25 July 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत नई दिल्ली में संपन्न आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर तीसरी ब्रिक्स (BRICS) मंत्रिस्तरीय बैठक के नीतिगत निष्कर्षों, लघु व मध्यम उद्योगों के वाणिज्यिक विवादों के त्वरित निपटारे हेतु एमएसएमई ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) पोर्टल, रसायन उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कैबिनेट द्वारा स्वीकृत ‘भव्य रसायन’ (Chemical Parks) योजना, इसके अतिरिक्त, कृषि क्षेत्र को डिजिटल मजबूती देने वाले WINDS सिस्टम और PMFBY (प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना) में तकनीकी सुधारों, स्वास्थ्य एवं जनसांख्यिकी संकेतकों पर प्रकाश डालने वाले NFHS-6 (राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण) के आंकड़ों तथा अनुसंधात्मक नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) के तहत अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) फंड का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर तीसरी ब्रिक्स मंत्रिस्तरीय बैठक: नई दिल्ली में सफल आयोजन
- प्रारंभिक परीक्षा: आपदा प्रबंधन (Disaster Management), ब्रिक्स (BRICS), उदयपुर घोषणापत्र (2016), कज़ान घोषणापत्र (2024), आपदा जोखिम न्यूनीकरण हेतु पीएम का 10-सूत्रीय एजेंडा।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): आपदा और आपदा प्रबंधन; अंतर्राष्ट्रीय संगठन (BRICS); जलवायु परिवर्तन और बुनियादी ढांचे का लचीलापन (Disaster-Resilient Infrastructure)।
चर्चा में क्यों?
नई दिल्ली में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत ‘आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) पर तीसरी ब्रिक्स मंत्रिस्तरीय बैठक’ का सफल आयोजन किया गया। गृह मंत्रालय के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) द्वारा आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय ने की। सम्मेलन का मुख्य आकर्षण ‘आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर ब्रिक्स संयुक्त वक्तव्य’ (BRICS Joint Statement on DRR) को सर्वसम्मति से अपनाना रहा, जिससे सदस्य देशों के बीच आपदा प्रबंधन और सतत विकास के लिए द्विपक्षीय व बहुपक्षीय सहयोग को नई दिशा मिलेगी।
मुख्य बिंदु: रणनीतिक प्राथमिकताएं, ज्ञान उत्पाद और भावी रोडमैप
1. ऐतिहासिक विकासक्रम और थीम
- उदयपुर से कज़ान तक: ब्रिक्स में आपदा प्रबंधन सहयोग की यात्रा उदयपुर घोषणापत्र (2016) से शुरू होकर कज़ान घोषणापत्र (2024) और ब्रिक्स आपदा जोखिम न्यूनीकरण समूह (DRRG) की स्थापना तक पहुंची है।
- मुख्य थीम: भारत की अध्यक्षता में यह बैठक “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” विषय पर केंद्रित रही।
- मंत्रिस्तरीय दर्जा: ब्राजील द्वारा आपदा जोखिम न्यूनीकरण समूह (DRRG) को मंत्रिस्तरीय दर्जा दिए जाने की सराहना की गई।
2. भारत के 5 रणनीतिक प्राथमिकता क्षेत्र और 10-सूत्रीय एजेंडा
- पीएम का 10-सूत्रीय एजेंडा: भारत का जन-केंद्रित (People-centric) दृष्टिकोण प्रधानमंत्री के आपदा जोखिम न्यूनीकरण हेतु 10-सूत्रीय एजेंडे से निर्देशित है।
- कार्य योजना (2025–2028): ब्रिक्स DRR कार्य योजना लागू करने के लिए भारत ने 5 रणनीतिक प्राथमिकताओं पर जोर दिया:
- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का सुदृढ़ीकरण।
- प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली (Early Warning Systems) का विस्तार।
