16 September 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने हेतु SPROUT सुविधा और बायो-ई3 (BioE3) नीति (जलवायु-अनुकूल फसलों का विकास), विज्ञान को जन-साधारण तक पहुँचाने हेतु SARAL AI और विज्ञान संचार (CSIR-NIScPR की नई पहल), वैश्विक संसाधन दक्षता व अपशिष्ट प्रबंधन पर केंद्रित वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम (WCEF) 2026, देश में रोजगार व श्रम भागीदारी के नवीनतम आंकड़ों को दर्शाने वाले आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) मासिक बुलेटिन (अगस्त 2026 आंकड़े), भक्ति आंदोलन की विरासत और मानवीय मूल्यों को संजोने वाले संत मलूकदास जी पर स्मारक डाक टिकट, द्विपक्षीय सामरिक व इंटरऑपरेबिलिटी को सुदृढ़ करने वाले भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास 2026’, डिजिटल भुगतान प्रणाली में लागत व स्थिरता पर केंद्रित UPI शुल्क ढांचा 2026 (क्या मुफ़्त रहेगा और क्या नहीं), तथा वंचित वर्गों के कल्याण हेतु TAPAS ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म (सामाजिक रक्षा और क्षमता निर्माण) का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
SPROUT सुविधा और बायो-ई3 नीति: जलवायु-अनुकूल फसलों का विकास
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की वैज्ञानिक घटनाएं, जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology), कृषि और जैव विविधता।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास और अनुप्रयोग, कृषि में जैव प्रौद्योगिकी, BioE3 नीति, खाद्य सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली स्थित BRIC-राष्ट्रीय पादप जीनोम अनुसंधान संस्थान (BRIC-NIPGR) में स्वदेशी SPROUT सुविधा का उद्घाटन किया। यह पहल भारत सरकार की BioE3 (बायोटेक्नोलॉजी फॉर इकॉनमी, एम्प्लॉयमेंट एंड एनवायरनमेंट) नीति का हिस्सा है। इसका मुख्य उद्देश्य जलवायु-अनुकूल (Climate-Resilient) फसलों का तेजी से विकास करना है।
मुख्य बिंदु: SPROUT सुविधा, स्पीडसीड तकनीक और DBT की उपलब्धियां
1. SPROUT सुविधा क्या है?
- पूरा नाम: “SpeedSeed Phenotyping and Resource Optimization for Unified Trait Analysis” (SPROUT)।
- विशेषता: यह एक मौसम-स्वतंत्र (Season-Independent) और नियंत्रित वातावरण वाली प्रयोगशाला है।
- कार्य: फसलों का हाई-थ्रूपुट फिनोटाइपिंग, सटीक तनाव परीक्षण (Precision Stress Screening) और जीनोम-एडिटेड रेखाओं का मूल्यांकन करना।
- प्राथमिक फोकस: मुख्य रूप से चने (Chickpea) की फसल पर केंद्रित है। यह जीनोमिक्स शोध को सीधे फसल सुधार से जोड़ती है।
2. स्पीडसीड तकनीक
- चक्र में कमी: NIPGR द्वारा विकसित यह अलग तकनीक फसलों की प्रजनन प्रक्रिया को तेज करती है।
- चना फसल पर असर: इसके इस्तेमाल से चने का प्रजनन चक्र (Generation Cycle) घटकर लगभग 40 दिन का रह जाता है।
- एकीकरण: इसे SPROUT के साथ मिलाकर या अन्य नियंत्रित वातावरण में इस्तेमाल किया जा सकता है।
3. जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) की प्रमुख उपलब्धियां (2014-2026)
- परियोजनाएं: DBT ने कृषि जैव प्रौद्योगिकी में 300 से अधिक परियोजनाओं को समर्थन दिया है।

- विकसित किस्म लें: चावल, गेहूं, चना, सरसों और सब्जियों की 50 से अधिक उन्नत किस्में विकसित की गईं।
- जलवायु-अनुकूल चावल: जीनोमिक्स-सहायता प्राप्त प्रजनन से 17 जलवायु-अनुकूल चावल की किस्में बनाई गईं। यह किस्में लगभग 15 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में उगाई जा रही हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| सुविधा का नाम | SPROUT (BRIC-NIPGR, नई दिल्ली) |
| प्रमुख तकनीक | स्पीडसीड (चने का चक्र ~40 दिन) |
| मूल नीति ढांचा | BioE3 नीति (DBT, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय) |
| चावल किस्म उपलब्धि | 17 जलवायु-अनुकूल किस्म (15 लाख हेक्टेयर में फैली) |
| पर्यावरणीय अभियान | ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधारोपण |
SARAL AI और विज्ञान संचार: CSIR-NIScPR की नई पहल
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की वैज्ञानिक घटनाएं, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास और उनके अनुप्रयोग, दैनिक जीवन में प्रभाव, नए प्रौद्योगिकीय विकास (AI/स्वचालन)।
चर्चा में क्यों?
