1 August 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत भारतीय अदालतों के डिजिटलीकरण हेतु e-Courts मिशन मोड प्रोजेक्ट, सौर ऊर्जा व जल संरक्षण को एकीकृत करने वाली प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY), देश को औषधीय क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने हेतु हिमाचल प्रदेश में बल्क ड्रग पार्क योजना, न्यायपालिका की कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए एआई (AI) आधारित LegRAA और Digital Courts 2.1 तकनीक, लद्दाख जैसे अत्यधिक ठंडे इलाकों हेतु भारतीय सेना द्वारा एक्सट्रीम वेदर ग्रेड डीजल (XWG Diesel) का शुभारंभ, अपतटीय खनिज संसाधनों के दोहन हेतु ‘समुद्र मंथन’ राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना, तथा वित्तीय तकनीक एवं द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने वाले भारत-मालदीव Favara-UPI क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट कॉरिडोर का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
न्याय प्रणाली में डिजिटल क्रांति: e-Courts मिशन मोड प्रोजेक्ट
- प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय राज्यव्यवस्था (Polity), ई-गवर्नेंस, और न्यायपालिका में तकनीकी पहल।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): ई-गवर्नेंस के अनुप्रयोग, सफलताएं व सीमाएं; न्यायपालिका की संरचना व कार्यप्रणाली; त्वरित न्याय का अधिकार और प्रौद्योगिकी का उपयोग।
चर्चा में क्यों?
कानून और न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में e-Courts मिशन मोड प्रोजेक्ट की प्रगति की अद्यतन स्थिति प्रस्तुत की। 30 जून 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, देश भर के उच्च न्यायालयों और जिला अदालतों में ई-फाइलिंग प्रणाली के माध्यम से 1.25 करोड़ से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं। ई-कोर्ट परियोजना का मुख्य लक्ष्य भारतीय न्यायिक प्रणाली में सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) के प्रयोग को मजबूत करना है।
मुख्य बिंदु: ICT पहल, ई-फाइलिंग और ई-सेवा केंद्र
1. ई-कोर्ट परियोजना के तहत प्रमुख ICT पहलें
- Case Information System (CIS 4.0): केस प्रबंधन और केस स्थिति ट्रैकिंग के लिए कोर सॉफ्टवेयर।
- राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड (NJDG): लंबित और निपटाए गए मामलों का राष्ट्रीय स्तर का व्यापक डेटाबेस।
- Interoperable Criminal Justice System (ICJS): पुलिस, जेल, फोरेंसिक और न्यायपालिका के बीच डेटा के सुगम आदान-प्रदान के लिए एक एकीकृत मंच।
- NSTEP: इलेक्ट्रॉनिक प्रक्रियाओं के माध्यम से समन और नोटिस की त्वरित डिलीवरी।
- वर्चुअल कोर्ट्स और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग: दूरस्थ सुनवाई और ई-पेमेंट्स (कोर्ट फीस का डिजिटल भुगतान) की सुविधा।
2. ई-फाइलिंग प्रणाली की स्थिति (30 जून 2026 तक)
- लागू करने वाले हाईकोर्ट: उत्तराखंड उच्च न्यायालय सहित 25 उच्च न्यायालयों और उनके अधीन जिला अदालतों में ई-फाइलिंग नियम लागू किए जा चुके हैं।
- कुल ई-फाइल्ड मामले: देश भर में कुल 1,25,87,329 (1.25 करोड़) मामले दर्ज हुए।
- उच्च न्यायालयों में: लगभग 20.18 लाख मामले।
- जिला न्यायालयों में: लगभग 1.05 करोड़ मामले।
- उत्तराखंड की स्थिति: उत्तराखंड में जिला अदालतों में 1.17 लाख और हाईकोर्ट में 356 मामलों सहित कुल 1,17,924 मामले दर्ज किए गए।
- विशेष प्रणाली: इलाहाबाद, दिल्ली, केरल और मध्य प्रदेश के उच्च न्यायालय अपनी स्वयं की ई-फाइलिंग एप्लिकेशन का उपयोग कर रहे हैं।