- आपदा-प्रतिरोधी बुनियादी ढांचा (Resilient Infrastructure)।
- प्रकृति-आधारित समाधान (Nature-based Solutions)।
- सामुदायिक लचीलापन (Community Resilience) को बढ़ावा।
3. प्रमुख उच्च-स्तरीय संवाद एवं 6 फ्लैगशिप ज्ञान उत्पाद
- उच्च-स्तरीय नीति संवाद: “जलवायु-स्मार्ट और आपदा-प्रतिरोधी बुनियादी ढांचा प्रणालियों को आगे बढ़ाना” विषय पर आयोजित संवाद में नवीन वित्तपोषण और उभरती प्रौद्योगिकियों पर चर्चा हुई।
- मंत्रिस्तरीय गोलमेज सम्मेलन: ब्रिक्स DRR कार्य योजना (2025-2028) के कार्यान्वयन को तेज करने, क्षमता निर्माण और ज्ञान साझाकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया।

- 6 ज्ञान उत्पादों का शुभारंभ: साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण और क्षमता निर्माण के लिए 6 फ्लैगशिप ज्ञान उत्पाद लॉन्च किए गए।
4. भावी कार्ययोजना
- व्यावहारिक सहयोग: नियमित तकनीकी आदान-प्रदान, संयुक्त परियोजनाएं, सिम्युलेटर अभ्यास और वार्षिक विषयगत कार्यप्रवाह का आयोजन होगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| बैठक का नाम | आपदा जोखिम न्यूनीकरण पर 3री ब्रिक्स मंत्रिस्तरीय बैठक (24 जुलाई 2026, नई दिल्ली)। |
| आयोजक संस्था | राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA), गृह मंत्रालय। |
| अध्यक्षता | भारत (गृह राज्य मंत्री श्री नित्यानंद राय)। |
| ऐतिहासिक संदर्भ | उदयपुर घोषणापत्र (2016) और कज़ान घोषणापत्र (2024)। |
| मुख्य परिणाम | ब्रिक्स संयुक्त वक्तव्य को अपनाना और 6 फ्लैगशिप ज्ञान उत्पादों का शुभारंभ। |
| मुख्य कार्य योजना | ब्रिक्स आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्य योजना (2025–2028)। |
एमएसएमई ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) पोर्टल: वाणिज्यिक विवाद समाधान की नई दिशा
- प्रारंभिक परीक्षा: एमएसएमई ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) पोर्टल, RAMP कार्यक्रम, MSMED अधिनियम 2006, ईज़ ऑफ़ डूइंग बिजनेस।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): ई-गवर्नेंस एवं डिजिटल इंडिया; एमएसएमई क्षेत्र की चुनौतियां व विलंबित भुगतान; वैकल्पिक विवाद समाधान (ADR/ODR); समावेशी आर्थिक विकास।
चर्चा में क्यों?
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) मंत्रालय ने राष्ट्रीय ओडीआर (Online Dispute Resolution) ढांचे के सफल कार्यान्वयन का विवरण साझा किया। ‘रैंप’ कार्यक्रम के तहत शुरू किए गए इस डिजिटल पोर्टल ने विलंबित भुगतान और वाणिज्यिक विवादों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया है। मुंबई की ‘ज़ीडिजाइन इंजीनियरिंग’ द्वारा 24 घंटे में ₹21.06 लाख और कोलकाता की ‘शिवा केमिकल्स’ द्वारा ₹4.99 लाख की त्वरित रिकवरी इसके प्रभावी होने का प्रत्यक्ष प्रमाण है। यह कदम व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) और एमएसएमई की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ कर रहा है।
मुख्य बिंदु: डिजिटल तंत्र, कार्यप्रणाली और रणनीतिक लाभ
1. एमएसएमई ओडीआर पोर्टल की मूल विशेषताएं
- पारदर्शी व त्वरित न्याय: यह पोर्टल विलंबित भुगतानों के निपटान के लिए एक सुलभ, पारदर्शी और लागत प्रभावी डिजिटल मंच प्रदान करता है।
- लंबी मुकदमेबाजी से मुक्ति: यह औपचारिक अदालती मुकदमों पर निर्भरता कम करके त्वरित समझौते को बढ़ावा देता है।
- व्यापारिक संबंधों की सुरक्षा: मध्यस्थता और आपसी सहमति से विवाद सुलझाकर यह खरीदार और आपूर्तिकर्ता के व्यावसायिक संबंधों को बनाए रखता है।
