23 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत दूरसंचार क्षेत्र में अगली पीढ़ी की तकनीक हेतु ‘भारत 6G एलायंस’ व स्पेक्ट्रम रोडमैप, मौसम पूर्वानुमान को अधिक सटीक बनाने वाले 6 किमी रिज़ॉल्यूशन वाले ‘भारत फॉरकास्ट सिस्टम’ और देश में पवन ऊर्जा क्षमता द्वारा 57,443 मेगावाट का आंकड़ा पार, बाल स्वास्थ्य को समर्पित नीतिगत सिफारिशों वाली ‘लेट्स फिक्स अवर फूड’ (LFOF) पहल, बाल कल्याण हेतु ‘मिशन वात्सल्य’ का एकीकृत ढांचा, ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु परमाणु ऊर्जा मिशन का दीर्घकालिक रोडमैप तथा ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ प्रथम त्रि-सेवा महिला नौकायन अभियान का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
भारत 6G एलायंस और भारत में 6G स्पेक्ट्रम रोडमैप
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत 6G एलायंस (B6GA), 6G टेराहर्ट्ज (THz) टेस्टबेड, ITU (IMT-2030), डिजिटल भारत निधि (TTDF), 3GPP, SAMIR कोलकाता।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; संचार क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक; बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR); स्टार्टअप्स और MSMEs का विकास।
चर्चा में क्यों?
संचार राज्य मंत्री डॉ. चंद्र शेखर पेम्मासानी ने लोकसभा में 6G तकनीक पर विस्तृत जानकारी साझा की। भारत में 6G सेवाओं को तेजी से विकसित करने के लिए ‘भारत 6G एलायंस’ (B6GA) का विस्तार 90 सदस्यों तक हो चुका है। इसके साथ ही, दूरसंचार विभाग (DoT) ने भारत के 6G विजन को साकार करने के लिए ‘स्पेक्ट्रम रोडमैप फॉर 6G इन इंडिया’ जारी किया है।
मुख्य बिंदु: 6G एलायंस, टेस्टबेड और वैश्विक मानक
1. भारत 6G एलायंस (B6GA) का विस्तार
- सदस्यता: 15 जुलाई 2026 तक इसमें 90 सदस्य (टेलीकॉम कंपनियां, R&D संस्थान, स्टार्टअप्स और अकादमिक क्षेत्र) शामिल हो चुके हैं।
- 7 वर्किंग ग्रुप्स: यह एलायंस तकनीक, स्पेक्ट्रम, एप्लिकेशन, कंपोनेंट्स, ग्रीन सस्टेनेबिलिटी, डिवाइसेज और आउटरीच पर केंद्रित 7 कार्य समूहों में काम करता है।
- मुख्य कार्य: स्वदेशी तकनीक का विकास, शोध को बढ़ावा देना, IPR मजबूत करना और नए 6G टेस्टबेड तैयार करना।
2. 6G टेराहर्ट्ज (THz) टेस्टबेड प्रोजेक्ट
- वित्त पोषण: डिजिटल भारत निधि के तहत संचालित टेलीकॉम टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट फंड (TTDF) द्वारा 3 साल की परियोजना मंजूर की गई है।
- कार्यान्वयन संस्थान: ‘समीर’ (SAMEER, कोलकाता) के नेतृत्व में IIT मद्रास, IIT गुवाहाटी और IIT पटना के सहयोग से इसे विकसित किया जा रहा है।
- उपलब्धि: इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2025 में इस प्रोजेक्ट के तहत हाई डेटा रेट वाली लिंक का प्रदर्शन किया जा चुका है।
3. वैश्विक मानकों में भारत का योगदान (ITU और 3GPP)
- IMT-2030 ढांचा: अंतर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) में भारत के सुझाव पर ‘सर्वव्यापी कनेक्टिविटी’ (Ubiquitous Connectivity) को 6G के 6 मुख्य उपयोगों में शामिल किया गया है।
- TDIP योजना: DoT की ‘प्रौद्योगिकी विकास और निवेश संवर्धन’ योजना के जरिए भारतीय स्टार्टअप्स और MSMEs को ITU, 3GPP और oneM2M जैसी वैश्विक संस्थाओं की बैठकों में शामिल होने के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| B6GA की प्रकृति | उद्योग और अकादमिक क्षेत्र का संयुक्त मंच (90 सदस्य)। |
| 6G टेस्टबेड केंद्र | SAMEER (कोलकाता) + IIT मद्रास, गुवाहाटी, पटना। |
| वित्त पोषण फंड | डिजिटल भारत निधि का TTDF (Telecom Technology Development Fund)। |
