26 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के इस व्यापक सारांश में हम उत्तर बंगाल की समृद्ध भवाईया लोक संगीत परंपरा और कोच राजबंशी समुदाय के इतिहास पर चर्चा करेंगे, जो आपके मुख्य परीक्षा के कला एवं संस्कृति खंड के लिए बेहद प्रासंगिक है। इसके साथ ही, विज्ञान और प्रौद्योगिकी तथा सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) योजना का बजट विस्तार, भारतीय वायुसेना को स्वदेशी ‘नेत्र’ (Netra) AEW&C प्रणाली की अंतिम परिचालन मंजूरी (FOC), सामाजिक न्याय मंत्रालय का वृद्धजनों के लिए विशेष ‘शतायु’ (SHATAYU) डैशबोर्ड, वेनेजुएला में आया भीषण भूकंप और आपदा के समय अरुणाचल प्रदेश में चालू की गई इंट्रा-सर्किल रोमिंग (ICR) तकनीक जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों का गहन विश्लेषण शामिल है।
सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट योजना (REPM Scheme)
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): रेयर अर्थ एलिमेंट्स (दुर्लभ मृदा तत्व), साइंस एंड टेक, और सरकारी योजनाएं।
- मुख्य परीक्षा (Mains – GS Paper 3): बुनियादी ढांचा (Infrastructure), ऊर्जा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science & Technology), और स्वदेशीकरण (Indigenization of Technology)।
चर्चा में क्यों? (Why in News?)
भारी उद्योग मंत्रालय (Ministry of Heavy Industries – MHI) ने REPM योजना के तहत जारी वैश्विक निविदा (Global Tender) की समय-सीमा को एक महीने के लिए बढ़ा दिया है। अब बोली जमा करने की अंतिम तिथि 29 जून 2026 से बढ़ाकर 29 जुलाई 2026 कर दी गई है। इसका मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक वैश्विक कंपनियों को इस बोली प्रक्रिया में भाग लेने का अवसर देना है।
इस खबर का मुख्य बैकग्राउंड (Background)
- वैश्विक निविदा की शुरुआत: मंत्रालय ने भारत में एकीकृत रेयर अर्थ मैग्नेट निर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए 20 मार्च 2026 को निर्माताओं से बोलियां आमंत्रित की थीं।
- कैबिनेट की मंजूरी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 26 नवंबर 2025 को इस योजना को मंजूरी दी थी।
- वित्तीय परिव्यय (Budget): इस महत्वाकांक्षी योजना के लिए सरकार ने 7,280 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है।
REPM योजना क्या है और यह क्यों जरूरी है? (The Core Scheme)
यह भारत में अपनी तरह की पहली अनूठी पहल है। इसका सीधा लक्ष्य भारत को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।
- उत्पादन का लक्ष्य: भारत में सालाना 6,000 मीट्रिक टन (MTPA) क्षमता वाली एकीकृत रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट निर्माण सुविधाएं स्थापित करना।
- पूरी वैल्यू चेन का निर्माण: इसका उद्देश्य NdPr ऑक्साइड (नियोडिमियम-प्रासीओडिमियम) से लेकर अंतिम उत्पाद (तैयार चुंबक) तक की पूरी मूल्य श्रृंखला को भारत में ही विकसित करना है।
- रणनीतिक लाभ: वर्तमान में भारत इन शक्तिशाली चुंबकों के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर है। यह योजना इस आयात निर्भरता को भारी मात्रा में कम करेगी।
रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) क्या होते हैं? (Actionable Tech Knowledge)
यह दुनिया के सबसे शक्तिशाली चुंबकों में से होते हैं। इनका उपयोग निम्नलिखित आधुनिक और रणनीतिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर किया जाता है:
- इलेक्ट्रिक वाहन (EVs): ईवी मोटर्स की कार्यक्षमता बढ़ाने में।
- अक्षय ऊर्जा: पवन टर्बाइन (Wind Turbines) के निर्माण में।
- इलेक्ट्रॉनिक्स: हाई-एंड गैजेट्स और कंप्यूटिंग उपकरणों में।
- रक्षा और एयरोस्पेस: मिसाइल सिस्टम, रडार और अंतरिक्ष अनुप्रयोगों में।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts)
| घटक / टर्म | परीक्षा उपयोगी त्वरित तथ्य (Exam Facts) |
| संबंधित मंत्रालय | भारी उद्योग मंत्रालय (Ministry of Heavy Industries – MHI) |
| कुल बजट (Outlay) | ₹7,280 करोड़ |
| उत्पादन क्षमता का लक्ष्य | 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) |
| प्रमुख कच्चा माल | NdPr ऑक्साइड (Neodymium-Praseodymium Oxide) |
| मुख्य अनुप्रयोग (Uses) | इलेक्ट्रिक वाहन (EV), विंड टर्बाइन, डिफेंस सिस्टम, एयरोस्पेस |
| पोर्टल का नाम | सेंट्रल पब्लिक प्रोक्योरमेंट (CPP) पोर्टल (जहाँ संशोधन जारी हुआ है |
परमाणु ऊर्जा से हाइड्रोजन उत्पादन: भारत ने रचा इतिहास, कल्पक्कम में दुनिया के पहले कॉपर-क्लोरीन थर्मोकेमिकल प्लांट का उद्घाटन
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): कॉपर-क्लोरीन (Cu–Cl) थर्मोकेमिकल चक्र, फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (FBTR), आईजीसीएआर (IGCAR), बार्क (BARC), भारत का तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम (Three-Stage Nuclear Programme), स्वच्छ हाइड्रोजन।
- मुख्य परीक्षा (Mains – GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science & Tech) – स्वदेशी तकनीक का विकास; ऊर्जा क्षेत्र – स्वच्छ और हरित ऊर्जा (Clean Energy Transition), परमाणु ऊर्जा के गैर-विद्युत अनुप्रयोग, डीकार्बोनाइजेशन लक्ष्य और ‘विकसित भारत @2047’।
चर्चा में क्यों? (Why in News?)
परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) ने 26 जून 2026 को इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR), कल्पक्कम में फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (FBTR) से उत्पन्न परमाणु प्रक्रिया ऊष्मा (Nuclear Process Heat) का उपयोग करने वाले दुनिया के पहले कॉपर-क्लोरीन (Cu–Cl) थर्मोकेमिकल चक्र आधारित हाइड्रोजन उत्पादन सुविधा का उद्घाटन किया है। परमाणु ऊर्जा विभाग के सचिव और परमाणु ऊर्जा आयोग (AEC) के अध्यक्ष डॉ. अजीत कुमार मोहंती द्वारा आईजीसीएआर के निदेशक श्री श्रीकुमार जी. पिल्लई की उपस्थिति में लॉन्च किया गया यह तकनीकी प्रदर्शक (Technology Demonstrator) भारत को कार्बन-मुक्त स्वच्छ हाइड्रोजन उत्पादन के वैश्विक मंच पर सबसे आगे खड़ा करता है।
परमाणु-सहायता प्राप्त हाइड्रोजन और भारत की वैज्ञानिक सफलता
1. कॉपर-क्लोरीन (Cu–Cl) थर्मोकेमिकल चक्र: क्यों है यह खास?
विश्व भर में स्वच्छ ऊर्जा के रूप में हाइड्रोजन उत्पादन की विभिन्न तकनीकों पर शोध चल रहा है, लेकिन भारत द्वारा अपनाई गई यह प्रणाली तकनीकी रूप से सबसे उन्नत मानी जा रही है:
- उच्च तापीय दक्षता (Higher Thermodynamic Efficiency): अन्य थर्मोकेमिकल चक्रों की तुलना में कॉपर-क्लोरीन चक्र अपेक्षाकृत कम परिचालन तापमान (Lower Operating Temperatures) पर काम करता है, जिससे रिएक्टर की सुरक्षा और दक्षता दोनों बढ़ जाती हैं।
- शून्य कार्बन उत्सर्जन: यह प्रक्रिया पूरी तरह से परमाणु रिएक्टर की थर्मल ऊर्जा (ऊष्मा) का उपयोग करती है, जिसके कारण पारंपरिक जीवाश्म ईंधन आधारित हाइड्रोजन उत्पादन विधियों की तरह ग्रीनहाउस गैसों का कोई उत्सर्जन नहीं होता है।
2. स्वदेशी अनुसंधान और संस्थागत अभिसरण (Institutional Synergy)
यह ऐतिहासिक उपलब्धि देश के दो सबसे बड़े परमाणु अनुसंधान संस्थानों के चार दशकों के तकनीकी कौशल और संयुक्त प्रयासों का परिणाम है:
- भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), मुंबई: इस संस्थान ने कॉपर-क्लोरीन थर्मोकेमिकल हाइड्रोजन उत्पादन की मुख्य तकनीक को पूरी तरह से स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया है।
- इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR), कल्पक्कम: इस केंद्र ने अपने फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (FBTR) की अनूठी क्षमताओं का उपयोग करके इस उन्नत परमाणु ऊष्मा को हाइड्रोजन उत्पादन प्रणाली के साथ सफलतापूर्वक एकीकृत किया है।
3. भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम को गति
- बिजली से आगे का विज़न: यह तकनीकी सफलता भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम (Three-Stage Nuclear Programme) के विस्तार को दर्शाती है, जहाँ परमाणु ऊर्जा का उपयोग अब केवल ग्रिड बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन के लिए स्वच्छ हाइड्रोजन का मुख्य स्रोत बनेगा।
- PFBR के लिए मजबूत आधार: एफबीटीआर (FBTR) के इस सफल संचालन से प्राप्त व्यावहारिक अनुभव भारत के दूसरे चरण के प्रमुख मील के पत्थर, यानी 500 मेगावाट के प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) के वाणिज्यिक और गैर-विद्युत अनुप्रयोगों के विकास को अत्यधिक सुदृढ़ करेगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
परमाणु और हाइड्रोजन अवयव मैट्रिक्स
- दुनिया का पहला प्लांट: परमाणु ऊष्मा (Nuclear Heat) का उपयोग करने वाला विश्व का पहला कॉपर-क्लोरीन (Cu–Cl) थर्मोकेमिकल हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र।
- संयंत्र का स्थान: इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR), कल्पक्कम, तमिलनाडु।
- रिएक्टर का प्रकार: फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (FBTR), जो भारत का एकमात्र परिचालन में रहने वाला फास्ट रिएक्टर अनुसंधान केंद्र है।
- तकनीकी डेवलपर: भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), मुंबई (स्वदेशी विकास)।
- आईजीसीएआर की स्थापना: वर्ष 1971 में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए की गई थी।
भवाईया लोक परंपरा (Bhawaiya Folk Tradition)
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): भारत की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत, लोक संगीत, जनजातियाँ और महत्वपूर्ण पुस्तकें।
- मुख्य परीक्षा (Mains – GS Paper 1): भारतीय संस्कृति – प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला रूपों, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू।
चर्चा में क्यों? (Why in News?)
