22 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत कपड़ा मंत्रालय की ‘ग्रेट’ योजना के तहत तकनीकी वस्त्र क्षेत्र में स्टार्टअप्स और नवाचार को दिए जा रहे प्रोत्साहन, पश्चिमी घाट में खोजे गए ‘एलोग्राफा’ कवक की 5 नई प्रजातियों के पारिस्थितिकीय महत्व तथा स्थानीय शासन को पारदर्शी बनाने वाली ‘मेरी समिति मेरा पटल’ पहल, CDSCO द्वारा भारत की पहली डेंगू वैक्सीन ‘Qdenga®’ को मिली तकनीकी मंजूरी, तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार 2025 के ऑनलाइन नामांकन, ‘मिशन golden स्पाइस’ के अंतर्गत मेघालय की उच्च-करक्यूमिन लाकाडोंग हल्दी के कायाकल्प, अल्पसंख्यक समुदायों हेतु PM VIKAS योजना, बहुराष्ट्रीय वायुसेना युद्धाभ्यास ‘पिच ब्लैक 2026’ और वस्त्र उद्योग में परिपत्र अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वाली ‘टैक्स-इको’ पहल का विस्तृत विश्लेष्ण किया गया है।
ग्रेट योजना: तकनीकी वस्त्र क्षेत्र में इनोवेशन और स्टार्टअप्स को बढ़ावा
- प्रारंभिक परीक्षा: ग्रेट योजना, राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM), वस्त्र मंत्रालय, स्मार्ट एवं फंक्शनल टेक्सटाइल्स।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): सरकारी नीतियां और विभिन्न क्षेत्रों में विकास के लिए हस्तक्षेप; भारतीय अर्थव्यवस्था, औद्योगिक वृद्धि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां और नई तकनीकों का विकास।
चर्चा में क्यों?
वस्त्र राज्य मंत्री श्री पवित्र मार्गेरिटा ने लोकसभा में बताया कि वस्त्र मंत्रालय वर्ष 2023 से राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM) के तहत ‘ग्रेट’ योजना को सफलतापूर्वक लागू कर रहा है। इस योजना का उद्देश्य युवा अन्वेषकों और वैज्ञानिकों को तकनीकी वस्त्र क्षेत्र में अपने विचारों को व्यावसायिक उत्पादों में बदलने में मदद करना है।
योजना की प्रमुख विशेषताएं और कार्यान्वयन रणनीति
1. ग्रेट योजना का परिचय और वित्तीय सहायता
- पूरा नाम: ग्रांट फॉर रिसर्च एंड एंटरप्रेन्योरशिप अक्रॉस एस्पायरिंग इनोवेटर्स इन टेक्निकल टेक्सटाइल्स (GREAT)।
- नोडल मंत्रालय: वस्त्र मंत्रालय (National Technical Textiles Mission के तहत)।
- वित्तीय सहायता: प्रति स्टार्टअप अधिकतम 50 लाख रुपये की वित्तीय मदद दी जाती है।
- वर्तमान स्थिति: अब तक 31 स्टार्टअप्स को मंजूरी मिली है। कुल लागत 15.40 करोड़ रुपये है, जिसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 13.65 करोड़ रुपये है।
2. राज्यवार स्टार्टअप प्रदर्शन
- शीर्ष राज्य: महाराष्ट्र सबसे आगे है (7 स्टार्टअप्स), इसके बाद तमिलनाडु (6 स्टार्टअप्स) और दिल्ली (5 स्टार्टअप्स) का स्थान है।
- अन्य राज्य: गुजरात (4), उत्तर प्रदेश (3), कर्नाटक (2), आंध्र प्रदेश (1), पंजाब (1), राजस्थान (1) और उत्तराखंड (1)।
- शैक्षणिक संस्थानों का समर्थन: योजना के तहत विभिन्न राज्यों के प्राइवेट और पब्लिक शैक्षणिक संस्थानों को भी तकनीकी वस्त्रों में शिक्षा और अनुसंधान के लिए अनुदान दिया जा रहा है।
3. नवोन्मेष के प्रमुख तकनीक क्षेत्र
- स्मार्ट टेक्सटाइल्स: ग्रेफीन-आधारित उत्पाद, तापमान के प्रति संवेदनशील कपड़े, ऊर्जा संचयन वाले फैब्रिक और स्वास्थ्य सेवा के लिए शेप-मेमोरी वाले वस्त्र।
- टिकाऊ व पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद: भांग-बायोप्लास्टिक कंपोजिट (Hemp-bioplastic), बायोडिग्रेडेबल टायर यार्न और शैवाल (Algae) से बनी लेदर सामग्री।
