य नई पीढ़ी को सौंपने का अवसर देती है।

- सांस्कृतिक जड़ें: बच्चे अपनी परंपराओं से जुड़े रहते हुए भावनात्मक रूप से सुरक्षित महसूस करेंगे, जबकि माता-पिता आधुनिकता और परंपरा के बीच संतुलन बना पाएंगे।
3. मौजूदा वरिष्ठ नागरिक योजनाओं से अभिसरण
- यह पहल मंत्रालय की मौजूदा योजनाओं का पूरक बनेगी, जैसे:
- अटल वयो अभ्युदय योजना (AVYAY): वरिष्ठ नागरिकों के समग्र कल्याण के लिए संचालित योजना।
- एल्डरलाइन (Elderline – 14567): वरिष्ठ नागरिकों के लिए राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन।
संस्थागत भागीदार और उनकी भूमिकाएँ
| संस्था / निकाय | भूमिका और उत्तरदायित्व |
| सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग (DoSJE) | नीतिगत ढांचा, वित्तीय और प्रशासनिक समन्वय |
| रामकृष्ण मठ एवं रामकृष्ण मिशन (RKM) | ज़मीनी क्रियान्वयन (इम्पलीमेंटिंग पार्टनर) |
| नॉलेज डेवलपमेंट पार्टनर | अनुसंधान, सामग्री डिजाइनिंग और प्रभाव का मूल्यांकन |