7 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत ग्रामीण और स्वदेशी शिल्पकारों को वैश्विक मंच प्रदान करने वाला वस्त्र मंत्रालय का ‘इंडियाहैंडमेड’ पोर्टल, दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण नियंत्रण के लिए गठित वैधानिक निकाय CAQM की हालिया दंडात्मक एवं नियामक कार्रवाइयाँ, देश के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम को मजबूती देने वाली NHLML की मल्टीमॉडल बुनियादी ढांचा परियोजनाएं, भारत-EFTA व्यापार समझौते (TEPA) के तहत भारतीय समुद्री खाद्य (Seafood) क्षेत्र के लिए खुले नए वैश्विक द्वार, सहकारिता मंत्रालय के 5 वर्ष पूरे होने पर लॉन्च की गई e-PACS, सहकार सहयोगी AI प्लेटफॉर्म व ‘भारत टैक्सी’ जैसी डिजिटल क्रांतियां, तथा जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (TRIs) को भविष्य के लिए तैयार करने हेतु अपनाई जाने वाली ‘भुवनेश्वर घोषणा’ और ‘TribeX’ प्लेटफॉर्म जैसे अति-महत्वपूर्ण अध्यायों को समाहित किया गया है।
इंडियाहैंडमेड पोर्टल — हस्तशिल्प विरासत का डिजिटल सेतु
- प्रारंभिक परीक्षा: इंडियाहैंडमेड पोर्टल, डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन, वस्त्र मंत्रालय, जीआई टैग, ओडोप योजना।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): समाज के कमजोर/वंचित वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं और उनका प्रदर्शन; डिजिटल इंडिया पहल; समावेशी विकास, रोजगार सृजन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का सुदृढ़ीकरण।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हैंडलूम और हस्तशिल्प क्षेत्र को सीधे डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने के लिए वस्त्र मंत्रालय (Ministry of Textiles) के तहत डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन द्वारा विकसित ‘इंडियाहैंडमेड’ पोर्टल ग्रामीण कारीगरों के आर्थिक सशक्तिकरण का एक बड़ा माध्यम बनकर उभरा है. वर्ष 2023 में लॉन्च किया गया यह समर्पित ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म बिचौलियों को समाप्त कर बुनकरों और शिल्पकारों को सीधे वैश्विक खरीदारों से जोड़ रहा है।
हस्तशिल्प क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और महिला भागीदारी
भारत का हस्तशिल्प और हथकरघा क्षेत्र देश की सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ ग्रामीण रोजगार का एक बड़ा आधार है:
- विशाल कार्यबल: भारत में वर्तमान में लगभग 64.66 लाख हथकरघा बुनकर और हस्तशिल्प कारीगर हैं।
- महिला सशक्तिकरण का नेतृत्व: इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी सर्वाधिक है. अगस्त 2025 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, कुल हथकरघा बुनकरों में 71% महिलाएं हैं और कुल हस्तशिल्प कारीगरों में 64% महिलाएं शामिल हैं।

- लक्ष्य: आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत इस पोर्टल पर 60 लाख से अधिक कारीगरों को जोड़ने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है।
‘इंडियाहैंडमेड’ पोर्टल की अनूठी विशेषताएं और कार्यप्रणाली
- बिचौलियों की समाप्ति (Direct Buyer Access): कारीगर अपने उत्पादों को सीधे ग्राहकों को बेच सकते हैं, जिससे उन्हें अपने हुनर का उचित और पूरा पारिश्रमिक मिलता है।
- छोटे कारीगरों के लिए समावेशी नियम (GST छूट): जिन छोटे ग्रामीण कारीगरों के पास जीएसटी (GST) पंजीकरण नहीं है, वे भी इस पोर्टल पर ‘एनरोलमेंट आईडी’ के जरिए पंजीकरण कर सकते हैं. हालांकि, ऐसे लघु विक्रेताओं को केवल अपने गृह राज्य (Inter-state mandate) के भीतर ही उत्पाद बेचने की अनुमति होती है ताकि कर नियमों का अनुपालन सरल रहे।
- क्षेत्रीय पहचान को बढ़ावा (GI और ODOP): पोर्टल पर विशेष रूप से भौगोलिक संकेतक (GI Tagged) और एक जिला एक उत्पाद (ODOP) श्रेणियों के उत्पादों को प्रमुखता दी गई है:
