4 September 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत वैश्विक रक्षा साझेदारी को दिशा देने वाले ‘रक्षा’ कूटनीति दस्तावेज (अगले 10 वर्षों का विजन), भारत के बंदरगाहों को हरित बनाने हेतु भारत का ग्रीन शिपिंग विजन (शून्य-उत्सर्जन गलियारे और हरित बंदरगाह), नेशनल लीडरशिप डायलॉग और एजेंटिक एआई स्किलिंग प्रोग्राम, भारतीय संगीत जगत की महान हस्ती प्रसिद्ध गुजराती संगीतकार गौरांग व्यास का निधन, जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में पूंजी प्रवाह को बढ़ावा देने वाले BIO-NIVESH (बायोटेक्नोलॉजी और स्टार्टअप्स के लिए निवेश मंच), भारत का एफटीए उपयोग अभियान (वैश्विक व्यापार में नई छलांग), तथा रीसाइक्लिंग तकनीक से टिकाऊ बुनियादी ढांचे के निर्माण हेतु NH-716 पर 60% RAP तकनीक का सफल प्रदर्शन का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
‘रक्षा’ कूटनीति दस्तावेज: अगले 10 वर्षों का विजन
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की समसामयिक घटनाएँ, भारत की रक्षा नीतियाँ, रक्षा कूटनीति।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3):
- GS Paper 2: भारत एवं इसके पड़ोस- संबंध, द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह, भारत के हितों पर विकसित तथा विकासशील देशों की नीतियों का प्रभाव।
- GS Paper 3: सुरक्षा चुनौतियाँ एवं उनका प्रबंधन, रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता, ‘मेक इन इंडिया’।
चर्चा में क्यों?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में ‘रक्षा’ (RAKSHA – Strategic Roadmap for Defence Diplomacy) नाम से एक व्यापक दस्तावेज जारी किया। यह दस्तावेज अगले 10 वर्षों (2026-2036) के लिए भारत की रक्षा कूटनीति, वैश्विक रणनीतिक साझेदारियों और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का विस्तृत रोडमैप प्रस्तुत करता है।
मुख्य बिंदु: रणनीतिक रोडमैप के 4 मुख्य स्तंभ
1. रणनीतिक साझेदारियों का विस्तार
- द्विपक्षीय और बहुपक्षीय जुड़ाव: मित्र राष्ट्रों के साथ सुरक्षा सहयोग को गहरा करना।
- वैश्विक स्थिरता: बदलती वैश्विक व्यवस्था में भारत को शांति और नियम-आधारित व्यवस्था (Rule-based order) के केंद्र के रूप में स्थापित करना।
2. क्षमता निर्माण और संयुक्त अभ्यास
- संयुक्त सैन्य अभ्यास: मित्र देशों के साथ प्रशिक्षण कार्यक्रम बढ़ाना।
- सर्वश्रेष्ठ प्रथाओं का साझाकरण: सैन्य दक्षता और तकनीकी ज्ञान का आदान-प्रदान।
3. स्वदेशी रक्षा निर्यात
- मेक इन इंडिया: ‘मेक इन इंडिया’ के तहत निर्मित रक्षा प्लेटफॉर्म्स को बढ़ावा देना।
- वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब: भारत को एक विश्वसनीय और गुणवत्तापूर्ण रक्षा निर्माण केंद्र के रूप में पेश करना।
4. समुद्री सुरक्षा (Maritime Security in IOR)
- नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर: हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ की भूमिका मजबूत करना।
- फर्स्ट रिस्पॉन्डर: किसी भी क्षेत्रीय संकट या आपदा के समय पहली सहायता (First Responder) प्रदान करने की क्षमता बनाए रखना।
‘RAKSHA’ दस्तावेज के प्रमुख स्तंभ
| स्तंभ | मुख्य उद्देश्य |
| 1. रणनीतिक साझेदारियां | सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना और वैश्विक नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखना। |
| 2. क्षमता निर्माण | प्रशिक्षण, संयुक्त सैन्य अभ्यास और ज्ञान साझाकरण। |
