10 September 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत मेक इन इंडिया और औद्योगिक गलियारों को बल देने वाले INNOPROM इंडिया 2026 (भारत-रूस औद्योगिक सहयोग और NICDC की भूमिका), ग्रामीण महिलाओं की वित्तीय स्वतंत्रता हेतु ‘स्किल मंथन’ (महिलाओं के लिए टिकाऊ आजीविका का निर्माण), समुद्री पारिस्थितिकी व संसाधनों के अध्ययन हेतु स्वदेशी ओशन रिसर्च वेसल ‘ORV सागर मंथन’, वित्तीय पारदर्शिता व एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग हेतु FIU-IND द्वारा 15 वर्चुअल डिजिटल एसेट संस्थाओं को नोटिस (PMLA का उल्लंघन), कम लागत में स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन हेतु ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल्स का सेल्फ-असेंबली (ग्रीन हाइड्रोजन की नई राह), तथा नीली अर्थव्यवस्था के तहत समुद्री जैव-विविधता वर्गीकरण के लिए इंटरनेशनल डीप-सी मैक्रोफ़ौना टैक्सोनॉमी स्कूल (कोच्चि) का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
INNOPROM इंडिया 2026: भारत-रूस औद्योगिक सहयोग और NICDC की भूमिका
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, भारत-रूस द्विपक्षीय संबंध, औद्योगिक अवसंरचना।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): द्विपक्षीय संबंध (भारत-रूस), भारतीय अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास, बुनियादी ढांचा (औद्योगिक गलियारे, पीएम गतिशक्ति, लॉजिस्टिक्स)।
चर्चा में क्यों?
भारत मंडपम, नई दिल्ली में पहले INNOPROM इंडिया 2026 का आयोजन किया गया। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के DPIIT के तहत कार्यरत NICDC (नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) ने इसमें भारत के अगली पीढ़ी के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को प्रदर्शित किया। इसका मुख्य उद्देश्य भारत-रूस विशेष एवं विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी को विनिर्माण और निवेश के क्षेत्र में मजबूत करना है।
मुख्य बिंदु: भारत-रूस व्यापार लक्ष्य, NICDP और डिजिटल पहल
1. भारत-रूस आर्थिक सहयोग और द्विपक्षीय लक्ष्य
- व्यापार लक्ष्य: दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को ₹9.45 लाख करोड़ (100 बिलियन) तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
- सहयोग के प्रमुख क्षेत्र: उन्नत इंजीनियरिंग, रेलवे, धातु, ऊर्जा, ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस एवं रक्षा, फार्मास्यूटिकल्स और रसायन।
- रशियन इंडस्ट्रियल क्लस्टर: NICDC शहरों में (जैसे कृष्णापटनम-आंध्र प्रदेश और तुमकुरु-कर्नाटक) रूसी कंपनियों के लिए एक समर्पित ‘औद्योगिक क्लस्टर’ स्थापित करने पर विचार किया जा रहा है।
2. राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (NICDP)
- विस्तार: इसके तहत 11 औद्योगिक गलियारे, 13 राज्यों में 20 ग्रीनफील्ड इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटी विकसित की जा रही हैं।
- निवेश एवं रोजगार क्षमता: 19,878 हेक्टेयर में फैले इन प्रोजेक्ट्स में लगभग ₹5.35 लाख करोड़ के निवेश और 14 लाख नौकरियों की संभावना है।
- 4 विकसित स्मार्ट शहर (Plug-and-Play Ecosystems):
- धोलेरा विशेष निवेश क्षेत्र (गुजरात)
- शेन्द्रा-बिडकिन औद्योगिक क्षेत्र – AURIC (महाराष्ट्र)
- एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप, ग्रेटर नोएडा (उत्तर प्रदेश)
- एकीकृत औद्योगिक टाउनशिप, विक्रम उद्योगपुरी (मध्य प्रदेश)
3. NICDC की अन्य प्रमुख परियोजनाएं और डिजिटल प्लेटफॉर्म
- भव्य (भारत औद्योगिक विकास योजना): FY 2026-27 से FY 2031-32 तक ₹33,660 करोड़ के परिव्यय के साथ 100 प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्कों का विकास। NICDC इसकी प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एजेंसी (PMA) है।
