6 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार विजेता ICMR-MINDS प्लेटफॉर्म, ग्रामीण भारत के डिजिटल सुशासन का आधार स्तंभ लोकोसऔर SHE-LEAPS ऐप, भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में साणंद में स्थापित CG Semi OSAT सुविधा, ₹29,000 करोड़ की लागत वाली संशोधित उड़ान योजना, ईंधन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का प्रमाण E20 इथेनॉल कार्यक्रम, तथा भारत-इजरायल द्विपक्षीय निवेश समझौता (BIA) जैसे अति-महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है।
ICMR-MINDS को मिला राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस स्वर्ण पुरस्कार 2026
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार 2026, ICMR-MINDS प्लेटफॉर्म, DARPG, क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (CDSS)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): ई-गवर्नेंस- अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएं, सीमाएं और संभावनाएं; स्वास्थ्य और शिक्षा से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित मुद्दे।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
1-2 जुलाई 2026 को जयपुर (राजस्थान) में आयोजित 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन (NCeG) के दौरान भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) की प्रमुख पहल ICMR-MINDS को प्रतिष्ठित स्वर्ण पुरस्कार (Gold Award) से सम्मानित किया गया है। प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) द्वारा यह पुरस्कार “नागरिक-केंद्रित सेवाएं प्रदान करने के लिए एआई (AI) और अन्य नई तकनीकों के उपयोग में नवाचार” श्रेणी के तहत केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा प्रदान किया गया।
ICMR-MINDS क्या है और यह कैसे काम करता है?
यह मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में तकनीकी नवाचार के माध्यम से जमीनी स्तर पर बड़े सुधार लाने वाली एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान प्राथमिकता परियोजना है।
- मूल उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य गैर-संचारी रोगों (Non-Communicable Diseases – NCDs) के साथ मानसिक स्वास्थ्य और मादक द्रव्यों के सेवन से जुड़े विकारों की स्क्रीनिंग (जांच) और प्रबंधन को प्राथमिक स्वास्थ्य प्रणाली के साथ एकीकृत करना है।
- क्लिनिकल डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (CDSS): यह इस प्लेटफॉर्म का मुख्य इंजन है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर काम करता है। इसकी मदद से विशेषज्ञ डॉक्टरों का काम (जैसे शुरुआती स्क्रीनिंग, असेसमेंट और सामान्य फॉलो-अप) अब प्रशिक्षित नॉन-स्पेशलिस्ट फ्रंटलाइन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (जैसे एएनएम, आशा वर्कर) को सौंप दिया जाता है, जिसे ‘टास्क-शिफ्टिंग’ कहते हैं।
- तकनीकी विशेषताएं: इस प्लेटफॉर्म में ऑफलाइन काम करने की क्षमता, स्थानीय स्तर पर बहुभाषी इंटरफेस, उपयोगकर्ताओं को जोड़े रखने के लिए गेमीफाइड (Gamified) फीचर्स और वास्तविक समय (Real-time) की निगरानी के लिए प्रशासनिक डैशबोर्ड शामिल हैं।
- निरंतर देखभाल ढांचा (Continuity-of-Care): इसके तहत एक द्वि-दिशात्मक रेफरल मार्ग तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से गंभीर मरीजों को विशेषज्ञ के पास भेजा जाता है और स्थिति स्थिर होने पर उन्हें वापस नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में फॉलो-अप के लिए भेज दिया जाता है, जिससे बड़े अस्पतालों पर बोझ कम होता है।
परियोजना का भौगोलिक विस्तार और कार्यान्वयन
