24 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत भारत की वायु रक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ करने वाली स्वदेशी ‘कुशा’ LR-SAM (लॉन्ग-रेंज एयर डिफेंस शील्ड) परियोजना, दक्षिणी नौसेना कमान कोच्चि में संपन्न ‘ऑपरेशन साउदर्न रेडीनेस 26-2’, और महान स्वतंत्रता सेनानी तिरु सुब्रमण्य शिव की पुण्यतिथि पर उन्हें दी गई भावभीनी श्रद्धांजलि, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता लाने हेतु पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों के गठन, भारत की अध्यक्षता में आयोजित 16वीं ब्रिक्स (BRICS) स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक के सफल समापन, तथा देश की अमूर्त विरासत को सहेजने के उद्देश्य से सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण-संवर्धन एवं संग्रहालयों व अभिलेखागारों के व्यापक डिजिटलीकरण की राष्ट्रीय योजनाओं का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
‘कुशा’ एलआर-एसएएम: भारत का स्वदेशी लॉन्ग-रेंज एयर डिफेंस शील्ड
- प्रारंभिक परीक्षा: रक्षा प्रौद्योगिकी (Defence Technology), प्रोजेक्ट कुशा, LRSAM, DRDO।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): स्वदेशी तकनीक का विकास, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता , राष्ट्रीय सुरक्षा एवं वायु रक्षा क्षमता।
चर्चा में क्यों?
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ओडिशा के तट पर स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से अपनी लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल ‘कुशा’ (LRSAM) का पहला सफल उड़ान-परीक्षण संपन्न किया। इस ऐतिहासिक परीक्षण के दौरान मिसाइल प्रणाली ने उच्च गति और अधिक ऊंचाई वाले एक इलेक्ट्रॉनिक लक्ष्य का सटीक रूप से पीछा करते हुए उसे हवा में ही नष्ट कर दिया। यह परीक्षण भारत की राष्ट्रीय वायु रक्षा क्षमताओं को सुदृढ़ करने और विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
मुख्य बिंदु: तकनीकी क्षमताएं, स्वदेशीकरण और रणनीतिक महत्व
1. ‘कुशा’ मिसाइल प्रणाली की प्रमुख क्षमताएं
- विविध हवाई खतरों से सुरक्षा: यह प्रणाली लड़ाकू विमानों, क्रूज मिसाइलों, ड्रोन (UAVs) और बड़े सैन्य विमानों को लंबी दूरी तथा अधिक ऊंचाई पर सटीक निशाना बना सकती है।
- इलेक्ट्रॉनिक टारगेट इंटरसेप्शन: पहले परीक्षण में ही इसने हाई-स्पीड और हाई-एल्टीट्यूड हवाई खतरों को बेअसर करने की क्षमता साबित की।
- व्यापक परिचालन दायरा: यह मिसाइल प्रणाली विभिन्न ऊंचाइयों और दूरियों के विस्तृत रेंज लिफाफे (Altitude Envelope) में दुश्मन के हवाई हमलों को विफल करने में सक्षम है।
2. स्वदेशी डिजाइन एवं तकनीकी घटक
- 100% स्वदेशी इकोसिस्टम: मिसाइल, उन्नत रडार और कमांड व कंट्रोल सेंटर को DRDO प्रयोगशालाओं और भारतीय औद्योगिक साझेदारों ने मिलकर तैयार किया है।
- समग्र रक्षा नेटवर्क: यह केवल एक मिसाइल नहीं बल्कि एक एकीकृत हथियार प्रणाली (Integrated Weapon System) है।
- पूर्ण स्वदेशी रडार व नियंत्रण प्रणाली: इसके रडार और कमांड-एंड-कंट्रोल सेंटर को घरेलू तकनीकों का उपयोग करके बनाया गया है, जो त्वरित रिस्पांस प्रदान करता है।
3. रणनीतिक महत्व एवं आत्मनिर्भरता
- सीमित वैश्विक क्लब: भारत उन चुनिंदा देशों के समूह में शामिल हो गया है जिनके पास लंबी दूरी की वायु रक्षा प्रणाली विकसित करने की स्वदेशी क्षमता है।
