NCERT Notes Class 6 Social science (Geography) Chapter 9: Family and Community के अंतर्गत भारतीय समाज में ग्रामीण और शहरी दोनों ही स्तरों पर विभिन्न परिवार प्रणालियाँ (जैसे संयुक्त और एकल परिवार) और समुदाय कैसे एक-दूसरे पर अंतर्निर्भर (Interdependent) हैं। यह अंतर्निर्भरता न केवल आर्थिक गतिविधियों को सुचारू बनाती है, बल्कि सामाजिक सुरक्षा, सांस्कृतिक निरंतरता और सामूहिक सहयोग की भावना को भी मजबूत करती है।
परिवार (Family)
- मूल प्रकृति: परिवार किसी भी समाज की सबसे मौलिक और प्राचीनतम इकाई (Fundamental and most ancient unit) है।
- भारतीय समाज में परिवार के प्रकार: आधुनिक भारतीय समाज में मुख्य रूप से दो प्रकार के परिवार पाए जाते हैं:
- संयुक्त परिवार (Joint Family): इसमें कई पीढ़ियां (Generations) एक साथ रहती हैं — जैसे दादा-दादी, माता-पिता, ताऊ-ताई, चाचा-चाची, भाई-बहन और चचेरे भाई-बहन।
- एकाकी परिवार (Nuclear Family): यह केवल एक जोड़े (पति-पत्नी) और उनके बच्चों तक सीमित होता है (कभी-कभी इसमें केवल एक एकल माता/पिता और बच्चे शामिल होते हैं)।

भाषाई और सांस्कृतिक विशेषताएँ (Linguistic and Cultural Features)
- रिश्तों की शब्दावली: अंग्रेजी भाषा की तुलना में भारतीय भाषाओं में पारिवारिक संबंधों को परिभाषित करने के लिए बहुत अधिक और विशिष्ट शब्द हैं।
- उदाहरण: हिंदी में बुआ, ताऊ, ताई, चाचा, मौसी, नाना, नानी जैसे विशिष्ट शब्द हैं।
- तमिल: तमिल जैसी कुछ भाषाओं में बड़े भाई/बहन और छोटे भाई/बहन के लिए भी पूरी तरह से अलग-अलग विशिष्ट शब्दों का उपयोग किया जाता है।
- ‘कज़िन’ (Cousin) शब्द का अभाव: अधिकांश भारतीय भाषाओं में ‘कज़िन’ (चचेरे/ममेरे/फुफेरे भाई-बहन) के लिए कोई एक विशिष्ट अलग शब्द नहीं होता है। भारतीय सामाजिक व्यवस्था में कज़िन को भी सीधे ‘भाई’ (Brother) या ‘बहन’ (Sister) ही माना जाता है। यह भाषाई विशेषता परिवार के सभी बच्चों के बीच के गहरे जुड़ाव और बंधन (Deep bonds) को रेखांकित करती है।
भूमिकाएँ एवं दायित्व (Roles and Responsibilities)
- पारिवारिक संबंधों का आधार: परिवार के सदस्यों के बीच के रिश्ते प्यार, देखभाल, सहयोग और पारस्परिक निर्भरता (Interdependence) पर टिके होते हैं।
- सहयोग का अर्थ: इसका सीधा मतलब है ‘एक साथ मिलकर काम करना’।
- भूमिकाएँ और उत्तरदायित्व:
- माता-पिता: बच्चों को खुशहाल व्यक्ति और समाज का जिम्मेदार नागरिक बनाने के लिए उनके पालन-पोषण के प्रति जवाबदेह होते हैं।
- बच्चे: जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, वे दैनिक अभ्यास के माध्यम से घर के कामों में हाथ बंटाना और जिम्मेदारी लेना सीखते हैं।
- सांस्कृतिक निरंतरता: घर के माहौल में ही बच्चे अपनी पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं और प्रथाओं को आत्मसात करते हैं।
भारतीय संस्कृति के मूल सिद्धांत और मूल्य
- धर्म: अपने कर्तव्यों का पालन करना भारतीय संस्कृति का एक मुख्य मार्गदर्शक सिद्धांत रहा है।
- परिवार एक ‘विद्यालय’: परिवार ही वह पहली पाठशाला है जहाँ बच्चे बुनियादी नैतिक मूल्य सीखते हैं:
- अहिंसा
- दान
- सेवा
- त्याग
- सामूहिक हित: परिवार के सदस्य अक्सर पूरे परिवार की साझा जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी व्यक्तिगत इच्छाओं या आवश्यकताओं का त्याग कर देते हैं।
भारतीय समाज में विविधता
1: केरल का एक कस्बा (साझा सहभागिता और त्याग)
- पारिवारिक संरचना: शालिनी का संयुक्त परिवार (पिता, माता, भाई, दादी, चाचा, चाची और चचेरी बहन)।
- संकट और मूल्य प्रदर्शन: ओणम त्योहार के दौरान शालिनी के चाचा की नौकरी चली गई। आर्थिक तंगी के कारण उनका परिवार नए कपड़े खरीदने में असमर्थ था।

- सीख: शालिनी के माता-पिता ने अपनी बेटी के लिए महंगी सिल्क ड्रेस के बजाय एक साधारण सूती (Cotton) ड्रेस खरीदी। बचे हुए पैसों से उन्होंने चाचा के पूरे परिवार के लिए नए कपड़े खरीदे। यह दिखाता है कि भारतीय परिवार कैसे संकट के समय एक-दूसरे का संबल बनते हैं।
2: मेघालय का एक गाँव (लैंगिक समानता और सामुदायिक सेवा)
- पारिवारिक संरचना: तेनजिंग का संयुक्त परिवार (माता-पिता, दादा-दादी)।
