22 September 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत स्वास्थ्य क्षेत्र में दवा सुरक्षा व निगरानी को सुदृढ़ करने वाले राष्ट्रीय भेषज संहिता (NFI) 2026 और बायोविजिलेंस प्रोग्राम (मरीज सुरक्षा की ओर बड़ा कदम), प्रकृति संरक्षण और स्वदेशी समुदायों के अधिकारों के संतुलन पर केंद्रित WWF वैश्विक संरक्षण सम्मेलन 2026, द्विपक्षीय सामरिक संबंधों को मजबूत करने वाले अभ्यास नोमैडिक एलिफेंट 2026 (भारत-मंगोलिया संयुक्त सैन्य अभ्यास), स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण हेतु आवश्यक खनिजों की आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए क्रिटिकल मिनरल्स रीसाइक्लिंग और सर्कुलर इकोनॉमी, कृषि व डेयरी उत्पाद निर्यात को बढ़ावा देने वाले भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 2026, उपभोक्ता कल्याण व बाजार स्थिरता हेतु चीनी स्टॉक सीमा नियमों में राहत और खुदरा मूल्य नियंत्रण, तथा शहरों को कचरा-मुक्त बनाने हेतु विरासत अपशिष्ट और डंपसाइट रीक्लेमेशन (कचरे से कंचन की ओर भारत) का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
राष्ट्रीय भेषज संहिता (NFI) 2026 और बायोविजिलेंस प्रोग्राम: मरीज सुरक्षा की ओर बड़ा कदम
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की वर्तमान घटनाएं, स्वास्थ्य नीति एवं तकनीकी पहलें।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): स्वास्थ्य क्षेत्र, सरकारी नीतियां, ई-गवर्नेंस, आत्मनिर्भर भारत और फार्मास्युटिकल क्षेत्र।
चर्चा में क्यों?
नई दिल्ली में छठे ‘राष्ट्रीय फार्माकोविजिलेंस सप्ताह’ (17-23 सितंबर) के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने राष्ट्रीय भेषज संहिता (National Formulary of India – NFI 2026) का 7वां संस्करण और NFI Online पोर्टल लॉन्च किया। इसी मंच से केंद्र सरकार ने भारत के नए बायोविजिलेंस प्रोग्राम को भी मंजूरी दी।
मुख्य बिंदु: स्वास्थ्य क्षेत्र की नई पहलें और भारत की वैश्विक उपलब्धि
1. NFI 2026 और डिजिटल टूल्स का शुभारंभ
- 7वां संस्करण: NFI 2026 में 34 अध्याय, 20 परिशिष्ट और 653 दवाएं (42 फिक्स्ड-डोज कॉम्बिनेशन और 30 इम्यूनोलॉजिकल उत्पाद) शामिल हैं। इसे राष्ट्रीय आवश्यक दवा सूची (NLEM) के अनुकूल ढाला गया है।
- डिजिटल प्लेटफॉर्म्स: iOS उपयोगकर्ताओं के लिए ADR-PvPI 2.0 ऐप, NFI ऑनलाइन, IP ऑनलाइन और Adverse Drug Reaction Monitoring System (ADRMS) लॉन्च किए गए।
2. बायोविजिलेंस प्रोग्राम को मंजूरी
- नया सुरक्षा ढांचा: भारतीय भेषज संहिता आयोग (IPC) इस नए कार्यक्रम की निगरानी करेगा।
- मुख्य फोकस: यह अंग और ऊतक प्रत्यारोपण (Organ & Tissue Transplantation) में इस्तेमाल होने वाले जैविक उत्पादों के प्रतिकूल प्रभावों की निगरानी और रोकथाम करेगा।
- ट्रिपल सेफ्टी नेट: अब भारत में दवाओं के लिए फार्माकोविजिलेंस, मेडिकल डिवाइसेस के लिए मेटरियोविजिलेंस और प्रत्यारोपण के लिए बायोविजिलेंस का एकीकृत सुरक्षा चक्र तैयार हो गया है।
3. WHO रैंकिंग में भारत का ऐतिहासिक उछाल
- ग्लोबल डेटाबेस: भारत WHO के मरीज सुरक्षा डेटाबेस में योगदान देने के मामले में 123वें स्थान से उठकर दुनिया में 8वें स्थान पर पहुंच गया है।
