24 August 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत युवाओं को डिजिटल तकनीकों से लैस करने वाली राष्ट्रव्यापी क्लाउड और एआई कौशल पहल (NSDC, Cultus और AWS), खेल कूटनीति को मजबूती देने वाली ब्रिक्स खेल मंत्रियों की बैठक और ‘संयुक्त घोषणापत्र’ (2026), वैज्ञानिक अनुसंधान में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने वाली 14वीं ब्रिक्स विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रिस्तरीय बैठक (‘चेन्नई घोषणापत्र’), पशुधन अर्थव्यवस्था को सुरक्षा प्रदान करने वाले राष्ट्रीय पशुरोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP), नौसेना की तटीय रक्षा क्षमता में वृद्धि करने वाले स्वदेशी एंटी-सबमरीन वारफेयर क्राफ्ट ‘मांगरोल’, तथा भारत को ‘विश्व की प्रयोगशाला’ बनाने के संकल्प पर आधारित स्वास्थ्य सेवा में AI और भारतीय फार्मा क्षेत्र के अभूतपूर्व योगदान का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
राष्ट्रव्यापी क्लाउड और एआई कौशल पहल (NSDC, Cultus और AWS)
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC), कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय (MSDE), AWS re/Start कार्यक्रम, विकसित भारत 2047।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): मानव संसाधन विकास, कौशल विकास योजनाएं, उद्योग 4.0, प्रौद्योगिकी आधारित शिक्षा, रोज़गार सृजन, टियर-2 और टियर-3 शहरों का विकास।
चर्चा में क्यों?
कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (MSDE) के तत्वावधान में राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) और Cultus Education ने अमेज़न वेब सर्विसेज (AWS) के सहयोग से एक राष्ट्रव्यापी क्लाउड और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) कौशल पहल शुरू की है। इसका उद्देश्य भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों के युवाओं को क्लाउड कंप्यूटिंग और एआई में प्रशिक्षित कर ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को गति देना है।
मुख्य बिंदु: प्रशिक्षण मॉडल, लाभार्थी और क्रियान्वयन
1. प्रशिक्षण का दो-स्तरीय ढांचा
- स्तर 1 (फाउंडेशनल साक्षरता): 1,50,000 (1.5 लाख) शिक्षार्थियों को AWS के डिजिटल ट्रेनिंग कंटेंट के माध्यम से क्लाउड और एआई की बुनियादी साक्षरता प्रदान की जाएगी।
- स्तर 2 (गहन नौकरी-तैयार प्रशिक्षण): 10,000 चुनिंदा प्रतिभागियों को ‘AWS re/Start’ कार्यक्रम के तहत गहन, नौकरी-उन्मुख प्रशिक्षण दिया जाएगा।
2. AWS re/Start और Cultus का क्रियान्वयन
- 100% ऑनलाइन मॉडल: Cultus (NSDC का डिलीवरी पार्टनर) के माध्यम से यह कार्यक्रम पूरे देश में पूरी तरह से ऑनलाइन संचालित होगा, जिससे युवाओं को बड़े शहरों में जाने की आवश्यकता नहीं होगी।
- पाठ्यक्रम सामग्री: इसमें क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा, नेटवर्किंग, प्रोग्रामिंग और रिलेशनल डेटाबेस जैसे विषय शामिल हैं।
- प्रमाणन व रोज़गार: सफल स्नातकों को वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त AWS Certification मिलेगा। साथ ही, उन्हें स्थानीय नियोक्ताओं के साथ साक्षात्कार के प्रत्यक्ष अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे।
3. प्रमुख विशेषताएं और समापन
- राष्ट्रीय हैकाथॉन: प्रशिक्षण प्रक्रिया का समापन एक राष्ट्रीय हैकाथॉन के साथ होगा। यहाँ प्रतिभागी उद्योग जगत के नेताओं और भर्ती प्रबंधकों के सामने अपनी एआई/क्लाउड समाधान प्रस्तुत करेंगे।
- टियर-2/3 शहरों पर केंद्रित: बड़े महानगरों से बाहर के उभरते टैलेंट हब को सशक्त बनाना ताकि डिजिटल विभाजन को समाप्त किया जा सके।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| मुख्य नोडल एजेंसियां | NSDC (MSDE के तहत) + Cultus Education |
| प्रौद्योगिकी साझेदार | अमेज़न वेब सर्विसेज (AWS) |