| 3. स्वदेशी निर्यात | भारत को विश्वसनीय रक्षा निर्यात हब बनाना (‘मेक इन इंडिया’)। |
| 4. समुद्री सुरक्षा | हिंद महासागर क्षेत्र में ‘Net Security Provider’ और ‘First Responder’ बनना। |
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| दस्तावेज का नाम | RAKSHA (Defence Diplomacy Document) |
| जारीकर्ता | रक्षा मंत्रालय (रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह) |
| समय अवधि | अगले 10 वर्ष (2026 से 2036) |
| मुख्य लक्ष्य | रणनीतिक स्वायत्तता, रक्षा निर्यात और समुद्री सुरक्षा |
भारत का ग्रीन शिपिंग विजन: शून्य-उत्सर्जन गलियारे और हरित बंदरगाह
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की समसामयिक घटनाएँ, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, जलवायु परिवर्तन, बुनियादी ढांचा (पोर्ट्स एवं जहाजरानी)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): बुनियादी ढांचा: बंदरगाह और जलमार्ग; संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण; हरित ऊर्जा और डीकार्बोनाइजेशन।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने टेरी के ग्वाल पहाड़ी परिसर (गुरुग्राम) का दौरा किया। उन्होंने भारत के बंदरगाहों को हरित ईंधन (Green Fuel) के लिए तैयार करने, शून्य-उत्सर्जन नौवहन गलियारों (Zero-Emission Shipping Corridors) के निर्माण और समुद्री डीकार्बोनाइजेशन की प्रगति की समीक्षा की।
मुख्य बिंदु: ग्रीन शिपिंग और बंदरगाहों की तैयारी
1. NCoEGPS और अनुसंधान साझेदार
- NCoEGPS की भूमिका: नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर ग्रीन पोर्ट्स एंड शिपिंग (NCoEGPS) MoPSW को समुद्री क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन घटाने में तकनीकी और नीतिगत सहयोग दे रहा है।
- RMI का योगदान: रॉकी माउंटेन इंस्टीट्यूट (RMI) भारत में कम और शून्य-उत्सर्जन नौवहन गलियारे विकसित करने पर काम कर रहा है।
2. प्रमुख बंदरगाहों की हरित पहल
- ग्रीन फ्यूल बैंकरिंग हब्स: तीन प्रमुख बंदरगाहों—दीनदयाल पोर्ट अथॉरिटी (कांडला), पारादीप पोर्ट अथॉरिटी, और वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट अथॉरिटी (तूतीकोरिन) ने वैकल्पिक एवं हरित समुद्री ईंधन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है।
- शोर पावर सुविधा: कामरजार पोर्ट लिमिटेड (चेन्नई) ने अपने कोयला टर्मिनलों पर ‘शोर पावर’ सुविधा शुरू की है। इससे तट पर खड़े जहाजों को अपने डीजल इंजन चलाने के बजाय सीधे जमीन से बिजली मिलती है, जिससे बंदरगाहों पर उत्सर्जन काफी घटता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| मंत्रालय | बंदरगाह, नौवहन और जलमार्ग मंत्रालय (MoPSW) |
| NCoEGPS केंद्र | TERI ग्वाल पहाड़ी कैंपस (गुरुग्राम, हरियाणा) |
| ग्रीन बैंकरिंग हब वाले पोर्ट्स | दीनदयाल (गुजरात), पारादीप (ओडिशा), V.O. चिदंबरनार (तमिलनाडु) |
| शोर पावर तकनीक | कामरजार पोर्ट (तमिलनाडु) के कोयला टर्मिनलों पर लागू |
| वैश्विक लक्ष्य | अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्यों के अनुरूप |
नेशनल लीडरशिप डायलॉग और एजेंटिक एआई स्किलिंग प्रोग्राम
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की समसामयिक घटनाएँ, सामान्य विज्ञान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सूचना प्रौद्योगिकी।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं उनके अनुप्रयोग; आईटी, कंप्यूटर, रोबोटिक्स और AI के क्षेत्र में जागरूकता; रोजगार एवं क्षमता निर्माण।
चर्चा में क्यों?
नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में NIELIT (इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय) और Intel India ने “Preparing the Future Workforce for the Agentic AI Era” विषय पर नेशनल लीडरशिप डायलॉग का आयोजन किया। इसी अवसर पर देश भर के युवाओं को AI के अगले चरण के लिए कुशल बनाने हेतु एजेंटिक एआई स्किलिंग प्रोग्राम लॉन्च किया गया।
मुख्य बिंदु: एजेंटिक एआई और नया स्किलिंग फ्रेमवर्क
1. एजेंटिक एआई क्या है?
- तकनीकी विकास: यह केवल प्रेडिक्टिव या जनरेटिव AI तक सीमित नहीं है। एजेंटिक AI ऐसी प्रणालियाँ हैं जो इंसानी देखरेख में जटिल कार्यों का विश्लेषण (Reasoning), योजना (Planning) और निष्पादन (Execution) खुद कर सकती हैं।
- कार्यबल पर प्रभाव: यह केवल सहायक टूल के रूप में काम नहीं करता। यह ऑटोनॉमस वर्कफ़्लो और निर्णय लेने में मदद करता है। इसके लिए इंसानों में तकनीकी कौशल और क्रिटिकल थिंकिंग दोनों जरूरी हैं।
2. लॉन्च किए गए 2 प्रमुख कौशल कार्यक्रम
NIELIT और इंटेल इंडिया ने संयुक्त रूप से दो स्तरों पर ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए हैं:
- एजेंटिक एआई फॉर एवरीवन:
- यह वर्कफ़्लो ऑटोमेशन और मल्टी-एजेंट सिस्टम्स से परिचित कराता है।
- इसमें नो-कोड प्लेटफॉर्म का उपयोग कर उत्पादकता बढ़ाने और निर्णय लेने की क्षमता पर ध्यान दिया जाएगा।
- इंजीनियरिंग एजेंटिक एआई सिस्टम्स:
- यह कोर टेक्निकल और डेवलपर स्तर का कोर्स है।
- इसमें नो-कोड/लो-कोड और कोड-बेस्ड फ्रेमवर्क के जरिए एजेंट आर्किटेक्चर, टूल इंटीग्रेशन, मेमोरी और डिप्लॉयमेंट सिखाया जाएगा।
3. इंडिया एआई मिशन और विज़न
- सॉवरेन एआई और टैलेंट पाइपलाइन: यह पहल IndiaAI Mission के तहत भारत को आत्मनिर्भर (Sovereign AI) बनाने और एआई डेटा लैब्स स्थापित करने के दृष्टिकोण से मेल खाती है।

- त्रिस्तरीय मॉडल: सरकार, उद्योग और अकादमिक जगत (Government-Industry-Academia) मिलकर भारत की युवा आबादी को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करेंगे।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| कार्यक्रम का नाम | Agentic AI Skilling Initiative |
| आयोजक | NIELIT (MeitY) एवं Intel India |
| मुख्य विषय | Preparing the Future Workforce for the Agentic AI Era |
| शुरू किए गए कोर्स | 1. Agentic AI for Everyone 2. Engineering Agentic AI Systems |
प्रसिद्ध गुजराती संगीतकार गौरांग व्यास का निधन
- प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय कला और संस्कृति, राष्ट्रीय व्यक्तित्व और पुरस्कार।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 1): भारतीय संस्कृति – प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला रूपों, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू।
चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजराती संगीत जगत के दिग्गज और जाने-माने संगीतकार श्री गौरांग व्यास के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने गुजराती सुगम संगीत और क्षेत्रीय सिनेमा में अपने अद्वितीय योगदान से राज्य की सांस्कृतिक विरासत को समृद्ध किया।
मुख्य बिंदु: गौरांग व्यास का संगीत क्षेत्र में योगदान
1. सांस्कृतिक संगीत विरासत को आगे बढ़ाना
- पारिवारिक पृष्ठभूमि: वे गुजरात के प्रसिद्ध संगीतकार और गीतकार अविनाश व्यास के पुत्र थे।
- अद्वितीय पहचान: अपने पिता की समृद्ध संगीतमय विरासत को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने गुजराती संगीत और लोकधुनों को आधुनिक पहचान दी।
2. गुजराती सिनेमा और संगीत में योगदान
- क्षेत्रीय सिनेमा: उन्होंने कई गुजराती फिल्मों, नाटकों और गरबा गीतों में संगीत निर्देशन किया।
