NCERT Notes Class 7 Science Chapter 5: Changes Around Us: Physical and Chemical के अंतर्गत परिवर्तनों के दो मुख्य वर्गों—भौतिक परिवर्तन (Physical Changes) और रासायनिक परिवर्तन (Chemical Changes)—के बीच के मूलभूत अंतरों को स्पष्ट करता है। इसमें यह समझाया गया है कि कैसे आकार, रूप, रंग या अवस्था में होने वाले परिवर्तन, जिनमें कोई नया पदार्थ नहीं बनता, भौतिक परिवर्तन कहलाते हैं और प्रायः उत्क्रमणीय (Reversible) होते हैं; जबकि नए पदार्थों के निर्माण और रासायनिक संगठन में बदलाव वाले परिवर्तन रासायनिक परिवर्तन कहलाते हैं। और लोहे में जंग लगने की प्रक्रिया, जंग से बचाव के वैज्ञानिक तरीकों (जैसे यशदलेपन/Galvanisation) और शुद्ध अवस्था में क्रिस्टल प्राप्त करने की क्रिस्टलीकरण विधि को व्यावहारिक उदाहरणों के साथ उजागर करता है।
पदार्थ का रूप बदल सकता है, लेकिन पदार्थ वही रहता है! (A Substance May Change in Appearance but Remain the Same!)
भौतिक परिवर्तनों में पदार्थ की केवल बाहरी बनावट बदलती है, उसकी आंतरिक रासायनिक पहचान नहीं।
A, B, C गतिविधियों के अवलोकन
- कागज को मोड़ना (A): कागज से आकृतियां बनाना और पुनः सीधा करना। कागज वही रहता है।
- गुब्बारे को फुलाना (B): हवा भरने पर आकार बदलता है। हवा निकलने पर गुब्बारा वापस अपनी मूल स्थिति में आ जाता है। पिन चुभाने पर वह फट जाता है, फिर भी रबर का पदार्थ नहीं बदलता।
- चौक का पाउडर बनाना (C): चौक को पीसने पर आकार छोटा होता है, पर रासायनिक रूप से वह चौक ही रहता है।
भौतिक परिवर्तन (Physical Changes)
- मूल लक्षण: आकार (Shape), माप (Size) और अवस्था (State – ठोस, द्रव, गैस) जैसे भौतिक गुणों में बदलाव।
- अवस्था परिवर्तन: पानी का बर्फ, जल और भाप के रूप में बदलना इसका मुख्य उदाहरण है।
- मुख्य निष्कर्ष: इन परिवर्तनों में कोई नया पदार्थ (No new substance) नहीं बनता है।
- प्रकृति: ये परिवर्तन सामान्यतः उत्क्रमणीय (Reversible) होते हैं।
भौतिक परिवर्तनों का त्वरित अवलोकन
| गतिविधि / प्रक्रिया | परिवर्तित भौतिक गुण | क्या नया पदार्थ बना? | परिवर्तन का प्रकार |
| कागज मोड़ना | आकार (Shape) | नहीं | भौतिक परिवर्तन |
| गुब्बारा फुलाना/फोड़ना | आकार व माप (Size) | नहीं | भौतिक परिवर्तन |
| चौक को पीसना | माप (Size) | नहीं | भौतिक परिवर्तन |
| बर्फ का पिघलना | अवस्था (State) | नहीं | भौतिक परिवर्तन |
रासायनिक परिवर्तन: नया पदार्थ बनना (A Substance May Change in Appearance and Not Remain the Same!)
