8 September 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन घटाने हेतु नीति आयोग द्वारा PACT और ZET मार्केटप्लेस का शुभारंभ (भारत में माल ढुलाई क्षेत्र का विद्युतीकरण), देश के प्रमुख पारंपरिक उद्योग और इसके आर्थिक लाभों पर आधारित जूट: भारत का ‘गोल्डन फाइबर’ और इसका आर्थिक महत्व, मत्स्य पालन में जल दक्षता बढ़ाने वाली अगली पीढ़ी की एक्वाकल्चर तकनीकें (RAS और बायो-फ्लॉक), नवाचार व एआई क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को मजबूती देने वाले भारत-स्वीडन AI और डिजिटल सहयोग (SITAC संवाद), वायु गुणवत्ता प्रबंधन की प्रगति दर्शाने वाले स्वच्छ वायु सर्वेक्षण पुरस्कार 2026 और NCAP की समीक्षा, तथा नगर निकायों और जन-भागीदारी का नया रोडमैप का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
भारत में माल ढुलाई क्षेत्र का विद्युतीकरण: नीति आयोग द्वारा PACT और ZET मार्केटप्लेस का शुभारंभ
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, अवसंरचना।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): बुनियादी ढांचा (परिवहन), पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, हरित गतिशीलता (Green Mobility)।
चर्चा में क्यों?
नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने 5वें e-FAST India Summit 2026 के दौरान दो ऐतिहासिक प्लेटफॉर्म लॉन्च किए: PACT (Platform for Aggregating Clean Transport) और ZET Marketplace (Zero Emission Truck Marketplace)। इसका प्राथमिक लक्ष्य भारत के फ्रेट सेक्टर (माल ढुलाई) को तेजी से इलेक्ट्रिक वाहनों की ओर स्थानांतरित करना और राष्ट्रीय नेट ज़ीरो 2070 लक्ष्य को गति देना है।
मुख्य बिंदु: रणनीतिक महत्व, बाजार की चुनौतियां और निवारक समाधान
1. माल ढुलाई क्षेत्र की स्थिति और चुनौतियां
- उत्सर्जन में उच्च हिस्सेदारी: भारी वाणिज्यिक ट्रक कुल वाहनों का मात्र 3-4% हैं, लेकिन परिवहन क्षेत्र के कार्बन उत्सर्जन में इनका योगदान 35% से अधिक है।
- सड़क परिवहन पर निर्भरता: भारत का लगभग 70% माल सड़क मार्ग से ढोया जाता है।
- कम बिक्री दर: वर्ष 2025 में केवल 800 भारी इलेक्ट्रिक ट्रक ही बिके।
- मुख्य बाधाएं: लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों का बिखराव, अत्यधिक वित्तपोषण लागत और कॉरिडोर-आधारित योजना का अभाव।
2. नई पहलों की भूमिका (PACT और ZET Marketplace)
- माग एकत्रीकरण (Demand Aggregation): PACT प्लेटफॉर्म विभिन्न लॉजिस्टिक कंपनियों और शिपर्स की मांग को एक साथ जोड़ता है।
- कॉरिडोर-आधारित परियोजनाएं: प्रमुख फ्रेट कॉरिडोर में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और ई-ट्रकों का समन्वित नियोजन।
- वित्तीय नवाचार: ब्लेंडेड फाइनेंस और लीजिंग मॉडल के ज़रिए पूंजी की लागत को डीजल ट्रकों के समकक्ष लाना।
- बाजार की भूमिका: सरकार केवल संसाधन आवंटन करने के बजाय ऐसा बाजार पारिस्थितिकी तंत्र बना रही है, जहाँ उद्योग स्वयं समाधान खोजें।
3. समर्थित राष्ट्रीय योजनाएं
- मांग पक्ष प्रोत्साहन: FAME, PM e-DRIVE, PARIVARTAN, और PM e-Bus Sewa।
- आपूर्ति पक्ष प्रोत्साहन: ऑटोमोबाइल और एडवांस्ड केमिस्ट्री सेल्स (ACC) के लिए PLI योजनाएं।
- इंफ्रास्ट्रक्चर: तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशनों का विस्तार।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजन मंच | 5वां e-FAST India Summit 2026 |
| आयोजक संस्था | नीति आयोग (NITI Aayog) |
| लॉन्च की गई पहलें | PACT और ZET Marketplace |
| e-FAST का पूर्ण रूप | Electric Freight Accelerator for Sustainable Transport |
जूट: भारत का ‘गोल्डन फाइबर’ और इसका आर्थिक महत्व
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, कृषि उपज, आर्थिक और सामाजिक विकास।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): मुख्य फसलें और उनके पैटर्न, कृषि आधारित उद्योग, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, तकनीकी वस्त्र (Technical Textiles) और पर्यावरण संरक्षण।
चर्चा में क्यों?
