1 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत गृह मंत्रालय द्वारा पारदर्शिता और आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए FCRA 2.0 पोर्टल और ई-ओसीआई (e-OCI) कार्ड जैसी अत्याधुनिक डिजिटल पहलों की शुरुआत की गई है। कृषि क्षेत्र को टिकाऊ बनाने के लिए जहां ‘खेत बचाओ अभियान’ को राष्ट्रीय मिशन का रूप दिया गया है, वहीं अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान में भारतीय वैज्ञानिकों ने सौर तूफानों (ICMEs) के थर्मल सिग्नेचर की खोज कर वैश्विक स्तर पर भारत का नाम रोशन किया है।
GCC कॉन्क्लेव ऑन इनोवेशन 2026: स्टार्टअप और उद्योग सहयोग को नई उड़ान
- प्रारंभिक परीक्षा: अटल इनोवेशन मिशन (AIM), नीति आयोग (NITI Aayog), STPI, भारत में स्टार्टअप इकोसिस्टम, विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीतियां।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): सूचना प्रौद्योगिकी (IT), औद्योगिक विकास, निवेश मॉडल, नवाचार (Innovation) और बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR), ‘विकसित भारत 2047’।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
30 जून 2026 को अटल इनोवेशन मिशन (AIM), नीति आयोग ने सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी पार्क्स ऑफ इंडिया (STPI) के साथ मिलकर बेंगलुरु में ‘GCC कॉन्क्लेव ऑन इनोवेशन 2026’ का आयोजन किया। इसका उद्देश्य भारत के जमीनी स्तर के नवाचार (ग्रासरूट इनोवेशन) और स्टार्टअप्स को वैश्विक दिग्गजों (Global Leaders) से जोड़ना है। इसमें वैश्विक क्षमता केंद्रों (GCCs), अनुसंधान एवं विकास (R&D) प्रमुखों और नीति निर्माताओं ने भाग लिया।
कॉन्क्लेव के मुख्य बिंदु और रणनीतिक कदम
1. भारत का GCC इकोसिस्टम (एक महाशक्ति के रूप में)
- भारत में वर्तमान में 2,100 से अधिक GCC (Global Capability Centres) काम कर रहे हैं।
- यह सेक्टर लगभग 100 बिलियन अमेरिकी डॉलर का राजस्व (Revenue) उत्पन्न करता है, जो भारतीय प्रतिभा पर वैश्विक कंपनियों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
2. तीन-स्तरीय नवाचार चक्र
इस कॉन्क्लेव में AIM के तीन प्रमुख स्तंभों को वैश्विक उद्योग (GCC) से जोड़ने पर रणनीति बनी:
- स्कूली स्तर: ‘अटल टिंकरिंग लैब्स’ (ATLs) के माध्यम से बच्चों में जिज्ञासा जगाना।
- स्टार्टअप इनक्यूबेशन: अटल इनक्यूबेशन सेंटर्स (AICs) और अटल कम्युनिटी इनोवेशन सेंटर्स (ACICs) के जरिए स्टार्टअप्स को शुरुआती सहायता देना।
- स्केल-अप (विस्तार) स्तर: आगामी इंडस्ट्रियल एक्सेलरेटर पहल AACESS के माध्यम से स्टार्टअप्स को बाजार में स्थापित करना।

3. ‘AACESS’ पहल: औद्योगिक विस्तार का नया मंच
- पूरा नाम: AACESS (Atal Acceleration Centres for Scale-up of Startups)।
- कार्य: यह AIM का एक आगामी इंडस्ट्रियल एक्सेलरेटर कार्यक्रम है।
- उद्देश्य: विकास के चरण (growth-stage) वाले स्टार्टअप्स को सीधे बड़े उद्योगों से जोड़ना, ताकि उन्हें औद्योगिक सत्यापन वातावरण (validation environments), पायलट प्रोजेक्ट के अवसर और मेंटरशिप मिल सके।
सहयोग के 4 मुख्य विषय
सम्मेलन में चार रणनीतिक विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई:
- स्कूली नवाचार का पुनरुद्धार: ATLs के माध्यम से बच्चों को उद्योग की जरूरतों के प्रति जागरूक करना।
- उद्यम से नवाचार का उत्प्रेरण: AICs और ACICs की मदद से विचारों को व्यापार में बदलना।
- औद्योगिक एक्सेलरेटर (AACESS): इसके माध्यम से व्यापक स्तर पर बड़े नवाचारों को गति देना।