3. क्षमता निर्माण और ई-सेवा केंद्र
- जागरूकता और प्रशिक्षण: सर्वोच्च न्यायालय की eCommittee ने राज्य न्यायिक अकादमियों के माध्यम से न्यायाधीशों, अदालती कर्मचारियों और अधिवक्ताओं के लिए ओरिएंटेशन कार्यक्रम और कार्यशालाएं आयोजित की हैं। SOPs और वीडियो ट्यूटोरियल जारी किए गए हैं।
- ई-सेवा केंद्र: याचिकाकर्ताओं और वकीलों को पोर्टल पंजीकरण, दस्तावेजों की स्कैनिंग/अपलोडिंग और ई-पेमेंट में डिजिटल सहायता प्रदान करने के लिए स्थापित किए गए हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| पहलू / मापदंड | महत्वपूर्ण तथ्य |
| परियोजना का नाम | ई-कोर्ट्स मिशन मोड प्रोजेक्ट। |
| कार्यान्वयन संस्था | कानून एवं न्याय मंत्रालय, भारत सरकार और सर्वोच्च न्यायालय की eCommittee। |
| कुल ई-फाइलिंग मामले | 1.25 करोड़+ (30 जून 2026 तक)। |
| ई-फाइलिंग लागू | 25 उच्च न्यायालयों और उनके अधीनस्थ न्यायालयों में। |
| स्वयं का e-Filing App | इलाहाबाद, दिल्ली, केरल और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट। |
| मुख्य डिजिटल टूल | CIS 4.0, NJDG, ICJS, NSTEP, eSewa Kendras। |
प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY)
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, पर्यावरण एवं जैव विविधता, नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): बुनियादी ढांचा: ऊर्जा; संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण; जलवायु परिवर्तन से निपटने के प्रयास (Climate Change Mitigation)।
चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY)’ को औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य देश के विभिन्न अंतर्देशीय जलाशयों और औद्योगिक तालाबों में ऊर्जा भंडारण प्रणाली (ESS) के साथ तैरती सौर ऊर्जा (Floating Solar PV) परियोजनाओं का विकास करना है। सरकार ने इस पूरे मिशन के लिए ₹5,070 करोड़ का कुल वित्तीय बजट तय किया है। इसके जरिए भारत की मौजूदा सीमित फ्लोटिंग सोलर क्षमता को तेजी से बढ़ाकर राष्ट्रीय जलवायु लक्ष्यों और स्वच्छ ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती प्रदान की जाएगी।
मुख्य बिंदु: योजना के लक्ष्य, लाभ और वित्तीय संरचना
1. लक्ष्य और समयसीमा
- क्षमता लक्ष्य: 5,000 MW तैरती सौर ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित करना।
- ऊर्जा भंडारण (ESS): न्यूनतम 2 घंटे की स्टोरेज क्षमता (यानी 10,000 MWh) वाली स्टोरेज प्रणाली साथ में जुड़ी होगी।
- अवधि: परियोजनाएं वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक स्वीकृत की जाएंगी। वित्तीय सहायता का वितरण 2032-33 तक जारी रहेगा।
2. वर्तमान स्थिति और क्षमता आकलन
- राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संस्थान (NISE) ने देश के जलाशयों में लगभग 102.18 GWp फ्लोटिंग सोलर क्षमता का अनुमान लगाया है।
- भारत में वर्तमान में फ्लोटिंग सोलर क्षमता केवल 700 MW के करीब है। PM-SSY से इसमें 5,000 MW की बड़ी बढ़ोतरी होगी।
3. वित्तीय सहायता (Central Financial Assistance – CFA)
- कमीशनिंग पर सहायता: सफल चालू होने पर ₹1 करोड़ प्रति MW की केंद्रीय वित्तीय सहायता।
- प्राथमिक अध्ययन सहायता: बाथिमेट्री, हाइड्रोग्राफी और पर्यावरणीय अध्ययनों के लिए प्रति प्रोजेक्ट ₹50 लाख तक की अलग से सहायता।
4. प्रमुख लाभ और रणनीतिक महत्व
- भूमि की बचत: जलाशयों और औद्योगिक तालाबों का उपयोग होने से सीमित भूमि संसाधनों पर दबाव कम होगा।