- आयात पर निर्भरता समाप्त: यह सफल परीक्षण भारत की वायु रक्षा प्रणालियों के विदेशी आयात पर निर्भरता को पूरी तरह खत्म करेगा।
- राष्ट्रीय वायु रक्षा शील्ड मजबूत: यह मिसाइल प्रणाली भारत की एकीकृत बहु-स्तरीय (Multi-layered) वायु रक्षा संरचना को मजबूत कर रणनीतिक सुरक्षा प्रदान करेगी।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| प्रणाली का नाम | ‘कुशा’ LRSAM। |
| प्रकार | लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (Surface-to-Air Missile)। |
| परीक्षण स्थल | डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप (ओडिशा तट)। |
| विकासकर्ता | DRDO एवं भारतीय उद्योग साझेदार। |
| मुख्य कार्य | लड़ाकू विमान, मिसाइल, UAV और बड़े विमानों को मार गिराना। |
ऑपरेशन साउदर्न रेडीनेस 26-2: दक्षिणी नौसेना कमान, कोच्चि में समापन
- प्रारंभिक परीक्षा: ऑपरेशन साउदर्न रेडीनेस (OSR 26-2), कंबाइंड मैरीटाइम फोर्सेज (CMF), कंबाइंड टास्क फोर्स 154 (CTF 154), IFC-IOR।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): भारत का समुद्री सुरक्षा दृष्टिकोण, अंतर्राष्ट्रीय निकाय और संधि, हिंद महासागर क्षेत्र में भारतीय नौसेना की भूमिका, क्षमता निर्माण (Capacity Building)।
चर्चा में क्यों?
कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान में चार दिवसीय बहुराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा प्रशिक्षण अभ्यास ‘ऑपरेशन साउदर्न रेडीनेस 26-2’ सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह अभ्यास भारतीय नौसेना द्वारा कंबाइंड मैरीटाइम फोर्सेज (CMF) के सहयोग से और भारत के नेतृत्व वाली कंबाइंड टास्क फोर्स 154 (CTF 154) के तत्वावधान में आयोजित किया गया था। 20 से 23 जुलाई 2026 तक चले इस कार्यक्रम में 27 देशों के 276 कर्मियों, 76 विशेषज्ञों और 4 अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भाग लिया। इस अभ्यास ने क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने और भाग लेने वाले देशों के बीच इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मुख्य बिंदु: प्रशिक्षण क्षेत्र, वैश्विक सहयोग और सामरिक महत्व
1. अंतर्राष्ट्रीय भागीदारी एवं प्रशिक्षण ढांचा
- व्यापक भागीदारी: अभ्यास में 27 देशों के 276 कर्मियों और 76 विषय विशेषज्ञों (SMEs) ने भाग लिया।
- अंतरराष्ट्रीय संगठन: संयुक्त राष्ट्र मादक द्रव्य एवं अपराध कार्यालय (UNODC) और IMO इंटरनेशनल मैरीटाइम लॉ इंस्टीट्यूट (IMO IMLI) जैसे प्रमुख निकायों का सहयोग मिला।
- मानव-घंटे (Man-hours): चार दिनों के इस गहन अभ्यास के दौरान कुल 3,800 प्रशिक्षण मैन-आवर्स उत्पन्न हुए।
2. प्रमुख प्रशिक्षण विषय और व्यावहारिक क्षेत्र
- सैद्धांतिक व कानूनी पहलू: समुद्री डोमेन जागरूकता (MDA), सूचना साझाकरण, समुद्री कानून, काउंटर-नारकोटिक्स, और असममित खतरे (Asymmetric Threats)।
- उन्नत तकनीक व प्रणाली: मैरीटाइम अनक्रूड सिस्टम (Drones/Unmanned Systems) और फोर्स प्रोटेक्शन मेजर का व्यावहारिक प्रशिक्षण।

- सिम्युलेटर व व्यावहारिक अभ्यास: डैमेज कंट्रोल, अग्निशमन, बार्डिंग प्रक्रियाएं, समुद्री संचार और भारतीय नौसैनिक जहाजों पर व्यावहारिक सी-ट्रेनिंग।
- सूचना केंद्र: इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर – इंडियन ओशन रीजन (IFC-IOR) और जॉइंट मैरीटाइम इंफॉर्मेशन सेंटर (JMIC) ने प्रमुख इनपुट प्रदान किए।