- उच्च प्रदर्शन कंपोजिट व मेडिकल क्षेत्र: ऑटोमोटिव, निर्माण व रक्षा अनुप्रयोगों के लिए उच्च-क्षमता वाले कंपोजिट; साथ ही सर्जिकल सिमुलेटर और रोगाणुरोधी (Antimicrobial) वस्त्र।
4. आउटरीच और क्षमता निर्माण
- कार्यशालाएं एवं सेमिनार: शोधकर्ताओं और स्टार्टअप्स को उद्योग के हितधारकों, खरीदारों और विक्रेताओं से जोड़ने के लिए वर्कशॉप, प्रदर्शनियां और राष्ट्रीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
- अखिल भारतीय पहुंच: यह पूरे देश में समान रूप से खुली योजना है, जिससे दूरदराज के जिलों के पात्र स्टार्टअप्स भी लाभ उठा सकते हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| योजना का नाम | ग्रेट – GREAT (Grant for Research and Entrepreneurship across Aspiring Innovators in Technical Textiles)। |
| मूल मिशन | राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन – NTTM (वस्त्र मंत्रालय)। |
| शुरुआत वर्ष | 2023। |
| वित्तीय मदद सीमा | प्रति स्वीकृत स्टार्टअप अधिकतम 50 लाख रुपये। |
| सब्सिडी का दायरा | केवल तकनीकी वस्त्र क्षेत्र (स्मार्ट टेक्सटाइल, मेडिकल, डिफेंस व बायो-कंपोजिट)। |
पश्चिमी घाट में ‘एलोग्राफा’ कवक की 5 नई प्रजातियों की खोज
- प्रारंभिक परीक्षा: पश्चिमी घाट, जैव विविधता हॉटस्पॉट, एलोग्राफा प्रजातियां, लाइकेन और उनका पारिस्थितिक महत्व.
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारतीयों की उपलब्धियां तथा नई खोजें.
चर्चा में क्यों?
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान, MACS आगरकर अनुसंधान संस्थान (पुणे) के वैज्ञानिकों ने भारत के जैव-विविधता समृद्ध क्षेत्र ‘पश्चिमी घाट’ से लाइकेन बनाने वाले कवक के ‘एलोग्राफा’ वंश की 5 नई प्रजातियों की खोज की घोषणा की है।
खोज की प्रमुख विशेषताएं और पारिस्थितिक महत्व
1. एलोग्राफा क्या है और इसका महत्व
- लाइकेन कवक (forming Fungi): यह ग्राफिडेसी परिवार से संबंधित लिपि लाइकेन कवक का एक वंश है, जिसमें शैवाल या सायनोबैक्टीरिया के साथ सहजीवन (Symbiosis) देखा जाता है।
- पर्यावरण सूचक (Bio-indicator): एलोग्राफा की प्रजातियां प्रदूषण और आवास परिवर्तनों के प्रति बेहद संवेदनशील होती हैं, जो वन स्वास्थ्य और पर्यावरण गुणवत्ता के उत्कृष्ट सूचक के रूप में कार्य करती हैं।
- वैश्विक विविधता: इस वंश के अंतर्गत दुनिया भर में 200 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं।
2. खोजी गई 5 नई प्रजातियां
- एलोग्राफा केरेलेंसिस: केरल राज्य के नाम पर नामित।
- एलोग्राफा नायके: भारतीय लाइकेन वैज्ञानिक डॉ. संजीव नायक के सम्मान में नामित।
- एलोग्राफा पैराकोनसांगुइनिया।
- एलोग्राफा पर्सिस्टिनस्पर्सा।
- एलोग्राफा सेमिकाबोनिसाटा।
3. शोध पद्धति और वैज्ञानिक तकनीक
- एकीकृत वर्गीकरण (Integrative Taxonomy): शोधकर्ताओं ने पारंपरिक रूपरेखा (Morphology) के साथ-साथ आधुनिक आणविक फाइलोगिनेटिक्स (Molecular Phylogenetics) का संयोजन किया।
- तीन जेनेटिक मार्कर्स: प्रजातियों के विकासवादी संबंधों को समझने के लिए mtSSU, nrLSU और RPB2 नामक तीन डीएनए मार्कर्स का उपयोग किया गया।
- अकादमिक प्रकाशन: यह ऐतिहासिक शोध प्रतिष्ठित जर्नल ‘मायकोलॉजिकल प्रोग्रेस’ में प्रकाशित हुआ है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| खोज का नाम | एलोग्राफा वंश की 5 नई कवक (Lichen) प्रजातियां। |
| खोज का स्थान | पश्चिमी घाट (उष्णकटिबंधीय वन आवास)। |
| अनुसंधान संस्थान | MACS आगरकर अनुसंधान संस्थान (ARI), पुणे (DST के अंतर्गत)। |