जब किसी परिवर्तन में एक या एक से अधिक नए पदार्थ बनते हैं, तो उसे रासायनिक परिवर्तन कहते हैं।
चूने के पानी में फूंक मारने का प्रयोग
- साधारण जल (गिलास A): फूंक मारने पर केवल बुलबुले बनते हैं, पानी का रंग नहीं बदलता।
- चूने का पानी (गिलास B): उच्छवास (Exhaled air) से हवा फूंकने पर चूने का पानी दूधिया (Milky) हो जाता है।
- नया पदार्थ बनना: सांस द्वारा छोड़ी गई कार्बन डाइऑक्साइड (CO_2) चूने के पानी से क्रिया करके अघुलनशील कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO_3) बनाती है, जो तली में बैठ जाता है।
- रासायनिक समीकरण: {कैल्शियम हाइड्रॉक्साइड (चूने का पानी)} + {कार्बन डाइऑक्साइड} {कैल्शियम कार्बोनेट (सफेद अवक्षेप)} + {जल}
CO_2 का परीक्षण: चूने के पानी का दूधिया होना कार्बन डाइऑक्साइड गैस की पहचान का मानक परीक्षण (Standard Test) है।

सिरका और बेकिंग सोडा की अभिक्रिया
- प्रक्रिया: सिरका (Vinegar / एसिटिक अम्ल) में एक चुटकी बेकिंग सोडा (सोडियम हाइड्रोजन कार्बोनेट – NaHCO_3) मिलाने पर सनसनाहट (Fizzing) के साथ गैस के बुलबुले बनते हैं।
- गैस की पहचान: इस गैस को चूने के पानी में प्रवाहित करने पर वह दूधिया हो जाता है, जिससे सिद्ध होता है कि बनी गैस कार्बन डाइऑक्साइड (CO_2) है।
- रासायनिक समीकरण: {सिरका (अम्ल)} + {बेकिंग सोडा} {कार्बन डाइऑक्साइड} + {अन्य पदार्थ}
- बेकिंग सोडा + जल: बेकिंग सोडा को केवल पानी में मिलाने पर कोई नया रासायनिक पदार्थ या CO_2 गैस नहीं बनती (यह एक भौतिक प्रक्रिया है)।
भौतिक और रासायनिक परिवर्तन में अंतर
| गुणधर्म | भौतिक परिवर्तन (Physical Change) | रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change) |
| नया पदार्थ | नहीं बनता | बनता है |
| प्रकृति | सामान्यतः उत्क्रमणीय (Reversible) | सामान्यतः अनुत्क्रमणीय (Irreversible) |
| उदाहरण | पानी से बर्फ बनना, बेकिंग सोडा + जल | सिरका + बेकिंग सोडा, CO_2 का चूने के पानी को दूधिया करना |
रासायनिक परिवर्तनों वाली अन्य प्रक्रियाएँ (Some Other Processes Involving Chemical Changes)
जंग लगना (Rusting)
- प्रक्रिया: लोहे का वायु और नमी की उपस्थिति में धीरे-धीरे क्षरण होना।
- नया पदार्थ: इसमें भूरे रंग का नया पदार्थ यानी आयरन ऑक्साइड (Fe_2O_3) बनता है।
- परिवर्तन का प्रकार: चूंकि एक नया रासायनिक यौगिक बनता है, इसलिए जंग लगना एक रासायनिक परिवर्तन है।
दहन (Combustion)