| अंतर्राष्ट्रीय निकाय | ITU (IMT-2030 फ्रेमवर्क), 3GPP, oneM2M। |
| सहायता योजना | TDIP योजना – स्टार्टअप्स/MSMEs को ग्लोबल स्टैंडर्ड्स बैठकों के लिए फंडिंग। |
| स्पेक्ट्रम रोडमैप | DoT द्वारा आधिकारिक रूप से 6G सेवाओं हेतु जारी। |
भारत फॉरकास्ट सिस्टम (BharatFS): 6 किमी रिज़ॉल्यूशन वाला मौसम मॉडल
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत फॉरकास्ट सिस्टम (BharatFS), अर्क, अरुणिका, TCo ग्रिड, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी; आपदा प्रबंधन; मानसून और कृषि पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव; मेक इन इंडिया।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में ‘भारत फॉरकास्ट सिस्टम’ (BharatFS) पर आधिकारिक जानकारी दी। भारत 6 किमी के उच्च रिज़ॉल्यूशन पर रीयल-टाइम वैश्विक मौसम पूर्वानुमान मॉडल चलाने वाला दुनिया का एकमात्र देश बन गया है। यह उपलब्धि भारत को वैश्विक मौसम विज्ञान के क्षेत्र में अग्रणी स्थान पर खड़ा करती है।
मुख्य बिंदु: तकनीकी क्षमताएं, लाभ और रणनीतिक महत्व
1. उन्नत तकनीक और सुपरकंप्यूटिंग
- TCo डायनेमिकल ग्रिड: यह मॉडल ट्रायंगुलर क्युबिक ऑक्टाहेड्रल (TCo) ग्रिड पर काम करता है।
- उच्च रिज़ॉल्यूशन: यह 6 किमी की क्षैतिज दूरी पर सटीक अनुमान प्रदान करता है। इससे पहले का GFS T1534 मॉडल 12 किमी पर काम करता था। दुनिया के अन्य मॉडल 9 से 14 किमी पर काम करते हैं।
- स्वदेशी सुपरकंप्यूटर: इस मॉडल को चलाने में दो नए सुपरकंप्यूटर अर्क (IITM-पुणे) और अरुणिका (NCMRWF-नोएडा) का उपयोग होता है।
- विकासकर्ता संस्थाएं: इसे IITM-पुणे, NCMRWF-नोएडा और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मिलकर विकसित किया है।
2. व्यावहारिक लाभ (कृषि और आपदा प्रबंधन)
- पंचायत स्तर पर पूर्वानुमान: 6 किमी की क्षमता से स्थानीय मौसम का सटीक पता चलता है। इससे पंचायतों के समूहों और गांवों के स्तर पर सीधे अलर्ट भेजा जा सकता है।
- किसानों को सहायता: सटीक डेटा मिलने से फसल बुआई, सिंचाई और कटाई की योजना बनाना आसान हो जाता है।
- बाढ़ नियंत्रण: मानसून के दौरान जलाशयों के जल स्तर को प्रबंधित करने में मदद मिलती है।
- चक्रवात व अतिवृष्टि: जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ने वाली चरम मौसमी घटनाओं का सटीक अनुमान लगाकर आपदा जोखिम को कम किया जा सकता है।
3. रणनीतिक और क्षेत्रीय महत्व
- मेक इन इंडिया: यह पूरी तरह स्वदेशी मॉडल है। यह हिमालय और पश्चिमी घाट की जटिल भौगोलिक संरचनाओं को ध्यान में रखकर बनाया गया है।
- दक्षिण एशियाई नेतृत्व: भारत अब पड़ोसी देशों को भी सटीक मौसमी सेवाएं दे सकता है। इससे क्षेत्र में भारत का वैज्ञानिक प्रभाव मजबूत होता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| मॉडल का नाम | भारत फॉरकास्ट सिस्टम (BharatFS)। |
| रिज़ॉल्यूशन क्षमता | 6 किलोमीटर (विश्व में सबसे सटीक)। |
| ग्रिड तकनीक | ट्रायंगुलर क्युबिक ऑक्टाहेड्रल (TCo) ग्रिड। |
| प्रयुक्त सुपरकंप्यूटर | अर्क (पुणे) और अरुणिका (नोएडा)। |
| नोडल मंत्रालय | पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (Ministry of Earth Sciences)। |
| मुख्य लक्ष्य | पंचायत स्तर पर मौसम अलर्ट और आपदा प्रबंधन। |
भारत में पवन ऊर्जा क्षमता: 57,443 मेगावाट का आंकड़ा पार
- प्रारंभिक परीक्षा: पवन ऊर्जा क्षमता, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर, VGF योजना, RCO (अक्षय उपभोग बाध्यता), GWEC रैंकिंग।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): बुनियादी ढांचा: ऊर्जा; भारत में नवीकरणीय ऊर्जा का विकास; जलवायु परिवर्तन समझौते और सतत विकास।
Why in News? (चर्चा में क्यों?