- बदलती लैंगिक भूमिकाएँ (Gender Roles): तेनजिंग की माता स्थानीय हस्तशिल्प सहकारी समिति (Handicraft cooperative) में व्यस्त हुईं, तो पिता ने घर की सफाई, रसोई और सब्जी के बगीचे की जिम्मेदारी में हाथ बंटाया।
- बुजुर्गों की भूमिका: दादी बच्चों को ज्ञान और हास्य की कहानियाँ सिखाती हैं, जबकि दादा गृहकार्य में मदद करने के साथ-साथ सामाजिक कार्यों (जैसे तूफान से क्षतिग्रस्त पड़ोसी के घर की मरम्मत के लिए धन जुटाना या बिजली कटौती की शिकायत दर्ज कराना) में सक्रिय रहते हैं।
| पारिवारिक आयाम / मूल्य | व्यावहारिक उदाहरण | मुख्य परीक्षा हेतु महत्वपूर्ण |
| त्याग और सहभागिता (Sharing) | शालिनी द्वारा सिल्क के बजाय सूती ड्रेस स्वीकार करना। | व्यक्तिगत हितों पर सामूहिक पारिवारिक हितों को प्राथमिकता देना। |
| बदलती लैंगिक गतिशीलता | तेनजिंग के पिता द्वारा घरेलू काम और रसोई संभालना। | पारंपरिक रूढ़िवादिता को तोड़कर श्रम का लैंगिक विभाजन कम करना। |
| सामाजिक पूंजी (Social Capital) | तेनजिंग के दादा द्वारा पड़ोसियों की मदद करना। | परिवार नागरिक समाज (Civil Society) और सामुदायिक एकजुटता की नींव है। |
| भविष्य की वित्तीय सुरक्षा | अप्रत्याशित जरूरतों के लिए बचत की आपसी चर्चा। | भारतीय परिवारों में आर्थिक नियोजन और मितव्ययिता (Frugality) का मूल्य। |
समुदाय (Community)
- परिभाषा: परिवारों का एक ऐसा समूह जो आपस में और अपने आस-पास के लोगों से जुड़ा होता है, ‘समुदाय’ कहलाता है।
- एकत्र होने के कारण: त्योहार मनाने, भोज (Feasts), शादियों और अन्य सामाजिक आयोजनों के लिए लोग एक साथ आते हैं।
1. ग्रामीण संदर्भ में समुदाय (Community in Rural Context)
- कृषि में सहयोग: ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि तैयार करने, बुआई करने और फसलों की कटाई जैसे कृषि कार्यों में लोग एक-दूसरे का सामूहिक सहयोग करते हैं।
- साझा प्राकृतिक संपदा (Common Pool Resources): समय के साथ समुदायों ने पानी, चरागाह (Grazing lands) और वन उपज जैसे साझा संसाधनों के उपयोग के लिए अलिखित नियम विकसित किए।
- अधिकार और कर्तव्य: ये अलिखित नियम समुदायों को संसाधनों तक सुरक्षित पहुँच प्रदान करते हैं, लेकिन साथ ही प्रत्येक परिवार और व्यक्ति पर विशिष्ट कर्तव्यों (Duties) को भी लागू करते हैं। जनजातीय और ग्रामीण भारत में यह व्यवस्था आज भी सक्रिय है।
2. शहरी संदर्भ में समुदाय Community in Urban Context
- कमल परमार की पहल (अहमदाबाद, गुजरात): लगभग 20 वर्ष पहले, एक छोटे ऑटो-फैब्रिकेशन वर्कशॉप के मालिक कमल परमार ने सड़क पर रहने वाले वंचित/ड्रॉपआउट बच्चों को देखा।
- कार्रवाई: उन्होंने अपने काम के बाद प्रतिदिन शाम 5:30 से 9:30 बजे तक इन बच्चों को ट्यूशन पढ़ाना और उन्हें मुफ्त रात का भोजन (Free dinner) देना शुरू किया। जल्द ही 150 बच्चे नियमित आने लगे।
- सामुदायिक प्रतिक्रिया (Social Capital): स्थानीय स्कूल के शिक्षकों और नियमित स्कूल जाने वाले बड़े बच्चों ने इस पहल में स्वेच्छा से (Volunteers) पढ़ाना शुरू किया।
- मूल्य प्रदर्शन: यह कहानी कठिन परिस्थितियों में भी बच्चों की शिक्षा के प्रति एकाग्रता, समाज की सामूहिक जिम्मेदारी और ‘सीखने के लिए सिखाने’ के सिद्धांत को प्रदर्शित करती है।
3. समुदायों के नए और विविध रूप
- रेसिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA): शहरी क्षेत्रों में पिछले 30-40 वर्षों में उभरा एक नया समुदाय। ये कचरा प्रबंधन, स्वच्छता और पालतू जानवरों की देखभाल के लिए अपने नियम खुद बनाते हैं।
- पारस्परिक निर्भरता (Interdependence): आधुनिक जटिल समाजों में कोई भी समुदाय आत्मनिर्भर नहीं है। उदाहरण के लिए, एक RWA आपूर्ति के लिए व्यापारिक समुदाय पर और कचरा निपटान के लिए नगर निगम के कर्मचारियों पर निर्भर करता है।
- समुदाय के बहुआयामी रूप: संदर्भ के आधार पर समुदाय के विभिन्न रूप हो सकते हैं:
- जातिगत आधार पर: एक जाति या उसकी उप-जाति।
- धार्मिक व क्षेत्रीय आधार पर: जैसे मुंबई का पारसी समुदाय, चेन्नई का सिख समुदाय या अमेरिका का भारतीय समुदाय।
- हित और कार्य के आधार पर: केरल का वैज्ञानिक समुदाय या किसी स्कूल का खेल/कला समुदाय, NCC और NSS समूह।