| कुल लाभार्थी (लक्ष्य) | 1,50,000 (बुनियादी साक्षरता) + 10,000 (गहन कौशल) |
| प्रमुख कार्यक्रम | AWS re/Start (निःशुल्क, कोहोर्ट-आधारित प्रशिक्षण) |
| डिलीवरी का माध्यम | 100% ऑनलाइन (टियर-2 और टियर-3 शहरों पर केंद्रित) |
| समापन कार्यक्रम | राष्ट्रीय हैकाथॉन |
ब्रिक्स खेल मंत्रियों की बैठक और ‘संयुक्त घोषणापत्र’ (2026)
- प्रारंभिक परीक्षा: ब्रिक्स खेल संयुक्त घोषणापत्र, फिट इंडिया अभियान, खेल तकनीक, स्वदेशी खेल (Indigenous Sports)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): अंतरराष्ट्रीय संबंध (BRICS), सॉफ्ट पावर, युवा विकास और मेक इन इंडिया (खेल सामान विनिर्माण)।
चर्चा में क्यों?
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता (BRICS Chairship 2026) के तहत विशाखापट्टनम (आंध्र प्रदेश) में ब्रिक्स खेल मंत्रियों की बैठक का आयोजन हुआ। केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में ‘ब्रिक्स खेल संयुक्त घोषणापत्र’ (BRICS Sports Joint Declaration) को सर्वसम्मति से स्वीकार किया गया।
मुख्य बिंदु: खेल साझेदारी और 3 प्रमुख नई पहलें
1. भारत द्वारा शुरू की गई 3 प्रमुख पहलें
- स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी पर BRICS वर्किंग ग्रुप: खेल विज्ञान (Sports Science), एथलीट प्रदर्शन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल परिवर्तन के लिए सहयोग बढ़ाना।
- BRICS स्पोर्ट्स मैन्युफैक्चरिंग कॉन्क्लेव (नवंबर 2026): उदयपुर (राजस्थान) में पहला कॉन्क्लेव आयोजित होगा। इसका उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच खेल उपकरणों के व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और तकनीक का आदान-प्रदान करना है।
- पारंपरिक और स्वदेशी खेल प्रदर्शन खेल 2026 (12-13 अक्टूबर 2026): अहमदाबाद (गुजरात) में आयोजित होने वाला यह गैर-प्रतिस्पर्धी सांस्कृतिक कार्यक्रम ब्रिक्स देशों की पारंपरिक खेल विरासत और जन-सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत करेगा।
2. खेल अवसंरचना और ‘मेक इन इंडिया’
- मेक इन इंडिया अभियान: जल्द ही ‘स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स’ प्रोत्साहन योजना शुरू की जाएगी।
- ग्लोबल हब: भारत का लक्ष्य केवल खिलाड़ी तैयार करना नहीं, बल्कि खेल उपकरणों का वैश्विक विनिर्माण हब बनना भी है।

- समावेशी विकास: पैरा-स्पोर्ट्स (Para-sports) और महिलाओं की खेल भागीदारी बढ़ाने के लिए नई नीतियों पर जोर दिया गया है।
3. BRICS फ्रेंडशिप साइकिलिंग इवेंट
- विशाखापट्टनम में ‘फिट इंडिया संडेज ऑन साइकिल’ के 87वें संस्करण के तहत BRICS फ्रेंडशिप साइकिलिंग इवेंट का आयोजन हुआ।
- इसमें मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, यूएई, ईरान और दक्षिण अफ्रीका के खेल मंत्रियों ने भाग लेकर स्वस्थ जीवन शैली का संदेश दिया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजन स्थल | विशाखापट्टनम, आंध्र प्रदेश |
| स्वीकृत दस्तावेज | ब्रिक्स खेल संयुक्त घोषणापत्र |
| अध्यक्षता करने वाला देश | भारत (खेल मंत्री: डॉ. मनसुख मंडाविया) |
| स्पोर्ट्स मैन्युफैक्चरिंग कॉन्क्लेव | उदयपुर, राजस्थान (नवंबर 2026) |
| पारंपरिक व स्वदेशी खेल आयोजन | अहमदाबाद, गुजरात (12-13 अक्टूबर 2026) |
| संबद्ध स्वास्थ्य अभियान | फिट इंडिया संडेज ऑन साइकिल (87वां संस्करण) |
14वीं ब्रिक्स विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रिस्तरीय बैठक: ‘चेन्नई घोषणापत्र’
- प्रारंभिक परीक्षा: 14वीं ब्रिक्स विज्ञान मंत्रिस्तरीय बैठक, चेन्नई घोषणापत्र, BRICS GRAIN, ब्रिक्स यंग साइंटिस्ट फोरम।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): अंतरराष्ट्रीय संबंध (BRICS & Global South), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में सहयोग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और साझा अनुसंधान अवसंरचना।
चर्चा में क्यों?