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा राज्य मंत्री श्री श्रीपद येसो नाइक ने लोकसभा में देश के पवन ऊर्जा क्षेत्र की नवीनतम प्रगति रिपोर्ट पेश की। इस आधिकारिक संसदीय वक्तव्य के अनुसार, 30 जून 2026 तक भारत की कुल स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता बढ़कर 57,443 MW हो गई है। इसके साथ ही, वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 6,057 MW की नई क्षमता जुड़ने से कुल वार्षिक उत्पादन 106 अरब यूनिट (BU) तक पहुंच गया है। GWEC (ग्लोबल विंड एनर्जी काउंसिल) रिपोर्ट 2026 के मुताबिक भारत वैश्विक स्तर पर पवन ऊर्जा की कुल क्षमता में चौथे स्थान पर मजबूती से कायम है।
मुख्य बिंदु: क्षमता, राज्यवार स्थिति और सरकारी पहलें
1. भारत की वैश्विक स्थिति और वार्षिक वृद्धि
- वैश्विक रैंकिंग: ग्लोबल विंड एनर्जी काउंसिल (GWEC) की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत 31 दिसंबर 2025 तक स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता में दुनिया में चौथे स्थान पर है।
- क्षमता में लगातार बढ़ोतरी: वित्त वर्ष 2023-24 में 3,253 MW, 2024-25 में 4,151 MW और 2025-26 में रिकॉर्ड 6,057 MW नई पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई।
2. राज्यवार स्थिति (शीर्ष राज्य)
- स्थापित क्षमता में नंबर-1: गुजरात कुल 16,086 MW क्षमता के साथ देश में पहले स्थान पर है। इसके बाद तमिलनाडु (12,273 MW) दूसरे और कर्नाटक (8,896 MW) तीसरे स्थान पर हैं।
- बिजली उत्पादन में अग्रणी: वित्त वर्ष 2025-26 में सबसे अधिक पवन ऊर्जा उत्पादन भी गुजरात (33,706 मिलियन यूनिट) और तमिलनाडु (24,200 मिलियन यूनिट) में दर्ज किया गया।
3. पवन ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली प्रमुख सरकारी नीतियां
- ग्रिड और ट्रांसमिशन: ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर योजना के तहत ट्रांसमिशन लाइनों का विस्तार किया जा रहा है।
- 100% एफडीआई: ऑटोमैटिक रूट के जरिए पवन ऊर्जा क्षेत्र में 100% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति दी गई है।
- ऑफ़शोर विंड विकास: तटीय क्षेत्रों के लिए ‘वायबिलिटी गैप फंडिंग’ (VGF) योजना और ‘ऑफशोर विंड एनर्जी लीज रूल्स, 2023’ लागू किए गए हैं।
- सख्त नियम (RCO): ऊर्जा संरक्षण अधिनियम के तहत ‘अक्षय उपभोग बाध्यता’ (RCO) लागू की गई है, जिसके उल्लंघन पर दंड का प्रावधान है।
- ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस (2022): 100 किलोवाट या उससे अधिक की कॉन्ट्रैक्ट डिमांड वाले किसी भी उपभोक्ता को आसानी से हरित ऊर्जा खरीदने की सुविधा दी गई है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| कुल स्थापित क्षमता | 57,443 MW (30 जून 2026 तक)। |
| ग्लोबल रैंकिंग | GWEC रिपोर्ट के अनुसार भारत विश्व में चौथे (4th) स्थान पर। |
| शीर्ष राज्य (क्षमता में) | 1. गुजरात (16,086 MW) 2. तमिलनाडु 3. कर्नाटक। |
| वित्त वर्ष 2025-26 उत्पादन | 106 बिलियन यूनिट (BU)। |
| FDI सीमा | ऑटोमैटिक रूट से 100% FDI की अनुमति। |
| ग्रीन एनर्जी ओपन एक्सेस | 100 kW या उससे अधिक की मांग वाले उपभोक्ताओं के लिए लागू। |
लेट्स फिक्स अवर फूड (LFOF): बच्चों में स्वस्थ खान-पान के लिए नीतिगत सिफारिशें
- प्रारंभिक परीक्षा: ICMR-NIN, LFOF कन्सोर्टियम, NEAT-S टूलकिट, FSSAI, गैर-संचारी रोग (NCDs)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): स्वास्थ्य और पोषण; मानव संसाधन विकास; खाद्य सुरक्षा; कुपोषण और मोटापे की समस्या; गैर-संचारी रोग।
चर्चा में क्यों?