| पारिस्थितिक कार्य | वन स्वास्थ्य, प्रदूषण और पर्यावरण परिवर्तन के जैव-सूचक (Bio-indicators)। |
| इस्तेमाल किए गए DNA मार्कर्स | mtSSU, nrLSU, और RPB2। |
‘मेरी समिति मेरा पटल’ पहल
- प्रारंभिक परीक्षा: मेरी समिति मेरा पटल, प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (PACS), राष्ट्रीय सहकारिता प्रशिक्षण परिषद (NCCT), RICM चंडीगढ़।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप; कृषि और संबद्ध क्षेत्र, सहकारिता आंदोलन और शासन में डिजिटल तकनीक के अनुप्रयोग।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर देते हुए ‘मेरी समिति मेरा पटल’ पहल की वर्तमान प्रगति रिपोर्ट पेश की। इस उत्तर के माध्यम से सरकार ने संसद के पटल पर यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय सहकारिता प्रशिक्षण परिषद (NCCT) के तहत RICM चंडीगढ़ द्वारा शुरू की गई यह महत्वाकांक्षी डिजिटल पहल किस प्रकार प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के सशक्तीकरण, प्रशिक्षण और प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ाने में प्रभावी भूमिका निभा रही है।
पहल के मुख्य प्रावधान, उद्देश्य और लाभ
1. ‘मेरी समिति मेरा पटल’ पहल क्या है?
- स्वायत्त अवधारणा: यह पहल राष्ट्रीय सहकारिता प्रशिक्षण परिषद (NCCT) के अंतर्गत क्षेत्रीय सहकारी प्रबंध संस्थान (RICM), चंडीगढ़ द्वारा स्वतंत्र रूप से शुरू की गई है।
- मुख्य उद्देश्य: प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) की प्रशिक्षण जरूरतों को पूरा करना, उनके प्रशासन (Governance) में सुधार करना और उनकी दृश्यता (Visibility) बढ़ाना।
2. डिजिटल प्रोफाइलिंग और पारदर्शिता
- डिजिटल पहचान: यह पहल PACS और बहुउद्देश्यीय सहकारी समितियों (MPCS) की डिजिटल प्रोफाइल तैयार करती है।
- पारदर्शी डेटा प्रणाली: यह वास्तविक समय में केंद्रीकृत और पारदर्शी डेटा प्रणाली उपलब्ध कराती है, जिससे सटीक निर्णय लेने में मदद मिलती है।
- पब्लिक डोमेन में विवरण: इसमें प्रत्येक समिति का इतिहास, सदस्यता, दी जाने वाली सेवाएं, लागू योजनाएं और प्रशासनिक ढांचा सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित होता है।
3. कार्यान्वयन का क्षेत्र और भावी योजना
- वर्तमान अधिकार क्षेत्र: यह पहल केवल RICM चंडीगढ़ के अधिकार क्षेत्र वाले क्षेत्रों जैसे पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, चंडीगढ़ और लेह-लद्दाख में लागू है।
- राष्ट्रव्यापी विस्तार नहीं: वर्तमान में इस पोर्टल को पूरे देश में विस्तारित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| पहल का नाम | मेरी समिति मेरा पटल। |
| शुरुआत करने वाली संस्था | RICM चंडीगढ़ (NCCT के अंतर्गत)। |
| लक्ष्य निकाय | प्राथमिक कृषि ऋण समितियां (PACS) और MPCS। |
| कवर किए गए क्षेत्र | पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, J&K, दिल्ली, चंडीगढ़, और लेह-लद्दाख। |
| प्रमुख कार्य | PACS का डिजिटल प्रोफाइलिंग, रियल-टाइम डेटा पारदर्शिता और शासन में सुधार। |
CDSCO ने भारत की पहली डेंगू वैक्सीन ‘Qdenga®’ को दी मंजूरी
- प्रारंभिक परीक्षा: सीडीएसको, डेंगू टेट्रावेलेंट वैक्सीन (Qdenga®), रीकॉम्बीनेंट डीएनए तकनीक, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) प्री-क्वालिफिकेशन।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित मुद्दे; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास और अनुप्रयोग; जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) और संक्रामक रोग नियंत्रण।
चर्चा में क्यों?
