27 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत हम परिवहन क्षेत्र में सहकारिता की नई क्रांति ‘भारत टैक्सी’, फ्रंटियर टेक्नोलॉजीज में भारत की छलांग और राष्ट्रीय क्वांटम मिशन, ग्रामीण महिला उद्यमिता को वैश्विक मंच देने वाली सरस आजीविका पहल, सामाजिक न्याय के प्रणेता राजर्षि छत्रपति शाहू जी महाराज की जयंती और पर्यावरण संरक्षण के मोर्चे पर राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA) द्वारा संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए जारी किए गए नए SOP का संपूर्ण विश्लेषण करेंगे।
एससीओ महिला मंच 2026: ‘महिला-नीत विकास’ और भारत की वैश्विक प्रतिबद्धता
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): शंघाई सहयोग संगठन (SCO), महत्वपूर्ण वैश्विक मंच, सरकारी योजनाएं और नीतियां।
- मुख्य परीक्षा (Mains – GS Paper 2): द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह और भारत से जुड़े या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले समझौते (International Relations), सामाजिक न्याय (Social Justice) – महिलाओं से जुड़े मुद्दे।
चर्चा में क्यों? (Why in News?)
किर्गिज गणराज्य की राजधानी बिश्केक (Bishkek) में आयोजित ‘एससीओ महिला मंच (SCO Women’s Forum) 2026’ में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने भारत का प्रतिनिधित्व किया। एक विशेष वीडियो संदेश के माध्यम से इस मंच को संबोधित करते हुए भारत ने शंघाई सहयोग संगठन के बुनियादी सिद्धांतों जैसे आपसी सम्मान, समानता और आम सहमति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया तथा आर्थिक विकास में महिलाओं की भूमिका पर विशेष बल दिया।
मुख्य बिंदु: आर्थिक विकास में महिलाओं की भूमिका और भारतीय मॉडल (Key Notes)
1. ‘महिला-नीत विकास’ (Women-Led Development) का दृष्टिकोण
- विकास की चालक: भारत ने इस वैश्विक मंच पर यह स्पष्ट किया कि महिलाएं अब विकास की केवल ‘लाभार्थी’ (Beneficiaries) नहीं हैं, बल्कि वे आर्थिक समृद्धि की सबसे मजबूत ‘चालक’ (Drivers) बन चुकी हैं।
- विकसित भारत @2047: यह दृष्टिकोण वर्ष 2047 तक भारत को एक ‘विकसित भारत’ बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य का एक मुख्य आधार स्तंभ है।
2. स्वयं सहायता समूह (SHGs) और ‘लखपति दीदी’ की सफलता
- विशाल नेटवर्क: भारत में वर्तमान में लगभग 10 करोड़ (100 Million) महिलाएं 90 लाख से अधिक स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जुड़ी हुई हैं, जो जमीनी स्तर पर एक बड़े वित्तीय समावेशन को दर्शाता है।
- लखपति दीदी मॉडल: इस विशाल नेटवर्क में से 3 करोड़ (30 Million) से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं, जिसने उनकी क्रय शक्ति और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उनकी भागीदारी को गुणात्मक रूप से बढ़ाया है।
3. प्रमुख नीतिगत स्तंभ: मिशन शक्ति और मिशन पोषण 2.0
- मिशन शक्ति (Mission Shakti): यह योजना देश में महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षण और उनके आर्थिक सशक्तिकरण को एकीकृत रूप से सुनिश्चित करने वाला एक मजबूत सुरक्षा ढांचा है।
- मिशन पोषण 2.0 (Mission Poshan 2.0): महिलाओं, गर्भवती माताओं और बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण सुधार पर केंद्रित यह मिशन देश के मानव संसाधन को बुनियादी रूप से मजबूत कर रहा है।
4. क्षेत्रीय सहयोग के लिए भारत की तत्परता
- भारत ने एससीओ के सहयोगी देशों के साथ महिला आर्थिक नेतृत्व, स्वास्थ्य और कल्याण के क्षेत्र में अपने सफल अनुभवों को साझा करने तथा इस पूरे क्षेत्र में लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के लिए गहरी रणनीतिक साझेदारी की इच्छा जताई है।
10वीं शीर्ष स्तरीय NCORD बैठक: ‘विज़न डॉक्यूमेंट ऑन ड्रग कंट्रोल (2026-2029)’ और नशामुक्त भारत का रोडमैप
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): सरकारी नीतियां, राष्ट्रीय सुरक्षा संगठन, नार्को-समन्वय केंद्र (NCORD), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB)।
- मुख्य परीक्षा (Mains – GS Paper 3): आंतरिक सुरक्षा (Internal Security), सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियां एवं उनका प्रबंधन, संगठित अपराध (Organized Crime) और नार्को-आतंकवाद (Narco-Terrorism) का लिंक, धन शोधन (Money Laundering) और उसका मुकाबला।
चर्चा में क्यों? (Why in News?)