ICMR-NIN के नेतृत्व वाले ‘लेट्स फिक्स अवर फूड’ (LFOF) कन्सोर्टियम ने एक नया नीतिगत दस्तावेज जारी किया। नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. एम. श्रीनिवास ने नई दिल्ली में इसे लॉन्च किया। इसका शीर्षक “Priority Policy Actions to Promote Healthier Diets and Food Environments for Children and Adolescents in India” है। इसका मुख्य मकसद बच्चों और किशोरों में बढ़ते मोटापे और खान-पान से जुड़ी बीमारियों को रोकना है।
मुख्य बिंदु: LFOF पहल, सिफारिशें और नए टूलकिट
1. ‘लेट्स फिक्स अवर फूड’ (LFOF) क्या है?
- प्रकृति: यह एक बहु-संस्थानीय राष्ट्रीय मंच है।
- नेतृत्व: ICMR-राष्ट्रीय पोषण संस्थान (ICMR-NIN)।
- प्रमुख साझेदार: UNICEF इंडिया, WHO, FSSAI, PHFI, रिजॉल्व टू सेव लाइव्स (RTSL), ग्लोबल हेल्थ एडवोकेसी इनक्यूबेटर (GHAI) और लेडी इरविन कॉलेज।
- उद्देश्य: अनुसंधान और नीतिगत बदलावों के जरिए गैर-संचारी रोगों (NCDs) को रोकना।
2. नीतिगत दस्तावेज की मुख्य सिफारिशें
- फ्रंट-ऑफ-पैक न्यूट्रिशन लेबलिंग (FOPNL): पैक्ड फूड के बाहर स्पष्ट पोषण संबंधी जानकारी देना।
- HFSS खाद्य पदार्थों पर टैक्स: वसा, नमक और चीनी (High Fat, Salt, Sugar) वाले अस्वास्थ्यकर भोजन पर कर लगाना।
- विज्ञापनों पर नियंत्रण: बच्चों को लक्षित करने वाले जंक फूड के विज्ञापनों पर रोक।

- स्कूल का माहौल: स्कूलों में स्वस्थ भोजन विकल्प मुहैया कराना।
- कम-सोडियम विकल्प: नमक और संतृप्त वसा का सेवन घटाकर कम-सोडियम वाले विकल्पों को बढ़ावा देना।
3. नए लॉन्च किए गए संसाधन
- NEAT-S टूलकिट: स्कूलों के खाद्य वातावरण का आकलन करने के लिए ‘न्यूट्रिशन एनवायरनमेंट असेसमेंट टूलकिट फॉर स्कूल्स’ शुरू किया गया।
- ई-लर्निंग मॉड्यूल: बच्चों में फूड लेबल समझने और न्यूट्रिशन साक्षरता बढ़ाने के लिए कोर्स।
- LFOF वेबसाइट: शोध और नीतिगत रिपोर्ट साझा करने हेतु आधिकारिक पोर्टल।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| LFOF का नेतृत्व | ICMR – राष्ट्रीय पोषण संस्थान (ICMR-NIN)। |
| लॉन्चकर्ता | डॉ. एम. श्रीनिवास (सदस्य-स्वास्थ्य, नीति आयोग)। |
| लक्ष्य समूह | बच्चे और किशोर (Children and Adolescents)। |
| NEAT-S टूलकिट | स्कूलों में पोषण माहौल का आकलन करने का टूल। |
| HFSS Foods | High in Fat, Salt, and Sugar (अस्वास्थ्यकर जंक फूड)। |
| मुख्य लक्ष्य | मोटापा और गैर-संचारी रोगों (NCDs) को नियंत्रित करना। |
मिशन वात्सल्य: बाल देखभाल और संरक्षण ढांचा
- प्रारंभिक परीक्षा: मिशन वात्सल्य, किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act) 2015, नीति आयोग (DMEO)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): कल्याणकारी योजनाएं; अतिसंवेदनशील वर्ग (बच्चे); वैधानिक निकाय; नीति आयोग की रिपोर्ट।
चर्चा में क्यों?