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने भारत की पहली डेंगू वैक्सीन ‘Qdenga®’ को देश में विपणन स्वीकृति दे दी है। इस मंजूरी से भारत में डेंगू की रोकथाम और नियंत्रण संबंधी राष्ट्रीय प्रयासों को अत्यधिक मजबूती मिलेगी। जर्मनी की प्रसिद्ध कंपनी ‘टकेडा जीएमबीएच’ द्वारा विकसित और भारत में आयात की जाने वाली इस ‘लाइव एटेन्यूएटेड टेट्रावेलेंट’ वैक्सीन को औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत कड़े वैज्ञानिक मूल्यांकन, गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता मानकों की पुष्टि के बाद अनुमोदित किया गया है।
वैक्सीन के तकनीकी पहलू, प्रभावकारिता और महत्व
1. Qdenga® वैक्सीन की तकनीकी संरचना
- वैक्सीन का प्रकार: यह रीकॉम्बीनेंट डीएनए तकनीक द्वारा विकसित एक लाइव, एटेन्यूएटेड टेट्रावेलेंट (चारों सेरोटाइप पर प्रभावी) डेंगू वैक्सीन है।
- निर्माता व आयातक: इसका निर्माण ‘टकेडा जीएमबीएच’ (जर्मनी) द्वारा किया गया है तथा इसे भारत में ‘एम/एस टकेडा बायोफार्मास्यूटिकल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड’ द्वारा आयात किया जाएगा।
- तकनीकी विशेषताएं: यह वेरो कोशिकाओं में उत्पादित होती है, जिसमें डेंगू वायरस टाइप-2 के बैकबोन में सेरोटाइप-विशिष्ट सतह प्रोटीन जोड़े गए हैं। इसमें जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गेनिज़्म (GMOs) शामिल हैं।
2. खुराक और उपयोग की आयु-सीमा
- लक्षित आयु वर्ग: यह वैक्सीन 4 से 60 वर्ष की आयु के व्यक्तियों में डेंगू बीमारी की रोकथाम के लिए स्वीकृत की गई है।
- खुराक और अंतराल: यह त्वचा के नीचे (Subcutaneous injection) दी जाती है। इसकी 0.5 ml की 2 खुराकें 3 महीने के अंतराल पर (0 और 3 महीने) दी जाती हैं।
3. वैश्विक साख और नैदानिक परीक्षण
- वैश्विक अनुमोदन: इस वैक्सीन को यूरोपीय संघ, यूके, स्विट्जरलैंड, इंडोनेशिया और थाईलैंड सहित 42 देशों में मंजूरी मिल चुकी है और यह WHO से प्री-क्वालिफाइड भी है।
- भारत में परीक्षण: भारत में भी 4 से 60 वर्ष की आयु के लोगों पर चरण-3 का सुरक्षा और इम्युनोजेनिसीटी अध्ययन सफलतापूर्वक पूरा किया गया है।
- सुरक्षा रिकॉर्ड: विश्व स्तर पर इसकी 2.4 करोड़ (24 मिलियन) से अधिक खुराकें वितरित की जा चुकी हैं।
4. राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम में भूमिका
- पूरक की भूमिका: यह वैक्सीन ‘राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम’ (NVBDCP) के तहत चल रहे मच्छर नियंत्रण, निगरानी और प्रारंभिक निदान जैसे उपायों के पूरक के रूप में काम करेगी।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| वैक्सीन का नाम | Qdenga® (Dengue Tetravalent Vaccine – Live, Attenuated)। |
| स्वीकृति देने वाली संस्था | केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO)। |
| निर्माता कंपनी | टकेडा जीएमबीएच (Takeda GmbH), जर्मनी। |
| तकनीक | रीकॉम्बीनेंट डीएनए तकनीक (GMO आधारित)। |
| उपयुक्त आयु सीमा | 4 से 60 वर्ष। |
| खुराक अनुसूची (Dosage Schedule) | 2 खुराकें (3 महीने के अंतराल पर) – सबक्यूटेनियस इंजेक्शन। |
| वैश्विक स्थिति | WHO प्री-क्वालिफाइड; 42 देशों में स्वीकृत। |
तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार 2025: ऑनलाइन नामांकन शुरू
- प्रारंभिक परीक्षा: तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार (TNNAA), युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय, गृह मंत्रालय का राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): युवाओं का विकास, सरकारी नीतियां और खेल व साहसिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले राष्ट्रीय पुरस्कार।
चर्चा में क्यों?
युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय ने ‘तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार (TNNAA) 2025’ के लिए ऑनलाइन नामांकन आमंत्रित किए हैं। यह भारत में साहसिक गतिविधियों और एडवेंचर स्पोर्ट्स के क्षेत्र में दिया जाने वाला सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान है। इसके लिए गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल (awards.gov.in) पर 21 जुलाई से 20 अगस्त 2026 तक आवेदन किए जा सकते हैं।
मुख्य बिंदु: पुरस्कार के नियम, श्रेणियां और पात्रता
1. पुरस्कार की श्रेणियां और उद्देश्य
- 4 प्रमुख श्रेणियां: थल (Land), जल (Water/Sea), नभ (Air) साहसिक गतिविधियां और लाइफटाइम अचीवमेंट (Lifetime Achievement)।
- मूल उद्देश्य: देश के युवाओं में साहस, धीरता (Endurance), टीम वर्क और नेतृत्व क्षमता का विकास करना।
2. पुरस्कार की विशेषताएं और समकक्षता
- पुरस्कार राशि: ₹15 लाख की नकद राशि।
- अतिरिक्त सम्मान: एक कांस्य प्रतिमा (Bronze Statuette), प्रमाण पत्र, ब्लेज़र और सिल्क टाई (या साड़ी)।

- दर्जा: यह पुरस्कार खेल जगत के ‘अर्जुन पुरस्कार’ के समकक्ष माना जाता है।
3. पात्रता और आवेदन प्रक्रिया
- भारतीय नागरिकता: साहसिक गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले सभी भारतीय नागरिक पात्र हैं।
- सशस्त्र बल कर्मी: थल सेना, नौसेना और वायु सेना के सेवारत कर्मियों के लिए सिफारिश (Recommendation) अनिवार्य है।
- समय अवधि: थल, जल और नभ श्रेणियों के लिए पिछले 3 कैलेंडर वर्षों की उपलब्धियों का मूल्यांकन किया जाएगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| पुरस्कार का नाम | तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार 2025। |
| नोडल मंत्रालय | युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय। |
| नामांकन पोर्टल | गृह मंत्रालय का राष्ट्रीय पुरस्कार पोर्टल (awards.gov.in)। |
| पुरस्कार की श्रेणियां | 4 (स्थल, जल, वायु और लाइफटाइम अचीवमेंट)। |
| पुरस्कार राशि व सम्मान | ₹15 लाख, कांस्य प्रतिमा, प्रमाण पत्र और ब्लेज़र/साड़ी। |
| समकक्षता | अर्जुन पुरस्कार के समकक्ष। |
‘मिशन गोल्डन स्पाइस’: मेघालय की लाकाडोंग हल्दी का कायाकल्प
- प्रारंभिक परीक्षा: मिशन गोल्डन स्पाइस, लाकाडोंग हल्दी (GI टैग), पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER), पूर्वोत्तर परिषद (NEC), करक्यूमिन.
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): केंद्र और राज्यों द्वारा निर्मित योजनाएं; कृषि उत्पादकता, मूल्य श्रृंखला (Value Chain) प्रबंधन, प्रसंस्करण (Processing), और पूर्वोत्तर भारत का आर्थिक विकास.
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने संयुक्त रूप से ‘मिशन गोल्डन स्पाइस’ लॉन्च किया. यह 175.45 करोड़ रुपये का एकीकृत प्रोजेक्ट है. इसका सीधा मकसद मेघालय की विश्व प्रसिद्ध GI-टैग्ड लाकाडोंग हल्दी की मूल्य श्रृंखला (Value Chain) को मजबूत बनाना है. यह पहल पूर्वोत्तर को “अष्टलक्ष्मी” मानकर विकसित करने के राष्ट्रीय विजन का हिस्सा है.
मुख्य बिंदु: मिशन की रूपरेखा, रणनीतिक लक्ष्य और महत्व
1. ‘मिशन गोल्डन स्पाइस’ की मुख्य विशेषताएं
- बजट और समयसीमा: 175.45 करोड़ रुपये के बजट के साथ यह 5-वर्षीय (2025–2030) रोडमैप है.
- दो-चरणीय रणनीति:
- चरण 1: मूल्य श्रृंखला को मजबूत करना (Value Chain Strengthening).
- चरण 2: उत्पादन और बाजार का विस्तार (Expansion & Scale-up).
- संस्थागत सहयोग: इसे MDoNER और पूर्वोत्तर परिषद (NEC) द्वारा संचालित किया जा रहा है. इसमें कृषि मंत्रालय, APEDA, स्पाइस बोर्ड, राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड और NABARD जैसी संस्थाएं मिलकर काम करेंगी.