हाल ही में भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने नई दिल्ली के उपराष्ट्रपति भवन में एक नई पुस्तक का विमोचन किया है। इस पुस्तक का नाम “संस्कृतिर रत्न भंडार: भवाईयार इतिब्रित्तो” (Sanskritir Ratna Bhandar: Bhaowaiyar Itibritto) है। यह पुस्तक भवाईया लोक परंपरा के इतिहास और उसकी यात्रा को रेखांकित करती है।
मुख्य बिंदु: पुस्तक और उसके लेखक
- लेखक: यह पुस्तक लोकसभा सांसद डॉ. जयंत कुमार रॉय और सुश्री संगीता रॉय द्वारा संयुक्त रूप से लिखी गई है।
- प्रकाशक: इसका प्रकाशन ‘कथा-ओ-काहिनी’ (Katha-O-Kahini) द्वारा किया गया है।
- विषय: यह पुस्तक मुख्य रूप से कोच राजबंशी (Koch Rajbanshi) समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और भवाईया लोक परंपरा को मुख्यधारा में लाती है।
भवाईया संगीत क्या है? (What is Bhawaiya?)
- परिभाषा: भवाईया एक पारंपरिक लोक संगीत (Folk music) शैली है।
- क्षेत्र: यह मुख्य रूप से उत्तरी बंगाल (North Bengal), असम और उसके आसपास के क्षेत्रों की मिट्टी से जुड़ा संगीत है।
- थीम/विषय: यह संगीत पीढ़ी-दर-पीढ़ी आम लोगों की भावनाओं, संघर्षों, कृषि पद्धतियों, मौसमी त्योहारों और उनके जीवन के ज्ञान को प्रदर्शित करता है।
- प्रासंगिकता: आधुनिकीकरण और वैश्वीकरण के बावजूद यह संगीत आज भी जीवित है क्योंकि यह वास्तविक मानवीय अनुभवों पर आधारित है।
उपराष्ट्रपति के संबोधन के मुख्य विचार (Mains Perspective)
“सांस्कृतिक आत्मविश्वास के बिना विकास अधूरा है।”
— श्री सी. पी. राधाकृष्णन (उपराष्ट्रपति)
- संगीत का दार्शनिक महत्व: प्राचीन भारत में संगीत को केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मानव चेतना को ब्रह्मांड से जोड़ने का माध्यम माना गया है। हमारे यहाँ सामवेद, ‘नाद ब्रह्म’ की अवधारणा तथा भक्ति और सूफी परंपराएं इसके उदाहरण हैं।
- भरत मुनि का नाट्यशास्त्र: पश्चिमी शास्त्रीय संगीत के उदय से बहुत पहले भारत के ‘नात्यशास्त्र’ में संगीत को मानवीय भावनाओं और आध्यात्मिक प्राप्ति का मूल माध्यम माना गया था।
- विकसित भारत @ 2047: राष्ट्र के विकास में सांस्कृतिक संरक्षण अनिवार्य है। नई पीढ़ी को पारंपरिक ज्ञान और भाषाओं को बचाने के लिए तकनीक (Technology) का उपयोग करना चाहिए।
- विविधता में एकता: महाकवि सुब्रमण्यम भारती के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की ताकत एकरूपता (Uniformity) में नहीं, बल्कि उसकी जीवंत विविधता में है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts)
| घटक / टर्म | विवरण / परीक्षा उपयोगी तथ्य |
| भवाईया (Bhawaiya) | उत्तरी बंगाल और असम का पारंपरिक लोक संगीत। |
| कोच राजबंशी (Koch Rajbanshi) | उत्तरी बंगाल और असम के क्षेत्रों से संबंधित समुदाय, जिसकी संस्कृति भवाईया संगीत से जुड़ी है। |
| नाट्यशास्त्र (Natya Shastra) | भरत मुनि द्वारा रचित ग्रंथ, जिसे कला और संगीत का प्राचीनतम प्रामाणिक स्रोत माना जाता है। |
| सामवेद (Sama Veda) | वह वेद जो मुख्य रूप से संगीत, मंत्रों और धुन से संबंधित है। |
| महाकवि सुब्रमण्यम भारती | तमिल भाषा के महान कवि और स्वतंत्रता सेनानी, जिन्होंने भारत की सांस्कृतिक एकता पर बल दिया। |
| मिशन LiFE (Lifestyle for Environment) | भारत द्वारा शुरू की गई वैश्विक पर्यावरण पहल, जिसका उल्लेख उपराष्ट्रपति ने योग के साथ किया। |
वेनेजुएला में भूकंप और आपदा कूटनीति (Earthquake in Venezuela)
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): भूगोल (भूकंपीय क्षेत्र, टेक्टोनिक प्लेट्स) और अंतर्राष्ट्रीय संबंध।
चर्चा में क्यों? (Why in News?)