CSIR-राष्ट्रीय विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान संस्थान (CSIR-NIScPR) ने शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित शोध को सुलभ और आकर्षक वीडियो में बदलने के लिए SARAL AI उपकरण का उपयोग शुरू किया। यह पहल अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) के सहयोग से चलाई जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य जटिल वैज्ञानिक अनुसंधानों को आम जनता, छात्रों और शोधकर्ताओं तक आसानी से पहुंचाना है।
मुख्य बिंदु: SARAL AI का उपयोग और विज्ञान संचार
1. SARAL AI क्या है?
- विकासकर्ता संस्था: यह अनुसंधान नेशनल RESEARCH फाउंडेशन (ANRF), नई दिल्ली की एक प्रमुख पहल है।
- मुख्य कार्य: यह जटिल अकादमिक शोध पत्रों और वैज्ञानिक जर्नल्स की सामग्री को छोटे, समझने योग्य और आकर्षक वीडियो में रूपांतरित करता है।
- उद्देश्य: शोध को सिर्फ कागजों तक सीमित न रखकर उसका व्यापक प्रसार (Mass Dissemination) करना।
2. CSIR-NIScPR का योगदान
- कार्यान्वयन: डॉ. गीता वाणी रायसम (निदेशक, CSIR-NIScPR) के नेतृत्व में जर्नल्स के संपादकों और शोधकर्ताओं के लिए व्यावहारिक कार्यशाला का आयोजन किया गया।
- प्रसार माध्यम: AI द्वारा तैयार किए गए वीडियो को एक समर्पित YouTube प्लेलिस्ट के माध्यम से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराया जा रहा है।
- मार्गदर्शन: केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह और ANRF के सीईओ डॉ. शिवकुमार कल्याणरामन की प्रेरणा से इसका तेजी से क्रियान्वयन किया गया।
3. इसका महत्व और उपयोगिता
- डिजिटल सशक्तिकरण: पारंपरिक शोध पत्रों की जटिल भाषा की बाधा को दूर करता है।
- जन-सहानुभूति व जागरूकता: वैज्ञानिक खोजों को समाज, छात्रों और गैर-वैज्ञानिक पृष्ठभूमि वाले लोगों तक पहुंचाता है।
- नीतिगत संरेखण: सरकार की नई प्रौद्योगिकियों के माध्यम से विज्ञान संचार को बढ़ावा देने की नीति के अनुकूल।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| SARAL AI की मूल संस्था | अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF), नई दिल्ली |
| लागू करने वाला संस्थान | CSIR-NIScPR (विज्ञान संचार एवं नीति अनुसंधान संस्थान) |
| तकनीक का मुख्य उद्देश्य | शोध पत्रों (Research Papers) को संक्षिप्त वीडियो में बदलना |
| डिजिटल वितरण चैनल | YouTube समर्पित प्लेलिस्ट और डिजिटल प्लेटफॉर्म |
वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम (WCEF) 2026: चक्रीय अर्थव्यवस्था और सतत विकास
- प्रारंभिक परीक्षा: पर्यावरण पारिस्थितिकी, जैव विविधता और जलवायु परिवर्तन से संबंधित सामान्य मुद्दे।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन, सतत विकास और संसाधन प्रबंधन।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्रभाई पटेल ने गांधीनगर (गुजरात) में वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम (WCEF) 2026 का उद्घाटन किया। यह दक्षिण एशिया में आयोजित होने वाला पहला WCEF संस्करण है। इसका आयोजन 15 से 18 सितंबर 2026 तक “Circular Economy: Transition for People and Prosperity” विषय (Theme) पर किया जा रहा है।