- सुगम संगीत: गुजराती भाषा में सुगम संगीत और शास्त्रीय-आधारित रचनाओं को लोकप्रिय बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| नाम | गौरांग व्यास |
| क्षेत्र | संगीत रचना एवं निर्देशन (गुजराती संगीत) |
| संबद्ध राज्य | गुजरात |
| पिता का योगदान | अविनाश व्यास (गुजरात के प्रसिद्ध संगीतकार, पद्म श्री प्राप्तकर्ता) |
| परीक्षा हेतु प्रासंगिकता | भारतीय कला एवं संस्कृति (क्षेत्रीय संगीत रूप और व्यक्तित्व) |
BIO-NIVESH: बायोटेक्नोलॉजी और स्टार्टअप्स के लिए निवेश मंच
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की समसामयिक घटनाएँ, सामान्य विज्ञान, बायोटेक्नोलॉजी, अर्थव्यवस्था और स्टार्टअप्स।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं उनके अनुप्रयोग; बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में जागरूकता; उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव; निवेश मॉडल और रोजगार सृजन।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में ‘BIO-NIVESH’ नाम के एक रणनीतिक प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया। यह पहल जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) क्षेत्र के इनोवेटर्स, स्टार्टअप्स और प्राइवेट इन्वेस्टर्स को एक मंच पर लाती है। इसका मुख्य उद्देश्य लैब में तैयार नई खोजों को बाजार और बड़े पैमाने पर उत्पादन (Scale-up) तक पहुँचाने के लिए निजी पूंजी जुटाना है।
मुख्य बिंदु: BIO-NIVESH और भारत का बायोटेक विजन
1. “Big Five in Five Years” का दृष्टिकोण
- एंकर कंपनियाँ बनाना: मंत्री ने सुझाव दिया कि भारत को अगले 5 वर्षों में 5 बड़ी बायोटेक कंपनियाँ (Big Five) तैयार करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
- इकोसिस्टम विकास: जिस तरह स्पेस सेक्टर में बड़े प्लेयर्स के आने से छोटे स्टार्टअप्स को सहारा मिला, वैसे ही बायोटेक में भी बड़ी एंकर कंपनियाँ अन्य स्टार्टअप्स के विकास को गति देंगी।
2. औद्योगिक क्रांति 4.0 से देर से न जुड़ने की सीख
- ऐतिहासिक सीख: आईटी (IT) क्रांति के समय भारत वैश्विक दौड़ में लगभग एक दशक पीछे रह गया था। बायोटेक से संचालित होने वाली अगली औद्योगिक क्रांति में भारत को अग्रणी भूमिका निभानी होगी।
- पूंजी और जोखिम साझा करना: सरकार शुरुआती जोखिम उठाएगी (Seed Capital/R&D Grants), लेकिन लंबी अवधि के विकास के लिए निजी पूंजी (Private Capital) और कॉर्पोरेट सेक्टर की भागीदारी जरूरी है।
3. ₹1 लाख करोड़ का RDI फंड और BIRAC की भूमिका
- फंड मैनेजर के रूप में BIRAC: ₹1 लाख करोड़ के रिसर्च, डेवलपमेंट एंड इनोवेशन (RDI) फंड के तहत BIRAC (Biotechnology Industry Research Assistance Council) को सेकेंड-लेवल फंड मैनेजर बनाया गया है।

- पेशेंट कैपिटल: बायोटेक प्रोजेक्ट्स की विकास अवधि (Development Cycle) लंबी और जटिल होती है। यह फंड स्टार्टअप्स को दीर्घकालिक और रणनीतिक पूंजी प्रदान करेगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| पहल का नाम | BIO-NIVESH |
| नोडल मंत्रालय | विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MoST) |
| कार्यान्वयन एजेंसी | BIRAC (Biotechnology Industry Research Assistance Council) |
| रणनीतिक लक्ष्य | ‘Big Five in Five Years’ (बायोटेक में 5 बड़ी एंकर कंपनियाँ बनाना) |
| संबंधित राष्ट्रीय फंड | ₹1 लाख करोड़ का RDI फंड |
भारत का एफटीए उपयोग अभियान: वैश्विक व्यापार में नई छलांग
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की समसामयिक घटनाएँ, भारतीय अर्थव्यवस्था, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार एवं संगठन (FTA, PTA)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास तथा रोजगार से संबंधित मुद्दे; उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति तथा भारत का विदेश व्यापार।
चर्चा में क्यों?
