18 September 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत मिट्टी में कार्बन संचयन से किसानों की आय बढ़ाने वाले सॉइल कार्बन पेमेंट्स (तिकाऊ खेती से बढ़ी कमाई), सेमीकंडक्टर, एआई, स्पेस व रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी नवाचार को बढ़ावा देने वाली भारत में डीप-टेक क्रांति, संस्थागत स्तर पर स्वच्छता और जन-भागीदारी को सुदृढ़ करने वाले स्वच्छता ही सेवा अभियान 2026 (सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग), इलेक्ट्रिक वाहन और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में कुशल कार्यबल तैयार करने हेतु EV एवं ग्रीन स्किल्स लैब (NSTI बेंगलुरु), तथा अपशिष्ट प्रबंधन में ग्रीनहाउस गैसों के सटीक मापन हेतु लाइफ साइकिल असेसमेंट (LCA) एवं GHG कैलकुलेटर का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
सॉइल कार्बन पेमेंट्स: टिकाऊ खेती से किसानों की बढ़ी कमाई
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की वर्तमान घटनाएं, पर्यावरण, पारिस्थितिकी, सतत कृषि।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): मुख्य फसलें और उनके पैटर्न, प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता, प्रौद्योगिकी मिशन; संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण।
चर्चा में क्यों?
पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (PAU), लुधियाना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भारत का पहला सॉइल कार्बन पेमेंट जारी किया गया। DARE के सचिव और ICAR के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने पंजाब और हरियाणा के 2,550 से अधिक छोटे किसानों को ₹2.9 करोड़ से अधिक की राशि का प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) शुरू किया।
मुख्य बिंदु: एग्रोनॉमी, कार्बन क्रेडिट और किसानों का लाभ
1. ‘आदि’ कार्बन प्रोग्राम
- शुरुआत और दायरा: यह ग्रो इंडिगो द्वारा ICAR के तकनीकी मार्गदर्शन में वर्ष 2019 में शुरू किया गया प्रोग्राम है। यह 7 राज्यों के 20 लाख से अधिक एकड़ क्षेत्र और 1,000,000 से अधिक किसानों को कवर करता है।
- सत्यापित मानक: कार्बन क्रेडिट Verra VM0042 कार्यप्रणाली के तहत जारी किए जाते हैं।
- प्रस्तावित विकल्प: किसानों को दो विकल्प दिए गए – एक निश्चित अग्रिम भुगतान या क्रेडिट की बिक्री के बाद शुद्ध कार्बन राजस्व का 75% हिस्सा।
2. पुनर्जनन कृषि पद्धतियां
- डीएसआर (Direct Seeded Rice): पारंपरिक रोपाई की तुलना में पानी की खपत को बहुत कम करता है।
- फसल अवशेष प्रबंधन: पराली जलाने की घटनाओं को रोकता है, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार होता है।
- कछार/जुताई कम करना (Reduced Tillage): मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ को संरक्षित रखता है।
3. पर्यावरणीय और आर्थिक प्रभाव (2019–2022 का आकलन)
- जल संरक्षण: लगभग 45 अरब (45 Billion) लीटर पानी की बचत हुई।
- पराली प्रबंधन: 2 लाख टन से अधिक फसल अवशेष जलने से बचाए गए, जिससे 1,000 टन PM2.5 उत्सर्जन रुका।

- पंजाब में पराली जलने में कमी: 2025 में केवल 5,114 घटनाएं दर्ज हुईं, जो 2021 की तुलना में 93% की भारी गिरावट दर्शाती हैं। (उदा. मोगा का रणसिंह कलां मॉडल 6 वर्षों से 100% पराली-मुक्त है)।
- आय में वृद्धि: 30,000 एकड़ और 50,000 से अधिक क्रेडिट के पहले निर्गमन से किसानों को औसतन ₹3,000 से ₹15,000 तक सीधे मिले।
4. अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: ब्रिक्स नेटवर्क
- जून 2026 में इंदौर में आयोजित 16वें ब्रिक्स कृषि मंत्रियों के सम्मेलन में ‘ब्रिक्स सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन एग्रोइकोलॉजी एंड रीजेनरेटिव एग्रीकल्चर’ स्थापित करने पर सहमति बनी।

- इसकी शुरुआती देखरेख ICAR–भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान (IIFSR), मोदीपुरम द्वारा की जा रही है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| पहल का नाम | पहला सॉइल कार्बन पेमेंट (आदि कार्बन प्रोग्राम) |
| प्रदाता और भागीदार | ग्रो इंडिगो एवं ICAR |
| प्रमाणन मानक | Verra VM0042 मेथोडोलॉजी |
| लाभांश प्राप्तकर्ता | पंजाब और हरियाणा के 2,550+ किसान (₹2.9+ करोड़) |
| पर्यावरणीय प्रभाव | 45B लीटर जल बचत | 1,000 टन PM2.5 उत्सर्जन में कमी |
भारत में डीप-टेक क्रांति: सेमीकंडक्टर, एआई, स्पेस और रक्षा में स्वावलंबन
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की वर्तमान घटनाएं, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, रोबोटिक्स, एआई, स्पेस और रक्षा प्रौद्योगिकी।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं उनके अनुप्रयोग और दैनिक जीवन पर इनका प्रभाव; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और नई तकनीक का विकास।
चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ज़ोहो के मुख्य वैज्ञानिक श्री श्रीधर वेम्बू का एक लेख साझा किया। इस लेख में भारत की तेज़ी से उभरती डीप-टेक क्षमता और कठिन तकनीकों को स्वयं सीखकर विकसित करने के भारत के नए संकल्प को रेखांकित किया गया है।
मुख्य बिंदु: डीप-टेक क्षमता और भारत के मुख्य स्तंभ
1. डीप-टेक क्षेत्र में भारत की नई दिशा
- स्वदेशी क्षमता का निर्माण: भारत अब वैश्विक तकनीकों का केवल उपभोक्ता बनने के बजाय कठिन तकनीकों को स्वयं सीखने और विकसित करने का विकल्प चुन रहा है।
- रणनीतिक आत्मनिर्भरता: डीप-टेक क्षमताएं भारत को बाहरी आपूर्ति श्रृंखला के जोखिमों (Supply Chain Vulnerabilities) से सुरक्षा प्रदान करती हैं।
2. चार प्रमुख क्षेत्र
- सेमीकंडक्टर: घरेलू चिप निर्माण और डिजाइन इकोसिस्टम को मजबूत करना।
- कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI): राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और जन-कल्याण के लिए स्वदेशी एआई मॉडल विकसित करना।
- अंतरिक्ष (Space): निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ स्पेस-टेक और पेलोड क्षमता बढ़ाना।
- रक्षा (Defence): रक्षा उत्पादन का स्वदेशीकरण और अत्याधुनिक क्रिटिकल टेक्नोलॉजी का निर्माण।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| चर्चा में रहा विषय | भारत की डीप-टेक क्षमता का विकास |
| लेखक | श्रीधर वेम्बू (मुख्य वैज्ञानिक, ज़ोहो) |
| प्रमुख 4 क्षेत्र | सेमीकंडक्टर, एआई, स्पेस और डिफेंस |
| मूल रणनीति | ‘Difficult Learning’ का स्वदेशीकरण |
स्वच्छता ही सेवा अभियान 2026: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की पहल
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की वर्तमान घटनाएं, सरकारी नीतियां और सामाजिक पहल।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): स्वास्थ्य, स्वच्छता से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन; नागरिक भागीदारी और शासन में सुधार।
चर्चा में क्यों?