- GI उत्पाद: इसमें ऐपन आर्ट, शुद्ध पश्मीना शॉल, डोकरा शिल्प और मुंडू उत्पाद शामिल हैं।
- ODOP उत्पाद: इसके तहत तंगैल साड़ी, बनारसी सिल्क, इकत, टसर और चंदेरी सिल्क साड़ियों के साथ टेराकोटा उत्पादों को वैश्विक विजिबिलिटी मिल रही है।
- उपभोक्ता भरोसा: ग्राहकों के लिए सुरक्षित भुगतान गेटवे, मुफ्त शिपिंग और परचेज प्रोटेक्शन जैसी सुविधाएं दी गई हैं ताकि लोग बिना किसी संकोच के पारंपरिक उत्पाद खरीद सकें।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / टर्म | महत्वपूर्ण तथ्य |
| इंडियाहैंडमेड पोर्टल | वर्ष 2023 में लॉन्च किया गया एक नो-कमीशन डिजिटल मार्केटप्लेस। |
| नोडल मंत्रालय | वस्त्र मंत्रालय (तकनीकी विकास: डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन)। |
| वर्कफोर्स डेटा | देश के कुल हथकरघा बुनकरों में 71% महिला कार्यबल शामिल है। |
| GST छूट विकल्प | बिना जीएसटी वाले छोटे शिल्पी Enrolment ID से सिर्फ अपने राज्य में व्यापार कर सकते हैं। |
CAQM द्वारा एनसीआर में वायु प्रदूषण नियंत्रण नियमों की समीक्षा
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आस-पास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM), एनफोर्समेंट टास्क फोर्स (ETF), फ्लाइंग स्क्वॉड।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन; वैधानिक, नियामक और विभिन्न अर्ध-न्यायिक निकाय।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में 6 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आस-पास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) की प्रवर्तन कार्यबल (Enforcement Task Force – ETF) की 134वीं बैठक आयोजित की गई. इस बैठक में दिल्ली-एनसीआर (NCR) में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में की गई कानूनी कार्रवाइयों, औचक निरीक्षणों और नियमों के अनुपालन की स्थिति की गहन समीक्षा की गई।
कार्रवाई और निरीक्षण रिपोर्ट: मुख्य आंकड़े
- सघन निरीक्षण अभियान: 14 जून 2026 से 30 जून 2026 के बीच (मात्र 17 दिनों में) फ्लाइंग स्क्वॉड ने एनसीआर में कुल 173 औचक निरीक्षण किए।
- क्षेत्र-विशिष्ट निरीक्षण और उल्लंघन (Sector-specific Data):
- निर्माण और विध्वंस (C&D) स्थल: 15 निरीक्षण किए गए, जिनमें से 7 जगहों पर नियमों का उल्लंघन पाया गया।
- औद्योगिक क्षेत्र (Industrial Sector): सबसे अधिक 91 निरीक्षण किए गए, जहाँ 31 उल्लंघन रिपोर्ट हुए।
- डीजल जेनरेटर (DG Sets): 67 निरीक्षण किए गए, जिनमें 24 स्थानों पर उल्लंघन मिला।
- कुल उल्लंघन: इन 173 निरीक्षणों में कुल 62 उल्लंघन के मामले सामने आए।
- दंडात्मक प्रस्ताव (Proposed Actions): नियमों को ताक पर रखने वाली इकाइयों के खिलाफ कड़े दंडात्मक कदम उठाए गए हैं:
- 4 इकाइयों/परियोजनाओं को पूरी तरह बंद (Closure) करने का प्रस्ताव है।
- 27 अवैध या नियमों के विरुद्ध चल रहे DG सेट्स को सील करने का प्रस्ताव किया गया है।
- 17 मामलों में पर्यावरणीय मुआवजा (Environmental Compensation – EC) यानी आर्थिक जुर्माना लगाने की सिफारिश की गई है।
- 6 मामलों में नियमों के अनुपालन के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
संचयी (cumulative) प्रवर्तन स्थिति
6 जुलाई 2026 तक के संचयी आंकड़ों के अनुसार, CAQM के फ्लाइंग स्क्वॉड ने अब तक कुल 27,750 इकाइयों/परियोजनाओं का निरीक्षण किया है. इन निरीक्षणों के आधार पर:
- 1,802 क्लोजर डायरेक्शन (बंद करने के आदेश) जारी किए गए।
- अनुपालन और सुधार की पुष्टि के बाद 1,424 रिजम्पशन ऑर्डर (पुनः संचालन की अनुमति) दिए गए।
- अंतिम निर्णय के लिए 123 मामलों को संबंधित राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों (SPCBs) या दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) को स्थानांतरित किया गया है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| निकाय / घटक | महत्वपूर्ण तथ्य |
