21 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की ‘स्माइल’ योजना की समीक्षा, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार व नीली अर्थव्यवस्था के तहत भारत द्वारा WTO मत्स्य पालन सब्सिडी समझौते की स्वीकृति, ग्रामीण विकास मंत्रालय के भूमि संसाधन विभाग द्वारा गोवा में संचालित ‘नक्शा’ पायलट प्रोजेक्ट पर जारी आधिकारिक स्पष्टीकरण, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी कोर उद्योगों के सूचकांक (ICI) की नई श्रृंखला और भारत की समृद्ध अमूर्त विरासत के संरक्षण के लिए संस्कृति मंत्रालय के ‘नेशनल मिशन ऑन कल्चरल मैपिंग’ (NMCM) एवं ‘मेरा गांव मेरी धरोहर’ (MGMD) पोर्टल के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई है।
स्माइल (SMILE) योजना: ‘भिक्षावृत्ति मुक्त भारत’ की दिशा में कदम
- प्रारंभिक परीक्षा: स्माइल योजना, सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, ‘भिक्षावृत्ति मुक्त भारत’ पहल, स्माइल-बेगरी नेशनल पोर्टल।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं; गरीबी, भूख और सामाजिक सशक्तिकरण से संबंधित मुद्दे।
चर्चा में क्यों?
20 जुलाई 2026 को सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने ‘स्माइल’ (SMILE) योजना की प्रगति साझा की। मंत्रालय के अनुसार, यह योजना वर्तमान में देश के 216 शहरों में लागू है और अब तक 10,200 से अधिक व्यक्तियों का पुनर्वास किया जा चुका है।
योजना की प्रमुख विशेषताएं और कार्यान्वयन रणनीति
1. स्माइल योजना का परिचय और उद्देश्य
- पूरा नाम: सपोर्ट फॉर मार्जिनालाइज्ड इंडिविजुअल्स फॉर लाइवलीहुड एंड एंटरप्राइज (SMILE)।
- नोडल मंत्रालय: सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय।
- मूल लक्ष्य: ‘भिक्षावृत्ति मुक्त भारत’ (Begging-Free India) के दृष्टिकोण को साकार करना।
- उप-योजना: इसमें ‘भिक्षावृत्ति में लगे व्यक्तियों के व्यापक पुनर्वास की केंद्रीय क्षेत्र योजना’ शामिल है।
2. योजना का विस्तार और भावी लक्ष्य (2026-31)
- शहरों का कवरेज: योजना अभी 216 शहरों में चल रही है; अगले 5 वर्षों (वित्त वर्ष 2030-31 तक) में इसे 295 शहरों तक पहुँचाने का लक्ष्य है।
- विशेष ध्यान केंद्रित क्षेत्र: स्थायी वित्त समिति (SFC) के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-31 के दौरान महानगरों, धार्मिक, पर्यटन और ऐतिहासिक स्थलों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

- पुनर्वास का लक्ष्य: कुल 35,000 व्यक्तियों के पुनर्वास का लक्ष्य तय किया गया है।
3. समग्र पुनर्वास रणनीति
- मल्टी-सेक्टर दृष्टिकोण: केवल भोजन या आश्रय नहीं, बल्कि कौशल विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, परामर्श और आर्थिक सशक्तिकरण प्रदान किया जाता है।
- अभिसरण दृष्टिकोण (Convergence Approach): केंद्र, राज्य, स्थानीय निकाय (ULBs), जिला प्रशासन और गैर-सरकारी संगठन मिलकर पहचान, बचाव और समाज में पुनर्एकीकरण का काम करते हैं।
4. डिजिटल निगरानी और पारदर्शिता