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली में नार्को-समन्वय केंद्र (NCORD) की 10वीं शीर्ष स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में नशीली दवाओं के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए ‘विज़न डॉक्यूमेंट ऑन ड्रग कंट्रोल (2026-2029)’ और ‘एनसीबी वार्षिक रिपोर्ट-2025’ जारी की गई। साथ ही, ड्रग्स निपटान पाक्षिक अभियान’ (Online Drugs Disposal Fortnight Campaign) की शुरुआत की गई, जिसके तहत ₹6,000 करोड़ मूल्य के 2,09,500 किलोग्राम नशीले पदार्थों को नष्ट करने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्य बिंदु: भारत की नई नार्को-कंट्रोल रणनीति
1. उभरता हुआ नार्को-आतंकवाद इकोसिस्टम (Evolving Narco-Terrorism Ecosystem)
- भौगोलिक संवेदनशीलता: भारत भौगोलिक रूप से ‘डेथ ट्रायंगल’ (गोल्डन ट्रायंगल) और ‘डेथ क्रेसेंट’ (गोल्डन क्रेसेंट) के बीच स्थित है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थों की तस्करी के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनाता है।
- तकनीकी चुनौतियां: तस्कर अब ड्रोन-ड्रॉप, समुद्री मार्ग (कंटेनर कार्गो), डार्कनेट (Darknet), क्रिप्टो-पेमेंट और पार्सल शिपमेंट जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर रहे हैं, जिससे यह एक ‘मल्टी-डोमेन’ अपराध बन गया है।
2. त्रि-स्तरीय रणनीति: ‘Detect, Disrupt, and Destroy’
- Detect (पता लगाना): ह्यूमन इंटेलिजेंस (HUMINT), तकनीकी खुफिया जानकारी और सीमावर्ती/संवेदनशील जिलों में कम्युनिटी पुलिसिंग के जरिए विदेशी, राज्यीय और स्थानीय स्तर के कार्टेल्स की पहचान करना।
- Disrupt (बाधित करना): तस्करों के वित्तीय नेटवर्क, नेतृत्व और आपूर्ति मार्गों पर प्रहार करना। वित्तीय जांच (PMLA के तहत) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) की भागीदारी को बड़े मामलों में अनिवार्य बनाना।
- Destroy (नष्ट करना): अवैध फसलों और प्रयोगशालाओं को पूरी तरह नष्ट करना। किंगपिन (मुख्य सरगनाओं) के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करना ताकि नेटवर्क दोबारा खड़ा न हो सके।
3. रोडमैप के 4 मुख्य स्तंभ (Four Pillars)
यह रणनीति सरकार और समाज के सामूहिक प्रयास (Whole of Government & Whole of Society Approach) पर आधारित है:
- प्रवर्तन, खुफिया और संचालन (Enforcement, Intelligence, and Operations)
- प्रिकर्सर और सिंथेटिक ड्रग नियंत्रण (Precursor and Synthetic Drug Control)
- मांग में कमी और पुनर्वास (Demand and Harm Reduction)
- क्षमता निर्माण, समन्वय और निगरानी (Capacity Building, Coordination, and Monitoring)
4. प्रशासनिक और संस्थागत सुधार (Institutional Reforms)
- विशेष अदालतें: गृह मंत्रालय ने त्वरित सुनवाई और सजा दर बढ़ाने के लिए विशेष NDPS अदालतों की स्थापना के लिए उच्च न्यायालयों से संपर्क किया है।
- ANTF का सुदृढ़ीकरण: सभी राज्यों को अपनी ‘एंटी-नारकोटिक्स टास्क फोर्स’ (ANTF) को पूर्णकालिक, आधुनिक उपकरणों से लैस और जवाबदेह इकाइयों में बदलने का निर्देश दिया गया है।
- अंतरराष्ट्रीय भगोड़े: विदेश में छिपे तस्करों और गैंगस्टरों के खिलाफ सीबीआई और इंटरपोल के माध्यम से रेड कॉर्नर नोटिस (Red Corner Notice) जारी कर प्रत्यर्पण प्रक्रिया तेज की जाएगी।
- ड्रग-फ्री जोन: स्कूलों और कॉलेजों में ‘ड्रग-फ्री कैंपस’ फ्रेमवर्क लागू कर मांग में कमी (Demand Reduction) लाने का प्रयास किया जाएगा।
10 वर्षों में मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई की प्रगति (Comparative Data)
| मापदंड / अवधि | 2004 – 2014 | 2014 – 2026 |
| जब्त दवाओं का मूल्य | ₹40,000 करोड़ (26 लाख किग्रा) | ₹1,84,000 करोड़ (1.18 करोड़ किग्रा) |
| नष्ट की गई दवाएं | ₹8,000 करोड़ (3.26 लाख किग्रा) | ₹89,896 करोड़ (42.47 लाख किग्रा) |
| दर्ज किए गए मामले | 1,73,000 मामले | 8,75,000 मामले |
| की गई गिरफ्तारियां | 1,95,000 गिरफ्तारियां | 10,97,000 गिरफ्तारियां |
| अवैध अफीम खेती नष्ट की | 10,000 एकड़ (2020 में) | 42,282 एकड़ (2025 में) |
छत्रपति शाहू जी महाराज: सामाजिक न्याय और आधुनिक सुधारों के प्रणेता
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): भारत का राष्ट्रीय आंदोलन, आधुनिक भारत का इतिहास, महत्वपूर्ण ऐतिहासिक व्यक्तित्व और उनके सुधार।
- मुख्य परीक्षा (Mains – GS Paper 1): अठारहवीं सदी के मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्वपूर्ण व्यक्ति, विषय और उनका योगदान।
- मुख्य परीक्षा (Mains – GS Paper 2): सामाजिक न्याय (Social Justice) – समाज के कमजोर, वंचित और शोषित वर्गों के कल्याण के लिए नीतियां और ऐतिहासिक सुधार।
चर्चा में क्यों? (Why in News?)
