9 September 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत डिजिटल बैंकिंग सुरक्षा को मजबूत करने वाले फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर (FRI), सामाजिक न्याय और जनसेवा पुरस्कारों से जुड़े राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम पुरस्कार 2026, वानिकी व सतत वन प्रबंधन हेतु भारत-जापान वन संयुक्त कार्य समूह की 7वीं बैठक, मानव रहित हवाई प्रणालियों में आत्मनिर्भरता दर्शाने वाले IAF ड्रोनॉथॉन 2026, डॉ. भूपेन हजारिका की 100वीं जयंती पर विशेष श्रद्धांजलि, डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने वाले 7वें ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (GFF) 2026, सामरिक रक्षा संबंधों को प्रगाढ़ करने वाले भारत-जापान संयुक्त वायु सेना अभ्यास ‘वीर गार्जियन-2026’, तथा ICAR द्वारा AI से ‘पहाड़ों की गाय’ (मिथुन) की निगरानी का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
साइबर फ्रॉड पर नकेल: फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर (FRI) का प्रभाव
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, ई-गवर्नेंस और साइबर सुरक्षा।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): साइबर सुरक्षा के मूल तत्व, संचार नेटवर्क के माध्यम से साइबर खतरे, आंतरिक सुरक्षा चुनौतियां, और सरकारी नीतियां।
चर्चा में क्यों?
संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (DoT) द्वारा लॉन्च किए गए फाइनेंशियल फ्रॉड रिस्क इंडिकेटर (FRI) ने अपनी शुरुआत के 15 महीनों के भीतर (अगस्त 2026 तक) देश के नागरिकों के ₹5,000 करोड़ से अधिक की धनराशि को साइबर धोखाधड़ी में डूबने से बचाया है। यह तकनीक नागरिकों के पैसे को धोखाधड़ी वाले खातों में स्थानांतरित होने से पहले ही रोक देती है। इससे जांच, FIR दर्ज करने और बैंक खातों को फ्रीज करने जैसी लंबी प्रशासनिक प्रक्रियाओं की आवश्यकता समाप्त हो जाती है।
मुख्य बिंदु: तकनीक, तंत्र और अंतर-मंत्रालयी सहयोग
1. FRI क्या है और यह कैसे काम करता है?
- डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP): FRI को दूरसंचार विभाग (DoT) के ‘डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म’ के तहत विकसित किया गया है।
- रियल-टाइम जोखिम मूल्यांकन: यह बैंकों और वित्तीय संस्थानों को वास्तविक समय में यह आंकने में मदद करता है कि किसी मोबाइल नंबर का उपयोग साइबर अपराध में होने की कितनी संभावना है।
- जोखिम की तीन श्रेणियां: यह प्रणाली विभिन्न मापदंडों के आधार पर मोबाइल नंबरों को तीन श्रेणियों—मध्यम (Medium), उच्च (High), और अत्यधिक उच्च जोखिमbमें वर्गीकृत करती है।
- डेटा के स्रोत: इस जोखिम स्तर का निर्धारण ‘संचार साथी’ पोर्टल पर नागरिक रिपोर्ट, 1930 हेल्पलाइन, I4C के ‘राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल’ (NCRP), और टेलीकॉम कंपनियों (TSPs) के डेटा के आधार पर किया जाता है।
2. रीएक्टिव मॉडल से प्रिवेंटिव मॉडल की ओर बदलाव
- समय और संसाधनों की बचत: पारंपरिक साइबर अपराध नियंत्रण मॉडल ‘प्रतिक्रियात्मक’ (Reactive) था, जिसमें फ्रॉड के बाद FIR, जांच और मनी ट्रेल की आवश्यकता होती थी। FRI इस मॉडल को ‘निवारक’ (Preventive) बनाता है।
- एकीकृत पारिस्थितिकी तंत्र: वर्तमान में 1,600 से अधिक संगठन DIP प्लेटफॉर्म से जुड़े हैं। DoT ने 1,500 से अधिक बैंकों, वित्तीय संस्थानों और नियामकों के लिए 25 से अधिक क्षमता-निर्माण सत्र आयोजित किए हैं।
- वित्तीय दायरे का विस्तार: इस फ्रेमवर्क को अब बैंकिंग और UPI से आगे बढ़ाकर प्रतिभूति बाजार (SEBI), बीमा क्षेत्र (IRDAI) और पेंशन फंड (PFRDA) तक विस्तारित किया जा रहा है।
3. जन-भागीदारी और DoT के अन्य प्रमुख टूल
- संचार साथी पोर्टल: नागरिक ‘चक्षु’ सुविधा के माध्यम से संदिग्ध कॉल, SMS या व्हाट्सएप मैसेज की शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- अन्य संबद्ध प्रणालियाँ: CEIR (खोए/चोरी हुए फोन को ब्लॉक करने के लिए), ASTR (कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सिम सत्यापन), और MNRL (मोबाइल नंबर निरसन सूची)।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| नोडल विभाग | दूरसंचार विभाग (DoT), संचार मंत्रालय |