- ग्रीड स्थिरता: ऊर्जा भंडारण प्रणाली (ESS) से ग्रिड को निरंतर और विश्वसनीय बिजली मिलेगी।
- उत्सर्जन में कमी: सालाना लगभग 10 मिलियन टन CO₂ उत्सर्जन कम होगा।
- रोजगार व मेक इन इंडिया: प्रोजेक्ट वैल्यू चेन में 16,000-17,000 पूर्णकालिक रोजगार पैदा होंगे। इसके अलावा फ्लोटेशन सिस्टम, PV सेल और मॉड्यूल के घरेलू निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| पहलू | महत्वपूर्ण तथ्य |
| योजना का नाम | प्रधानमंत्री सूर्य सरोवर योजना (PM-SSY)। |
| कुल बजट | ₹5,070 करोड़। |
| लक्ष्य क्षमता | 5,000 MW FSPV + 10,000 MWh Energy Storage System (ESS)। |
| अनुमानित क्षमता (NISE) | 102.18 GWp (भारत के अंतर्देशीय जलाशयों में)। |
| वर्तमान फ्लोटिंग क्षमता | लगभग 700 MW। |
| वित्तीय सहायता (CFA) | ₹1 करोड़/MW (चालू होने पर) + ₹50 लाख/प्रोजेक्ट (अध्ययन हेतु)। |
| पर्यावरणीय प्रभाव | ~10 मिलियन टन CO₂ प्रति वर्ष की कमी। |
हिमाचल प्रदेश में बल्क ड्रग पार्क योजना
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, सरकारी योजनाएं एवं नीतियां, औषधीय उद्योग (Pharmaceutical Industry)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, औद्योगिक नीति, विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector), बुनियादी ढांचे का विकास, और आयात निर्भरता में कमी।
चर्चा में क्यों?
रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने लोकसभा में हिमाचल प्रदेश के ऊना जिले में बन रहे बल्क ड्रग पार्क की वर्तमान प्रगति की जानकारी दी। इस दौरान सरकार ने बताया कि राज्यों से मिले सुझावों, फंड के उपयोग और निर्माण कार्यों की स्थिति को देखते हुए ‘बल्क ड्रग पार्क प्रोत्साहन योजना’ की समयावधि को वित्तीय वर्ष 2026-27 तक बढ़ा दिया गया है। 2025 में पर्यावरण मंजूरी मिलने के बाद अब इस प्रोजेक्ट के बुनियादी ढांचे के निर्माण में काफी तेजी आई है।
मुख्य बिंदु: परियोजना की स्थिति, बुनियादी ढांचा और फंड का विवरण
1. स्थान और स्वीकृत बजट
- लोकेशन: हरोली, जिला ऊना (हिमाचल प्रदेश)।
- केंद्रीय सहायता: फार्मास्यूटिकल्स विभाग (DoP) ने 11 अक्टूबर 2022 को ₹1,000 करोड़ स्वीकृत किए थे। इसमें से ₹225 करोड़ की पहली किश्त 2023 में जारी की जा चुकी है।
- राज्य का अंशदान: हिमाचल प्रदेश सरकार ने ₹118.46 करोड़ स्वीकृत किए और ₹35.53 करोड़ की राशि जारी की।
2. कॉमन इन्फ्रास्ट्रक्चर फैसिलिटीज (CIF) की वर्तमान प्रगति
- साइट डेवलपमेंट: पहले चरण का लगभग 20% कार्य पूरा हो गया है।
- जल आपूर्ति: 15 MLD क्षमता की जल आपूर्ति और भूजल पुनर्भरण का 98% काम पूरा हो चुका है।
- बिजली व्यवस्था: निर्माण चरण के लिए आवश्यक 20 MVA पावर इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लिया गया है।
- इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP): जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) आधारित CETP (₹273 करोड़) और स्टीम जनरेशन सिस्टम (₹300 करोड़) के लिए निविदाएं (tenders) जारी की गई हैं।
- अन्य सुविधाएं: गोदाम, सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, सॉल्वेंट रिकवरी सिस्टम, इमरजेंसी रिस्पॉन्स सेंटर और ठोस कचरा प्रबंधन सुविधाएं बनाई जा रही हैं।
3. देरी के कारण और निगरानी ढांचा
- देरी की मुख्य वजहें: 25 सितंबर 2025 को मिली पर्यावरणीय मंजूरी (Environmental Clearance) में देरी, पेड़ काटने की वैधानिक प्रक्रियाएं और निविदा प्रक्रियाएं।