26 जून 2026 को भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने महान सामाजिक सुधारक और कोल्हापुर रियासत के दूरदर्शी राजा, राजर्षि छत्रपति शाहू जी महाराज की जयंती पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रधानमंत्री ने समाज के वंचित, शोषित और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए उनके द्वारा किए गए जीवनपर्यंत संघर्ष और आदर्शों को याद करते हुए उन्हें देश का मार्गदर्शक बताया।
मुख्य बिंदु: शाहू जी महाराज का योगदान और ऐतिहासिक महत्व (Key Historical Notes)
शाहू जी महाराज (1874-1922) कोल्हापुर के छत्रपति भोंसले राजवंश के एक ऐसे राजा थे, जिन्होंने अपने राजपाट का उपयोग केवल सत्ता चलाने के लिए नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति के लिए किया:
1. सामाजिक न्याय और आरक्षण के जनक
- ऐतिहासिक आरक्षण: शाहू जी महाराज भारत के इतिहास में पहले ऐसे शासक माने जाते हैं जिन्होंने 26 जुलाई 1902 को कोल्हापुर रियासत में पिछड़े और वंचित वर्गों के लिए 50% आरक्षण लागू किया था। यह आधुनिक भारत में सकारात्मक कार्रवाई (Affirmative Action) की नींव रखने वाली पहली बड़ी घटना थी।
- अस्पृश्यता उन्मूलन: उन्होंने दलितों और शोषितों को समाज की मुख्यधारा में लाने के लिए छुआछूत जैसी कुप्रथाओं के खिलाफ कड़े कानून बनाए तथा कुओं, तालाबों और सराय जैसी सार्वजनिक संपत्तियों को सभी के लिए अनिवार्य रूप से खोल दिया।
2. शिक्षा के क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार
- अनिवार्य और मुफ्त शिक्षा: उन्होंने अपनी रियासत में प्राथमिक शिक्षा को सभी के लिए अनिवार्य और पूरी तरह से मुफ्त कर दिया था ताकि गरीब से गरीब बच्चा भी पढ़ सके।
- छात्रवासों (Hostels) की स्थापना: ग्रामीण और पिछड़े वर्ग के बच्चों को शिक्षा के लिए शहरों में रहने की सुविधा देने के उद्देश्य से उन्होंने कोल्हापुर में विभिन्न जातियों और समुदायों के लिए अलग-अलग छात्रवासों की श्रृंखला खड़ी की।
3. डॉ. बी.आर. आंबेडकर के संरक्षक और सहयोगी
- वित्तीय और नैतिक समर्थन: शाहू जी महाराज ने डॉ. भीमराव आंबेडकर की प्रतिभा को पहचाना और उनके उच्च अध्ययन (Higher Studies) के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की।
- ‘मूकनायक’ को समर्थन: डॉ. आंबेडकर द्वारा शुरू की गई ऐतिहासिक पत्रिका ‘मूकनायक’ के प्रकाशन में शाहू जी महाराज ने महत्वपूर्ण आर्थिक मदद दी थी।
- माणगांव परिषद (1920): वर्ष 1920 में माणगांव में आयोजित अछूतों की ऐतिहासिक परिषद में उन्होंने खुलकर हिस्सा लिया और घोषणा की थी कि देश को डॉ. आंबेडकर के रूप में उनका असली नेता मिल गया है।
4. उपाधि ‘राजर्षि’ (Rajarshi) का इतिहास
- उनकी जन-कल्याणकारी नीतियों और सामाजिक सुधारों के प्रति समर्पण को देखते हुए कानपुर की कुर्मी क्षत्रिय सभा ने उन्हें वर्ष 1919 में ‘राजर्षि’ (राजाओं में ऋषि) की उपाधि से सम्मानित किया था।
| ऐतिहासिक घटक (Component) | परीक्षा उपयोगी त्वरित तथ्य (Exam Facts) |
| नाम और जीवनकाल | राजर्षि छत्रपति शाहू जी महाराज (26 जून 1874 – 6 मई 1922)। |
| संबद्ध रियासत | कोल्हापुर रियासत (मराठा भोंसले राजवंश)। |
| ऐतिहासिक कदम (1902) | प्रशासन और नौकरियों में पिछड़े वर्गों के लिए 50% आरक्षण की घोषणा करने वाले पहले भारतीय शासक। |
| ‘राजर्षि’ उपाधि | वर्ष 1919 में कानपुर की कुर्मी क्षत्रिय सभा द्वारा प्रदान की गई। |
| डॉ. आंबेडकर से जुड़ाव | डॉ. आंबेडकर की शिक्षा और उनके समाचार पत्र ‘मूकनायक’ (1920) को वित्तीय सहायता दी। |
| प्रमुख सुधार | अंतर्जातीय और विधवा विवाह को कानूनी मान्यता दी, बंधुआ मजदूरी और अस्पृश्यता को प्रतिबंधित किया। |
फ्रंटियर टेक्नोलॉजीज: भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता और आर्थिक संवृद्धि का नया रोडमैप
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा नीतियां, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020।
- मुख्य परीक्षा (Mains – GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science & Technology)- विकास और उनके अनुप्रयोग, उभरती और अग्रणी प्रौद्योगिकियां (Frontier Technologies), आईटी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स के क्षेत्र में जागरूकता, और बौद्धिक संपदा अधिकार।
चर्चा में क्यों? (Why in News?)