- PM MITRA टेक्स्टाइल पार्क: NICDC 7 पीएम मित्र पार्कों के लिए भी PMA के रूप में कार्य कर रहा है।

- इंडस्ट्रियल कॉरिडोर लैंड प्लेटफॉर्म (ICLP): यह एक GIS-आधारित राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म है, जो निवेशकों को 4,000 से अधिक औद्योगिक पार्कों में भूमि की उपलब्धता की जानकारी देता है।
- लॉजिस्टिक्स डेटा बैंक (LDB) और ULIP: LDB के जरिए अब तक 10 करोड़ से अधिक EXIM कंटेनरों की रीयल-टाइम ट्रैकिंग की जा चुकी है। NLDSL द्वारा ‘कोयला शक्ति’ डैशबोर्ड भी विकसित किया गया है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजन | प्रथम INNOPROM इंडिया 2026 (नई दिल्ली) |
| भारत-रूस व्यापार लक्ष्य | 100 बिलियन (₹9.45 लाख करोड़) वर्ष 2030 तक |
| नोडल संस्था | NICDC (DPIIT, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय) |
| NICDP दायरा | 11 औद्योगिक गलियारे, 20 स्मार्ट सिटी, 13 राज्य |
| विकसित 4 स्मार्ट सिटी | धोलेरा (GJ), AURIC (MH), ग्रेटर नोएडा (UP), विक्रम उद्योगपुरी (MP) |
‘स्किल मंथन’: महिलाओं के लिए टिकाऊ आजीविका का निर्माण
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की नीतियां, सामाजिक विकास, महिला सशक्तिकरण और कौशल विकास पहल।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास, समावेशी विकास, सरकारी नीतियां, अति-स्थानीय (Hyperlocal) योजनाएं और जिला प्रशासन की भूमिका।
चर्चा में क्यों?
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) ने ‘स्किल मंथन’ की पहली बैठक का आयोजन किया। इस बैठक का मुख्य विषय “महिलाओं के लिए टिकाऊ आजीविका का निर्माण” (Building Sustainable Livelihoods for Women) था। इसका उद्देश्य जिला-स्तरीय सफल मॉडलों को उजागर करना और देश भर में साझा करना है।
मुख्य बिंदु: जिला-स्तरीय मॉडल, अति-स्थानीय कौशल और महिला सशक्तिकरण
1. जिला-संचालित योजनाएं और ‘हाइपरलोकल’ दृष्टिकोण
- विकास का इंजन: कौशल विकास और शिक्षा राज्य मंत्री जयंती चौधरी के अनुसार, जिला प्रशासन विकास और सुधार का वास्तविक इंजन है।
- मांग-आधारित कौशल विकास: कौशल पहलों को स्थानीय जरूरतों, उद्योग आवश्यकताओं और विशेषकर एमएसएमई (MSME) क्षेत्र से जोड़ना आवश्यक है।
- जिला कौशल विकास योजना (DSDP): इसके माध्यम से युवाओं और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए अधिक प्रभावी और सटीक परिणाम हासिल किए जा रहे हैं।
- हाइपरलोकल स्कीलिंग: एमएसडीई सचिव देबाश्री मुखर्जी ने जोर दिया कि युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए जिलों की स्थानीय वास्तविकताओं के अनुसार कौशल प्रशिक्षण देना अनिवार्य है।
2. जिला स्तरीय तीन प्रमुख सफल मॉडल
- मेरठ मॉडल (उत्तर प्रदेश): महिला-केंद्रित निर्माण मॉडल, जो बैडमिंटन रैकेट और शटलकॉक उत्पादन में महिलाओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण और रोजगार देता है।
- बिजनौर – ‘विदुर प्रेरणा स्वदेशी’ (उत्तर प्रदेश): ग्रामीण महिला उद्यमियों को ब्रांडिंग, बाजार पहुंच और उद्यम सहायता प्रदान करने वाला एक जिला-स्तरीय प्लेटफॉर्म।
- एनटीआर जिला – ‘RISE’ (आंध्र प्रदेश): महिला-संचालित उद्यमों के लिए कौशल, ऋण सुविधा, सलाह (Mentoring) और रोजगार संबंधों को जोड़ने वाला वन-स्टॉप इकोसिस्टम।
3. राष्ट्रीय दृष्टिकोण और ‘विकसित भारत@2047’
- सफल मॉडलों की पुनरावृत्ति: स्किल मंथन का लक्ष्य जमीनी स्तर के सफल प्रयोगों को एक राष्ट्रीय मंच देकर अन्य जिलों में लागू करना है।

- आर्थिक भागीदारी: महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाकर आत्मनिर्भर समुदायों और विकसित भारत@2047 के विजन को गति देना।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजक मंत्रालय | कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) |
