17 September 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत स्वच्छ परिवहन और ईवी क्रांति को मापने वाले नीति आयोग के भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सूचकांक (IEMI), समुद्री पर्यावरण और ओजोन परत के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाले विश्व ओजोन दिवस 2026 (‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर 5.0’ – IITM पुणे), भारत के जलवायु लक्ष्यों और पेरिस समझौते की प्रगति की रीयल-टाइम निगरानी हेतु नेट ज़ीरो पोर्टल और NAPCC डैशबोर्ड, वंचित वर्गों के कल्याण और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने वाले बाबू जगजीवन राम नेशनल फाउंडेशन (BJRNF), बहुभाषी स्वदेशी एआई प्रौद्योगिकियों के विकास हेतु भाषादिनी और ‘व्योम इनोवेशन चैलेंज’, तथा विशेष अभियान 6.0 (खान मंत्रालय की पहल) का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
नीति आयोग का भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सूचकांक (IEMI): e-Mobility और विकसित भारत
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की वर्तमान घटनाएं, पर्यावरण, सतत विकास और सरकारी नीतियां।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): बुनियादी ढांचा (ऊर्जा, परिवहन), संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, सरकारी नीतियां एवं हस्तक्षेप।
चर्चा में क्यों?
नीति आयोग ने राज्य ई-वाहन नीतियों पर आयोजित कार्यशाला के दौरान ‘भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सूचकांक’ (India Electric Mobility Index – IEMI) का दूसरा संस्करण लॉन्च किया। इस अवसर पर पूर्व कैबिनेट सचिव श्री राजीव गौबा ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य के लिए एक “रणनीतिक अनिवार्यता” (Strategic Imperative) बताया।
मुख्य बिंदु: IEMI रिपोर्ट और भारत की EV क्रांति
1. वैश्विक परिदृश्य और भारत की चुनौतियां
- वैश्विक बिक्री आंकड़े (2025): नई कारों की कुल बिक्री में EV की हिस्सेदारी चीन में 50% से अधिक, यूरोपीय संघ (EU) में 25% से अधिक और अमेरिका में लगभग 10% रही।
- कच्चे तेल पर निर्भरता: भारत अपनी जरूरत का लगभग 89% कच्चा तेल आयात करता है। EV अपनाने से यह आयात निर्भरता कम होगी।
- आर्थिक व स्वास्थ्य महत्व: भारत का ऑटोमोटिव सेक्टर जीडीपी में 7.1% का योगदान देता है और 1.9 करोड़ नौकरियों को सहारा देता है। इसके साथ ही शहरों (जैसे दिल्ली) में वाहनों के प्रदूषण से होने वाले सार्वजनिक स्वास्थ्य नुकसान को रोकना बेहद जरूरी है।
- पश्चिम एशिया संकट: वैश्विक तेल संकट EV क्रांति के लिए एक नया मोड़ (Inflection Point) साबित हो सकता है।
2. सरकारी प्रोत्साहन और नीतियां
- ₹92,000+ करोड़ का बजटीय समर्थन: सरकार ने EV क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन दिया है।
- प्रमुख योजनाएं:
- FAME योजना (Fast Adoption and Manufacturing of Electric Vehicles)
- PM E-DRIVE और PM E-Bus Sewa
- PLI योजनाएं: ऑटोमोबाइल एवं ऑटो घटकों के लिए और एडवांस केमिस्ट्री सेल (ACC) बैटरी स्टोरेज के लिए।
- चार्जिंग बुनियादी ढांचा: तेल विपणन कंपनियों (OMCs) और निजी कंपनियों द्वारा चार्जिंग नेटवर्क का विस्तार। Unified Bharat e-Charge App से चार्जिंग स्टेशनों की उपलब्धता आसान होगी।
3. राज्यों का प्रदर्शन और IEMI स्कोर
- नीतिगत प्रगति: भारत के 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में से 29 ने अपनी EV नीतियां अधिसूचित कर दी हैं।

- IEMI स्कोर में सुधार: पिछले वर्ष की तुलना में राज्यों का उच्चतम स्कोर 77 से बढ़कर 84 हो गया। मध्यिका स्कोर भी 36 से बढ़कर 40 पहुंचा।
- डाटा-संचालित ढांचा: IEMI राज्यों को साक्ष्य-आधारित नीतियां बनाने और एक-दूसरे के बेहतरीन अभ्यासों (Best Practices) से सीखने में मदद करता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| सूचकांक का नाम | भारत इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सूचकांक (IEMI) – 2nd Edition |
| जारीकर्ता संस्था | नीति आयोग |
| कच्चे तेल पर आयात निर्भरता | ~89% |
| ऑटो सेक्टर योगदान | 7.1% (GDP में) | 1.9 करोड़ रोजगार |
| सरकारी सहायता कोष | ₹92,000 करोड़ से अधिक |
| डिजिटल ऐप | Unified Bharat e-Charge App |
विश्व ओजोन दिवस 2026: IITM पुणे का ‘स्वच्छ सागर सुरक्षित सागर 5.0’ अभियान
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की वर्तमान घटनाएं, पर्यावरण, समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र और ओजोन परत संरक्षण।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन, महासागरीय संसाधन और प्रदूषण नियंत्रण।
चर्चा में क्यों?
विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (IITM), पुणे ने नगांव बीच (अलीबाग, रायगढ़/मुंबई) पर एक बड़ा समुद्र तट सफाई और प्लास्टिक कचरा संग्रह अभियान आयोजित किया। यह कार्यक्रम पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के राष्ट्रव्यापी अभियान ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर (SSSS) 5.0’ के तहत आयोजित किया गया।
मुख्य बिंदु: अभियान के प्रमुख पहलू और तटीय संरक्षण
1. अभियान का उद्देश्य और समय सीमा
- अवधि: SSSS 5.0 अभियान 12 से 19 सितंबर 2026 तक पूरे देश में चलाया जा रहा है।
- अंतर्राष्ट्रीय तटीय सफाई दिवस: यह अभियान 19 सितंबर 2026 को मनाए जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय तटीय सफाई दिवस (International Coastal Cleanup Day) के पूर्वाभ्यास के रूप में कार्य करता है।
- मूल लक्ष्य: समुद्री कचरे को कम करना, जिम्मेदार अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा देना और नाजुक तटीय पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा करना।
2. नगांव बीच पर प्रमुख गतिविधियां
- व्यापक भागीदारी: IITM के वरिष्ठ वैज्ञानिकों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अध्यापकों और सैकड़ों छात्र स्वयंसेवकों ने भाग लिया।
- कचरा संग्रहण और पृथक्करण: नगांव बीच की तटरेखा से 200 किलोग्राम प्लास्टिक कचरे और गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे को एकत्र कर वर्गीकृत किया गया।
- जिम्मेदार निपटान: एकत्र किए गए कचरे को स्थानीय नगर निकायों और अधिकृत रीसाइक्लिंग एजेंसियों को सौंपा गया।
- स्थानीय नेतृत्व का सम्मान: अलीबाग (रायगढ़) के नगांव की सरपंच श्रीमती हर्षदा मायेकर को स्थानीय समुदाय के सहयोग के लिए सम्मानित किया गया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजक संस्थान | IITM पुणे (पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत) |
| अभियान का नाम | स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर (SSSS) 5.0 |
| विश्व ओजोन दिवस | 16 सितंबर |
| अंतर्राष्ट्रीय तटीय सफाई दिवस | 19 सितंबर 2026 |
| स्थान | नगांव बीच, अलीबाग (रायगढ़ जिला, महाराष्ट्र) |
नेट ज़ीरो पोर्टल और NAPCC डैशबोर्ड: भारत का डिजिटल जलवायु रोडमैप
- प्रारंभिक परीक्षा: पर्यावरण पारिस्थितिकी, जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय योजनाएं और अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन; जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए राष्ट्रीय नीतियां।
चर्चा में क्यों?