| CAQM | यह एक वैधानिक निकाय (Statutory Body) है, जिसे संसद के अधिनियम द्वारा दिल्ली-एनसीआर में वायु गुणवत्ता की निगरानी और सुधार के लिए गठित किया गया है। |
| ETF और फ्लाइंग स्क्वॉड | यह CAQM के तहत प्रवर्तन विंग है, जिसके पास प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों को बंद करने, सील करने और जुर्माना लगाने का अधिकार है। |
| प्रदूषण के तीन प्राथमिक स्रोत | औद्योगिक उत्सर्जन (Industrial Emissions), निर्माण गतिविधियां (C&D) और अवैध डीजल जनरेटर (DG Sets)। |
भारत में मल्टीमॉडल लॉजिस्टिक्स और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की समीक्षा
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय राजमार्ग रसद प्रबंधन लिमिटेड (NHLML), मल्टी मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क (MMLP), रोपवे परियोजनाएं, इंटरमॉडल स्टेशन।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): बुनियादी ढांचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानन, रेलवे आदि; अर्थव्यवस्था तथा योजना, संसाधनों को जुटाने, प्रगति, विकास और रोजगार से संबंधित विषय; लॉजिस्टिक्स दक्षता और परिवहन लागत।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में 6 जुलाई 2026 को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय राजमार्ग रसद प्रबंधन लिमिटेड (NHLML) की एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की. इस बैठक में देश भर में विकसित किए जा रहे मल्टी मोडल लॉजिस्टिक्स पार्कों (MMLPs), रोपवे (Ropeways), इंटरमॉडल स्टेशनों और राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे वे-साइड एमेनिटीज की प्रगति का गहन मूल्यांकन किया गया।
परियोजनाओं की रणनीतिक प्रासंगिकता और मुख्य उद्देश्य
- भविष्य के लिए तैयार परिवहन तंत्र: इन परियोजनाओं का प्राथमिक उद्देश्य देश के भीतर एक एकीकृत और भविष्य के लिए पूरी तरह तैयार परिवहन पारिस्थितिकी तंत्र (Integrated Transport Ecosystem) का निर्माण करना है।
- लॉजिस्टिक्स प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार: मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी को मजबूत करके यह बुनियादी ढांचा भारत की वैश्विक लॉजिस्टिक्स प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देगा और देश में संतुलित क्षेत्रीय विकास के नए रास्ते खोलेगा।
- लागत और समय की बचत: परियोजनाओं के समय पर पूरा होने से परिवहन की कुल लागत (Transportation Costs) में भारी कमी आएगी और रसद दक्षता (Logistics Efficiency) में सुधार होगा, जो ‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्यों के अनुकूल है।
- बाधाओं को दूर करने के निर्देश: समीक्षा के दौरान परियोजना कार्यान्वयन को प्रभावित करने वाली प्रमुख चुनौतियों की पहचान की गई और सभी हितधारकों को प्राथमिकता के आधार पर बाधाओं को दूर करने का आदेश दिया गया।
NHLML के तहत विकसित हो रहे प्रमुख घटक
- मल्टी मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क (MMLPs): माल ढुलाई के विभिन्न माध्यमों (सड़क, रेल, वायु) को एक स्थान पर लाकर लॉजिस्टिक्स हब तैयार करना।
- रोपवे: पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों के साथ-साथ घने शहरी इलाकों में कनेक्टिविटी और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय रोपवे कार्यक्रम (पर्वतमाला परियोजना)।
- इंटरमॉडल स्टेशन: यात्रियों के सुगम आवागमन के लिए बस, मेट्रो और रेलवे जैसी परिवहन प्रणालियों को एक ही केंद्र पर एकीकृत करना।
- वे-साइड एमेनिटीज (WSA): राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे यात्रियों और वाहन चालकों के लिए ईंधन स्टेशन, फूड कोर्ट, विश्राम गृह और ट्रॉली पार्किंग जैसी विश्व स्तरीय जन-सुविधाएं विकसित करना।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| संगठन / परियोजना | महत्वपूर्ण तथ्य |