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने संसद में ‘मिशन वात्सल्य’ की समीक्षा रिपोर्ट साझा की। मंत्रालय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ नियमित बैठकों के जरिए इस योजना की निगरानी करता है। हाल ही में नीति आयोग के विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (DMEO) ने भी इस योजना की उच्च प्रासंगिकता और दक्षता को देखते हुए इसे जारी रखने की सिफारिश की है।
मुख्य बिंदु: योजना की संरचना, कानून और कार्यान्वयन
1. मिशन वात्सल्य की मूल संरचना
- योजना का स्वरूप: यह एक केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) है।
- लक्ष्य समूह: देखभाल और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चे (CNCP) तथा कानून का उल्लंघन करने वाले किशोर (CCL)।
- कानूनी आधार: यह किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत लागू की जाती है।
- मुख्य उद्देश्य: कठिन परिस्थितियों में फंसे बच्चों का पुनर्वास, पारिवारिक पुनर्मिलन और सामाजिक एकीकरण।
2. किशोर न्याय अधिनियम, 2015 के प्रमुख कानूनी प्रावधान
संस्थागत पंजीकरण ────► धारा 41: सभी CCIs का अनिवार्य पंजीकरण
उल्लंघन पर कार्रवाई ────► धारा 42: गैर-पंजीकरण पर दंडात्मक प्रावधान
व्यक्तिगत देखभाल ────► धारा 39: इंडिविजुअल केयर प्लान (ICP) के तहत पुनर्वास
समीक्षा और मूल्यांकन ────► धारा 55: DM/सरकार द्वारा स्वतंत्र मूल्यांकन
- अनिवार्य पंजीकरण (धारा 41): सभी बाल देखभाल संस्थानों (CCIs) का पंजीकरण अनिवार्य है। चाहे वे सरकारी हों या एनजीओ द्वारा संचालित।
- दंडात्मक कार्रवाई (धारा 42): बिना पंजीकरण संस्थान चलाने पर सख्त सजा का प्रावधान है।
- व्यक्तिगत देखभाल योजना (धारा 39): पुनर्वास के लिए ‘इंडिविजुअल केयर प्लान’ तैयार किया जाता है। इसमें गोद लेना, फॉस्टर केयर और प्रायोजन शामिल हैं।
- पारिवारिक बहाली (धारा 40): बच्चे को परिवार या कानूनी अभिभावक को सौंपना बाल कल्याण समिति (CWC) की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
- स्वतंत्र मूल्यांकन (धारा 55): जिला मजिस्ट्रेट या सरकार JJB, CWC और विशेष पुलिस इकाइयों के कामकाज का मूल्यांकन कर सकती है।
3. वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था
- संस्थागत सहायता: CWC, JJB, जिला बाल संरक्षण इकाइयों (DCPUs) और राज्य दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसियों (SARAs) को वित्तीय सहायता दी जाती है।
- राज्यों की जवाबदेही: इन संस्थाओं का पंजीकरण, निरीक्षण और रिक्त पदों को भरना पूरी तरह राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| योजना का प्रकार | केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme)। |
| संबंधित मंत्रालय | महिला एवं बाल विकास मंत्रालय। |
| वैधानिक कानून | किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015। |
| पंजीकरण नियम | धारा 41 (अनिवार्य पंजीकरण) एवं धारा 42 (दंडनीय अपराध)। |
| मूल्यांकन रिपोर्ट | DMEO (नीति आयोग) ने योजना जारी रखने की सिफारिश की। |
| प्राथमिकता | गैर-संस्थागत देखभाल (पारिवारिक पुनर्वास और गोद लेना)। |
परमाणु ऊर्जा मिशन: विकसित भारत @2047 के लिए रोडमैप
