25 August 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत देश की खाद्य सुरक्षा और बीज आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने वाले भारत के पहले स्वदेशी गैर-जीएमओ पॉपकॉर्न मक्का हाइब्रिड बीज, छोटे शहरों में नवाचार को गति देने वाले GENESIS Entrepreneur-in-Residence (EIR) Cohort-3 (टायर-II एवं III शहरों में स्टार्टअप क्रांति), असंगठित खाद्य उद्योग को मजबूत करने वाले PMFME कॉन्क्लेव 2026 और ‘PMFME बाजार’, ‘गर्भिणी मित्र’ पाठ्यक्रम, युवाओं में डिजिटल उत्तरदायित्व बढ़ाने वाली पहल The Fifth Space, मृदा स्वास्थ्य व जलवायु अनुकूलन के लिए पुनर्योजी कृषि (Regenerative Agriculture), तथा रणनीतिक क्षेत्रों में पूंजी प्रवाह को सुगम बनाने वाले संशोधित एफडीआई ढांचे (सीमावर्ती देशों से गैर-नियंत्रित निवेश में तेजी) का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
भारत का पहला स्वदेशी गैर-जीएमओ पॉपकॉर्न मक्का हाइब्रिड बीज
- प्रारंभिक परीक्षा: गैर-जीएमओ (Non-GMO) हाइब्रिड बीज, मक्का उत्पादन, कृषि में आत्मनिर्भर भारत, प्रमुख किसान कल्याण योजनाएं।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय कृषि एवं प्रौद्योगिकी, बीजों का स्वदेशीकरण, आयात प्रतिस्थापन (Import Substitution), किसान आय में वृद्धि और एग्रो-प्रोसेसिंग उद्योग।
चर्चा में क्यों?
उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आंध्र प्रदेश के एलुरु जिले के मुसूनूरु में भारत के पहले गैर-जीएमओ (Non-GMO), उच्च-प्रसार (High-Expansion) पॉपकॉर्न मक्का हाइब्रिड बीज को औपचारिक रूप से लॉन्च किया। निजी उपक्रम ‘गुरमे पॉपकॉर्निका’ द्वारा विकसित यह बीज कृषि क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
मुख्य बिंदु: तकनीक, किसान साझेदारी और आयात प्रतिस्थापन
1. विदेशी निर्भरता में कमी
- विदेशी बीजों से मुक्ति: भारत लंबे समय से प्रीमियम गुणवत्ता वाले पॉपकॉर्न मक्का के लिए आयातित हाइब्रिड बीजों पर निर्भर था।
- विदेशी मुद्रा की बचत: इस स्वदेशी किस्म के आने से न केवल बीजों के आयात पर निर्भरता खत्म होगी, बल्कि देश की विदेशी मुद्रा की भी बचत होगी।
2. गैर-जीएमओ तकनीक (Non-GMO Hybrid)
- प्राकृतिक संकरण: यह बीज आनुवंशिक रूप से संशोधित (GMO) नहीं है। यह गैर-जीएमओ (Non-GMO) हाइब्रिड है, जो सुरक्षित होने के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय मानकों के अनुकूल है।
- उच्च-प्रसार क्षमता: इसमें ‘हाई-एक्सपेंशन’ गुण है, जिससे पॉपकॉर्न का आकार और गुणवत्ता बेहतर बनती है और वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धा की क्षमता बढ़ती है।
3. व्यापक किसान-उद्यम साझेदारी
- विस्तार: 8 राज्यों के 17,500 से अधिक किसान लगभग 40,000 एकड़ भूमि पर इसकी खेती कर रहे हैं।
- किसान कल्याण व बाज़ार पहुंच: यह पहल आंध्र प्रदेश से शुरू होकर एक प्रमुख वैश्विक प्रसंस्करण मॉडल बन गई है, जो किसानों को बेहतर बाजार पहुंच और सीधी आय प्रदान करती है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| नया उत्पाद | भारत का पहला Non-GMO High-Expansion Popcorn Maize Hybrid |
| लॉन्च स्थल | मुसूनूरु, एलुरु जिला (आंध्र प्रदेश) |
| उद्घाटनकर्ता | उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन |
| संबद्ध संस्था/कंपनी | गुरमे पॉपकॉर्निका |
| प्रौद्योगिकी का प्रकार | नॉन-जीएमओ (गैर-आनुवंशिक रूप से संशोधित हाइब्रिड) |
| संबद्ध सरकारी योजनाएं | PM-KISAN, PM फसल बीमा योजना, नमो ड्रोन दीदी |
GENESIS Entrepreneur-in-Residence (EIR) Cohort-3: टायर-II एवं III शहरों में स्टार्टअप क्रांति
- प्रारंभिक परीक्षा: GENESIS योजना, MeitY Startup Hub (MSH), Entrepreneur-in-Residence (EIR), टेक्नोलॉजी रेडिनेस लेवल (TRL), डीपटेक क्षेत्र।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): भारत में स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र, डिजिटल इंडिया, गैर-महानगरीय शहरों में नवाचार, मेक इन इंडिया एवं रोजगार सृजन।
चर्चा में क्यों?