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने एक प्रमुख मीडिया कॉन्क्लेव में घोषणा की कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), परमाणु (Nuclear), अंतरिक्ष (Space) और क्वांटम (Quantum) प्रौद्योगिकियां ही भारत के भविष्य की आर्थिक संवृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को तय करेंगी। उन्होंने विशेष रूप से रेखांकित किया कि वर्ष 2023 में लॉन्च हुए भारत के राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (National Quantum Mission) ने अपने शुरुआती तीन वर्षों के भीतर ही अपने निर्धारित लक्ष्यों में से आधे से अधिक परिणाम समय से पहले हासिल कर लिए हैं।
मुख्य बिंदु: फ्रंटियर टेक्नोलॉजीज और भारत का बढ़ता प्रभाव
1. राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) की ऐतिहासिक प्रगति
- समय से आगे: भारत ने डिफेंस, रणनीतिक संचार, साइबर सुरक्षा और संवेदनशील सूचनाओं की सुरक्षा के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्षेत्र यानी ‘क्वांटम-सुरक्षित संचार’ (Quantum-Secure Communication) में बड़ी सफलताएं समय सीमा से पहले हासिल कर ली हैं।
- इकोसिस्टम का विकास: देश क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम कम्युनिकेशन और उससे जुड़े अन्य मुख्य अनुसंधान क्षेत्रों में दुनिया के अग्रणी देशों के साथ बराबरी पर खड़ा है।
2. नीतिगत सुधार और ट्रिपल-इंजन ग्रोथ (Space, Nuclear & AI)
- अंतरिक्ष (Space): निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स के लिए द्वार खोलने के बाद भारत में एक बेहद जीवंत स्पेस स्टार्टअप इकोसिस्टम तैयार हुआ है।
- परमाणु ऊर्जा (Nuclear Energy): परमाणु क्षेत्र में हालिया नीतिगत सुधारों से तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण में तेजी आई है। बढ़ती कंप्यूटिंग और डेटा सेंटर्स की मांग के लिए परमाणु ऊर्जा को ‘स्वच्छ ऊर्जा’ (Clean Energy Transition) के मुख्य स्रोत के रूप में देखा जा रहा है।
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): शासन (Governance), शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सार्वजनिक सेवा वितरण को आधुनिक बनाने के लिए AI को एक आवश्यक उपकरण के रूप में अपनाया जा रहा है। इसके लिए देश में डिजिटल बुनियादी ढांचे और डेटा संसाधनों को तेजी से मजबूत किया जा रहा है।
3. अनुसंधान मॉडल में संरचनात्मक बदलाव (Structural Shift in R&D)
- सहयोगात्मक मॉडल: भारत अब केवल सरकार-केंद्रित नवाचार मॉडल (Government-Centric Model) पर निर्भर नहीं है; बल्कि अब अकादमिक जगत, उद्योग (Industry), स्टार्टअप और निजी उद्यम मिलकर काम कर रहे हैं।
- संसाधनों की पूलिंग: वैज्ञानिक खोजों और उनके व्यावसायीकरण (Commercialization) के लिए वित्तीय, तकनीकी और बौद्धिक संसाधनों को एक साझा प्लेटफॉर्म पर लाया जा रहा है।
4. एनईपी 2020: नए इनोवेटर्स की नींव
- लचीलापन: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 ने पुरानी और कठोर अकादमिक प्रणालियों को पूरी तरह बदलकर छात्रों को बहु-विषयक (Multidisciplinary) अवसर दिए हैं।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण: यह नीति रटने की प्रवृत्ति को छोड़कर छात्रों में वास्तविक रुचि और वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Temper) विकसित कर रही है, जो ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य के लिए नए इनोवेटर्स तैयार करेगी।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / मिशन (Component) | परीक्षा उपयोगी त्वरित तथ्य (Exam Facts) |
| राष्ट्रीय क्वांटम मिशन (NQM) | वर्ष 2023 में लॉन्च किया गया था। (वर्तमान में इसे संचालित होते हुए 3 वर्ष हो चुके हैं)। |
| मुख्य फोकस क्षेत्र | क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम कम्युनिकेशन, क्वांटम सेंसिंग और मौसम विज्ञान। |
| प्राथमिक सफलता (2026) | डिफेंस और रणनीतिक महत्व के लिए क्वांटम-सुरक्षित संचार लक्ष्यों की समय से पहले प्राप्ति। |
| नवाचार का नया ढांचा | सरकार-केंद्रित मॉडल से बदलकर “अकादमिक + उद्योग + स्टार्टअप” का पीपीपी मॉडल। |
| लक्षित वर्ष | वर्ष 2047 तक भारत को नवाचार-संचालित विकसित अर्थव्यवस्था बनाना। |