मुख्य बिंदु: चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) का भारतीय दृष्टिकोण
1. भारत की सांस्कृतिक विरासत और नीतियां
- सांस्कृतिक दर्शन: भारत में रीयूज़ (पुनः उपयोग), रिपेयर (मरम्मत) और संसाधनों के प्रति सम्मान की परंपरा पुरानी है। “रिप्लेस से पहले रिपेयर, फेंकने से पहले रीयूज़” इसका मूल आधार है।
- सोमनाथ मंदिर का उदाहरण: सोमनाथ मंदिर में चढ़ावे के कचरे को रीसायकल करके संसाधन बनाए जाते हैं, जिससे स्थानीय रोजगार भी बनता है।
- मिशन LiFE (Lifestyle for Environment): यह अभियान चक्रीय अर्थव्यवस्था का आधार है। कचरा प्रबंधन केवल रीसाइक्लिंग प्लांट में नहीं, बल्कि रोजमर्रा की आदतों से शुरू होता है।
2. विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) और आंकड़े
- नियामक सुधार: भारत ने वेस्ट मैनेजमेंट नियमों को सख्त किया है।
- पंजीकरण: अगस्त 2026 तक EPR के तहत 83,000 से अधिक उत्पादक (Producers) और 4,802 रीसायकलर पंजीकृत हैं।
- कचरा प्रसंस्करण: विभिन्न विनियमित कचरा धाराओं के तहत 482.24 लाख मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण किया जा चुका है।
3. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और वैश्विक साझेदारी
- RECEIC पहल: भारत ने अपनी G20 अध्यक्षता के दौरान ‘संसाधन दक्षता और चक्रीय अर्थव्यवस्था उद्योग गठबंधन’ (RECEIC) शुरू किया था।
- BRICS और वैश्विक मंच: भारत ने ब्रिक्स (BRICS) में चक्रीय अर्थव्यवस्था को सतत जीवन शैली और पारिस्थिकी बहाली से जोड़ा है।

- फिनलैंड: फिनलैंड का लक्ष्य 2035 तक संसाधन खपत को 2015 के स्तर से नीचे रखना है। भारत और फिनलैंड डिजिटल और सतत विकास में रणनीतिक भागीदार हैं।
- नीदरलैंड: नीदरलैंड का लक्ष्य 2050 तक पूरी तरह चक्रीय अर्थव्यवस्था बनने का है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजन का नाम | वर्ल्ड सर्कुलर इकोनॉमी फोरम (WCEF) 2026 |
| स्थान व तिथि | गांधीनगर (गुजरात), 15-18 सितंबर 2026 |
| फोरम की थीम | Circular Economy: Transition for People and Prosperity |
| मुख्य वैश्विक ढांचा | RECEIC (G20 के तहत भारत द्वारा लॉन्च) |
| भागीदार देश | फिनलैंड (आयोजक भागीदार / SITRA), नीदरलैंड |
आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) मासिक बुलेटिन: अगस्त 2026 आंकड़े
- प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय अर्थव्यवस्था, समावेशी विकास, रोजगार और सामाजिक क्षेत्र की पहल।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोजगार से संबंधित मुद्दे।
चर्चा में क्यों?
