7 September 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत छोटे शहरों में नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने वाले 6वें RISE सम्मेलन 2026 (कोलकाता में भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों के स्टार्टअप्स पर जोर), पर्यावरणीय शासन और सतत विकास को सुदृढ़ करने वाले राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों के 16वें राष्ट्रीय सम्मेलन, अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस 2026 (संकट से पुनरुद्धार की दिशा में भारत), उद्योग 4.0, रोबोटिक्स और एआई में तकनीकी आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने वाले साइबर-फिजिकल सिस्टम्स (CPS), तथा पर्वतीय क्षेत्रों में जलवायु जोखिमों से निपटने के लिए हिमालयी राज्यों में GLOF और हिमस्खलन जोखिम प्रबंधन (केंद्रीय गृह सचिव द्वारा समीक्षा) का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
6वां RISE सम्मेलन 2026: कोलकाता में भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों के स्टार्टअप्स पर जोर
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और सरकारी नीतियां।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-प्रौद्योगिकी, बायो-प्रौद्योगिकी तथा स्वदेशी तकनीक विकसित करना।
चर्चा में क्यों?
कोलकाता में 6ठे RISE सम्मेलन 2026 का उद्घाटन केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा किया गया । इस सम्मेलन का उद्देश्य लैब-टू-मार्केट यात्रा को गति देना और छोटे शहरों के स्टार्टअप्स को उद्योग व विज्ञान से जोड़ना है।
मुख्य बिंदु: स्टार्टअप इकोसिस्टम, अनुसंधान विकास और नवाचार पहल
1. टियर-2 और टियर-3 शहरों का स्टार्टअप पावरहाउस
- भारत के 50-60% से अधिक स्टार्टअप मेट्रो शहरों के बाहर (टियर-2 और टियर-3) से आ रहे हैं।
- छोटे शहरों के युवा इनोवेटर्स बड़े महानगरों के समकक्ष बेहतरीन प्रदर्शन कर रहे हैं।
- अब वैज्ञानिक संस्थानों को स्वयं इन युवाओं तक पहुँचने की आवश्यकता है।
- RISE सम्मेलन उद्योग, शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को एक साझा मंच प्रदान करता है।
2. ‘Whole-of-Science’ दृष्टिकोण और संस्थागत ढांचा
- सरकार ‘Whole-of-Government’ से आगे बढ़कर ‘Whole-of-Science’ मॉडल अपना रही है।
- CSIR प्रयोगशालाएं, IIT खड़गपुर, IISER कोलकाता, NIT दुर्गापुर और अटल टिंकरिंग लैब्स मिलकर पूर्वी भारत में एक ज्ञान गलियारा (Knowledge Corridor) बना रही हैं।
- अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने के लिए ₹1 लाख करोड़ का RDI फंड और ANRF (अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन) स्थापित किया गया है।
- अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और बायोटेक जैसे निजी क्षेत्रों के दरवाजे स्टार्टअप्स के लिए खोल दिए गए हैं।
3. 4M फ्रेमवर्क और सम्मेलन के प्रमुख परिणाम
- यह सम्मेलन 4M फ्रेमवर्क: खनिज (Minerals), औषधि (Medicine), सामग्री (Materials) और मशीनें (Machines) पर आधारित है।
- आयोजन में 8 MoUs, 4 तकनीक हस्तांतरण, 2 उत्पाद लॉन्च और 1 सुविधा का उद्घाटन हुआ।

- सम्मेलन में CGCRI का नया लोगो, संग्रह (Compendium) और बूटकैंप लॉन्च किया गया।
- 67 विशेषज्ञों ने दवाओं की खोज, इस्पात के डीकार्बोनाइजेशन और क्रिटिकल मिनरल्स पर 8 पैनलों में चर्चा की।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजन का नाम | 6वां RISE सम्मेलन 2026 (Kolkata Edition) |
| मुख्य थीम | Driving Innovation & Entrepreneurship for Viksit Bharat 2047 |
| आयोजक प्रयोगशालाएं | CSIR-CGCRI, CSIR-IICB, CSIR-CMERI और CSIR-IMMT |
| मुख्य ढांचा (Framework) | 4M (Minerals, Medicine, Materials, Machines) |
| स्थान व तिथि | 6-7 सितंबर 2026, CSIR-IICB साल्ट लेक, कोलकाता |
| पूर्ववर्ती संस्करण | मुंबई, लखनऊ, हैदराबाद, चेन्नई और बेंगलुरु |
राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों का 16वां राष्ट्रीय सम्मेलन
- प्रारंभिक परीक्षा: पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, जैव विविधता और अंतर्राष्ट्रीय समझौते।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता का ह्रास, सतत विकास और जैविक विविधता अधिनियम।
चर्चा में क्यों?
