यूपीएससी 2026 की तैयारी रणनीति पूरी करें

Quadrilateral Security Dialogue – Quad in hindi for upsc and other exam

विषय: सामान्य अध्ययन (GS) पेपर-2: अंतर्राष्ट्रीय संबंध (IR) — द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से जुड़े और/या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले समझौते।

Quadrilateral Security Dialogue – क्वाड चार प्रमुख लोकतांत्रिक देशों — भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका (US), जापान और ऑस्ट्रेलिया — का एक अनौपचारिक रणनीतिक मंच है। इसका प्राथमिक घोषित उद्देश्य हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में एक “मुक्त, खुला, समृद्ध और नियम-आधारित आदेश” सुनिश्चित करना है।

ऐतिहासिक विकास

  • क्वाड 1.0 (2007): जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने इसकी अवधारणा प्रस्तुत की थी। हालांकि, चीन के कड़े राजनयिक विरोध और ऑस्ट्रेलिया की हिचकिचाहट के कारण यह मंच प्रारंभिक चरण में ही निष्क्रिय हो गया।

  • क्वाड 2.0 (2017): मनीला में आसियान (ASEAN) शिखर सम्मेलन के इतर, चीन के आक्रामक भू-राजनीतिक रुख (जैसे- दक्षिण चीन सागर का सैन्यीकरण और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव – BRI) के प्रत्युत्तर में इसे पुनर्जीवित किया गया।

  • शिखर सम्मेलन का स्तर (2021-वर्तमान): वर्ष 2021 में इसके पहले राष्ट्राध्यक्षों के स्तर (Summit Level) के सम्मेलन ने इसे भू-राजनीतिक विमर्श के केंद्र में ला दिया।

प्रमुख समझौते और रणनीतिक पहल (Key Initiatives)

A. क्वाड महत्वपूर्ण खनिज पहल ढांचा (Quad Critical Minerals Initiative):

    • वित्तीय लक्ष्य: सरकारी और निजी क्षेत्र के सहयोग से लगभग 20 बिलियन डॉलर जुटाना।

    • नियम: सहायता केवल उन परियोजनाओं को मिलेगी जो क्वाड देशों में स्थित हैं और जिनका मुख्यालय क्वाड देशों की कंपनियों के पास है।

    • उद्देश्य: नियमों का सामंजस्य (Harmonisation), चीन पर निर्भरता कम करना और ई-कचरे (e-waste) से खनिजों की रीसाइक्लिंग।

B. समुद्री सुरक्षा (Maritime Security)

  • IPMSC (भारत-प्रशांत समुद्री निगरानी सहयोग पहल): सूचना साझाकरण (Information Sharing) बढ़ाने के लिए चारों देशों की समुद्री निगरानी क्षमताओं का एकीकरण।

  • IPMDA का विस्तार: इंडो-पैसिफिक पार्टनरशिप फॉर मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस के तहत भागीदार देशों को आपातकालीन संचालन के लिए ‘नियर रियल-टाइम’ (Near real-time) वाणिज्यिक समुद्री डेटा प्रदान करना।

  • Quad at Sea Mission: भारत इसके अगले संस्करण की मेजबानी करेगा, जो चारों देशों के तट रक्षकों (Coast Guards) को एक साझा जहाज पर लाएगा।

  • मालाबार नौसैनिक अभ्यास (Malabar Exercise): चारों देशों के बीच अंतर-संचालनीयता (Interoperability) बढ़ाने के लिए वार्षिक सैन्य अभ्यास।

C. ऊर्जा, तकनीकी और विकासात्मक पहल

  • ऊर्जा सुरक्षा: Quad Initiative on Indo-Pacific Energy Security के तहत क्षेत्रीय ऊर्जा लचीलेपन और आपातकालीन प्रतिक्रिया अभ्यासों को मजबूती।

  • बुनियादी ढांचा वित्तपोषण: मई 2022 में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के लिए 50 बिलियन डॉलर के बुनियादी ढांचा निवेश का संकल्प।

  • ऋण प्रबंधन: G20 कॉमन फ्रेमवर्क के तहत ‘क्वाड डेट मैनेजमेंट रिसोर्स पोर्टल’ (Quad Debt Management Resource Portal) की स्थापना (चीनी ऋण-जाल का मुकाबला करने के लिए)।

  • अन्य तकनीकी पहल:

    • क्वाड फैलोशिप: STEM पाठ्यक्रमों में डॉक्टरेट के लिए।

    • क्वाड सीनियर साइबर ग्रुप: साझा साइबर मानकों का क्रियान्वयन।

    • अंतरिक्ष क्षेत्र: उपग्रह डेटा साझाकरण (Climate Working Group के तहत)।

    • क्वाड वैक्सीन एक्सपर्ट्स ग्रुप: वैक्सीन रणनीति में सहयोग।

भारत के लिए क्वाड का रणनीतिक महत्व

  • चीन के ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ (String of Pearls) का मुकाबला: क्वाड भारत को हिंद महासागर में चीनी नौसैनिक विस्तारवाद को रोकने के लिए भू-स्थानिक और खुफिया लाभ प्रदान करता है।

  • आर्थिक और बुनियादी ढांचा कल्प (Blue Dot Network): मई 2022 में घोषित 50 बिलियन डॉलर के बुनियादी ढांचा कोष और ‘क्वाड डेट मैनेजमेंट रिसोर्स पोर्टल’ (G20 कॉमन फ्रेमवर्क के तहत) के माध्यम से यह समूह चीनी “ऋण-जाल कूटनीति” (Debt-Trap Diplomacy) का एक विश्वसनीय विकल्प पेश कर रहा है।