‘भारत टैक्सी’: सहकारिता आधारित मोबिलिटी मॉडल और आर्थिक सशक्तिकरण
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): सहकारिता क्षेत्र (Cooperative Sector), केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय, सरकारी योजनाएं और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)।
- मुख्य परीक्षा (Mains – GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) – समावेशी विकास (Inclusive Growth), बुनियादी ढांचा (Infrastructure) – परिवहन, रोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण, सहकारिता आंदोलन का विकास।
चर्चा में क्यों? (Why in News?)
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने 27 जून 2026 को महात्मा मंदिर कन्वेंशन सेंटर, गांधीनगर (गुजरात) से देश की पहली सहकारिता-आधारित टैक्सी सेवा “भारत टैक्सी” (Bharat Taxi) को आधिकारिक तौर पर लॉन्च किया। उल्लेखनीय है कि इस क्रांतिकारी सेवा का ‘सॉफ्ट-लॉन्च’ (Soft-launch) दिसंबर 2025 में किया गया था, जो अब पूर्ण सेवा के रूप में धरातल पर उतर चुकी है।
मुख्य बिंदु: सहकारिता आधारित मोबिलिटी मॉडल और इसके लाभ (Key Notes)
1. ‘सारथी ही मालिक’ (Saarthi Hi Maalik) का अनूठा दर्शन
- सहकारी स्वामित्व: इस मॉडल के तहत टैक्सी चालकों (जिन्हें ‘सारथी’ कहा गया है) को केवल एक सेवा प्रदाता (Service Provider) नहीं माना गया है, बल्कि वे इस पूरे डिजिटल प्लेटफॉर्म के सह-मालिक (Co-owners) हैं।
- शेयर सर्टिफिकेट: उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सारथियों को इस कार्यक्रम में कंपनी के शेयर सर्टिफिकेट प्रदान किए गए, जो उनके आर्थिक स्वामित्व को सीधे प्रमाणित करते हैं।
2. शून्य-कमीशन और सामाजिक सुरक्षा (Zero-Commission Model)
- शत-प्रतिशत लाभ: पारंपरिक एग्रीगेटर्स (जैसे Uber/Ola) के विपरीत, यह प्लेटफॉर्म शून्य-कमीशन (Zero-commission) मॉडल पर काम करता है। इसका मतलब है कि यात्रा से होने वाली पूरी कमाई बिना किसी कटौती के सीधे चालक के पास जाती है।
- कल्याणकारी लाभ: इसके तहत सारथियों को बीमा (Insurance), सुलभ लोन, पेंशन और केंद्र/राज्य सरकार की विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का सीधा वित्तीय लाभ प्रदान किया जाता है।
3. ग्राहकों के लिए लाभ और तकनीकी जुड़ाव
- नो सर्ज-प्राइसिंग: ग्राहकों के लिए सबसे बड़ी राहत यह है कि इसमें मांग बढ़ने पर किराया बढ़ने का कोई नियम नहीं है यानी ‘सर्ज-फ्री प्राइसिंग मॉडल’ लागू है।
- सुरक्षा तंत्र: गुजरात पुलिस के साथ सीधे समन्वय के माध्यम से यात्रियों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। इस प्लेटफॉर्म पर ग्राहक अपनी सुविधा के अनुसार बाइक, ऑटो और कैब तीनों विकल्पों को चुन सकते हैं।
- भविष्य का रोडमैप: आने वाले समय में इसे भारत के राष्ट्रीय डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के साथ एकीकृत किया जाएगा और हर राज्य में समर्पित सपोर्ट सेंटर बनाए जाएंगे।
‘भारत टैक्सी’ का संस्थागत ढांचा (Institutional Structure)
- विकासकर्ता संस्था: यह सेवा ‘सहकार टैक्सी को-ऑपरेटिव लिमिटेड’ (Sahkar Taxi Cooperative Limited) द्वारा विकसित की गई है।
- पंजीकरण: यह मल्टी-स्टेट को-ऑपरेटिव सोसाइटीज एक्ट, 2002 (Multi-State Cooperative Societies Act, 2002) के तहत पंजीकृत है और इसकी स्थापना 6 जून, 2025 को हुई थी।
- समर्थक संस्थाएं (8 प्रमुख पिलर): भारत की आठ सबसे बड़ी सहकारी और वित्तीय संस्थाओं ने मिलकर इसे बैक किया है, जिनके नाम सीधे प्रीलिम्स में पूछे जा सकते हैं:
- NCDC (राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम)
- GCMMF / AMUL (गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ)
- NDDB (राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड)
- NAFED (भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ)
- IFFCO (भारतीय किसान उर्वरक सहकारी)
- KRIBHCO (कृषक भारती को-ऑपरेटिव)
- NABARD (राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक)
- NCEL (राष्ट्रीय सहकारी निर्यात लिमिटेड)
सरस आजीविका: ग्रामीण महिला उद्यमिता और ‘सरस शक्ति कलेक्शन’ का नया वैश्विक चेहरा