चंडीगढ़ में राज्य जैव विविधता बोर्डों और केंद्र शासित प्रदेश जैव विविधता परिषदों का 16वां राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया। राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य और स्थानीय स्तर पर जैव विविधता प्रशासन को मजबूत करना है।
मुख्य बिंदु: जैव विविधता प्रशासन, वैधानिक सुधार और स्थानीय भागीदारी
1. कानूनी ढाँचा और संस्थागत सुधार
- जैविक विविधता (संशोधन) अधिनियम 2023 और नियम 2024 ने भारत के जैव विविधता प्रशासन को अधिक सुव्यवस्थित बनाया है।
- सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने नियमों और संस्थागत तंत्रों को इस नए संशोधित कानून के अनुरूप ढालना होगा।
- देश भर की 2.76 लाख से अधिक जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMCs) को पूर्णतः क्रियाशील और प्रभावी बनाने पर बल दिया गया है।
- जन जैव विविधता रजिस्टर (PBR) को स्थानीय विकास योजनाओं के लिए एक गतिशील योजना उपकरण के रूप में विकसित किया जाएगा।
2. एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग (ABS) फंड
- राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने किसानों, समुदायों, BMCs और शोध संस्थानों के साथ ₹200 करोड़ से अधिक राशि साझा की है।
- एबीएस फंड का मुख्य उद्देश्य स्थानीय समुदायों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ देकर उनकी आजीविका में सुधार करना है।
- बैठक के दौरान NBA की एक वर्ष की उपलब्धियों और एबीएस योजना के पारदर्शी वितरण पर एक व्यापक दस्तावेज जारी किया गया।
3. अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं और वैश्विक लक्ष्य
- भारत ने जैविक विविधता पर सम्मेलन (CBD) को अपनी 7वीं राष्ट्रीय रिपोर्ट सौंप दी है।
- नगोया प्रोटोकॉल के तहत एक्सेस एंड बेनिफिट शेयरिंग पर भारत ने अपनी पहली राष्ट्रीय रिपोर्ट प्रस्तुत की है।
- राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना (NBSAP) 2024–2030 को कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढाँचे (KMGBF) के साथ संरेखित किया गया है।
- राज्यों को वर्ष 2030 तक 30 प्रतिशत भूमि और महासागर क्षेत्रों के संरक्षण के वैश्विक ’30-बाय-30′ लक्ष्य में योगदान करने का आह्वान किया गया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजन का नाम | राज्य जैव विविधता बोर्डों और UT जैव विविधता परिषदों का 16वां राष्ट्रीय सम्मेलन |
| आयोजक संस्था | राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) |
| आयोजन तिथि व स्थान | 6–7 सितंबर 2026, चंडीगढ़ |
| कुल BMCs की संख्या | 2.76 लाख से अधिक |
| विपरीत लाभ साझाकरण (ABS) कोष | ₹200 करोड़ से अधिक का वितरण |
अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस 2026: संकट से पुनरुद्धार की दिशा में भारत
- प्रारंभिक परीक्षा: पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, जैव विविधता और प्रजाति संरक्षण की राष्ट्रीय पहलें।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): पर्यावरण संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं और संकटग्रस्त प्रजातियों का पुनरुद्धार।
चर्चा में क्यों?