| कार्यक्रम का नाम | स्किल मंथन |
| मुख्य विषय | महिलाओं के लिए टिकाऊ आजीविका का निर्माण |
| मेरठ मॉडल | खेल सामग्री (बैडमिंटन रैकेट व शटलकॉक) विनिर्माण |
| विदुर प्रेरणा स्वदेशी | बिजनौर (UP) – ग्रामीण महिला उद्यमियों के लिए ब्रांडिंग/मार्केट प्लेटफॉर्म |
ओशन रिसर्च वेसल ‘ORV सागर मंथन’: भारत का स्वदेशी समुद्री अनुसंधान जहाज
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की वैज्ञानिक तकनीक, महासागर अनुसंधान, दीप ओशन मिशन।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- स्वदेशी तकनीक का विकास, दीप ओशन मिशन, नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy), एयरोस्पेस और समुद्री अवसंरचना।
चर्चा में क्यों?
कोलकाता स्थित ऋषि बंकिम शिपयार्ड में भारत के सबसे उन्नत ओशन रिसर्च वेसल (Yard 3041) ‘ORV सागर मंथन’ का जलावतरण (Launch) किया गया। इसे रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) ने NCPOR (राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं महासागर अनुसंधान केंद्र) के लिए तैयार किया है।
मुख्य बिंदु: तकनीकी क्षमताएं, दीप ओशन मिशन और रणनीतिक महत्व
1. दीप ओशन मिशन और ‘ORV सागर मंथन’
- लागत और नोडल मिशन: यह जहाज भारत सरकार के दीप ओशन मिशन (DOM) के ‘वर्टिकल-4’ (डीप ओशन सर्वे एंड एक्सप्लोरेशन) के तहत ₹840 करोड़ की लागत से बना है।
- सगर कन्या का विकल्प: यह लगभग 43 वर्ष पुराने ORV सागर कन्या (जिसे 1983 में जर्मनी से खरीदा गया था) का स्थान लेगा।
- कार्यकाल: यह ऑल-वेदर जहाज दक्षिणी महासागर (Southern Ocean) जैसी कठिन परिस्थितियों में 30 वर्षों तक काम करने में सक्षम है।
2. प्रमुख तकनीकी विशेषताएं और उपकरण
- उन्नत अनुसंधान प्रणाली: इसमें मल्टीबीम बाथिमेट्री, मल्टीचैनल सीस्मिस सिस्टम, सब-बॉटम प्रोफाइलिंग और वेदर रडार शामिल हैं।
- ROV और AUV क्षमता: यह रिमोटली ऑपरेटेड व्हीकल्स (ROV) और ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल्स (AUV) को समुद्र में तैनात कर सकता है।
- द्वि-स्तरीय प्रमाणीकरण (Dual-Class Certification): इसे IRS (इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग) और ABS (अमेरिकन ब्यूरो ऑफ शिपिंग) से अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप मंजूरी मिली है।
3. वैज्ञानिक और रणनीतिक प्रभाव
- बहुधात्विक सल्फाइड की खोज: हिंद महासागर की मध्य-समुद्री कटक (Mid-Oceanic Ridges) में मल्टी-मेटल हाइड्रोथर्मल सल्फाइड खनिजों की पहचान करना।
- जलवायु और सुनामी पूर्वानुमान: समुद्र के जलस्तंभ (Water Column) की सैंपलिंग, ऊपरी वायुमंडलीय अवलोकन और ग्लेशियर पिघलने के डेटा से मौसम पूर्वानुमान को बेहतर बनाना।
- वैश्विक महासागरीय भू-राजनीति: भारत को महासागरीय डेटा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना और नीली अर्थव्यवस्था में बढ़त दिलाना।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| जहाज का नाम | ORV सागर मंथन (Yard 3041) |
| निर्माता संस्था | GRSE (गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स, कोलकाता) |
| उपयोगकर्ता एजेंसी | NCPOR (गोवा) / पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) |
| मूल योजना | दीप ओशन मिशन (DOM) |
| परियोजना लागत | लगभग ₹840 करोड़ |
| किसका स्थान लेगा? | ORV सागर कन्या (1983, जर्मनी निर्मित) |
FIU-IND ने 15 वर्चुअल डिजिटल एसेट संस्थाओं को जारी किया नोटिस: PMLA का उल्लंघन
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की संस्थाएं (FIU-IND), PMLA 2002, वर्चुअल डिजिटल एसेट्स (VDA)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): मनी लॉन्ड्रिंग और इसका रोकथाम, आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौतियां, साइबर सुरक्षा, प्रौद्योगिकी एवं क्रिप्टो संपत्ति विनियम।
चर्चा में क्यों?