विश्व ओजोन दिवस के अवसर पर मुंबई में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने भारत का नेट ज़ीरो पोर्टल और NAPCC डैशबोर्ड लॉन्च किया। ये दोनों डिजिटल प्लेटफॉर्म पारदर्शिता बढ़ाने, अंतर-मंत्रालयी समन्वय को मजबूत करने और साक्ष्य-आधारित जलवायु कार्रवाई को गति देने के लिए शुरू किए गए हैं।
मुख्य बिंदु: डिजिटल प्लेटफॉर्म और उनकी कार्यप्रणाली
1. भारत का नेट ज़ीरो पोर्टल
- स्वैच्छिक पंजीकरण: यह भारतीय संस्थाओं और उद्योगों द्वारा स्वैच्छिक नेट ज़ीरो प्रतिबद्धताओं के पंजीकरण और प्रकटीकरण का केंद्रीकृत प्लेटफॉर्म है।
- उत्सर्जन रिपोर्टिंग: संस्थाएं अपने ग्रीनहाउस गैस (GHG) उत्सर्जनों की घोषणा कर सकती हैं। इसमें Scope 1 और Scope 2 उत्सर्जन रिपोर्ट करना मुख्य है, जबकि Scope 3 उत्सर्जन की रिपोर्टिंग स्वैच्छिक है।
- कार्ययोजना प्रकटीकरण: यह पोर्टल स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण, ऊर्जा दक्षता, तकनीकी हस्तक्षेप और कार्बन सिंक निर्माण के माध्यम से नेट ज़ीरो तक पहुंचने का रोडमैप दिखाता है।
- सरकारी स्वीकृति: लक्ष्य घोषित करने वाली संस्थाओं को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) से स्वीकृति प्रमाण-पत्र मिलेगा।
2. NAPCC डैशबोर्ड
- एकीकृत निगरानी: यह प्लेटफॉर्म जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्ययोजना (NAPCC) के तहत आने वाले सभी राष्ट्रीय मिशनों की प्रगति की एकीकृत ट्रैकिंग करता है।
- अंतर-मंत्रालयी समन्वय: विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के बीच सूचना का आदान-प्रदान आसान बनाएगा।
- कार्यान्वयन अंतर की पहचान: यह क्षेत्रीय प्रगति का आकलन करने और नीतिगत कमियों को पहचानने में मदद करेगा।
- अंतर्राष्ट्रीय जुड़ाव: यह भारत की घरेलू जलवायु कार्रवाइयों को उसकी अंतर्राष्ट्रीय जलवायु प्रतिबद्धताओं (जैसे NDC) से जोड़ेगा।
महत्वपूर्ण शब्दावली: Scope 1, 2 और 3 उत्सर्जन
- Scope 1: संस्था के प्रत्यक्ष स्रोतों से होने वाला उत्सर्जन (जैसे कारखानों की चिमनियों या कंपनी के वाहनों से निकला धुआं)।
- Scope 2: खरीदी गई बिजली, भाप, या हीटिंग के उत्पादन से होने वाला अप्रत्यक्ष उत्सर्जन।
- Scope 3: मूल्य श्रृंखला (Value Chain) से जुड़ा संपूर्ण अप्रत्यक्ष उत्सर्जन (जैसे आपूर्ति श्रृंखला, यात्राएं, और कचरा निपटान)।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| लॉन्च की तिथि व अवसर | 16 सितंबर 2026 (विश्व ओजोन दिवस) |
| संबंधित मंत्रालय | पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) |
| नेट ज़ीरो पोर्टल यूआरएल | netzeroindia.moef.gov.in |
| NAPCC डैशबोर्ड यूआरएल | napccindia.moef.gov.in |
| प्राथमिकता उत्सर्जन | Scope 1 और Scope 2 (Scope 3 स्वैच्छिक है) |
| भारत का नेट ज़ीरो लक्ष्य | वर्ष 2070 तक (COP26 में घोषित) |
बाबू जगजीवन राम नेशनल फाउंडेशन (BJRNF): वर्गहीन और जातिविहीन समाज का रोडमैप
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की वर्तमान घटनाएं, सामाजिक न्याय और सरकारी संस्थाएं।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): कार्यपालिका और न्यायपालिका, कल्याणकारी योजनाएं, कमजोर वर्गों का संरक्षण, सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित मुद्दे।
चर्चा में क्यों?