| NHLML | National Highways Logistics Management Limited — यह भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) की पूर्ण स्वामित्व वाली विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) कंपनी है। |
| नोडल मंत्रालय | सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार। |
| MMLP का उद्देश्य | माल ढुलाई की लागत को कम करना, जो वर्तमान में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के अनुपात में वैश्विक मानकों से अधिक है। |
| मुख्य फोकस क्षेत्र | MMLPs, रोपवे, इंटरमॉडल स्टेशन और वे-साइड एमेनिटीज। |
भारत-EFTA TEPA के तहत समुद्री खाद्य क्षेत्र के लिए अवसर
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता (TEPA), डिपार्टमेंट ऑफ कॉमर्स, इन्वेस्ट इंडिया, महानिदेशालय विदेश व्यापार (DGFT)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से जुड़े या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले समझौते; भारतीय अर्थव्यवस्था तथा योजना, आर्थिक विकास, बुनियादी ढांचा और निर्यात संवर्धन; ब्लू इकोनॉमी।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में वाणिज्य विभाग (Department of Commerce), भारत सरकार द्वारा 3 जुलाई 2026 को चेन्नई ट्रेड सेंटर में “भारत-यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (EFTA) व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौते (TEPA) के तहत समुद्री खाद्य क्षेत्र के लिए अवसर” विषय पर एक ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन किया गया. इस उच्च स्तरीय विचार-विमर्श सत्र का आयोजन ‘सीफूड एक्सपो भारत 2026’ के इतर किया गया था।
भारत-ईएफटीए टेपा: प्रमुख आर्थिक और रणनीतिक बिंदु
- पहला यूरोपीय व्यापार समझौता: TEPA यूरोपीय आर्थिक गुट के साथ भारत का पहला परिचालन व्यापार समझौता है. यह आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड जैसे चार EFTA सदस्य देशों के साथ हस्ताक्षरित है।
- विशाल बाजार और निवेश का लक्ष्य:
- इन चार EFTA देशों की संयुक्त जीडीपी (GDP) लगभग 1.79 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर है।
- इस समझौते का मुख्य लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में भारत में 100 बिलियन डॉलर का निवेश आकर्षित करना और 10 लाख प्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों का सृजन करना है।
- इसके माध्यम से तटीय राज्यों (जैसे तमिलनाडु) के मछुआरों और समुद्री खाद्य हितधारकों के लिए निर्यात के अवसर बड़े पैमाने पर बढ़ेंगे।
- तकनीकी सहयोग: यह समझौता भारत को EFTA देशों की विशिष्ट प्रौद्योगिकी फर्मों के साथ संयुक्त उद्यम (Joint Ventures), सहयोग और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) के मार्ग खोलता है।
समुद्री खाद्य निर्यातकों के लिए विशिष्ट टैरिफ रियायतें
TEPA के तहत भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाजारों में अपनी पैठ मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण सीमा शुल्क लाभ दिए गए हैं:
- आइसलैंड: इसने मछली के चारे (Fish Feed) पर लगने वाले 55 प्रतिशत के भारी आयात शुल्क को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है।
- नॉर्वे: इसने मछली और झींगे के चारे (Shrimp Feed) पर लगने वाले 13.16 प्रतिशत के आयात शुल्क को घटाकर शून्य कर दिया है।
- स्विट्जरलैंड: इसने मछली के तेल और वसा (लीवर ऑयल को छोड़कर) पर लगने वाले 18.05 प्रतिशत के आयात शुल्क को घटाकर शून्य कर दिया है।
चिंतन शिविर के मुख्य एजेंडे
- सहभागी संगठन: इस बैठक में वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव मोहित यादव के साथ इन्वेस्ट इंडिया, DGFT क्षेत्रीय कार्यालय, निर्यात निरीक्षण परिषद (EIC) और भारतीय निर्यात संगठनों के महासंघ (FIEO) के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