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने ‘MeitY Startup Hub’ (MSH) के माध्यम से GENESIS Entrepreneur-in-Residence (EIR) Cohort 3 लॉन्च किया। इसे ‘GENESIS NextGen Startup Summit’ के कोयंबटूर (तमिलनाडु) संस्करण के दौरान लॉन्च किया गया। इस योजना का उद्देश्य देश के छोटे शहरों (Tier-II और Tier-III) के नए उद्यमियों, शोधकर्ताओं और छात्रों को अपने विचारों को तकनीक-आधारित स्टार्टअप में बदलने के लिए शुरुआती वित्तीय सहायता देना है।
मुख्य बिंदु: वित्तीय सहायता, ध्यान केंद्रित क्षेत्र और पात्रता
1. GENESIS योजना और वित्तीय सहायता
- GENESIS योजना क्या है? इसका पूरा नाम Gen-Next Support for Innovative Startups है। यह MeitY का 490 करोड़ रुपये के कुल बजट वाला एक प्रमुख कार्यक्रम है।
- EIR 3.0 के तहत मिलने वाली मदद: चयनित उद्यमियों को विचार/प्रोटोटाइप स्तर पर ₹10 लाख तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
- मुख्य उद्देश्य: शुरुआती विचारों (TRL 1-4) को पायलट-रेडी उत्पादों और व्यावसायिक रूप से सफल स्टार्टअप्स में बदलना।
2. प्रमुख तकनीक क्षेत्र
- इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी
- डीपटेक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI/ML)
- इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT)
- सेमीकंडक्टर / VLSI डिज़ाइन
- साइबर सुरक्षा और ब्लॉकचेन
- क्वांटम टेक्नोलॉजीज
- AR/VR और इमर्सिव टेक्नोलॉजीज
3. पात्रता मानदंड
- नागरिकता: आवेदक को भारत का नागरिक होना अनिवार्य है।
- स्टार्टअप की स्थिति: स्टार्टअप Tier-II या Tier-III शहर में स्थित होना चाहिए।
- आयु सीमा: यदि कंपनी पंजीकृत है, तो आवेदन की तिथि तक वह 2 वर्ष से अधिक पुरानी न हो।

- पूर्व वित्तीय सहायता: उसी विचार के लिए सरकार की किसी अन्य योजना से ₹10 लाख से अधिक की सहायता प्राप्त न की गई हो।
- प्रौद्योगिकी स्तर: प्रोजेक्ट TRL 1 से 4 (विचार, प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट या शुरुआती प्रोटोटाइप) के बीच होना चाहिए।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| योजना का नाम | GENESIS EIR Cohort 3.0 |
| संबंधित मंत्रालय | इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) |
| कार्यान्वयन एजेंसी | MeitY Startup Hub (MSH) |
| कुल योजना बजट | ₹490 करोड़ (GENESIS स्कीम हेतु) |
| अधिकतम वित्तीय अनुदान | ₹10 लाख प्रति स्टार्टअप |
PMFME कॉन्क्लेव 2026 और ‘PMFME बाजार’: सूक्ष्म खाद्य संस्करण क्षेत्र में नई क्रांति
- प्रारंभिक परीक्षा: PMFME योजना, PMFME बाजार, APEDA, ONDC, NABKISAN, ‘FoodNova’ पत्रिका।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): खाद्य प्रसंस्करण एवं संबंधित उद्योग, आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन, कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन (Value Addition), स्वयं सहायता समूह (SHGs) और FPOs की भूमिका।
चर्चा में क्यों?