3. भारतीय नौसेना और दक्षिणी कमान का रणनीतिक महत्व
- CTF 154 का नेतृत्व: भारत द्वारा कंबाइंड टास्क फोर्स 154 (CTF 154) का नेतृत्व वैश्विक समुद्री सुरक्षा में उसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
- प्रशिक्षण हब के रूप में उभार: कोच्चि स्थित दक्षिणी नौसेना कमान ने आधुनिक सिमुलेटर और उन्नत शिक्षण विधियों के माध्यम से खुद को एक अग्रणी वैश्विक समुद्री प्रशिक्षण केंद्र के रूप में सिद्ध किया है।
- सॉफ्ट पावर और कूटनीति: इस आयोजन ने साझेदार देशों के बीच पेशेवर नेटवर्क, परिचालन विश्वास और क्षेत्रीय क्षमता निर्माण (Capacity Building) को सुदृढ़ किया है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| अभ्यास का नाम | ऑपरेशन साउदर्न रेडीनेस 26-2 (OSR 26-2)। |
| आयोजन स्थल | दक्षिणी नौसेना कमान, कोच्चि (20-23 जुलाई 2026)। |
| आयोजक | भारतीय नौसेना + कंबाइंड मैरीटाइम फोर्सेज (CMF) / CTF 154। |
| कुल भागीदार | 27 देश, 276 कर्मी, 4 अंतरराष्ट्रीय संगठन (जैसे UNODC, IMO IMLI)। |
| CTF 154 का नेतृत्व | भारतीय नौसेना (कमोडोर मिलिंद एम. मोकाशी – कमांडर CTF 154)। |
| मुख्य सूचना नोड | IFC-IOR (भारत) और JMIC (CMF)। |
स्वतंत्रता सेनानी तिरु सुब्रमण्य शिव: पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की व्यक्तित्व-आधारित घटनाएं, आधुनिक भारत का इतिहास, स्वतंत्रता संग्राम में तमिलनाडु का योगदान।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन (1857-1947) – महत्वपूर्ण व्यक्तित्व, उनका योगदान, स्वतंत्रता संग्राम में क्षेत्रीय आंदोलनों और नेताओं की भूमिका।
चर्चा में क्यों?
भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने महान स्वतंत्रता सेनानी तिरु सुब्रमण्य शिव की पुण्यतिथि पर उन्हें उपराष्ट्रपति भवन में पुष्पांजलि अर्पित की। इस दौरान उन्होंने तिरु सुब्रमण्य शिव के अटूट राष्ट्रप्रेम, वन्दे मातरम के जन-जागरण अभियान और ब्रिटिश जेल में कुष्ठ रोग से पीड़ित होने के बावजूद स्वतंत्रता संग्राम में उनके अप्रतिम योगदान को याद किया। यह श्रद्धांजलि भारत के उन महान नायकों के प्रति सम्मान प्रकट करती है जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया।
मुख्य बिंदु: जीवन परिचय, योगदान और ऐतिहासिक संदर्भ
1. प्रारंभिक जीवन और राष्ट्रवादी कार्य
- जन्मस्थान: तिरु सुब्रमण्य शिव तमिलनाडु के दक्षिणी भाग में स्थित वटलुगुंडु नामक छोटे से कस्बे के निवासी थे।
- जन-जागरण अभियान: उन्होंने तमिलनाडु के गांव-गांव की यात्रा की और लोगों को आजादी की लड़ाई से जोड़ने के लिए प्रेरित किया।
- ‘वन्दे मातरम’ का प्रसार: उन्होंने देशभक्ति के जीवंत नारे ‘वन्दे मातरम’ को जन-जन तक पहुंचाया।
- भारत माता के प्रति भक्ति: वे भारत माता को अपने ईश्वर के रूप में पूजते थे और उनका पूरा जीवन राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित रहा।
2. वी. ओ. चिदंबरम पिल्लई (VOC) के साथ सहयोग
- स्वदेशी आंदोलन में भूमिका: उन्होंने प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी तिरु वी. ओ. चिदंबरम पिल्लई के साथ मिलकर काम किया।
- ब्रिटिश औपनिवेशिक कार्रवाई: राष्ट्र के प्रति अटूट प्रतिबद्धता और स्वतंत्रता संग्राम में सक्रियता के कारण ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार ने उन्हें वी. ओ. सी. के साथ गिरफ्तार कर जेल में डाल दिया था।