- केंद्रों का विस्तार: देश भर में लगभग 1,150 प्रतिकूल दवा प्रतिक्रिया (ADR) निगरानी केंद्र काम कर रहे हैं। सरकार अब इन्हें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) तक ले जाने की योजना बना रही है।
- अंतरराष्ट्रीय मान्यता: लगभग 25 देश भारतीय भेषज संहिता (IP) को मान्यता देते हैं। वर्ष 2023 में IPC को फार्माकोपियल डिस्कशन ग्रुप की सदस्यता मिली थी।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजक संस्था | भारतीय भेषज संहिता आयोग (IPC), गाजियाबाद |
| NFI 2026 का संस्करण | 7वां संस्करण (34 अध्याय, 653 दवाएं) |
| बायोविजिलेंस का उद्देश्य | अंग और ऊतक प्रत्यारोपण में प्रतिकूल प्रभावों की ट्रैकिंग |
| WHO डेटाबेस रैंकिंग | भारत 8वें स्थान पर (पहले 123वें स्थान पर था) |
| अंतरराष्ट्रीय पहुंच | 25 देश भारतीय भेषज संहिता (IP) को स्वीकार करते हैं |
| थीम (2026) | “Promoting Rational Use of Medicines through Pharmacovigilance” |
WWF वैश्विक संरक्षण सम्मेलन 2026: जैव विविधता और स्थानीय समुदायों का सह-अस्तित्व
- प्रारंभिक परीक्षा: पर्यावरण एवं जैव विविधता, अंतर्राष्ट्रीय संगठन (WWF, CITES, CBD)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव का आकलन, वन्यजीव गलियारे और सामुदायिक प्रयास।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने जयपुर (राजस्थान) में वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF) के ‘वैश्विक संरक्षण सम्मेलन’ का उद्घाटन किया। 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी वाले इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य वन्यजीव संरक्षण के साथ स्थानीय समुदायों के सह-अस्तित्व को बढ़ावा देना था। इस अवसर पर भारत के संवैधानिक व सांस्कृतिक मूल्यों का उल्लेख करते हुए वनों, आर्द्रभूमियों और घास के मैदानों के एकीकृत संरक्षण तथा ‘ओरण’ जैसे पारंपरिक सामुदायिक प्रयासों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया गया।
मुख्य बिंदु: भारत की संरक्षण यात्रा और रणनीतिक पहलें
1. भारत के संरक्षण प्रयासों की प्रमुख उपलब्धियां
- संरक्षित क्षेत्रों का विस्तार: पिछले एक दशक में संरक्षित क्षेत्र 750 से बढ़कर 1,000 से अधिक हो गए हैं।
- प्रमुख प्रजातियों की वापसी: भारत में बाघ, हाथी, गैंडा, एशियाई शेर और हिम तेंदुए का सफल संरक्षण हुआ है। प्रोजेक्ट चीता के तहत चीतों का पुनः परिचय भी बड़ी सफलता है।
- घास के मैदान और आर्द्रभूमि: वनों के साथ-साथ घास के मैदानों (Grasslands) और आर्द्रभूमियों (Wetlands) के संरक्षण पर विशेष बल दिया जा रहा है। एक सींग वाले गैंडे और जंगली पानी की भैंस के लिए विशेष कार्यक्रम चल रहे हैं।
2. सामुदायिक भागीदारी और सांस्कृतिक मूल्य
- संवैधानिक प्रावधान: भारत के संविधान में वन्यजीव संरक्षण को राज्य का नीति निदेशक तत्व और नागरिकों का मूल कर्तव्य बनाया गया है।
- ओरण: राजस्थान के पवित्र उपवनों (Sacred Groves) या ‘ओरण’ का सामुदायिक संरक्षण किया जा रहा है। यह प्रयास भूमि क्षरण तटस्थता (Land Degradation Neutrality) में मदद करता है।
- संरक्षण प्रजनन: राजस्थान में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) का सफल संरक्षण प्रजनन कराया गया है।
3. अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबद्धताएं और वैज्ञानिक निगरानी
