22 August 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत युवाओं और महिलाओं में उद्यमिता को गति देने के लिए राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान-II एवं ‘संकल्प शक्ति’ बुलेटिन, देश को मोबाइल असेंबली व विनिर्माण का वैश्विक केंद्र बनाने वाली मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS – ₹62,500 करोड़ परिव्यय), कॉर्पोरेट प्रशासन में पारदर्शिता लाने हेतु NFRA के 6वें आउटरीच कार्यक्रम (‘बेहतर वित्तीय रिपोर्टिंग पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण’), स्थायी व उत्तरदायी पर्यटन को बढ़ावा देने वाले ब्रिक्स पर्यटन मंत्रियों की बैठक और ‘जयपुर घोषणापत्र’ (2026), सैन्य व राष्ट्रीय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा समर्पित प्रादेशिक सेना के ‘टेरियर साइबर क्वेस्ट 2026’ (TCQ 3.0), तथा जनजातीय समुदायों की वन-आधारित आजीविका और मूल्य संवर्धन को सुदृढ़ करने वाले प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (PMJVM) का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान- II एवं ‘संकल्प शक्ति’ बुलेटिन
- प्रारंभिक परीक्षा: DAY-NRLM, लखपति दीदी पहल, संकल्प शक्ति तकनीकी बुलेटिन, SVEP, ONDC, GeM।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, स्वयं सहायता समूह (SHG) आंदोलन, समावेशी विकास, ग्रामीण उद्यमिता एवं गैर-कृषि अर्थव्यवस्था।
चर्चा में क्यों?
विश्व उद्यमी दिवस (21 अगस्त) के अवसर पर ग्रामीण विकास मंत्रालय ने दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के तहत ‘राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान- II’ (National Campaign on Entrepreneurship – II) का शुभारंभ किया। यह 3 महीने का विशेष अभियान (21 अगस्त से 21 नवंबर 2026) ग्रामीण महिला उद्यमियों को बढ़ावा देने और 6 करोड़ लखपति दीदियां तैयार करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को गति देगा। इसी अवसर पर मंत्रालय ने ग्रामीण उद्यमिता पर अपना पहला मासिक तकनीकी बुलेटिन ‘संकल्प शक्ति’ भी जारी किया।
मुख्य बिंदु: अभियान के लक्ष्य, रणनीति और मुख्य घटक
1. अभियान की रणनीति और दायरा
- अवधि: 3 महीने (21 अगस्त से 21 नवंबर 2026)।
- दोहरा ध्यान: यह अभियान कृषि (Farm) और गैर-कृषि (Non-Farm) दोनों क्षेत्रों के उद्यमों तथा स्वयं सहायता समूहों (SHG) के उत्पादों के विपणन (Marketing) पर केंद्रित है।
- ‘उद्यम सखी’ नामकरण: आजीविका संवर्धन में लगी कम्युनिटी रिसोर्स पर्सन (CRP-EP) और बिजनेस डेवलपमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स (BDSP) को पहचान देने के लिए अब ‘उद्यम सखी’ कहा जाएगा।
2. अभियान के 6 प्रमुख निर्धारित लक्ष्य
- कैडर ओरिएंटेशन: 50,000 सामुदायिक कैडरों का ओरिएंटेशन।
- उद्यमिता प्रशिक्षण: 5 लाख SHG महिलाओं को उद्यमिता और आजीविका प्रशिक्षण।
- डिजिटल ई-कॉमर्स की पहुंच: 25,000 SHG सदस्यों को ONDC, GeM और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर ऑनबोर्ड करना।
- औपचारिकीकरण: 50,000 ग्रामीण उद्यमों को औपचारिक ढांचे में लाना।
- कृषि-पारिस्थितिकी संवर्धन: 20 लाख महिलाओं के बीच एग्रो-इकोलॉजिकल प्रथाओं को बढ़ावा देना।
- उत्पादक समूह विस्तार: उत्पादक समूहों और उत्पादक उद्यमों की सदस्यता में 2 लाख नए सदस्यों को जोड़ना।
3. ‘संकल्प शक्ति’ बुलेटिन एवं डिजिटल एकीकरण
- तकनीकी बुलेटिन: ‘संकल्प शक्ति’ DAY-NRLM का पहला ग्रामीण उद्यम तकनीकी बुलेटिन (Rural Enterprise Tech Bulletin) है, जो अब मासिक रूप से प्रकाशित होगा।
- ई-कॉमर्स और बाज़ार लिंकेज: ONDC, GeM और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से SHG उत्पादों को सीधे संस्थागत खरीदारों, खुदरा विक्रेताओं और एग्रीगेटर से जोड़ा जाएगा।
