NCERT Notes Class 7 Science Chapter 6: Adolescence: A Stage of Growth and Change के अंतर्गत यौवनारंभ (Puberty) की प्रक्रिया और इसके पीछे जिम्मेदार अंतःस्रावी ग्रंथियों (Endocrine Glands) तथा उनसे स्रावित होने वाले हार्मोन (Hormones) की भूमिका को स्पष्ट करता है। इसमें लंबाई में वृद्धि, शारीरिक बनावट में बदलाव, स्वर में परिवर्तन (Adam’s Apple) और द्वितीयक लैंगिक लक्षण (Secondary Sexual Characters) के विकसित होने की जैविक प्रक्रियाओं का गहन विश्लेषण दिया गया है। इसके अतिरिक्त, किशोरों के लिए संतुलित आहार (Nutritional Needs), व्यक्तिगत स्वच्छता, शारीरिक व्यायाम और नशे की लत से बचाव जैसे प्रजनन स्वास्थ्य (Reproductive Health) एवं सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर भी वैज्ञानिक प्रकाश डालता है।
आयु के साथ वृद्धि – किशोरावस्था के वर्ष (Growing With Age: The Teenage Years)
बाल्यावस्था और प्रौढ़ावस्था के बीच का विकास काल किशोरावस्था (Adolescence) कहलाता है।
- अवधि: यह अवस्था लगभग 10 वर्ष की आयु से शुरू होकर 19 वर्ष की आयु तक चलती है।
- सामान्य पहचान: ऊँचाई में वृद्धि, मूछों का निकलना, और आवाज में बदलाव इसके शुरुआती लक्षण हैं।
शारीरिक बदलावों का अवलोकन
- परिवर्तनों का दायरा: 5वीं से 8वीं कक्षा के दौरान छात्रों में शारीरिक ऊँचाई, वजन, ताकत, रूप-रंग और व्यवहार में स्पष्ट बदलाव देखने को मिलते हैं।
किशोरावस्था के प्रमुख लक्षण (Adolescence: A Stage of Growth and Change)
किशोरावस्था के दौरान शरीर में कई प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष शारीरिक परिवर्तन होते हैं।
1. ऊँचाई में वृद्धि
- जन्म से ही शरीर में निरंतर वृद्धि होती है।
- किशोरावस्था के दौरान लंबाई में यह वृद्धि सबसे अधिक स्पष्ट और तीव्र होती है।
2. शारीरिक बनावट और भार में बदलाव
- लड़कों में बदलाव: लंबाई बढ़ने के साथ वजन बढ़ता है, कंधे चौड़े होते हैं और सीना चौड़ा होता है।
- लड़कियों में बदलाव: ऊँचाई और वजन में वृद्धि के साथ-साथ स्तनों का विकास (Development of breasts) होता है।
3. आवाज में परिवर्तन
- एडम्स एप्पल: लड़कों में स्वरयंत्र (Voice box) का आकार तेजी से बढ़ता है, जो गले में एक उभार के रूप में दिखता है। इसे एडम्स एप्पल कहते हैं।
- आवाज का भारी होना: स्वरयंत्र के अत्यधिक विकास के कारण लड़कों की आवाज भारी या फटी हुई (Hoarse) हो जाती है।

- लड़कियों की आवाज: लड़कियों में स्वरयंत्र का आकार लड़कों जितना बड़ा नहीं होता, इसलिए उनकी आवाज में बहुत मामूली बदलाव होता है।
4. शरीर पर बालों का आना
- सामान्य वृद्धि: लड़कों और लड़कियों दोनों में कांख (Armpits) और जघन क्षेत्र (Pubic region) में बाल उगते हैं।
- लड़कों में विशेष वृद्धि: चेहरे पर दाढ़ी-मूंछें आने लगती हैं। कुछ लड़कों के सीने और पीठ पर भी बाल उग सकते हैं।
- भिन्नता: बालों के उगने का समय और तरीका हर व्यक्ति में अलग हो सकता है, जो पूरी तरह सामान्य है।