  • पोस्ट-कोविड और विनिर्माण कूटनीति: ‘सप्लाई चेन रेजिलिएंस इनिशिएटिव’ (SCRI) के तहत अमेरिकी और जापानी कंपनियां चीन से बाहर निकलकर भारत को एक वैकल्पिक विनिर्माण केंद्र (Alternative Manufacturing Hub) के रूप में देख रही हैं।

  • गैर-पारंपरिक सुरक्षा और तकनीक: स्टेम (STEM) पाठ्यक्रमों के लिए ‘क्वाड फैलोशिप’, ‘क्वाड वैक्सीन एक्सपर्ट्स ग्रुप’, ‘क्वाड सीनियर साइबर ग्रुप’ और अंतरिक्ष डेटा साझाकरण इसके बहुआयामी आयामों को दर्शाते हैं।

क्वाड की सीमाएं और चुनौतियां (Group Limitations)

  • संस्थागत ढांचे का अभाव: नाटो (NATO) की तरह क्वाड का कोई स्थायी सचिवालय (Secretariat) या औपचारिक चार्टर नहीं है। यह केवल संयुक्त बयानों और कार्य समूहों पर निर्भर है।

  • वैश्विक प्रतिक्रिया और “एशियाई नाटो” का नैरेटिव: चीन इसे शीतयुद्ध की मानसिकता वाला “इंडो-पैसिफिक नाटो” कहता है। रूस ने भी इसे अमेरिका के नेतृत्व वाली “विभाजनकारी नीति” का हिस्सा माना है, जो भारत-रूस के पारंपरिक रक्षा संबंधों के लिए एक कूटनीतिक चुनौती है।

  • चीन पर आर्थिक निर्भरता: भारत को छोड़कर, क्वाड के अन्य तीन सदस्य (अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) आर्थिक रूप से चीन के बाजार और आपूर्ति श्रृंखलाओं से गहरे जुड़े हुए हैं, जिससे उनकी रणनीतिक प्रतिक्रियाओं में एकरूपता का अभाव दिखता है।

  • आसयान (ASEAN) की केंद्रीयता की चिंताएं: इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देश चिंतित हैं कि क्वाड क्षेत्र में आसियान की केंद्रीय भूमिका को कमजोर कर सकता है।

  • रणनीतिक प्राथमिकताओं में अंतर: अमेरिका का प्राथमिक ध्यान वर्तमान में यूक्रेन-रूस संकट और मध्य पूर्व (लाल सागर संकट) पर केंद्रित है, जबकि भारत की मुख्य प्राथमिकता हिंद महासागर और उसकी भूमि सीमाओं की रक्षा करना है।

आगे की राह (Way Forward)

क्वाड की प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जाने चाहिए:

  1. सुरक्षा और विकास का संतुलन (Security-Development Balance): क्वाड को केवल “चीन-विरोधी क्लब” के रूप में पेश करने से बचना चाहिए। इसका ध्यान हिंद-प्रशांत क्षेत्र के छोटे द्वीपीय देशों को सार्वजनिक वस्तुएं (जैसे- वैक्सीन, आपदा राहत, स्वच्छ ऊर्जा) प्रदान करने पर अधिक होना चाहिए।

  2. आर्थिक मोर्चे को मजबूत करना (Economic Quad): इंडो-पैसिफिक इकोनॉमिक फ्रेमवर्क (IPEF) जैसी पहलों को और अधिक आकर्षक बनाना होगा ताकि क्षेत्र के देश चीनी निवेश (BRI) पर निर्भर न रहें।

  3. समुद्री सुरक्षा का विस्तार (Expanding Maritime Scope): IPMDA कूटनीति के तहत केवल सूचना साझा करने से आगे बढ़कर अवैध मादक पदार्थों की तस्करी और समुद्री डकैती के खिलाफ संयुक्त गश्त (Joint Patrols) की ओर बढ़ना चाहिए।

  4. संस्थागत स्थिरता: भविष्य की भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं से निपटने के लिए एक लचीला लेकिन औपचारिक चार्टर तैयार करने पर विचार किया जा सकता है।

  5. क्वाड प्लस’: वैश्विक चुनौतियों (जैसे महामारी और तकनीकी आपूर्ति श्रृंखला) से निपटने के लिए ब्राजील, इजरायल, दक्षिण कोरिया, वियतनाम और न्यूजीलैंड जैसे देशों को ‘क्वाड प्लस’ प्रारूप में शामिल किया जाना चाहिए।

“क्वाड 21वीं सदी की बहुध्रुवीय व्यवस्था का एक अनिवार्य भू-आर्थिक यथार्थ है। यह चीन को रोकने का एक नकारात्मक गठबंधन मात्र नहीं है, बल्कि हिंद-प्रशांत में अंतरराष्ट्रीय कानून की संप्रभुता और आर्थिक लचीलेपन को बनाए रखने वाला एक सकारात्मक सुरक्षा कवच है।”

  • प्रश्न: “हालाँकि क्वाड (Quad) ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और तकनीकी सहयोग को मजबूत किया है, लेकिन एक औपचारिक संस्थागत ढांचे का अभाव और चीन पर आर्थिक निर्भरता इसकी प्रभावशीलता को सीमित करती है। चर्चा कीजिए।” (250 शब्द, 15 अंक)

  • Question: “While the Quad has strengthened maritime security and technological cooperation in the Indo-Pacific, the lack of a formal institutional structure and economic dependence on China limit its effectiveness. Discuss.” (250 Words, 15 Marks)

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top