3. संघर्ष, बीमारी और अदम्य साहस
- जेल में बीमारी: कारावास की कठिन और अमानवीय परिस्थितियों के दौरान वे कुष्ठ रोग (Leprosy) से ग्रसित हो गए थे।
- अंतिम सांस तक संघर्ष: गंभीर बीमारी के बावजूद उन्होंने अपने संकल्प को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया और जीवन की अंतिम सांस तक स्वतंत्रता संग्राम की सेवा करते रहे।
- प्रेरणादायक संदेश: उनका जीवन यह सिखाता है कि राष्ट्रप्रेम और अदम्य इच्छाशक्ति के आगे शारीरिक कष्ट और औपनिवेशिक दमन कभी बाधा नहीं बन सकते।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| व्यक्तित्व | तिरु सुब्रमण्य शिव। |
| जन्मस्थान | वटलुगुंडु, तमिलनाडु। |
| प्रमुख सहयोगी | तिरु वी. ओ. चिदंबरम पिल्लई। |
| मुख्य नारा/विचार | ‘वन्दे मातरम’ का प्रचार और भारत माता की भक्ति। |
| ऐतिहासिक संघर्ष | ब्रिटिश जेल में कारावास और कुष्ठ रोग से ग्रसित होने के बावजूद निरंतर राष्ट्र सेवा। |
पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों का गठन
- प्रारंभिक परीक्षा: फास्ट-ट्रैक कोर्ट (FTC), लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम 2024, न्यायिक सुधार।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): शासन प्रणाली एवं प्रशासनिक सुधार; युवाओं का कल्याण; आपराधिक न्याय प्रणाली; सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता।
चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य और छात्रों के हित की सुरक्षा के लिए एक बड़ा प्रशासनिक निर्णय लेते हुए पेपर लीक से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक अदालतों के गठन की घोषणा की। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि युवाओं का भविष्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और परीक्षा प्रणालियों की पवित्रता से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। इस कड़े संदेश के तुरंत बाद दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट कॉम्प्लेक्स में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत दर्ज मुकदमों की विशेष सुनवाई के लिए पहली फास्ट-ट्रैक अदालत भी अधिसूचित कर दी है।
मुख्य बिंदु: निर्णय का उद्देश्य, न्यायिक तंत्र और कानूनी ढांचा
1. घोषणा का मूल उद्देश्य एवं प्रशासनिक निर्देश
- त्वरित व कठोर न्याय: प्रतियोगी एवं सार्वजनिक परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक में शामिल अपराधियों को जल्द से जल्द सख्त सजा दिलाना।
- छात्रों के विश्वास की बहाली: परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाकर लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य एवं मानसिक तनाव की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- सख्त निर्देश: प्रधानमंत्री ने संबंधित विभागों को त्वरित न्यायिक संरचना स्थापित करने के लिए तत्काल कदम उठाने के आदेश दिए हैं।
2. फास्ट-ट्रैक अदालतों का गठन और अधिकार क्षेत्र
- राज्य व उच्च न्यायालय की भूमिका: अधीनस्थ न्यायालयों और फास्ट-ट्रैक कोर्ट की स्थापना राज्य सरकारों द्वारा संबंधित उच्च न्यायालयों के परामर्श से की जाती है।
- समर्पित विशेष अदालतें: दिल्ली उच्च न्यायालय ने लोक परीक्षा अधिनियम, 2024 के तहत लंबित सभी मामलों को नवनिर्मित फास्ट-ट्रैक कोर्ट में स्थानांतरित करने का निर्देश दिया है।