- वैश्विक संधियां: भारत CITES, CMS (कन्वेंशन ऑन माइग्रेटरी स्पीशीज), CBD (जैव विविधता कन्वेंशन) और रामसर कन्वेंशन का हस्ताक्षरी है।
- लैंडस्केप दृष्टिकोण: मेगाफौना (बड़े जीवों) के संरक्षण के लिए केवल जंगलों तक सीमित न रहकर गलियारों (Corridors) को सुरक्षित करने और लैंडस्केप-आधारित योजना पर काम हो रहा है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| सम्मेलन का नाम | WWF वैश्विक संरक्षण सम्मेलन 2026 |
| आयोजन स्थल | जयपुर, राजस्थान |
| आयोजक संस्था | वर्ल्ड वाइड फंड फॉर नेचर (WWF-International & WWF-India) |
| भारत में रामसर स्थल | 24 से बढ़कर 101 हुए |
| राजस्थान की विशेष पहल | ‘ओरण’ (पवित्र उपवन) और ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) प्रजनन कार्यक्रम |
अभ्यास नोमैडिक एलिफेंट 2026: भारत-मंगोलिया संयुक्त सैन्य अभ्यास
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): भारत और उसके पड़ोसी देश, द्विपक्षीय संबंध, रक्षा सहयोग और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा।
चर्चा में क्यों?
भारत-मंगोलिया संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘नोमैडिक एलिफेंट’ का 18वां संस्करण उत्तराखंड के पिथौरागढ़ स्थित फॉरेन ट्रेनिंग नोड में आयोजित किया जा रहा है। इस अभ्यास का आयोजन भारत और मंगोलिया में बारी-बारी से (Alternately) किया जाता है। इसका पिछला (17वां) संस्करण मई-जून 2025 में उलानबटार (मंगोलिया) में आयोजित हुआ था।
मुख्य बिंदु: अभ्यास का दायरा और सामरिक महत्व
1. अभ्यास का मुख्य उद्देश्य
- संयुक्त क्षमता विकास: अर्ध-शहरी और पहाड़ी इलाकों में आतंकवाद विरोधी अभियानों (Counter-Insurgency Operations) के संचालन की क्षमता बढ़ाना।
- संयुक्त राष्ट्र जनादेश: यह पूरा सैन्य प्रशिक्षण संयुक्त राष्ट्र (UN) के जनादेश के तहत आयोजित किया जा रहा है।
- अंतर-संचालनीयता: दोनों देशों की सेनाओं के बीच परिचालन संबंधी समन्वय, सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान और आपसी विश्वास को मजबूत करना।
2. प्रमुख युद्ध अभ्यास और तकनीकी प्रशिक्षण
- सामरिक अभियान: कॉर्डन एंड सर्च ऑपरेशन, रूम इंटरवेंशन ड्रिल्स और स्पेशल हेलिबॉर्न ऑपरेशन्स।
- आधुनिक तकनीक पर ध्यान: पहली बार साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण, ड्रोन और काउंटर-ड्रोन प्रणालियों के उपयोग को विशेष रूप से शामिल किया गया है।
- सैनिकों की भागीदारी: भारतीय सेना और मंगोलियाई सशस्त्र बलों के 45-45 जवान (प्लाटून स्तर) इसमें भाग ले रहे हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| अभ्यास का नाम | नोमैडिक एलिफेंट (18वां संस्करण) |
| प्रतिभागी देश | भारत और मंगोलिया |
| आयोजन स्थल | फॉरेन ट्रेनिंग नोड, पिथौरागढ़ (उत्तराखंड) |
| आयोजन की प्रकृति | वार्षिक (एक वर्ष भारत, एक वर्ष मंगोलिया) |
| पिछला संस्करण (2025) | उलानबटार, मंगोलिया |
क्रिटिकल मिनरल्स रीसाइक्लिंग और सर्कुलर इकोनॉमी: भारत की खनिज सुरक्षा
- प्रारंभिक परीक्षा: पर्यावरण पारिस्थितिकी, आर्थिक विकास, राष्ट्रीय नीतियां।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): बुनियादी ढांचा, ऊर्जा, संरक्षण, ई-अपशिष्ट प्रबंधन, सर्कुलर इकोनॉमी और खनिज सुरक्षा।
चर्चा में क्यों?