2. प्री-MSEFC वार्ता और डिजिटल गाइडेड पाथवे
- सूक्ष्म एवं लघु उद्यम सुविधा परिषद (MSEFC): MSMED अधिनियम, 2006 के तहत कानूनी दावों के लिए गठित परिषद है।
- प्री-MSEFC तंत्र: मामले को परिषद में ले जाने से पहले दोनों पक्षों को एक संरचित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बातचीत का अवसर दिया जाता है।

- डिजिटल गाइडेड पाथवे: यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित टूल विवाद का विश्लेषण कर संभावित परिणाम का संकेत देता है, जिससे दोनों पक्ष यथार्थवादी फैसला ले पाते हैं।
3. सुगम पहुंच और डिजिटल इंडिया से जुड़ाव
- क्षेत्रीय भाषाओं में सहायता: स्थानीय और क्षेत्रीय भाषाओं के समर्थन से देश के किसी भी कोने का उद्यमी इसका उपयोग कर सकता है।
- ऑनलाइन सुलह और मध्यस्थता: परिषद के समक्ष होने वाली कार्यवाही ऑनलाइन आयोजित होती है, जिससे भौगोलिक बाधाएं और प्रक्रियात्मक देरी खत्म होती है।
- कैश-फ्लो में सुधार: समय पर बकाया पैसा मिलने से सूक्ष्म इकाइयों की कार्यशील पूंजी (Working Capital) बाधित नहीं होती।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| पोर्टल का नाम | एमएसएमई ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR) पोर्टल। |
| नोडल मंत्रालय | सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (Ministry of MSME)। |
| संबंधित कार्यक्रम | RAMP (Raising and Accelerating MSME Performance)। |
| वैधानिक निकाय | MSEFC (MSMED अधिनियम, 2006 के अंतर्गत स्थापित)। |
| तकनीकी सुविधा | प्री-MSEFC नेगोशिएशन एवं ‘डिजिटल गाइडेड पाथवे’। |
केमिकल पार्क्स योजना: ‘भव्य रसायन’ को कैबिनेट की मंजूरी
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन, केमिकल पार्क्स, केंद्रीय बजट 2026-27 की प्रमुख योजनाएं, रसायन एवं पेट्रोकेमिकल क्षेत्र।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): औद्योगिक नीति और भारत के विनिर्माण क्षेत्र पर इसका प्रभाव; बुनियादी ढांचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क और औद्योगिक गलियारे; आत्मनिर्भर भारत और मेक इन इंडिया।
चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने देश में तीन समर्पित केमिकल पार्क्स की स्थापना के लिए ‘भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन’ (BHAVYA Rasayan) को मंजूरी दी है। इस योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2026–27 में की गई थी। इसका प्राथमिक उद्देश्य भारत के रसायन उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना, लॉजिस्टिक्स लागत को कम करना और सतत व पर्यावरण-अनुकूल उत्पादन को बढ़ावा देना है। यह पहल देश के रसायन क्षेत्र में घरेलू और विदेशी निवेश (FDI) को आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
मुख्य बिंदु: वित्तीय आवंटन, चयन प्रक्रिया और आर्थिक व पर्यावरण प्रभाव
1. वित्तीय आवंटन और वित्त पोषण का ढांचा
- कुल वित्तीय परिव्यय: इस योजना के लिए ₹3,030 करोड़ का कुल बजट मंजूर किया गया है।
- बजट का विभाजन: ₹3,000 करोड़ कॉमन इंफ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं और बुनियादी उपयोगिताओं के निर्माण पर खर्च होंगे, जबकि ₹30 करोड़ प्रशासनिक व्यय के लिए निर्धारित हैं।
- योजना की अवधि: यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक 5 वर्षों की अवधि के लिए लागू रहेगी।
- केंद्र-राज्य अंशदान: केंद्र सरकार प्रति पार्क ₹1,000 करोड़ तक का अनुदान प्रदान करेगी। इसके लिए संबंधित राज्य सरकार को कम से कम ₹500 करोड़ का न्यूनतम योगदान देना अनिवार्य होगा।