- निगरानी संस्थाएं: केंद्रीय स्तर पर ‘स्कीम स्टीयरिंग कमेटी’ (SSC) तथा राज्य स्तर पर हिमाचल प्रदेश के उद्योग मंत्री की अध्यक्षता वाली ‘उच्च स्तरीय समिति’ द्वारा इसकी नियमित समीक्षा की जा रही है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| योजना का नाम | बल्क ड्रग पार्क प्रोत्साहन योजना (Promotion of Bulk Drug Parks Scheme)। |
| प्रशासनिक मंत्रालय | फार्मास्यूटिकल्स विभाग (DoP), रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय। |
| हिमाचल में स्थान | हरोली, जिला ऊना (हिमाचल प्रदेश)। |
| कुल स्वीकृत केंद्रीय मदद | ₹1,000 करोड़। |
| योजना का बढ़ा हुआ कार्यकाल | वित्तीय वर्ष 2026-27 तक। |
| मुख्य तकनीकी विशेषता | Zero Liquid Discharge (ZLD) आधारित कॉमन इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP)। |
भारतीय न्यायपालिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस: LegRAA और Digital Courts 2.1
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, ई-गवर्नेंस, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का अनुप्रयोग।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): ई-गवर्नेंस के अनुप्रयोग, चुनौतियां एवं संभावनाएं; न्यायपालिका का सुदृढ़ीकरण व त्वरित न्याय; शासन व्यवस्था में उभरती प्रौद्योगिकियां (Emerging Technologies)।
चर्चा में क्यों?
कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में ई-कोर्ट्स मिशन मोड प्रोजेक्ट के तीसरे चरण (Phase-III) के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि भारतीय अदालतों में न्यायिक दक्षता बढ़ाने के लिए दो नए AI टूल—LegRAA और Digital Courts 2.1 विकसित किए गए हैं। ये दोनों टूल वर्तमान में पायलट टेस्टिंग चरण में हैं। इनका मुख्य उद्देश्य न्यायाधीशों को कानूनी शोध, केस विश्लेषण और निर्णय लिखने में तकनीकी सहायता प्रदान करना है।
मुख्य बिंदु: AI टूल्स, बजटीय प्रावधान और संस्थागत ढांचा
1. ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट चरण-III और बजटीय आवंटन
- कार्यान्वयन: न्याय विभाग (Department of Justice) और सर्वोच्च न्यायालय की eCommittee मिलकर इसे लागू कर रही हैं।
- तकनीकी बजट: प्रोजेक्ट के ‘भविष्य की तकनीकी प्रगति’ (Future Technological Advancements) घटक के तहत ₹53.57 करोड़ की राशि निर्धारित की गई है।
2. नए विकसित AI टूल्स की विशेषताएं
- LegRAA (Legal Research Analysis Assistant):
- इसे NIC के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डिविजन और ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ई-कोर्ट्स’ (CoEE) ने मिलकर बनाया है।
- यह जजों को केस से जुड़े कानूनी शोध (legal research) और दस्तावेज विश्लेषण में मदद करेगा।
- Digital Courts 2.1:
- इसे CoEE, NIC पुणे द्वारा विकसित एक एकीकृत डिजिटल केस मैनेजमेंट प्लेटफॉर्म के रूप में पेश किया गया है।
- इसमें वॉइस-टू-टेक्स्ट ट्रांसक्रिप्शन और भाषा अनुवाद जैसी AI सुविधाएं दी गई हैं। इससे न्यायाधीशों को आदेशों और फैसलों का डिक्टेशन देने में आसानी होगी।
3. परिचालन ढांचा और नीतियां
- AI समाधानों के अंतिम इस्तेमाल और तैनाती का फैसला सुप्रीम कोर्ट और संबंधित हाई कोर्ट्स के नियमों व नीतियों के अनुसार तय किया जाएगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| LegRAA का फुल फॉर्म | Legal Research Analysis Assistant |
| LegRAA का कार्य | कानूनी शोध और डॉक्युमेंट एनालिसिस में जजों की सहायता। |
| Digital Courts 2.1 का कार्य | डिजिटल केस मैनेजमेंट, वॉइस-टू-टेक्स्ट ट्रांसक्रिप्शन और अनुवाद। |