- समयबद्ध न्याय प्रक्रिया: इन विशेष अदालतों का प्राथमिक कार्य नियमित अदालतों के बोझ को कम करके केवल परीक्षा अपराधों पर प्रतिदिन सुनवाई कर त्वरित फैसला सुनाना है।
3. पृष्ठभूमि एवं लोक परीक्षा अधिनियम, 2024
- विद्यमान कानून: भारत सरकार ने संगठित नकल और पेपर लीक को रोकने के लिए ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024’ लागू किया था।
- सख्त कानूनी प्रावधान: इस कानून में दोषियों के लिए 3 से 10 साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
- फास्ट-ट्रैक अदालतों का पूरक प्रभाव: नया फास्ट-ट्रैक तंत्र इस कानून के तहत दर्ज मुकदमों के त्वरित निस्तारण (Disposal) को सुनिश्चित करेगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| हालिया घोषणा | पेपर लीक मामलों की सुनवाई हेतु फास्ट-ट्रैक कोर्ट्स (FTC) का गठन। |
| संबद्ध अधिनियम | लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024। |
| गठन का अधिकार | राज्य सरकारें / केंद्र शासित प्रदेश, संबंधित उच्च न्यायालय के परामर्श से। |
| पहली विशेष अदालत | राउज एवेन्यू कोर्ट कॉम्प्लेक्स, नई दिल्ली (दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा अधिसूचित)। |
| कानूनी प्रावधान | 3 से 10 साल का कारावास और ₹1 करोड़ तक का जुर्माना। |
16वीं ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक: भारत की अध्यक्षता में सफल समापन
- प्रारंभिक परीक्षा: ब्रिक्स, वैश्विक स्वास्थ्य पहल, NIMHANS, आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): अंतर्राष्ट्रीय संबंध (BRICS और ग्लोबल साउथ की भूमिका); स्वास्थ्य सुरक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचा, डिजिटल स्वास्थ्य तथा सामाजिक निर्धारकों से उत्पन्न बीमारियां।
चर्चा में क्यों?
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत चंडीगढ़ में ’16वीं ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्रियों की बैठक’ का सफल समापन हुआ। “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और निरंतरता के लिए निर्माण” (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) विषय के अंतर्गत आयोजित इस बैठक में ब्रिक्स देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों और सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने वैश्विक स्वास्थ्य चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया। सम्मेलन का समापन ’16वें ब्रिक्स स्वास्थ्य मंत्री घोषणापत्र’ के सर्वसम्मति से अपनाए जाने के साथ हुआ।
मुख्य बिंदु: प्रमुख पहल, संस्थागत तंत्र और वैश्विक स्वास्थ्य नीतियां
1. मानसिक कल्याण और NIMHANS की भूमिका
- उत्कृष्टता केंद्र नेटवर्क: मानसिक स्वास्थ्य को सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज (UHC) का अभिन्न अंग मानते हुए ‘ब्रिक्स नेटवर्क ऑफ सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस ऑन मेंटल वैलनेस’ की स्थापना की गई।
- NIMHANS का नेतृत्व: भारत का राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य और तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS) इस नेटवर्क के समन्वय केंद्र के रूप में कार्य करेगा।
- ट्रेनिंग हब नेटवर्क: अनुसंधान, नीति संवाद और मानसिक स्वास्थ्य रणनीतियों को बढ़ावा देने के लिए ‘ब्रिक्स ट्रेनिंग हब नेटवर्क’ का समर्थन किया गया।
2. महामारी की रोकथाम और प्रारंभिक चेतावनी तंत्र