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता (BRICS Chairship 2026) के तहत आयोजित 14वीं ब्रिक्स विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रिस्तरीय बैठक में सर्वसम्मति से ‘चेन्नई घोषणापत्र’ को अपनाया गया। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह की अध्यक्षता में संपन्न हुई यह बैठक वर्ष 2026 की थीम “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और निरंतरता के लिए निर्माण” पर केंद्रित थी।
मुख्य बिंदु: चेन्नई घोषणापत्र की प्रमुख पहलें और सहयोग क्षेत्र
1. मानव-केंद्रित दृष्टिकोण
- ग्लोबल साउथ पर ध्यान: विज्ञान, तकनीक और नवाचार (STI) को समावेशी बनाना ताकि सीमांत प्रौद्योगिकियां सस्ती और सुलभ बन सकें।
- सामाजिक कल्याण: AI, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, क्वांटम टेक्नोलॉजी, बायोटेक्नोलॉजी, रीन्यूएबल एनर्जी और महासागर अनुसंधान का उपयोग सीधे नागरिकों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए करना।
2. साझा अनुसंधान और अवसंरचना विकास
- BRICS GRAIN: ‘ब्रिक्स ग्लोबल रिसर्च एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क’ को क्रियान्वित करना, जिससे सदस्य देशों के शोधकर्ताओं को साझा वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं और सुविधाओं तक सीधी पहुंच मिलेगी।
- BRICS विज्ञान एवं अनुसंधान रिपोजिटरी: यह एक डिजिटल पब्लिक गुड के रूप में कार्य करेगा। इसमें वैज्ञानिक डेटाबेस, शोध पत्र, संस्थान और शोधकर्ताओं की जानकारी साझा की जाएगी।
3. युवा नवाचार और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र
- युवा वैज्ञानिक कार्यक्रम: ‘ब्रिक्स यंग साइंटिस्ट फोरम’ और ‘यंग इनोवेटर्स प्राइज’ के जरिए युवा शोधकर्ताओं की आवाजाही (Mobility) बढ़ाना।
- ब्रिक्स यूथ स्टार्टअप प्लेटफॉर्म: स्टार्टअप्स के लिए फंडिंग और बाजार पहुंच आसान बनाना। इसके साथ ही ‘ब्रिक्स स्टार्टअप इनोवेशन फंड’ पर भी विचार किया जा रहा है।
4. भविष्य की रूपरेखा (2026-2027)
- गतिविधियों का कैलेंडर: 2026-2027 के लिए एसटीआई कैलेंडर को मंजूरी दी गई।
- अगली अध्यक्षता: वर्ष 2027 में अगला ब्रिक्स विज्ञान मंत्रिस्तरीय सम्मेलन चीन की अध्यक्षता में आयोजित होगा।
राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP): एक सुदृढ़ पशुधन स्वास्थ्य ढांचा
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP), खुरपका-मुंहपका रोग (FMD), ब्रुसलोसिस, भारत पशुधन पोर्टल, नेशनल वन हेल्थ मिशन।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालन, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र, खाद्य सुरक्षा, वन हेल्थ दृष्टिकोण और महामारियों से निपटने की पूर्व तैयारी।
चर्चा में क्यों?