पंचकुला (हरियाणा) में ‘अंतर्राष्ट्रीय गिद्ध जागरूकता दिवस’ पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की गई। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने ‘संकट से पुनरुद्धार – भारत के गिद्धों का संरक्षण’ थीम पर इसका उद्घाटन किया। इस दौरान देश में ‘सुरक्षित गिद्ध क्षेत्र’ (Vulture Safe Zones) के निर्माण और तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया।
मुख्य बिंदु: गिद्धों का पारिस्थितिक महत्व, संकट और संरक्षण रणनीतियाँ
1. पारिस्थितिकी तंत्र में भूमिका और संकट के कारण
- गिद्ध प्रकृति के बेहतरीन सफाईकर्मी हैं।
- ये मृत मवेशियों को खाकर पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण करते हैं।
- भारत में गिद्धों की कुल 9 प्रजातियां पाई जाती हैं।
- इनमें सफेद पीठ वाले, लंबी चोंच वाले, पतली चोंच वाले, लाल सिर वाले, मिस्र के, हिमालयन ग्रिफॉन, यूरेशियन ग्रिफॉन, सिनेरियस और दाढ़ी वाले गिद्ध शामिल हैं।
- 1990 के दशक से इनकी संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई।
- मवेशियों के इलाज में प्रयुक्त दर्द निवारक दवाएं इसका मुख्य कारण बनीं।
2. जटायु संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र (JCBC), पिंजौर
- यह केंद्र हरियाणा वन विभाग और BNHS का एक संयुक्त प्रयास है।
- यहाँ सफेद पीठ वाले, लंबी चोंच वाले और पतली चोंच वाले गिद्धों का वैज्ञानिक प्रजनन कराया जाता है।
- केंद्र में वैज्ञानिक रखरखाव, कृत्रिम गर्भाधान और आनुवंशिक प्रबंधन किया जाता है।
- वर्ष 2025-26 के दौरान यहाँ 356 गिद्धों की देखभाल की गई।
- इस अवधि में केंद्र में 35 नए चूजों का सफल जन्म हुआ।
- केंद्र ने 87 गिद्धों को पुनः जंगलों में छोड़ने में योगदान दिया।
- यहाँ 22 संस्थानों के 1,222 प्रतिभागियों को प्रशिक्षण दिया गया।
3. प्रमुख घोषणाएं एवं भावी रणनीति
- ‘स्टोरी ऑफ जटायु: सेविंग इंडियाज वल्चर’ नामक कॉफी टेबल पुस्तक का विमोचन किया गया।
- यह पुस्तक गिद्धों के संरक्षण की सफल कहानी को दर्शाती है।
- पशु चिकित्सा में केवल सुरक्षित दवाओं के इस्तेमाल का आह्वान किया गया।
- मवेशियों के शवों के सुरक्षित प्रबंधन को बढ़ावा देने की अपील की गई।
- संरक्षण नीतियों के लिए ‘संपूर्ण सरकार’ और ‘संपूर्ण समाज’ दृष्टिकोण पर बल दिया गया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजन का स्थान | पंचकुला, हरियाणा |
| कार्यशाला की थीम | संकट से पुनरुद्धार – भारत के गिद्धों का संरक्षण |
| मुख्य भागीदार संस्थाएं | केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय (MoEFCC), CZA, हरियाणा वन विभाग, BNHS, JCBC |
| प्रमुख प्रजनन केंद्र | जटायु संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र (JCBC), पिंजौर |
| विमोचित पुस्तक | ‘स्टोरी ऑफ जटायु: सेविंग इंडियाज वल्चर’ |
साइबर-फिजिकल सिस्टम्स (CPS): भारत के तकनीकी और आत्मनिर्भर भविष्य का आधार
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, सूचना प्रौद्योगिकी (IT), रोबोटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास और अनुप्रयोग, स्वदेशी तकनीक का विकास, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और डिजिटल अवसंरचना।
चर्चा में क्यों?