- स्माइल-बेगरी नेशनल पोर्टल: शेल्टर होम और पुनर्वास केंद्रों के पंजीकरण, निगरानी और ट्रैकिंग के लिए डिजिटल पोर्टल की व्यवस्था की गई है।
- क्षमता निर्माण: कार्यान्वयन एजेंसियों के लिए नए दिशानिर्देश जारी किए गए हैं और जागरूकता अभियानों को बढ़ावा दिया जा रहा है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | त्वरित तथ्य |
| योजना का नाम | स्माइल – SMILE (Support for Marginalized Individuals for Livelihood and Enterprise)। |
| संबंधित मंत्रालय | सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय। |
| योजना का स्वरूप | केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme)। |
| लक्ष्य (2030-31 तक) | 295 शहरों को कवर करना और 35,000 व्यक्तियों का पुनर्वास। |
| डिजिटल पोर्टल | स्माइल-बेगरी नेशनल पोर्टल (SMILE-Beggary National Portal)। |
भारत ने डब्ल्यूटीओ (WTO) मत्स्य पालन सब्सिडी समझौते को दी स्वीकृति
- प्रारंभिक परीक्षा: विश्व व्यापार संगठन (WTO), मत्स्य पालन सब्सिडी समझौता (AFS), प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY), विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) नियम 2025।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): अंतर्राष्ट्रीय संगठन (WTO) और भारत से संबंधित मुद्दे; भारतीय अर्थव्यवस्था तथा नियोजन; खाद्य प्रसंस्करण और संबंधित उद्योग (मत्स्य पालन क्षेत्र)।
चर्चा में क्यों?
भारत ने विश्व व्यापार संगठन (WTO) के ‘मत्स्य पालन सब्सिडी समझौते‘ (Agreement on Fisheries Subsidies – AFS) की औपचारिक स्वीकृति का दस्तावेज (Instrument of Acceptance) जमा कर दिया है। वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने इसे WTO की महानिदेशक को सौंपा, जिसके साथ ही भारत आधिकारिक रूप से इस समझौते का पक्षकार बन गया है।
मुख्य बिंदु: शोध के प्रमुख निष्कर्ष और वैज्ञानिक महत्व
1. डब्ल्यूटीओ मत्स्य पालन सब्सिडी समझौता क्या है?
- पहला पर्यावरण-केंद्रित समझौता: जून 2022 में 12वें डब्ल्यूटीओ मंत्री स्तरीय सम्मेलन (Geneva) में सर्वसम्मति से अपनाया गया यह पहला बहुपक्षीय समझौता है जो पर्यावरणीय स्थिरता पर केंद्रित है।
- लागू होने की तिथि: दो-तिहाई सदस्यों की स्वीकृति मिलने के बाद यह समझौता 15 सितंबर 2025 को लागू हुआ था।
- भारत की स्थिति: भारत इस समझौते का समर्थन करने वाला WTO का 123वां सदस्य देश बन गया है।
2. समझौते का दायरा
- समुद्री मत्स्य पालन पर लागू: यह समझौता केवल समुद्री जंगली मछली पकड़ने (Marine Wild Capture Fishing) और समुद्र में मत्स्य संबंधी गतिविधियों पर दी जाने वाली सब्सिडी को विनियमित करता है।
- मछली पालन और अंतर्देशीय मत्स्य बाहर: जलकृषि (Aquaculture/Shrimp Farming) और अंतर्देशीय (Inland) मत्स्य पालन को इस समझौते के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
3. पारंपरिक और छोटे मछुआरों की सुरक्षा व वैश्विक लाभ
- अवैध गतिविधियों पर रोक: यह अवैध, अनियंत्रित और अघोषित (IUU) मत्स्यन तथा अत्यधिक दोहन (Overfished Stocks) के लिए दी जाने वाली हानिकारक सब्सिडी पर प्रतिबंध लगाता है।