- प्रारंभिक परीक्षा: न्यूक्लियर एनर्जी मिशन (NEM), शांति अधिनियम 2025, स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs), AERB, BARC।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): बुनियादी ढांचा: ऊर्जा; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- स्वदेशी तकनीक का विकास; नवीकरणीय एवं स्वच्छ ऊर्जा; नेट-जीरो 2070।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में ‘विकसित भारत के लिए परमाणु ऊर्जा मिशन’ से संबंधित एक रिपोर्ट प्रस्तुत कि। सरकार ने वर्ष 2047 तक 100 GWe परमाणु ऊर्जा क्षमता प्राप्त करने के लिए विस्तृत रोडमैप, निजी क्षेत्र के प्रवेश हेतु SHANTI अधिनियम 2025 के कार्यान्वयन और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) द्वारा विकसित किए जा रहे स्वदेशी स्मॉल मॉड्युलर रिएक्टर्स (SMRs) की अद्यतन स्थिति को रेखांकित किया है।
मुख्य बिंदु: रोडमैप, SMRs, शांति अधिनियम और सुरक्षा ढांचा
1. 100 GW परमाणु ऊर्जा का चरणबद्ध रोडमैप (2047 तक)
वर्तमान क्षमता ────► 8.78 GW (वर्तमान में कार्यरत)
2031-32 तक ────► ~22 GW (निर्माणाधीन परियोजनाओं के पूरा होने पर)
NPCIL (2047) ────► +32 GW (PHWR और LWR तकनीक के जरिए) ➔ कुल 54 GW
निजी व JV (2047) ────► +46 GW (निजी क्षेत्र, PSEs और राज्यों की भागीदारी) ➔ कुल 100 GW
2. BARC द्वारा विकसित किए जा रहे प्रमुख SMRs
- BSMR-200 (220 MWe):
- तकनीक: स्वदेशी प्रेसराइज्ड वॉटर रिएक्टर (PWR)।
- स्थिति: तारापुर (महाराष्ट्र) में स्थापना हेतु AEC से मंजूरी और AEC/ETG से वित्तीय स्वीकृति प्राप्त।
- SMR-55 (55 MWe):
- तकनीक: PWR डिजाइन पर आधारित।
- स्थिति: तारापुर (महाराष्ट्र) स्थल को AEC की मंजूरी मिली।
- HTGCR (5 MWth तक):
- उद्देश्य: हाइड्रोजन उत्पादन के लिए थर्मोकेमिकल चक्र (जैसे कॉपर-क्लोरीन साइकिल) हेतु परमाणु ऊष्मा स्रोत।
- स्थिति: BARC विशाखापट्टनम (वाइजैग) में साइटिंग कंसेंट और MoEF&CC से ToR मंजूरी प्राप्त।
3. शांति अधिनियम, 2025 के तहत सुधार
- निजी क्षेत्र की प्रविष्टि: परमाणु ऊर्जा उत्पादन और R&D में निजी कंपनियों/JV की भागीदारी का रास्ता साफ किया।
- AERB को वैधानिक दर्जा: परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (AERB) को स्वतंत्र स्वायत्त निकाय का दर्जा दिया गया ताकि वह नियम बना सके और प्रवर्तन कर सके।
- वेंडर इकोसिस्टम: BARC भारतीय उद्योगों के साथ तकनीक साझा कर स्वदेशी वेंडरों का विकास कर रहा है।
4. परमाणु सुरक्षा और अपशिष्ट प्रबंधन
- सुरक्षा सिद्धांत: ‘डिफेंस-इन-डेप्थ’ दृष्टिकोण, जिसमें पर्यावरण और रेडियोधर्मिता के बीच कई सुरक्षा परतें होती हैं।
- कचरा निपटान: ‘रेडियोधर्मी अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 1987’ और AERB सुरक्षा कोड के अनुसार ठोस रूप में परिवर्तित कर सुरक्षित भंडारण। BARC की पर्यावरण सर्वेक्षण प्रयोगशालाएं (ESLs) लगातार निगरानी करती हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| लक्ष्य क्षमता | 2047 तक 100 GW (वर्तमान में 8.78 GW)। |
| SMR लक्ष्य | 2033 तक कम से कम 5 स्वदेशी SMRs चालू करना। |
| शांति अधिनियम 2025 | निजी क्षेत्र को परमाणु ऊर्जा में प्रवेश और AERB को वैधानिक दर्जा। |
| BSMR-200 & SMR-55 | दोनों PWR आधारित; प्रस्तावित स्थल – तारापुर, महाराष्ट्र। |
| HTGCR (5 MWth) | हाइड्रोजन उत्पादन हेतु; प्रस्तावित स्थल – BARC, विशाखापट्टनम। |
| अपशिष्ट नियम | रेडियोधर्मी अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 1987 द्वारा विनियमित। |
समुद्र प्रदक्षिणा: प्रथम त्रि-सेवा महिला नौकायन अभियान
- प्रारंभिक परीक्षा: समुद्र प्रदक्षिणा, IASV त्रिवेणी, थ्री ग्रेट केप्स, ड्रेक पैसेज, केप हॉर्नर्स।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): रक्षा क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण (नारी शक्ति); त्रि-सेवा एकीकरण (Tri-Service Jointness); सैन्य कूटनीति (Military Diplomacy); आत्मनिर्भर भारत।
चर्चा में क्यों?