- परिभाषा: वह रासायनिक अभिक्रिया जिसमें कोई पदार्थ ऑक्सीजन के साथ क्रिया करके ऊष्मा और/या प्रकाश उत्पन्न करता है।


- दाह्य पदार्थ (Combustible Substances): जो पदार्थ जल सकते हैं, जैसे लकड़ी, कागज, कपास, केरोसिन और मैग्नीशियम।
- मैग्नीशियम का दहन: {मैग्नीशियम} + {ऑक्सीजन} {मैग्नीशियम ऑक्साइड (सफेद चूर्ण)} + {ऊष्मा} + {प्रकाश}
- सफेद पाउडर (MgO) का बनना और ऊष्मा-प्रकाश निकलना इसे रासायनिक परिवर्तन बनाता है।
दहन के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता
- प्रयोग: मोमबत्ती को कांच के गिलास से ढकने पर वह थोड़ी देर में बुझ जाती है।
- कारण: हवा की आपूर्ति कट जाने से दहन रुक जाता है।
- CO_2 की उपस्थिति: मोमबत्ती के मोम (कार्बन) और हवा (ऑक्सीजन) की क्रिया से CO_2 बनती है।
- परीक्षण: चूने का पानी मिलाने पर वह दूधिया हो जाता है, जो CO_2 की पुष्टि करता है।
आग पर नियंत्रण और सुरक्षा
- कंबल लपेटना: जब किसी व्यक्ति के कपड़ों में आग लगती है, तो कंबल लपेटने से ऑक्सीजन (हवा) की आपूर्ति कट जाती है।
- सावधानी: आग बुझाने के लिए सिंथेटिक कपड़ों/कंबल का प्रयोग कभी न करें। ये पिघलकर त्वचा से चिपक जाते हैं।
बायोलुमिनिसेंस
- जुगनू (Fireflies): शाम को जुगनू बिना ऊष्मा उत्पन्न किए प्रकाश उत्सर्जित करते हैं।

- जैव-दीप्ति (Bioluminescence): जीवों के शरीर में रासायनिक परिवर्तनों द्वारा बिना गर्मी उत्पन्न किए प्रकाश का उत्पादन ‘बायोलुमिनिसेंस’ कहलाता है।
दहन के लिए आवश्यक शर्तें
केवल दाह्य पदार्थ और हवा का होना पर्याप्त नहीं है; दहन शुरू करने के लिए निश्चित तापमान आवश्यक है।
ज्वलन ताप (Ignition Temperature)
- ज्वलन ताप की परिभाषा: वह न्यूनतम तापमान जिस पर कोई पदार्थ आग पकड़ लेता है, उसका ज्वलन ताप (Ignition Temperature) कहलाता है।
- आवर्धक कांच (Magnifying Glass) का प्रयोग: सूर्य की किरणों को कागज पर केंद्रित करने से कागज गर्म होकर अपने ज्वलन ताप तक पहुँच जाता है और बिना सीधी माचिस की तीली के भी जलने लगता है।
दहन के लिए 3 अनिवार्य तत्व
| क्रम | आवश्यक घटक | भूमिका |
| 1. | दाह्य पदार्थ (ईंधन / Fuel) | जलने वाला मुख्य पदार्थ (कागज, लकड़ी, आदि) |
| 2. | ऑक्सीजन | दहन में सहायक वायुमंडलीय घटक |
| 3. | ऊष्मा (Heat) | ईंधन को उसके ज्वलन ताप तक पहुँचाने वाली ऊष्मा |
क्या एक ही प्रक्रिया में भौतिक और रासायनिक परिवर्तन दोनों हो सकते हैं? (Can Physical and Chemical Changes Occur in the Same Process?)