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के तहत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) ने आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) का अगस्त 2026 मासिक बुलेटिन जारी किया। यह PLFS मासिक श्रृंखला का 17वां बुलेटिन है। इसमें 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के लिए वर्तमान साप्ताहिक स्थिति (CWS) दृष्टिकोण के आधार पर श्रम बाजार के प्रमुख संकेतक जारी किए गए हैं।
मुख्य बिंदु: रोजगार और बेरोजगारी के आंकड़े (अगस्त 2026)
1. श्रम बल भागीदारी दर (LFPR)
- समग्र LFPR: 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के लिए LFPR बढ़कर 55.6% हो गया (जुलाई 2026 में 55.4% और अगस्त 2025 में 55.0% था)।
- ग्रामीण बनाम शहरी: ग्रामीण LFPR बढ़कर 58.2% पर पहुंचा, जबकि शहरी LFPR 50.4% पर स्थिर रहा।
- महिला LFPR: महिलाओं की श्रम बल भागीदारी बढ़कर 34.8% हुई, जो मुख्य रूप से ग्रामीण महिला LFPR (39.4%) में सुधार से संचालित है। शहरी महिला LFPR 25.4% रहा।
2. श्रमिक जनसंख्या अनुपात (WPR)
- कुल WPR: राष्ट्रीय स्तर पर WPR बढ़कर 52.8% हो गया, जो मार्च 2026 के बाद का उच्चतम स्तर है।
- क्षेत्रवार अंतर: ग्रामीण WPR बढ़कर 55.8% हुआ (सालाना आधार पर 1.3 प्रतिशत अंक की वृद्धि)। वहीं शहरी WPR 47.0% पर स्थिर रहा।
- महिला WPR: वार्षिक आधार पर महिला WPR 32.0% (अगस्त 2025) से बढ़कर 33.0% (अगस्त 2026) हो गया।
3. बेरोजगारी दर (UR)
- समग्र UR: राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी दर 5.0% पर स्थिर रही (जुलाई में 5.1% थी)।
- ग्रामीण बेरोजगारी में गिरावट: ग्रामीण क्षेत्रों में UR घटकर 4.1% पर आ गया, जो जनवरी 2026 के बाद का सबसे निचला स्तर है।
- शहरी बेरोजगारी: शहरी UR 6.8% दर्ज किया गया।
- लिंग-आधारित अंतर: पुरुषों के लिए समग्र UR लगातार तीन महीनों से घटकर 4.9% हुआ। ग्रामीण महिला UR घटकर 3.9% पर आ गया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| मापदंड / सूचकांक | समग्र (All-India) | ग्रामीण (Rural) | शहरी (Urban) |
| LFPR (15+ वर्ष) | 55.6% | 58.2% | 50.4% |
| महिला LFPR | 34.8% | 39.4% | 25.4% |
| WPR (15+ वर्ष) | 52.8% | 55.8% | 47.0% |
| बेरोजगारी दर (UR) | 5.0% | 4.1% | 6.8% |
| नोडल एजेंसी | NSO (MoSPI) | CWS दृष्टिकोण | अगस्त 2026 डेटा |
संत मलूकदास जी पर स्मारक डाक टिकट जारी: भक्ति, ज्ञान और आधुनिक विकास का संगम
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत का इतिहास और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन, भारतीय संस्कृति में कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 1): भारतीय संस्कृति – प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला के रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू; भक्ति आंदोलन और उसके सामाजिक-सांस्कृतिक प्रभाव।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (DoNER) मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने संत मलूकदास जी की स्मृति में डाक विभाग (Department of Posts) द्वारा जारी एक स्मारक डाक टिकट (Commemorative Postage Stamp) का विमोचन किया। यह डाक टिकट संत मलूकदास जी की स्मृति में आयोजित ‘संत समागम’ और ‘श्री राम कथा’ के शुभारंभ के अवसर पर जारी किया गया। इसका उद्देश्य उनकी भक्ति, सेवा और मानवता के संदेश को राष्ट्रीय स्मृति का हिस्सा बनाना है।
मुख्य बिंदु: संत मलूकदास जी और सांस्कृतिक पुनर्जागरण
1. संत मलूकदास जी का दर्शन और योगदान
- भक्ति और सामाजिक संदेश: संत मलूकदास जी भगवान राम के अनन्य भक्त थे। उन्होंने राम-भक्ति को केवल पूजा-पाठ तक सीमित न रखकर उसे कर्तव्य, त्याग, सत्य, करुणा और लोक-कल्याण का जीवन दर्शन बनाया।
- मलूक पीठ सेवा संस्थान न्यास: उनकी परंपरा और दर्शन को आगे बढ़ाने में इस न्यास की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनके विचारों ने सदियों से समाज को सही दिशा दिखाई है।
2. विरासत और आधुनिक विकास का तालमेल
- सांस्कृतिक आत्मविश्वास: भारत आज आर्थिक प्रगति के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़कर आगे बढ़ रहा है।
- सांस्कृतिक पुनरुद्धार के उदाहरण: अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम और उज्जैन में महाकाल लोक का विकास इस बात के प्रमाण हैं कि आधुनिकता और परंपरा एक-दूसरे के विपरीत नहीं हैं।