भारत दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा जूट (Raw Jute) और जूट उत्पादों का उत्पादक देश बन गया है। वर्ष 2025-26 में भारत ने 94.03 लाख गांठ (Bales) कच्चे जूट का उत्पादन किया। जूट उद्योग देश के लगभग 40 लाख किसान परिवारों और 3.70 लाख मिल श्रमिकों की आजीविका को सहारा देता है।
मुख्य बिंदु: जूट क्षेत्र का महत्व, नीतियां और नई तकनीकें
1. फसल की भौगोलिक आवश्यकताएं और इतिहास
- जलवायु: गर्म और आर्द्र जलवायु, 700-1,500 मिमी वर्षा की आवश्यकता।
- अवधि: मार्च-अप्रैल में बुआई होती है और 100-110 दिनों में फसल पकती है।
- प्रमुख राज्य: पश्चिम बंगाल सबसे बड़ा उत्पादक है। इसके बाद बिहार, असम, ओडिशा और झारखंड का स्थान है।
- ऐतिहासिक संदर्भ: 1947 में विभाजन के बाद 80% जूट क्षेत्र पूर्वी पाकिस्तान में चला गया, जबकि मिलें भारत में रह गईं। इसे ठीक करने के लिए 1949 में ‘ग्रो मोर जूट’ अभियान चलाया गया।
2. जूट के बहुआयामी उपयोग
- जूट जियोटेक्सटाइल (JGT): यह एक सिविल इंजीनियरिंग सामग्री है। इसका उपयोग मृदा अपरदन रोकने, सड़कों और रेलवे ट्रैक के निर्माण में होता है।
- खाद्य और पोषण: जूट की पत्तियां खाद्य पदार्थ के रूप में उपयोग की जाती हैं। इनमें विटामिन, कैल्शियम और फाइबर प्रचुर मात्रा में होते हैं।
- टेक्सटाइल व परिधान: राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय एथलीटों ने जूट-विस्कोस मिश्रित कपड़े पहने थे। इसे NIFT नई दिल्ली और राष्ट्रीय जूट बोर्ड ने मिलकर तैयार किया।
3. प्रमुख सरकारी नीतियां और योजनाएं
- MSP सहायता: FY 2026-27 के लिए कच्चे जूट का न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹5,925 प्रति क्विंटल तय किया गया है।
- जूट पैकेजिंग सामग्री अधिनियम 1987: 100% खाद्यान्न और 20% चीनी को जूट की बोरियों में पैक करना अनिवार्य है।

- राष्ट्रीय जूट विकास कार्यक्रम (NJDP): यह एक मुख्य योजना है। इसके तहत JUTE-ICARE योजना और जूट विविधीकरण योजना संचालित की जाती हैं।
- JUTE-ICARE: उन्नत रे Retting तकनीकों और प्रमाणित बीजों के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया जाता है।
4. डिजिटल और तकनीकी पहलें
- JUTE-SMART Portal: यह जूट की बोरी खरीद और आपूर्ति के लिए लागू किया गया एक ई-गवर्नेंस सॉफ्टवेयर है।
- ISRO की मदद (Jute Crop Information System): ISRO के NRSC ने जूट फसलों की निगरानी के लिए मोबाइल ऐप ‘BHUVAN JUMP’ और वेब प्लेटफॉर्म ‘PATSAN’ विकसित किया है।
- गुणवत्ता प्रमाणन: असली और मानक जूट उत्पादों की पहचान के लिए ‘Jute Mark India’ लोगो जारी किया गया है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| वैश्विक स्थिति | भारत दुनिया का सबसे बड़ा कच्चा जूट और जूट सामान उत्पादक है (वैश्विक उत्पादन का 75%) |
| शीर्ष उत्पादक राज्य | पश्चिम बंगाल (कुल 120 में से 89 जूट मिलें यहीं हैं) |
| कच्चे जूट का MSP (2026-27) | ₹5,925 प्रति क्विंटल |
| MSP नोडल एजेंसी | भारतीय जूट निगम (JCI) |
| डिजिटल निगरानी उपकरण | BHUVAN JUMP ऐप और PATSAN वेब पोर्टल (ISRO द्वारा निर्मित) |
| अनिवार्य पैकेजिंग नियम | 100% खाद्यान्न और 20% चीनी |
भारत में अगली पीढ़ी की एक्वाकल्चर: RAS और बायो-फ्लॉक तकनीक का विकास