- मौजूदा योजनाओं से तालमेल: यह अभियान स्टार्ट-अप ग्राम उद्यमिता कार्यक्रम (SVEP), EDP और वन स्टॉप फैसिलिटी (OSF) के ढांचे के साथ मिलकर काम करेगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजक मंत्रालय | ग्रामीण विकास मंत्रालय (DAY-NRLM के तहत) |
| अभियान की अवधि | 21 अगस्त से 21 नवंबर 2026 (3 महीने) |
| विश्व उद्यमी दिवस | 21 अगस्त |
| नया तकनीकी बुलेटिन | ‘संकल्प शक्ति’ (मासिक प्रकाशन) |
| नया नामकरण | CRP-EP एवं BDSP को अब ‘उद्यम सखी’ कहा जाएगा |
| राष्ट्रीय लक्ष्य | 6 करोड़ लखपति दीदियां बनाना |
मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS): ₹62,500 करोड़ का परिव्यय
- प्रारंभिक परीक्षा: मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS), PLI-LSEM योजना, घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA), इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप, मेक इन इंडिया, औद्योगिक नीति, रोजगार सृजन, प्रौद्योगिकी संप्रभुता (Technological Sovereignty), निर्यात और वैश्विक मूल्य श्रृंखला (GVC)।
चर्चा में क्यों?
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने ₹62,500 करोड़ के बजटीय परिव्यय के साथ मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS) अधिसूचित की है। यह योजना बड़े पैमाने के इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए PLI योजना (PLI-LSEM) की जगह लेगी, जिसकी अवधि 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी है। सरकार का लक्ष्य भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनाना, स्वदेशी ब्रांडों को बढ़ावा देना और वर्ष 2027 के मध्य तक पहला मजबूत भारतीय मोबाइल ब्रांड स्थापित करना है।
मुख्य बिंदु: योजना का दायरा, प्रोत्साहन और पात्रता शर्तें
1. योजना के दो लक्ष्य खंड
- लक्ष्य खंड 1 (TS1): मोबाइल फोन विनिर्माण को बड़े पैमाने पर बढ़ाना और घरेलू मूल्य संवर्धन (DVA) को गहरा करना। इसके तहत 2.25% से 5% तक विभेदित इंसेंटिव मिलेगा।
- लक्ष्य खंड 2 (TS2): भारतीय मोबाइल ब्रांडों का समर्थन करना। इसमें भारतीय ब्रांडों के लिए 5% इंसेंटिव और घरेलू डिजाइन व R&D के लिए 3% अतिरिक्त इंसेंटिव का प्रावधान है।
2. अतिरिक्त प्रोत्साहन और समयावधि
- अवधि: यह योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक 5 वर्षों के लिए लागू रहेगी। TS2 के आवेदकों को 1 वर्ष की गर्भाधान अवधि (Gestation Period) मिल सकती है।
- घरेलू घटकों की सोर्सिंग पर बोनस: यदि किसी वित्तीय वर्ष में निर्मित कुल फोन इकाइयों का कम से कम 25% हिस्सा स्थानीय घटकों/सब-असेंबली से पूरा होता है, तो 1.5% तक अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाएगा।
3. पात्रता मानदंड
- TS1 की पात्रता: भारत में पंजीकृत निर्माता/EMS कंपनियां। वित्त वर्ष 2025-26 में न्यूनतम ₹10,000 करोड़ का टर्नओवर अनिवार्य है। मौजूदा ब्रांडों को हर साल ₹5,000 करोड़ की वृद्धिशील बिक्री का लक्ष्य पूरा करना होगा।

- TS2 की पात्रता (भारतीय ब्रांड): 2025-26 में न्यूनतम ₹1,000 करोड़ का टर्नओवर। कंपनी का भारत में पंजीकृत होना, 51% से अधिक भारतीय शेयरधारिता, भारतीय प्रबंधन नियंत्रण, और स्वदेशी ट्रेडमार्क/R&D होना अनिवार्य है।
4. अपेक्षित आर्थिक प्रभाव
- उत्पादन लक्ष्य: 5 वर्षों में लगभग ₹39 लाख करोड़ का संचयी मोबाइल उत्पादन।
- रोजगार सृजन: लगभग 60,000 प्रत्यक्ष नौकरियां (Direct Jobs) पैदा होंगी।
- वर्तमान स्थिति: भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल उत्पादक है, जहाँ 99.2% इस्तेमाल होने वाले फोन ‘मेड इन इंडिया’ हैं। 2025 में स्मार्टफोन भारत की सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बनकर उभरा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| योजना का नाम | मोबाइल फोन विनिर्माण योजना (MPMS) |