नई दिल्ली में खान मंत्रालय (Ministry of Mines) ने मटेरियल्स रीसाइक्लिंग एसोसिएशन ऑफ इंडिया (MRAI) के साथ मिलकर “भारत का क्रिटिकल मिनरल्स रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम और सर्कुलर इकोनॉमी” विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की। केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने इस सम्मेलन का उद्घाटन किया और ‘कांसेप्ट पेपर ऑन क्रिटिकल मिनरल रीसाइक्लिंग इकोसिस्टम’ जारी किया।
मुख्य बिंदु: रणनीतिक ढांचा और प्रमुख पहलें
1. क्रिटिकल मिनरल्स रीसाइक्लिंग का महत्व
- रणनीतिक आवश्यकता: स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण (Clean Energy Transition), रक्षा क्षेत्र, डिजिटल अर्थव्यवस्था और उन्नत विनिर्माण के लिए महत्वपूर्ण खनिजों की रीसाइक्लिंग आवश्यक है।
- सर्कुलर इकोनॉमी: जीवन चक्र समाप्त कर चुके उत्पादों (EOL products) और ई-कचरे से खनिजों की रिकवरी करके प्राथमिक संसाधनों पर निर्भरता कम की जाएगी।
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला: घरेलू स्तर पर माध्यमिक स्रोतों (Secondary Sources) से खनिज निकालकर भारत आयात निर्भरता को घटाएगा।
2. नई तकनीकें और औद्योगिक रणनीति
- लिथियम-आयन बैटरी: बैटरी तकनीक से धातुओं की रिकवरी और ‘ब्लैक मास’ के प्रसंस्करण व निर्यात पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
- ब्लैक मास का प्रसंस्करण: उपयोग की गई बैटरियों को क्रश करके निकाला गया ब्लैक मास लिथियम, कोबाल्ट और निकल का प्राथमिक स्रोत बनता है।
- औपचारिक ढांचा: अनौपचारिक क्षेत्र के ई-कचरे को औपचारिक रीसाइक्लिंग नेटवर्क (Formal Ecosystem) में लाया जाएगा।
3. नीतिगत ढांचा और जन भागीदारी
- कांसेप्ट पेपर जारी: मंत्रालयों के लिए समयबद्ध रोडमैप और क्रिटिकल मिनरल्स रिकवरी का रणनीतिक ढांचा पेश किया गया।
- जन जागरूकता: ई-अपशिष्ट को फेंकने के बजाय मूल्यवान संसाधन के रूप में देखने हेतु ग्रामीण स्तर तक जागरूकता अभियान चलाने का प्रस्ताव है।
- अभियान से जुड़ाव: इस पहल को ‘विशेष अभियान 6.0’ और ‘स्वच्छता ही सेवा’ कार्यक्रमों के साथ जोड़ा गया है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजक मंत्रालय | खान मंत्रालय (MRAI के सहयोग से) |
| मुख्य जारी दस्तावेज | Concept Paper on Critical Mineral Recycling Ecosystem |
| ब्लैक मास (Black Mass) | प्रयुक्त लिथियम-आयन बैटरियों के क्रशिंग से प्राप्त पाउडर (जिसमें लिथियम, निकल, कोबाल्ट होता है) |
| माध्यमिक स्रोत (Secondary Sources) | ई-अपशिष्ट, औद्योगिक अपशिष्ट और End-of-Life (EOL) उत्पाद |
| संबंधित अभियान | स्वच्छता ही सेवा और विशेष अभियान 6.0 |
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 2026: आर्थिक संबंधों का नया अध्याय
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, द्विपक्षीय व्यापार समझौते (FTA)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): द्विपक्षीय संबंध, भारत के हितों पर विकसित देशों की नीतियों का प्रभाव, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, रोजगार और कृषि सुरक्षा।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले ने घोषणा की कि भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 20 अक्टूबर 2026 (विजयादशमी) से लागू होगा। यह समझौता 27 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में हस्ताक्षरित हुआ था। न्यूजीलैंड की संसद ने 16 सितंबर 2026 को इससे संबंधित कानून पास कर दिया। जुलाई 2026 में भारतीय प्रधानमंत्री की चार दशकों में पहली न्यूजीलैंड यात्रा ने इस रणनीतिक साझेदारी को गति दी।दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर (~₹35,000 करोड़) तक दोगुना करने का लक्ष्य रखा है।