- उप-कार्य समूह का गठन: संक्रामक रोगों की रोकथाम और त्वरित प्रतिक्रिया के लिए ‘ब्रिक्स एकीकृत प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली’ (BRICS Integrated Early Warning System) के तहत एक नए उप-कार्य समूह (Sub-Working Group) का गठन किया गया।

- टीवी अनुसंधान नेटवर्क: वैश्विक टीबी बोझ के लगभग आधे हिस्से का प्रतिनिधित्व करने वाले ब्रिक्स देशों ने ‘ब्रिक्स टीबी रिसर्च नेटवर्क’ को मजबूत करने पर जोर दिया ताकि टीबी उन्मूलन में तेजी आ सके।
3. डिजिटल स्वास्थ्य और नियामक ढांचा
- डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI): भारत ने आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन, आयुष्मान आरोग्य मंदिर और ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म के सफल मॉडलों को साझा किया।
- BRICS GxP व्हाइट पेपर: चिकित्सा उत्पादों की गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावकारिता सुनिश्चित करने के लिए ‘ब्रिक्स GxP व्हाइट पेपर’ जारी किया गया।
- संग्रह (Compendiums) का विमोचन: डिजिटल हेल्थ आर्किटेक्चर, स्वस्थ जीवन शैली, मानसिक कल्याण और राष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों पर ज्ञान-साझाकरण संग्रह जारी किए गए।
4. पारंपरिक चिकित्सा और स्वस्थ जीवन शैली
- पारंपरिक चिकित्सा (TCIM): पारंपरिक, पूरक और एकीकृत चिकित्सा पर एक ‘विशेषज्ञ कार्य समूह’ (Expert Working Group) स्थापित करने के संदर्भ-शर्तों (ToR) को मंजूरी दी गई।
- स्वस्थ जीवन शैली मिशन: गैर-संचारी रोगों (NCDs) से निपटने के लिए ‘ब्रिक्स मिशन फॉर हेल्दी लाइफस्टाइल’ तथा ‘संयुक्त पहल रोडमैप (2026–2029)’ का शुभारंभ किया गया।
- सामाजिक निर्धारक ढांचा: स्वास्थ्य समता और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) को हासिल करने के लिए ‘सामाजिक निर्धारकों से संचालित बीमारियों’ (DD-SDH) के खिलाफ परिचालन ढांचे को अपनाया गया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महवपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महवपूर्ण तथ्य |
| आयोजन स्थल व वर्ष | चंडीगढ़ (23 जुलाई 2026) — भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत। |
| अध्यक्षता की थीम | Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability। |
| मानसिक स्वास्थ्य नोडल संस्था | NIMHANS (बेंगलुरु) — ब्रिक्स उत्कृष्टता केंद्र नेटवर्क का समन्वयक। |
| नियामक पहल | BRICS GxP White Paper (चिकित्सा उत्पादों के मानकों के सामंजस्य हेतु)। |
| स्वास्थ्य रोडमैप | स्वस्थ जीवन शैली संवर्धन पर संयुक्त पहल रोडमैप (2026–2029)। |
| अन्य प्रमुख तंत्र | BRICS TB Research Network, BRICS Vaccine R&D Centre, CTF/Sub-Working Group on Early Warning System। |
भारत की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण एवं संवर्धन
- प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय संस्कृति – प्राचीन से आधुनिक काल तक के कला रूप, साहित्य और वास्तुकला के मुख्य पहलू। DESH योजना, KSVY, अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (ICH)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 1 & 2): भारतीय विरासत और संस्कृति का संरक्षण; सांस्कृतिक नीति एवं योजनाओं का क्रियान्वयन (सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप)।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राज्यसभा में देश की मूर्त (Tangible) और अमूर्त (Intangible) सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, डिजिटलीकरण तथा संवर्धन से जुड़ी विभिन्न केंद्रीय योजनाओं के कार्यान्वयन और वित्तीय आवंटन के संबंध में एक विस्तृत लिखित उत्तर प्रस्तुत किया। इस संसदीय जवाब में उत्तर प्रदेश और बिहार सहित पूरे देश में लागू की जा रही योजनाओं का ब्योरा दिया गया है।