यह महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय पहल वर्तमान में देश के 7 राज्यों में संबंधित राज्य स्वास्थ्य विभागों और 7 प्रमुख भागीदार संस्थानों के सहयोग से चलाई जा रही है:
| राज्य | सहयोगी संस्थान (Collaborating Institutions) |
| असम | अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), गुवाहाटी |
| गुजरात | गुजरात मानसिक स्वास्थ्य संस्थान (GIMH), अहमदाबाद |
| हरियाणा | अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), नई दिल्ली |
| कर्नाटक | सेंट जॉन्स मेडिकल कॉलेज, बेंगलुरु |
| मध्य प्रदेश | अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), भोपाल |
| ओडिशा | अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS), भुवनेश्वर |
| पंजाब | पोस्टग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (PGIMER), चंडीगढ़ |
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
- ICMR-MINDS का पूर्ण रूप: Mental Health Innovations in Non-Communicable Diseases-Supported by ICMR (यह कार्यान्वयन अनुसंधान अध्ययन है)।
- पुरस्कार प्रदाता: प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG), केंद्रीय कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय।
- आयोजन स्थल: 29वां राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन, जयपुर, राजस्थान।
- तकनीकी शब्द – टास्क शिफ्टिंग: चिकित्सा के क्षेत्र में विशेषज्ञों की कमी को दूर करने के लिए एआई-सपोर्टेड डिजिटल गाइडेंस के जरिए बुनियादी काम गैर-विशेषज्ञ फ्रंटलाइन वर्कर को सौंपने की प्रक्रिया।
लोकोस प्लेटफॉर्म — ग्रामीण आजीविका का डिजिटल आधार स्तंभ
- प्रारंभिक परीक्षा: लोकोस प्लेटफॉर्म, DAY-NRLM, शी-लीप्स, लखपति दीदी पहल, डिजिटल आजीविका रजिस्टर (DAR)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): केंद्र और राज्यों द्वारा आबादी के कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं और इन योजनाओं का कार्यपादन; ई-गवर्नेंस—अनुप्रयोग, मॉडल और सफलताएं; समावेशी विकास और इससे उत्पन्न विषय (वित्तीय समावेशन और महिला अधिकारिता)।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत लोकोस डिजिटल प्लेटफॉर्म ने देश के ग्रामीण क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन, पारदर्शिता और डिजिटल सुशासन को बढ़ावा देने में बड़ी सफलता हासिल की है। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के नेटवर्क के भीतर सालाना ₹2 लाख करोड़ के वित्तीय लेनदेन को डिजिटल रूप से ट्रैक किया जा रहा है।
LokOS प्लेटफॉर्म क्या है और इसके मुख्य कार्य?
लोकोस (Lok = लोग, OS = ऑपरेटिंग सिस्टम) एक व्यापक वेब और मोबाइल एप्लिकेशन प्लेटफॉर्म है, जो स्वयं सहायता समूहों (SHGs) और उनके संघों (Federations) के व्यापक एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण के लिए काम करता है।
- मैनुअल रिकॉर्ड में कमी: यह कागजी बही-खातों की जगह डिजिटल रिकॉर्ड को बढ़ावा देता है, जिससे पारदर्शिता बढ़ती है और धोखाधड़ी की गुंजाइश खत्म होती है।

- द्विस्तरीय संरचना:
- वेब एप्लिकेशन: इसका उपयोग प्रशासक, ई-बुककीपर और लेनदेन को मंजूरी देने वाले अधिकारी करते हैं, जो ग्राम संगठन (VO) और क्लस्टर स्तरीय संघों (CLF) को पंजीकृत करते हैं।
- मोबाइल एप्लिकेशन: यह फील्ड स्तर पर कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन (CRPs) द्वारा स्वयं सहायता समूहों के दैनिक लेनदेन, बचत, ऋण और पुनर्भुगतान को रियल-टाइम में दर्ज करने के लिए उपयोग किया जाता है।
- विशिष्ट डिजिटल पहचान: यह सामुदायिक संगठनों (CBOs) और उनके सदस्यों के लिए बैंक-लिंक्ड डिजिटल पहचान तैयार करता है।