हाल ही में वेनेजुएला में आए भीषण भूकंप के कारण जान-माल की भारी तबाही हुई है। इस दुखद घटना पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने भारत के नागरिकों की ओर से वेनेजुएला की सरकार और वहां के लोगों के प्रति संवेदना प्रकट की है।
मुख्य बिंदु: भारत का रुख और वैश्विक एकजुटता
- सहायता का आश्वासन: प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया है कि संकट की इस घड़ी में भारत वेनेजुएला को हर संभव मानवीय सहायता (Humanitarian Assistance) प्रदान करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
- अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता: भारत का यह कदम उसकी “वसुधैव कुटुंबकम” और “वैश्विक दक्षिण” (Global South) के प्रति एकजुटता की नीति को प्रदर्शित करता है।
Geographical & Strategic Perspective
- वेनेजुएला की भौगोलिक स्थिति: वेनेजुएला दक्षिण अमेरिका के उत्तरी भाग में स्थित है। यह क्षेत्र कैरेबियन प्लेट (Caribbean Plate) और दक्षिण अमेरिकी प्लेट (South American Plate) के विवर्तनिक सीमा (Tectonic boundary) के करीब है, जिसके कारण यहाँ अक्सर भूकंप आते हैं।
- आपदा कूटनीति (Disaster Diplomacy): संकट के समय अन्य देशों को मदद भेजना भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ (Soft Power) को मजबूत करता है। इससे पहले भारत ने तुर्की में ‘ऑपरेशन दोस्त’ के जरिए ऐसी ही बड़ी सहायता भेजी थी।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts)
| घटक / टर्म | परीक्षा उपयोगी त्वरित तथ्य (Exam Facts) |
| वेनेजुएला (Venezuela) | दक्षिण अमेरिकी महाद्वीप का एक देश, जिसकी राजधानी काराकास (Caracas) है। |
| भूकंप का कारण | कैरेबियन और दक्षिण अमेरिकी टेक्टोनिक प्लेट्स की आपसी हलचल। |
| वैश्विक स्थिति | यह देश ओपेक (OPEC) का संस्थापक सदस्य है और यहाँ दुनिया का सबसे बड़ा प्रमाणित तेल भंडार है। |
| भारत की नीति | आपदा के समय त्वरित सहायता प्रदान करना (HADR – Humanitarian Assistance and Disaster Relief)। |
स्वदेशी ‘नेत्र’ AEW&C प्रणाली (Indigenous ‘Netra’ AEW&C System)
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): रक्षा प्रौद्योगिकी (Defense Technology), डीआरडीओ (DRDO), और स्वदेशी प्रणालियाँ।
- मुख्य परीक्षा (Mains – GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- सुरक्षा और स्वदेशीकरण (Indigenization of Technology), रक्षा क्षमताएं।
चर्चा में क्यों? (Why in News?)
25 जून 2026 को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने भारतीय वायुसेना (IAF) को स्वदेशी ‘नेत्र’ (Netra) एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) सिस्टम का फाइनल ऑपरेशनल क्लीयरेंस (FOC) प्रमाण पत्र सौंप दिया है। यह कार्यक्रम बेंगलुरु (कर्नाटक) में वायु सेना के उप प्रमुख एयर मार्शल अवधेश कुमार भारती की अध्यक्षता में आयोजित हुआ।
- अतीत का बैकग्राउंड: इस प्रणाली को 2017 में इनिशियल ऑपरेशनल क्लीयरेंस (IOC) मिला था। अब FOC मिलने का मतलब है कि यह प्रणाली युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार और स्वीकृत है।
‘नेत्र’ (Netra) प्रणाली क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

इसे आसान भाषा में “आसमान में उड़ती आंख और कमांड सेंटर” कहा जा सकता है। यह रक्षा क्षेत्र में ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में एक मील का पत्थर है।
- मुख्य कार्य: यह हवा में सर्विलांस (निगरानी करने), स्थितिजन्य जागरूकता (Situational Awareness) बढ़ाने और युद्ध प्रबंधन (Battle Management) में वायुसेना की क्षमता को कई गुना मजबूत करता है।
- वास्तविक युद्ध में उपयोग: वायुसेना के उप प्रमुख के अनुसार, इस प्रणाली ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और ‘बालाकोट एयर स्ट्राइक’ के दौरान अपनी उच्च विश्वसनीयता और परिचालन क्षमता साबित की थी।
- स्वदेशी तकनीक का फायदा: भारत की अपनी तकनीक होने के कारण, वायुसेना भविष्य के युद्ध परिदृश्यों के हिसाब से इसमें अपनी जरूरत के मुताबिक आसानी से बदलाव (Modifications) कर सकती है।
किन संस्थाओं ने मिलकर इसे बनाया?
