11 September 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत मध्य गंगा के मैदानी इलाकों में प्राचीन जल चक्र और जलवायु परिवर्तन के अध्ययन हेतु बखीरा झील के तलछट (जल संसाधन प्रबंधन की कुंजी), भारत और मलेशिया के बीच समुद्री सुरक्षा व अंतर-संचालनशीलता को बढ़ावा देने वाले अभ्यास ‘समुद्र लक्ष्मण’ का चौथा संस्करण, विकेंद्रीकृत ऊर्जा उत्पादन को गति देने वाले लघु जलविद्युत क्षेत्र (भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण का आधार), वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था और गगनयान विजन को साझा करने वाले अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन 2026, तथा देश के अनौपचारिक क्षेत्र और रोजगार सृजन की वास्तविक स्थिति दर्शाने वाली असंगठित गैर-कृषि क्षेत्र पर NSO की पहली जिला-स्तरीय रिपोर्ट (ASUSE 2025) का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
बखीरा झील के तलछट: मध्य गंगा मैदान में जल संसाधन प्रबंधन की कुंजी
- प्रारंभिक परीक्षा: पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी (रामसर स्थल, आर्द्रभूमि), भूगोल (मानसूनी प्रणाली, नदियां व भू-आकृति)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 1 & 3): भारत का भौतिक भूगोल (भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून – ISM), जलवायु परिवर्तन, जल संसाधन प्रबंधन, कृषि एवं बाढ़-सूखा न्यूनीकरण।
चर्चा में क्यों?
बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पेलियोसाइंसेज (BSIP), लखनऊ के शोधकर्ताओं ने उत्तर प्रदेश की बखीरा झील के तलछट (Sediments) का विश्लेषण किया है। Palaeogeography, Palaeoclimatology, Palaeoecology पत्रिका में प्रकाशित यह अध्ययन पिछले 25,000 वर्षों के दौरान भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून (ISM) के उतार-चढ़ाव और जलवायु घटनाओं का निरंतर रिकॉर्ड प्रस्तुत करता है।
मुख्य बिंदु: तकनीक, पुराजलवायु घटनाक्रम और महत्व
1. अध्ययन पद्धति और तकनीक
- पर्यावरणीय चुंबकीय गुण: तलछट में जमा चुंबकीय खनिजों का उपयोग कर जल विज्ञान, अपरदन और अपक्षय का अध्ययन किया गया।
- रेडियोकार्बन डेटिंग: 7 एक्सीलेरेटर मास स्पेक्ट्रोमेट्री (AMS) डेटिंग के माध्यम से 25,000 साल पुराने पर्यावरण परिवर्तनों का कालक्रम निर्धारित किया गया।
- मल्टी-प्रॉक्सी विश्लेषण: चुंबकीय गुणों को कण आकार (Grain-size), भू-रसायन और मृदा खनिज रिकॉर्ड के साथ एकीकृत किया गया।
2. चिह्नित प्रमुख ऐतिहासिक जलवायु घटनाएं
- लास्ट ग्लेशियल मैक्सिमम व हेनरिख स्टैडियल 1 (~25.3-18.1 ka BP): अत्यधिक ठंडा व शुष्क मौसम, कमजोर मानसून।
- बौलिंग-एलेरॉड (~15.3-12.8 ka BP): अपेक्षाकृत गर्म और आर्द्र अवधि, मानसून में मजबूती।
- यंगर ड्रायस (~12.8-11.1 ka BP): पुनः शीतलन और शुष्कता का दौर।
- होलोसिन क्लाइमैटिक ऑप्टिमम (~9.2-4 ka BP): गर्म एवं अत्यधिक आर्द्र जलवायु, तीव्र मानसूनी वर्षा।
- उत्तर होलोसिन सूखा (~4-2 ka BP): शुष्क परिस्थितियां और मानसूनी बारिश में कमी।
3. व्यावहारिक और रणनीतिक उपयोगिता
- सटीक मानसून मॉडल: प्राकृतिक जलवायु परिवर्तनशीलता को मानव-जनित जलवायु परिवर्तन से अलग करने में सहायक।

- जल संसाधन प्रबंधन: मध्य गंगा मैदान (CGP) में बाढ़, सूखा प्रबंधन और कृषि नियोजन के लिए डेटाबेस का निर्माण।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| अध्ययन संस्थान | बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पेलियोसाइंसेज (BSIP), लखनऊ (DST का स्वायत्त संस्थान) |
| झील की स्थिति | घाघरा-राप्ती जलोढ़ प्रणाली, संत कबीर नगर जिला (उत्तर प्रदेश) |
| झील का प्रकार | राप्ती नदी के मार्ग बदलने से बनी गोखुर/बाढ़ के मैदान की आर्द्रभूमि (Oxbow Wetland) |
| रामसर स्थल दर्जा | 2022 में अंतर्राष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि घोषित |
| समय अवधि (Timeframe) | 25,000 वर्ष (अंतिम हिमनद अधिकतम/LGM से वर्तमान तक) |
अभ्यास ‘समुद्र लक्ष्मण’ का चौथा संस्करण: भारत और मलेशिया का नौसैनिक अभ्यास
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास (Military Exercises)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): भारत के हितों पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों का प्रभाव, एक्ट ईस्ट पॉलिसी, रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा।
चर्चा में क्यों?