2. चयन प्रक्रिया एवं ‘प्लग-एंड-प्ले’ इंफ्रास्ट्रक्चर
- चैलेंज रूट: केंद्र सरकार राज्यों के बीच प्रतिस्पर्धा के आधार पर ‘चैलेंज रूट’ के माध्यम से तीन समर्पित केमिकल पार्क्स का चयन करेगी।
- भूमि आवश्यकता: प्रत्येक पार्क के लिए न्यूनतम 8 वर्ग किमी (कम से कम 2,000 एकड़) की बाधा-मुक्त (Encumbrance-free) और निरंतर भूमि अनिवार्य है।
- प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं: इन पार्क्स में उद्योगों के लिए पूर्व-निर्मित ढांचागत सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिनमें शामिल हैं:
- कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) और ट्रीटमेंट, स्टोरेज एंड डिस्पोजल फैसिलिटी (TSDF)।
- सॉल्वेंट रिकवरी और डिस्टिलेशन सुविधाएं।
- स्टीम जनरेशन और इंटरकनेक्टेड पाइपलाइन नेटवर्क।
- समर्पित जल आपूर्ति, वितरण प्रणाली, लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग।
3. आर्थिक, पर्यावरणीय एवं रणनीतिक महत्व
- वैश्विक मूल्य श्रृंखला (GVC) का एकीकरण: यह भारतीय रसायन उद्योग को ग्लोबल वैल्यू चेन से जोड़कर निर्यात बढ़ाएगा और आयात पर निर्भरता कम करेगा।
- लॉजिस्टिक्स लागत में कमी: अपस्ट्रीम, डाउनस्ट्रीम और सहायक उद्योगों को एक स्थान पर लाकर संसाधनों के कुशल उपयोग से लागत में कमी आएगी।
- डाउनस्ट्रीम उद्योगों पर प्रभाव: यह योजना कृषि, वस्त्र (Textiles), फार्मास्यूटिकल्स, न्यूट्रास्यूटिकल्स, निर्माण, ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों को कच्चा माल उपलब्ध कराएगी।
- पर्यावरण अनुपालन: सामान्य अपशिष्ट उपचार संयंत्रों के माध्यम से अपशिष्ट प्रबंधन सुदृढ़ होगा, जो पर्यावरण मानकों के पालन को आसान बनाएगा।
- विकसित भारत @2047: औद्योगिक विकास से बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे, जो विकसित भारत के लक्ष्य को गति प्रदान करेंगे।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| योजना का पूरा नाम | भारत औद्योगिक विकास योजना रसायन (BHAVYA Rasayan)। |
| कुल बजट | ₹3,030 करोड़ (5 वर्षों के लिए: FY 2026-27 से 2030-31)। |
| प्रस्तावित केमिकल पार्क | 3 समर्पित केमिकल पार्क्स। |
| सहायता राशि (प्रति पार्क) | केंद्र का अनुदान: अधिकतम ₹1,000 करोड़; राज्य का न्यूनतम अंशदान: ₹500 करोड़। |
| चयन विधि | चैलेंज रूट। |
| भूमि की न्यूनतम शर्त | न्यूनतम 8 वर्ग किमी (2,000 एकड़) की निरंतर भूमि। |
WINDS सिस्टम और PMFBY में तकनीकी सुधार: भारतीय कृषि का डिजिटल कायाकल्प
- प्रारंभिक परीक्षा: मौसम सूचना नेटवर्क एवं डेटा सिस्टम (WINDS), पीएम फसल बीमा योजना (PMFBY), YES-TECH, डिजीक्लेम मॉड्यूल, CLAP ऐप।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): कृषि क्षेत्र में प्रौद्योगिकी का प्रयोग; फसल बीमा एवं जोखिम प्रबंधन; प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और डिजिटल गवर्नेंस।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने राज्यसभा में ‘वेदर इंफॉर्मेशन नेटवर्क एंड डेटा सिस्टम’ (WINDS) के प्रसार तथा ‘प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना’ (PMFBY) के तहत दावा निपटान में तेजी लाने के लिए किए गए तकनीकी सुधारों का ब्योरा साझा किया। सरकार ने फसल नुकसान के सटीक आकलन के लिए ‘यस-टेक’ और पारदर्शी भुगतान के लिए ‘डिजीक्लेम’ जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म को अनिवार्य कर दिया है। यह पहल फसल बीमा, कृषि सलाह और आपदा प्रबंधन के लिए हाइपरलोकल मौसम डेटा उत्पन्न करने में क्रांतिकारी साबित हो रही है।
