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26 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf

चर्चा में क्यों? (Why in News?)

इस खबर का मुख्य बैकग्राउंड (Background)

REPM योजना क्या है और यह क्यों जरूरी है? (The Core Scheme)

रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) क्या होते हैं? (Actionable Tech Knowledge)

प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts)


चर्चा में क्यों? (Why in News?)

परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) ने 26 जून 2026 को इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR), कल्पक्कम में फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (FBTR) से उत्पन्न परमाणु प्रक्रिया ऊष्मा (Nuclear Process Heat) का उपयोग करने वाले दुनिया के पहले कॉपर-क्लोरीन (Cu–Cl) थर्मोकेमिकल चक्र आधारित हाइड्रोजन उत्पादन सुविधा का उद्घाटन किया है। परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव और परमाणु ऊर्जा आयोग (AEC) के अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार मोहंती द्वारा आईजीसीएआर के निदेशक श्री श्रीकुमार जी. पिल्लई की उपस्थिति में लॉन्च किया गया यह तकनीकी प्रदर्शक (Technology Demonstrator) भारत को कार्बन-मुक्त स्वच्छ हाइड्रोजन उत्पादन के वैश्विक मंच पर सबसे आगे खड़ा करता है।

परमाणु-सहायता प्राप्त हाइड्रोजन और भारत की वैज्ञानिक सफलता

1. कॉपर-क्लोरीन (Cu–Cl) थर्मोकेमिकल चक्र: क्यों है यह खास?

विश्व भर में स्वच्छ ऊर्जा के रूप में हाइड्रोजन उत्पादन की विभिन्न तकनीकों पर शोध चल रहा है, लेकिन भारत द्वारा अपनाई गई यह प्रणाली तकनीकी रूप से सबसे उन्नत मानी जा रही है:

  • उच्च तापीय दक्षता (Higher Thermodynamic Efficiency): अन्य थर्मोकेमिकल चक्रों की तुलना में कॉपर-क्लोरीन चक्र अपेक्षाकृत कम परिचालन तापमान (Lower Operating Temperatures) पर काम करता है, जिससे रिएक्टर की सुरक्षा और दक्षता दोनों बढ़ जाती हैं।
  • शून्य कार्बन उत्सर्जन: यह प्रक्रिया पूरी तरह से परमाणु रिएक्टर की थर्मल ऊर्जा (ऊष्मा) का उपयोग करती है, जिसके कारण पारंपरिक जीवाश्म ईंधन आधारित हाइड्रोजन उत्पादन विधियों की तरह ग्रीनहाउस गैसों का कोई उत्सर्जन नहीं होता है।

2. स्वदेशी अनुसंधान और संस्थागत अभिसरण (Institutional Synergy)

यह ऐतिहासिक उपलब्धि देश के दो सबसे बड़े परमाणु अनुसंधान संस्थानों के चार दशकों के तकनीकी कौशल और संयुक्त प्रयासों का परिणाम है:

  • भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), मुंबई: इस संस्थान ने कॉपर-क्लोरीन थर्मोकेमिकल हाइड्रोजन उत्पादन की मुख्य तकनीक को पूरी तरह से स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया है।
  • इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR), कल्पक्कम: इस केंद्र ने अपने फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (FBTR) की अनूठी क्षमताओं का उपयोग करके इस उन्नत परमाणु ऊष्मा को हाइड्रोजन उत्पादन प्रणाली के साथ सफलतापूर्वक एकीकृत किया है।

3. भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम को गति

  • बिजली से आगे का विज़न: यह तकनीकी सफलता भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम (Three-Stage Nuclear Programme) के विस्तार को दर्शाती है, जहाँ परमाणु ऊर्जा का उपयोग अब केवल ग्रिड बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन के लिए स्वच्छ हाइड्रोजन का मुख्य स्रोत बनेगा।
  • PFBR के लिए मजबूत आधार: एफबीटीआर (FBTR) के इस सफल संचालन से प्राप्त व्यावहारिक अनुभव भारत के दूसरे चरण के प्रमुख मील के पत्थर, यानी 500 मेगावाट के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) के वाणिज्यिक और गैर-विद्युत अनुप्रयोगों के विकास को अत्यधिक सुदृढ़ करेगा।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य

परमाणु और हाइड्रोजन अवयव मैट्रिक्स

  • दुनिया का पहला प्लांट: परमाणु ऊष्मा (Nuclear Heat) का उपयोग करने वाला विश्व का पहला कॉपर-क्लोरीन (Cu–Cl) थर्मोकेमिकल हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र।
  • संयंत्र का स्थान: इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR), कल्पक्कम, तमिलनाडु।
  • रिएक्टर का प्रकार: फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (FBTR), जो भारत का एकमात्र परिचालन में रहने वाला फास्ट रिएक्टर अनुसंधान केंद्र है।
  • तकनीकी डेवलपर: भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), मुंबई (स्वदेशी विकास)।
  • आईजीसीएआर की स्थापना: वर्ष 1971 में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए की गई थी।

चर्चा में क्यों? (Why in News?)

मुख्य बिंदु: पुस्तक और उसके लेखक

उपराष्ट्रपति के संबोधन के मुख्य विचार (Mains Perspective)


Geographical & Strategic Perspective

प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts)

चर्चा में क्यों? (Why in News?)

‘नेत्र’ (Netra) प्रणाली क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

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