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र, पर्यावरण और जैव विविधता।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): पशुपालन का अर्थशास्त्र, प्रौद्योगिकी मिशन, नीतियां, खाद्य सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला और ब्लू इकॉनमी।
चर्चा में क्यों?
भारत के मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर क्षेत्र ने रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत आधुनिक तकनीकों जैसे रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) और बायो-फ्लॉक टेक्नोलॉजी (Bio-floc) के बड़े पैमाने पर अपनाए जाने से भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक देश बन गया है।
मुख्य बिंदु: वैश्विक स्थिति, उन्नत तकनीकें और रणनीतिक लाभ
1. भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र की वर्तमान स्थिति
- उत्पादन का दायरा: भारत दुनिया में कुल मछली उत्पादन का लगभग 8% योगदान देता है। यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा एक्वाकल्चर उत्पादक और झींगा (Shrimp) का सबसे बड़ा उत्पादक तथा निर्यातक है।
- उत्पादन आंकड़े: कुल वार्षिक मछली उत्पादन 2013-14 के 95.79 लाख टन से बढ़कर 2024-25 में रिकॉर्ड 198 लाख टन पहुंच गया।
- अंतर्देशीय (Inland) वृद्धि: अंतर्देशीय मत्स्य पालन उत्पादन में 147% का उछाल आया है (61.36 लाख टन से 151.60 लाख टन)।
- सीफूड निर्यात: समुद्री उत्पादों का निर्यात 2013-14 के ₹30,213 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹73,890 करोड़ की सर्वकालिक ऊंचाई पर आ गया।
- आजीविका सहायता: यह क्षेत्र लगभग 3 करोड़ मछुआरों और मत्स्य पालकों को प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करता है।
2. अगली पीढ़ी की तकनीकें: RAS और बायो-फ्लॉक
- रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS): यह एक बंद (Controlled) वातावरण में जल शोधन और पुनर्चक्रण प्रणाली पर काम करता है। यह 90% से 95% पानी को रीसायकल करता है, जिससे कम पानी में शहरी उपभोग केंद्रों के पास भी मछली पालन संभव होता है।
- बायो-फ्लॉक टेक्नोलॉजी (Bio-floc): इसमें लाभकारी सूक्ष्मजीवों (Microorganisms) का उपयोग करके पानी की गुणवत्ता में सुधार किया जाता है। यह कचरे को प्रोटीन युक्त भोजन में बदल देता है, जिससे भोजन की लागत घटती है।
- PMMSY के तहत स्वीकृतियां: सरकार ने PMMSY के तहत 9,467 RAS यूनिट्स और 4,573 बायो-फ्लॉक यूनिट्स को मंजूरी दी है, जिसमें ₹4,120 करोड़ का निवेश शामिल है।
3. क्षेत्रीय विस्तार और निर्यात रणनीति
- शीतकालीन/पहाड़ी क्षेत्र: जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में ट्राउट जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के पालन के लिए RAS तकनीक अपनाई जा रही है।
- लवणीय एवं सजावटी मत्स्य पालन: खारे पानी के क्षेत्रों में निर्यात-उन्मुख झींगा और सजावटी (Ornamental) मछलियों के व्यावसायिक उत्पादन को गति मिली है।
- गुणवत्ता और ट्रैसेबिलिटी: इन नियंत्रित प्रणालियों से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में गुणवत्ता, बायोसियोरिटी और ट्रैसेबिलिटी सुनिश्चित करना आसान हो गया है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| वैश्विक रैंकिंग | दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा मछली उत्पादक (8% वैश्विक हिस्सेदारी) |