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ‘समुद्र परिक्रमा’ अभियान का फ़्लैग-इन (Flag-in) किया। यह भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की नौ महिला अधिकारियों का पहला त्रि-सेवा (Tri-Service) सर्व-महिला नौकायन अभियान था। स्वदेशी पोत IASV त्रिवेणी पर सवार होकर इस क्रू ने 314 दिनों में लगभग 25,500 समुद्री मील (Nautical Miles) की दूरी तय कर चार महासागरों को पार किया और मुंबई वापस लौटीं।
मुख्य बिंदु: अभियान की विशेषताएं, मार्ग और महत्व
1. अभियान का मार्ग और अंतरराष्ट्रीय मानदंड
- अभियान की अवधि: 11 सितंबर 2025 से 22 जुलाई 2026 (314 दिन)।
- महासागर: 4 महासागरों को पार करते हुए लगभग 25,500 समुद्री मील की दूरी तय की।
- अंतरराष्ट्रीय मानक: टीम ने भूमध्य रेखा को दो बार पार किया, अंतरराष्ट्रीय तिथि रेखा (IDL) और सभी देशांतर रेखाओं को पार किया।

- थ्री ग्रेट केप्स: केप लीउविन (ऑस्ट्रेलिया), केप हॉर्न (दक्षिण अमेरिका) और केप ऑफ गुड होप (दक्षिण अफ्रीका) की परिक्रमा की।
भूमध्य रेखा ───► दो बार पार किया
3 ग्रेट केप्स ───► केप लीउविन (ऑस्ट्रेलिया) ➔ केप हॉर्न (S. America) ➔ केप ऑफ गुड होप (S. Africa)
चुनौतीपूर्ण मार्ग ────► ड्रेक पैसेज को सफलतापूर्वक पार किया
2. केप हॉर्नर्स क्लब की सदस्यता
- टीम ने दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री मार्गों में से एक ड्रेक पैसेज को पार किया।
- केप हॉर्न को सफलतापूर्वक पार करने के कारण चालक दल को प्रतिष्ठित ‘केप हॉर्नर्स’ बिरादरी की सदस्यता मिली।
3. तीन प्रमुख स्तंभ: नारी शक्ति, त्रि-सेवा एकीकरण और आत्मनिर्भरता
- नारी शक्ति: भारत की महिला अधिकारियों द्वारा सैन्य क्षेत्र में अग्रणी नेतृत्व का प्रतीक।
- त्रि-सेवा एकीकरण (Jointness): तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और एकीकृत कमान क्षमता का प्रत्यक्ष प्रदर्शन।
- आत्मनिर्भर भारत: प्रयोग में लाया गया पोत IASV त्रिवेणी 50-फुट का स्वदेशी रूप से निर्मित नौकायन पोत है।
- सैन्य कूटनीति (Military Diplomacy): विदेश यात्राओं और पोर्ट कॉल्स के दौरान पोत ने भारत के ‘फ्लोटिंग एंबेसडर’ की तरह काम किया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| अभियान का नाम | समुद्र प्रदक्षिणा। |
| प्रयुक्त पोत | IASV त्रिवेणी (50-फुट स्वदेशी पोत)। |
| सदस्य संख्या | 9 महिला अधिकारी (थल सेना, नौसेना, वायु सेना)। |
| कुल दूरी व समय | 314 दिन में ~25,500 समुद्री मील (4 महासागर)। |
| थ्री ग्रेट केप्स | केप लीउविन, केप हॉर्न, केप ऑफ गुड होप। |
| विशेष उपलब्धि | ड्रेक पैसेज पार कर ‘केप हॉर्नर्स’ क्लब में शामिल। |