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM), सरस आजीविका (SARAS Aajeevika), राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन 2026, सरकारी योजनाएं और पहल।
- मुख्य परीक्षा (Mains – GS Paper 2 & 3): सामाजिक न्याय (Social Justice) – स्वयं सहायता समूह (SHGs) की भूमिका और उनका सशक्तिकरण; भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) – समावेशी विकास, ग्रामीण उद्यमिता, रोजगार सृजन और ‘लखपति दीदी’ मॉडल।
चर्चा में क्यों? (Why in News?)
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान 28–29 जून 2026 को आईसीएआर-एनएएससी (ICAR–NASC) कॉम्प्लेक्स, पूसा, नई दिल्ली में ‘राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन (Rashtriya Gramin Vikas Sammelan) 2026’ का उद्घाटन करेंगे। इस सम्मेलन के मुख्य आकर्षण के रूप में ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाओं के उत्पादों को एक राष्ट्रीय पहचान देने के लिए ‘सरस आजीविका गैलरी’ का विशेष प्रदर्शन किया जाएगा और इसी मंच पर प्रीमियम उत्पादों के एक अनूठे संग्रह ‘सरस शक्ति कलेक्शन’ (SARAS Shakti Collection) को भी लॉन्च किया जाएगा।

मुख्य बिंदु: सरस आजीविका और ग्रामीण महिला उद्यमिता का नया इकोसिस्टम (Key Notes)
1. ब्रांडिंग और कानूनी पहचान (Trademarks & Identity)
- वैधानिक सुरक्षा: मंत्रालय ने स्वयं सहायता समूहों (SHGs) के स्थानीय उत्पादों को संगठित वैश्विक बाजार से जोड़ने के लिए SARAS, SARAS Aajeevika और Aajeevika जैसे आधिकारिक ट्रेडमार्क (Trademarks) सुरक्षित किए हैं।
- बदलता नैरेटिव: इस ब्रांडिंग रणनीति ने ग्रामीण महिलाओं के काम को केवल “स्थानीय हस्तशिल्प” (Localized Crafts) के दायरे से बाहर निकालकर एक व्यवस्थित, पहचान योग्य और प्रामाणिक राष्ट्रीय बिजनेस इकोसिस्टम में बदल दिया है।
2. बाजार पहुंच के बहुआयामी प्लेटफॉर्म (Market Access Matrix)
ग्रामीण महिलाओं को उपभोक्ताओं से सीधे जोड़ने के लिए सरकार ने भौतिक (Physical) और डिजिटल (Digital) दोनों मोर्चों पर बुनियादी ढांचा तैयार किया है:
- स्थायी रिटेल आउटलेट: नई दिल्ली के बाबा खड़क सिंह मार्ग पर ‘सरस आजीविका गैलरी’ (SARAS Aajeevika Gallery) की स्थापना की गई है, जो देश भर के बेहतरीन हस्तशिल्प के लिए एक स्थायी वाणिज्यिक केंद्र है।
- डिजिटल ई-कॉमर्स: ग्रामीण उद्यमियों को सीधे डिजिटल बाजार से जोड़ने के लिए ‘eSARAS’ ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप्लिकेशन संचालित किया जा रहा है।
- सरस मेला: देश के विभिन्न राज्यों और जिलों में ‘सरस मेलों’ का आयोजन कर इन उत्पादों की पहुंच और दृश्यता (Visibility) को जमीनी स्तर पर बढ़ाया जाता है।
3. ‘सरस शक्ति कलेक्शन’ (SARAS Shakti Collection) का लॉन्च
- प्रीमियम गिफ्टिंग सॉल्यूशन: इस वर्ष सम्मेलन में ‘सरस शक्ति कलेक्शन’ को विशेष रूप से लॉन्च किया जा रहा है, जो ग्रामीण महिलाओं द्वारा पूरी तरह हाथ से तैयार किए गए प्रीमियम उत्पादों का एक अनूठा बुटीक संग्रह है।
- कॉरपोरेट लिंकेज: इसका मुख्य प्रशासनिक उद्देश्य ग्रामीण एसएचजी (SHG) उत्पादों को सीधे बड़े कॉरपोरेट हाउस, सरकारी विभागों और संस्थागत बाजारों (Institutional Markets) में उपहार समाधान (Gifting Solutions) के रूप में सीधे प्रविष्टि दिलाना है।
4. लखपति दीदी और 2029 का रोडमैप
- लक्ष्य: भारत वर्तमान में 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने के महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, जिसमें से 3 करोड़ से अधिक महिलाएं यह मुकाम हासिल कर चुकी हैं।
- आर्थिक भूमिका: वर्ष 2029 के ग्रामीण विकास रोडमैप में इन लखपति दीदियों को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य चालक और ‘रोजगार निर्माता’ (Job Creators) माना गया है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts)
गैलरी में प्रदर्शित प्रमुख भौगोलिक और पारंपरिक उत्पाद (Geographical & Craft Panorama)
| राज्य / केंद्र शासित प्रदेश | प्रसिद्ध पारंपरिक उत्पाद (Famous Art & Textile) |
| मध्य प्रदेश | चंदेरी साड़ियां (Chanderi Sarees) |
| पंजाब | फुलकारी कढ़ाई (Phulkari) |