- संयुक्त एक्सेलरेटर प्लेटफॉर्म: STPI के ‘सेंटर्स ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप’ के साथ मिलकर उद्योग-नेतृत्व वाले नवाचार को बढ़ावा देना।
अध्याय: खेत बचाओ अभियान और हरियाणा का कृषि मॉडल
- प्रारंभिक परीक्षा: कृषि पद्धतियां, मृदा स्वास्थ्य (Soil Health), टिकाऊ कृषि (Sustainable Agriculture), FPO मिशन।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय कृषि और संबंधित मुद्दे (Indian Agriculture); भूमि क्षरण (Land Degradation); कृषि में प्रौद्योगिकी (Technology in Agri); फसल विविधीकरण (Crop Diversification)।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
30 जून 2026 को हरियाणा के रेवाड़ी जिले के बावल स्थित कृषि महाविद्यालय में ‘खेत बचाओ अभियान‘ (Save the Farm Campaign) का समापन समारोह और ‘हरियाणा किसान उत्पादक संगठन (FPO) मिशन’ का भव्य शुभारंभ हुआ। इस कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान और हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायाब सिंह सaini ने भाग लिया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने ‘खेत बचाओ अभियान’ को एक राष्ट्रव्यापी दीर्घकालिक मिशन बनाने की घोषणा की।
अभियान के मुख्य नीतिगत बिंदु और रणनीतिक घोषणाएं
1. ‘खेत बचाओ अभियान’ अब एक राष्ट्रीय मिशन
- नया संकल्प: केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि यह केवल एक अस्थायी अभियान नहीं रहेगा, बल्कि अब इसे एक राष्ट्रीय मिशन का रूप दिया जाएगा।
- व्यक्तिगत प्रतिबद्धता: कृषि मंत्री प्रत्येक सप्ताह कम से कम एक दिन देश के विभिन्न राज्यों में इस मिशन से जुड़े कार्यक्रमों में स्वयं भाग लेंगे ताकि संतुलित उर्वरक उपयोग और मृदा संरक्षण को जन-आंदोलन बनाया जा सके।
2. हरियाणा का कृषि मॉडल: देश के लिए मार्गदर्शक
केंद्रीय मंत्री ने अन्य राज्यों को हरियाणा के निम्नलिखित सफल कृषि और प्रशासनिक सुधारों को अपनाने की सलाह दी:
- 24 फसलों पर MSP: हरियाणा देश का अग्रणी राज्य है जो 24 फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) प्रदान कर रहा है।
- भावांतर भरपाई योजना: बागवानी फसलों, सब्जियों और फलों की कीमतों में गिरावट से होने वाले नुकसान से किसानों को बचाने के लिए मूल्य-कमी मुआवजा योजना।
- डिजिटल गवर्नेंस: ‘मेरी फसल, मेरा ब्यौरा’ (फसल पंजीकरण हेतु) और ‘मेरा पानी, मेरी विरासत’ (जल संरक्षण और फसल विविधीकरण हेतु) जैसी अनूठी पहलें।
- फसल विविधीकरण प्रोत्साहन: धान (Paddy) की खेती छोड़कर दलहन (Pulses) अपनाने वाले किसानों को ₹8,000 प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि।
3. ‘मृदा स्वास्थ्य’ (Soil Health) और संतुलित उर्वरक पर चिंता
- मृदा क्षरण का संकट: यूरिया और डीएपी (DAP) जैसे रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक और असंतुलित उपयोग से मिट्टी की अम्लता (Acidity) बढ़ रही है और लाभकारी सूक्ष्मजीव व केंचुए नष्ट हो रहे हैं।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण: किसानों से अपील की गई कि वे केवल वैज्ञानिक मृदा परीक्षण (Soil Testing) के आधार पर ही आवश्यक मात्रा में खाद का उपयोग करें।
4. कृषि में तकनीकी नवाचार: मोबाइल आधारित सॉइल कार्ड
- स्मार्ट खेती: सरकार एक ऐसे मोबाइल एप्लिकेशन पर काम कर रही है जो किसानों के सॉइल हेल्थ कार्ड (Soil Health Card) के डेटा से सीधे जुड़ा होगा।
- कार्यप्रणाली: किसान अपने खेत में खड़े रहकर मोबाइल ऐप के जरिए अपनी मिट्टी की पोषक तत्व संरचना, कमियों और उर्वरक की सटीक आवश्यकता की तुरंत जानकारी प्राप्त कर सकेंगे, जिससे इनपुट लागत (Input Cost) में कमी आएगी।