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने नई दिल्ली में आयोजित “Leveraging FTAs: An Outreach Programme” राष्ट्रीय कार्यशाला को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भारत के सभी 780 जिलों में मुक्त व्यापार समझौतों (Free Trade Agreements – FTAs) के अधिकतम उपयोग के लिए एक राष्ट्रव्यापी आउटरीच अभियान का आह्वान किया।
मुख्य बिंदु: वैश्विक व्यापार नेटवर्क और भारत का विजन
1. वैश्विक व्यापार तक पहुंच और टैरिफ लाभ
- 9 सक्रिय एफटीए (FTAs): भारत के वर्तमान 9 मुक्त व्यापार समझौते लगभग 60 ट्रिलियन जीडीपी वाली अर्थव्यवस्थाओं को कवर करते हैं। यह वैश्विक व्यापार के लगभग दो-तिहाई हिस्से तक तरजीही पहुंच (Preferential Access) प्रदान करते हैं।
- भविष्य के समझौते: आगामी एफटीए (कनाडा, मैक्सिको, चिली, मर्सोसुर, SACU, GCC, इज़राइल) और मौजूदा समझौतों (आसियान, कोरिया, जापान) की समीक्षा के बाद भारत की पहुंच प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कम शुल्क दरों पर 75% वैश्विक व्यापार तक हो जाएगी।
- टेक्सटाइल उदाहरण: वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रतिस्पर्धी देशों को एलडीसी (LDC) दर्जा या एफटीए के कारण मिलने वाले शून्य-शुल्क लाभ का मुकाबला अब भारत अपने नए समझौतों के जरिए कर रहा है।
2. निर्यात लक्ष्य और आर्थिक प्रदर्शन
- Q1 GDP वृद्धि: अनिश्चित वैश्विक माहौल के बावजूद भारत ने पहली तिमाही में 7.8% की जीडीपी वृद्धि दर दर्ज की।
- निर्यात आंकड़े (अप्रैल-जुलाई 2026): चालू वित्त वर्ष के पहले 4 महीनों में भारत का निर्यात 317 बिलियन तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि (280 बिलियन) से 36-37 बिलियन अधिक है।
- दीर्घकालिक लक्ष्य: इस वर्ष 1 ट्रिलियन निर्यात का लक्ष्य है। भारत वर्ष 2030 तक 2 ट्रिलियन निर्यात और वर्ष 2047 तक 30 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में काम कर रहा है।
3. प्रमुख नीतियां और संस्थागत तंत्र
- निर्यात संवर्धन मिशन (Export Promotion Mission – EPM): यह मिशन निर्यात ऋण तक आसान पहुंच, सरलीकृत डिजिटल अनुपालन, और कंट्री-ऑफ-ओरिजिन प्रमाणन में सीधी सहायता प्रदान करता है।
- डिस्ट्रिक एज एक्सपोर्ट हब्स (DEH): सभी 780 जिलों के एमएसएमई, स्टार्टअप्स, और महिला उद्यमियों तक एफटीए लाभ पहुंचाना।
- भव्या पार्क्स: 100 भव्य पार्क्स में निर्यातकों को प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं और प्राथमिकता सहायता प्रदान की जाएगी।
- एसपीएस एवं टीबीटी मानक: सैनिटरी और फाइटोसैनिटरी (SPS) तथा तकनीकी बाधाओं (TBT) से जुड़े नियमों का सख्ती से पालन कर भारत को एक भरोसेमंद वैश्विक साझेदार बनाना।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| कार्यक्रम का नाम | National Workshop on Leveraging FTAs |
| आयोजक मंत्रालय | वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (Department of Commerce & DPIIT) |
| Q1 GDP वृद्धि दर | 7.8% (स्थिर मूल्यों पर) |
| अप्रैल-जुलाई 2026 निर्यात | ~317 बिलियन |
| वर्ष 2030 का लक्ष्य | 2 ट्रिलियन कुल निर्यात |
| वर्ष 2047 का लक्ष्य | 30 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था |
NH-716 पर 60% RAP तकनीक का सफल प्रदर्शन: टिकाऊ सड़क निर्माण की दिशा में बड़ा कदम
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्त्व की समसामयिक घटनाएँ, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, बुनियादी ढाँचा (सड़क एवं राजमार्ग)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): बुनियादी ढाँचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे; संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियाँ; प्रौद्योगिकियों का स्वदेशीकरण।
चर्चा में क्यों?