भारतीय नौसेना का निर्देशित मिसाइल विध्वंसक युद्धपोत ‘INS मैसूर’ मलेशिया के लुमुट बंदरगाह पहुंचा। यह पोत रॉयल मलेशियाई नौसेना के साथ द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास ‘समुद्र लक्ष्मण’ के चौथे संस्करण में भाग ले रहा है। इस अभ्यास में बंदरगाह और समुद्री दोनों चरणों के तहत क्रॉस-डेक विजिट, परिचालन बैठकें तथा खेलकूद गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं, जिसका उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता को बेहतर बनाना है। यह यात्रा भारत सरकार के ‘महासागर’ विज़न और ‘आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष 2026’ के रणनीतिक लक्ष्यों के सर्वथा अनुकूल है।
मुख्य बिंदु: अभ्यास के घटक, रणनीतिक महत्व और भारत का दृष्टिकोण
1. अभ्यास के प्रमुख घटक और गतिविधियां
- दो चरणों में आयोजन: यह अभ्यास बंदरगाह चरण (Harbour Phase) और समुद्री चरण (Sea Phase) दोनों में आयोजित किया जा रहा है।
- व्यावसायिक और इंटरऑपरेबिलिटी इंटरैक्शन: इसमें क्रॉस-डेक विजिट, परिचालन बैठकें और खेलकूद प्रतियोगिताएं शामिल हैं, जिनका उद्देश्य दोनों देशों की नौसेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता (Interoperability) को बढ़ावा देना है।
2. द्विपक्षीय संबंध और रक्षा सहयोग
- 12वीं सब-कमेटी बैठक की निरंतरता: 1 जुलाई 2026 को आयोजित ’12वीं भारत-मलेशिया उप-समिति बैठक’ के बाद यह यात्रा दोनों देशों के बीच मजबूत और स्थायी समुद्री साझेदारी को दर्शाती है।
- पेशेवर आदान-प्रदान: यह दौरा दोनों नौसेनाओं के बीच अनुभव साझा करने और रणनीतिक समझ को गहरा करने का एक महत्वपूर्ण मंच है।
3. वैश्विक एवं क्षेत्रीय विज़न
- महासागर विज़न: यह अभ्यास भारत सरकार की पहल MAHASAGAR (Maritime Security and Growth for All in the Region) के रणनीतिक सिद्धांतों के अनुरूप है।
- आसियान-भारत समुद्री सहयोग वर्ष 2026: यह यात्रा वर्ष 2026 में मनाए जा रहे ‘ASEAN-India Year of Maritime Cooperation’ के उद्देश्यों को भी गति प्रदान करती है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| अभ्यास का नाम | ‘समुद्र लक्ष्मण’ – 4वां संस्करण |
| भागीदार देश | भारत और मलेशिया (नौसेना) |
| आयोजन स्थल | लुमुट, मलेशिया |
| भारतीय नौसेना का पोत | INS मैसूर |
| संबद्ध रणनीतिक विज़न | MAHASAGAR विज़न |
लघु जलविद्युत क्षेत्र: भारत के स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण का नया आधार
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत का भूगोल (नदियां व जल संसाधन), नवीकरणीय ऊर्जा, विकास योजनाएं।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): बुनियादी ढांचा: ऊर्जा, नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकी, समावेशी विकास, पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA)।
चर्चा में क्यों?