- आजीविका प्रोफाइलिंग: ग्रामीण परिवारों की आजीविका का डेटा कैप्चर करता है ताकि अन्य सरकारी योजनाओं के साथ उनका अभिसरण (Convergence) सुनिश्चित किया जा सके।
शी-लीप्स: ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा
हाल ही में 29 जून 2026 को लोकोस प्लेटफॉर्म के ही एक हिस्से के रूप में SHE-LEAPS (Self-Help Entrepreneur-Livelihoods and Enterprise Application for Prosperity and Sustainability) को लॉन्च किया गया है।
- उद्देश्य: ग्रामीण भारत में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को उद्यमी (Entrepreneurs) बनने के लिए सशक्त बनाना।
- विशेषता: यह कृषि (Farm) और गैर-कृषि (Non-farm) दोनों प्रकार के उद्यमों के निर्माण, उनके प्रदर्शन की ट्रैकिंग और व्यावसायिक प्रबंधन के लिए एक एकीकृत मंच प्रदान करता है।
लोकोस प्लेटफॉर्म की व्यापक पहुंच
यह प्लेटफॉर्म भारत के 34 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 762 जिलों, 7,241 ब्लॉकों और लगभग 5.92 लाख गांवों तक फैल चुका है:
1. शामिल संस्थागत ढांचा
- स्वयं सहायता समूह (SHGs): 94.16 लाख
- एसएचजी सदस्य (SHG Members): 10.03 करोड़ ग्रामीण महिलाएं
- ग्राम संगठन (VOs): 5.62 लाख
- क्लस्टर स्तरीय संघ (CLFs): 34,314
2. गतिमान की गई वित्तीय सहायता
यह प्लेटफॉर्म विभिन्न फंडों के कुशल प्रबंधन और ट्रैकिंग को सुनिश्चित करता है:
- रिवॉल्विंग फंड (RF): ₹9,718.41 करोड़
- सामुदायिक निवेश कोष (CIF): ₹64,607.66 crore
- सामुदायिक उद्यम कोष (CEF): ₹38.34 करोड़
3. ‘लखपति दीदी’ पहल को सशक्त बनाना
लोकोस प्लेटफॉर्म सरकार की महत्वाकांक्षी ‘लखपति दीदी’ योजना के क्रियान्वयन की डिजिटल रीढ़ है:
- इसके नेटवर्क में 3.87 करोड़ संभावित लखपति दीदी (PLDs) की ट्रैकिंग की जा रही है।
- इस कार्य के लिए 6,611 मास्टर ट्रेनर्स और 4.09 लाख कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन (CRPs) तैनात हैं।
- प्लेटफॉर्म पर 18.50 करोड़ डिजिटल आजीविका रजिस्टर (DAR) बनाए रखे जा रहे हैं, जो भविष्य की योजना के लिए मजबूत डेटाबेस हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / टर्म | तथ्य |
| LokOS प्लेटफॉर्म | DAY-NRLM के तहत ग्रामीण स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के डिजिटलीकरण का राष्ट्रीय प्लेटफॉर्म। |
| SHE-LEAPS | 29 जून 2026 को लॉन्च, ग्रामीण महिला उद्यमियों के व्यावसायिक प्रबंधन के लिए समर्पित डिजिटल ऐप। |
| डिजिटल आजीविका रजिस्टर (DAR) | ग्रामीण परिवारों की आजीविका गतिविधियों और योजना की निगरानी के लिए लोकोस पर बना डिजिटल डेटाबेस। |
| DAY-NRLM | ग्रामीण विकास मंत्रालय का गरीबी उन्मूलन और स्वरोजगार संवर्धन का प्रमुख मिशन। |
साणंद में CG Semi OSAT सुविधा का उद्घाटन
- प्रारंभिक परीक्षा: सेमिकॉन इंडिया प्रोग्राम, OSAT सुविधा, सेमीकंडक्टर क्लस्टर, मेक इन इंडिया, डिजाइन इन इंडिया।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-प्रौद्योगिकी, जैव-प्रौद्योगिकी से संबंधित क्षेत्रों में जागरूकता; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां; बुनियादी ढांचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानन, रेलवे आदि।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के साणंद में CG Semi OSAT (आउटसोर्स सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट) सुविधा का उद्घाटन किया। भारत को एक वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने के विजन के साथ, यह देश का तीसरा सेमीकंडक्टर संयंत्र है जहां चिप पैकेजिंग और वाणिज्यिक उत्पादन (Commercial Production) की शुरुआत हो चुकी है।
CG Semi OSAT सुविधा के मुख्य बिंदु