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) द्वारा 24-25 अगस्त 2026 को इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली में PMFME कॉन्क्लेव 2026 का आयोजन किया गया। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान ने इस दो दिवसीय कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने ‘PMFME बाजार’ प्रदर्शनी की भी शुरुआत की। इस बाजार में 25 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सूक्ष्म उद्यमियों ने अपने पारंपरिक व स्थानीय खाद्य उत्पादों का प्रदर्शन किया।
मुख्य बिंदु: बाजार संपर्क, डिजिटल समझौते और PMFME 2.0 की राह
1. सूक्ष्म खाद्य उद्यमों का सशक्तिकरण
- स्थानीय से वैश्विक: इस प्रदर्शनी का उद्देश्य स्थानीय कच्चे माल और पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक ब्रांडिंग, पैकेजिंग और गुणवत्ता सुधार के जरिए राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना है।
- विविध उत्पाद: इसमें बाजरा आधारित (Millet-based) उत्पाद, पारंपरिक मसाले, अचार, स्नेक्स और पेय पदार्थ प्रदर्शित किए गए।
- लाभार्थी समूह: स्वयं सहायता समूह (SHGs), किसान उत्पादक संगठन (FPOs) और व्यक्तिगत सूक्ष्म उद्यमी इसमें शामिल हुए।
2. तीन प्रमुख समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर
- APEDA: सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को निर्यात (Export) बाजारों से जोड़ने के लिए।
- ONDC (ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स): डिजिटल कॉमर्स और ऑनलाइन बिक्री बढ़ाने के लिए।
- नेबकिसान: आसान ऋण और वित्तीय पहुँच मजबूत करने के लिए।
3. प्रमुख प्रकाशन और नई पहलें
- ‘FoodNova’ पत्रिका: खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में नई तकनीकों, नवाचारों और उभरते रुझानों पर आधारित मंत्रालय की तिमाही (Quarterly) पत्रिका का विमोचन किया गया।
- कॉफी टेबल बुक: PMFME योजना के 30 सफल उद्यमियों की प्रेरक कहानियों पर आधारित विशेष पुस्तक जारी की गई।
- PMFME 2.0 का आह्वान: केंद्रीय मंत्री ने भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए अधिक व्यापक ‘PMFME 2.0’ योजना लाने पर जोर दिया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजित कार्यक्रम | PMFME कॉन्क्लेव 2026 एवं PMFME बाजार |
| आयोजन स्थल | इंडिया हैबिटेट सेंटर, नई दिल्ली |
| आयोजक मंत्रालय | खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MoFPI) |
| एमओयू साझेदार | APEDA (निर्यात), ONDC (डिजिटल बाजार), NABKISAN (वित्त) |
‘गर्भिणी मित्र’ पाठ्यक्रम: आयुर्वेद आधारित मातृ स्वास्थ्य सहायता की नई पहल
- प्रारंभिक परीक्षा: ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA), गर्भिणी मित्र पाठ्यक्रम, आयुष मंत्रालय, गर्भिणी परिचर्या, सूतिका परिचर्या।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): स्वास्थ्य क्षेत्र का विकास, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधार, आयुष प्रणाली का एकीकरण, सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना।
चर्चा में क्यों?