| जम्मू और कश्मीर | पश्मीना शॉल और वस्त्र (Pashmina) |
| गुजरात | पटोला और अजरख प्रिंट कपड़ा (Patola & Ajrakh) |
| आंध्र प्रदेश | कलमकारी हस्तशिल्प (Kalamkari) |
| तेलंगाना | इकत और तेलिया रूमाल/कपड़ा (Ikat & Telia) |
| मिजोरम | पांचेई पारंपरिक वस्त्र (Paunchei) |
| राजस्थान | संगमरमर हस्तशिल्प (Marble Handicrafts) |
| केरल | केरल हैंडलूम उत्पाद (Kerala Handloom) |
राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA): संकटग्रस्त प्रजातियों की अधिसूचना के लिए एसओपी (SOP) जारी
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): जैव विविधता अधिनियम 2002, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (NBA), संकटग्रस्त प्रजातियां (Threatened Species), अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण समझौते।
- मुख्य परीक्षा (Mains – GS Paper 3): पर्यावरण (Environment) – संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन, जैव विविधता का ह्रास और इसके संरक्षण से जुड़े कानूनी उपाय।
चर्चा में क्यों? (Why in News?)
भारत में जैव विविधता संरक्षण को अधिक वैज्ञानिक और सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (National Biodiversity Authority – NBA) ने संकटग्रस्त प्रजातियों की पहचान के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure – SOP) जारी की है। यह एसओपी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 38 के तहत विलुप्त होने की कगार पर खड़ी प्रजातियों की पहचान, वैज्ञानिक मूल्यांकन और उनकी अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया को समान, पारदर्शी और वैज्ञानिक रूप से सुव्यवस्थित करेगा।
मुख्य बिंदु: संकटग्रस्त प्रजातियों के लिए नया एसओपी और विनियामक ढांचा (Key Notes)
1. जैव विविधता अधिनियम, 2002 की धारा 38 (Section 38) का महत्व
- अधिसूचना की शक्ति: यह धारा केंद्र सरकार को (संबंधित राज्य सरकार के परामर्श से) किसी भी ऐसी प्रजाति को ‘संकटग्रस्त प्रजाति’ (Threatened Species) के रूप में अधिसूचित करने की शक्ति देती है जो विलुप्त होने की कगार पर है।
- संग्रह पर प्रतिबंध: एक बार अधिसूचित होने के बाद, उस प्रजाति के व्यावसायिक या स्थानीय संग्रह को पूरी तरह प्रतिबंधित या विनियमित कर दिया जाता है और उसके पुनर्वास के लिए विशेष उपाय किए जाते हैं।
- वर्तमान स्थिति: पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) अब तक इस धारा के तहत 17 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में 159 पौधों की प्रजातियों और 173 पशु प्रजातियों को संकटग्रस्त घोषित कर चुका है।
2. नए एसओपी (SOP) की चरणबद्ध कार्यप्रणाली
यह एसओपी राज्य जैव विविधता बोर्डों (SBBs) और केंद्र शासित प्रदेशों की जैव विविधता परिषदों को निम्नलिखित चरणों पर काम करने के लिए एक स्पष्ट ढांचा प्रदान करता है:
- वैज्ञानिक साक्ष्य और ज्ञान का एकीकरण: प्रजातियों के मूल्यांकन के लिए सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक साक्ष्यों, जमीनी आकलन और स्थानीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान (Traditional Knowledge) का एक साथ उपयोग किया जाएगा।
- हितधारक परामर्श (Stakeholder Consultations): इसमें स्थानीय समुदायों, जैव विविधता प्रबंधन समितियों (BMCs), भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (BSI), भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) और विषय विशेषज्ञों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
- रिकवरी और एक्शन प्लान: अधिसूचना जारी होने के बाद, इन प्रजातियों की आबादी को दोबारा बढ़ाने के लिए ‘स्पीशीज रिकवरी प्लान’ और नियमित निगरानी तंत्र विकसित किया जाएगा।
3. नए विनियमों (Regulations 2025) के साथ जुड़ाव
- लाभ-साझाकरण (Benefit-Sharing): यह पहल जैव विविधता (जैविक संसाधनों और ज्ञान तक पहुंच और उचित एवं न्यायसंगत लाभ-साझाकरण) विनियम, 2025 के क्रियान्वयन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
- विभेदक व्यवहार: यदि कोई जैविक संसाधन धारा 38 के तहत संकटग्रस्त अधिसूचित प्रजाति से संबंधित है, तो उसके व्यावसायिक उपयोग पर लाभ-साझाकरण (Access and Benefit Sharing – ABS) के नियम और वित्तीय दायित्व अधिक कड़े और भिन्न होंगे।