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा संचालित राष्ट्रीय अंतरविषय साइबर-फिजिकल सिस्टम मिशन (NM-ICPS) ने देश में स्वदेशी तकनीक, अनुसंधान और स्टार्टअप्स के माध्यम से एक मजबूत डिजिटल-भौतिक पारिस्थितिकी तंत्र तैयार किया है। अगस्त 2026 तक इस मिशन ने 1,100 से अधिक तकनीकों, 1,300 से अधिक उत्पादों और भारत जन जैसे स्वदेशी एआई मॉडल को विकसित करने में सफलता प्राप्त की है।
मुख्य बिंदु: साइबर-फिजिकल सिस्टम, मिशन की संरचना और वास्तविक अनुप्रयोग
1. साइबर-फिजिकल सिस्टम (CPS) क्या है?
- CPS भौतिक (Physical) और डिजिटल दुनिया को आपस में जोड़ता है।
- यह सेंसर, सॉफ्टवेयर और संचार नेटवर्क का एक एकीकृत तंत्र है।
- मशीनें परिवेश को महसूस करती हैं, डेटा का विश्लेषण करती हैं और रियल-टाइम में निर्णय लेती हैं।
- इसका उपयोग ड्राइवरलेस कारों, स्मार्ट कारखानों, मेडिकल उपकरणों और स्मार्ट शहरों में होता है।
2. राष्ट्रीय अंतरविषय साइबर-फिजिकल सिस्टम मिशन (NM-ICPS)
- मंजूरी वर्ष: केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2018 में स्वीकृत।
- बजट और अवधि: 9 वर्षों के लिए ₹3,660 करोड़ का वित्तीय आवंटन।
- नोडल विभाग: विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST)।
- प्रौद्योगिकी नवाचार हब (TIHs): देश के प्रमुख संस्थानों में धारा-8 (Section 8) कंपनियों के रूप में 25 TIHs स्थापित किए गए हैं।
- टेक्नोलॉजी ट्रांसलेशन रिसर्च पार्क्स (TTRPs): अनुसंधान को सीधे बाजार में उतारने के लिए 4 प्रमुख संस्थानों में TTRPs बनाए गए हैं:
- IIT कानपुर: साइबर सुरक्षा (Cybersecurity)।
- IISc बेंगलुरु: रोबोटिक्स और एआई सिस्टम।
- IIT (ISM) धनबाद: खनन प्रौद्योगिकियां (Mining Technologies)।
- IIT इंदौर: डिजिटल स्वास्थ्य सेवा (Digital Healthcare)।
3. भारत जन पहल
- यह NM-ICPS के तहत समर्थित एक स्वदेशी, बहुभाषी और मल्टीमॉडल एआई पहल है।
- नेतृत्व: IIT बॉम्बे के नेतृत्व में अकादमिक संस्थानों का एक समूह।
- परम-2 मॉडल: 17 बिलियन पैरामीटर्स वाला फाउंडेशन मॉडल, जो संविधान की सभी 22 अनुसूचित भाषाओं को सपोर्ट करता है।
- अन्य प्रमुख मॉडल: ‘श्रुतम्’ (स्पीच-टू-टेक्स्ट), ‘सूक्तम्’ (टेक्स्ट-टू-स्पीच), और ‘पत्रम्’ (दस्तावेज़ विश्लेषण)।
- विषय-विशिष्ट मॉडल: आयुर्वेद के लिए ‘आयुर् परम’, कृषि के लिए ‘एग्री परम’ और कानून के लिए ‘लीगल परम’।
4. विभिन्न क्षेत्रों में व्यावहारिक अनुप्रयोग
- स्वास्थ्य सेवा: IIT इंदौर ने मानव शरीर का डिजिटल ट्विन ‘चरक डीटी’ विकसित किया है, जो फेफड़ों और हृदय के रोगों का आभासी अध्ययन करता है।
- कृषि: IIT बॉम्बे द्वारा विकसित ‘Agri-IoT’ प्रणाली मिट्टी, मौसम और सूक्ष्म जलवायु का रियल-टाइम डेटा प्रदान करती है।
- खनन: IIT (ISM) धनबाद के TEXMiN हब ने 50 किमी तक डेटा भेजने वाले ड्रोन बनाए हैं, जो खतरनाक खदानों में सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं।
- दूरसंचार: IIIT बेंगलुरु ने 5G-एडवांस्ड ORAN मैसिव माइमो रेडियो यूनिट विकसित की है, जो दूरस्थ क्षेत्रों में किफ़ायती कनेक्टिविटी देती है।