5. मुहांसे (Acne and Pimples)
- कारण: किशोरावस्था में त्वचा की तैलीय ग्रंथियों (Sebaceous glands) से स्राव बढ़ जाता है।
- प्रभाव: यह अत्यधिक तेल त्वचा के छिद्रों (Pores) को बंद कर देता है, जिससे संक्रमण और चेहरे पर लाल मुहांसे (Pimples) निकलने लगते हैं।
- अंतर: एक्ने त्वचा की एक स्थिति है, जबकि पिंपल्स उस स्थिति का प्रत्यक्ष लक्षण हैं।
व्यक्तिगत भिन्नता का नियम
- शारीरिक परिवर्तनों (ऊँचाई, आवाज, दाढ़ी-मूंछ) का समय, प्रकृति और सीमा हर व्यक्ति में अलग-अलग होती है।
- किशोरावस्था की गति और अवधि व्यक्तिगत होती है, और यह भिन्नता पूरी तरह से स्वाभाविक और सामान्य है।
द्वितीयक लैंगिक लक्षण और यौवनारंभ
- द्वितीयक लैंगिक लक्षण (Secondary Sexual Characteristics):
- वे लक्षण जो प्रजनन प्रक्रिया में सीधे शामिल नहीं होते, लेकिन नर (पुरुष) और मादा (स्त्री) में बाहरी अंतर स्पष्ट करते हैं।
- उदाहरण: लड़कों में दाढ़ी-मूंछ व सीने के बाल, और लड़कियों में स्तनों का विकास।
- यौवनारंभ (Puberty):
- वह जैविक अवस्था जिसमें किशोर का शरीर वयस्क बनने और प्रजनन योग्य (Capable of reproduction) होने के लिए आंतरिक व बाहरी बदलावों से गुजरता है।
- द्वितीयक लैंगिक लक्षण यौवनारंभ (Puberty) के प्राकृतिक संकेत हैं।
किशोरावस्था में होने वाले परिवर्तनों का त्वरित अवलोकन
| परिवर्तन का प्रकार | लड़कों में लक्षण | लड़कियों में लक्षण |
| स्वरयंत्र | ‘एडम्स एप्पल’ स्पष्ट, आवाज भारी/करकश | स्वरयंत्र छोटा, आवाज में मामूली बदलाव |
| शारीरिक बनावट | कंधे और सीना चौड़ा होना | स्तनों का विकास |
| चेहरे व शरीर के बाल | दाढ़ी, मूंछ, सीने पर बाल | कांख और जघन क्षेत्र में बाल |
| द्वितीयक लैंगिक लक्षण | दाढ़ी-मूंछ, भारी आवाज | स्तनों का विकास |
प्रजनन क्षमता को दर्शाने वाले परिवर्तन
किशोरावस्था में बाहरी परिवर्तनों के साथ-साथ आंतरिक अंगों का परिपक्व (Mature) होना भी शुरू होता है।
माहवारी और जनन स्वास्थ्य
- माहवारी चक्र (Menstrual Cycle):
- यह किशोरियों में होने वाला एक स्वाभाविक आंतरिक परिवर्तन है।
- सामान्य चक्र: यह आमतौर पर 28–30 दिनों में दोहराया जाता है।
- सामान्य सीमा (Normal Range): स्वास्थ्य के अनुसार यह चक्र 21 से 35 दिनों का भी हो सकता है।
- रजोधर्म / रजोदर्शन (Menstruation):
- चक्र का वह चरण जब शरीर से रक्तस्राव होता है।
- इसकी अवधि 3 से 7 दिनों तक हो सकती है।
- इस दौरान निचले पेट में हल्का दर्द या परेशानी होना स्वाभाविक है।
- रजोनिवृत्ति (Menopause):
- लगभग 45–55 वर्ष की आयु में माहवारी प्राकृतिक रूप से बंद हो जाती है।
- यह महिलाओं में प्रजनन क्षमता के समाप्त होने का सूचक है।
सामाजिक भ्रांतियाँ और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
- कुरीतियाँ व रूढ़िवादिता: माहवारी से जुड़े भ्रमों के कारण समाज में अनुचित भय, शर्म और महिलाओं का सामाजिक अलगाव देखा जाता है।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण: माहवारी पूरी तरह से एक प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है।