| बजटीय परिव्यय | ₹62,500 करोड़ |
| योजना की अवधि | 5 वर्ष (वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31) |
| प्रोत्साहन दर (Incentive) | TS1: 2.25% – 5% | TS2: 5% (ब्रांड) + 3% (R&D) |
| घरेलू कंपोनेंट बोनस | 1.5% अतिरिक्त इंसेंटिव (25% लोकलाइजेशन पर) |
NFRA का 6वां आउटरीच कार्यक्रम: ‘बेहतर वित्तीय रिपोर्टिंग पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण’
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA), भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (ICAI), लेखापरीक्षा मानक (Audit Standards)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): वैधानिक व नियामक निकाय, कॉरपोरेट प्रशासन, भारतीय अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता और वित्तीय स्थिरता।
चर्चा में क्यों?
राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) ने अहमदाबाद में अपना छठा आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किया। “एक बेहतर वित्तीय रिपोर्टिंग पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण” (Creating a Better Financial Reporting Ecosystem) थीम पर आधारित यह कार्यक्रम छोटे और मध्यम आकार के ऑडिटरों (SMPs) की क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (ICAI) के सहयोग से आयोजित किया गया।
मुख्य बिंदु: आउटरीच कार्यक्रम का उद्देश्य और मुख्य सत्र
1. मुख्य उद्देश्य
- क्षमता निर्माण: छोटे और मध्यम ऑडिट फर्मों की व्यावसायिक क्षमता में सुधार करना।
- लेखापरीक्षा गुणवत्ता: वित्तीय विवरणों में पारदर्शिता लाना और ऑडिट की समग्र गुणवत्ता में सुधार करना।
- जनहित एवं विश्वास: सार्वजनिक हित की रक्षा करना और कॉरपोरेट रिपोर्टिंग में निवेशकों का विश्वास मजबूत करना।
2. प्रमुख चर्चाएं और तकनीकी सत्र
- वैश्विक मानक व तकनीक: NFRA के अध्यक्ष नितिन गुप्ता ने ऑडिट प्रक्रिया में आधुनिक वैश्विक मानकों को अपनाने और नई तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया।
- निरीक्षण और निरीक्षण प्रक्रिया: NFRA की पूर्णकालिक सदस्य स्मिता झिंग्रान ने रेखांकित किया कि ऑडिट फर्मों का नियमित निरीक्षण ही वित्तीय गुणवत्ता सुनिश्चित करता है।
- तकनीकी सत्र: इसमें ऑडिट रणनीति प्रलेखन, गंभीर गलत बयानी के जोखिम (Risk of Material Mis-statements), और NFRA की निगरानी से सीखे गए मामलों (Case Studies) पर व्यावहारिक अंतर्दृष्टि साझा की गई।
3. अब तक की प्रगति
- शुरुआत: यह आउटरीच श्रृंखला वर्ष 2025 में शुरू हुई थी।

- ICAI के साथ दूसरा संयुक्त कार्यक्रम: जून 2026 में पुणे में आयोजित पहले कार्यक्रम के बाद ICAI के साथ यह दूसरा संयुक्त आयोजन था।
- भागीदारी: इस पहल की शुरुआत के बाद से अब तक 450 से अधिक छोटी और मध्यम ऑडिट फर्मों के प्रतिनिधि इसमें भाग ले चुके हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजक निकाय | राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण (NFRA) |
| सहयोगी संस्थान | भारतीय चार्टर्ड अकाउंटेंट्स संस्थान (ICAI) |
| कार्यक्रम का स्थान | अहमदाबाद, गुजरात (6वां संस्करण) |
| विषय / थीम | Creating a Better Financial Reporting Ecosystem |
| लक्ष्य समूह | छोटे और मध्यम आकार के ऑडिटर |
ब्रिक्स पर्यटन मंत्रियों की बैठक और ‘जयपुर घोषणापत्र’ (2026)
- प्रारंभिक परीक्षा: ब्रिक्स, जयपुर घोषणापत्र, विकसित भारत 2047, एआई और जिम्मेदार पर्यटन।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय समूह, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, सतत पर्यटन, अवसंरचना विकास, रोजगार सृजन।
चर्चा में क्यों?