- सुरक्षा और गतिशीलता: IIT हैदराबाद का ‘TiHAN’ स्वायत्त वाहनों के परीक्षण के लिए भारत का पहला टेस्टबेड है। IISc बेंगलुरु का ‘iRASTE’ ऐप दुर्घटना-संभावित क्षेत्रों की पहचान कर ड्राइवरों को अलर्ट करता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| मिशन का नाम | राष्ट्रीय अंतरविषय साइबर-फिजिकल सिस्टम मिशन (NM-ICPS) |
| मंत्रालय / विभाग | विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय (DST) |
| प्रौद्योगिकी नवाचार हब (TIHs) | 25 हब (शीर्ष अकादमिक संस्थानों में स्थापित) |
| रिसर्च पार्क्स (TTRPs) | 4 (IIT कानपुर, IISc बेंगलुरु, IIT धनबाद, IIT इंदौर) |
हिमालयी राज्यों में GLOF और हिमस्खलन जोखिम प्रबंधन: केंद्रीय गृह सचिव द्वारा समीक्षा
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, पर्यावरण और आपदा प्रबंधन।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): आपदा और आपदा प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिम और हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन की अध्यक्षता में नई दिल्ली में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसका मुख्य उद्देश्य हिमालयी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) और हिमस्खलन (Snow Avalanches) से निपटने की तैयारियों का मूल्यांकन करना था।
मुख्य बिंदु: जोखिम समीक्षा, संस्थागत समन्वय और निवारक रणनीतियाँ
1. शामिल राज्य और प्रमुख तकनीकी संस्थाएं
- प्रतिभागी राज्य/UTs: उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर।
- केंद्रीय मंत्रालय व संस्थाएं: गृह मंत्रालय (MHA), राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), केंद्रीय जल आयोग (CWC), भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और रक्षा भू-सूचना विज्ञान अनुसंधान प्रतिष्ठान (DGRE)।
2. समीक्षा के प्रमुख क्षेत्र और जोखिम प्रबंधन
- प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली: संवेदनशील हिमनद झीलों और बर्फ से ढके क्षेत्रों की निरंतर निगरानी।
- सटीक चेतावनी का प्रसार: अंतिम व्यक्ति तक सूचना पहुँचाने (Last-mile dissemination) पर विशेष बल दिया गया।
- जोखिम मानचित्रण: उच्च जोखिम वाले स्थानों और पानी के बहाव के रास्तों (Flow path) की पहचान करना।
- समुदाय की भूमिका: स्थानीय स्तर पर निकासी और बचाव कार्य तंत्र को मजबूत बनाना।
3. मुख्य दिशा-निर्देश और भविष्य की रणनीति
- निवारक योजना (Risk-informed Planning): केवल आपदा के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले से जोखिम-आधारित योजनाएं बनाई जाएं।
- अंतर-एजेंसी समन्वय: राज्य एजेंसियों, जिला प्रशासनों और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच आपसी तालमेल बढ़ाया जाए।
- 2024 की केंद्रीय परियोजनाएं: केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2024 में मंजूर की गई GLOF शमन परियोजनाओं के काम में तेजी लाने का निर्देश दिया गया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| मुख्य आपदाएं | ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) और हिमस्खलन |
| बैठक की अध्यक्षता | केंद्रीय गृह सचिव (गोविंद मोहन) |
| प्रमुख भागीदार राज्य/UTs | उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर |
| मुख्य वैज्ञानिक संस्थाएं | NDMA, CWC, IMD, और DGRE |
| रणनीतिक ध्यान | 2024 की GLOF शमन परियोजना की समीक्षा और अंतिम स्तर तक पूर्व चेतावनी |