- विकसित भारत 2047 की संकल्पना: देश का विकास तभी पूर्ण होगा जब इसके केंद्र में ‘मानव’ और ‘करुणा’ होगी। इसका लक्ष्य तकनीक और अवसरों का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना है।
संत मलूकदास जी: ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पृष्ठभूमि
- काल एवं पहचान: संत मलूकदास जी (1574–1682 ई.) भक्ति काल के एक प्रमुख निर्गुण/सगुण संत, कवि और समाज सुधारक थे।
- जन्म स्थान: कड़ा (वर्तमान कौशांबी जिला, उत्तर प्रदेश)।
- प्रसिद्ध दोहा (अजगर करे न चाकरी):“अजगर करे न चाकरी, पंछी करे न काम।दास मलूका कह गए, सब के दाता राम॥”यह दोहा ईश्वर की सर्वव्यापकता और कृपा को दर्शाने के लिए पूरे भारत में प्रसिद्ध है।
- मुख्य रचनाएँ: ‘अलखबानी’, ‘ज्ञानबोध’, ‘रतनखान’, ‘भक्तवच्छावली’, और ‘रामअवतार लीला’।
- सामाजिक दर्शन: उन्होंने जाति-पाति और आडंबरों का विरोध किया तथा प्रेम, अहिंसा और मानवता का संदेश दिया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| जारीकर्ता निकाय | डाक विभाग, संचार मंत्रालय (भारत सरकार) |
| मुख्य व्यक्तित्व | संत मलूकदास जी (भक्ति काल के संत) |
| मूल स्थान / पीठ | कड़ा (कौशांबी, उत्तर प्रदेश) / श्री मलूक पीठ |
| संबंधित पहलें | विकसित भारत 2047, विरासत भी विकास भी |
| संस्कृति-विकास स्थल | काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक (उज्जैन), राम मंदिर (अयोध्या) |
भारत-अमेरिका संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास 2026’ शुरू
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की वर्तमान घटनाएं, अंतर्राष्ट्रीय संगठन और सैन्य अभ्यास।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से जुड़े और/या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले समझौते; भारत-अमेरिका संबंध।
चर्चा में क्यों?
भारत और अमेरिका के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास 2026’ का 22वां संस्करण शुरू हुआ। इसका उद्घाटन समारोह उत्तराखंड के औली (Auli Foreign Training Node) में आयोजित किया गया। इस बार यह अभ्यास दो अलग-अलग स्थानों—उत्तराखंड के औली और राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में एक साथ आयोजित किया जा रहा है।
मुख्य बिंदु: अभ्यास के उद्देश्य और प्रमुख विशेषताएं
1. भागीदारी और नेतृत्व
- सैन्य बल: दोनों पक्षों (भारतीय सेना और अमेरिकी सेना) से 600-600 सैनिक इस अभ्यास में भाग ले रहे हैं।
- अमेरिकी टुकड़ी: अमेरिकी सेना की 11वीं एयरबोर्न डिवीजन की 1ली इन्फैंट्री ब्रिगेड कॉम्बैट टीम भाग ले रही है।
- भारतीय नेतृत्व: 14 इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल अमरेश गुंजन ने इस अवसर पर संबोधित किया।
2. संचालन संबंधी उद्देश्य
- इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स (IBG): पर्वतीय और अर्ध-पर्वतीय क्षेत्रों में पैदल सेना (Infantry) आधारित अभियानों के लिए IBG की क्षमता बढ़ाना।
- इंटरऑपरेबिलिटी: दोनों सेनाओं के बीच संयुक्त योजना, संचालन निष्पादन और सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं के आदान-प्रदान को मजबूत करना।
- रणनीतिक तालमेल: विभिन्न भूभागों और परिचालन वातावरण में समन्वय के साथ सैन्य अभियान चलाने की क्षमता विकसित करना।
3. प्रौद्योगिकी का समावेश
- निगरानी और रेकी: निगरानी और टोह (Reconnaissance) के लिए ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियों (Autonomous Systems) का उपयोग।
- हथियार प्रदर्शन: राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन किया जाएगा।
- मल्टी-डोमेन वॉरफेयर: दोनों सेनाओं के विषय विशेषज्ञ (Subject Matter Experts) उभरती प्रौद्योगिकियों और मल्टी-डोमेन युद्ध अभियानों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| अभ्यास का नाम | ‘युद्ध अभ्यास 2026’ |
| संस्करण | 22वां संस्करण |
| भाग लेने वाले देश | भारत और अमेरिका (सेनाएं) |
| स्थान | औली (उत्तराखंड) और महाजन फील्ड फायरिंग रेंज (राजस्थान) |
| मुख्य तकनीकी फोकस | ड्रोन, ऑटोनॉमस सिस्टम और मल्टी-डोमेन वॉरफेयर |
| सैन्य बल क्षमता | प्रति देश 600 सैनिक |
UPI शुल्क ढांचा 2026: क्या मुफ़्त रहेगा और क्या नहीं?