| मूल प्लेटफॉर्म | डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (DIP – 2024 में लॉन्च) |
| FRI लॉन्च तिथि | 22 मई 2025 |
| प्रमुख नोडल पोर्टल | संचार साथी और चक्षु |
| जोखिम श्रेणियां | 3 श्रेणियां: मध्यम, उच्च, अत्यधिक उच्च |
| साइबर क्राइम हेल्पलाइन | 1930 (राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल) |
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जन सेवा पुरस्कार 2026
- प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय राज्यव्यवस्था और शासन, संवैधानिक निकाय, सामाजिक न्याय।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): संवैधानिक निकाय (सशक्तता, कार्य और उत्तरदायित्व), समाज के कमजोर वर्गों की सुरक्षा के लिए तंत्र और निकाय।
चर्चा में क्यों?
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) के अध्यक्ष श्री किशोर मकवाना को “डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जन सेवा पुरस्कार 2026” से सम्मानित करने की घोषणा की गई है। यह सम्मान आयोग के सामाजिक न्याय और अनुसूचित जाति के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा में दिए गए उत्कृष्ट योगदान के लिए दिया जा रहा है। 9 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 16वें संसद रत्न पुरस्कार समारोह के दौरान नागरिक समाज द्वारा यह पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।
मुख्य बिंदु: पुरस्कार का महत्व, संस्थागत भूमिका और NCSC का संवैधानिक ढांचा
1. पुरस्कार और आयोजक संस्था
- आयोजक: प्राइम प्वाइंट फाउंडेशन और संसद रत्न पुरस्कार समिति।
- प्रकृति: यह नागरिक समाज द्वारा स्थापित एक प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान है।
- उद्देश्य: सामाजिक न्याय, समानता और अनुसूचित जातियों के संवैधानिक अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा के लिए NCSC के प्रयासों को मान्यता देना।
2. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) का संवैधानिक ढांचा
- संवैधानिक स्थिति: NCSC एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय (Constitutional Body) है।
- अनुच्छेद: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 388 के तहत स्थापित।
- संशोधन इतिहास:
- 65वें संविधान संशोधन अधिनियम (1990) द्वारा एक बहु-सदस्यीय आयोग की स्थापना हुई।
- 89वें संविधान संशोधन अधिनियम (2003) द्वारा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (NCSC) और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST – अनुच्छेद 338A) को अलग किया गया।

- संरचना: इसमें एक अध्यक्ष, एक उपाध्यक्ष और तीन अन्य सदस्य होते हैं। इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
3. NCSC की शक्तियां और कार्य
- अधिकारों की रक्षा: अनुसूचित जातियों के संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों के हनन की शिकायतों की जांच करना।
- सिविल कोर्ट की शक्तियां: किसी मामले की जांच करते समय आयोग के पास सिविल कोर्ट की सभी शक्तियां होती हैं। यह किसी को भी समन भेज सकता है और दस्तावेजों की मांग कर सकता है।
- वार्षिक रिपोर्ट: आयोग अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को सौंपता है, जिसे संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत किया जाता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| पुरस्कार का नाम | डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जन सेवा पुरस्कार 2026 |
| पुरस्कार प्राप्तकर्ता | श्री किशोर मकवाना (अध्यक्ष, NCSC) |
| समारोह | 16वां संसद रत्न पुरस्कार समारोह 2026 |
| संवैधानिक अनुच्छेद | अनुच्छेद 338 (Article 338) |
| संबंधित संशोधन | 89वां संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 |
भारत-जापान वन संयुक्त कार्य समूह की 7वीं बैठक: मुख्य बिंदु
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, पर्यावरण और पारिस्थितिकी, जैव विविधता।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): द्विपक्षीय संबंध, पर्यावरण संरक्षण, वन प्रबंधन और वानिकी प्रौद्योगिकी (Forestry Technology)।
चर्चा में क्यों?