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान 2026 की शुरुआत की। विभाग के सचिव श्री सुधांश पंत ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को स्वच्छता की शपथ दिलाई। यह अभियान 2 अक्टूबर 2026 (गांधी जयंती) तक चलेगा।
मुख्य बिंदु: अभियान के मुख्य संकल्प और नागरिक भागीदारी
1. स्वच्छता शपथ के मुख्य संकल्प
- समय का योगदान: प्रत्येक नागरिक/कर्मचारी प्रति वर्ष 100 घंटे (अर्थात प्रति सप्ताह 2 घंटे) का समय स्वैच्छिक स्वच्छता कार्य के लिए देगा।
- व्यक्तिगत प्रतिबद्धता: न स्वयं गंदगी करेंगे और ना ही दूसरों को करने देंगे।
- व्यापक दायरा: स्वच्छता की शुरुआत स्वयं से, परिवार से, मोहल्ले से, गांव से और कार्यस्थल से की जाएगी।
- सामूहिक प्रेरणा: स्वच्छ भारत मिशन (SBM) को गति देने के लिए अन्य लोगों को भी इस अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
2. संस्थागत रणनीति
- देशव्यापी भागीदारी: सामाजिक न्याय विभाग के अंतर्गत आने वाले सभी अधीनस्थ कार्यालयों, स्वायत्त संस्थानों और संगठनों में एक साथ स्वच्छता शपथ दिलाई गई।
- जन-भागीदारी: केवल सरकारी कार्यालयों तक सीमित रहने के बजाय, इसे सामुदायिक स्तर पर एक जन-आंदोलन बनाने पर जोर दिया गया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| अभियान का नाम | स्वच्छता ही सेवा अभियान 2026 |
| आयोजक विभाग | सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग (MoSJE) |
| सपथ दिलाने वाले अधिकारी | श्री सुधांश पंत (सचिव, SJE) |
| अभियान की अवधि | 17 सितंबर 2026 से 2 अक्टूबर 2026 तक |
| स्वच्छता दान का संकल्प | 100 घंटे/वर्ष (2 घंटे/सप्ताह) |
| समापन अवसर | गांधी जयंती (2 अक्टूबर) |
EV एवं ग्रीन स्किल्स लैब: राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (NSTI) बेंगलुरु में नई शुरुआत
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की वर्तमान घटनाएं, कौशल विकास, सरकारी नीतियां और योजनाएं।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): मानव संसाधन और कौशल विकास; समावेशी विकास; प्रौद्योगिकी और पर्यावरण (ई-मोबिलिटी एवं हरित ऊर्जा)।
चर्चा में क्यों?
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) की सचिव श्रीमती देबाश्री मुखर्जी ने राष्ट्रीय कौशल प्रशिक्षण संस्थान (NSTI), बेंगलुरु में ‘Skills4Future EV & Green Skills Lab’ का उद्घाटन किया। यह अत्याधुनिक लैब शैल इंडिया, प्रशिक्षण महानिदेशालय (DGT – MSDE) और एजुनेट फाउंडेशन का एक संयुक्त प्रयास है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं को इलेक्ट्रिक वाहन (EV) प्रौद्योगिकियों, बैटरी प्रबंधन और आधुनिक हरित कौशलों में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना है, ताकि उन्हें स्वच्छ ऊर्जा और ई-मोबिलिटी जैसे उभरते क्षेत्रों में रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।
मुख्य बिंदु: लैब के उद्देश्य और ‘Skills4Future’ कार्यक्रम
1. लैब की प्रमुख विशेषताएं और व्यावहारिक प्रशिक्षण
- व्यावहारिक शिक्षा (Hands-on Exposure): छात्रों को इलेक्ट्रिक वाहन (EV) सिस्टम, बैटरी तकनीक, वाहन निदान (Diagnostics) और सुरक्षा प्रथाओं का प्रत्यक्ष अनुभव मिलेगा।
- भविष्य की जरूरतें: स्वच्छ ऊर्जा और टिकाऊ गतिशीलता (Sustainable Mobility) के क्षेत्र में युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाना।
- उद्योग-सरकार साझेदारी: हरित अर्थव्यवस्था (Green Economy) के लिए एक कुशल कार्यबल तैयार करना।
2. Skills4Future कार्यक्रम के आंकड़े व प्रभाव
- राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार: यह कार्यक्रम 5 राज्यों के 290 से अधिक संस्थानों तक पहुँच चुका है।
- कौशल विकास: 70,000 से अधिक छात्रों को प्रशिक्षित किया गया है और 258 से अधिक फैकल्टी सदस्यों का अपस्किलिंग हुआ है।
- ग्रीन लैब्स की स्थापना: देश भर में 20 ‘ग्रीन स्किल्स EV लैब’ स्थापित की जा चुकी हैं।

- कर्नाटक में प्रभाव: अकेले कर्नाटक के 101 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITIs) में 9,113 छात्रों को प्रशिक्षित किया गया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| प्रयोगशाला का नाम | Skills4Future EV & Green Skills Lab |
| उद्घाटनकर्ता | श्रीमती देबाश्री मुखर्जी (सचिव, MSDE) |
| स्थान | NSTI बेंगलुरु, कर्नाटक |
| सहयोगी संस्थाएं | MSDE (DGT), Shell India, Edunet Foundation |
| प्रोग्राम का नाम | Skills4Future |
लाइफ साइकिल असेसमेंट (LCA) एवं GHG कैलकुलेटर: ठोस कचरा प्रबंधन में नया तकनीकी कदम
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की वर्तमान घटनाएं, पर्यावरण, पारिस्थितिकी और ई-कचरा व ठोस कचरा प्रबंधन।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, बुनियादी ढांचा (अपशिष्ट प्रबंधन), सरकारी नीतियां एवं हस्तक्षेप (स्वच्छ भारत मिशन-शहरी)।
चर्चा में क्यों?