इस कार्यक्रम की सफलता तीन स्तंभों के आपसी तालमेल (Synergy) का परिणाम है:
- DRDO (विशेष रूप से इसकी प्रयोगशाला CABS – सेंटर फॉर एयर बोर्न सिस्टम)।
- भारतीय वायुसेना (IAF) (प्रयोक्ता के रूप में)।
- भारतीय रक्षा उद्योग भागीदार (उत्पादन के लिए)।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts)
| घटक / टर्म | परीक्षा उपयोगी त्वरित तथ्य (Exam Facts) |
| नेत्र (NETRA) | भारत का पहला स्वदेशी एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल (AEW&C) सिस्टम। |
| निर्माता संस्था | DRDO (मुख्य रूप से सेंटर फॉर एयर बोर्न सिस्टम – CABS)। |
| IOC और FOC वर्ष | IOC (शुरुआती मंजूरी): 2017 | FOC (अंतिम परिचालन मंजूरी): 2026। |
| महत्वपूर्ण ऑपरेशन्स | बालाकोट स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर में इसका सफल उपयोग हुआ। |
| रक्षा नेतृत्व (2026) | केंद्रीय रक्षा मंत्री: श्री राजनाथ सिंह | रक्षा सचिव और DRDO अध्यक्ष: श्री राजेश कुमार सिंह। |
शतायु डैशबोर्ड (SHATAYU Dashboard) और वृद्धजन देखभाल
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): सरकारी नीतियां, सामाजिक न्याय, कल्याणकारी योजनाएं और महत्वपूर्ण पोर्टल/डैशबोर्ड।
- मुख्य परीक्षा (Mains – GS Paper 2): शासन व्यवस्था (Governance), स्वास्थ्य और समाज के कमजोर वर्गों (विशेषकर वरिष्ठ नागरिकों) के लिए नीतियां व तंत्र।
चर्चा में क्यों? (Why in News?)
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के तहत सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने हाल ही में ‘शतायु’ (SHATAYU) डैशबोर्ड शुरू किया है।
- लॉन्च की तारीख: इस डैशबोर्ड को 22 मई 2026 को लॉन्च किया गया था।
शतायु (SHATAYU) डैशबोर्ड क्या है? (Understanding the Core Concept)
यह वरिष्ठ नागरिकों और प्रशिक्षित केयरगिवर्स (देखभाल करने वालों) को आपस में जोड़ने वाला एक डिजिटल प्लेटफॉर्म है।
- पूरा नाम: SHATAYU का फुल फॉर्म Senior Holistic Care Assistance and Training for Your Utility है।
- मुख्य उद्देश्य: सभी प्रशिक्षित जेरियाट्रिक केयरगिवर्स (वृद्धजनों की देखभाल करने वाले) इस डैशबोर्ड पर खुद को पंजीकृत कर सकते हैं। इससे जरूरतमंद बुजुर्गों को उनके घर के पास ही विशेषज्ञ सहायता मिल सकेगी।
- प्रबंधन (Management): इसे राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान (NISD) द्वारा प्रबंधित किया जा रहा है। एनआईएसडी (NISD) सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की एक स्वायत्त संस्था है, जो इन केयरगिवर्स को ट्रेनिंग देने का काम भी करती है।
आंकड़ों और पंजीकरण को लेकर मंत्रालय का स्पष्टीकरण
- डेटाबेस को मजबूत करना: इस डैशबोर्ड पर केवल नए लोग ही नहीं, बल्कि साल 2023-24 या उससे पहले प्रशिक्षित हो चुके केयरगिवर्स को भी ‘स्व-पंजीकरण’ (Self-registration) का मौका दिया गया है ताकि नेटवर्क बड़ा हो सके।
- एक ही क्षेत्र से अधिक पंजीकरण का कारण: सोशल मीडिया पर एक ही जिले से ज्यादा लोगों के चुने जाने की चर्चा थी। इस पर सरकार ने साफ किया कि केयरगिवर्स की भर्ती ट्रेनिंग सेंटर के आसपास के इलाकों से होती है, इसलिए किसी एक खास जिले या शहर से ट्रेनिंग लेने वालों की संख्या अधिक हो सकती है।
- विजन: सरकार का अंतिम लक्ष्य भारत के बुजुर्गों के लिए एक समावेशी (Inclusive) और उनकी उम्र के अनुकूल (Age-responsive) इकोसिस्टम तैयार करना है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts)
| घटक / टर्म | परीक्षा उपयोगी त्वरित तथ्य (Exam Facts) |
| शतायु (SHATAYU) | वरिष्ठ नागरिकों की समग्र देखभाल और सहायता के लिए लॉन्च किया गया एक आधिकारिक डैशबोर्ड। |
| संबंधित मंत्रालय | केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय। |
| नोडल एजेंसी | राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान – NISD (Caregivers को ट्रेनिंग देने और डैशबोर्ड संभालने वाली स्वायत्त संस्था)। |
| जेरियाट्रिक केयर (Geriatric Care) | चिकित्सा विज्ञान की वह शाखा जो बुजुर्गों के स्वास्थ्य और उनकी विशेष देखभाल से संबंधित है। |