मोमबत्ती का जलना इसका सबसे सटीक उदाहरण है, जहाँ भौतिक और रासायनिक दोनों परिवर्तन एक साथ होते हैं।
मोमबत्ती जलने के अवलोकन
- भौतिक परिवर्तन (Physical Changes):
- मोम का पिघलना (Melting): ज्वाला की गर्मी से ठोस मोम पिघलकर द्रव बनता है।
- वाष्पीकरण (Evaporation): पिघला हुआ द्रव मोम बाती के सहारे ऊपर चढ़ता है और वाष्प में बदलता है।
- जमना (Solidification): पिघला हुआ मोम ठंडा होकर वापस ठोस बन जाता है।
- इन तीनों क्रियाओं में कोई नया रासायनिक पदार्थ नहीं बनता।
- रासायनिक परिवर्तन (Chemical Change):
- मोम के वाष्प का दहन (Combustion): मोम की वाष्प हवा में जलकर रोशनी, ऊष्मा, जलवाष्प और कार्बन डाइऑक्साइड (CO_2) बनाती है।
- दहन प्रक्रिया में नए रासायनिक पदार्थ बनते हैं।
माइकल फैराडे का योगदान
- माइकल फैराडे: 19वीं सदी के महान वैज्ञानिक, जिन्होंने विज्ञान अध्ययन के लिए मोमबत्ती को एक आदर्श मॉडल माना।
- ‘केमिकल हिस्ट्री ऑफ ए कैंडल’: फैराडे द्वारा दिए गए प्रसिद्ध व्याख्यानों की श्रृंखला।
- वैज्ञानिक महत्व: इसमें मोमबत्ती के उदाहरण से पिघलने (Melting), वाष्पीकरण (Vaporisation) और दहन (Combustion) जैसे भौतिक व रासायनिक अंतरों को समझाया गया।
मोमबत्ती जलने में दोनों परिवर्तनों की तुलना
| परिवर्तन का प्रकार | शामिल प्रक्रियाएँ | क्या नया पदार्थ बनता है? |
| भौतिक परिवर्तन (Physical) | मोम का पिघलना, जमना और वाष्पीकृत होना | नहीं (केवल अवस्था बदलती है) |
| रासायनिक परिवर्तन (Chemical) | मोम की वाष्प का जलना (Combustion) | हाँ (ऊष्मा, रोशनी, CO_2, जलवाष्प) |
क्या परिवर्तन स्थायी होते हैं? (Are Changes Permanent?)
परिवर्तनों को उनकी प्रकृति के आधार पर दो मुख्य श्रेणियों में बाँटा जाता है: उत्क्रमणीय (Reversible) और अनुत्क्रमणीय (Irreversible)।
उत्क्रमणीय एवं अनुत्क्रमणीय परिवर्तन
- उत्क्रमणीय परिवर्तन (Reversible Changes):
- वे बदलाव जिनमें पदार्थ को पुनः उसकी मूल अवस्था में प्राप्त किया जा सकता है।
- उदाहरण: बर्फ का पिघलना (पुनः जमाया जा सकता है), पानी का वाष्पीकरण (संघनन द्वारा पुनः द्रव बनता है)।
- अनुत्क्रमणीय परिवर्तन (Irreversible Changes):
- वे बदलाव जिनमें पदार्थ को वापस उसकी मूल स्थिति में नहीं लाया जा सकता।
- उदाहरण: कटी हुई सब्ज़ियाँ, मक्के से पॉपकॉर्न बनना।
परिवर्तनों का वर्गीकरण
| क्र.सं. | परिवर्तन (Change) | मूल अवस्था वापस पाई जा सकती है? (Yes/No) | परिवर्तन का प्रकार |
| 1. | बर्फ के टुकड़ों का पिघलना | Yes | उत्क्रमणीय (Reversible) |
| 2. | सब्जियों को काटना | No | अनुत्क्रमणीय (Irreversible) |
| 3. | पानी का उबलना | Yes | उत्क्रमणीय (Reversible) |
| 4. | मक्के से पॉपकॉर्न बनना | No | अनुत्क्रमणीय (Irreversible) |
क्या सभी परिवर्तन वांछनीय होते हैं?