| विकासकर्ता संस्थाएं | NIC की AI डिविजन और CoEE (Centre of Excellence for eCourts, Pune)। |
| उभरती तकनीकों का बजट | ₹53.57 करोड़ (eCourts Phase-III के तहत)। |
| वर्तमान स्थिति | दोनों AI टूल वर्तमान में पायलट परीक्षण (Pilot Testing) चरण में हैं। |
भारतीय सेना द्वारा एक्सट्रीम वेदर ग्रेड डीजल (XWG Diesel) का शुभारंभ
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (रक्षा तकनीक), आत्म-निर्भर भारत।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियां और उनका प्रबंधन; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और नई तकनीकों का विकास।
चर्चा में क्यों?
थल सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ ने नई दिल्ली में पूरी तरह स्वदेशी रूप से विकसित ‘एक्सट्रीम वेदर ग्रेड (XWG) डीजल’ का औपचारिक शुभारंभ किया। भारतीय सेना और सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) द्वारा संयुक्त रूप से विकसित यह विशेष ईंधन अत्यधिक विषम जलवायु वाले उच्च पर्वतीय इलाकों में सैन्य वाहनों की आवाजाही, सुरक्षा और परिचालन तत्परता को मजबूत बनाएगा।
मुख्य बिंदु: तकनीक, परिचालन लाभ और नागरिक अनुप्रयोग
1. पारंपरिक डीजल की समस्या और XWG का समाधान
- अत्यधिक कम तापमान में पारंपरिक डीजल जमने लगता है। इसके कारण ईंधन फिल्टर ब्लॉक हो जाते हैं और भारी बर्फबारी वाले इलाकों में वाहन अचानक बंद पड़ जाते हैं।

- नया XWG डीजल माइनस 42 डिग्री सेल्सियस (-42°C) जैसे भीषण जमाव बिंदु वाले तापमान में भी पूरी तरह तरल और प्रभावी बना रहता है।
2. मानक और इंजन अनुकूलता
- यह ईंधन BS-VI मानकों और IS 1460:2025 विनिर्देशों के पूरी तरह अनुकूल है।

- सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सेना को अपने मौजूदा वाहनों के बेड़े या इंजनों में बिना किसी बदलाव (Engine Modification) के सीधे इस ईंधन का उपयोग करने की सुविधा मिलती है।
3. रणनीतिक और सैन्य महत्व
- भीषण सर्दियों में गाड़ियों को चालू रखने के लिए पहले इस्तेमाल किए जाने वाले जोखिम भरे और देसी तरीकों की अब आवश्यकता नहीं रहेगी।
- इससे उच्च हिमालयी सीमावर्ती क्षेत्रों में सैनिकों का मनोबल और मिशन की विश्वसनीयता दोनों बढ़ेगी।

- भारतीय सेना और OMCs की संयुक्त टीम ने इस जटिल तकनीक को महज एक साल के भीतर विकसित कर दिखाया है।
4. नागरिक उपयोग (Civilian Application)
- सैन्य अभियानों के अलावा यह तकनीक लद्दाख, हिमाचल और उत्तर-पूर्व के उच्च पर्वतीय नागरिक क्षेत्रों में भी उपयोगी साबित होगी। अत्यधिक ठंड में स्थानीय नागरिकों के वाहनों और उपकरणों की विफलता में कमी आएगी।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| पहलू / मापदंड | महत्वपूर्ण तथ्य |
| उत्पाद का नाम | एक्सट्रीम वेदर ग्रेड (XWG) डीजल। |
| न्यूनतम प्रभावी तापमान | -42°C (माइनस 42 डिग्री सेल्सियस)। |
| तकनीकी मानक | BS-VI और IS 1460:2025 अनुकूल। |
| विकासकर्ता निकाय | भारतीय सेना + ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs)। |
| इंजन संशोधन की आवश्यकता | शून्य (बिना किसी बदलाव के मौजूदा बेड़े में प्रयोग योग्य)। |
| प्रमुख विज़न | आत्म-निर्भर भारत अभियान। |
समुद्र मंथन: राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, भारत का भूगोल (तटीय व समुद्री संसाधन), आर्थिक विकास।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): बुनियादी ढांचा: ऊर्जा क्षेत्र; भारतीय अर्थव्यवस्था तथा संसाधनों को जुटाना; ऊर्जा सुरक्षा और ‘मेक इन इंडिया’ / ‘आत्म-निर्भर भारत’।
चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘समुद्र मंथन’ – राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना (National Offshore Exploration Scheme) को मंजूरी दे दी। यह पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme) है। स्वतंत्रता दिवस 2025 के भाषण में दिए गए दृष्टिकोण को साकार करते हुए इस योजना के लिए ₹84,084 करोड़ का कुल बजट मंजूर किया गया है। यह योजना वित्तीय वर्ष 2030-31 तक लागू की जाएगी। इसका प्राथमिक लक्ष्य भारत के विशाल समुद्री क्षेत्रों में तेल और प्राकृतिक गैस की खोज को गति देकर देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है।
मुख्य बिंदु: योजना के घटक, रणनीतिक लक्ष्य और अपेक्षित प्रभाव
1. योजना के प्रमुख घटक और रणनीतिक पहलें
- सीस्मिक डेटा संग्रह: उच्च गुणवत्ता वाले सीस्मिक (भूकंपीय) डेटा का बड़े पैमाने पर अधिग्रहण, प्रसंस्करण और व्याख्या करना।
- गहरे समुद्र में ड्रिलिंग: गहरे (Deepwater) और अत्यधिक गहरे (Ultra-deepwater) समुद्री क्षेत्रों तथा अग्रणी बेसिनों (Frontier Basins) में वैज्ञानिक और खोजपूर्ण ड्रिलिंग को तेज करना।
- साझा बुनियादी ढांचा: अपतटीय उत्पादन और निष्कासन (Evacuation) के लिए कॉमन इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करना।
- मैन्युफैक्चरिंग ज़ोन: एक एकीकृत ‘तेल एवं गैस विनिर्माण तथा सेवा क्षेत्र’ (Oil & Gas Manufacturing and Services Zone) की स्थापना करना।
- डिजिटल और तकनीकी प्रबंधन: डिजिटल प्रोग्राम मैनेजमेंट, क्षमता निर्माण, उन्नत तकनीकों को अपनाने और अंतर्राष्ट्रीय जुड़ाव के लिए समर्पित प्रावधान शामिल हैं।
2. अपेक्षित परिणाम और आर्थिक-पर्यावरणीय प्रभाव
- भंडार में वृद्धि: तेल और गैस के हाइड्रोकार्बन भंडार में 600 मिलियन मीट्रिक टन तेल समकक्ष (MMTOE) से अधिक की बढ़ोतरी का लक्ष्य।
- आयात निर्भरता में कमी: घरेलू कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन में भारी वृद्धि होगी, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी।
- आत्म-निर्भर भारत और रोजगार: ‘मेक इन इंडिया’ के तहत स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही अन्वेषण और उत्पादन (E&P) मूल्य श्रृंखला में बड़े पैमाने पर नए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
- निजी निवेश को बढ़ावा: बुनियादी ढांचे और डेटा उपलब्धता से वैश्विक और घरेलू कंपनियों द्वारा इस क्षेत्र में बड़ा निवेश आकर्षित होगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| योजना का नाम | समुद्र मंथन – राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना। |
| मंत्रालय | पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय (Ministry of Petroleum & Natural Gas)। |
| योजना का प्रकार | केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme)। |
| कुल बजट परिव्यय | ₹84,084 करोड़। |
| कार्यान्वयन की अवधि | वित्तीय वर्ष 2030–31 तक। |
| लक्ष्य भंडार वृद्धि | >600 MMTOE (मिलियन मीट्रिक टन तेल समकक्ष)। |
| मुख्य क्षेत्र | गहरे व अति-गहरे समुद्री अपतटीय (Offshore) तेल एवं गैस अन्वेषण। |
भारत-मालदीव Favara-UPI क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट कॉरिडोर
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएं, अंतर्राष्ट्रीय संबंध (IR)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): भारत और उसके पड़ोसी संबंध, द्विपक्षीय नीतियां; ई-प्रद्योगिकी, बैंकिंग व डिजिटल फिनटेक इन्फ्रास्ट्रक्चर।
चर्चा में क्यों?