वित्तीय खुफिया इकाई-भारत (FIU-IND) ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 की धारा 13 के तहत गैर-अनुपालन के कारण 15 वर्चुअल डिजिटल एसेट सर्विस प्रोवाइडर्स (VDA SPs) को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इस कार्रवाई के साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2000 के प्रावधानों के अंतर्गत इन गैर-पंजीकृत कंपनियों के मोबाइल ऐप्स और यूआरएल (URLs) को भारत में बंद करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
मुख्य बिंदु: FIU-IND की कार्रवाई, VDA विनियम और PMLA दायित्व
1. अवैध गतिविधियों और ऐप्स पर प्रतिबंध का आदेश
- नोटिस जारी की गई संस्थाएं: इनमें Weex, Blofin, Bitunix, Latoken, SimpleSwap, Fixedfloat जैसी 15 विदेशी व घरेलू क्रिप्टो एक्सचेंज/वर्चुअल एसेट कंपनियां शामिल हैं।
- IT अधिनियम के तहत कार्रवाई: सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2000 की धारा 79(3)(b) और आईटी नियम 2025 के तहत नोडल अधिकारी के रूप में, FIU-IND ने इन संस्थाओं के ऐप्स और वेब URLs को सार्वजनिक पहुंच से हटाने (Takedown) के निर्देश दिए हैं।
2. VDA सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए PMLA दायित्व
- मार्च 2023 से प्रवर्तन: मार्च 2023 में वर्चुअल डिजिटल एसेट सेवा प्रदाताओं को Anti-Money Laundering (AML) और Counter Financing of Terrorism (CFT) के दायरे में लाया गया था।
- अनिवार्य पंजीकरण (Reporting Entity): भारत में या भारत से जुड़े काम करने वाले सभी VDA SPs को FIU-IND में ‘रिपोर्टिंग इकाई’ के रूप में पंजीकृत होना अनिवार्य है।
- भौतिक उपस्थिति आवश्यक नहीं: यह नियम गतिविधियों पर आधारित है। यदि कोई विदेशी कंपनी भारत में सेवाएं दे रही है, तो उसे भी इन नियमों का पालन करना होगा।
- मुख्य जिम्मेदारियां: संदिग्ध लेनदेन की रिपोर्ट देना, रिकॉर्ड बनाए रखना (Record Keeping) और नो-योर-कस्टमर (KYC) मानदंडों का पालन करना।
3. उपभोक्ताओं के लिए जोखिम चेतावनी
- अनियंत्रित क्षेत्र: क्रिप्टो उत्पाद और NFT (नॉन-फंजिबल टोकन) भारत में पूरी तरह से अनियंत्रित (Unregulated) और जोखिम भरे हैं।
- कानूनी मदद की कमी: इन लेन-देन में वित्तीय नुकसान होने पर उपयोगकर्ताओं को कोई नियामक सहायता (Regulatory Recourse) नहीं मिलती।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| कार्रवाई करने वाली संस्था | FIU-IND (वित्तीय खुफिया इकाई – भारत) |
| मूल अधिनियम | PMLA 2002 की धारा 13 और IT अधिनियम 2000 की धारा 79 |
| VDA SPs को AML/CFT के तहत कब लाया गया? | मार्च 2023 |
| कुल प्रभावित संस्थाएं | 15 VDA सर्विस प्रोवाइडर्स |
| FIU-IND का प्रशासनिक ढांचा | वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अंतर्गत नोडल एजेंसी |
| मुख्यालय | नई दिल्ली |
ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल्स का सेल्फ-असेंबली: ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की नई राह
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय महत्व की वैज्ञानिक तकनीक, अक्षय ऊर्जा, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, जैव-प्रौद्योगिकी, धातु-मुक्त उत्प्रेरक (Metal-free Photocatalysts)।
चर्चा में क्यों?