आयुष मंत्रालय के तहत नई दिल्ली स्थित स्वायत्त संस्थान ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA) ने शैक्षणिक सत्र 2026–2027 के लिए ‘गर्भिणी मित्र’ पाठ्यक्रम शुरू किया है। यह एक कौशल विकास कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य गर्भावस्था और प्रसवोत्तर (postnatal) अवधि में महिलाओं को आयुर्वेद-आधारित स्वास्थ्य शिक्षा, जीवन शैली मार्गदर्शन और सामुदायिक सहायता प्रदान करना है।
मुख्य बिंदु: आयुर्वेद सिद्धांत, कौशल विकास और सुरक्षा ढांचा
1. आयुर्वेद के पारंपरिक सिद्धांतों पर आधारित
- गर्भाधान विधि: प्रसव पूर्व / अवधारणा पूर्व देखभाल (Pre-conceptional care)।
- गर्भिणी परिचर्या: गर्भावस्था के दौरान त्रैमासिक-वार (trimester-specific) आहार और जीवन शैली मार्गदर्शन।
- सूतिका परिचर्या: प्रसव के बाद माँ और नवजात शिशु की देखभाल (Postnatal care)।
2. व्यावहारिक प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम का दायरा
- अवधि व मोड: 6 महीने का ऑफलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम (AIIA, नई दिल्ली परिसर में)।
- प्रमुख कौशल: सुरक्षित योग, आहार विज्ञान, प्रसव के समय भावनात्मक सहायता, नवजात शिशु की मालिश और बेसिक लाइफ सपोर्ट (BLS)।
- सुरक्षा मानक: इसमें संक्रमण नियंत्रण, स्वच्छता, बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट और कार्यस्थल सुरक्षा का प्रशिक्षण भी शामिल है।
- सहायक भूमिका: ‘गर्भिणी मित्र’ नियमित डॉक्टरी जांच का विकल्प नहीं हैं। ये केवल शुरुआती चेतावनी संकेतों की पहचान कर महिलाओं को समय पर डॉक्टर के पास भेजने में मदद करेंगी।
3. पात्रता और रोजगार के अवसर
- पात्रता: न्यूनतम 10+2 पास और आयु कम से कम 18 वर्ष। (प्रति बैच 20 सीटें)।
- रोजगार क्षेत्र: आयुष केंद्र, प्रसूति क्लिनिक, एनजीओ (NGOs), सामुदायिक स्वास्थ्य परियोजनाएं और वेलनेस संस्थान।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| प्रोग्राम का नाम | गर्भिणी मित्र पाठ्यक्रम |
| नोडल संस्थान | ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (AIIA), नई दिल्ली |
| संबद्ध मंत्रालय | आयुष मंत्रालय (Ministry of Ayush) |
| पाठ्यक्रम की अवधि | 6 महीने (ऑफलाइन) |
| मुख्य वैज्ञानिक आधार | गर्भिणी परिचर्या, सूतिका परिचर्या और गर्भाधान विधि |
The Fifth Space: शिक्षा और डिजिटल जिम्मेदारी का संगम
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW), NCPCR, यूनेस्को, The Fifth Space अवधारणा।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): सामाजिक न्याय, शिक्षा व्यवस्था, बाल अधिकार एवं सुरक्षा, डिजिटल उत्तरदायित्व (Digital Responsibility), मानव गरिमा और संस्थागत ढांचा।
चर्चा में क्यों?
डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर (DAIC), नई दिल्ली में “द फिफ्थ स्पेस – व्हेयर एजुकेशन मीट्स रिस्पॉन्सिबिलिटी” (The Fifth Space – Where Education Meets Responsibility) नामक विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार ने स्कूली छात्रों से सीधे बातचीत की और शिक्षा, डिजिटल जिम्मेदारी, तथा मानव गरिमा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की।
मुख्य बिंदु: डिजिटल जिम्मेदारी, बाल अधिकार और ‘फिफ्थ स्पेस’