| लॉन्च वर्ष | मई 2026 में इसकी आधिकारिक शुरुआत की गई। |
एयर सुविधा 2.0 पोर्टल (AIR SUVIDHA 2.0 Portal)
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): सरकारी पोर्टल, अंतरराष्ट्रीय संगठन (WHO), और स्वास्थ्य से जुड़े मुद्दे (इबोला वायरस)।
- मुख्य परीक्षा (Mains – GS Paper 2 & 3): शासन व्यवस्था (Governance – ई-गवर्नेंस), स्वास्थ्य क्षेत्र (Public Health Surveillance), और आपदा/महामारी प्रबंधन।
चर्चा में क्यों? (Why in News?)
नागरिक उड्डयन मंत्रालय (Ministry of Civil Aviation) और दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (DIAL) ने मिलकर ‘एयर सुविधा 2.0’ (AIR SUVIDHA 2.0) पोर्टल लॉन्च किया है। यह अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए एक संपर्क रहित (Contactless) स्वास्थ्य स्व-घोषणा (Health Self-Declaration) पोर्टल है, जिसे भारत के प्रवेश बिंदुओं (Points of Entry) पर इबोला वायरस की स्क्रीनिंग के लिए शुरू किया गया है।
इस पोर्टल को लॉन्च करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? (The Background)
- WHO की घोषणा: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने 17 मई 2026 को कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC) और युगांडा में फैले इबोला वायरस को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल (PHEIC) घोषित किया है।
- इबोला का प्रकार: वर्तमान में फैल रहा वायरस बुंडिबुग्यो वायरस रोग (BVD) के रूप में पुष्ट हुआ है। कांगो और युगांडा की सीमा से लगे देशों (जैसे दक्षिण सूडान) को संक्रमण के उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में रखा गया है।
एयर सुविधा 2.0 कैसे काम करता है? (Key Features)
इसे स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) के सहयोग से विकसित किया गया है।
- अनिवार्य स्व-घोषणा: भारत आने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को इमिग्रेशन क्लीयरेंस से पहले ऑनलाइन फॉर्म भरना अनिवार्य होगा।
- क्या जानकारी देनी होगी? यात्रियों को पिछले 21 दिनों का यात्रा इतिहास (Travel History), किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने की जानकारी और खुद में दिख रहे लक्षणों का ब्योरा देना होगा।
- रियल-टाइम डेटा शेयरिंग: यह पोर्टल एयरपोर्ट स्वास्थ्य अधिकारी, ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन, और राज्य निगरानी अधिकारियों (State Surveillance Officers) के साथ तुरंत डेटा साझा करता है ताकि जोखिम वाले यात्रियों की पहचान तुरंत हो सके।
- यात्रियों के लिए नियम: यात्री भारत पहुंचने से 24 घंटे पहले या फ्लाइट बोर्डिंग/वेब चेक-इन के समय इस फॉर्म को भर सकते हैं। लैंडिंग पर कोई भौतिक (कागजी) फॉर्म नहीं भरना होगा।
NCERT पढ़ें
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts)
| घटक / टर्म | परीक्षा उपयोगी त्वरित तथ्य (Exam Facts) |
| एयर सुविधा 2.0 | नागरिक उड्डयन मंत्रालय और DIAL द्वारा विकसित एक डिजिटल हेल्थ स्क्रीनिंग पोर्टल। |
| इबोला का मौजूदा स्ट्रेन | बुंडिबुग्यो वायरस रोग (Bundibugyo Virus Disease – BVD)। |
| प्रभावित मुख्य देश | कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (DRC), युगांडा और दक्षिण सूडान। |
| PHEIC | Public Health Emergency of International Concern (यह दर्जा WHO द्वारा अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियम – IHR 2005 के तहत दिया जाता है)। |
| क्लीयरेंस समय | यात्रा से 24 घंटे पहले फॉर्म भरा जा सकता है। आधिकारिक वेबसाइट: airsuvidha.civilaviation.gov.in है। |
11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक (11th BRICS Energy Ministers’ Meeting)
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): ब्रिक्स (BRICS), वैश्विक ऊर्जा गठबंधन (ISA, GBA), भारत के ऊर्जा लक्ष्य।
- मुख्य परीक्षा (Mains – GS Paper 2 & 3): अंतर्राष्ट्रीय संबंध (द्विपक्षीय और बहुपक्षीय समूह), बुनियादी ढांचा (ऊर्जा क्षेत्र), और वैज्ञानिक नवाचार (स्मार्ट ग्रिड, रिन्यूएबल एनर्जी)।
चर्चा में क्यों? (Why in News?)