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की आर्थिक एवं सामाजिक विकास की घटनाएं, भारतीय अर्थव्यवस्था, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था; समावेशी विकास; डिजिटल भुगतान प्रणाली; सरकारी नीतियां एवं हस्तक्षेप; Payment and Settlement Systems Act, 2007।
चर्चा में क्यों?
भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) और वित्त मंत्रालय ने UPI ढांचे में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। नया नियम 15 सितंबर 2026 से प्रभावी हो गया है। इस नए ढांचे में P2P (व्यक्ति-से-व्यक्ति) लेनदेन को पूरी तरह से नि:शुल्क रखा गया है। वहीं बड़े मर्चेंट लेनदेन पर सीमित MDR लागू किया गया है।
मुख्य बिंदु: नया UPI शुल्क ढांचा और प्रभाव
1. क्या पूरी तरह मुफ़्त रहेगा?
- व्यक्ति-से-व्यक्ति (P2P): सभी P2P लेनदेन 100% नि:शुल्क रहेंगे। इस पर कोई प्लेटफॉर्म फीस या हिडन चार्ज नहीं लगेगा। कुल UPI वैल्यू का 70% हिस्सा इसी वर्ग में आता है।
- छोटे व्यापारी (P2M < ₹2,000): ₹2,000 तक की सभी मर्चेंट खरीदारी पर कोई MDR नहीं लगेगा।
- रेहड़ी-पटरी और छोटे दुकानदार (P2PM): ₹1 लाख/माह तक की राशि QR कोड से प्राप्त करने वाले छोटे व्यापारियों (जैसे स्ट्रीट वेंडर्स) के लिए MDR शून्य रहेगा।
- कुल प्रभाव: कुल मर्चेंट लेनदेन (P2M) का लगभग 96% हिस्सा पूरी तरह अप्रभावित रहेगा।
2. किन लेनदेन पर लागू होगा MDR?
- ₹2,000 से अधिक के सामान्य P2M लेनदेन: इन पर 0.4% का मामूली MDR लगेगा। अधिकतम कैप ₹300 प्रति लेनदेन (₹75,000 या अधिक के भुगतानों के लिए) रखी गई है।
- आवश्यक और कम-मार्जिन वाले क्षेत्र: रेलवे, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट में ₹2,000 से ऊपर के भुगतान पर ₹5 प्रति लेनदेन का फ्लैट चार्ज लगेगा।
- पूंजी बाजार (Capital Markets): म्यूच्यूअल फंड, सिक्योरिटीज और स्टॉकब्रोकर्स के लिए MDR 0.02% रहेगा (अधिकतम ₹300 पर कैप)।
3. MDR का स्वरूप और ग्राहक सुरक्षा
- MDR क्या है?: MDR कोई सरकारी टैक्स या शुल्क नहीं है। यह बैंकों और फिनटेक ऐप प्रोवाइडर्स (जैसे PhonePe, Google Pay) के बीच डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर चलाने और बढ़ाने के लिए वितरित की जाने वाली राशि है।
- ग्राहकों पर शून्य भार: बैंक यह सुनिश्चित करेंगे कि मर्चेंट इस MDR शुल्क का बोझ ग्राहकों पर न डालें। ग्राहकों के लिए मुफ्त उपयोग की कोई सीमा, मासिक कोटा या टियर सिस्टम नहीं होगा।
- छोटे व्यापारियों के लिए समर्पित कोष: जुटाए गए कुल MDR का 5% हिस्सा एक विशेष फंड में जाएगा, जिससे ग्रामीण और छोटे व्यापारियों के बीच UPI के प्रसार को बढ़ावा दिया जाएगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| P2P लेनदेन शुल्क | पूरी तरह नि:शुल्क (0% MDR) |
| मुफ़्त मर्चेंट सीमा | ₹2,000 तक के लेनदेन और छोटे मर्चेंट (₹1 लाख/माह तक) |
| सामान्य MDR दर | 0.4% (₹2,000 से ऊपर, अधिकतम ₹300) |
| आवश्यक क्षेत्र MDR | ₹5 फ्लैट दर (रेलवे, ईंधन, कृषि, आदि) |
| पूंजी बाजार MDR | 0.02% (अधिकतम ₹300) |
| लक्षित मर्चेंट प्रभाव | केवल 4% बड़े मर्चेंट लेनदेन दायरे में आएंगे |
| व्यापारी सहायता फंड | कुल MDR संग्रह का 5% |
| संबंधित अधिनियम | Payment and Settlement Systems Act, 2007 |
TAPAS ऑनलाइन लर्निंग प्लेटफॉर्म: सामाजिक रक्षा और क्षमता निर्माण
- प्रारंभिक परीक्षा: सरकारी योजनाएं, सामाजिक न्याय और कमजोर वर्गों के लिए नीतियां।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित मुद्दे; कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं।
चर्चा में क्यों?