बेंगलुरु में भारत और जापान के बीच वन क्षेत्र में सहयोग पर 7वीं संयुक्त कार्य समूह (JWG) बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में दोनों देशों ने 2015 के समझौता ज्ञापन (MoC) के तहत वर्ष 2027–2031 के लिए एक रोडमैप को अंतिम रूप दिया और इसे मंजूरी दी।
मुख्य बिंदु: सहयोग के तीन प्रमुख स्तंभ और अध्ययन दौरा
1. सहयोग के मुख्य विषय
- वनों से बाहर पेड़ (Trees Outside Forests – TOF): वनों के बाहर वृक्ष संसाधनों के आकलन, टिकाऊ प्रबंधन और आनुवंशिक सुधार पर अनुभव साझा किए गए।
- वन आनुवंशिकी (Forest Genetics): आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण, वृक्ष प्रजनन (Tree Breeding), गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री और जर्मप्लाज्म संरक्षण पर ध्यान केंद्रित किया गया।
- फॉरेस्ट स्टैक: वन सूची (Forest Inventory), वन स्टॉक का मूल्यांकन और भू-स्थानिक (Geospatial) एवं रिमोट सेंसिंग निगरानी तकनीकों पर विचार-विमर्श हुआ।
2. प्रतिनिधिमंडल और प्रमुख संस्थागत दौरे
- भारतीय प्रतिनिधिमंडल: श्री रमेश कुमार पांडे (अपर महानिदेशक – वन, MoEFCC) के नेतृत्व में।
- जापानी प्रतिनिधिमंडल: मिस्टर शिमिज़ु कोटारो (उप महानिदेशक, वानिकी एजेंसी, कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन मंत्रालय) के नेतृत्व में।

- स्थान व संस्थान दौरा: बैठक बेंगलुरु में आयोजित हुई। इसके साथ प्रतिनिधिमंडल ने काष्ठ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (IWST), बेंगलुरु का दौरा किया।
- क्षेत्रीय अध्ययन भ्रमण: मैसूर में चंदन कृषि-वानिकी फार्म, प्रसंस्करण इकाई और नागरहोल टाइगर रिजर्व का अध्ययन दौरा शामिल है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| बैठक का नाम | भारत-जापान वन संयुक्त कार्य समूह (7वीं बैठक) |
| आयोजन स्थल | बेंगलुरु, कर्नाटक (8 सितंबर 2026) |
| मूल समझौता | 2015 का समझौता ज्ञापन (MoC) |
| स्वीकृत रोडमैप | 2027–2031 की अवधि के लिए |
| प्रमुख शोध संस्थान | काष्ठ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (IWST), बेंगलुरु |
भारतीय वायु सेना (IAF) ड्रोनॉथॉन 2026: स्वदेशी ड्रोन तकनीक का प्रदर्शन
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की घटनाएं, रक्षा प्रौद्योगिकी, ड्रोन और काउंटर-ड्रोन सिस्टम।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास और उनके अनुप्रयोग, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत, आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा चुनौतियां।
चर्चा में क्यों?