| झींगा उत्पादन | भारत दुनिया का सबसे बड़ा झींगा उत्पादक और निर्यातक है |
| मुख्य योजना | प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) |
| सार्वजनिक निवेश | 2015 से अब तक ₹39,272 करोड़ से अधिक का कुल आवंटन |
| RAS की मुख्य विशेषता | 90-95% पानी का पुनर्चक्रण (Recycle) |
| स्वीकृत आधुनिक यूनिट्स | 9,467 RAS और 4,573 बायो-फ्लॉक यूनिट्स |
| सीफूड निर्यात (2025-26) | ₹73,890 करोड़ का रिकॉर्ड स्तर |
भारत-स्वीडन AI और डिजिटल सहयोग: SITAC संवाद
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): भारत और उसके पड़ोसी-द्विपक्षीय संबंध, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और आईटी क्षेत्र में विकास।
चर्चा में क्यों?
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत ‘इंडिया-AI मिशन’ ने नई दिल्ली में स्वीडन के प्रतिनिधिमंडल के साथ एक उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता की। यह बैठक स्वीडन-इंडिया टेक्नोलॉजी एंड AI कॉरिडोर (SITAC) के तहत आयोजित की गई थी।
मुख्य बिंदु: रणनीतिक साझेदारी और AI पारिस्थितिकी तंत्र
1. दोनों देशों के मुख्य योगदान
- भारत का पक्ष: विशाल बाजार आधार, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), कुशल AI प्रतिभाएं और विविध डेटासेट।
- स्वीडन का पक्ष: उन्नत विनिर्माण (Manufacturing), औद्योगिक AI, शोध क्षमता और गहरी तकनीकी विशेषज्ञता।
2. इंडिया-AI मिशन के मुख्य प्राथमिकता वाले क्षेत्र
- कम्प्यूट क्षमता (Compute Capacity): मजबूत AI इंफ्रास्ट्रक्चर बनाना।
- डेटासेट और मॉडल: स्वदेशी और क्षेत्र-विशिष्ट (Domain-specific) AI मॉडल तैयार करना।
- स्किलिंग और स्टार्ट-अप: फ्यूचर स्किल्स को बढ़ावा देना और AI स्टार्ट-अप्स को वित्तीय सहायता देना।
- सुरक्षित AI: सुरक्षित और विश्वसनीय AI (Safe & Trusted AI) के लिए नीतिगत ढांचा।
3. प्रमुख भाग लेने वाली स्वीडिश व भारतीय कंपनियां
- स्वीडिश प्रतिनिधिमंडल: वोल्वो ग्रुप, साब, आइकिया, ऑटोलाइव और सैंडविक।
- भारतीय प्रतिनिधिमंडल: टीसीएस, टेक महिंद्रा, इनफू, कोरोवर और ज्ञानी।
4. सहयोग के संभावित क्षेत्र
- इंडस्ट्रियल AI: विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स में AI का एकीकरण।
- पायलट प्रोजेक्ट और टेस्टबेड: संयुक्त शोध और वाणिज्यिक साझेदारी (Commercial Partnerships)।
- डेटा गवर्नेंस: डेटा लोकलाइजेशन और उत्तरदायी AI अपनाने पर जोर।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| मुख्य मंच | स्वीडन-इंडिया टेक्नोलॉजी एंड AI कॉरिडोर (SITAC) |
| आयोजक मंत्रालय | इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) |
| कार्यान्वयन एजेंसी | इंडिया-AI मिशन |
| स्वीडिश प्रतिनिधि संस्था | बिजनेस स्वीडन और स्वीडिश दूतावास |
| प्राथमिकता विषय | इंडस्ट्रियल AI, सेफ AI, कम्प्यूट कैपेसिटी और डेटा गवर्नेंस |
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण पुरस्कार 2026 और NCAP की समीक्षा
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, पर्यावरण और पारिस्थितिकी, वायु प्रदूषण।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन, शहरी अवसंरचना।
चर्चा में क्यों?