1. ‘फिफ्थ स्पेस’ की अवधारणा
- अर्थ एवं संगम: यह अवधारणा घर, स्कूल, संस्कृति, समाज, नागरिकता, ज्ञान और डिजिटल दुनिया के आपस में जुड़ने और तालमेल का प्रतिनिधित्व करती है।
- नैतिकता और तकनीक: तकनीक के तेजी से प्रसार के दौर में युवाओं को केवल तकनीकी ज्ञान ही नहीं, बल्कि नैतिकता, जिम्मेदारी और विवेकपूर्ण निर्णय लेने की क्षमता भी सिखाना आवश्यक है।
2. ‘दृष्टि से अंतर्दृष्टि की ओर’
- संवादात्मक दृष्टिकोण: माता-पिता, शिक्षकों और संस्थानों को केवल तकनीक के इस्तेमाल की आलोचना करने के बजाय बच्चों की चिंताओं को सहानुभूतिपूर्वक सुनना और समझना चाहिए।
- अंतर्दृष्टि पर जोर: मंत्री जी ने ‘दृष्टि से अंतर्दृष्टि की ओर’ जाने का आह्वान किया। इसका मतलब है चीजों को केवल ऊपरी तौर पर देखने के बजाय उन्हें गहराई से समझना।
3. सहयोगात्मक पहल और प्रमुख मुद्दे
- आयोजक संस्थाएं: यह कार्यक्रम राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW), डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर (DAIC), यूनेस्को नई दिल्ली और माउंट आबू पब्लिक स्कूल द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया।
- विचार-विमर्श के क्षेत्र: इसमें बाल अधिकार, सुरक्षा, लैंगिक समानता, मानव गरिमा, डिजिटल जिम्मेदारी और एक जिम्मेदार नागरिक बनने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसमें राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| कार्यक्रम का नाम | The Fifth Space – Where Education Meets Responsibility |
| आयोजन स्थल | डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर (DAIC), नई दिल्ली |
| आयोजक संस्थाएं | NCW, DAIC, UNESCO नई दिल्ली, और माउंट आबू पब्लिक स्कूल |
| फिफ्थ स्पेस का दायरा | घर, स्कूल, समाज, नागरिकता, ज्ञान और डिजिटल जगत का एकीकरण |
| प्रमुख सहभागी निकाय | NCPCR (राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग) और NCW |
पुनर्योजी कृषि : समृद्ध और जलवायु-सक्षम भारतीय कृषि की ओर
- प्रारंभिक परीक्षा: पुनर्योजी कृषि, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF), मृदा स्वास्थ्य कार्ड (SHC), पर ड्रॉप मोर क्रॉप (PDMC), परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY), RAD योजना।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): सतत एवं पुनर्योजी कृषि, मृदा स्वास्थ्य एवं जैव विविधता, कृषि में प्रौद्योगिकी का प्रयोग, जलवायु परिवर्तन का कृषि पर प्रभाव और कृषि संबंधी प्रमुख सरकारी योजनाएं।
चर्चा में क्यों?
भारत सरकार द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों (मार्च 2026 तक) के अनुसार, देश में पुनर्योजी कृषि (Regenerative Agriculture) और सतत तकनीकों को अपनाने की गति में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है। प्राकृतिक खेती मिशन के तहत 8.80 लाख हेक्टेयर क्षेत्र कवर हो चुका है, जबकि सूक्ष्म सिंचाई (PDMC) के तहत 109 लाख हेक्टेयर से अधिक भूमि लाई जा चुकी है। इसके अतिरिक्त, देश में 25.89 करोड़ से अधिक ‘मृदा स्वास्थ्य कार्ड’ (Soil Health Cards) भी जारी किए जा चुके हैं।
मुख्य बिंदु: अवधारणा, अभ्यास, लाभ एवं सरकारी पहलें
1. पुनर्योजी कृषि (Regenerative Agriculture) क्या है?