मुख्य बिंदु: कृषि और फसल बीमा में डिजिटल नवाचार
1. WINDS सिस्टम: हाइपरलोकल मौसम डेटा नेटवर्क
- उद्देश्य: फसल बीमा, कृषि परामर्श और आपदा जोखिम प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर दीर्घकालिक मौसम डेटा उत्पन्न करना।
- तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर: इसके तहत ऑटोमैटिक वेदर स्टेशन (AWS) और ऑटोमैटिक रेन गेज (ARG) स्थापित किए जा रहे हैं।
- स्वीकृत साइट्स: 7 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों (असम, हिमाचल प्रदेश, केरल, ओडिशा, पुडुचेरी, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड) में 16,843 साइटों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 892 AWS/ARGs स्थापित हो चुके हैं।
2. YES-TECH: रिमोट सेंसिंग से उपज का सटीक आकलन
- प्रारंभ व विस्तार: खरीफ 2023 से धान और गेहूं तथा खरीफ 2024 से सोयाबीन के लिए रिमोट सेंसिंग आधारित उपज आकलन शुरू किया गया।
- अनिवार्य वेटेज: उपज अनुमान में YES-TECH आधारित आंकड़ों को न्यूनतम 30% अनिवार्य वेटेज देना लागू किया गया है।
- राज्यवार स्थिति (2025-26): यह 12 राज्यों के 344 जिलों में लागू है। मध्य प्रदेश ने इसे 100% वेटेज दिया है, जबकि महाराष्ट्र व उत्तर प्रदेश ने 50% और ओडिशा व कर्नाटक ने 40% वेटेज दिया है।
3. त्वरित दावा निपटान हेतु वित्तीय व तकनीकी सुधार
- डिजीक्लेम मॉड्यूल: राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल (NCIP) को PFMS और बीमा कंपनियों के सिस्टम से जोड़कर खरीफ 2022 से प्रत्यक्ष व पारदर्शी भुगतान शुरू किया गया।
- विलंब पर 12% दंड: बीमा कंपनी (खरीफ 2024 से) अथवा राज्य सरकार (खरीफ 2025 से) द्वारा प्रीमियम या दावों के भुगतान में देरी पर 12% का स्वतः संगणित दंड लगाया जाता है।
- प्रीमियम सब्सिडी का पृथक्करण (Delinking): केंद्र सरकार के हिस्से की सब्सिडी को राज्य के हिस्से से अलग कर दिया गया है ताकि किसानों को आनुपातिक दावा तुरंत मिल सके।
- अनिवार्य एस्क्रो खाता (ESCROW Account): खरीफ 2025 से राज्यों द्वारा प्रीमियम शेयर अग्रिम जमा करने के लिए एस्क्रो खाता खोलना अनिवार्य कर दिया गया है।
- CLAP ऐप: स्थानीय आपदाओं और कटाई के बाद के व्यक्तिगत नुकसान के त्वरित आकलन के लिए क्रॉप लॉस असेसमेंट ऐप (CLAP) को सभी राज्यों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| पहल / टूल | महत्वपूर्ण तथ्य |
| WINDS पहल | AWS और ARG का राष्ट्रीय नेटवर्क (हाइपरलोकल डेटा हेतु)। |
| YES-TECH | उपग्रह/रिमोट सेंसिंग आधारित फसल उपज अनुमान प्रणाली। |
| Digiclaim | NCIP और PFMS के एकीकरण से त्वरित DBT दावा भुगतान। |
| CLAP App | व्यक्तिगत खेतों में स्थानीय आपदा नुकसान के त्वरित आकलन हेतु ऐप। |
| 12% पेनल्टी नियम | बीमा कंपनियों व राज्यों द्वारा देरी पर 12% ऑटो-कैलकुलेटेड दंड। |
| CCE-Agri App | फसल कटाई प्रयोगों (CCEs) का डिजिटल डेटा अपलोड करने हेतु। |
NFHS-6 आंकड़े: मातृ-शिशु स्वास्थ्य में सुधार और जीवनशैली बीमारियों की चुनौती