- सुविधाएं और रणनीति: महानिदेशालय विदेश व्यापार (DGFT) ने ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए विभिन्न निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं की रूपरेखा प्रस्तुत की. वहीं, EIC और FIEO ने नियामक आवश्यकताओं और अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुपालन पर चर्चा की।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / संगठन | महत्वपूर्ण तथ्य |
| EFTA देश | आइसलैंड, लिकटेंस्टीन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड। |
| TEPA समझौता लक्ष्य | $100 बिलियन का निवेश और 10 लाख प्रत्यक्ष नौकरियों का सृजन। |
| शून्य आयात शुल्क लाभ | आइसलैंड और नॉर्वे द्वारा फिश/श्रिंप फीड पर तथा स्विट्जरलैंड द्वारा फिश ऑयल पर सीमा शुल्क शून्य। |
| नोडल हितधारक | वाणिज्य विभाग, इन्वेस्ट इंडिया, DGFT, EIC, और FIEO। |
सहकार से समृद्धि — भारत के सहकारी आंदोलन के सुदृढ़ीकरण के 5 वर्ष
- प्रारंभिक परीक्षा: सहकारिता मंत्रालय, प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (PACS), ई-पैक, राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL), भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL), ‘भारत टैक्सी’ (Bharat Taxi)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): वैधानिक, नियामक और विभिन्न अर्ध-न्यायिक निकाय; समावेशी विकास और इससे उत्पन्न विषय; ग्रामीण अर्थव्यवस्था, कृषि अवसंरचना और किसान-उत्पादक संगठन (FPOs)।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में 6 जुलाई 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में सहकारिता मंत्रालय (Ministry of Cooperation) का पांचवां स्थापना दिवस मनाया गया. 6 जुलाई 2021 को स्थापित इस मंत्रालय ने ‘सहकार से समृद्धि’ के विजन के साथ पिछले 5 वर्षों में 152 से अधिक ऐतिहासिक और नीतिगत सुधारों को लागू कर भारतीय सहकारी पारिस्थितिकी तंत्र का पूरी तरह से कायाकल्प कर दिया है।
स्थापना दिवस की मुख्य डिजिटल और अवसंरचनात्मक पहलें
मंत्रालय के 5वें स्थापना दिवस के अवसर पर ग्रामीण और बैंकिंग सहकारी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए:
- 50,000 e-PACS का शुभारंभ: देश की 50,000 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) को डिजिटल रूप से उन्नत करते हुए ‘e-PACS’ में परिवर्तित किया गया है।
- अनाज भंडारण गोदाम: सहकारी भंडारण बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए 47 नए अनाज भंडारण गोदामों की आधारशिला रखी गई।
- मिल्क सप्लाई रिव्यू डैशबोर्ड पोर्टल: राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के लिए दूध की खरीद और वितरण को सुव्यवस्थित करने हेतु एक लाइव डैशबोर्ड लॉन्च किया गया।

- NUCFDC की दो फ्लैगशिप पहलें: राष्ट्रीय शहरी सहकारी वित्त और विकास निगम ने शहरी सहकारी बैंकों के लिए दो महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म लॉन्च किए:
- सहकार CBS: शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) के लिए एक केंद्रीकृत कोर बैंकिंग सॉल्यूशन।
- सहकार सहयोगी: ग्राहकों की बैंकिंग सेवाओं और परिचालन को आसान बनाने के लिए एक कन्वर्सेशनल AI-पावर्ड (कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित) प्लेटफॉर्म।
ढांचागत सुधार और प्रगति (Scale & Structural Reforms)
1. PACS का बहु-सेवा केंद्रों (Multi-Service Centres) में रूपांतरण
पैक्स (PACS) अब केवल ऋण देने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण विकास के मुख्य केंद्र बन चुके हैं:
- व्यापार विविधीकरण: मॉडल उप-नियमों (Model bye-laws) के कारण 32 राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में PACS अब 25 से अधिक व्यावसायिक गतिविधियाँ (रिटेल, स्वास्थ्य सेवा, ईंधन वितरण आदि) संचालित कर रहे हैं।