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान CeNS (बेंगलुरु) के वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक एस्पार्टिक एसिड (अमीनो एसिड) को पेरिलीन डिइमाइड (PDI) नामक कार्बनिक अणु के साथ मिलाकर एक धातु-मुक्त (metal-free) उत्प्रेरक तैयार किया है। सुप्रामॉलिक्यूलर सेल्फ-असेंबली की प्रक्रिया द्वारा निर्मित यह उत्प्रेरक पानी में 2D नैनोशीट्स बनाता है, जिससे सौर जल-विभाजन में 18% अधिक फोटोकरंट उत्पन्न होता है। रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री के Journal of Materials Chemistry A में प्रकाशित यह अध्ययन हरित हाइड्रोजन उत्पादन, कृत्रिम प्रकाश संश्लेषण और सौर ईंधन उपकरणों के लिए एक सस्ता, टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु: तकनीक, क्रियाविधि और लाभ
1. नई तकनीक और इसकी कार्यप्रणाली
- अणुओं का संयोजन: वैज्ञानिकों ने प्राकृतिक अमीनो एसिड (एस्पार्टिक एसिड) को प्रकाश-अवशोषित करने वाले कार्बनिक अणु ‘पेरिलीन डिइमाइड’ (PDI) के साथ मिलाया।
- सुप्रामॉलिक्यूलर सेल्फ-असेंबली: ये अणु पानी में स्वाभाविक रूप से व्यवस्थित होकर अत्यधिक सुव्यवस्थित 2D नैनोशीट्स बनाते हैं।
- बॉन्डिंग और लाइट एब्जॉर्प्शन: अमीनो एसिड हाइड्रोजन बॉन्डिंग को बढ़ावा देता है, जबकि PDI अणु pi-pi स्टैकिंग और प्रकाश अवशोषण को बढ़ाता है।
2. इस तकनीक के प्रमुख लाभ
- 18% अधिक फोटोकरंट: सेल्फ-असेंबल सामग्री अपने सामान्य (Bulk) रूप की तुलना में सौर जल-विभाजन (Solar-driven Water Splitting) के दौरान 18% अधिक फोटोकरंट उत्पन्न करती है।
- चार्ज पृथक्करण में सुधार: अमीनो एसिड आणविक द्विध्रुव आघूर्ण (Molecular Dipole Moment) को बढ़ाता है। इससे प्रकाश से उत्पन्न चार्ज आसानी से अलग होते हैं और ऊर्जा का नुकसान कम होता है।
- पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ: पारंपरिक फोटोकैटलिस्ट में महंगी धातुओं या अकार्बनिक सेमीकंडक्टरों की आवश्यकता होती थी। यह तकनीक पूरी तरह से धातु-मुक्त और किफायती है।
3. भविष्य के अनुप्रयोग
- हरित ऊर्जा और स्वच्छ ईंधन: ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, कृत्रिम प्रकाश संश्लेषण (Artificial Photosynthesis) और अगली पीढ़ी के सौर ईंधन उपकरणों में उपयोगी।

- दुर्लभ धातुओं पर निर्भरता में कमी: कीमती और दुर्लभ धातुओं के उपयोग को समाप्त कर उत्पादन लागत को काफी कम किया जा सकता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| अनुसंधान संस्थान | CeNS (सेंटर फॉर नैनो एंड सॉफ्ट मैटर साइंसेज), बेंगलुरु |
| मूल मंत्रालय | विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) |
| तकनीक का नाम | सुप्रामॉलिक्यूलर सेल्फ-असेंबली |
| उपयोग किए गए मुख्य तत्व | एस्पार्टिक एसिड (अमीनो एसिड) + PDI (पेरिलीन डिइमाइड) |
| मुख्य आउटपुट | धातु-मुक्त 2D नैनोशीट्स फोटोकैटलिस्ट |
इंटरनेशनल डीप-सी मैक्रोफ़ौना टैक्सोनॉमी स्कूल: कोच्चि में वैश्विक वैज्ञानिक पहल
- प्रारंभिक परीक्षा: जैव विविधता और पर्यावरण, अंतर्राष्ट्रीय संगठन (ISA, IORA)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी (संरक्षण और जैव विविधता), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- दीप ओशन मिशन, नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy)।
चर्चा में क्यों?