वर्ष 2019 में शुरू किया गया राष्ट्रीय पशु रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NADCP) भारत की सबसे बड़ी पशु स्वास्थ्य पहलों में से एक बनकर उभरा है। इस कार्यक्रम के तहत चलाए गए व्यापक टीकाकरण और निगरानी अभियानों के कारण देश में खुरपका-मुंहपका रोग (FMD) और ब्रुसलोसिस के मामलों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। हाल ही में जारी आंकड़ों के अनुसार, FMD के मामले 2019 के 132 से घटकर 2025 तक केवल 40 रह गए हैं। वहीं ब्रुसलोसिस के मामले भी 22 से घटकर 15 पर आ गए हैं।
मुख्य बिंदु: रोग नियंत्रण, डिजिटल एकीकरण और वन हेल्थ मिशन
1. बीमारियों का प्रभाव और टीकाकरण मॉडल
- खुरपका-मुंहपका रोग (FMD): यह एक विषाणुजनित (Viral) संक्रामक रोग है जो खुर वाले पशुओं को प्रभावित करता है। इसके लिए वर्ष में दो बार (द्विवार्षिक) 100% पशुओं का टीकाकरण किया जाता है। बीते तीन वर्षों में FMD के ‘एशिया-1’ सेरोटाइप का कोई भी मामला सामने नहीं आया है।
- ब्रुसलोसिस: यह जीवाणु Brucella abortus के कारण होने वाला प्रजनन रोग है। इसके लिए 4 से 8 महीने की मादा गोवंशीय बछड़ों को उनके जीवनकाल में एक बार टीका लगाया जाता है।
2. उत्पादकता और आर्थिक लाभ
- दुग्ध उत्पादन में वृद्धि: भारत का कुल दुग्ध उत्पादन 2014-15 के 146.31 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 247.87 मिलियन टन (69.4% की वृद्धि) हो गया है।
- औसत दुग्ध उत्पादकता: औसतन गोवंशीय उत्पादकता 1,640 किग्रा/पशु से बढ़कर 2,250 किग्रा/पशु हो गई है। लक्ष्य 2030 तक इसे 3,000 किग्रा तक पहुंचाना है।
- एकीकृत योजना (LHDCP): NADCP और पशु औषधि पहल को अब ₹2,010 करोड़ (FY 2026-27) के बजट के साथ पशुधन स्वास्थ्य और रोग नियंत्रण कार्यक्रम (LHDCP) के तहत एकीकृत कर दिया गया है।
3. डिजिटल मॉनिटरिंग और अवसंरचना
- भारत पशुधन पोर्टल: इसके तहत 39 करोड़ से अधिक पशुओं को 12-अंकों का यूनिक टैग आईडी जारी कर पंजीकृत किया गया है।

- मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयां (MVUs): 4,019 MVUs के जरिए टोल-फ्री नंबर 1962 के माध्यम से किसानों को घर तक पशु चिकित्सा सेवाएं दी जा रही हैं।
4. वन हेल्थ मिशन और महामारी फंड प्रोजेक्ट
- नेशनल वन हेल्थ मिशन: PM-STIAC द्वारा अनुमोदित यह मिशन मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य के बीच समन्वय स्थापित कर ज़ूनोटिक रोगों और रोगाणुरोधी प्रतिरोध (AMR) को रोकता है।
- पैंडेमिक फंड प्रोजेक्ट (G20): G20 पैंडेमिक फंड ($25 मिलियन) के सहयोग से मानक पशु चिकित्सा उपचार दिशानिर्देश (SVTG) और पशु रोगों के लिए संकट प्रबंधन योजना (CMP) जारी की गई है।
एंटी-सबमरीन वारफेयर क्राफ्ट ‘मांगरोल’: तटीय सुरक्षा में स्वदेशी मील का पत्थर
- प्रारंभिक परीक्षा: एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW SWC), कोचिंग शिपयार्ड लिमिटेड (CSL), मांगरोल, आत्मनिर्भर भारत।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): सुरक्षा चुनौतियाँ एवं उनका प्रबंधन, तटीय सुरक्षा, रक्षा क्षेत्र में स्वदेशीकरण (Indigenisation of Defence) और मेक इन इंडिया।
चर्चा में क्यों?