भारतीय वायु सेना (IAF) 14 से 16 सितंबर 2026 तक जैसलमेर के पोखरन रेंज में ‘ड्रोनॉथॉन 2026’ आयोजन कर रही है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य घरेलू निर्माताओं को मानव रहित हवाई प्रणालियों (UAS) और काउंटर मानव रहित हवाई प्रणालियों (CUAS) में अपनी तकनीकी क्षमताओं का प्रदर्शन करने का अवसर देना है।
मुख्य बिंदु: रणनीतिक उद्देश्य, तकनीक और ‘आत्मनिर्भर भारत’
1. आयोजन का मुख्य उद्देश्य
- क्षमता प्रदर्शन: घरेलू ड्रोन निर्माताओं, स्टार्ट-अप्स और इनोवेटर्स को अपनी अत्याधुनिक तकनीकों का प्रदर्शन करने के लिए मंच देना।
- युद्ध प्रभावशीलता का मूल्यांकन: लाइव डिमॉन्स्ट्रेशन के माध्यम से ड्रोन तकनीकों की वास्तविक सैन्य उपयोगिता और लड़ाकू क्षमता को परखना।
- आपसी अनुभव साझा करना: हितधारकों, वायु सेना के अधिकारियों और रक्षा उद्योगों के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान।
2. फोकस वाले प्रमुख तकनीकी क्षेत्र
- निगरानी और रेकी (Surveillance & Reconnaissance): रीयल-टाइम इंटेलिजेंस जुटाना।
- स्वायत्त संचालन (Autonomous Operations): बिना मानवीय हस्तक्षेप के संचालित होने वाली प्रणालियां।
- स्वार्म टेक्नोलॉजी: एक साथ मिलकर काम करने वाले ड्रोन के समूह।
- इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर: सिग्नल जैमिंग और काउंटर-ड्रोन सिस्टम (CUAS)।
3. ‘आत्मनिर्भर भारत’ और रक्षा पारिस्थितिकी तंत्र
- स्वदेशीकरण पर जोर: विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता घटाना।
- भविष्य के लिए तैयार वायु सेना: उभरती सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए IAF को आधुनिक और तकनीक-संचालित बनाना।
- स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा: रक्षा नवाचारों (Defense Innovations) को सीधे सशस्त्र बलों से जोड़ना।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजक संस्था | भारतीय वायु सेना (IAF) |
| आयोजन स्थल | पोखरन रेंज, जैसलमेर (राजस्थान) |
| आयोजन की तिथियां | 14 से 16 सितंबर 2026 |
| मुख्य तकनीकें | UAS, CUAS, Swarm Drones, Electronic Warfare |
| संबंधित राष्ट्रीय पहल | आत्मनिर्भर भारत अभियान |
डॉ. भूपेन हजारिका: 100वीं जयंती पर विशेष श्रद्धांजलि
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की हस्तियां, भारतीय कला, संगीत और संस्कृति।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 1): भारतीय संस्कृति, प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला रूपों, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू।
चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महान गायक, संगीतकार और गीतकार डॉ. भूपेन हजारिका की 100वीं जयंती (100th Birth Anniversary) पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि भूपेन दा की आवाज ने असम की आत्मा और पूर्वोत्तर की भावना को पूरे देश तक पहुंचाया। उनके शताब्दी समारोह की शुरुआत पिछले साल गुवाहाटी में हुई थी।
मुख्य बिंदु: बहुमुखी प्रतिभा, योगदान और राष्ट्रीय सम्मान
1. पूर्वोत्तर की आवाज और सांस्कृतिक दूत
- पूर्वोत्तर का एकीकरण: उन्होंने संगीत के जरिए पूर्वोत्तर भारत को देश की मुख्यधारा से जोड़ा।
- ब्रह्मपुत्र का बार्ड: उनके गीतों में असम की लोक संस्कृति, सामाजिक समरसता और मानवीय भावनाएं झलकती हैं।
- बहुभाषी कलाकार: उन्होंने असमिया, हिंदी, बंगाली और कई अन्य भाषाओं में संगीत दिया।
2. कलात्मक यात्रा और जन-सामाजिक सरोकार
- संगीतकार और निर्देशक: संगीत के अलावा वे एक बेहतरीन फिल्म निर्माता, लेखक और कवि भी थे।
- सिनेमा में योगदान: उन्होंने असमिया सिनेमा को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। ‘रुदाली’ जैसी हिंदी फिल्मों में उनका संगीत बेहद लोकप्रिय रहा।
- सामाजिक प्रभाव: उनके गीत केवल मनोरंजन नहीं थे। वे मानवतावाद, भ्रातृत्व और शोषण के खिलाफ आवाज उठाते थे।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| नाम / उपाधि | डॉ. भूपेन हजारिका (‘ब्रह्मपुत्र का बार्ड’) |
| जन्म / जयंती | 8 सितंबर 1926 (वर्ष 2026 में 100वीं जयंती) |
| जन्म स्थान | सादिया, असम |
| सर्वोच्च नागरिक सम्मान | भारत रत्न (2019 में मरणोपरांत) |
| अन्य प्रमुख पुरस्कार | पद्म विभूषण (2012), दादा साहेब फाल्के पुरस्कार (1992), संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (1987) |
| प्रसिद्ध रचनाएं | ‘दिल हूम हूम करे’ (फिल्म: रुदाली), ‘ओ गंगा बहती हो क्यों’ |
7वां ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (GFF) 2026: भारत का डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर और वित्तीय भविष्य
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, ई-गवर्नेंस, डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर (DPI), वित्तीय समावेशन।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था, समावेशी विकास, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग, आईटी एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा।
चर्चा में क्यों?