25 जून 2026 को भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता (BRICS Chairship 2026) के तहत गुरुग्राम (हरियाणा) में 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा मंत्रियों की बैठक सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस बैठक का मुख्य विषय (Theme) “Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” (लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता का निर्माण) था।
- मार्गदर्शक सिद्धांत: यह पूरी बैठक “सर्वेषां ऊर्जम्” (Energy for All – सबके लिए ऊर्जा) के विचार पर आधारित थी।
- प्रमुख भागीदार: ब्रिक्स देशों के अलावा अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA), वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (GBA) और न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) के प्रतिनिधियों ने भी इसमें भाग लिया।
बैठक के 3 मुख्य प्राथमिकता वाले क्षेत्र (Three Priority Areas)
- ऊर्जा सुरक्षा और स्थिरता (Security & Sustainability): इसमें ग्रिड का आधुनिकीकरण, ऊर्जा भंडारण (Energy Storage), क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिज) और मजबूत सप्लाई चेन पर ध्यान दिया गया।
- ऊर्जा पहुंच और समानता (Access & Equity): विकासशील देशों के लिए सस्ती दरों पर स्वच्छ खाना पकाने के साधन (Clean Cooking) और आसान फाइनेंसिंग की व्यवस्था करना।
- प्रौद्योगिकी और नवाचार (Technology & Innovation): स्मार्ट ग्रिड, हाइड्रोजन वैल्यू चेन, ऊर्जा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग, और कार्बन कैप्चर तकनीक को बढ़ावा देना।
भारत की ऊर्जा क्रांति और वैश्विक नेतृत्व (India’s Energy Growth)

केंद्रीय बिजली और शहरी मामलों के मंत्री श्री मनोहर लाल ने बैठक में भारत की पिछले 10 वर्षों की उपलब्धियों को दुनिया के सामने रखा:
- तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक: भारत बिजली का दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता बन चुका है।
- क्षमता (Capacity): भारत की स्थापित बिजली क्षमता लगभग 540 GW तक पहुंच गई है, जिसमें से आधी से अधिक (More than half) गैर-जीवाश्म (Non-fossil) स्रोतों से आती है।
- सौर ऊर्जा: 2014 में सौर क्षमता सिर्फ 3 GW थी, जो अब बढ़कर 154 GW से अधिक हो गई है। इसमें ‘पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना’ का बड़ा योगदान है।
- भविष्य के लक्ष्य:
- 2032 तक 400 GWh से अधिक ऊर्जा भंडारण (Storage) क्षमता हासिल करना।
- 2047 तक 100 GW परमाणु ऊर्जा (Nuclear Power) क्षमता का लक्ष्य।
- भारत ने समय से पहले ही 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग (पेट्रोल में मिश्रण) का लक्ष्य पूरा कर लिया है।
भारत की अध्यक्षता में क्या बड़े परिणाम निकले? (Key Outcomes)
- डिजिटल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का शुभारंभ: भारत के नेतृत्व में ‘BRICS Digital Centre of Excellence for Smart Grids and Energy Storage’ लॉन्च किया गया है। यह ब्रिक्स देशों के बीच नीति और तकनीकी ज्ञान साझा करने का एक स्वैच्छिक मंच होगा।
- मार्गदर्शक सिद्धांतों को मंजूरी: ‘ब्रिक्स गाइडिंग प्रिंसिपल्स ऑन स्मार्ट ग्रिड्स एंड एनर्जी Storage’ को अपनाया गया।
- हाइड्रोजन वैल्यू चेन रिपोर्ट: ‘BRICS Joint Report on Hydrogen Value Chains 2026’ को अंतिम रूप देने की सराहना की गई।
- युवाओं की भागीदारी: भारत की अध्यक्षता में ‘ब्रिक्स यूथ एनर्जी समिट’ के आयोजन की सराहना की गई।
- अगली अध्यक्षता: 2027 में ब्रिक्स की अध्यक्षता चीन के पास होगी।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts)
| घटक / टर्म | परीक्षा उपयोगी त्वरित तथ्य (Exam Facts) |
| 11वीं ब्रिक्स ऊर्जा बैठक | आयोजन स्थल: गुरुग्राम, हरियाणा (25 जून 2026)। अध्यक्षता: भारत। |
| मार्गदर्शक सूत्र | “सर्वेषां ऊर्जम्” (Energy for All)। |
| नया लॉन्च केंद्र | BRICS Digital Centre of Excellence for Smart Grids and Energy Storage (वेबसाइट: brics-dcoe.global)। |
| भारत का बिजली स्थान | उत्पादन और उपभोग दोनों में दुनिया में तीसरा (3rd) स्थान। |
| परमाणु ऊर्जा लक्ष्य | वर्ष 2047 तक 100 GW क्षमता हासिल करने का विजन। |
| ब्रिक्स चेयर 2027 | चीन (People’s Republic of China)। |
फार्मा सही दाम और फार्मा जन समाधान पोर्टल का एकीकरण
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA), सरकारी पोर्टल और ई-गवर्नेंस।
- मुख्य परीक्षा (Mains – GS Paper 2): शासन व्यवस्था (Governance), ई-गवर्नेंस का अनुप्रयोग, पारदर्शिता और जवाबदेही, स्वास्थ्य क्षेत्र और नागरिक चार्टर।
चर्चा में क्यों? (Why in News?)