मालदीव मॉनेटरी अथॉरिटी (MMA) ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की। मालदीव के इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम ‘Favara’ और भारत के ‘UPI’ का एकीकरण अब पूरी तरह लाइव हो गया है। अब मालदीव के नागरिक सीधे अपने मोबाइल बैंकिंग ऐप का इस्तेमाल कर सकते हैं। वे बिना किसी झंझट के भारत में यूपीआई-लिंक्ड बैंक खातों में तुरंत पैसा भेज पाएंगे।
मुख्य बिंदु: कॉरिडोर की कार्यप्रणाली, अनुमति प्राप्त श्रेणियां व भविष्य का खाका
1. वास्तविक समय में लेनदेन (Real-Time Transfers)
- मालदीव में भुगतान मालदीवियन रुफिया (MVR) में शुरू होगा।
- भारत में प्राप्तकर्ता के खाते में पैसा सीधे भारतीय रुपये (INR) में क्रेडिट होगा।
- यह सर्विस P2P (पर्सन-टू-पर्सन) ट्रांसफर पर आधारित है।
2. शुरुआती चरण में शामिल बैंक
- बैंक ऑफ मालदीव (Bank of Maldives Plc)।
- मालदीव इस्लामिक बैंक (Maldives Islamic Bank Plc)।
3. किन कामों के लिए भेज सकते हैं पैसा?
- पारिवारिक रखरखाव: इनवर्ड और आउटवर्ड दोनों तरह के रेमिटेंस।
- उपहार: फॉरेन आउटवर्ड रेमिटेंस के तहत दिए जाने वाले गिफ्ट्स।
4. प्रोजेक्ट टाइमलाइन और आगे का प्लान
- समझौता: NIPL और MMA के बीच जुलाई 2025 में करार हुआ था।
- फास्ट टेस्टिंग: महज 10 दिनों में टेस्टिंग, सर्टिफिकेशन और लाइव वैलीडेशन पूरा किया गया।
- अगला चरण: जल्द ही QR-कोड मर्चेंट पेमेंट और अन्य डिजिटल सेवाएं शुरू होंगी। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार और पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलेगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| पहलू / मापदंड | महत्वपूर्ण तथ्य |
| मालदीव का सिस्टम | Favara (Maldives Instant Payment System)। |
| भारत का सिस्टम | Unified Payments Interface (UPI)। |
| संबद्ध संस्थाएं | NIPL (NPCI International Payments Limited) + MMA (Maldives Monetary Authority)। |
| भागीदार बैंक | Bank of Maldives Plc और Maldives Islamic Bank Plc। |
| करेंसी कन्वर्जन | MVR (मालदीवियन रुफिया) से INR (भारतीय रुपया)। |
| यूपीआई स्वीकार करने वाले 9 देश | कंबोडिया, सिंगापुर, यूएई, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर और श्रीलंका। |