- त्रिपक्षीय साझेदारी: यह संयंत्र भारत (CG Power), जापान (Renesas Electronics), और थाईलैंड के उद्योग भागीदारों के संयुक्त प्रयासों का प्रतीक है।
- उत्पादन क्षमता: वर्तमान में इस संयंत्र में सालाना 20 करोड़ (200 मिलियन) चिप्स का उत्पादन शुरू हो रहा है, जिसे भविष्य में सालाना 5 अरब (5 बिलियन) चिप्स (लगभग 15 मिलियन चिप्स प्रतिदिन) तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।
- फास्ट-ट्रैक क्रियान्वयन: वर्ष 2024 में इस संयंत्र का शिलान्यास किया गया था, अगस्त 2025 तक चिप टेस्टिंग का काम शुरू हुआ, और जुलाई 2026 में इसका व्यावसायिक उद्घाटन कर दिया गया।
- कौशल विकास और महिला सशक्तिकरण: इस संयंत्र में काम करने वाली कई महिला कर्मचारी भारत के सुदूर आदिवासी क्षेत्रों (जैसे झारखंड, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश) से आती हैं, जिन्हें इस उन्नत तकनीक के लिए मलेशिया में विशेष प्रशिक्षण दिया गया है।
भारत में सेमीकंडक्टर क्लस्टर का उदय
दुनिया के बड़े औद्योगिक केंद्र हमेशा एकल फैक्ट्रियों के बजाय ‘क्लस्टर्स’ के रूप में विकसित हुए हैं (जैसे अमेरिका की सिलिकॉन वैली, ताइवान का सिंचू साइंस पार्क)। भारत भी अब इसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।
- साणंद सेमीकंडक्टर क्लस्टर: साणंद में बहुत कम समय के भीतर माइक्रोन, कायन्स, और CG Semi जैसी प्रमुख कंपनियों ने उत्पादन शुरू कर दिया है।
- पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) का विकास: इस क्लस्टर के विकसित होने से चिप पैकेजिंग के साथ-साथ रसायन विनिर्माण, नई परीक्षण प्रयोगशालाएं (Testing Labs), मशीन सर्विसिंग उद्योग, डिजाइन केंद्र और नए स्टार्टअप्स का एक पूरा इकोसिस्टम तैयार होगा।
- इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन: भारत की रणनीति ‘पहले अंतिम उत्पाद (जैसे मोबाइल), फिर कलपुर्जे (Components), और अब सेमीकंडक्टर’ के निर्माण की है, ताकि पूरी वैल्यू चेन भारत के भीतर ही मौजूद हो। वर्ष 2014 की तुलना में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन 7 गुना और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात 11 गुना बढ़ चुका है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / शब्द | महत्वपूर्ण तथ्य |
| संयंत्र का स्थान | साणंद, गुजरात। |
| OSAT का अर्थ | Outsourced Semiconductor Assembly and Test (चिप निर्माण के बाद उसकी पैकेजिंग और टेस्टिंग करने वाली इकाई)। |
| सेमिकॉन इंडिया प्रोग्राम | भारत को सेमीकंडक्टर डिजाइन, फैब्रिकेशन और पैकेजिंग का वैश्विक केंद्र बनाने के लिए शुरू किया गया राष्ट्रीय कार्यक्रम। |
| साझेदार देश | भारत, जापान और थाईलैंड। |
| लक्षित उत्पादन | भविष्य में सालाना 5 अरब चिप्स का उत्पादन करना। |
E20 ईंधन कार्यक्रम — भारतीय ऑटोमोबाइल क्षेत्र का ‘विश्वास वक्तव्य’
- प्रारंभिक परीक्षा: E20 ईंधन, इथेनॉल सम्मिश्रण (Ethanol Blending) कार्यक्रम, BIS मानक, BS-VI उत्सर्जन मानदंड, UNECE।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): बुनियादी ढांचा: ऊर्जा; संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन; वैज्ञानिक नवाचार और आत्मनिर्भरता।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
4 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। इसमें देश के शीर्ष ऊर्जा और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों ने E20 (20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) कार्यक्रम की सफलता और सुरक्षा पर एक ‘विश्वास वक्तव्य’ जारी किया। विशेषज्ञों ने आश्वस्त किया कि वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद यह साबित हो चुका है कि E20 ईंधन से पुराने वाहनों को कोई नुकसान नहीं पहुँचता है।