2. लाकाडोंग हल्दी की विशेषताएं और समस्याएं
- उच्च करक्यूमिन मात्रा: लाकाडोंग हल्दी में करक्यूमिन की मात्रा 7% से 10% होती है. यह वैश्विक औसत से लगभग चार गुना अधिक है.

- वर्तमान चुनौतियां: सीमित प्रसंस्करण सुविधाएं, कोल्ड चेन की कमी, और सीधे बाजार से जुड़ाव न होना. इस वजह से किसानों को उनकी फसल का उचित दाम नहीं मिल पाता था.
3. स्पष्ट लक्ष्य (2025-2030)
- किसानों की आय दोगुनी करना: कच्ची हल्दी का भाव 30-40 रुपये प्रति किग्रा से बढ़ाकर 2030 तक लगभग 80 रुपये प्रति किग्रा करना.
- क्षेत्रफल का विस्तार: खेती के दायरे को 2,500 हेक्टेयर से बढ़ाकर 7,500 हेक्टेयर तक ले जाना.
- प्रसंस्करण इकाई: पूर्वोत्तर की सबसे बड़ी एकीकृत जैविक हल्दी प्रसंस्करण और करक्यूमिन निष्कर्षण (Curcumin Extraction) इकाई स्थापित करना.
- महिला सशक्तिकरण: हल्दी उत्पादन और प्रसंस्करण में अग्रणी भूमिका निभाने वाली महिला किसानों को केंद्रित करना.
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| मिशन का नाम | मिशन गोल्डन स्पाइस. |
| लक्षित उत्पाद | लाकाडोंग हल्दी – GI टैग्ड उत्पाद. |
| प्रमुख नोडल निकाय | MDoNER और पूर्वोत्तर परिषद (NEC). |
| करक्यूमिन सामग्री | 7-10% (विश्व औसत से लगभग 4 गुना अधिक). |
| मुख्य क्षेत्र | मेघालय (विशेषकर ईस्ट और वेस्ट जयंतिया हिल्स). |
| वित्तीय आवंटन | ₹175.45 करोड़ (5 वर्षों के लिए). |
PM VIKAS योजना: अल्पसंख्यक समुदायों के समावेशी विकास की ओर कदम
- प्रारंभिक परीक्षा: पीएम विकास योजना, केंद्रीय क्षेत्र की योजनाएं, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम 1992।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): कल्याणकारी योजनाएं और कमजोर वर्गों का संरक्षण; सामाजिक न्याय और समावेशी विकास (Inclusive Growth)।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राज्यसभा में पीएम विकास योजना पर अहम जानकारी दी. सरकार ने स्पष्ट किया कि यह एक ‘केंद्रीय क्षेत्र की योजना’ (Central Sector Scheme) है. इसमें राज्यों के अनुसार अलग से बजट का आवंटन नहीं किया जाता है. पंजाब या किसी विशेष राज्य के लिए अलग से वित्तीय आवंटन का कोई प्रस्ताव नहीं है.
मुख्य बिंदु: योजना की संरचना, पात्रता और मुख्य नियम
1. योजना का स्वरूप और उद्देश्य
- केंद्रीय क्षेत्र की योजना: यह शत-प्रतिशत केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित है.
- मूल उद्देश्य: अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों को शिक्षा, कौशल विकास (Skilling) और रोजगार के अवसर देकर उनका समावेशी विकास करना.
- कार्यान्वयन मॉडल: योजना के प्रोजेक्ट सीधे ‘प्रोजेक्ट कार्यान्वयन एजेंसियों’ (PIAs) को दिए जाते हैं, राज्यों को नहीं.
2. पात्रता और मुख्य नियम
- अधिसूचित अल्पसंख्यक: राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग अधिनियम, 1992 के तहत 6 अधिसूचित समुदाय (मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी और जैन) इसके मुख्य पात्र हैं.
- राज्य स्तरीय अल्पसंख्यक: जिन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में राज्य सरकार द्वारा अलग से अल्पसंख्यक समुदाय घोषित हैं, वे भी पात्र हैं.
- 5% का कैप नियम: राज्य-स्तरीय अल्पसंख्यकों के लिए इस योजना में अधिकतम 5% सीटों का ही प्रावधान है.