मुख्य बिंदु: विरासत संरक्षण का संस्थागत एवं योजनागत ढांचा
1. मूर्त सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण
- भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI): केंद्रीय रूप से संरक्षित स्मारकों, पुरातात्विक स्थलों और अवशेषों की सुरक्षा और संरक्षण की नोडल एजेंसी।
- DESH योजना (देश): बजट 2026 में घोषित यह एक केंद्र प्रायोजित उप-योजना (Centrally Sponsored Sub-Scheme) है। इसका मुख्य उद्देश्य देश भर के 15 चयनित मूर्त सांस्कृतिक विरासत स्थलों का संवर्धन और सतत विकास करना है।
- म्यूजियम ग्रांट स्कीम: इस योजना के तहत क्षेत्रीय, राज्य और जिला स्तर पर नए संग्रहालयों की स्थापना, मौजूदा संग्रहालयों के आधुनिकीकरण और संग्रहालय संग्रह के डिजिटलीकरण के लिए वित्तीय सहायता दी जाती है।
2. अमूर्त सांस्कृतिक विरासत एवं कला रूप
- अमूर्त सांस्कृतिक विरासत संरक्षण योजना (ICH): भारत की जीवंत विरासत (Living Heritage) की पहचान, दस्तावेजीकरण, संरक्षण और संवर्धन का कार्य करती है।
- सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं उत्पादन अनुदान (CFPG) योजना: क्षेत्रीय, लोक और शास्त्रीय कला रूपों के संवर्धन हेतु सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रदर्शनों के आयोजन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
- गुरु-शिष्य परंपरा संवर्धन योजना (Repertory Grant): शास्त्रीय प्रदर्शन कलाओं को पारंपरिक गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से संरक्षित और प्रसारित करने के लिए दिग्गज गुरुओं और उनके समूहों को वित्तीय अनुदान।
3. छाता योजना: कला संस्कृति विकास योजना (KSVY)
- एकीकृत ढांचा: कला और संस्कृति के संवर्धन से जुड़ी उप-योजनाएं ‘कला संस्कृति विकास योजना’ (KSVY) के तहत संचालित होती हैं।
- वित्तीय प्रवाह: KSVY के तहत बजटीय आवंटन किया जाता है, जिसे इसके विभिन्न घटकों और अनुदान योजनाओं में आवश्यकतानुसार उपयोग में लाया जाता है।
4. संग्रहालय अनुदान योजना के प्रमुख उदाहरण (राज्यवार पहलें)
- उत्तर प्रदेश: संत रविदास संग्रहालय (वाराणसी) की स्थापना और अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय (अयोध्या) में डिजिटल रामायण गैलरी का विकास।
- मध्य प्रदेश: ग्वालियर में संगीत संग्रहालय की स्थापना और भोपाल स्थित सिटी म्यूजियम का आधुनिकीकरण।
- कर्नाटक: बसव समिति (बेंगलुरु) के माध्यम से संग्रहालय संग्रह का डिजिटलीकरण।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / योजना | महत्वपूर्ण तथ्य |
| DESH योजना | 15 चयनित विरासत स्थलों का विकास (बजट 2026 की केंद्र प्रायोजित उप-योजना)। |
| अमूर्त विरासत (ICH) | जीवंत कलाओं के दस्तावेजीकरण और संरक्षण हेतु। |
| गुरु-शिष्य परंपरा योजना | रेपर्टरी ग्रांट (शास्त्रीय कलाओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने हेतु)। |
| छतरी योजना (Umbrella Scheme) | कला संस्कृति विकास योजना (KSVY)। |