E20 ईंधन और वाहन क्षमता: मुख्य वैज्ञानिक निष्कर्ष
- पुराने वाहनों पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं: मारुति सुजुकी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में उनके द्वारा सर्विस की गई 2.84 करोड़ कारों में से 1.5 करोड़ से अधिक कारें 3 साल से अधिक पुरानी थीं (जो मूल रूप से E20 प्रमाणित नहीं थीं)। इसके बावजूद फील्ड से इंजन में जंग (Corrosion), घिसावट या पुर्जों के खराब होने की एक भी शिकायत नहीं मिली।
- माइलेज पर न्यूनतम प्रभाव: शुद्ध पेट्रोल या E10 की तुलना में E20 का कैलोरीफिक मान (Calorific Value) लगभग 3 से 3.5 प्रतिशत कम होता है।
- उदाहरण: यदि कोई कार 20 किमी/लीटर का माइलेज देती है, तो E20 से केवल 0.6 किमी/लीटर की मामूली कमी आ सकती है।
- माइलेज की भरपाई और लाभ: इस मामूली कमी की भरपाई इथेनॉल के उच्च प्रदर्शन गुणों द्वारा हो जाती है, क्योंकि यह ईंधन:
- बेहतर त्वरण (Better Acceleration) प्रदान करता है।
- इसमें एंटी-नॉकिंग (Anti-knocking) के गुण बेहतर होते हैं।
- यह शुद्ध पेट्रोल की तुलना में बहुत कम प्रदूषण फैलाता है।
- वैश्विक मानकों के अनुरूप: भारत संयुक्त राष्ट्र आर्थिक आयोग (UNECE) का हिस्सा है। भारत में ऑटोमोबाइल परीक्षण प्रोटोकॉल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानकीकृत और विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त हैं, जिनका उपयोग निर्यात किए जाने वाले वाहनों के लिए भी किया जाता है।
इथेनॉल सम्मिश्रण की भावी दिशा और बुनियादी ढांचा
भारत का इथेनॉल कार्यक्रम केवल E20 तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भविष्य के स्वच्छ ईंधन ईकोसिस्टम की नींव रख रहा है।
- E85 डिस्पेंसिंग स्टेशन: देश में हाल ही में E85 (85% इथेनॉल मिश्रण) स्टेशनों की शुरुआत की गई है। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि ये स्टेशन विशेष रूप से फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए हैं, जो भविष्य की नीतिगत दिशा को दर्शाते हैं।
- रेट्रोफिटमेंट किट: वर्तमान में पुराने वाहनों को E20 अनुकूल बनाने के लिए बाजार में कोई बाहरी रेट्रोफिटमेंट किट उपलब्ध नहीं कराई जा रही है; ऐसे समाधान अभी केवल अनुसंधान और विकास (R&D) स्तर तक सीमित हैं।
- मानकीकरण: वर्तमान में पूरे देश के रिटेल आउटलेट्स पर उपलब्ध E20 ईंधन भारतीय मानक ब्यूरो (BIS मानक) और BS-VI उत्सर्जन मानदंडों का पूरी तरह पालन करता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| बिंदु / घटक | महत्वपूर्ण तथ्य |
| E20 ईंधन | 80% गैसोलीन (पेट्रोल) और 20% इथेनॉल का मिश्रण। |
| नियामक मानक | यह ईंधन BIS (Bureau of Indian Standards) और BS-VI मानदंडों के अनुरूप है। |
| UNECE जुड़ाव | भारत United Nations Economic Commission for Europe के वाहन नियमों का पालन करता है, जिससे इसके परीक्षण मानक वैश्विक स्तर के हैं। |
| E85 ईंधन | उच्च इथेनॉल सम्मिश्रण (85%), जो केवल फ्लेक्स-फ्यूल इंजन वाले वाहनों में उपयोग हो सकता है। |
भारत-इजरायल द्विपक्षीय निवेश समझौता (BIA) लागू
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत-इजरायल द्विपक्षीय निवेश समझौता (BIA), आर्थिक मामले विभाग, वित्त मंत्रालय।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): भारत के हितों पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव; द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से जुड़े या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले समझौते; भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