4. वैश्विक और राष्ट्रीय लक्ष्यों के साथ संरेखण
- यह एसओपी राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय जैव विविधता रणनीति और कार्य योजना (NBSAP) 2024-2030 के ‘लक्ष्य 4’ (मानव-प्रेरित विलुप्ति को रोकना और आनुवंशिक विविधता बनाए रखना) को पूरा करने में मदद करेगा।
- वैश्विक स्तर पर, यह भारत की कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे (KMGBF) के लक्ष्यों के प्रति प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts)
विनियामक और विधिक अवयव (Regulatory Matrix)
- नोडल कानून: जैव विविधता अधिनियम, 2002 (Biological Diversity Act, 2002)।
- संकटग्रस्त प्रजातियों की धारा: अधिनियम की धारा 38 (Section 38)।
- अधिसूचना जारी करने की वर्तमान प्रगति: 159 पादप (Plant) प्रजातियां + 173 जंतु (Animal) प्रजातियां (कुल 17 राज्य और 3 UTs)।
- तकनीकी भागीदार संस्थान: भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (BSI) और भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI)।
- वैश्विक लक्ष्य जुड़ाव: कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचा (Kunming-Montreal Global Biodiversity Framework)।
बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जयंती: वंदे मातरम के 150 वर्ष और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद
- प्रारंभिक परीक्षा (Prelims): आधुनिक भारतीय इतिहास, महत्वपूर्ण व्यक्तित्व (बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय), स्वतंत्रता संग्राम के विभिन्न चरण और महत्वपूर्ण राष्ट्रवादी साहित्य।
- मुख्य परीक्षा (Mains – GS Paper 1): 18वीं सदी के मध्य से लेकर वर्तमान समय तक का आधुनिक भारतीय इतिहास- महत्वपूर्ण व्यक्ति, उनका योगदान; भारतीय संस्कृति में साहित्य का महत्व और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद (Cultural Nationalism)।
चर्चा में क्यों? (Why in News?)
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महान स्वतंत्रता सेनानी और प्रख्यात साहित्यकार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की जयंती (26 जून) पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। इस वर्ष का महत्व इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि भारत राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ (150th Anniversary) मना रहा है, जिसने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रवाद और सांस्कृतिक गौरव की अलख जगाई थी।
मुख्य बिंदु: बंकिम चंद्र का राष्ट्रवाद और साहित्यिक योगदान
1. ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष
- स्वतंत्रता आंदोलन का मंत्र: बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वंदे मातरम’ ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पूरे देश को एक सूत्र में पिरोने का काम किया, जिसे बाद में भारत के राष्ट्रगीत (National Song) के रूप में स्वीकार किया गया।
- सांस्कृतिक चेतना: प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि यह गीत केवल शब्द नहीं, बल्कि पीढ़ियों के भीतर देशभक्ति और अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान जगाने वाला एक जीवंत स्रोत है।
2. राष्ट्र निर्माण में साहित्यिक योगदान
- चेतना का जागरण: बंकिम चंद्र की रचनाओं ने औपनिवेशिक शासन (Colonial Rule) के खिलाफ भारतीयों के मन में सामूहिक संकल्प और वैचारिक स्वतंत्रता को सुदृढ़ किया।
- सांस्कृतिक राष्ट्रवाद: उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से भारत की समृद्ध विरासत को जनता के सामने रखा, जिसने आगे चलकर स्वदेशी आंदोलन (Swadeshi Movement) की वैचारिक नींव रखी।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य (Prelims Facts)
- आनंदमठ (Anandamath): वंदे मातरम मूल रूप से उनके प्रसिद्ध उपन्यास ‘आनंदमठ’ (1882) से लिया गया है, जो सन्यासी विद्रोह (Sanyasi Rebellion) की पृष्ठभूमि पर आधारित है।
- वंदे मातरम का गायन: इस गीत को पहली बार 1896 के कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा गाया गया था।