- औद्योगिक बेड़ों पर नियंत्रण: बड़े औद्योगिक जहाजों और दूरस्थ समुद्री क्षेत्रों (Distant Water Fishing Nations) में जाने वाले भारी सब्सिडी प्राप्त विदेशी जहाजों पर लगाम लगेगी, जिससे भारत जैसे छोटे मछुआरों वाले देशों को बराबरी का अवसर मिलेगा।
- भारतीय निर्यात को बढ़ावा: जिम्मेदार और टिकाऊ सीफूड निर्यातक के रूप में भारत की साख बढ़ेगी, जिससे वैश्विक बाजारों में बेहतर पहुँच मिलेगी। (साथ ही, भारत का अधिकांश झींगा निर्यात ‘एक्वाकल्चर’ से आता है जो इस प्रतिबंध से पूरी तरह मुक्त है)।
4. भारत का घरेलू ढांचा और नीतिगत सुरक्षा
- सशक्त नियामक ढांचा: भारत ने ‘विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) नियम 2025’ और ‘हाई सीज (High Seas) के लिए दिशानिर्देश 2025’ के जरिए पहले ही एक मजबूत नियामक ढांचा तैयार कर लिया है।
- पीएम मत्स्य संपदा योजना: ‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ (PMMSY) के माध्यम से क्षमता निर्माण और बुनियादी ढांचे को लगातार मजबूत किया जा रहा है।
- छोटे मछुआरों के हित सुरक्षित: भारत का घरेलू ढांचा छोटे व पारंपरिक मछुआरों की आजीविका की पूरी सुरक्षा करता है और डब्ल्यूटीओ में भारत के नीतिगत अधिकारों को बनाए रखता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य |
| समझौते का नाम | WTO मत्स्य पालन सब्सिडी समझौता (Agreement on Fisheries Subsidies – AFS)। |
| स्वीकृति की तिथि | 20 जुलाई 2026 (भारत 123वां सदस्य बना)। |
| समझौते का मुख्य उद्देश्य | अवैध (IUU) और अत्यधिक मत्स्यन को मिलने वाली हानिकारक सब्सिडी को समाप्त करना। |
| दायरे से बाहर (Exclusions) | जलकृषि (Aquaculture/झींगा पालन) और अंतर्देशीय (Inland) मत्स्य पालन। |
| सहायक राष्ट्रीय योजनाएं | प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) तथा EEZ/High Seas नियम 2025। |
गोवा में ‘नक्शा’ पायलट प्रोजेक्ट पर भूमि संसाधन विभाग का स्पष्टीकरण
- प्रारंभिक परीक्षा: नक्शा पायलट प्रोजेक्ट, डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP), भूमि संसाधन विभाग (DoLR)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): सरकारी नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप; भारतीय अर्थव्यवस्था तथा नियोजन; भूमि सुधार (Land Reforms) और शासन में आईटी के अनुप्रयोग।
चर्चा में क्यों?
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत भूमि संसाधन विभाग (DoLR) ने गोवा के निपटान और भूमि रिकॉर्ड निदेशालय (DSLR) के साथ मिलकर ‘नक्शा’ पायलट प्रोजेक्ट के संबंध में फैली अफवाहों का आधिकारिक खंडन किया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस सर्वेक्षण से मूल भूमि रिकॉर्ड, कानूनी स्वामित्व और संपत्ति की सीमाओं पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा और सभी मौजूदा रिकॉर्ड पूरी तरह सुरक्षित रहेंगे।
शोध के प्रमुख निष्कर्ष
1. नक्शा प्रोजेक्ट क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?