मुंबई में 7वें ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (GFF 2026) का आयोजन किया जा रहा है। वर्ष 2020 में अपनी शुरुआत के बाद से, GFF दुनिया के सबसे बड़े फिनटेक सम्मेलनों में से एक बन गया है। यह आयोजन डिजिटल फाइनेंस और फिनटेक इनोवेशन में भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभुत्व को दर्शाता है।
मुख्य बिंदु: थीम, तकनीक, वित्तीय समावेशन और नियामक ढांचा
1. GFF 2026 की मुख्य थीम और आयोजक संस्थाएं
- आधिकारिक थीम: “Potential to Impact: Agentic AI | Tokenisation | Quantum: Trusted, Connected, Global Systems for Inclusive Finance.”
- तीन स्तंभ तकनीकें:
- Agentic AI: वित्तीय प्रणालियों को रियल-टाइम में निर्णय लेने और स्वचालित कार्यप्रवाह (Workflows) संचालित करने में सक्षम बनाता है।
- टोकनाइजेशन: परिसंपत्तियों को डिजिटल इकाइयों में बदलकर तरलता (Liquidity) और त्वरित निपटान को बढ़ावा देता है।
- क्वांटम: क्वांटम-सुरक्षित क्रिप्टोग्राफी और जोखिम अनुकूलन के माध्यम से डेटा सुरक्षा को अभेद्य बनाता है।

- मुख्य आयोजक: पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (PCI), नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI), और फिनटेक कन्वर्जेंस काउंसिल (FCC)।
- सहयोगी संस्थाएं: MeitY, वित्त मंत्रालय (DFS), नीति आयोग, MEA (NEST डिवीजन), RBI, SEBI, IFSCA और PFRDA।
2. फिनटेक और भारत का DPI मॉडल (JAM Trinity & UPI)
- फिनटेक: यह वित्तीय सेवाओं को अधिक कुशल, सुलभ और सस्ता बनाने के लिए प्रौद्योगिकी (AI, DLT, APIs, क्लाउड कंप्यूटिंग) का उपयोग है।
- JAM ट्रिनिटी (जन धन-आधार-मोबाइल): डिजिटल वित्तीय समावेशन का आधार है।
- अगस्त 2026 तक 59.15 करोड़ जन धन खाते खोले जा चुके हैं।
- आधार नामांकन 144 करोड़ (मार्च 2026 तक) के पार पहुंच चुका है।
- UPI की वैश्विक सफलता: जुलाई 2026 में UPI ने ₹29.88 लाख करोड़ मूल्य के 2,365.8 करोड़ लेनदेन संसाधित किए। UPI विश्व के लगभग 50% रियल-टाइम डिजिटल लेनदेन को संभालता है और 11 देशों में चालू है।

- वित्तीय समावेशन सूचकांक (FI-Index): भारत का FI-इंडेक्स मार्च 2017 के 43.4 से बढ़कर मार्च 2026 में 70.0 हो गया है।
- अन्य प्लेटफॉर्म: DigiLocker के 73.53 करोड़ पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं। वहीं प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के तहत सितंबर 2026 तक कुल ₹53.26 लाख करोड़ सीधे लाभार्थियों के खातों में भेजे गए हैं।
3. मजबूत नियामक और उपभोक्ता संरक्षण ढांचा
- SRO-FT फ्रेमवर्क (मई 2024): RBI द्वारा फिनटेक क्षेत्र के लिए स्व-नियामक संगठनों (Self-Regulatory Organisations) का ढांचा।
- रेगुलेटरी सैंडबॉक्स (अगस्त 2019): नियंत्रित वातावरण में नए वित्तीय उत्पादों के परीक्षण की अनुमति।
- डेटा सुरक्षा: डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 और इसके नियम 2025।
- डिजिटल फ्रॉड से बचाव: SACHET पोर्टल (अवैध जमा के खिलाफ), हेल्पलाइन 1930 और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजन | 7वां ग्लोबल फिनटेक फेस्ट (मुंबई, 8-11 सितंबर 2026) |
| मुख्य आयोजक | PCI, NPCI, और FCC |
| FI-Index 2026 | 70.0 (RBI द्वारा जारी) |