कोचिंग शिपयार्ड लिमिटेड (CSL), कोच्चि ने भारतीय नौसेना को ‘मांगरोल’। यह CSL द्वारा निर्मित किए जा रहे एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW SWC) श्रृंखला का तीसरा युद्धपोत है, जो भारत की तटीय और पनडुब्बी-रोधी युद्ध क्षमताओं को नई मजबूती देगा।
मुख्य बिंदु: क्षमताएं, सामरिक महत्व और नामकरण
1. स्वदेशीकरण और निर्माण
- 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री: मांगरोल का निर्माण ‘आत्मनिर्भर भारत’ और रक्षा निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र के तहत किया गया है, जिसमें 80% से अधिक उपकरण और तकनीकें पूरी तरह स्वदेशी हैं।
- तटीय सुरक्षा कवच: यह पोत तटीय जल (Coastal Waters) में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।
2. तकनीकी विशेषताएं और मारक क्षमता
- वाटरजेट प्रोपल्शन: यह युद्धपोत वाटरजेट्स से संचालित होता है, जो इसे कम गहराई वाले पानी (Shallow Waters) में असाधारण गतिशीलता और उच्च गति प्रदान करता है।
- उन्नत हथियार एवं सेंसर: यह स्वदेशी टॉरपीडो, एंटी-सबमरीन रॉकेट्स, आधुनिक रडार और उच्च क्षमता वाले सोनार सिस्टम से लैस है।
- बहुआयामी भूमिका: यह जल के भीतर निगरानी (Underwater Surveillance), लो-इंटेंसिटी मैरीटाइम ऑपरेशन्स (LIMO) और माइन वारफेयर (समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाने व हटाने) में पूरी तरह सक्षम है।
3. ऐतिहासिक नामकरण और विरासत
- भौगोलिक जुड़ाव: इस पोत का नाम गुजरात के जूनागढ़ जिले के प्रमुख तटीय शहर और बंदरगाह ‘मांगरोल’ के नाम पर रखा गया है, जो अपने मत्स्य उद्योग के लिए प्रसिद्ध है।

- पुराने युद्धपोत की विरासत: यह नाम भारतीय नौसेना के पूर्व माइंसवेपर INS मांगरोल की याद दिलाता है, जिसने 2004 तक नौसेना में अपनी सेवाएं दी थीं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| पोत का नाम व प्रकार | मांगरोल – 3rd ASW SWC |
| निर्माता संस्था | कोचिंग शिपयार्ड लिमिटेड (CSL), कोच्चि |
| स्वदेशी घटक | 80% से अधिक |
| प्रणोदन तकनीक | वाटरजेट्स |
| प्रमुख कार्य | तटीय पनडुब्बी रोधी युद्ध, LIMO और माइन वारफेयर |
| नाम का स्रोत | मांगरोल बंदरगाह (जूनागढ़, गुजरात) व पूर्व INS मांगरोल |
स्वास्थ्य सेवा में एआई और भारतीय फार्मा क्षेत्र: ‘विश्व की प्रयोगशाला’ बनने की ओर भारत
- प्रारंभिक परीक्षा: Ayushman Bharat Digital Mission (ABDM), ABHA ID, PRIP योजना, बायोफार्मा शक्ति मिशन, IndiaAI Mission, eSanjeevani portal।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का अनुप्रयोग, अनुसंधान एवं विकास (R&D), फार्मास्युटिकल क्षेत्र में स्वदेशीकरण और भारत का डिजिटल स्वास्थ्य ढांचा।
चर्चा में क्यों?