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता (BRICS Chairship) के तहत जयपुर में आयोजित ब्रिक्स पर्यटन मंत्रियों की बैठक सर्वसम्मति से ‘जयपुर घोषणापत्र’ को अपनाने के साथ संपन्न हुई। केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की अध्यक्षता में हुई यह बैठक वर्ष 2026 की थीम “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और निरंतरता के लिए निर्माण” (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) पर केंद्रित थी।
मुख्य बिंदु: प्राथमिकताएं, सहयोग और रणनीति
1. जयपुर घोषणापत्र की 4 मुख्य प्राथमिकताएं
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और पर्यटन: उत्तरदायी और मानव-केंद्रित AI का उपयोग करके गंतव्य प्रबंधन, बहुभाषी संचार और यात्रा में सुगमता लाना।
- सतत एवं जिम्मेदार पर्यटन: प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करते हुए समुदाय-केंद्रित विकास को बढ़ावा देना।
- कौशल विकास और क्षमता निर्माण: पर्यटन उद्योग और शिक्षा जगत के बीच साझेदारी बढ़ाकर कार्यबल का निरंतर अपस्किलिंग करना।
- सहज यात्रा और डेटा विनिमय: ब्रिक्स देशों के बीच पर्यटन आंकड़ों का आदान-प्रदान और लोगों के बीच जुड़ाव मजबूत करना।
2. आर्थिक और क्षेत्रीय प्रभाव
- समावेशी विकास: पर्यटन का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित न रखकर छोटे कस्बों, गांवों और दूरदराज के क्षेत्रों तक पहुंचाना।
- स्थानीय आजीविका: होमस्टे, टैक्सी ऑपरेटर, गाइड, हस्तशिल्प कारीगर, बुनकर और किसानों के लिए सीधे रोजगार का सृजन।
- विकसित भारत 2047: पर्यटन को वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित अर्थव्यवस्था बनाने के प्रमुख स्तंभ के रूप में स्थापित करना।
3. द्विपक्षीय वार्ताएं और सांस्कृतिक अनुभव
- द्विपक्षीय बैठकें: भारत ने सम्मेलन से इतर ब्राजील, ईरान, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ अलग से पर्यटन सहयोग पर चर्चा की।

- सांस्कृतिक पर्यटन: प्रतिनिधियों को जयपुर के विरासत स्थलों (हवा महल, सिटी पैलेस, आमेर किला) और स्थानीय पारंपरिक कला-शिल्प का अनुभव कराया गया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजन स्थल | जयपुर, राजस्थान |
| अपनाया गया दस्तावेज | जयपुर घोषणापत्र (2026) |
| बैठक की थीम | Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability |
| अध्यक्षता करने वाला देश | भारत (पर्यटन मंत्री: गजेंद्र सिंह शेखावत) |
| सहभागी देश | भारत, ब्राजील, चीन, मिस्र, ईरान, दक्षिण अफ्रीका, UAE, इथियोपिया, इंडोनेशिया और रूस |
प्रादेशिक सेना का ‘टेरियर साइबर क्वेस्ट 2026’ (TCQ 3.0)
- प्रारंभिक परीक्षा: प्रादेशिक सेना (Territorial Army), साइबरपीस, बग हंटिंग, एआई कवच, कैप्चर-द-फ्लैग (CTF)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): आंतरिक सुरक्षा, साइबर सुरक्षा की चुनौतियां, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सैन्य उपयोग, स्वदेशी रक्षा तकनीक।
चर्चा में क्यों?
