21 August 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत महासागरीय पारिस्थितिकी और ध्रुवीय शोध को बढ़ावा देने वाली ब्रिक्स महासागर एवं ध्रुवीय विज्ञान-प्रौद्योगिकी कार्यसमूह की 8वीं बैठक, भारत के अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) में नीली अर्थव्यवस्था के अवसरों को रेखांकित करने वाली भारत के गहरे समुद्र और सुदूर जल मत्स्य संसाधनों पर राष्ट्रीय रिपोर्ट, भारत-जापान संयुक्त रक्षा वक्तव्य (2026), तकनीकी नवाचार व स्टार्ट-अप्स को बढ़ावा देने के लिए TDB द्वारा समर्थित एलायंस AI और स्वदेशी ‘Fixit’ प्लेटफॉर्म, ‘स्मार्ट’ कैंसर रोधी दवा RK-251, तथा डिजिटल अवसंरचना व सुशासन के वैश्विक मानकों को तय करने वाले वैश्विक डिजिटल क्षमता निर्माण गठबंधन (GDCBA) का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
ब्रिक्स महासागर एवं ध्रुवीय विज्ञान-प्रौद्योगिकी कार्यसमूह की 8वीं बैठक
- प्रारंभिक परीक्षा: ब्रिक्स, NCPOR, गोआ, ग्लोबल ओशियन ऑब्जर्विंग सिस्टम (GOOS), अंतर्राष्ट्रीय ध्रुवीय वर्ष (IPY-5)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संस्थान, बहुपक्षीय मंच, महासागर और ध्रुवीय अनुसंधान, तटीय लचीलापन (Coastal Resilience), जलवायु परिवर्तन।
चर्चा में क्यों?
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता (BRICS Presidency) के तहत पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) ने 12-14 अगस्त 2026 तक गोवा में महासागर और ध्रुवीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर ब्रिक्स कार्यसमूह (BRICS OPST) की 8वीं बैठक का आयोजन किया। इस बैठक की मेजबानी राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं महासागर अनुसंधान केंद्र (NCPOR), गोवा ने की।
मुख्य बिंदु: रणनीतिक सहयोग, प्राथमिकताएं एवं प्रमुख समझौते
1. संस्थागत ढांचा और सहभागी देश
- समन्वयक निकाय: यह गतिविधियां पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) द्वारा ब्रिक्स के ‘विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (STI)’ ढांचे के तहत आयोजित की जाती हैं।
- प्रतिभागी देश: ब्राजील, चीन, मिस्र, भारत, इंडोनेशिया, रूस, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के वैज्ञानिकों और अधिकारियों ने भाग लिया।
2. प्रमुख चर्चा बिंदु और प्राथमिकताएं
- तटीय शहरों का संरक्षण: तटीय क्षेत्रों की चुनौतियों का समाधान और तटीय शहरों की सुरक्षा के लिए तटीय लचीलापन (Coastal Resilience) विकसित करना।
- GOOS का सुदृढ़ीकरण: सटीक महासागरीय जानकारी सेवाओं के विकास के लिए ‘ग्लोबल ओशियन ऑब्जर्विंग सिस्टम’ (GOOS) को मजबूत करना।
- ध्रुवीय अनुसंधान एवं अंटार्कटिका अभियान: संयुक्त ध्रुवीय अनुसंधान और अंटार्कटिक अभियानों में ब्रिक्स देशों की समावेशी भागीदारी सुनिश्चित करना।
- युवा शोधकर्ताओं का क्षमता निर्माण: युवा शोधकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण और वैज्ञानिकों के आदान-प्रदान के अवसरों को बढ़ाना।
3. प्रमुख समझौते और भविष्य का रोडमैप
- अंतर्राष्ट्रीय ध्रुवीय वर्ष-5 (IPY-5): ‘IPY-5’ के लिए संयुक्त लक्ष्य निर्धारित करने पर सहमति बनी।
- ध्रुवीय महासागरीय जैव विविधता: ब्रिक्स देशों के बीच संयुक्त ध्रुवीय महासागरीय जैव विविधता अध्ययन शुरू करने का निर्णय।
- भारत की भूमिका: भारत कार्यसमूह के लिए रोडमैप और अल्पकालिक कार्य योजना को अंतिम रूप देने का समन्वय करेगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजन स्थल | NCPOR, गोवा (12-14 अगस्त 2026) |
| नोडल मंत्रालय | पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) + DST |
| मेजबान संस्थान | राष्ट्रीय ध्रुवीय एवं महासागर अनुसंधान केंद्र (NCPOR) |
| सहयोगी ढांचा | BRICS विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (STI) ढांचा |
| प्रमुख वैश्विक पहल | IPY-5 (5वां अंतर्राष्ट्रीय ध्रुवीय वर्ष) और GOOS प्रणाली |
भारत के गहरे समुद्र और सुदूर जल मत्स्य संसाधनों पर राष्ट्रीय रिपोर्ट
- प्रारंभिक परीक्षा: CMLRE, भारत का EEZ (2.37 मिलियन वर्ग किमी), मेसोपेलैजिक ज़ोन (ट्वाइलाइट ज़ोन), FORV सागर संपदा, पर्यावरण डीएनए (eDNA), SDG 14।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy), खाद्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और जैविक कार्बन पंप, समुद्री स्थानिक नियोजन।
चर्चा में क्यों?