| डिजिटल रामायण गैलरी | अंतर्राष्ट्रीय राम कथा संग्रहालय, अयोध्या (उत्तर प्रदेश)। |
संग्रहालयों एवं अभिलेखागारों का डिजिटलीकरण
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की डिजिटल पहलें, जतन सॉफ्टवेयर, ज्ञान भारतम मिशन, अभिलेख पटल।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): भारत की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण; डिजिटलीकरण के माध्यम से शासन एवं अभिगम्यता; ज्ञान परंपराओं का पुनरुद्धार।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में देश के संग्रहालयों, पांडुलिपियों और ऐतिहासिक अभिलेखों के डिजिटलीकरण की अद्यतन स्थिति साझा की। उन्होंने बताया कि जतन सॉफ्टवेयर, ज्ञान भारतम मिशन और अभिलेख पटल जैसे समर्पित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा और पुरातात्विक अवशेषों को दुनिया भर के शोधकर्ताओं और नागरिकों के लिए सुलभ बनाया जा रहा है।
मुख्य बिंदु: डिजिटलीकरण की प्रमुख पहलें और प्रगति
1. ‘जतन’ सॉफ्टवेयर और म्युजियम पोर्टल
- तकनीकी सहयोग: संग्रहालय संग्रह के डिजिटलीकरण के लिए C-DAC, पुणे के सहयोग से ‘जतन’ सॉफ्टवेयर विकसित किया गया है।
- डिजिटल भंडार: ‘म्यूजियम्स ऑफ इंडिया’ पोर्टल पर 8 राष्ट्रीय संग्रहालयों, 2 ASI साइट संग्रहालयों और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर संग्रहालय (पुणे) का डेटा उपलब्ध है।
- डिजिटलीकरण की स्थिति (15 जुलाई 2026 तक): कुल 4,88,983 कलाकृतियों में से 3,75,707 कलाकृतियों (लगभग 76.83%) को ऑनलाइन उपलब्ध करा दिया गया है।
2. ज्ञान भारतम मिशन
- मूल उद्देश्य: भारत की विशाल पांडुलिपि विरासत (Manuscript Heritage) की रक्षा करना और सभ्यतागत ज्ञान परंपराओं को पुनर्जीवित करना।
- डिजिटल उपलब्धता: वर्तमान में ज्ञान भारतम पोर्टल पर 3.5 लाख से अधिक डिजिटाइज्ड पांडुलिपियां सार्वजनिक पहुंच के लिए उपलब्ध हैं।
3. भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार (NAI) और ‘अभिलेख पटल’
- वृहत लक्ष्य: भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार द्वारा 30 करोड़ पृष्ठों के डिजिटलीकरण और 4.5 करोड़ पृष्ठों के संरक्षण का लक्ष्य रखा गया है।
- वर्तमान उपलब्धि: 21 जुलाई 2026 तक लगभग 17.67 करोड़ (17,67,40,596) छवियों का डिजिटलीकरण पूरा हो चुका है।
- वैश्विक पहुंच: इन अभिलेखीय रिकॉर्ड्स को NAI के समर्पित पोर्टल ‘अभिलेख पटल’ पर अपलोड किया जा रहा है।
4. संग्रहालयों की डिजिटलीकरण स्थिति
| संग्रहालय | कुल कलाकृतियां | डिजिटाइज्ड / ऑनलाइन उपलब्ध | उपलब्धता (%) |
| राष्ट्रीय संग्रहालय (नई दिल्ली) | 2,06,169 | 1,19,255 | 57.84% |
| भारतीय संग्रहालय (कोलकाता) | 1,08,000 | 91,013 | 84.27% |
| सालारजंग संग्रहालय (हैदराबाद) | 48,367 | 48,349 | 99.96% |
| NGMA (मुंबई) | 1,461 | 1,461 | 100.00% |
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| पहल / पोर्टल | महत्वपूर्ण तथ्य |
| जतन सॉफ्टवेयर | C-DAC पुणे द्वारा विकसित संग्रहालय डिजिटलीकरण सॉफ्टवेयर। |
| ज्ञान भारतम मिशन | पांडुलिपियों के संरक्षण और ज्ञान परंपराओं के पुनरुद्धार हेतु। |
| अभिलेख पटल | भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार (NAI) का ऑनलाइन पोर्टल। |
| म्यूजियम ग्रांट स्कीम | संग्रहालयों के विकास और डिजिटलीकरण हेतु वित्तीय सहायता योजना। |
| डिजिटल रिपॉजिटरी नोड | Museums of India पोर्टल। |