- सामाजिक आवश्यकता: अंधविश्वासों को समाप्त कर वैज्ञानिक समझ को बढ़ावा देना महिलाओं के बेहतर जनन स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवनशैली के लिए अनिवार्य है।
संवेगात्मक और व्यावहारिक परिवर्तन
किशोरावस्था केवल शारीरिक या लैंगिक बदलावों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह तीव्र भावनात्मक और व्यावहारिक परिवर्तनों की अवस्था भी है।
भावात्मक परिवर्तनों के प्रभाव और समाधान
किशोरावस्था में संवेग (Emotions) बचपन की तुलना में अधिक तीव्र होते हैं, जो व्यवहार और जीवन के निर्णयों को प्रभावित करते हैं।
भावनात्मक बदलाव, उनके प्रभाव और सकारात्मक विकास के उपाय
| मुख्य भावनात्मक बदलाव | व्यवहार पर संभावित प्रभाव | सकारात्मक विकास के उपाय |
| मूड स्विंग्स | व्यवहार में अचानक बदलाव | संगीत, नृत्य या खेलों में संलग्न होना |
| तीव्र भावनाएँ (Strong Emotions) | नई जिज्ञासा और ऊर्जा | आत्म-खोज, रचनात्मकता और नवाचार में ऊर्जा लगाना |
| अत्यधिक संवेदनशीलता (Increased Sensitivity) | दूसरों के प्रति जुड़ाव या असंतोष | करुणा, सहानुभूति और सामाजिक कार्यों में सहभागिता |
किशोरावस्था को सुखद अनुभव बनाना
पोषण संबंधी आवश्यकताएँ
- संतुलित आहार की आवश्यकता: शारीरिक विकास और खेलकूद में बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, वसा, विटामिन और खनिजों की पर्याप्त मात्रा आवश्यक है।
पोषण स्रोत और उनके कार्य
| खाद्य स्रोत | पोषक तत्व | मुख्य कार्य |
| दूध, बाजरा, दही, पनीर | कैल्शियम, प्रोटीन, वसा | हड्डियों का विकास |
| पालक, राजमा, किशमिश, अंजीर | आयरन | रक्त निर्माण (हीमोग्लोबिन) |
| दालें, सोयाबीन, अंडे | प्रोटीन | शारीरिक वृद्धि, शक्ति व ऊर्जा स्तर में सुधार |
लौह और B12 की कमी तथा सरकारी प्रयास
- स्वास्थ्य समस्या: किशोरियों में आयरन या विटामिन B12 की कमी से अल्परक्तता (Anemia) रोग हो जाता है।
डोरोथी हॉजकिन
- योगदान: इन्होंने विटामिन B12 की संरचना का अध्ययन किया।
- नोबेल पुरस्कार: 1964 में रसायन विज्ञान में नोबेल पुरस्कार जीतने वाली तीसरी महिला बनीं।
- विटामिन B12 का स्रोत: यह मानव शरीर में स्वयं नहीं बनता, इसे भोजन से ही प्राप्त करना पड़ता है।
व्यक्तिगत स्वच्छता
- संक्रमण से बचाव: कांख (Armpits) और जघन क्षेत्र (Pubic region) की स्वच्छता संक्रमण से बचाती है।
- माहवारी स्वच्छता: सेनेटरी पैड या धोकर पुनः उपयोग किए जाने वाले सूती कपड़ों का प्रयोग सुरक्षित है।
- निपटान (Disposal): इस्तेमाल किए गए पैड्स को अखबार में लपेटकर कूड़ेदान में डालना चाहिए। पर्यावरण संरक्षण के लिए बायोडिग्रेडेबल पैड्स बेहतर विकल्प हैं।
मासिक धर्म स्वच्छता योजनाएँ
- मेंस्ट्रुअल हाइजीन स्कीम (MHS): ग्रामीण किशोरियों को सस्ते या मुफ्त सेनेटरी पैड देना।
- राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK): सहकर्मी शिक्षा (Peer education) के माध्यम से समग्र स्वास्थ्य में सुधार।
- सुविधा सेनेटरी नैपकिन पहल (Suvidha Initiative): जन औषधि केंद्रों के माध्यम से ₹1 में बायोडिग्रेडेबल पैड उपलब्ध कराना।
- राज्य स्तरीय योजनाएँ: कर्नाटक की ‘शुचि योजना’, तमिलनाडु और ओडिशा में मुफ्त सेनेटरी पैड योजनाएँ।
शारीरिक गतिविधियाँ
- लाभ: नियमित व्यायाम से शारीरिक और मानसिक फिटनेस बनी रहती है, स्टैमिना बढ़ता है और मूड बेहतर होता है।

संतुलित सामाजिक जीवन और साइबर सुरक्षा
- सामाजिक व्यवहार: साथियों के प्रति सम्मानजनक और विनम्र व्यवहार सुरक्षित माहौल बनाता है।
- साइबर बुलिंग: डिजिटल साधनों से किसी को परेशान करना या निजी जानकारी उजागर करना।

- बचाव उपाय: किसी भी धमकी से डरने के बजाय माता-पिता या शिक्षकों से मदद लें।
मादक पदार्थों से बचाव
- पदार्थ व्यसन (Substance Abuse): तंबाकू, गुटखा, सिगरेट, शराब या अवैध ड्रग्स का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक और लत पैदा करने वाला (Addictive) होता है।
- शारीरिक प्रभाव: फेफड़ों को नुकसान, सांस की बीमारी और याददाश्त में कमी।

- समाधान: पहली बार ही ‘ना’ (NO) कहें। लत से बाहर निकलने के लिए परामर्श (Counselling) और चिकित्सीय सहायता लें।
नशा मुक्त भारत अभियान
- मंत्रालय: सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment)।
- लक्ष्य: युवाओं और बच्चों में नशीले पदार्थों के सेवन की रोकथाम।
- राष्ट्रीय नशामुक्ति हेल्पलाइन नंबर: 14446।
किशोरावस्था में परिवर्तनों का कारण
किशोरावस्था में होने वाले शारीरिक, जैविक और व्यावहारिक बदलावों का मुख्य कारण शरीर में बनने वाले विशेष रसायन हैं।
मुख्य तथ्य
- हार्मोन: किशोरावस्था के दौरान होने वाले सभी बदलाव, जैसे यौवनारंभ (Puberty) और माहवारी (Menstruation), मुख्य रूप से हार्मोन नामक रासायनिक पदार्थों के कारण होते हैं।
- विकास में भूमिका: हार्मोन शारीरिक वृद्धि, विकास और शरीर के आंतरिक कार्यों के सही संचालन को नियंत्रित करते हैं।
- मस्तिष्क का नियंत्रण: हार्मोन शरीर की विभिन्न ग्रंथियों में बनते हैं और मस्तिष्क (Brain) से संकेत मिलते ही सही समय पर स्रावित होते हैं।
- व्यवहार पर प्रभाव: कुछ विशिष्ट हार्मोन सीधे तौर पर किशोरों के मूड, संवेग और व्यावहारिक बदलावों को प्रभावित करते हैं।
- स्वस्थ दृष्टिकोण: सही जानकारी, उचित मार्गदर्शन और स्वस्थ निर्णय किशोरावस्था को सुरक्षित और सुदृढ़ बनाते हैं।
किशोरावस्था में हार्मोनल नियंत्रण की प्रक्रिया
| चरण | प्रक्रिया | परिणाम |
| 1. | मस्तिष्क से संकेत (Brain Signals) | पिट्यूटरी ग्रंथि को हार्मोन स्राव का निर्देश मिलता है |
| 2. | हार्मोन का स्राव (Hormone Release) | टेस्टोस्टेरोन और एस्ट्रोजन जैसे रसायन स्रावित होते हैं |
| 3. | शारीरिक व मानसिक बदलाव | यौवनारंभ, द्वितीयक लैंगिक लक्षण और मूड स्विंग्स दिखाई देते हैं |