भारत सरकार और इजरायल सरकार के बीच 4 जुलाई 2026 से ऐतिहासिक द्विपक्षीय निवेश समझौता (BIA – Bilateral Investment Agreement) आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। इस महत्वपूर्ण समझौते पर दोनों देशों ने पिछले साल 8 सितंबर 2025 को नई दिल्ली में हस्ताक्षर किए थे। यह कदम दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाने और निवेशकों को सुरक्षित माहौल देने के लिए उठाया गया है।
समझौते के मुख्य बिंदु और महत्व
- सुरक्षित निवेश माहौल: यह समझौता दोनों देशों के निवेशकों के लिए एक सुरक्षित, पारदर्शी और पूर्वानुमानित (Predictable) निवेश माहौल सुनिश्चित करता है, जिससे सीमा पार निवेश (Cross-border investment) गतिविधियों में तेजी आएगी।
- संप्रभु नीतिगत लचीलापन (Sovereign Policy Space): इस समझौते की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह अंतरराष्ट्रीय निवेश कानून के आधुनिक सिद्धांतों के अनुरूप है। यह जहां एक तरफ निवेशकों और उनके निवेश को मजबूत सुरक्षा देता है, वहीं दूसरी तरफ दोनों सरकारों को अपने जनहित और राष्ट्रीय नीतियों के अनुसार फैसले लेने की पूरी संप्रभु आजादी (Policy space) भी देता है।
- आर्थिक साझेदारी को मजबूती: इसके लागू होने से रक्षा, कृषि, जल प्रबंधन और अत्याधुनिक तकनीक (High-tech software/hardware) जैसे क्षेत्रों में इजरायली कंपनियों द्वारा भारत में निवेश बढ़ाए जाने की उम्मीद है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| प्रमुख पहलू | महत्वपूर्ण तथ्य |
| समझौते का नाम | भारत-इजरायल द्विपक्षीय निवेश समझौता (BIA) 2026 |
| हस्ताक्षर की तिथि | 8 सितंबर 2025 (नई दिल्ली) |
| लागू होने की तिथि | 4 जुलाई 2026 |
| नोडल विभाग/मंत्रालय | आर्थिक मामले विभाग (DEA), वित्त मंत्रालय, भारत सरकार |
| मुख्य उद्देश्य | निवेशकों को संरक्षण देना और द्विपक्षीय आर्थिक साझेदारी को गहरा करना |
विकसित उड़ान — क्षेत्रीय हवाई कनेक्टिविटी के नए युग की शुरुआत
- प्रारंभिक परीक्षा: संशोधित उड़ान योजना (Modified UDAN), जोधपुर हवाई अड्डा नया टर्मिनल, भारतीय विमानन प्राधिकरण (AAI), गृह (GRIHA) रेटिंग।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): बुनियादी ढांचा: विमानन (Aviation); समावेशी विकास और इससे उत्पन्न विषय; सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के जोधपुर में उड़ान योजना के अगले चरण—‘विकसित उड़ान’ का शुभारंभ किया। इसके साथ ही, जोधपुर हवाई अड्डे पर ₹480 करोड़ की लागत से निर्मित अत्याधुनिक न्यू टर्मिनल बिल्डिंग (NTB) का उद्घाटन भी किया गया, जो देश के टियर-2 और टियर-3 शहरों में विमानन बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
संशोधित उड़ान योजना (Modified UDAN Scheme): मुख्य बिंदु
केंद्र सरकार ने क्षेत्रीय हवाई संपर्क को अगले स्तर पर ले जाने के लिए उड़ान योजना के एक नए और विस्तारित संस्करण को मंजूरी दी है:
- ऐतिहासिक बजटीय आवंटन: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अगले 10 वर्षों (2026-2036) के लिए लगभग ₹29,000 करोड़ के वित्तीय परिव्यय के साथ ‘संशोधित उड़ान योजना’ को मंजूरी दी है, जो ‘विकसित भारत 2047’ के विजन का हिस्सा है।
- बजट का रणनीतिक वर्गीकरण:
- 100 नए एरोड्रोम का विकास: देश के अनारक्षित (Unserved) हवाई पट्टियों को आधुनिक क्षेत्रीय हवाई अड्डों, हेलीपोर्ट और वॉटर एयरोड्रोम में बदलने के लिए ₹12,159 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
- आधुनिक हेलीपैड: दूरदराज के क्षेत्रों को जोड़ने के लिए 200 आधुनिक हेलीपैड के विकास पर ₹3,661 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
- वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF): क्षेत्रीय मार्गों पर उड़ानों को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाए रखने और टिकटों की कीमतों को आम नागरिक के बजट में रखने के लिए ₹10,043 करोड़ की निरंतर वीजीएफ सहायता दी जाएगी।
- संचालन और रखरखाव (O&M): क्षेत्रीय हवाई अड्डों के रख-रखाव के लिए ₹2,577 करोड़ का प्रावधान है।
- स्वदेशी विमानों को बढ़ावा: यह योजना विशेष रूप से दूरदराज के क्षेत्रों में परिचालन के लिए भारत में निर्मित विमानों और हेलीकॉप्टरों—जैसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के ध्रुव हेलीकॉप्टर और डोरनियर प्लेटफॉर्म के उपयोग को प्रोत्साहित करती है।
जोधपुर हवाई अड्डे का नया टर्मिनल
जोधपुर को राजस्थान की “ब्लू सिटी” और थार मरुस्थल का प्रवेश द्वार कहा जाता है। वहां बढ़ते पर्यटन और व्यापार के दबाव को देखते हुए भारतीय विमानन प्राधिकरण (AAI) ने इस नए टर्मिनल का निर्माण किया है:
- क्षमता में भारी वृद्धि: पुराना टर्मिनल सालाना केवल 4 लाख यात्रियों की क्षमता के साथ संतृप्ति (Saturation) के स्तर पर पहुँच चुका था। नया टर्मिनल 20 लाख यात्रियों को सालाना और पीक ऑवर्स के दौरान 1,500 यात्रियों को संभालने में सक्षम है।
- सांस्कृतिक वास्तुकला: इसकी बाहरी बनावट में मारवाड़ की शाही विरासत, मेहराबों और झरोखों को शामिल किया गया है, जो ‘पधारो म्हारे देस’ की सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित करता है।
- पर्यावरणीय स्थिरता: यह टर्मिनल पर्यावरण-अनुकूल हरित भवन प्रथाओं और जल संरक्षण प्रणालियों से लैस है, जिसका लक्ष्य 5-स्टार गृह रेटिंग प्राप्त करना है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| योजना / घटक | त्वरित तथ्य |
| उड़ान (UDAN) योजना की शुरुआत | अक्टूबर 2016 में लॉन्च (अब तक 669 मार्ग और 95 हवाई अड्डे संचालित)। |
| संशोधित उड़ान की अवधि | वर्ष 2026 से अगले 10 वर्षों के लिए कुल ₹29,000 करोड़ का बजट। |
| स्वदेशी विमान उपयोग | HAL ध्रुव (एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर) और डोरनियर विमान। |
| GRIHA रेटिंग | Green Rating for Integrated Habitat Assessment (भारत में हरित भवनों के मूल्यांकन का राष्ट्रीय मानक)। |
विकसित भारत की ओर अग्रसर भारत — रक्षा मंत्री का संबोधन
- प्रारंभिक परीक्षा: मेक इन इंडिया, जैम ट्रिनिटी, डिफेंस एक्सपोर्ट्स (रक्षा निर्यात), जीएसटी, जन विश्वास सुधार।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): सरकारी नीतियों और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप; उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन; आंतरिक सुरक्षा; विकास और फैलते उग्रवाद के बीच संबंध (नक्सलवाद)।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में 4 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में एक मीडिया संगठन के कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत की पिछले 12 वर्षों (2014-2026) की विकास यात्रा का लेखा-जोखा प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि भारत ‘अभावों से आत्मनिर्भरता, आत्मनिर्भरता से आत्मविश्वास और अब आत्मविश्वास से एक विकसित भारत के निर्माण’ की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
भारत के बड़े बदलाव: मुख्य आर्थिक और ढांचागत बिंदु
पिछले दशक में भारत की विकास नीति “रिफॉर्म, परफॉर्म, ट्रांसफॉर्म” पर आधारित रही है, जिसने देश के वैश्विक कद को पूरी तरह बदल दिया है:
- रक्षा क्षेत्र में अभूतपूर्व उछाल (Defense Production & Exports):
- वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत का वार्षिक रक्षा उत्पादन ₹1.78 लाख करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुँच गया, जो वर्ष 2014-15 की तुलना में तीन गुना अधिक है।
- भारत का रक्षा निर्यात आज रिकॉर्ड ₹38,000 करोड़ से अधिक हो गया है, जो वित्तीय वर्ष 2013-14 (₹686 करोड़) की तुलना में लगभग 57 गुना की भारी वृद्धि को दर्शाता है।
- डिजिटल क्रांति और वित्तीय समावेशन (Digital Revolution):
- जैम ट्रिनिटी (JAM – Jan Dhan, Aadhaar, Mobile): इस त्रिगुट के माध्यम से प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के तहत लाभार्थियों के बैंक खातों में ₹51 लाख करोड़ सीधे भेजे गए, जिससे लगभग ₹4.3 लाख करोड़ की लीकेज (भ्रष्टाचार/बिचौलियों) को रोका गया।
- UPI लेन-देन: भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र की वैश्विक धाक जमी है। केवल अप्रैल महीने में ही 22.35 बिलियन (2235 करोड़) यूपीआई लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य ₹29 लाख करोड़ था।
- दूरसंचार: स्वदेशी 5G तकनीक के सफल रोलआउट के बाद अब देश 6G तकनीक के विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
- स्टार्ट-अप और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस (Start-up Ecosystem):
- भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्ट-अप इकोसिस्टम बन चुका है। पिछले 12 वर्षों में स्टार्ट-अप्स की संख्या 500 से बढ़कर 2 लाख से अधिक हो गई है, जबकि यूनिकॉर्न की संख्या 4 से बढ़कर 125 हो गई है।
- ‘जन विश्वास’ जैसे सुधारों ने देश में व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) को बेहतर बनाया है।
आंतरिक सुरक्षा और सांस्कृतिक पुनरुत्थान
- राष्ट्रीय सुरक्षा: जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 का उन्मूलन और नक्सलवाद को समाप्त करने के निरंतर प्रयास सरकार के मजबूत इरादों के उदाहरण हैं, जिससे देश की आंतरिक सुरक्षा सुदृढ़ हुई है।
- सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण: आर्थिक प्रगति के साथ-साथ सभ्यता और विरासत के संरक्षण को समान महत्व दिया जा रहा है। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर, महाकाल लोक, और मां कामाख्या दिव्य लोक परियोजना इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इसके साथ ही संसद में ‘सेंगोल’ की स्थापना और प्राचीन कलाकृतियों की वापसी से सांस्कृतिक पहचान को पुनर्जीवित किया गया है।
मीडिया की भूमिका और एआई
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बनाम मानवीय संवेदना: तकनीक और AI पत्रकारिता को तेज़ और अधिक सटीक बना सकते हैं, लेकिन वे मानवीय रचनात्मकता और सहानुभूति (Emotional Intelligence) का स्थान नहीं ले सकते। पत्रकारिता की विश्वसनीयता मानवीय दृष्टिकोण से ही बनी रहेगी।
- राष्ट्रीय सुरक्षा और मीडिया: राष्ट्रीय सुरक्षा, सशस्त्र बलों के मनोबल या शहीदों के सम्मान से जुड़े मुद्दों पर गलत सूचना (Misinformation) समाज को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। अतः मीडिया को हमेशा सटीकता, निष्पक्षता और वस्तुनिष्ठता का पालन करना चाहिए।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / आंकड़ा | महत्वपूर्ण तथ्य |
| रक्षा उत्पादन (FY 2025-26) | ₹1.78 लाख करोड़ (ऐतिहासिक स्तर)। |
| रक्षा निर्यात (2026) | ₹38,000 करोड़ से अधिक (2013-14 से 57 गुना अधिक)। |
| लीकेज बचत (JAM) | जैम ट्रिनिटी (Direct Benefit Transfer) के कारण ₹4.3 लाख करोड़ की बचत। |
| यूनिकॉर्न की संख्या | भारत में यूनिकॉर्न की संख्या बढ़कर 125 हुई (विश्व में तीसरा स्थान)। |
| सांस्कृतिक गलियारे | काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक, और माँ कामाख्या दिव्य लोक परियोजना। |