भारतीय प्रबंध संस्थान अहमदाबाद में IIMA हेल्थकेयर समिट 2026 का आयोजन किया गया। इस समिट की थीम “Advancing AI in Healthcare” रखी गई थी। सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने कहा कि भारत को अब केवल ‘दुनिया की फार्मेसी’ (Pharmacy of the World) बनकर नहीं रहना है, बल्कि अनुसंधान, नवाचार और एआई के बल पर ‘दुनिया की प्रयोगशाला’ (Laboratory of the World) बनना है।
मुख्य बिंदु: एआई का अनुप्रयोग, सरकारी योजनाएं और चुनौतियां
1. स्वास्थ्य सेवा में AI का जिम्मेदार उपयोग
- मानव निर्णय का पूरक: AI तकनीक डॉक्टरों और चिकित्सकों के नैदानिक निर्णय (Clinical Judgement) का स्थान नहीं ले सकती, बल्कि यह केवल उनका सहयोग करेगी।
- प्रमुख उपयोग: एआई का उपयोग ड्रग डिस्कवरी (औषधि खोज), वैयक्तिकृत उपचार (Personalised Treatment), तपेदिक (TB) तथा डायबिटिक रेटिनोपैथी के त्वरित परीक्षण और eSanjeevani के माध्यम से नैदानिक सहायता में किया जा रहा है।
- AI उत्कृष्टता केंद्र: एम्स नई दिल्ली, पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ और एम्स ऋषिकेश में एआई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं।
2. फार्मा एवं मेडटेक क्षेत्र के लिए प्रमुख सरकारी पहलें
- PRIP योजना (₹5,000 करोड़): फार्मा-मेडटेक क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार को बढ़ावा देने (Promotion of Research and Innovation in Pharma-MedTech Sector) के लिए स्वीकृत की गई है।
- बायोफार्मा शक्ति मिशन (₹10,000 करोड़): बजट में घोषित इस मिशन का उद्देश्य बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर, क्लिनिकल ट्रायल और घरेलू बायोफार्मास्युटिकल इकोसिस्टम को मजबूत करना है।
- आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM): 96 करोड़ से अधिक ABHA (Ayushman Bharat Health Account) आईडी बनाई जा चुकी हैं और 1000 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड्स जोड़े जा चुके हैं।
3. स्टार्टअप्स और AI पारिस्थितिकी तंत्र
- ड्रग डिस्कवरी में स्टार्टअप्स: बेंगलुरु और हैदराबाद के स्टार्टअप्स ड्रग डिस्कवरी के समय और लागत को कम करने के लिए एआई मॉडल का उपयोग कर रहे हैं।
- चुनौतियां और समाधान: सॉफ्टवेयर लाइसेंसिंग, कंप्यूटिंग क्षमता और डेटा एक्सेस जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार ‘IndiaAI Mission’ और ‘AIKosh’ के माध्यम से सहायता प्रदान कर रही है।
4. नए डिजिटल पहल व पुस्तकें जारी
- इंडिया फार्मा आर्काइव्स: इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस (IPA) और IIM अहमदाबाद आर्काइव्स की इस साझा डिजिटल पहल का उद्देश्य भारतीय फार्मा उद्योग के इतिहास को संरक्षित करना है।
- कोविड-19 वैक्सीन पर पुस्तक: भारत की कोविड-19 वैक्सीन विकास यात्रा और उसके वैज्ञानिक प्रबंधन पर एक पुस्तक का विमोचन किया गया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| समिट का नाम व स्थल | IIMA हेल्थकेयर समिट 2026, अहमदाबाद (गुजरात) |
| आयोजन की थीम | “Advancing AI in Healthcare” |
| PRIP योजना | ₹5,000 करोड़ (फार्मा-मेडटेक R&D और नवाचार हेतु) |
| बायोफार्मा शक्ति मिशन | ₹10,000 करोड़ (बायोलॉजिक्स व बायोसिमिलर हेतु) |
| AI Center of Excellence | AIIMS नई दिल्ली, PGIMER चंडीगढ़, AIIMS ऋषिकेश |
| डिजिटल आर्काइव पहल | इंडिया फार्मा आर्काइव्स (IPA + IIM अहमदाबाद) |