- सतत कृषि से अंतर: सतत कृषि वर्तमान स्थिति को बनाए रखने पर जोर देती है, जबकि पुनर्योजी कृषि एक कदम आगे बढ़कर मृदा की जीवंतता को पुनः बहाल करने, जैव विविधता बढ़ाने और पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने का काम करती है।
- प्रमुख 6 सिद्धांत:
- मिट्टी की न्यूनतम जुताई (Minimizing soil disturbance)।
- पौधों की जीवित जड़ों की निरंतर उपस्थिति।
- मृदा आवरण (Mulching/Cover Crops) बनाए रखना।
- फसल प्रणालियों में पशुधन (Livestock) को जोड़ना।
- रासायनिक उर्वरकों व कीटनाशकों का सीमित/शून्य प्रयोग।
- जैव विविधता में वृद्धि करना।
2. पुनर्योजी कृषि के प्रमुख घटक और तकनीकें
- प्राकृतिक खेती (Natural Farming): देशी गाय आधारित जैविक इनपुट जैसे बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, नीमास्त्र और दशपर्णी का प्रयोग।
- मृदा एवं पोषण प्रबंधन: लेग्यूम अंतर-फसली, हरी खाद (Green Manuring), आवरण फसलें (Cover Cropping) और लीफ कलर चार्ट के जरिए नाइट्रोजन का सटीक प्रयोग।
- एकीकृत कृषि प्रणाली (IFS): फसलों के साथ पशुपालन, मत्स्य पालन, बागवानी और मधुमक्खी पालन का संयोजन, जिससे फसल खराब होने का जोखिम कम होता है।
- कृषि-वानिकी (Agroforestry): खेतों की मेड़ों पर बारहमासी और फलदार पेड़ लगाना, जिससे अतिरिक्त आय के साथ कार्बन सिंक का निर्माण होता है।
3. प्रमुख पर्यावरण व आर्थिक लाभ
- पर्यावरणीय प्रभाव: मृदा की जल धारण क्षमता में सुधार, कार्बन पृथक्करण (Carbon Sequestration – SDG 13 के अनुकूल) और परागणकों व मृदा सूक्ष्मजीवों का संरक्षण।

- आर्थिक लाभ: रासायनिक इनपुट लागत में भारी कमी, फसलों की जलवायु झटकों (सूखा/बाढ़) के प्रति सहनशीलता में वृद्धि और किसानों की शुद्ध आय में बढ़ोतरी।
4. पुनर्योजी कृषि को बढ़ावा देने वाली प्रमुख सरकारी योजनाएं
- राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF – 2024 में लॉन्च):
- किसानों को ₹4,000 प्रति एकड़/वर्ष का प्रोत्साहन (2 साल के लिए, अधिकतम 1 एकड़)।
- 10,000 बायो-इनपुट संसाधन केंद्र (BRCs) की स्थापना।
- 18,786 क्लस्टर बनाए गए (8.80 लाख हेक्टेयर और 18.19 लाख किसान पंजीकृत)।
- परम्परागत कृषि विकास योजना (PKVY – 2015):
- जैविक खेती के लिए 3 वर्षों में ₹31,500 प्रति हेक्टेयर की सहायता।
- अक्टूबर 2025 तक 16.90 लाख हेक्टेयर क्षेत्र कवर।
- पर ड्रॉप मोर क्रॉप (PDMC – 2015-16):
- ड्रिप व स्प्रिंकलर सिंचाई पर छोटे/सीमान्त किसानों को 55% और अन्य किसानों को 45% सब्सिडी।
- मई 2026 तक 109 लाख हेक्टेयर क्षेत्र आच्छादित और ₹26,325 करोड़ की केंद्रीय सहायता जारी।

- वर्षासिंचित क्षेत्र विकास कार्यक्रम (RAD – 2014-15):
- IFS अपनाने के लिए प्रति परिवार ₹30,000 की वित्तीय सहायता।
- 9.53 लाख हेक्टेयर क्षेत्र कवर और 15.73 लाख किसान लाभान्वित।
- मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना (SHC – 2015):
- 12 प्रमुख मापदंडों (मैक्रो/माइक्रो न्यूट्रिएंट्स) पर मिट्टी का परीक्षण।
- मार्च 2026 तक कुल 25.89 करोड़ कार्ड जारी; 70,002 ‘कृषि सखियों’ को सलाह देने का प्रशिक्षण दिया गया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| योजना / पहल | शुरुआत का वर्ष | मुख्य लक्ष्य / बजटीय तथ्य |
| National Mission on Natural Farming (NMNF) | 2024 | ₹4,000/एकड़/वर्ष प्रोत्साहन; 10,000 Bio-input Resource Centres |
| Paramparagat Krishi Vikas Yojana (PKVY) | 2015 | ₹31,500/हेक्टेयर (3 वर्ष हेतु); 16.90 लाख हेक्टेयर कवर्ड |
| Per Drop More Crop (PDMC) | 2015-16 | 109 लाख हेक्टेयर कवर्ड; छोटे/सीमान्त किसानों को 55% सब्सिडी |
| Soil Health Card (SHC) | 2015 | 12 मृदा पैरामीटर; 25.89 करोड़ कार्ड जारी (मार्च 2026 तक) |
| Rainfed Area Development (RAD) | 2014-15 | IFS अपनाने हेतु ₹30,000/परिवार सहायता; 9.53 लाख हेक्टेयर |
| SDG संरेखण | – | SDG 13 (जलवायु कार्रवाई / Climate Action) |
संशोधित एफडीआई ढांचा: सीमावर्ती देशों से गैर-नियंत्रित निवेश में तेजी
- प्रारंभिक परीक्षा: एफडीआई, प्रेस नोट 2 (2026), प्रेस नोट 3 (2020), फेमा नियम 2019, ऑटोमैटिक रूट बनाम सरकारी रूट।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की नीतियां, Ease of Doing Business, और तटीय/सीमावर्ती राष्ट्रों से निवेश के नियमन।
चर्चा में क्यों?