नई एवं नवीकरणीय ऊर्जा और विद्युत राज्य मंत्री श्री श्रीपाद येसो नाइक ने नई दिल्ली में आयोजित ‘भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो 2026’ के लिए आयोजित कर्टेन रेज़र कार्यक्रम को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने घोषणा की कि 2 से 5 नवंबर 2026 तक भारत मंडपम में आयोजित होने वाले आगामी एक्सपो में लघु जलविद्युत (Small Hydro Power – SHP) क्षेत्र पर एक विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा।
मुख्य बिंदु: भारत की क्षमता, प्रस्तावित योजना और चुनौतियां
1. भारत में SHP की वर्तमान स्थिति और क्षमता
- संभावित क्षमता: भारत में 7,100 से अधिक चिह्नित स्थलों पर लगभग 21 GW की लघु जलविद्युत क्षमता का आकलन किया गया है।
- दोहन स्थिति: इस कुल क्षमता में से वर्तमान में केवल 5.2 GW का ही दोहन किया जा सका है।
- नवीकरणीय ऊर्जा में मील का पत्थर: भारत ने 300 GW से अधिक स्थापित गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता का आंकड़ा पार कर लिया है।
2. लघु जलविद्युत विकास योजना (2026-27 से 2030-31)
- वित्तीय परिव्यय: सरकार ने इस अवधि के लिए ₹2,584.60 करोड़ के बजट का प्रस्ताव रखा है।
- लक्ष्य: लगभग 1,500 MW की नई लघु जलविद्युत क्षमता जोड़ना।
- DPR तैयारी: राज्यों को लगभग 200 परियोजनाओं की विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि भविष्य के लिए प्रोजेक्ट पाइपलाइन बनाई जा सके।
3. SHP के लाभ और रणनीतिक महत्व
- कम भूमि की आवश्यकता: ‘रन-ऑफ-रिवर’ परियोजनाएं बड़े बांधों की तरह विशाल जलमग्नता (Submergence) और विस्थापन की समस्या पैदा नहीं करती हैं।
- विकेंद्रीकृत विद्युत उत्पादन: यह दूरदराज और कठिन भौगोलिक क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर टिकाऊ बिजली पहुंचाता है।

- स्थानीय रोजगार: पारिस्थितिकी और स्थानीय समुदायों को नुकसान पहुंचाए बिना दूरस्थ क्षेत्रों में स्थानीय उद्यमों और रोजगार को बढ़ावा देता है।
4. प्रमुख चुनौतियां और समाधान
- मंजूरी में देरी: पर्यावरण, वन और राइट-ऑफ-वे मंजूरियों में देरी परियोजना की समयसीमा को प्रभावित करती है। इसके लिए स्वचालित अलर्ट प्रणाली विकसित करने की सिफारिश की गई है।
- लंबे समय की पूंजी (Patient Capital): MNRE सचिव ने जोर दिया कि IREDA को एशियाई विकास बैंक (ADB) और विश्व बैंक के साथ मिलकर लंबे समय के लिए कम ब्याज दर पर पूंजी (Patient Capital) उपलब्ध करानी चाहिए।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| लघु जलविद्युत (SHP) सीमा | भारत में 25 MW तक की जलविद्युत परियोजनाओं को SHP माना जाता है |
| भारत में कुल आकलित क्षमता | ~21 GW (7,100 से अधिक स्थल) |
| वर्तमान में स्थापित क्षमता | ~5.2 GW |
| प्रस्तावित नई योजना परिव्यय | ₹2,584.60 करोड़ (2026-27 से 2030-31) |
| आगामी एक्सपो का आयोजन स्थल | भारत मंडपम, नई दिल्ली (2-5 नवंबर 2026) |
अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन 2026: वैश्विक अंतरिक्ष सहयोग और भारत का रोडमैप
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (अंतरिक्ष क्षेत्र)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): अंतर्राष्ट्रीय संबंध (भारत-फ्रांस संबंध, वैश्विक अभिशासन), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (ISRO के मिशन, अंतरिक्ष का निजीकरण, अंतरिक्ष मलबा और सुरक्षा)।
चर्चा में क्यों?