भारत सरकार के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) प्रो. अजय कुमार सूद ने एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में ‘भारत में ठोस कचरा प्रबंधन (SWM) प्रौद्योगिकियों के लिए LCA फ्रेमवर्क का विकास’ परियोजना के परिणामों की समीक्षा की गई और शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) के लिए एक डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म GHG कैलकुलेटर वेब ऐप लॉन्च किया गया।
मुख्य बिंदु: प्रोजेक्ट का स्वरूप, संस्थान और डिजिटल टूल
1. परियोजना की संरचना और सहयोगी निकाय
- शुरुआत: यह प्रोजेक्ट वर्ष 2024 में प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) के कार्यालय द्वारा स्वीकृत किया गया था।
- सहभागी संस्थान: IISc बेंगलुरु, IIT मद्रास और IIT (BHU) वाराणसी ने मिलकर इसे विकसित किया है।
- संबद्ध राष्ट्रीय मिशन: यह पहल वेस्ट टू वेल्थ मिशन और स्वच्छ भारत मिशन-अर्बन (SBM-U) के उद्देश्यों से जुड़ी है।
- केस स्टडीज: बेंगलुरु, मैसूर, तुमकुरु, चेन्नई, दिल्ली और वाराणसी जैसे शहरों के डेटा का अध्ययन किया गया।
2. GHG कैलकुलेटर ऐप की प्रमुख विशेषताएं
- उत्सर्जन का सटीक विश्लेषण: यह ऐप स्थानीय निकायों को बायो-माइनिंग, एनारोबिक डाइजेशन (अवायवीय पाचन), कंपोस्टिंग, रीसाइक्लिंग, वेस्ट-टू-एनर्जी (भस्मीकरण) और लैंडफिलिंग जैसी तकनीकों के नेट उत्सर्जन का डेटा देता है।

- गैसों की मैपिंग: यह मीथेन, कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रस ऑक्साइड (NOx) और ब्लैक कार्बन जैसे ग्रीनहाउस गैसों के स्तर को मापता है।
- निर्णय लेने में सहायक: नगर निगम नई परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) का पर्यावरणीय आकलन कर सकते हैं और टेंडर के लिए ज़रूरी कार्बन फ़ुटप्रिंट मानक तय कर सकते हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| प्रोजेक्ट का नाम | LCA Framework for Solid Waste Management |
| डिजिटल टूल | GHG Calculator Web Application |
| नोडल एजेंसी | ऑफिस ऑफ द प्रिंसिपल साइंटिफिक एडवाइजर (PSA) |
| प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार | प्रो. अजय कुमार सूद |
| विकासकर्ता संस्थान | IISc बेंगलुरु, IIT मद्रास, IIT (BHU) वाराणसी |
| टारगेट यूजर | शहरी स्थानीय निकाय (ULBs / नगर निगम) |
| संबद्ध मिशन | स्वच्छ भारत मिशन-शहरी एवं वेस्ट टू वेल्थ मिशन |