जलवायु परिवर्तन और अल नीनो से निपटने की तैयारी
मौसम विभाग द्वारा कम वर्षा के अनुमानों को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार मिलकर निम्नलिखित रणनीतियों पर काम कर रही हैं:
- कम पानी चाहने वाली और जल्दी पकने वाली (Short-duration) फसलों की किस्मों को बढ़ावा देना।
- प्राकृतिक खेती (Natural Farming) को प्रोत्साहन देना, जिससे भूमि की जल धारण क्षमता (Water Retention Capacity) बढ़ती है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य |
| अभियान का नाम | खेत बचाओ अभियान (Save the Fields, Save the Earth) |
| आयोजन स्थल | कृषि महाविद्यालय, बावल (रेवाड़ी जिला, हरियाणा) |
| नई पहल की शुरुआत | हरियाणा किसान उत्पादक संगठन (FPO) मिशन का शुभारंभ |
| प्रोत्साहन राशि | धान से दलहन की ओर शिफ्ट करने पर ₹8,000 प्रति एकड़ (हरियाणा सरकार) |
| तकनीकी समाधान | सॉइल हेल्थ कार्ड को सीधे मोबाइल एप्लीकेशन से जोड़ने की योजना |
| प्रमुख नारा | “संतुलित उर्वरक ही स्वस्थ पृथ्वी की कुंजी है” तथा “खेत बचाओ, भविष्य बचाओ” |
राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन 2026 और ‘सरस शक्ति’ पहल
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन (RGVS), ‘सरस शक्ति’ कलेक्शन, डे-एनआरएलएम (DAY-NRLM), लखपति दीदी योजना।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप (Government Policies); महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment); स्वयं सहायता समूह (SHGs) और उनकी भूमिका; ग्रामीण विकास व समावेशी विकास (Inclusive Growth)।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन (RGVS) 2026 का समापन 29 जून 2026 को हुआ। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य ‘विकसित ग्राम, विकसित भारत’ के दृष्टिकोण को गति देना था। इस अवसर पर केंद्रीय ग्रामीण विकास और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने ग्रामीण महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए ‘सरस शक्ति’ (SARAS Shakti) कलेक्शन और एक कॉफी टेबल बुक लॉन्च की।
सम्मेलन के मुख्य बिंदु और रणनीतिक निर्णय
1. ग्रामीण विकास योजनाओं की समीक्षा
सम्मेलन में केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय मजबूत करने तथा ग्रामीण विकास की निम्नलिखित फ्लैगशिप योजनाओं की समीक्षा पर बल दिया गया:
- VB-GRAMG अधिनियम, 2025: इसके प्रभावी कार्यान्वयन पर प्राथमिक ध्यान केंद्रित किया गया।
- प्रमुख योजनाएं: प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण (PMAY-G), प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY), और राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP)।
- लखपति दीदी लक्ष्य: वर्ष 2029 तक 6 करोड़ ‘लखपति दीदी’ बनाने के लक्ष्य को गति देने के लिए डिजिटल हस्तक्षेपों (Digital Interventions) पर चर्चा हुई।
2. स्वयं सहायता समूहों (SHGs) का सशक्तिकरण
- वर्तमान स्थिति: दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत वर्तमान में 10 करोड़ से अधिक महिलाएं स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी हुई हैं।
- रणनीति: इन महिला उद्यमियों के लिए एंटरप्राइज फाइनेंसिंग (व्यवसाय ऋण), डिजिटल नवाचार, ब्रांडिंग और वैश्विक बाजार तक पहुंच (Market Access) सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
3. ‘सारस आजीविका’ और ‘सारस शक्ति’ लॉन्च