मुख्य बिंदु: व्यापार, निवेश और जन-गतिशीलता के प्रमुख लाभ
1. भारतीय माल और उद्योगों को लाभ
- 100% ड्यूटी-फ्री पहुंच: पहले ही दिन से न्यूजीलैंड में भारत के 100% निर्यात (टैरिफ लाइन्स) पर शुल्क शून्य हो जाएगा।
- श्रम-प्रधान क्षेत्रों को बढ़ावा: वस्त्र (Textiles), चमड़ा, जूते, रत्न-आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और प्रोसेस्ड फूड पर न्यूजीलैंड का 10% तक का शुल्क समाप्त हो जाएगा।
- कच्चे माल की आसान आपूर्ति: भारतीय निर्माताओं को लकड़ी के लट्ठे (Wooden Logs), कोकिंग कोल और मेटल स्क्रैप पर बिना सीमा शुल्क के कच्चा माल मिलेगा।
2. भारतीय कृषि और डेयरी हितों की पूर्ण सुरक्षा
- डेयरी और संवेदनशील फसलें बाहर: घरेलू किसानों की सुरक्षा के लिए डेयरी, पशु मांस, चीनी, एडिबल ऑयल, प्याज, चना और मक्का को शुल्क छूट से पूरी तरह बाहर (Exclude) रखा गया है।
- सीमित कोटा व्यवस्था: न्यूजीलैंड के सेब, कीवी और मैन्युका शहद के लिए न्यूनतम आयात मूल्य (MIP) और मौसमी आयात विंडो के साथ टैरिफ रेट कोटा (TRQ) लागू किया गया है।
- कृषि उत्पादकता साझेदारी: उत्पादकता बढ़ाने के लिए ‘कृषि उत्पादकता परिषद’ और कीवी, सेब व मधुमक्खी पालन के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित होंगे।
3. $20 अरब का निवेश और सेवाओं में अवसर
- विदेशी निवेश: न्यूजीलैंड अगले 15 वर्षों में भारत में 20 अरब डॉलर (USD) के निवेश को सुगम बनाएगा, जिससे कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप्स को पूंजी मिलेगी।
- सेवा क्षेत्र और वीजा कोटा:
- अस्थायी कार्य वीजा: कुशल भारतीयों (आयुष चिकित्सकों, योग प्रशिक्षकों, शेफ, IT व इंजीनियरों) के लिए 5,000 अस्थायी रोजगार वीजा का विशेष कोटा।
- वर्किंग हॉलिडे वीजा: युवा भारतीयों के लिए प्रतिवर्ष 1,000 वर्किंग हॉलिडे वीजा।
- छात्रों के लिए लाभ: STEM स्नातकों को 3 वर्ष और डॉक्टरेट शोधकर्ताओं को 4 वर्ष तक का पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा मिलेगा।
- फार्मा क्षेत्र को गति: न्यूजीलैंड अब US FDA, UK MHRA और EMA जैसे वैश्विक नियामकों द्वारा स्वीकृत भारतीय दवाओं और मेडिकल उपकरणों को सीधे मान्यता देगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| लागू होने की तिथि | 20 अक्टूबर 2026 (विजयादशमी) |
| हस्ताक्षर तिथि व स्थान | 27 अप्रैल 2026, भारत मंडपम (नई दिल्ली) |
| शुल्क छूट (Tariff Reduction) | भारत के 100% निर्यात पर शून्य शुल्क |
| संरक्षित क्षेत्र (Excluded) | डेयरी, पशु मांस, चीनी, खाद्य तेल, प्याज, चना |
| निवेश प्रतिबद्धता | न्यूजीलैंड द्वारा भारत में $20 अरब (15 वर्षों में) |
चीनी स्टॉक सीमा नियमों में राहत और खुदरा मूल्य नियंत्रण
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की आर्थिक घटनाएं, कृषि नीतियां और मूल्य नियंत्रण।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारत में कृषि उत्पाद: भंडारण, विपणन, मूल्य निर्धारण, न्यूनतम समर्थन मूल्य (FRP/MSP) और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग।
चर्चा में क्यों?