20 अगस्त 2026 तक भारत के संशोधित एफडीआई ढांचे (Revised FDI Framework) के तहत कुल ₹4,895.65 करोड़ मूल्य के 29 प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की सूचना मिली है। यह नया ढांचा 1 मई 2026 से प्रभावी हुआ था। इसने भारत की भूमि सीमा से लगे देशों (Land Bordering Countries – LBC) के छोटे और गैर-नियंत्रित स्वामित्व वाले विदेशी निवेश के लिए सरकारी मंजूरी की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया है।
मुख्य बिंदु: प्रेस नोट 2 (2026), फेमा नियम और प्रभाव
1. नीतिगत बदलाव और प्रेस नोट 3 (2020) की तुलना
- पुराना नियम (Press Note 3 of 2020): भारत से थल सीमा साझा करने वाले देशों (जैसे चीन) से आने वाले किसी भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए ‘सरकारी रूट’ (Government Approval Route) अनिवार्य था, चाहे वह स्वामित्व कितना भी छोटा क्यों न हो।
- नया नियम (Press Note 2 of 2026): इसके तहत फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट (Non-debt Instruments) रूल्स, 2019 में संशोधन किया गया। अब ‘बेनेफिशियल ओनरशिप टेस्ट’ केवल निवेशक संस्था के स्तर पर लागू होता है।
2. 10% गैर-नियंत्रित सीमा (Non-Controlling Threshold)
- ऑटोमैटिक रूट की अनुमति: यदि किसी विदेशी निवेशक संस्था में भूमि सीमा साझा करने वाले देश (LBC) का गैर-नियंत्रित स्वामित्व 10% तक है, तो वह सीधे ऑटोमैटिक रूट से भारत में निवेश कर सकती है।
- प्रक्रिया का सरलीकरण: इसके लिए सरकार से पूर्व स्वीकृति की आवश्यकता नहीं है। केवल निवेश की जानकारी सरकार को दर्ज (Report) करानी होगी।
3. निवेश के प्रमुख क्षेत्र और देश
- प्रमुख क्षेत्र: आईटी (IT), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सूचना एवं संचार, विनिर्माण (Manufacturing), फार्मास्यूटिकल्स, डेटा सेंटर और परिवहन सेवाएं।
- प्रमुख निवेशक क्षेत्र: मॉरीशस, अमेरिका, दक्षिण कोरिया, जापान, सिंगापुर, लक्ज़मबर्ग और केमैन आइलैंड्स।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| संशोधित नीति का नाम | Press Note 2 of 2026 (1 मई 2026 से लागू) |
| संशोधित कानून | Foreign Exchange Management (Non-debt Instruments) Rules, 2019 |
| LBC स्वामित्व सीमा | 10% तक (Non-controlling Beneficial Ownership) |
| अनुमोदन मार्ग (Approval Route) | ऑटोमैटिक रूट (सरकारी मंजूरी की आवश्यकता नहीं) |
| पुराना प्रतिबंधक नियम | Press Note 3 of 2020 (सभी LBC निवेश पर अनिवार्य मंजूरी) |
| प्राप्त कुल FDI (20 Aug 2026 तक) | 29 निवेश प्रस्ताव (कुल मूल्य: ₹4,895.65 करोड़) |