- सारस का विकास: वर्ष 1999 में पहले ‘सारस मेले’ से शुरू हुई यह पहल अब एक राष्ट्रव्यापी मार्केटिंग इकोसिस्टम बन चुकी है, जिसमें 25 से अधिक राज्य ब्रांड शामिल हैं और यह सालाना ₹200 करोड़ से अधिक का मेला व्यवसाय उत्पन्न करती है।
- सरस शक्ति कलेक्शन (SARAS Shakti Collection): इसके तहत देश भर के महिला SHGs द्वारा बनाए गए प्रीमियम उत्पादों को प्रदर्शित किया गया है ताकि उन्हें बड़े कॉर्पोरेट और संस्थागत बाजारों में जगह मिल सके।
- कॉफी टेबल बुक: यह पुस्तक इन ग्रामीण महिला उद्यमों की विविधता, गुणवत्ता और बाजार क्षमता को दस्तावेजों के माध्यम से वैश्विक पटल पर प्रदर्शित करती है।
सरस आजीविका गैलरी: क्षेत्रीय कला का प्रदर्शन
सम्मेलन के दौरान प्रदर्शित गैलरी में भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और हस्तशिल्प विविधता को दिखाया गया, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं:
- वस्त्र और हैंडलूम: पंजाब की फुलकारी, जम्मू-कश्मीर की पश्मीना, तेलंगाना का इकात और तेलिया कपड़ा, तथा मिजोरम का पंचेई ।
- हस्तशिल्प और धातु कला: मीनाकारी, डोकरा कला, पीतल का काम और पारंपरिक काष्ठ कला (Woodcraft)।
सौर तूफानों के थर्मल सिग्नेचर और अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान
- प्रारंभिक परीक्षा: सामान्य विज्ञान, वैज्ञानिक अनुसंधान, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी (Space Technology), आदित्य-L1 मिशन।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं उनके अनुप्रयोग और रोजमर्रा के जीवन पर इनका प्रभाव; अंतरिक्ष क्षेत्र में भारतीयों की उपलब्धियां; अंतरिक्ष मौसम (Space Weather) और उपग्रह प्रणालियां।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
30 जून 2026 को जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के तहत एक स्वायत्त संस्थान, भारतीय ताराभौतिकी संस्थान (IIA), बेंगलुरु के खगोल वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। शोधकर्ताओं ने पृथ्वी की ओर आने वाले बड़े सौर विस्फोटों, जिन्हें इंटरप्लेनेटरी कोरोनल मास इजेक्शन (ICMEs) कहा जाता है, के ‘थर्मल व्यवहार’ (तापमान में बदलाव) का पहला दीर्घकालिक सांख्यिकीय अध्ययन किया है। यह शोध प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ‘मंथली नोटिसेज ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी’ (MNRAS) में प्रकाशित हुआ है।
क्या होते हैं ICMEs और उनके प्रभाव?
- परिभाषा: ICMEs सूर्य के बाहरी वायुमंडल (Corona) से निकलने वाले चुम्बकीय प्लाज्मा (Magnetized Plasma) के विशाल विस्फोट हैं, जो अंतरिक्ष में यात्रा करते हैं।
- प्रभाव: जब ये पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराते हैं, तो भू-चुंबकीय तूफान (Geomagnetic Storms) पैदा करते हैं।

- नुकसान: इन तूफानों से उपग्रह संचालन (Satellite Operations), जीपीएस, रेडियो संचार, विमानन मार्ग (Aviation Routes) और बिजली ग्रिड (Power Grids) गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, इनसे पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में खूबसूरत ऑरोरा (Auroras – ध्रुवीय ज्योति) भी बनते हैं।
- सौर चक्र (Solar Cycle): सौर गतिविधियां हर 11 वर्ष में चरम (Maxima) पर होती हैं। वर्तमान सौर चक्र-25 का चरम वर्ष 2025 में था।
शोध के मुख्य निष्कर्ष
यह अध्ययन 1995 से 2024 तक (लगभग 29 वर्षों और तीन सौर चक्रों- 23, 24, 25) के डेटा पर आधारित है, जिसे नासा (NASA) के ओम्नी (OMNI) डेटाबेस से लिया गया था।
1. पॉलीट्रोपिक इंडेक्स
वैज्ञानिकों ने प्रत्येक ICME के भीतर दबाव/तापमान और घनत्व के संबंध को मापने के लिए पॉलीट्रोपिक इंडेक्स की गणना की। इससे प्लाज्मा के गर्म या ठंडे होने की अवस्था का पता चलता है।