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने बाबू जगजीवन राम नेशनल फाउंडेशन (BJRNF) की प्रगति और पहलों की समीक्षा साझा की। यह स्वायत्त संस्था पूर्व उप-प्रधानमंत्री बाबू जगजीवन राम के आदर्शों के अनुरूप जातिविहीन और वर्गहीन समाज के निर्माण की दिशा में काम कर रही है।
मुख्य बिंदु: BJRNF के उद्देश्य, संरचना और रणनीतिक कार्य
1. फाउंडेशन का जनादेश और मुख्य उद्देश्य
- सामाजिक समानता: अनुसूचित जातियों (SC), कमजोर वर्गों और वंचित समुदायों के समग्र सशक्तीकरण के लिए काम करना।
- जातिगत भेदभाव का उन्मूलन: समाज में अस्पृश्यता और जाति-आधारित पूर्वाग्रहों के खिलाफ जागरूकता फैलाना और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना।
- समान अवसर की गारंटी: हाशिए पर मौजूद वर्गों की समाज में न्यायसंगत भागीदारी सुनिश्चित करना।
2. संस्थागत संरचना और कानूनी ढांचा
- स्वायत्त निकाय: यह सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त (Autonomous) संगठन है।
- पंजीकरण: इसकी स्थापना 14 मार्च 2008 को हुई थी और यह सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत पंजीकृत है।

- मुख्यालय और नेतृत्व: इसका मुख्यालय 6, कृष्णा मेनन मार्ग, नई दिल्ली में है। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री इसके पदेन अध्यक्ष (President) के रूप में कार्य करते हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| संस्था का नाम | बाबू जगजीवन राम नेशनल फाउंडेशन (BJRNF) |
| मंत्रालय | सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (MoSJE) |
| स्थापना तिथि | 14 मार्च 2008 (सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860) |
| संस्था के अध्यक्ष | केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री |
| मुख्यालय | 6, कृष्णा मेनन मार्ग, नई दिल्ली |
| मूल दर्शन | जातिविहीन और वर्गहीन समाज |
| बाबू जगजीवन राम कौन थे? | भारत के पूर्व उप-प्रधानमंत्री, स्वतंत्रता सेनानी और प्रसिद्ध समाज सुधारक। |
भाषादिनी और ‘व्योम इनोवेशन चैलेंज’: स्वदेशी व बहुभाषी AI का नया अध्याय
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की वर्तमान घटनाएं, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सरकारी पहलें।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और नई तकनीक का विकास; समावेशी विकास में AI की भूमिका।
चर्चा में क्यों?
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन (DIBD) ने ‘करंट एआई’ और ‘कलपा इंपैक्ट’ के साथ मिलकर IIIT-दिल्ली में व्योम इनोवेशन चैलेंज के फ़ाइनल का आयोजन किया। इस चैलेंज में ओपन-सोर्स एआई और बहुभाषी तकनीक पर आधारित 4 प्रमुख भारतीय नवाचारों को विजेता घोषित किया गया।
मुख्य बिंदु: व्योम चैलेंज और ‘सुनो सूत्र’ तकनीक
1. सुनो सूत्र क्या है?