केंद्र सरकार ने बल्क कंज्यूमर के लिए चीनी स्टॉक रखने की सीमा को 15 दिनों से बढ़ाकर 30 दिन कर दिया है। यह राहत आगामी त्यौहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए दी गई है। हालांकि, अतिरिक्त 15 दिनों का स्टॉक केवल आयातित चीनी (Advance Authorisation Scheme और Tariff Rate Quota के तहत) से ही पूरा किया जा सकता है।
मुख्य बिंदु: नीतिगत बदलाव और बाज़ार संतुलन
1. बल्क कंज्यूमर के लिए स्टॉक नियमों में ढील
- पात्रता: जो औद्योगिक इकाइयां प्रति माह 10 मीट्रिक टन (MT) से अधिक चीनी का उपयोग कच्चे माल के रूप में करती हैं।
- खुला बाजार नियम: घरेलू खुले बाजार से चीनी खरीदने की सीमा अभी भी अधिकतम 15 दिनों की खपत तक ही सीमित रहेगी।
- आयातित चीनी की शर्त: अतिरिक्त 15 दिनों का स्टॉक केवल एडवांस ऑथराइजेशन स्कीम (AAS) और टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत आयातित चीनी से लिया जा सकता है।
- पारदर्शिता व ट्रैकिंग: बल्क कंज्यूमर्स को हर शुक्रवार खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग (DFPD) के ऑनलाइन पोर्टल पर स्टॉक का साप्ताहिक विवरण दर्ज करना होगा।
2. चीनी की कीमतों में गिरावट और मूल्य संचरण
- खुदरा बनाम एक्स-मिल कीमतें: चीनी की एक्स-मिल कीमतों में 25% की गिरावट आई है, जबकि खुदरा कीमतें केवल 10% (₹65 से घटकर ₹58.50/किग्रा) घटी हैं।
- सप्लाई चेन का अंतर: सरकार ने व्यापारियों और खुदरा विक्रेताओं से एक्स-मिल कीमतों में आई कमी का पूरा लाभ आम उपभोक्ताओं तक पहुंचाने की अपील की है।
3. गन्ना किसानों के लिए लाभ (FRP वृद्धि)
- नया चीनी सीजन: 1 अक्टूबर 2026 से शुरू हो रहे नए चीनी सीजन से किसानों को गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (FRP) ₹365 प्रति क्विंटल मिलेगा।
- संतुलित नीति: सरकार का उद्देश्य गन्ना किसानों की आय सुरक्षित करने के साथ-साथ उपभोक्ताओं के लिए भी कीमतें स्थिर बनाए रखना है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| बल्क उपभोक्ता | प्रति माह 10 मीट्रिक टन से अधिक चीनी उपयोग करने वाली इकाइयां |
| नई स्टॉक सीमा | 30 दिन (15 दिन घरेलू + 15 दिन केवल AAS/TRQ आयातित चीनी) |
| आयात योजनाएं | Advance Authorisation Scheme (AAS) और Tariff Rate Quota (TRQ) |
| नया गन्ना FRP (2026-27) | ₹365 प्रति क्विंटल (1 अक्टूबर 2026 से लागू) |
| निगरानी पोर्टल | DFPD ऑनलाइन पोर्टल (साप्ताहिक शुक्रवार रिपोर्टिंग) |
विरासत अपशिष्ट और डंपसाइट रीक्लेमेशन: कचरे से कंचन की ओर भारत
- प्रारंभिक परीक्षा: पर्यावरण पारिस्थितिकी, सतत विकास, शहरी विकास नीतियां और स्वच्छ भारत मिशन।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA), ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) और आपदा प्रबंधन।
चर्चा में क्यों?
आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने स्वच्छ भारत मिशन-अर्बन 2.0 (SBM-U 2.0) के तहत देश के प्रमुख legacy waste डंपसाइट्स के सफल वैज्ञानिक उपचार (Scientific Remediation) और भूमि पुनर्प्राप्ति (Land Reclamation) के उत्कृष्ट केस स्टडीज जारी किए हैं। जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच 29 राज्यों के 459 शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) ने पूरी तरह से डंपसाइट उपचार हासिल किया और 3.66 करोड़ मीट्रिक टन लेगेसी वेस्ट को सफलतापूर्वक रिमेडिएट किया।
मुख्य बिंदु: रणनीतिक ढांचा और प्रमुख केस स्टडीज
1. मिशन और तकनीकी कार्यप्रणाली
- लक्ष्य शून्य डंपसाइट: SBM-U 2.0 के तहत शहरों को कचरा-मुक्त (Garbage Free) बनाने के लिए समयबद्ध तरीके से लेगेसी वेस्ट हटाने का अभियान है।
- बायोमाइनिंग प्रक्रिया: इस प्रक्रिया में पुराने कचरे को खोदकर, सुखाकर और छानकर अलग किया जाता है:
- रिफ्यूज-डिराइव्ड फ्यूल (RDF): सीमेंट उद्योगों में ईंधन के रूप में प्रयुक्त।
- काली मिट्टी/इनर्ट: निचले इलाकों को भरने और पौधारोपण हेतु प्रयुक्त।
- DRAP (डंपसाइट रिमेडिएशन एक्सीलरेटर प्रोग्राम): नवंबर 2025 में शेष बचे विशाल डंपसाइट्स के त्वरित वैज्ञानिक उपचार हेतु शुरू किया गया राष्ट्रीय कार्यक्रम।
2. प्रमुख शहरों के परिवर्तन मॉडल
A. गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) – राप्ती इको पार्क
- प्रक्रिया: 40 एकड़ में फैले 7 साल पुराने 400 टन/दिन कचरे का बायोमाइनिंग से निस्तारण।
- उपलब्धता: इस स्थान को ‘कचरे से कंचन राप्ती इको पार्क’ में बदला गया, जिसमें सोलर लाइटिंग, ओपन जिम और स्वयं सहायता समूह (शक्ति की रसोई) द्वारा आजीविका मॉडल स्थापित किया गया।
B. दिल्ली (भालस्वा डंपसाइट)
- प्रक्रिया: 70 एकड़ के विशाल कचरे के पहाड़ का DRAP के तहत तीव्र उपचार। 31 जुलाई 2026 तक 99.07 लाख मीट्रिक टन लेगेसी वेस्ट संसाधित किया गया।
- सुरक्षा उपाय: नए कचरे को जमा होने से रोकने के साथ लीचेट प्रबंधन और आग से बचाव की वैज्ञानिक व्यवस्था लागू की गई।
C. नागपुर (भंडेवाड़ी) – एकीकृत ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण
- प्रक्रिया: 10 लाख मीट्रिक टन से अधिक कचरे का उपचार कर भूमि मुक्त कराई गई।
- मॉडल: अब इसे एकीकृत नगर निगम ठोस अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधा (Composting & Waste-to-Energy) में बदल दिया गया है, जहाँ CCTV और वास्तविक समय निगरानी प्रणाली तैनात है।
D. रायचूर (कर्नाटक) – मियावाकी शहरी वन
- प्रक्रिया: यकलासपुरा डंपसाइट के 62,252 मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण करके 22 एकड़ जमीन पुनः प्राप्त की गई।
- मॉडल: 5-7 एकड़ में मियावाकी तकनीक से 60,000 बांस और स्थानीय पौधों का रोपण कर शहरी जंगल विकसित किया गया (विषैले कचरे से पारिस्थितिक संपत्ति)।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| मूल मिशन | स्वच्छ भारत मिशन-अर्बन 2.0 (अक्टूबर 2021 में शुरू) |
| नोडल मंत्रालय | आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) |
| DRAP पहल | डंपसाइट रिमेडिएशन एक्सीलरेटर प्रोग्राम (नवंबर 2025 में लॉन्च) |
| बायोमाइनिंग उत्पाद | RDF (सीमेंट उद्योग हेतु), काली मिट्टी (भरान हेतु), रीसायकलेबल प्लास्टिक्स |
| मियावाकी तकनीक | जापानी तकनीक जिससे कम जगह में तेजी से घने देशी जंगल उगाए जाते हैं |