2. सौर तूफान अंतरिक्ष में ठंडे नहीं, ‘थर्मिकली एक्टिव’ होते हैं
- पहले यह माना जाता था कि कोरोनल मास इजेक्शन (CME) जैसे-जैसे अंतरिक्ष में फैलते हैं, वे ठंडे हो जाते हैं।
- लेकिन इस शोध ने साबित किया कि लगभग 45% सौर विस्फोट पृथ्वी के करीब (1 AU की दूरी पर) पहुंचने पर भी गर्म (Heating Signatures) होते हैं। यह स्थिति विशेष रूप से सौर अधिकतम के दौरान देखी जाती है।
3. सौर चक्रों के साथ बदलाव
शोध में पाया गया कि सौर चक्र-23 (Solar Cycle 23) के दौरान सौर तूफान अधिक गर्म अवस्था में थे, जबकि सौर चक्र-24 में वे अधिक ठंडे (Cooling-dominated) अवस्था में बदल गए। यह दर्शाता है कि सौर चक्र का चुंबकीय वातावरण इन तूफानों के तापमान को नियंत्रित करता है।
4. सबसे विनाशकारी तूफानों की पहचान
पृथ्वी पर आने वाले सबसे गंभीर और प्रभावी (Geoeffective) सौर तूफान उन ICMEs के कारण आते हैं जो गर्म अवस्था (कम पॉलीट्रोपिक इंडेक्स-में होते हैं। इनमें मजबूत चुंबकीय क्षेत्र और तीव्र विस्तार गति (Expansion Speed) होती है।
अंतरिक्ष मौसम पूर्वानुमान में भारत का अगला कदम: आदित्य-L1
IIA के वैज्ञानिकों के अनुसार, इस थर्मल मॉडल को भविष्य में भारत के आदित्य-L1 मिशन से मिलने वाले आंकड़ों के साथ जोड़ा जाएगा। आदित्य-L1 पर लगे कोरोनोग्राफ और सौर पवन (Solar Wind) मापने वाले उपकरण सूर्य के करीब ही इन तूफानों के थर्मल व्यवहार को ट्रैक कर सकेंगे, जिससे अंतरिक्ष मौसम की सटीक भविष्यवाणी की जा सकेगी।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य |
| शोध संस्थान | भारतीय ताराभौतिकी संस्थान (IIA), बेंगलुरु (DST के तहत)। |
| ICME का पूर्ण रूप | इंटरप्लेनेटरी कोरोनल मास इजेक्शन (Interplanetary Coronal Mass Ejections)। |
| डेटा का स्रोत | नासा (NASA) का OMNI डेटाबेस (29 वर्षों का डेटा: 1995-2024)। |
| पॉलीट्रोपिक इंडेक्स | सौर तूफानों के आंतरिक प्लाज्मा के थर्मल/तापमान अवस्था को मापने का पैमाना। |
| खोज का महत्व | गर्म अवस्था वाले सौर तूफान पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र के लिए सबसे खतरनाक होते हैं। |
| आगामी एकीकरण | भारत के पहले सूर्य मिशन आदित्य-L1 के डेटा का उपयोग इसके सटीक पूर्वानुमान के लिए होगा। |
इंडियास्किल्स प्रतियोगिता 2026-27 और भारत का कौशल परिदृश्य
- प्रारंभिक परीक्षा: मानव संसाधन विकास, सरकारी योजनाएं और कौशल विकास पहल (Skill India)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): शिक्षा और मानव संसाधन से संबंधित सामाजिक क्षेत्र की योजनाएं; भारतीय अर्थव्यवस्था और रोजगार (Employment); जनसांख्यिकीय लाभांश (Demographic Dividend) का लाभ उठाना।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
30 जून 2026 को कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयंत चौधरी ने देश की सबसे बड़ी कौशल स्पर्धा ‘इंडियास्किल्स प्रतियोगिता 2026-27’ को आधिकारिक तौर पर लॉन्च कर दिया है। इसके साथ ही इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए स्किल इंडिया डिजिटल हब (SIDH) पोर्टल पर ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।
इंडियास्किल्स प्रतियोगिता 2026-27 के मुख्य बिंदु
1. संगठनात्मक ढांचा और उद्देश्य
- नोडल मंत्रालय: यह प्रतियोगिता कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) के तत्वावधान में आयोजित की जाती है।