- रेफरेंस डिज़ाइन: यह भाषिणी और करंट एआई द्वारा संयुक्त रूप से विकसित एक ओपन-सोर्स, बहुभाषी हैंडहेल्ड एआई डिवाइस का ब्लूप्रिंट है।
- पहला अनावरण: इसे फरवरी 2026 में ‘इंडिया एआई इंपैक्ट समिट’ के दौरान पेश किया गया था।
- तकनीकी लाभ: यह डिवाइस कम बैंडविड्थ या बिना इंटरनेट (ऑफ़लाइन) के भी काम कर सकती है। इससे स्थानीय भाषा में सुरक्षा और गोपनीयता के साथ सेवाएं अंतिम व्यक्ति तक पहुँचती हैं।
2. विजेता नवाचार (Top 4 Winning Innovations)
चैलेंज के फ़ाइनल में 10 टीमों ने अपने प्रोटोटाइप दिखाए। इनमें से 4 मुख्य विजेता रहे:
- आशा सहायक: स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए।
- श्रवण: सुगम्यता (Accessibility) और दिव्यांगजनों के लिए।
- संग्रह – अपना साथी: जन-कल्याणकारी योजनाओं तक पहुँच के लिए।
- सहायक मित्र – A.V.E.R.A.: कृषि और ग्रामीण सलाह के लिए स्वायत्त वॉयस-सक्षम तकनीक।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| चैलेंज का नाम | व्योम इनोवेशन चैलेंज |
| आयोजक निकाय | डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन (MeitY), Current AI, Kalpa Impact |
| आयोजन स्थल | IIIT-दिल्ली |
| मूल तकनीक | सुनो सूत्र – ओपन-सोर्स बहुभाषी एआई डिवाइस |
| मुख्य विजेता | आशा सहायक, श्रवण, संग्रह-अपना साथी, सहायक मित्र (A.V.E.R.A.) |
विशेष अभियान 6.0: खान मंत्रालय की ई-कचरा प्रबंधन और स्वच्छता पहल
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की वर्तमान घटनाएं, पर्यावरण, पारिस्थितिकी और ई-कचरा प्रबंधन।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): सरकारी नीतियां एवं हस्तक्षेप; ई-कचरा प्रबंधन; पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण; नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (NCMM)।
चर्चा में क्यों?
भारत सरकार 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक विशेष अभियान 6.0 (Special Campaign 6.0) चलाएगी। खान मंत्रालय ने ‘विशेष अभियान 5.0’ की सफलताओं के आधार पर इस बार “ई-कचरे का प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान” को अपना मुख्य फोकस क्षेत्र घोषित किया है।
मुख्य बिंदु: विशेष अभियान 5.0 की उपलब्धियां और 6.0 का खाका
1. अभियान के दो चरण
- तैयारी चरण (15 – 30 सितंबर 2026): सांसदों, पीएमओ, राज्य सरकारों के लंबित मामलों, जन शिकायतों और संसदीय आश्वासनों की पहचान व समीक्षा।
- कार्यान्वयन चरण (2 – 31 अक्टूबर 2026): खान मंत्रालय, उसके अधीनस्थ कार्यालयों, CPSEs और स्वायत्त निकायों द्वारा तय लक्ष्यों को पूरा करना।
2. विशेष अभियान 5.0 की प्रमुख उपलब्धियां (नवंबर 2025 – अगस्त 2026)
- सार्वजनिक शिकायतें: कुल 1,772 जन शिकायतों का समाधान।
- फाइलों का निपटान: 3,751 भौतिक फाइलों को हटाकर रिकॉर्ड प्रबंधन सुधारा गया।
- स्थान की मुक्ति: 1.7 लाख वर्ग फुट से अधिक सरकारी कार्यालय स्थल को खाली कराया गया।
- राजस्व संग्रह: स्क्रैप (कबाड़) निपटान से लगभग ₹19.33 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ।
- सफाई अभियान: कुल 116 स्वच्छता अभियान आयोजित किए गए।
3. ई-कचरा संग्रह और नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (NCMM)
- ई-कचरा बूथ: JNARDDC (स्वायत्त निकाय) और MRAI मिलकर GPOA तथा खान मंत्रालय के विभिन्न कार्यालयों में ई-कचरा संग्रह बूथ स्थापित करेंगे।
- क्रिटिकल मिनरल्स की रिकवरी: इस पहल का मुख्य उद्देश्य ई-कचरे से महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) को रीसायकल कर निकालना है।
- NCMM से जुड़ाव: यह कदम राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन (NCMM) के लक्ष्यों को सीधे सहयोग प्रदान करता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| अभियान की अवधि | 2 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 (विशेष अभियान 6.0) |
| मुख्य विषय (Theme) | ई-कचरे का प्रभावी संग्रह, पृथक्करण और निपटान |
| संबंधित मिशन | राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन (NCMM) |
| सहयोगी संस्थाएं | JNARDDC और MRAI |
| अभियान 5.0 से राजस्व | ₹19.33 करोड़ (कबाड़ निपटान से) |
| खाली कराया गया स्थान | 1.7 लाख वर्ग फुट से अधिक |