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6), स्वास्थ्य सूचकांक (TFR, ANC, स्टंटिंग, वेस्टिंग), गैर-संचारी रोग (NCDs)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): स्वास्थ्य क्षेत्र से संबंधित सामाजिक मुद्दे; मानव संसाधन विकास; गैर-संचारी रोग और कुपोषण की दोहरी चुनौती।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्री प्रतापराव जाधव ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6: 2023-24) के प्रमुख आंकड़ों का विश्लेषण साझा किया। इन आंकड़ों से पता चलता है कि NFHS-5 (2019-21) की तुलना में देश में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य के संकेतकों में काफी सुधार हुआ है। हालांकि, वयस्कों में मोटापे और हाई ब्लड शुगर जैसी जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों (NCDs) में बढ़ोतरी एक नई चुनौती बनकर उभरी है।
मुख्य बिंदु: मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण और NCDs का तुलनात्मक विश्लेषण
1. मातृ स्वास्थ्य एवं परिवार नियोजन सूचकांक
- संस्थागत प्रसव (Institutional Deliveries): संस्थागत प्रसव की दर 88.6% से बढ़कर 90.6% हो गई है।
- एंटी-नेटल केयर (ANC): कम से कम 4 ANC जांच कराने वाली गर्भवती महिलाओं की संख्या 58.5% से बढ़कर 65.2% हो गई है। (कुल ANC कवरेज 92.6% से 95.9% पहुंचा)।
- कुशल स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा प्रसव: यह आंकड़ा 89.4% से सुधरकर 91.3% हो गया है।
- गर्भनिरोधक प्रसार दर (CPR): CPR 66.7% से बढ़कर 69.1% हो गई है। इससे अनमेत्त आवश्यकता (Unmet Need) घटकर 9.4% से 8.5% पर आ गई है।
- कुल प्रजनन दर (TFR): देश की TFR 2.0 पर स्थिर बनी हुई है, जो प्रतिस्थापन स्तर (Replacement Level 2.1) से नीचे है।
2. शिशु स्वास्थ्य, कुपोषण और टीकाकरण
- पूर्ण टीकाकरण (12-23 माह): बच्चों का पूर्ण टीकाकरण कवरेज 83.8% से बढ़कर 87.1% हो गया है।
- खसरा व रोटावायरस टीका: खसरे के दूसरे टीके की खुराक 58.6% से बढ़कर 71.8% हुई। वहीं रोटावायरस टीके की कवरेज 36.4% से दोगुनी से अधिक बढ़कर 85.4% हो गई।
- कुपोषण में कमी: बच्चों में स्टंटिंग (नाटापन) 35.5% से घटकर 29.3% और गंभीर वेस्टिंग (सूखा रोग) 7.7% से घटकर 5.2% रह गई है।
3. जीवनशैली रोग (NCDs) और वयस्कों का स्वास्थ्य
- मोटापा और ओवरवेट: 15-49 वर्ष के आयु वर्ग में 30.7% महिलाएं और 27.3% पुरुष ओवरवेट या मोटापे से ग्रस्त हैं।
- हाई ब्लड शुगर (>140 mg/dl): 15 वर्ष से अधिक उम्र के वयस्कों में ब्लड शुगर की समस्या महिलाओं में 13.5% से बढ़कर 17.8% और पुरुषों में 15.6% से बढ़कर 20.9% हो गई है।
- उच्च रक्तचाप (Hypertension): इसमें मामूली गिरावट दर्ज की गई है। महिलाओं में यह 21.3% से घटकर 19.4% और पुरुषों में 24.0% से घटकर 22.1% पर आ गया है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| सूचकांक / घटक | NFHS-5 (2019-21) | NFHS-6 (2023-24) | दिशा / प्रभाव |
| कुल प्रजनन दर (TFR) | 2.0 | 2.0 | स्थिर (प्रतिस्थापन स्तर से नीचे)। |
| संस्थागत प्रसव | 88.6% | 90.6% | सकारात्मक सुधार। |
| बच्चों में स्टंटिंग | 35.5% | 29.3% | कुपोषण में उल्लेखनीय कमी। |
| रोटावायरस टीकाकरण | 36.4% | 85.4% | दोगुनी से अधिक वृद्धि। |
| वयस्क मोटापा (महिलाएं) | – | 30.7% | NCD चिंता का विषय। |
| उच्च रक्तचाप (पुरुष) | 24.0% | 22.1% | मामूली सुधार। |
ANRF के तहत अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) फंड: एक नज़र में
- प्रारंभिक परीक्षा: अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF), RDI फंड, प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर (TRL), TDB, BIRAC, AIFs और FROs।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में घरेलू विकास; नई तकनीकों का स्वदेशीकरण; अनुसंधान एवं विकास (R&D) में निजी क्षेत्र की भागीदारी; आत्मनिर्भर भारत।
चर्चा में क्यों?