भारतीय सेना की प्रादेशिक सेना (Territorial Army) ने साइबर सुरक्षा थिंक-टैंक CyberPeace के साथ मिलकर राष्ट्रीय स्तर के हैकाथॉन ‘टेरियर साइबर क्वेस्ट 2026’ (TCQ 3.0) का तीसरा संस्करण लॉन्च किया है। इसका मुख्य उद्देश्य साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और सूचना क्षेत्र की उभरती रक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए स्वदेशी समाधान विकसित करना है।
मुख्य बिंदु: प्रतियोगिता के 3 प्रमुख ट्रैक और समयसीमा
1. प्रतियोगिता के 3 मुख्य ट्रैक
- बग हंटिंग: यह एक कैप्चर-द-फ्लैग (CTF) हैकाथॉन है। इसमें प्रतिस्पर्धियों को वास्तविक जैसी सिमुलेटेड महत्वपूर्ण अवसंरचना (Critical Infrastructure) में तकनीकी कमियों और सुरक्षा खतरों की पहचान करनी होगी।
- एआई कवच: यह एआई और मशीन लर्निंग पर आधारित ट्रैक है। इसका ध्यान स्वचालित रक्षा प्रणाली विकसित करने, खतरे का पहले से अनुमान लगाने और असामान्य गतिविधियों (Anomaly Detection) को पकड़ने पर है।
- क्रीटर्स चैलेंज: कंटेंट क्रीटर्स और डिजिटल मीडिया विशेषज्ञों के लिए एक अभियान है। इसका लक्ष्य डीपफेक, फिशिंग, ऑनलाइन धोखाधड़ी और भ्रामक जानकारियों (Misinformation) के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना है।
2. प्रतिभागी और स्वदेशी सुरक्षा
- साझेदारी: हैकाथॉन में शिक्षा जगत, उद्योग, अनुसंधान संस्थानों, सरकारी निकायों और सशस्त्र बलों की प्रतिभाएं एक साथ काम करेंगी।
- आत्मनिर्भर रक्षा: इसका फोकस राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण तकनीकों का पूरी तरह स्वदेशी विकास करना है।
3. महत्वपूर्ण तिथियां
- पंजीकरण अंतिम तिथि: 31 अगस्त 2026
- ऑनलाइन शॉर्टलिस्टिंग: 1 से 10 सितंबर 2026
- ग्रैंड फिनाले (नई दिल्ली): 6 से 8 अक्टूबर 2026
- पुरस्कार समारोह: 9 अक्टूबर 2026
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजक निकाय | प्रादेशिक सेना (Territorial Army) + साइबरपीस |
| प्रोग्राम का नाम | टेरियर साइबर क्वेस्ट 2026 / TCQ 3.0 (तीसरा संस्करण) |
| मुख्य उद्देश्य | साइबर सुरक्षा और एआई में स्वदेशी रक्षा समाधान |
| बग हंटिंग तकनीक | कैप्चर-द-फ्लैग (CTF) क्वालीफायर |
| एआई कवच का काम | प्रेडिक्टिव थ्रेट इंटेलिजेंस और ऑटोमेटेड डिफेंस |
प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (PMJVM): जनजातीय वन अर्थव्यवस्था का सशक्तिकरण
- प्रारंभिक परीक्षा: PMJVM, ट्राइफेड, लघु वन उपज (MFP), न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), वन अधिकार अधिनियम (FRA) 2006, पेसा अधिनियम 1996, वन धन विकास केंद्र (VDVK)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): अतिसंवेदनशील वर्गों का कल्याण, जनजातीय अधिकार, समावेशी विकास, ग्रामीण आजीविका, महिला सशक्तिकरण और समुदाय-संचालित अर्थव्यवस्था।
चर्चा में क्यों?