CSIR-CRRI (केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान), OSEPL और ओम्स इंडिया ने मिलकर राष्ट्रीय राजमार्ग-716 (NH-716, चेन्नई-तिरुपति पैकेज-I) पर 60% रिक्लेम्ड डामर फुटपाथ (RAP – Reclaimed Asphalt Pavement) तकनीक का सफल मैदानी प्रदर्शन (Field Demonstration) किया। यह पहल राष्ट्रीय राजमार्गों के निर्माण में रीसाइक्लिंग और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा मील का पत्थर मानी जा रही है।
मुख्य बिंदु: 60% RAP तकनीक और स्वदेशी REJUBIT
1. RAP क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
- रिसोर्स बैंक की तरह उपयोग: पुरानी उखड़ी हुई सड़कों के डामर और गिट्टी (Aggregates) को बेकार कचरा मानने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से रीसाइकिल किया जाता है।
- प्राकृतिक संसाधनों की बचत: 60% RAP तकनीक से नई सड़क बनाने में लगने वाले नए पत्थरों (Virgin Aggregates) और बिटुमेन (डामर) की निर्भरता काफी कम हो जाती है।
- पर्यावरणीय लाभ: इससे निर्माण से पैदा होने वाले कचरे में कमी आती है और कार्बन फुटप्रिंट घटता है।
2. ‘REJUBIT’ स्वदेशी रीजुवेनेटर तकनीक
- संयुक्त विकास: इस स्वदेशी तकनीक को CSIR-CRRI और ओम्स इंडिया ने मिलकर विकसित किया है।
- कार्यप्रणाली: यह पुराने डामर (Aged Bitumen) में रासायनिक सुधार कर उसकी बाइंडिंग क्षमता को फिर से नए जैसा बना देता है।

- महत्व: इसी तकनीक की वजह से डामर मिश्रण (Dense Bituminous Macadam – DBM) में 60% तक पुराना मटेरियल मिलाना संभव हो पाया है।
परियोजना में शामिल प्रमुख निकाय और उनकी भूमिकाएँ
| संस्था / निकाय | भूमिका और दायित्व |
| CSIR-CRRI | वैज्ञानिक मार्गदर्शन, मिक्स डिजाइन और तकनीकी नेतृत्व। |
| Ooms India | ‘REJUBIT’ तकनीक का विकास और हॉट-मिक्स प्लांट प्रोसेसिंग। |
| OSEPL | राष्ट्रीय राजमार्ग-716 पर ऑन-साइट सड़क निर्माण और निष्पादन। |
| NHAI एवं तमिलनाडू हाईवे रिसर्च स्टेशन | क्षेत्र स्तरीय समीक्षा और गुणवत्ता नियंत्रण निगरानी। |
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| तकनीक का नाम | 60% Reclaimed Asphalt Pavement (RAP) |
| स्वदेशी रीजुवेनेटर | REJUBIT (CSIR-CRRI + Ooms India द्वारा विकसित) |
| सड़क परियोजना | NH-716 (चेन्नई-तिरुपति पैकेज-I) |
| मुख्य नोडल अनुसंधान संस्थान | CSIR-Central Road Research Institute (नई दिल्ली) |
| पर्यावरणीय अवधारणा | सर्कुलर इकोनॉमी और संसाधन दक्षता |