| UPI की वैश्विक पहुंच | वैश्विक रियल-टाइम डिजिटल लेनदेन का ~50%, 11 देशों में स्वीकार्य |
| डेटा सुरक्षा कानून | डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (DPDP) अधिनियम 2023 / नियम 2025 |
भारत-जापान संयुक्त वायु सेना अभ्यास: वीर गार्जियन-2026
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, प्रमुख सैन्य अभ्यास।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): भारत और इसके पड़ोसी/द्विपक्षीय संबंध, इंडो-पैसिफिक में भारत-जापान रक्षा सहयोग।
चर्चा में क्यों?
भारतीय वायु सेना (IAF) और जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स (JASDF) के बीच द्विपक्षीय वायु सेना अभ्यास वीर गार्जियन-2026 का आयोजन 9 सितंबर से 22 सितंबर 2026 तक वायु सेना स्टेशन जोधपुर में किया जा रहा है। यह अभ्यास दोनों देशों के बीच गहराते रणनीतिक रक्षा संबंधों और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में परिचालन तालमेल को मजबूत करने का संकेत है।
मुख्य बिंदु: प्रतिभागी विमान, परिचालन उद्देश्य और रणनीतिक महत्व
1. भाग लेने वाले विमान और बल
- भारतीय वायु सेना (IAF): अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों का एक विविध बेड़ा इसमें शामिल है।
- स्वदेशी LCA तेजस
- Su-30 MKI
- राफेल
- जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स (JASDF): अपने मुख्य लड़ाकू विमान F-2A के साथ भाग ले रहा है।
2. अभ्यास के प्रमुख उद्देश्य और गतिविधियां
- उन्नत परिचालन मिशन: 14-दिवसीय इस अभ्यास में दोनों देशों के एयर वारियर्स उन्नत सामरिक और कॉम्बैट मिशनों में हिस्सा लेंगे।
- विषय वस्तु विशेषज्ञों का आदान-प्रदान (SMEE): मिशन योजना, एयरोस्पेस सुरक्षा और विमान इंजीनियरिंग जैसे जटिल पहलुओं पर अनुभव साझा किए जाएंगे।
- इंटर-ऑपरेबिलिटी: दोनों वायु सेनाओं के बीच संयुक्त योजना बनाने और वास्तविक युद्ध स्थितियों में तालमेल बिठाने की क्षमता को निधारा जाएगा।
3. भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी
- एयरोस्पेस तालमेल: यह अभ्यास रक्षा संबंधों को और गहरा करता है।
- क्षेत्रीय शांति व स्थिरता: स्वतंत्र, खुले और समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के निर्माण में सहयोग।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| अभ्यास का नाम | वीर गार्जियन-2026 |
| प्रकृति | द्विपक्षीय वायु सेना अभ्यास (Bilateral Air Exercise) |
| प्रतिभागी देश | भारत (IAF) और जापान (JASDF) |
| आयोजन स्थल | एयर फोर्स स्टेशन जोधपुर, राजस्थान |
| आयोजन तिथि | 9 से 22 सितंबर 2026 |
| भारत के प्रमुख विमान | LCA तेजस, सुखोई-30 MKI, राफेल |
| जापान का प्रमुख विमान | F-2A |
| अन्य भारत-जापान अभ्यास | धर्म गार्जियन (थल सेना), जिमेक्स/JIMEX (नौसेना), शिन्यू मैत्री (वायु सेना) |
AI तकनीक से होगी ‘पहाड़ों की गाय’ (मिथुन) की निगरानी: ICAR का नया मुकाम
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की वैज्ञानिक तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), कृषि और पशुपालन।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग, कृषि में AI का प्रयोग, पशुपालन का अर्थशास्त्र और पूर्वोत्तर भारत में आजीविका।
चर्चा में क्यों?