25 जून 2026 को राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) ने एक बड़ा कदम उठाते हुए ‘फार्मा जन समाधान’ (Pharma Jan Samadhan) पोर्टल को ‘फार्मा सही दाम’ (Pharma Sahi Daam) पोर्टल के साथ पूरी तरह एकीकृत (Integrate) कर दिया है। अब दवा की कीमतों की जांच और उनसे जुड़ी शिकायतें, दोनों काम नागरिक एक ही प्लेटफॉर्म पर कर सकेंगे।
- पहले की स्थिति: ये दोनों सेवाएं मोबाइल ऐप पर तो एक साथ थीं, लेकिन वेब ब्राउज़र पर इनके पोर्टल अलग-अलग काम करते थे। अब इन्हें वेब स्तर पर भी एक कर दिया गया है।
इन दोनों पोर्टल्स का मुख्य कार्य क्या है? (Understanding the Tools)
- फार्मा सही दाम (Pharma Sahi Daam): यह उपभोक्ताओं को अनुसूचित (Scheduled) और गैर-अनुसूचित (Non-scheduled) दवाओं की कीमतों की तुरंत जांच करने की सुविधा देता है। इससे मरीज यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि दवाएं सरकार द्वारा तय मूल्य सीमा के भीतर ही बेची जा रही हैं।
- फार्मा जन समाधान (Pharma Jan Samadhan): यह एक शिकायत निवारण प्रणाली है। यदि कोई फार्मेसी या कंपनी दवा की तय कीमत से अधिक वसूली करती है, तो नागरिक इस पोर्टल पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
इस एकीकरण का महत्व
- एकल खिड़की समाधान (Single Window Solution): नागरिकों को अब जानकारी देखने और शिकायत करने के लिए अलग-अलग वेबसाइट्स पर नहीं भटकना पड़ेगा।
- पारदर्शिता और जवाबदेही: इससे बाजार में दवाओं की ओवर-प्राइसिंग (तय दाम से अधिक वसूली) पर रोक लगेगी और नागरिकों की भागीदारी बढ़ेगा।
- सस्ती स्वास्थ्य सेवा: यह कदम भारत में दवाओं को किफायती और आम जनता की पहुंच में बनाए रखने के सरकारी प्रयासों को मजबूत करता है।
राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (NPPA) के बारे में
- स्थापना: एनपीपीए (NPPA) का गठन 1997 में भारत सरकार के एक प्रस्ताव के तहत किया गया था।
- मंत्रालय: यह रसायन और उर्वरक मंत्रालय के औषधि विभाग (Department of Pharmaceuticals) का एक संलग्न कार्यालय (Attached Office) है।
- मुख्य जिम्मेदारी: यह औषधि मूल्य नियंत्रण आदेश (DPCO), 2013 के प्रावधानों के तहत दवाओं की कीमतें तय और संशोधित करता है। इसके अलावा, यह देश में दवाओं की उपलब्धता की निगरानी भी करता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts)
| घटक / टर्म | परीक्षा उपयोगी त्वरित तथ्य (Exam Facts) |
| एकीकृत पोर्टल | फार्मा सही दाम (Pharma Sahi Daam) — अब इसी सिंगल इंटरफेस पर शिकायत निवारण भी उपलब्ध है। |
| NPPA का स्वरूप | रसायन और उर्वरक मंत्रालय के तहत 1997 में स्थापित एक स्वतंत्र नियामक (Independent Regulator)। |
| नियामक ढांचा | दवाओं की कीमतों का नियंत्रण DPCO, 2013 के तहत किया जाता है। |
| आधिकारिक वेबसाइट | विस्तृत जानकारी के लिए: nppa.gov.in पर विजिट कर सकते हैं। |