- पीएम किसान समृद्धि केंद्र: 39,177 PACS इन केंद्रों के रूप में सक्रिय हैं।
- कॉमन सर्विस सेंटर (CSC): 54,117 PACS अब साझा सेवा केंद्रों के रूप में डिजिटल सेवाएं दे रहे हैं।
- जन औषधि केंद्र: 4,248 PACS को इसके लिए मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें से 843 कार्य करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
2. PACS का डिजिटल कायाकल्प
- बजटीय आवंटन में वृद्धि: इसके डिजिटलीकरण के लिए वित्तीय परिव्यय को बढ़ाकर ₹2,925.39 करोड़ कर दिया गया है।
- समय-सीमा और ERP सॉफ्टवेयर: 63,000 PACS के कम्प्यूटरीकरण का लक्ष्य 31 मार्च 2027 तक रखा गया है, जिसमें से 63,428 PACS वर्तमान में 14 भाषाओं में उपलब्ध ERP सॉफ्टवेयर का उपयोग कर रहे हैं।
- पारदर्शिता: 42,700 से अधिक PACS में ऑनलाइन ऑडिट का काम सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है।
3. ग्रामीण अवसंरचना, FPOs और कर राहत
- विश्व की सबसे बड़ी विकेंद्रीकृत भंडारण योजना: सहकारी क्षेत्र के तहत अब तक 145 PACS में गोदाम बनाए जा चुके हैं, जिससे 68,702 मीट्रिक टन (MT) से अधिक की भंडारण क्षमता विकसित हुई है।
- FPO एकीकरण: सहकारी क्षेत्र में 1,863 किसान उत्पादक संगठन (FPOs) बनाए गए हैं, जिनमें से 1,117 अकेले PACS के माध्यम से गठित हैं।
- राजकोषीय प्रोत्साहन व टैक्स राहत: सहकारी समितियों के लिए अधिभार (Surcharge) को 12% से घटाकर 7% (₹1-10 करोड़ की आय पर) और न्यूनतम वैकल्पिक कर (MAT) को 18.5% से घटाकर 15% किया गया है. इसके अलावा, टीडीएस (TDS) मुक्त नकद निकासी की सीमा को बढ़ाकर ₹3 करोड़ कर दिया गया है।
- श्वेत क्रांति 2.0 (White Revolution 2.0): इसका उद्देश्य वर्ष 2028-29 तक सहकारी क्षेत्र द्वारा दूध की खरीद में 50% की वृद्धि करना है, जिसमें महिला-नेतृत्व वाली डेयरी समितियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
नई राष्ट्रीय सहकारी संस्थाएं और नवाचार
| राष्ट्रीय सहकारी संस्थान | स्थापना का मुख्य उद्देश्य एवं वर्तमान प्रगति (जून 2026 तक) |
| राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड (NCEL) | सहकारी अधिशेष उत्पादों के निर्यात के लिए अम्ब्रेला संगठन. इसने 38 देशों को ₹6,295 करोड़ मूल्य का 15.4 लाख मीट्रिक टन (LMT) निर्यात दर्ज किया है। |
| राष्ट्रीय सहकारी ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL) | जैविक उत्पादों के एकत्रीकरण, प्रमाणीकरण, ब्रांडिंग और विपणन के लिए जिम्मेदार. इसमें 14,286 सदस्य सहकारी समितियां शामिल हैं। |
| भारतीय बीज सहकारी समिति लिमिटेड (BBSSL) | “भारत बीज” ब्रांड नाम के तहत उन्नत बीजों का उत्पादन और वितरण. इसके साथ 38,665 सदस्य सहकारी समितियां जुड़ी हैं। |
| त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय (TSU) | सहकारिता क्षेत्र में अनुसंधान, शिक्षा और कौशल विकास के लिए स्थापित भारत का पहला सहकारी विश्वविद्यालय। |
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / आंकड़ा | तथ्य |
| सहकारिता मंत्रालय की स्थापना | 6 जुलाई 2021 (मंत्रालय के 5 वर्ष पूरे)। |
| Sahakar Sahyogi | शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) के लिए लॉन्च किया गया AI-पावर्ड कन्वर्सेशनल प्लेटफॉर्म। |
| White Revolution 2.0 | लक्ष्य: वर्ष 2028-29 तक दूध खरीद में 50% की वृद्धि करना। |
| “भारत बीज” (Bharat Seed) | BBSSL द्वारा सहकारी नेटवर्क के माध्यम से वितरित किए जाने वाले गुणवत्तापूर्ण बीजों का ब्रांड नाम। |
| भारत का पहला सहकारी विश्वविद्यालय | त्रिभुवन सहकारी विश्वविद्यालय (TSU)। |
जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (TRIs) के सुदृढ़ीकरण पर राष्ट्रीय कार्यशाला