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| योजना का नाम | PM VIKAS (प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन). |
| नोडल मंत्रालय | अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय. |
| योजना का प्रकार | केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme). |
| केंद्रीय अधिसूचित वर्ग | मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी और जैन (1992 अधिनियम). |
| राज्य-स्तरीय अल्पसंख्यक कोटा | कुल सीटों का अधिकतम 5%. |
| आबंटन मॉडल | सीधे कार्यान्वयन एजेंसियों (PIAs) को आवंटन. |
अभ्यास पिच ब्लैक 2026: भारतीय वायुसेना का ऑस्ट्रेलिया में बहुराष्ट्रीय युद्धाभ्यास
- प्रारंभिक परीक्षा: अभ्यास पिच ब्लैक, राफेल, C-17 ग्लोबमास्टर-III, IL-78 मिड-एयर रीफ्यूलर, इंडो-पैसिफिक रक्षा सहयोग।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): भारत और उसके पड़ोसी; द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह; सुरक्षा चुनौतियां और उनका प्रबंधन; रक्षा क्षेत्र में प्रौद्योगिकी।
चर्चा में क्यों?
ऑस्ट्रेलिया के डार्विन स्थित रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स (RAAF) बेस पर बहुराष्ट्रीय हवाई युद्धाभ्यास ‘अभ्यास पिच ब्लैक 2026’ की औपचारिक शुरुआत हो गई है, जो 07 अगस्त 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इस 45 साल पुराने प्रतिष्ठित युद्धाभ्यास में भारतीय वायुसेना (IAF) अपने अग्रणी लड़ाकू विमानों राफेल (Rafale) के साथ हिस्सा ले रही है। हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में बढ़ती सामरिक चुनौतियों, शक्ति संतुलन और कई मित्र देशों के साथ रणनीतिक समन्वय (Interoperability) को मजबूत करने के दृष्टिकोण से भारत की इस भागीदारी को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अभ्यास का स्वरूप, उद्देश्य और भारत की भूमिका
1. अभ्यास की प्रमुख विशेषताएं
- द्विवार्षिक आयोजन: यह ऑस्ट्रेलिया द्वारा हर दो साल में आयोजित किया जाने वाला सबसे बड़ा बहुराष्ट्रीय हवाई युद्ध अभ्यास है।
- नाम की पृष्ठभूमि: उत्तरी ऑस्ट्रेलिया के विशाल, निर्जन और खुले इलाकों में रात के समय (Night Flying Operations) की जाने वाली जटिल उड़ानों के कारण इसे ‘पिच ब्लैक’ नाम दिया गया है।
- व्यापक दायरा: यह 45 वर्षों के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा संस्करण है, जिसमें कई देशों की वायुसेनाएं एक साथ जटिल ‘लार्ज फोर्स एम्प्लॉयमेंट’ (LFE) अभियानों का अभ्यास कर रही हैं।
2. भारतीय वायुसेना (IAF) का बेड़ा और क्षमता
- मुख्य लड़ाकू विमान: भारत ने अपने सबसे आधुनिक बहुउद्देश्यीय राफेल फाइटर जेट्स को इस अभ्यास में उतारा है।
- सहायक विमान: लंबी दूरी के लॉजिस्टिक्स के लिए C-17 ग्लोबमास्टर-III और हवा में ही ईंधन भरने के लिए IL-78 रीफ्यूलिंग टैंकर शामिल हैं।
- विशेषज्ञ टीम: इसमें पायलटों के साथ-साथ कॉम्बैट कंट्रोलर्स, इंजीनियर्स और तकनीकी विशेषज्ञों की एक मजबूत टीम हिस्सा ले रही है।
- पिछला इतिहास: भारतीय वायुसेना इससे पहले 2018, 2022 और 2024 के संस्करणों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी है।
3. सामरिक और व्यावहारिक लाभ
- रणनीतिक एकीकरण: विभिन्न देशों की वायुसेनाओं के साथ मिलकर एक ही मिशन पर काम करने की क्षमता (Interoperability) का विकास।
- लंबी दूरी का परीक्षण: अपने बेस से दूर जाकर अभियानों को अंजाम देने (Expeditionary Air Operations) की क्षमता का परीक्षण।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| अभ्यास का नाम | अभ्यास पिच ब्लैक 2026। |
| आयोजक संस्था | रॉयल ऑस्ट्रेलियन एयर फोर्स (RAAF)। |
| स्थान | RAAF बेस डार्विन (उत्तरी ऑस्ट्रेलिया)। |
| अभ्यास की आवृत्ति | द्विवार्षिक (Biennial) – हर दो साल में। |
| भारत के प्रमुख विमान | राफेल (Rafale), C-17 ग्लोबमास्टर-III, IL-78। |
| मुख्य फोकस | नाइट फ्लाइंग, लार्ज फोर्स एम्प्लॉयमेंट (LFE) और इंडो-पैसिफिक सुरक्षा। |
टैक्स-इको पहल: वस्त्र उद्योग में नवाचार और रीसाइक्लिंग तकनीकें
- प्रारंभिक परीक्षा: टैक्स-इको पहल, राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM), पीएम मित्र पार्क, सर्कुलर इकोनॉमी, जीवन चक्र मूल्यांकन (LCA)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): पर्यावरण और सतत विकास; औद्योगिक नीतियां; वेस्ट मैनेजमेंट; सर्कुलर इकोनॉमी और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता।
चर्चा में क्यों?