पेरिस (फ्रांस) में आयोजित पहले अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन (International Space Summit 2026) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से संबोधित किया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के निमंत्रण पर आयोजित इस सम्मेलन में भारत ने सुरक्षित, टिकाऊ और समावेशी अंतरिक्ष खोज के लिए वैश्विक सहयोग का आह्वान किया।
मुख्य बिंदु: वैश्विक दृष्टिकोण, ISRO की उपलब्धियां और भविष्य का रोडमैप
1. वैश्विक अंतरिक्ष अभिशासन के लिए तीन प्रमुख सिद्धांत
- सहयोग बनाम टकराव: पीएम ने टकराव के बजाय सहयोग, अल्पकालिक लाभ के बजाय निरंतरता (Sustainability), और निष्कासन के बजाय समावेशिता (Inclusion) पर जोर दिया।
- वसुधैव कुटुंबकम का विचार: भारत का दृष्टिकोण “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” के विचार से प्रेरित है।
- पारदर्शी अनुसंधान: वैज्ञानिक डेटा का नैतिक और पारदर्शी साझाकरण ताकि इसका लाभ पूरी मानवता को मिल सके।
2. ISRO का वैश्विक योगदान और भारत-फ्रांस साझेदारी
- वैश्विक पेलोड प्रक्षेपण: ISRO ने अब तक 34 देशों के 430 से अधिक पेलोड का सफल प्रक्षेपण किया है।
- ऐतिहासिक भारत-फ्रांस संबंध: 1960 के दशक में थुम्बा से भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत के समय से फ्रांस एक विश्वसनीय साझेदार रहा है। वर्तमान में दोनों देश पृथ्वी अवलोकन और उन्नत प्रौद्योगिकियों में मिलकर काम कर रहे हैं।
- निजी क्षेत्र का समावेश: भारत का स्पेस स्टार्ट-अप इकोसिस्टम अब ISRO के साथ मिलकर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
3. भारत के प्रमुख अंतरिक्ष मिशन और भविष्य के लक्ष्य
- हालिया सफलताएं: चंद्रयान-3 के साथ चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने वाला भारत पहला देश बना। सूर्य के अध्ययन के लिए आदित्य-L1 सक्रिय है और पिछले वर्ष एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री ने ISS (अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन) का दौरा किया।
- 2035 का लक्ष्य: भारत का अपना स्वदेशी अंतरिक्ष स्टेशन (भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन) स्थापित करना।
- 2040 का लक्ष्य: चंद्रमा की सतह पर भारतीय अंतरिक्ष यात्री को भेजना।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजन स्थल | पेरिस, फ्रांस (वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा संबोधन) |
| मेजबान नेता | इमैनुएल मैक्रॉन (राष्ट्रपति, फ्रांस) |
| भारतीय प्रक्षेपण रिकॉर्ड | 34 देशों के 430 से अधिक पेलोड |
| भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन की समयसीमा | वर्ष 2035 तक |
| मानवयुक्त चंद्रमा मिशन की समयसीमा | वर्ष 2040 तक |
असंगठित गैर-कृषि क्षेत्र पर NSO की पहली जिला-स्तरीय रिपोर्ट (ASUSE 2025)
- प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय अर्थव्यवस्था, समावेशी विकास, महिला सशक्तिकरण और रोजगार।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था (असंगठित क्षेत्र, औद्योगिक नीति), उत्पादकता, रोजगार सृजन, एमएसएमई (MSME) और क्षेत्रीय असमानता।
चर्चा में क्यों?