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा में अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) के तहत संचालित ₹1 लाख करोड़ के अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) फंड की प्रगति का ब्योरा दिया। केंद्रीय कैबिनेट द्वारा 1 जुलाई 2025 को स्वीकृत और 3 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री द्वारा लॉन्च किए गए इस फंड ने अब निजी क्षेत्र में दीप-टेक अनुसंधान और रणनीतिक प्रौद्योगिकियों के लिए पूंजी वितरण शुरू कर दिया है।
मुख्य बिंदु: फंडिंग संरचना, प्रगति और रणनीतिक प्राथमिकताएं
1. फंडिंग ढांचा और कार्यान्वयन मॉडल
- द्वितीय स्तर के फंड मैनेजर (SLFMs): फंड का आवंटन सीधे सरकार द्वारा न होकर प्राथमिक रूप से चयनित संस्थानों के जरिए होता है।
- FRO श्रेणी: प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) और जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) को प्राथमिक SLFM का दर्जा मिला है।
- वित्तीय आवंटन: TDB और BIRAC को ₹1,000-₹1,000 करोड़ की स्वीकृति मिली है, जिसमें से मार्च 2026 में TDB को ₹500 करोड़ का पहला हस्तांतरण किया गया।
- पात्रता मानदंड (TRL Level): सहायता केवल उन्हीं संस्थाओं को मिलेगी जिनकी तकनीक प्रौद्योगिकी तैयारी स्तर 4 (TRL 4) या उससे ऊपर है।
- वित्तपोषण का दायरा (50% कैप): RDI फंड परियोजना लागत का अधिकतम 50% कवर करेगा (ऋण या इक्विटी दोनों में 50% सीमा)। शेष 50% राशि निजी या वाणिज्यिक स्रोतों से जुटानी होगी।
2. अब तक की प्रगति और परियोजनाएं
- TDB की प्रगति: TDB ने ₹4,744 करोड़ की कुल लागत वाली 22 परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जिसमें RDI फंड का योगदान ₹2,192 करोड़ है।
- BIRAC की स्थिति: BIRAC ने ₹390.35 करोड़ की 8 परियोजनाओं को वित्तीय सहायता के लिए शॉर्टलिस्ट किया है।
- भविष्य की पाइपलाइन: नए SLFM ऑनबोर्डिंग के तहत वैकल्पिक निवेश फंडों (AIFs) से 162 और केंद्रित अनुसंधान संगठनों (FROs) से 38 आवेदन मिले हैं। करीब ₹8,000 करोड़ की प्रतिबद्धता विचाराधीन है।
3. लक्षित रणनीतिक क्षेत्र और भागीदार संस्थान
- प्राथमिकता वाले क्षेत्र: ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु कार्य, क्वांटम कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स, स्पेस, एआई (कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा हेतु), सिंथेटिक बायोलॉजी, फार्मा, मेडिकल डिवाइसेज और डिजिटल इकोनॉमी।
- भागीदार संस्थान: IITs, IISc और अन्य उत्कृष्ट संस्थानों (Institutions of Eminence) के रिसर्च पार्क FRO के तहत स्टार्ट-अप्स को समर्थन देंगे।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| फंड का नाम | RDI फंड (ANRF के अंतर्गत विशेष कोष)। |
| कुल कॉर्पस | ₹1 लाख करोड़ (6 वर्षों के लिए)। |
| नोडल विभाग | विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) / ANRF। |
| प्राथमिक SLFMs | TDB (DST का निकाय) और BIRAC (DBT का निकाय)। |
| तकनीकी योग्यता | TRL 4 या उससे अधिक की तकनीक। |
| फंडिंग सीमा | कुल परियोजना लागत/इक्विटी राउंड का अधिकतम 50%। |
| मॉडल | ब्लेंडेड फाइनेंसिंग (सार्वजनिक व निजी पूंजी का मिश्रण)। |