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने जानकारी दी कि TAPAS (Training for Augmenting Productivity and Services) प्लेटफॉर्म ने वर्ष 2021 से 2026 के दौरान कुल 6,866 छात्रों का नामांकन (Enrolment) दर्ज किया है। अकेले वर्ष 2026 में ही इस प्लेटफॉर्म पर 733 नए नामांकन दर्ज किए गए हैं। यह पहल ई-लर्निंग के माध्यम से सामाजिक रक्षा (Social Defence) के क्षेत्र में क्षमता निर्माण (Capacity Building) को बढ़ावा दे रही है।
मुख्य बिंदु: TAPAS प्लेटफॉर्म और इसकी कार्यप्रणाली
1. TAPAS क्या है?
- पूरा नाम: “Training for Augmenting Productivity and Services” (TAPAS)।
- नोडल संस्थान: यह सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान (NISD) द्वारा संचालित एक स्व-संचालित (Self-paced) ऑनलाइन लर्निंग मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म है।
- पात्रता: यह कोर्स सभी नागरिकों के लिए खुले हैं। कोई भी व्यक्ति सामाजिक रक्षा के क्षेत्र में कौशल विकास के लिए नामांकित हो सकता है।
2. शिक्षण का फोर-क्वाड्रेंट मॉडल
- वीडियो व्याख्यान (Video Lectures): ऑडियो-विजुअल माध्यम से पाठ्य सामग्री का विस्तृत विवरण।
- पूरक पठन सामग्री (Supplementary Reading Material): डाउनलोड करने योग्य अध्ययन सामग्री और नोट्स।
- चर्चा मंच (Discussion Forums): संदेह निवारण और परस्पर विचार-विमर्श के लिए।

- स्व-मूल्यांकन (Self-Assessment): परीक्षण और क्विज़ के माध्यम से अपनी प्रगति जांचने की सुविधा।
3. पाठ्यक्रम और मॉड्यूल संरचना
TAPAS वर्तमान में सामाजिक रक्षा से जुड़े 5 प्रमुख क्षेत्रों में 48 मॉड्यूल आधारित सर्टिफिकेट कोर्स प्रदान करता है:
- वृद्धों की देखभाल (Geriatric/Elderly Care): बुजुर्गों की स्वास्थ्य व दैनिक देखभाल।
- मनोभ्रंश (डिमेंशिया) की देखभाल व प्रबंधन (Care and Management of Dementia): मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना।
- मादक द्रव्यों/नशीली दवाओं के दुरुपयोग की रोकथाम (Substance Abuse Prevention): व्यसन मुक्ति और पुनर्वास।
- ट्रांसजेंडर मुद्दे: समावेशिता और अधिकारों के प्रति जागरूकता।
- सामान्य सामाजिक रक्षा मुद्दे (Social Defence Issues): हाशिए पर मौजूद वर्गों का सामाजिक संरक्षण।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| प्लेटफ़ॉर्म का नाम | TAPAS (Training for Augmenting Productivity and Services) |
| संचालक संस्था | NISD (राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान) |
| संबद्ध मंत्रालय | सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय |
| सीखने का मॉडल | 4-क्वाड्रेंट अप्रोच (Self-Paced Online Certificate Course) |