- डिजिटल इंडिया से जुड़ाव: यह डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP) के तहत लागू किया गया एक जीआईएस-आधारित (GIS-based) शहरी भूखंड मैपिंग पहल है।
- शहरी प्रशासन का आधुनिकीकरण: इसका मुख्य उद्देश्य नगर नियोजन (Town Planning) को बेहतर बनाना, भूमि प्रशासन को आधुनिक बनाना और सार्वजनिक उपयोग की सुविधाओं का सही खाका तैयार करना है।
- व्यापक पहुंच: यह पायलट प्रोजेक्ट विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के शहरी क्षेत्रों में लागू किया जा रहा है।
2. अनिवासी (NRI) और अनुपस्थित भू-स्वामियों के अधिकारों की सुरक्षा
- स्वामित्व पर कोई असर नहीं: सर्वेक्षण के दौरान यदि कोई मकान मालिक या एनआरआई (NRI) उपस्थित नहीं है, तो भी उसके कानूनी स्वामित्व अधिकारों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
- बहु-स्तरीय सत्यापन: अनुपस्थित मालिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए इसमें बहु-स्तरीय सत्यापन (Verification Stages) और सार्वजनिक समीक्षा विंडो का प्रावधान किया गया है।
- पड़ोसियों का दावा अमान्य: भूमि का स्वामित्व केवल वैध कानूनी दस्तावेजों से तय होगा; सर्वेक्षण के समय उपस्थित रहने मात्र से कोई तीसरा पक्ष या पड़ोसी जमीन पर दावा नहीं कर सकता।
3. मैपिंग अभ्यास बनाम भूमि अधिग्रहण और कर
- केवल एक मैपिंग अभ्यास: ‘नक्शा’ केवल भूमि की वर्तमान भौतिक स्थिति का रिकॉर्ड तैयार करने का मैपिंग अभ्यास है, यह कोई भूमि अधिग्रहण (Land Acquisition) प्रक्रिया नहीं है।
- कर में बढ़ोतरी नहीं: सरकार इस प्रोजेक्ट के माध्यम से न तो निजी जमीनों का अधिग्रहण कर रही है और न ही इसका उद्देश्य स्थानीय संपत्ति कर (Property Tax) बढ़ाना है।
- कानूनी विवादों पर असर नहीं: जमीन से जुड़े पुराने या चल रहे कानूनी व सीमा विवादों पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा; वे पूर्ववत संबंधित अदालतों द्वारा ही निपटाए जाएंगे।
4. आगामी औपचारिक जांच प्रक्रिया और नागरिक मार्गदर्शन
- जांच की समय-सीमा: धरातलीय सत्यापन (Ground-truthing) पूरा होने के बाद औपचारिक जांच प्रक्रिया 16 जुलाई से 14 अगस्त 2026 तक संचालित की जाएगी।
- दस्तावेजों की प्रस्तुति: संपत्ति मालिकों को मडगांव स्थित ‘निरीक्षक सर्वेक्षण और भूमि रिकॉर्ड’ (ISLR) कार्यालय में अपने स्वामित्व दस्तावेजों के साथ उपस्थित होना होगा।
- अधिकारियों द्वारा मार्गदर्शन: नागरिकों को किसी तकनीकी सर्वेक्षण ज्ञान की आवश्यकता नहीं है; नियुक्त अधिकारी प्रक्रिया में उनका पूरा मार्गदर्शन करेंगे।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| प्रोजेक्ट का नाम | नक्शा – NAKSHA (National Geospatial Knowledge-based Land Survey of Urban Habitations)। |
| मूल योजना | डिजिटल इंडिया भूमि रिकॉर्ड आधुनिकीकरण कार्यक्रम (DILRMP)। |
| संबंधित मंत्रालय व विभाग | भूमि संसाधन विभाग (DoLR), ग्रामीण विकास मंत्रालय और गोवा सरकार का DSLR। |
| प्रोजेक्ट की प्रकृति | जीआईएस आधारित शहरी भूमि पार्सल मैपिंग पहल। |
| जांच अवधि | 16 जुलाई से 14 अगस्त 2026 तक (ISLR कार्यालय, मडगांव, गोवा)। |
कोर उद्योगों के सूचकांक (ICI) की नई श्रृंखला: आधार वर्ष 2022-23 जारी
- प्रारंभिक परीक्षा: कोर उद्योगों का सूचकांक (ICI), औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP), आधार वर्ष बदलाव, DPIIT।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): सरकारी नीतियां एवं आर्थिक नियोजन; भारतीय अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचा और औद्योगिक वृद्धि से संबंधित मुद्दे।
चर्चा में क्यों?
उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के आर्थिक सलाहकार कार्यालय (OEA) ने कोर उद्योगों के सूचकांक (ICI) का नया आधार वर्ष 2022-23 घोषित किया है। यह नई श्रृंखला पुराने आधार वर्ष 2011-12 का स्थान लेगी। जून 2026 के लिए इस नई श्रृंखला के तहत पहला अनंतिम सूचकांक जारी किया गया है।
योजना की प्रमुख विशेषताएं और कार्यान्वयन रणनीति
1. नई ICI श्रृंखला (आधार वर्ष 2022-23) के मुख्य बदलाव
- लौह अयस्क शामिल (Iron Ore Included): औद्योगिक विकास में महत्व के कारण लौह अयस्क को शामिल किया गया है, जिससे कुल कोर उद्योग 8 से बढ़कर 9 हो गए हैं।
- स्टील सूचकांक में बदलाव: IIP के साथ तालमेल बिठाने के लिए स्टील सूचकांक हेतु ‘शुद्ध उत्पादन’ के स्थान पर ‘सकल उत्पादन’ (Gross Production) का उपयोग किया गया है।
- दोहरी गणना समाप्त: कोयला क्षेत्र में ‘कोयला मिडलिंग’ और ‘वाश-कोयला’ को हटाकर केवल कच्चा कोयला (Raw Coal) बनाए रखा गया है।
- लिंकिंग फैक्टर: पुरानी और नई श्रृंखला को जोड़ने के लिए समग्र ICI का लिंकिंग फैक्टर 1.47 तय किया गया है।
2. जून 2026 में कोर उद्योगों का प्रदर्शन
- वार्षिक वृद्धि दर: जून 2026 में कोर उद्योगों की वृद्धि दर बढ़कर 5.0% (वर्ष-दर-वर्ष) हो गई है।
- प्रमुख विकास चालक: लौह अयस्क (43.9%), बिजली (9.8%), सीमेंट (9.8%), स्टील (4.6%) और कोयला (1.4%) में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई।
- ऋणात्मक वृद्धि वाले क्षेत्र: प्राकृतिक गैस, कच्चा तेल, रिफाइनरी उत्पाद और उर्वरक क्षेत्रों में गिरावट देखी गई।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य |
| नया आधार वर्ष | 2022-23 (पुराना: 2011-12)। |
| जारीकर्ता संस्था | आर्थिक सलाहकार कार्यालय (OEA), DPIIT, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय। |
| कोर उद्योगों की संख्या | 9 (नया जुड़ा उद्योग: लौह अयस्क)। |
| सर्वाधिक भार वाले क्षेत्र | 1. बिजली (30.93%), 2. रिफाइनरी उत्पाद (22.57%), 3. स्टील (17.58%)। |
| न्यूनतम भार वाले क्षेत्र | उर्वरक (2.731%), प्राकृतिक गैस (3.841%), सीमेंट (4.41%)। |
फिनटेक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए सरकार और आरबीआई के प्रयास
- प्रारंभिक परीक्षा: फिनटेक, डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिनियम, रेगुलेटरी सैंडबॉक्स, नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (1930)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): सरकारी नीतियां एवं विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप; भारतीय अर्थव्यवस्था, बैंकिंग क्षेत्र में प्रौद्योगिकी के अनुप्रयोग और साइबर सुरक्षा।
चर्चा में क्यों?