- कार्यान्वयन भागीदार: राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) इसमें ज्ञान और कार्यान्वयन भागीदार (Knowledge and Implementation Partner) के रूप में सहयोग कर रहा है।
- लक्ष्य: भारत के युवाओं की वैश्विक स्तर की व्यावसायिक प्रतिभा की पहचान करना और उन्हें अंतरराष्ट्रीय मानकों (जैसे वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता) के लिए तैयार करना।
2. चयन की त्रि-स्तरीय प्रक्रिया (Selection Pathway)
यह प्रतियोगिता जमीनी स्तर से शुरू होकर वैश्विक मंच तक पहुँचने का एक पारदर्शी रास्ता देती है:
{जिला स्तर} \{राज्य स्तर} \{क्षेत्रीय स्तर} \{राष्ट्रीय प्रतियोगिता}
राष्ट्रीय स्तर पर चुने गए सर्वश्रेष्ठ युवाओं को विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी, जिसके बाद वे ‘वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता’ में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।
3. कौशल श्रेणियाँ (Skill Categories)
इस बार भी प्रतियोगिता में कुल 63 फ्यूचर-रेडी (भविष्य के अनुकूल) स्किल्स को शामिल किया गया है। इनमें उन्नत विनिर्माण (Advanced Manufacturing), डिजिटल तकनीक, निर्माण (Construction), इंजीनियरिंग, आतिथ्य (Hospitality), परिवहन और उभरते हुए अन्य आधुनिक तकनीकी क्षेत्र शामिल हैं।
अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का हालिया प्रदर्शन
यह प्रतियोगिता भारत के कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र (Skilling Ecosystem) को वैश्विक पहचान दिलाने में गेम-चेंजर साबित हुई है:
- वर्ल्डस्किल्स 2024 (ल्योन, फ्रांस): भारत ने इतिहास का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 13वां स्थान हासिल किया (4 कांस्य पदक और 12 मेडलियन्स फॉर एक्सीलेंस)।
- वर्ल्डस्किल्स एशिया 2025: भारत ने और बेहतर प्रदर्शन करते हुए एशिया में 8वां स्थान प्राप्त किया।
- ग्लोबल स्किल्स चैलेंज 2026 (ऑस्ट्रेलिया): भारतीय टीम ने हाल ही में शानदार प्रदर्शन करते हुए 3 स्वर्ण, 1 रजत और 1 कांस्य पदक अपने नाम किए।
- आगामी लक्ष्य: भारतीय दल इस साल के अंत में शंघाई में होने वाली वर्ल्डस्किल्स प्रतियोगिता 2026 में अपनी कला का प्रदर्शन करेगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| बिंदु / घटक | महत्वपूर्ण तथ्य |
| प्रतियोगिता का नाम | इंडियास्किल्स (IndiaSkills) प्रतियोगिता 2026–27 |
| मंत्रालय | कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) |
| क्रियान्वयन एजेंसी | राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) |
| रजिस्ट्रेशन पोर्टल | स्किल इंडिया डिजिटल हब (SIDH) |
| शामिल कौशल की संख्या | 63 उद्योग-प्रासंगिक (Industry-relevant) श्रेणियाँ |
| शुरुआत का वर्ष | वर्ष 2016 (2016 में 5,000 पंजीकरण से बढ़कर 2025-26 में 3.5 लाख+ पंजीकरण हुए) |
पर्यटन और आतिथ्य (Hospitality) क्षेत्र में विकास को गति
- प्रारंभिक परीक्षा: आर्थिक और सामाजिक विकास, सतत विकास, नीति आयोग की रिपोर्ट।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था और योजना, बुनियादी ढांचा (Infrastructure): ऊर्जा, बंदरगाह, सड़कें, हवाई अड्डे, रेलवे और पर्यटन; रोजगार सृजन; समावेशी विकास।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
30 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान पर्यटन मंत्रालय और नीति आयोग ने संयुक्त रूप से एक महत्वपूर्ण रिपोर्ट लॉन्च की है, जिसका शीर्षक है: ‘अनलॉकिंग ग्रोथ इन टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी सेक्टर’। यह रिपोर्ट ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण के तहत पर्यटन क्षेत्र में नियमों को सरल बनाने और निवेश बढ़ाने का एक रोडमैप प्रदान करती है।
रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष और रणनीतिक सिफारिशें
1. विनियामक बाधाओं (Regulatory Bottlenecks) की पहचान
रिपोर्ट में होटल, होमस्टे, रेस्तरां (F&B सर्विसेज), टूर ऑपरेटरों और पर्यटन बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को संचालित करने वाले मौजूदा नियमों का बारीकी से अध्ययन किया गया है। इसमें पाया गया कि जटिल अनुमोदन प्रक्रियाएं और अत्यधिक अनुपालन बोझ (Compliance Burden) इस क्षेत्र में निजी निवेश की राह में बड़ी बाधाएं हैं।
2. प्रमुख सिफारिशें और आगे की राह
- व्यवसाय सुगमता (Ease of Doing Business): पर्यटन और आतिथ्य क्षेत्र से जुड़े विनियामक और अनुमोदन प्रक्रियाओं को सरल बनाना।
- अंतर-विभागीय समन्वय: केंद्र, राज्यों और स्थानीय निकायों के बीच नीतिगत समन्वय को मजबूत करना ताकि परियोजनाओं को समय पर मंजूरी मिल सके।
- आवास क्षमता का विस्तार: होमस्टे और स्थानीय आतिथ्य व्यवसायों को बढ़ावा देकर ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों में पर्यटकों के ठहरने की क्षमता को बढ़ाना।
- सतत पर्यटन (Sustainable Tourism): ऐसी पर्यटन प्रथाओं को बढ़ावा देना जो पर्यावरण के अनुकूल हों, स्थानीय आजीविका का समर्थन करती हों और सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करती हों।
पर्यटन क्षेत्र का आर्थिक एवं सामाजिक महत्व
कार्यशाला में नीति निर्माताओं ने देश के विकास में पर्यटन की भूमिका को तीन मुख्य स्तंभों के रूप में रेखांकित किया:
- आर्थिक विकास (Economic Growth): विदेशी मुद्रा अर्जित करने और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में योगदान देने का बड़ा माध्यम।
- रोजगार सृजन (Employment Generation): यह एक श्रम-प्रधान (Labor-intensive) क्षेत्र है जो कुशल और अकुशल दोनों तरह के युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार देता है।
- क्षेत्रीय विकास (Regional Development): दूरदराज के सांस्कृतिक और प्राकृतिक स्थलों का विकास कर क्षेत्रीय असमानता को कम करना।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | तथ्य |
| रिपोर्ट का नाम | अनलॉकिंग ग्रोथ इन टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी सेक्टर |
| जारीकर्ता संस्थाएं | पर्यटन मंत्रालय + नीति आयोग (NITI Aayog)। |
| आयोजन स्थल | राष्ट्रीय कार्यशाला, नई दिल्ली (30 जून 2026)। |
| मूल उद्देश्य | नियमों को सरल बनाना, निजी निवेश आकर्षित करना और व्यापार सुगमता बढ़ाना। |
| दीर्घकालिक विजन | ‘विकसित भारत 2047’ के तहत पर्यटन आधारित आर्थिक विकास को गति देना। |
FCRA 2.0 पोर्टल और ई-ओसीआई (e-OCI) कार्ड का शुभारंभ
- प्रारंभिक परीक्षा: विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA), ओसीआई (OCI) कार्ड योजना, सरकारी पोर्टल और डिजिटल पहल।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): विकास प्रक्रिया और विकास उद्योग- गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) की भूमिका; शासन व्यवस्था (Governance) और ई-गवर्नेंस के अनुप्रयोग; आंतरिक सुरक्षा (GS-3) – विदेशी फंडिंग की निगरानी।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
30 जून 2026 को केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में ‘FCRA 2.0 पोर्टल’ और ‘ई-ओसीआई कार्ड’ लॉन्च किया। ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ (Minimum Government, Maximum Governance) के सिद्धांत पर आधारित ये दोनों डिजिटल पहलें पारदर्शिता बढ़ाने, प्रशासनिक कागजी कार्रवाई को खत्म करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में गृह मंत्रालय का एक बड़ा कदम हैं।