‘अंतर्राष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस’ पर केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा आयोजित ‘स्वच्छ वायु दिवस 2026‘ कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत 5वें स्वच्छ वायु सर्वेक्षण पुरस्कार प्रदान किए गए। इस अवसर पर देश के 130 NCAP शहरों में सड़क की धूल, कचरा प्रबंधन, वाहन और औद्योगिक उत्सर्जन नियंत्रण जैसे 8 प्रमुख मापदंडों पर जमीनी प्रयासों का मूल्यांकन कर 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में लखनऊ को प्रथम, इंदौर को द्वितीय तथा जबलपुर को तृतीय स्थान दिया गया।
मुख्य बिंदु: सर्वेक्षण मानदंड, प्रगति और प्रमुख दिशा-निर्देश
1. स्वच्छ वायु सर्वेक्षण पुरस्कार 2026 की मुख्य बातें
- संस्थागत भागीदारी: समारोह की अध्यक्षता राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने की। इसमें CPCB, CAQM और MoEFCC के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
- मूल्यांकन के मुख्य आधार: शहरों का मूल्यांकन 8 प्रमुख घटकों पर हुआ—सड़क की धूल, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (SWM), वाहन उत्सर्जन, औद्योगिक प्रदूषण, निर्माण व तोड़फोड़ (C&D) अपशिष्ट, अन्य उत्सर्जन (DG सेट आदि), सूचना-शिक्षा-संचार (IEC) गतिविधियां और जन-जागरूकता।
- मूल्यांकन प्रक्रिया: 130 NCAP शहरों का स्व-मूल्यांकन, राज्य स्तरीय निगरानी समिति की स्वीकृति, CPCB द्वारा मूल्यांकन और स्वतंत्र समितियों द्वारा मैदानी सत्यापन के बाद विजेताओं का चयन किया गया।
2. राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) की उपलब्धियां (2025-26)
- वित्तीय सहायता: 130 NCAP शहरों को वायु प्रदूषण शमन उपायों के लिए ₹16,425 करोड़ का प्रदर्शन-लिंक्ड ग्रांट दिया गया है।
- PM10 में सुधार (2017-18 की तुलना में):
- 130 में से 108 शहरों के PM10 स्तर में सुधार दर्ज हुआ।
- 72 शहरों ने PM10 सांद्रता में 20% से अधिक की कमी दर्ज की।
- 26 शहरों ने 40% से अधिक की भारी गिरावट हासिल की।
- 14 शहर राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों (NAAQS) को पूरा करने में सफल रहे।
3. NGT और MoEFCC के प्रमुख दिशा-निर्देश
- संपूर्ण समाज दृष्टिकोण (Whole of Society Approach): NGT अध्यक्ष ने रेखांकित किया कि वायु प्रदूषण सीमाओं में नहीं बंधा है, इसलिए स्थानीय निकायों को जन-भागीदारी और आधुनिक तकनीक का उपयोग करना होगा।

- PRANA पोर्टल: यह NCAP के तहत शामिल 130 शहरों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के विभिन्न मापदंडों की रीयल-टाइम ट्रैकिंग करता है।
- बेस्ट प्रैक्टिस संग्रह: शहरों और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (SPCBs) द्वारा अपनाए गए सफल मॉडलों को अन्य शहरों में दोहराने (Replicate) के लिए यह गाइड जारी की गई।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| विशेष दिवस | स्वच्छ वायु दिवस (7 सितंबर 2026) |
| आयोजक मंत्रालय | पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) |
| अवार्ड का नाम | 5वां स्वच्छ वायु सर्वेक्षण पुरस्कार |
| ट्रैकिंग पोर्टल | PRANA पोर्टल (Portal for Regulation of Air-pollution in Non-Attainment cities) |
NCR में वायु प्रदूषण पर नकेल: नगर निकायों और जन-भागीदारी का नया रोडमैप
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, पर्यावरण और पारिस्थितिकी, वायु प्रदूषण।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन, शहरी अवसंरचना, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन।
चर्चा में क्यों?