भारत के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन CMLRE (कोच्चि) में 5-दिवसीय “इंटरनेशनल डीप-सी मैक्रोफ़ौना टैक्सोनॉमी स्कूल” का आयोजन किया जा रहा है। यह अंतर्राष्ट्रीय क्षमता-निर्माण कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय सीबेड अथॉरिटी (ISA) के ‘सस्टेनेबल सीबेड नॉलेज इनिशिएटिव’ (SSKI) प्लेटफॉर्म के तहत आयोजित हो रहा है, जिसमें IORA और दक्षिण कोरिया का MABIK भी सहयोग कर रहे हैं। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य हिंद महासागर क्षेत्र के 13 देशों से आए 30 से अधिक युवा शोधकर्ताओं को गहरे समुद्र की तलहटी (Benthic) के जैव विविधता मूल्यांकन, डीएनए बारकोडिंग और इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी जैसी उन्नत तकनीकों का मानकीकृत प्रशिक्षण देना है।
मुख्य बिंदु: वैश्विक सहयोग, प्रशिक्षण और रणनीतिक महत्व
1. बहुपक्षीय सहयोग और भागीदार देश
- आयोजक और सहयोगी संस्थाएं: CMLRE (पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय), अंतर्राष्ट्रीय सीबेड अथॉरिटी (ISA), इंडियन ओशियन रिम एसोसिएशन (IORA) और नेशनल मरीन बायोडाइवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ कोरिया (MABIK)।
- IORA और ISA सदस्य देश: दक्षिण अफ्रीका, केन्या, बांग्लादेश, मॉरीशस, मलेशिया, इंडोनेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका, मोजांबिक, तंजानिया, थाईलैंड, ओमान और भारत के लगभग 30 युवा शोधकर्ता भाग ले रहे हैं।
2. प्रशिक्षण का तकनीकी दायरा
- मानकीकृत कार्यप्रणाली: गहरे समुद्र की तलहटी (Benthic Environment) की जैव विविधता मूल्यांकन के लिए तकनीकों का मानकीकरण करना।
- उन्नत अनुसंधान तकनीकें: पारंपरिक टैक्सोनॉमी (वर्गिकी), डीएनए बारकोडिंग, स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी (SEM) और ओपन-एक्सेस डेटा पब्लिशिंग का व्यावहारिक प्रशिक्षण।
- समुद्री नमूना संग्रहण: बेंटिक नमूनों का एकत्रीकरण, लैब पहचान और क्यूरेशन।
3. भारत के लिए रणनीतिक महत्व
- वैश्विक नेतृत्व: यह कार्यक्रम हिंद महासागर क्षेत्र में गहरे समुद्र की अनुसंधान तकनीकों के नेतृत्व में भारत की मजबूत स्थिति को दर्शाता है।
- पर्यावरण शासन: यह पहल अंतर्राष्ट्रीय नियमों के अनुसार गहरे समुद्र के खनिजों व जैव संसाधनों के सतत दोहन और संरक्षण के बीच संतुलन बनाने में मदद करेगी।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजन स्थल | CMLRE, कोच्चि (केरल) |
| नोडल मंत्रालय | पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) |
| मूल वैश्विक पहल | Sustainable Seabed Knowledge Initiative (SSKI) |
| ISA प्रमुख | लेटिशिया कार्वाल्हो (महासचिव, ISA) |
| सहयोगी वैश्विक संस्थाएं | ISA, IORA, MABIK (दक्षिण कोरिया) |