मानव और पर्यावरण के दृष्टिकोण से परिवर्तनों को वांछनीय (Desirable) और अवांछनीय (Undesirable) में वर्गीकृत किया जाता है।
1. वांछनीय परिवर्तन (Desirable Changes)
- परिभाषा: वे परिवर्तन जो लाभदायक और उपयोगी होते हैं।
- उदाहरण: दूध से दही बनना, फलों का पकना, भोजन का पकना।
2. अवांछनीय परिवर्तन (Undesirable Changes)
- परिभाषा: वे परिवर्तन जो नुकसानदेह या अवांछित होते हैं।
- उदाहरण: लोहे में जंग लगना, भोजन का खराब या सड़ना (Decay of food)।
3. परिस्थिति-आधारित परिवर्तन (Context-Dependent Changes)
- दोहरी भूमिका: एक ही परिवर्तन स्थिति के अनुसार वांछनीय या अवांछनीय हो सकता है।
- उदाहरण: भोजन का सड़ना रसोई में अवांछनीय है, लेकिन कचरे से खाद (Compost) बनाने में यह वांछनीय और अत्यंत उपयोगी है।
4. पर्यावरण पर दीर्घकालिक प्रभाव (Long-term Environmental Impact)
- जीवाश्म ईंधन का दहन: वाहनों, ट्रेनों और हवाई जहाजों में ईंधन की खपत से वायुमंडल में CO_2 बढ़ रही है।
- पेंट का सूखना: दीवारों और फर्नीचर पर पेंट सूखने की प्रक्रिया से वाष्पीकरण द्वारा रसायनों का उत्सर्जन होता है, जो वायु प्रदूषण फैलाता है।
कुछ धीमी प्राकृतिक प्रक्रियाएँ (Some Slow Natural Changes)
पृथ्वी की सतह पर परिवर्तन लाने वाली ये प्राकृतिक प्रक्रियाएँ अत्यंत धीमी, निरंतर और सामान्यतः अनुत्क्रमणीय (Irreversible) होती हैं।
चट्टानों का अपक्षय (Weathering of rocks)
- अवसाद (Sedimentation): पहाड़ों के आधार पर जमा बालू, मिट्टी और पत्थरों के ढेर को अवसाद (Sediment) कहते हैं।
- भौतिक अपक्षय (Physical Weathering):
- तापमान का उतार-चढ़ाव, पेड़ों की जड़ों का बढ़ना और चट्टानों की दरारों में पानी का जमना चट्टानों को तोड़ता है।
- इसमें चट्टान के रासायनिक संगठन में कोई बदलाव नहीं होता।
- रासायनिक अपक्षय (Chemical Weathering):
- जल और रसायनों की चट्टानों से अभिक्रिया से नए यौगिक बनते हैं।
- बेसाल्ट चट्टान का उदाहरण: काले रंग की बेसाल्ट चट्टान (जिसमें लोहा होता है) नमी और वायु के संपर्क में आकर लाल रंग की आयरन ऑक्साइड परत बनाती है।
- मृदा निर्माण (Soil Formation): भौतिक और रासायनिक अपक्षय की इस संयुक्त क्रिया को अपक्षय (Weathering) कहते हैं, जिससे अंततः मृदा (Soil) का निर्माण होता है।
अपरदन (Erosion)
- परिभाषा: हवा और बहते जल जैसे प्राकृतिक बलों द्वारा चट्टानी टुकड़ों, मिट्टी और अवसादों का एक स्थान से टूटकर दूसरे स्थान पर स्थानांतरित होना।
- भौतिक परिवर्तन: लैंडस्लाइड (भूस्खलन) के दौरान होने वाला अपरदन एक भौतिक परिवर्तन है।
- पत्थरों का चिकना होना: बहते जल के लगातार घर्षण से नदियों के पत्थर और कंकड़ चिकने (Smooth) हो जाते हैं।
- निक्षेपण व नई चट्टानें (Deposition): जल या हवा की गति कम होने पर (जैसे समुद्र या झील में) अवसाद तली में बैठ जाते हैं। ये अवसाद हजारों वर्षों में कठोर होकर अवसादी चट्टानें (Sedimentary Rocks) बनते हैं।
अपक्षय और अपरदन में मुख्य अंतर
| प्रक्रिया | मुख्य क्रिया | भौतिक/रासायनिक प्रकृति | मुख्य परिणाम |
| अपक्षय (Weathering) | चट्टानों का अपने स्थान पर टूटना | भौतिक व रासायनिक दोनों | मृदा (Soil) का निर्माण |
| अपरदन (Erosion) | पदार्थों का एक स्थान से स्थानांतरण | मुख्यतः भौतिक परिवर्तन | अवसादी चट्टानें व चिकने पत्थर |