वित्त राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश में फिनटेक क्षेत्र, डिजिटल लेंडिंग प्लेटफॉर्म और पेमेंट एग्रीगेटर्स को सुरक्षित व पारदर्शी बनाने के लिए कई नियामकीय कदम उठाए हैं।
फिनटेक नियामक ढांचा एवं उपभोक्ता सुरक्षा उपाय
1. फिनटेक क्षेत्र के लिए नियामकीय ढांचा
- SRO-FT ढांचा: आरबीआई ने फिनटेक क्षेत्र में नैतिक आचरण, बाजार की सत्यनिष्ठा और विवाद निवारण को बढ़ावा देने के लिए ‘सेल्फ-रेगुलेटरी ऑर्गनाइजेशन’ (SRO-FT) ढांचा जारी किया है।
- रेगुलेटरी सैंडबॉक्स: नियंत्रित वातावरण में नए वित्तीय उत्पादों और सेवाओं के परीक्षण के लिए आरबीआई द्वारा अगस्त 2019 में एक सक्षम ढांचा पेश किया गया था।
2. डिजिटल भुगतान सुरक्षा और एआई का उपयोग
- डिजिटल पेमेंट सुरक्षा नियंत्रण: वेब और मोबाइल ऐप के खतरों से निपटने के लिए आरबीआई ने इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग हेतु सुरक्षा मानकों के दिशानिर्देश जारी किए हैं।
- एआई/एमएल से धोखाधड़ी निगरानी: एनपीसीआई यूपीआई लेनदेन में धोखाधड़ी को रोकने और अलर्ट जेनरेट करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) आधारित मॉडल का उपयोग करता है।
3. डेटा सुरक्षा और साइबर अपराध नियंत्रण
- डेटा संरक्षण कानून: नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के लिए ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023’ (DPDP Act) लागू किया गया है।
- रिपोर्टिंग तंत्र: गृह मंत्रालय (MHA) ने साइबर धोखाधड़ी और अवैध लोन ऐप्स की रिपोर्टिंग के लिए ‘नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल’ (cybercrime.gov.in) और हेल्पलाइन नंबर 1930 शुरू किया है।
4. उपभोक्ता जागरूकता और शिकायत निवारण
- सचेत पोर्टल: अवैध रूप से धन जमा या संग्रह करने वाली संस्थाओं के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए राज्य स्तरीय समन्वय समिति (SLCC) और ‘सचेत’ पोर्टल की व्यवस्था है।
- जागरूकता कार्यक्रम: आरबीआई धोखाधड़ी से बचाव और जोखिम कम करने के लिए ‘इलेक्ट्रॉनिक-बैंकिंग अवेयरनेस एंड ट्रेनिंग’ (eBAAT) कार्यक्रम और जागरूकता अभियान चलाता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए विशेष त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य |
| SRO-FT ढांचा | फिनटेक कंपनियों में स्व-नियमन और पारदर्शिता के लिए आरबीआई द्वारा मई 2024 में जारी। |
| साइबर हेल्पलाइन नंबर | 1930 (नेशनल साइबरक्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल – गृह मंत्रालय द्वारा संचालित)। |
| शिकायत निवारण पोर्टल | सचेत (SACHET) – अवैध रूप से पैसे जुटाने वाली संस्थाओं की रिपोर्ट करने के लिए। |
| डेटा संरक्षण ढांचा | डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) अधिनियम 2023 (MeitY द्वारा अधिसूचित)। |
| eBAAT कार्यक्रम | इलेक्ट्रॉनिक-बैंकिंग अवेयरनेस एंड ट्रेनिंग (आरबीआई का धोखाधड़ी जागरूकता कार्यक्रम)। |
नेशनल मिशन ऑन कल्चरल मैपिंग (NMCM) और ‘मेरा गांव मेरी धरोहर’
- प्रारंभिक परीक्षा: नेशनल मिशन ऑन कल्चरल मैपिंग (NMCM), मेरा गांव मेरी धरोहर (MGMD) पोर्टल, भारत की प्रमुख लोक कलाएं, नृत्य और पारंपरिक शिल्प।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): भारतीय संस्कृति, प्राचीन काल से आधुनिक काल तक के कला रूपों, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू; सरकारी नीतियां एवं विकास के लिए हस्तक्षेप।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से ‘नेशनल मिशन ऑन कल्चरल मैपिंग’ (NMCM) और इसकी प्रमुख पहल ‘मेरा गांव मेरी धरोहर’ (MGMD) की वर्तमान स्थिति और इसके संचालन से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट किया है।