नागालैंड स्थित ICAR-नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन मिथुन (ICAR-NRC on Mithun) के वैज्ञानिकों ने मिथुन (Bos frontalis) की गतिविधियों पर 24 घंटे नजर रखने के लिए एक AI-आधारित रियल-टाइम ट्रैकिंग सिस्टम तैयार किया है। यह शोध प्रसिद्ध वैज्ञानिक पत्रिका Engineering Research Express (2026) में प्रकाशित हुआ है। यह तकनीक पशुओं के स्वास्थ्य, प्रजनन और व्यवहार की सटीक जानकारी बिना उन्हें छुए (Non-contact) प्रदान करेगी।
मुख्य बिंदु: तकनीक, मिथुन का महत्व और भावी संभावनाएं
1. मिथुन क्या है और इसका क्या महत्व है?
- पहाड़ों की गाय (Cattle of the Hills): मिथुन पूर्वोत्तर भारत (विशेषकर नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर और मिजोरम) की एक प्रमुख पशु प्रजाति है।
- सामाजिक-सांस्कृतिक महत्व: यह पूर्वोत्तर की जनजातीय संस्कृति, सामाजिक प्रतिष्ठा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक अभिन्न अंग है।
- आजीविका और खाद्य सुरक्षा: यह मुख्य रूप से मांस, दूध और चमड़े के लिए पाला जाता है।
2. AI तकनीक कैसे काम करती है?
- मॉडल और तकनीक: इसमें व्यवहार का पता लगाने के लिए YOLOv8n मॉडल और प्रत्येक पशु को एक विशिष्ट पहचान (ID) देकर ट्रैक करने के लिए DeepSORT तकनीक का संयोजन किया गया है।
- सटीकता और गति: यह AI मॉडल 99.5% सटीकता (mAP@0.5) और 31 फ्रेम प्रति सेकंड की गति से काम करता है।
- इनफ्रारेड नाइट विजन: 12 एचडी सीसीटीवी कैमरों के जरिए यह प्रणाली रात के अंधेरे, छाया, और खराब मौसम में भी सटीक परिणाम देती है।
- मुख्य 4 व्यवहारों की ट्रैकिंग:
- चरना (Feeding)
- खड़े रहना (Standing)
- बैठना/लेटना (Lying)
- माउंटिंग/प्रजनन व्यवहार (Mounting – Oestrus Management)
3. पारम्परिक निगरानी की तुलना में लाभ
- श्रम की बचत: पारंपरिक रूप से पशुओं की देखभाल मैनुअल होती थी, जो रात के समय बेहद कठिन थी।
- बीमारी का जल्द पता लगाना: खान-पान या बैठने के ढर्रे में बदलाव से बीमारी का शुरुआती अवस्था में ही पता चल जाएगा।
- प्रजनन प्रबंधन: माउंटिंग व्यवहार की पहचान से समय पर प्रजनन (Breeding) कराना आसान होगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| प्रजाति (वैज्ञानिक नाम) | मिथुन (Bos frontalis) |
| उपनाम | ‘Cattle of the Hills’ (पहाड़ों की गाय) |
| मुख्य शोध संस्थान | ICAR-NRC on Mithun (झरनापानी, नागालैंड) |
| सहयोगी संस्थान | NIT नागालैंड, नागालैंड यूनिवर्सिटी और क्राइस्ट यूनिवर्सिटी |
| AI मॉडल और तकनीक | YOLOv8n (डिटेक्शन) + DeepSORT (ट्रैकिंग) |