- प्रारंभिक परीक्षा: जनजातीय अनुसंधान संस्थान (TRIs), ट्राइबएक्स डिजिटल प्लेटफॉर्म, भुवनेश्वर घोषणा।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): कार्यपालिका और न्यायपालिका की संरचना, संगठन और कार्यप्रणाली; केंद्र और राज्यों द्वारा जनसंख्या के कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं और इन योजनाओं का प्रदर्शन।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
हाल ही में 6 जुलाई 2026 को पत्र सूचना कार्यालय (PIB) द्वारा जारी सूचना के अनुसार, जनजातीय कार्य मंत्रालय (Ministry of Tribal Affairs) द्वारा 7-8 जुलाई 2026 को भुवनेश्वर, ओडिशा में जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (TRIs) के सुदृढ़ीकरण पर एक दो-दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है. इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य देश भर के TRIs की कार्यप्रणाली की समीक्षा करना और उन्हें ज्ञान संस्थानों, सांस्कृतिक संसाधन केंद्रों तथा नीतिगत सहायता केंद्रों के रूप में विकसित करने के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार करना है।
कार्यशाला के मुख्य आकर्षण और डिजिटल पहलें
- ट्राइबएक्स डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म का शुभारंभ: इस कार्यशाला का सबसे प्रमुख आकर्षण ‘TribeX’ प्लेटफॉर्म का लॉन्च है, जो जनजातीय कला, संस्कृति, भाषाओं, पारंपरिक ज्ञान और कौशल विकास को समर्पित अपनी तरह का पहला डिजिटल लर्निंग इकोसिस्टम है. इसका उद्देश्य डिजिटल रिपॉजिटरी और तकनीक के माध्यम से भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत का दस्तावेजीकरण और प्रसार करना है, जिससे अनुसंधान और टिकाऊ आजीविका के नए अवसर पैदा होंगे।
- एमओयू पर हस्ताक्षर: जनजातीय कार्य मंत्रालय और सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के बीच जनजातीय संस्कृति और ज्ञान प्रणालियों के संरक्षण के लिए एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
- भुवनेश्वर घोषणा: कार्यशाला के समापन पर इस घोषणापत्र को अपनाया जाएगा, जो संस्थागत सुधारों, अनुसंधान उत्कृष्टता, प्रौद्योगिकी एकीकरण और क्षमता निर्माण के माध्यम से TRIs को भविष्य के लिए तैयार (Future-ready) बनाने की एक साझा दृष्टि को रेखांकित करेगा।
संस्थागत सुदृढ़ीकरण और तकनीकी एकीकरण
जनजातीय अनुसंधान संस्थान (TRIs) राज्य स्तर पर जनजातीय मामलों पर मुख्य अनुसंधान और नीति-निर्माण सहायता संस्थान के रूप में कार्य करते हैं. इस कार्यशाला के तहत दो दिनों में निम्नलिखित चार मुख्य विषयगत ब्रेकआउट वर्किंग समूहों (Thematic Groups) पर चर्चा की जाएगी:
- ज्ञान और सांस्कृतिक संसाधन केंद्रों के रूप में TRIs का विकास।
- जनजातीय विकास के लिए अनुसंधान, दस्तावेजीकरण और साक्ष्य निर्माण।
- प्रौद्योगिकी एकीकरण: जनजातीय शासन और अनुसंधान को मजबूत करने के लिए जीआईएस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को जोड़ना।
- संस्थागत सुदृढ़ीकरण, मानव संसाधन, शासन और रणनीतिक भागीदारी।
उभरती प्रौद्योगिकियों का उपयोग: कार्यशाला के दूसरे दिन CDAC, वाधवानी एआई, आईआईटी दिल्ली, आईआईटी भुवनेश्वर, डेलॉइट और सर्वम एआई के विशेषज्ञ जनजातीय अनुसंधान और सुशासन में उभरती डिजिटल तकनीकों की भूमिका पर अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / टर्म | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजक मंत्रालय | जनजातीय कार्य मंत्रालय, भारत सरकार। |
| TribeX | जनजातीय कला, संस्कृति, भाषा और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण के लिए समर्पित एक नया डिजिटल लर्निंग प्लेटफॉर्म। |
| आयोजन स्थल | भुवनेश्वर, ओडिशा (7-8 जुलाई 2026)। |
| भुवनेश्वर घोषणा | जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (TRIs) को साक्ष्य-आधारित नीति केंद्र बनाने से संबंधित साझा विजन। |