मिशन के प्रमुख प्रावधान, सीमाएं और सांस्कृतिक मैपिंग
1. ‘मेरा गांव मेरी धरोहर’ (MGMD) और डेटा प्रबंधन
- गांव-स्तरीय मैपिंग: यह मिशन ‘मेरा गांव मेरी धरोहर’ पहल के माध्यम से देश भर में गांव-स्तरीय सांस्कृतिक मैपिंग का कार्य करता है।
- कलाकारों का पंजीकरण नहीं: NMCM केवल सांस्कृतिक संपत्तियों और कलाकारों की प्रोफाइल दर्ज करता है; यह कलाकारों या सांस्कृतिक चिकित्सकों का कोई आधिकारिक पंजीकरण नहीं करता है।
- डेटा संग्रहण का तरीका: डेटा का रखरखाव गांव-वार (Village-wise) किया जाता है, राज्य-वार या श्रेणी-वार (Category-wise) नहीं।
2. वित्तीय सहायता और क्लस्टर डेटा की सीमाएं
- सामाजिक सुरक्षा का अभाव: चूंकि इस मिशन में कलाकारों का पंजीकरण नहीं होता, इसलिए इसके तहत कोई वित्तीय सहायता, बीमा या सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने का प्रावधान नहीं है।
- सांस्कृतिक क्लस्टर: मिशन के तहत अलग से सांस्कृतिक क्लस्टरों का डेटा नहीं रखा जाता, केवल गांव के प्रोफाइल में सांस्कृतिक जानकारी दर्ज होती है।
- अंतर-मंत्रालयी एकीकरण नहीं: वर्तमान में इस सांस्कृतिक मैपिंग डेटाबेस को पर्यटन, शिक्षा या कौशल विकास पहलों के साथ एकीकृत करने का कोई प्रावधान नहीं है।
3. प्रमुख लोक कलाएं और कलाकार (संस्कृति मैपिंग के तहत चिन्हित)
- गोवा: जागोर लोक रंगमंच (Tulsi Velingkar), फुगड़ी/ढालो।
- राजस्थान: बाक्या वादक (Jaman Lal Bhand), कावड़ कला (Satya Narayan Suthar), पावा वादक (Punma Ram & Padma Ram)।
- कर्नाटक: यक्षगान – बडागुटिट्टू (Chittani Ramachandra Hegde), जेनु कुरुबा लोक संगीत (Kariya)।
- पश्चिम बंगाल: बाउल गायक (Abdul Halim), तारर पुतुल – पुतुल नाच (Thakurdas Saboni)।
- उत्तर प्रदेश: पखावज वादक (Nathuni Paswan), कोल संगीत (Bela)।
- केरल: चेंडा/मेलम (Peruvanam Kuttan Marar), गधिका (Karinkali Gopi)।
- मध्य प्रदेश: गोंड कला (Durga Bai Vyam)।
4. सांस्कृतिक संस्थान और लोक कला समूह
- पश्चिम बंगाल: गोमीरा मास्क (माहिसबथान ग्रामीण हस्तशिल्पी समबाय समिति), छोऊ नृत्य (सीमा महतो महिला छोऊ समिति)।
- अरुणाचल प्रदेश: पोनुंग नृत्य (आदि कल्चरल ग्रुप), न्योकुम नृत्य (न्योशी डांस एसेम्बल)।
- राजस्थान: कालबेलिया, चरी, घूमर और ग्रामीण भवाई नृत्य (राजकी सपेरा मंडली), रुपायन संस्थान (लोककथा संरक्षण)।
- गुजरात व महाराष्ट्र: राठवा कला केंद्र (गुजरात), वारली पेंटिंग (वाडेया ब्रदर्स – महाराष्ट्र), गोंधळ प्रस्तुति (शिव मल्हार जागरण गोंधळ पार्टी – महाराष्ट्र)।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए त्वरित तथ्य
| घटक / बिंदु | प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य |
| मिशन का नाम | नेशनल मिशन ऑन Cultural Mapping (NMCM)। |
| प्रमुख पहल | मेरा गांव मेरी धरोहर (MGMD – Mera Gaon Meri Dharohar)। |
| नोडल मंत्रालय | संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार। |
| मुख्य उद्देश्य | ग्रामीण स्तर की सांस्कृतिक विरासत, कला रूपों और सांस्कृतिक संपत्तियों का दस्तावेजीकरण। |