भारत की 10.4 करोड़ से अधिक जनजातीय आबादी की आजीविका को सुदृढ़ करने के लिए प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन (PMJVM) एक प्रमुख स्तंभ के रूप में उभर रहा है। यह योजना जनजातीय संग्राहकों को केवल कच्चे माल के विक्रेता से बदलकर ‘मूल्य संवर्धन उद्यमी’ बना रही है। अब तक देश में 4,172 वन धन विकास केंद्र (VDVK) स्वीकृत किए जा चुके हैं, जिनसे 12.48 लाख जनजातीय सदस्य सीधे जुड़े हैं।
मुख्य बिंदु: कानूनी ढांचा, VDVK मॉडल और आर्थिक प्रभाव
1. लघु वन उपज (MFP) और कानूनी अधिकार
- आजीविका का आधार: जनजातीय परिवारों की 20% से 40% वार्षिक आय महुआ, तेंदू पत्ता, शहद, बांस, इमली, लाख और जड़ी-बूटियों जैसी लघु वन उपज से आती है।
- वन अधिकार अधिनियम (FRA) 2006: गैर-इमारती वन उपज (NTFP) के संग्रह और बिक्री का कानूनी अधिकार देता है।
- पेसा अधिनियम 1996: जनजातीय ग्राम पंचायतों को लघु वन उपज पर मालिकाना हक प्रदान करता है।
2. MSP और संस्थागत तंत्र (TRIFED)
- 87 MFP आइटम: सरकार PMJVM के तहत 87 लघु वन उपज वस्तुओं के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) अधिसूचित करती है।

- ट्राइफेड: जनजातीय सहकारी विपणन विकास महासंघ राज्य एजेंसियों के माध्यम से सीधे जनजातीय संग्राहकों से तय MSP पर खरीद करता है। 2013-14 से अब तक राज्यों द्वारा ₹693.98 करोड़ मूल्य की 2.67 लाख मीट्रिक टन MFP खरीदी गई है।
3. वन धन विकास केंद्र (VDVK) की संरचना
- SHG क्लस्टर: 15 स्वयं सहायता समूहों (लगभग 300 सदस्य) को मिलाकर एक VDVK बनता है। इसमें कम से कम 60% सदस्य अनुसूचित जनजाति (ST) से होने अनिवार्य हैं।
- मूल्य संवर्धन एवं सहायता: केंद्रों को प्राथमिक प्रसंस्करण उपकरण, सस्टेनेबल हार्वेस्टिंग ट्रेनिंग, वर्किंग कैपिटल तथा पैकेजिंग सहायता दी जाती है।
- ब्रांडिंग और ई-कॉमर्स: ट्राइफेड के माध्यम से उत्पादों की जीआई टैगिंग, हाट-बाजारों का आधुनिकीकरण और डिजिटल विपणन लिंकेज प्रदान किया जाता है।
4. महिला सशक्तिकरण और उदाहरण
- अधिकांश वन उपज संग्रह और बिक्री महिलाएं करती हैं।
- सफल मॉडल: अरुणाचल प्रदेश के लेपाराडा जिले का VDVK किंग चिली अचार, बांस के कोपलों का अचार और हल्दी पाउडर बनाकर ₹11 लाख से अधिक के उत्पाद बेच चुका है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| कार्यान्वयन एजेंसी | ट्राइफेड (जनजातीय कार्य मंत्रालय के तहत) |
| योजना की शुरुआत | वित्त वर्ष 2021-22 (वन धन योजना: 14 अप्रैल 2018) |
| MSP के तहत अधिसूचित MFP | 87 वस्तुएं |
| VDVK संरचना | 15 SHGs का क्लस्टर (300 सदस्य, न्यूनतम 60% ST) |
| स्वीकृत / सक्रिय VDVK | 4,172 स्वीकृत (2,911 सक्रिय) |
| मुख्य लक्ष्य | बिचौलियों से मुक्ति, मूल्य संवर्धन, विकसित भारत @2047 |