वस्त्र राज्य मंत्री श्री पवित्र मार्गेरिटा ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में कपड़ा क्षेत्र में टिकाऊ विकास और वेस्ट मैनेजमेंट को बढ़ावा देने वाली सरकारी पहलों का ब्यौरा पेश किया। केंद्रीय बजट 2026-27 में घोषित ‘टैक्स-इको पहल’ का उद्देश्य भारत के कपड़ा उद्योग को पर्यावरण के अनुकूल, वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और सर्कुलर इकोनॉमी पर आधारित बनाना है। यह पहल रीसाइक्लिंग तकनीकों, ग्रीन टेक्नोलॉजी और टिकाऊ पैकेजिंग को बढ़ावा देती है।
मुख्य बिंदु: प्रमुख पहलें, परियोजनाएं और रणनीतिक कदम
1. टैक्स-इको पहल
- बजट घोषणा: केंद्रीय बजट 2026-27 में इसकी आधिकारिक घोषणा की गई।
- मुख्य उद्देश्य: कपड़ा कचरा प्रबंधन, रीसाइक्लिंग और रिसाइकिल्ड फाइबर से उच्च मूल्य वाले उत्पाद तैयार करना।
- साझेदारी मॉडल: यह शोध संस्थानों, स्टार्टअप्स, उद्योग और टेक्सटाइल रिसर्च एसोसिएशन्स के सहयोग से लागू की जा रही है।
2. अंतरराष्ट्रीय सहयोग और परियोजनाएं
- खतरनाक रसायनों का उन्मूलन: UNIDO और वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF) के सहयोग से भारतीय फैशन सप्लाई चेन से हानिकारक रसायनों को हटाने का प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।
- In-Tex India परियोजना: UNEP के साथ मिलकर चलाए जा रहे इस प्रोजेक्ट का ध्यान ‘लाइफ साइकिल असेसमेंट’ (LCA) और ‘प्रोडक्ट एनवायरनमेंटल फुटप्रिंट’ (PEF) विधियों द्वारा सर्कुलर बिजनेस मॉडल को बढ़ावा देना है।
3. अन्य महत्वपूर्ण ढांचागत व नीतिगत प्रयास
- राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM): टिकाऊ तकनीकों और पर्यावरण-अनुकूल सामग्रियों के अनुसंधान व विकास (R&D) प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है।
- पीएम मित्र पार्क: विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर और सतत औद्योगीकरण के लिए समर्पित पार्क बनाए जा रहे हैं।
- सार्वजनिक खरीद में अपसाइक्लिंग: GeM (गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस), टेक्सटाइल कमेटी और SCOPE के बीच समझौता हुआ है ताकि सरकारी खरीद में अपसाइकिल किए गए उत्पादों का इस्तेमाल बढ़े।
- मैपिंग रिपोर्ट: “मैपिंग ऑफ टेक्सटाइल वेस्ट वैल्यू चेन इन इंडिया” रिपोर्ट जारी की गई है, जो टेक्सटाइल कचरे के पुनर्चक्रण के अवसरों का आकलन करती है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| प्रमुख पहल | टैक्स-इको पहल (Tex-Eco Initiative) – बजट 2026-27 में घोषित। |
| नोडल मंत्रालय | वस्त्र मंत्रालय (Ministry of Textiles)। |
| अंतरराष्ट्रीय साझेदार | UNIDO, GEF, UNEP। |
| प्रयुक्त विधियां | लाइफ साइकिल असेसमेंट (LCA) और प्रोडक्ट एनवायरनमेंटल फुटप्रिंट (PEF)। |
| सरकारी खरीद का माध्यम | GeM पोर्टल (अपसाइकिल उत्पादों को बढ़ावा देने हेतु)। |
| मुख्य लक्ष्य | कपड़ा कचरा प्रबंधन, ग्रीन टेक्नोलॉजी और सर्कुलर इकोनॉमी। |