‘अंतर्राष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस’ पर केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में एक विशेष संवाद आयोजित हुआ। इसमें राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के 63 शहरों के मेयरों और शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) के जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस ऐतिहासिक बैठक का मुख्य उद्देश्य NCR में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर जन-भागीदारी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देना था।
मुख्य बिंदु: रणनीतिक पहल, स्थानीय निकायों की भूमिका और नए नियम
1. ग्राउंड-लेवल लीडरशिप और वैज्ञानिक दृष्टिकोण
- प्रथम प्रतिक्रियाकर्ता (First Responders): शहरी स्थानीय निकाय जमीन पर प्रदूषण नियंत्रण के लिए पहली ढाल हैं।
- डेटा-संचालित रणनीति: वैज्ञानिक और डेटा-आधारित कार्य योजनाओं को केवल कागजों तक सीमित न रखकर वार्ड स्तर पर लागू करना अनिवार्य है।
- क्लीन एयर प्लेज: सभी जनप्रतिनिधियों ने अपने क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए नागरिकों को एकजुट करने का संकल्प लिया।
2. नए अपशिष्ट प्रबंधन नियम और प्रवर्तन
- Solid Waste Management Rules, 2026: ठोस कचरे के निस्तारण और खुले में प्लास्टिक तथा बायोमास (कूड़ा) जलाने पर रोक के नियमों को कड़ाई से लागू करने का निर्देश दिया गया।
- C&D Waste Management Rules, 2025: निर्माण और तोड़फोड़ (Construction & Demolition) से उठने वाली धूल को रोकने के लिए नए दिशानिर्देशों का पालन जरूरी है।
- गैर-अनुरूप उद्योग और वाहन: रिहायशी इलाकों में अवैध रूप से चल रही प्रदूषणकारी इकाइयों और अनधिकृत वाहनों पर सख्त निगरानी की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों को सौंपी गई।
3. हरियाली और धूल नियंत्रण के उपाय
- सड़कों के किनारे ग्रीन कवर: धूल प्रदूषण (Dust Pollution) को रोकने के लिए सड़कों के किनारे स्थानीय और सूखा-रोधी (Drought-resistant) घास की प्रजातियां उगाने की सलाह दी गई।

- संस्थागत ढांचा: NCR में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए CAQM (Commission for Air Quality Management) एक केंद्रीय संस्था के रूप में कार्य कर रहा है, जो स्थानीय निकायों को तकनीकी सहायता प्रदान करेगा।
- केंद्रीय समीक्षा: पर्यावरण मंत्रालय द्वारा NCR के नगर निकायों और राज्य सरकारों के साथ 25 से अधिक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठकें की जा चुकी हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| मुख्य निकाय | वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM – आयोग अधिनियम 2021 द्वारा गठित) |
| भागीदारी दायरा | NCR के 63 शहरों के मेयर और स्थानीय प्रतिनिधि |
| नवीनतम नियम | ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम 2026 एवं C&D वेस्ट प्रबंधन नियम 2025 |
| धूल नियंत्रण उपाय | सड़कों के किनारे सूखा-रोधी घास (Drought-resistant grass) का रोपण |
| नोडल मंत्रालय | केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) |