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने पहली बार असंगठित गैर-कृषि क्षेत्र (Unincorporated Non-Agricultural Sector) के लिए जिला-स्तरीय आंकड़े जारी किए हैं। यह डेटा ‘वार्षिक असंगठित क्षेत्र उद्यम सर्वेक्षण 2025’ (ASUSE 2025) पर आधारित है। यह पहल भारत में स्थानीय नीति निर्माण को अधिक सटीक और डेटा-आधारित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
मुख्य बिंदु: आर्थिक संकेंद्रण, उत्पादकता और महिला सहभागिता
1. आर्थिक संकेंद्रण
- शीर्ष 50 जिलों का प्रभाव: भारत के शीर्ष 50 जिले देश के कुल असंगठित प्रतिष्ठानों, कार्यबल और सकल मूल्य संवर्धन (GVA) का लगभग एक-तिहाई (1/3rd) हिस्सा कवर करते हैं।
- शीर्ष 10 जिले: ये जिले देश के कुल असंगठित क्षेत्र की गतिविधियों का 10% हिस्सा संभालते हैं, जो गुजरात, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में फैले हैं।
- बड़े केंद्र: केवल 16 जिलों में 5 लाख से अधिक असंगठित इकाइयां दर्ज की गईं।
2. आर्थिक उत्पादकता (GVA per Worker)
- राष्ट्रीय औसत: असंगठित क्षेत्र में प्रति कार्यकर्ता औसतन GVA ₹1,56,539 है।
- उच्च उत्पादकता वाले जिले: देश के 280 जिलों ने प्रति कार्यकर्ता GVA के मामले में राष्ट्रीय औसत को पार कर लिया है।
- मध्यम वर्ग: लगभग 331 जिलों में प्रति कार्यकर्ता GVA ₹1 लाख से ₹1.5 लाख के बीच है।
3. महिला उद्यमिता और कार्यबल में भागीदारी
- शीर्ष राज्य: महिला नेतृत्व वाले उद्यमों और महिला कार्यकर्ताओं के मामले में तेलंगाना, मणिपुर, मेघालय और मिजोरम सबसे आगे हैं।
- मिजोरम का प्रदर्शन: मिजोरम के हर जिले में 50% से अधिक स्वामित्व वाले प्रतिष्ठान महिलाओं के पास हैं।
- जिला-वार आंकड़े: 237 जिलों में कुल कार्यबल का एक-तिहाई हिस्सा महिलाएं हैं, जबकि 25 जिलों में महिला कार्यबल 50% से अधिक है।
प्रमुख राज्यों के शीर्ष योगदानकर्ता जिले
| राज्य / यूटी | उच्चतम प्रतिष्ठानों वाला जिला | राज्य के भीतर योगदान (%) |
| उत्तर प्रदेश | प्रयागराज | 5.77% |
| महाराष्ट्र | पुणे | 9.14% |
| पश्चिम बंगाल | उत्तर 24 परगना | 15.99% |
| गुजरात | सूरत | 19.43% |
| कर्नाटक | बेंगलुरु (शहरी) | 12.83% |
| बिहार | पटना | 8.23% |
| दिल्ली | डेटा उपलब्ध नहीं (अति-लघु ग्रामीण नमूने के कारण एकल स्ट्रैटम) | — |
सर्वेक्षण पद्धति (ASUSE 2025)
- कवरेज: विनिर्माण (Manufacturing), व्यापार (Trade) और अन्य सेवाओं के असंगठित गैर-कृषि उद्यम।
- स्वामित्व: एकल स्वामित्व (Proprietorship), साझेदारी (Partnerships), और ट्रस्ट/सोसायटी (LLP को छोड़कर)।
- सैंपलिंग डिजाइन: बहु-स्तरीय स्तरीकृत सैंपलिंग। डेटा संग्रह के लिए CAPI (कंप्यूटर-असिस्टेड पर्सनल इंटरव्यूइंग) का उपयोग किया गया।
- भौगोलिक दायरा: ASUSE 2025 के दौरान 770 में से 757 जिलों को कवर किया गया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| जारीकर्ता संस्था | NSO (सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय – MoSPI) |
| मूल सर्वेक्षण | ASUSE 2025 (Annual Survey of Unincorporated Sector Enterprises) |
| राष्ट्रीय औसत GVA प्रति कार्यकर्ता | ₹1,56,539 |
| शीर्ष 50 जिलों का योगदान | कुल GVA, कार्यबल और प्रतिष्ठानों का ~33% |
| महिला नेतृत्व में शीर्ष क्षेत्र | पूर्वोत्तर राज्य (मणिपुर, मेघालय, मिजोरम) और तेलंगाना |