1. FCRA 2.0 पोर्टल: विदेशी फंडिंग की पारदर्शी निगरानी
विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) के तहत गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को मिलने वाले विदेशी चंदे की प्रक्रिया को सरल और सुरक्षित बनाने के लिए इस नए पोर्टल को डिजाइन किया गया है।
मुख्य विशेषताएं और तकनीकी सुधार:
- पूर्णतः डिजिटल (End-to-End): वर्तमान में देश में लगभग 14,500 सक्रिय FCRA पंजीकृत संगठन हैं। अब आवेदन, नवीनीकरण (Renewals) और वार्षिक रिटर्न (Annual Returns) जमा करने की पूरी प्रक्रिया को 100% डिजिटल कर दिया गया है।
- भौतिक दस्तावेजों की समाप्ति: अब किसी भी संगठन को भौतिक (Physical) रूप से दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी।
- आधुनिक तकनीक का एकीकरण: पोर्टल में आधार-आधारित प्रमाणीकरण (Aadhaar-based authentication), ई-साइन सुविधा, और दस्तावेजों के स्वचालित विश्लेषण के लिए OCR (ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकॉग्निशन) जैसी तकनीकें शामिल की गई हैं।
- ‘मेघराज’ क्लाउड पर होस्टिंग: डेटा चोरी और साइबर हमलों से सुरक्षा के लिए इस पूरे डेटा को सरकारी नेशनल क्लाउड ‘MeghRaj’ पर होस्ट किया गया है।
- डेटाबेस लिंकेज: यह पोर्टल पैन (PAN), आधार, ओसीआई, एनजीओ दर्पण (NGO Darpan) और आईसीएआई (ICAI) के UDIN सिस्टम के साथ एकीकृत है, जिससे रियल-टाइम वेरिफिकेशन आसान होगा।
- FCRA संशोधन नियम, 2026: नए पोर्टल में हाल ही में लागू किए गए FCRA संशोधन नियम, 2026 के प्रमुख प्रावधानों को भी शामिल किया गया है।
2. ई-ओसीआई कार्ड: वैश्विक भारतीय प्रवासियों के लिए सुगमता
यह डिजिटल पहल दुनिया भर में फैले 50 लाख से अधिक ‘ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया’ (OCI) कार्डधारकों को सीधे लाभान्वित करेगी।
मुख्य सुधार और लाभ:
- पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन: आवेदन करने, दस्तावेज अपलोड करने से लेकर स्वीकृत होने के बाद डिजिटल ई-ओसीआई कार्ड डाउनलोड करने तक की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी।
- 20 वर्ष की आयु का नियम समाप्त: पहले नियम था कि 20 वर्ष की आयु के बाद नया पासपोर्ट मिलने पर ओसीआई पुस्तिका को दोबारा जारी करवाना पड़ता था। अब इस बाध्यता को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। अब नया पासपोर्ट मिलने पर केवल उसकी जानकारी ऑनलाइन अपडेट करनी होगी।
- यूनिक रजिस्ट्रेशन नंबर: अब प्रत्येक कार्डधारक का पंजीकरण नंबर हमेशा के लिए विशिष्ट रहेगा।
- दस्तावेजों के खोने का जोखिम नहीं: डिजिटल ओसीआई कार्ड होने से भौतिक दस्तावेज के फटने या खोने का डर खत्म हो जाएगा और हवाई अड्डों पर तेजी से आव्रजन (Immigration) और रियल-टाइम सत्यापन संभव होगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / पहल | प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य |
| लॉन्च करने वाला मंत्रालय | गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs), भारत सरकार। |
| FCRA का पूर्ण रूप | विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम / Foreign Contribution (Regulation) Act। |
| सक्रिय संगठन और डेटा मात्रा | भारत में ~14,500 सक्रिय FCRA संगठन; सालाना 15k-20k आवेदन प्राप्त होते हैं। |
| तकनीकी प्लेटफॉर्म | नेशनल गवर्नमेंट क्लाउड ‘MeghRaj’ पर आधारित सुरक्षा अवसंरचना। |