समुद्री जीव संसाधन एवं पारिस्थितिकी केंद्र (CMLRE) की रजत जयंती पर पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय (MoES) ने “भारत के EEZ के गहरे समुद्र और सुदूर जल मत्स्य संसाधनों पर राष्ट्रीय रिपोर्ट” जारी की। यह ऐतिहासिक दस्तावेज पिछले 4 दशकों के महासागरीय अध्ययनों और 30 वर्षों के व्यवस्थित सर्वेक्षणों पर आधारित है। इसका लक्ष्य भारत के 2.37 मिलियन वर्ग किलोमीटर में फैले विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के लिए एक स्थायी ‘ब्लू इकोनॉमी रोडमैप’ तैयार करना है।
मुख्य बिंदु: सर्वेक्षण, ट्वाइलाइट ज़ोन एवं तकनीकी ढांचा
1. 40 वर्षों की खोज और FORV सागर संपदा
- समुद्री अनुसंधान: ‘समुद्री जीव संसाधन कार्यक्रम’ (MLRP) के तहत 1990 के दशक से अब तक 400 से अधिक महासागरीय जहाजी यात्राएं (Cruises) पूरी की गईं।
- सागर संपदा: भारत के प्रमुख शोध पोत FORV सागर संपदा (एक तैरती प्रयोगशाला) ने अरब सागर, बंगाल की खाड़ी, लक्षद्वीप, अंडमान सागर और दक्षिण महासागर (अंटार्कटिका) तक सर्वेक्षण किया।
2. गहरे समुद्र के प्रमुख निष्कर्ष
- ट्वाइलाइट ज़ोन (200-1000 मीटर): इस मेसोपेलैजिक परत में लालटेनफिश, गहरे समुद्र के झींगे और सेफैलोपोड्स प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं। ये जीव रात में ऊपर आकर भोजन करते हैं और गहराई में लौट जाते हैं, जिससे जैविक कार्बन पंप (Biological Carbon Pump) संचालित होता है। यह प्रक्रिया सतह से कार्बन को गहरे समुद्र में स्थानांतरित कर वैश्विक जलवायु को नियंत्रित करती है।
- महाद्वीपीय ढलान (200 मीटर से आगे): 200 मीटर से अधिक गहराई वाले ढलान पर गहरे समुद्र के झींगे, पर्च, स्क्रैम्बॉइड्स, फ्लैटफिश और ईल के बड़े भंडार मिले हैं।
- सुदूर जल मत्स्य: इसमें उच्च मूल्य वाली खुले महासागर की प्रजातियां जैसे टूना, बिलफिश, शार्क, महासागरीय स्क्विड और अंटार्कटिक क्रिल शामिल हैं।
3. संवेदनशील समुद्री पारिस्थितिकी क्षेत्र
रिपोर्ट में जैव विविधता और नर्सरी संरक्षण के लिए कुछ प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की गई है:
- कोल्लम बैंक और आंग्रिया बैंक
- मंगलुरु का गहरा समुद्री ढलान
- तिरुवनंतपुरम के पास का समुद्री सोपान
- लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह
4. तकनीकी नवाचार और विज़न 2047
- तकनीक का एकीकरण: मत्स्य ध्वनिकी (Fisheries Acoustics), eDNA, उपग्रह अवलोकन, स्वदेशी अवलोकन प्लेटफॉर्म और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का उपयोग कर समुद्री स्थानिक नियोजन (Marine Spatial Planning) तैयार किया जा रहा है।

- वैश्विक प्रतिबद्धता: यह प्रयास भारत के ‘विज़न 2047’ (ब्लू इकोनॉमी), SDG 14 (जल के नीचे जीवन) और संयुक्त राष्ट्र ‘सतत विकास के लिए महासागर विज्ञान दशक’ को मजबूती प्रदान करता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| जारीकर्ता संस्था | CMLRE (कोच्चि), पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के तहत |
| भारत का EEZ दायरा | 2.37 मिलियन वर्ग किलोमीटर |
| प्रमुख शोध पोत | FORV सागर संपदा (Fishery and Oceanographic Research Vessel) |
| ट्वाइलाइट ज़ोन गहराई | 200 से 1000 मीटर (मेसोपेलैजिक ज़ोन) |
| पारिस्थितिक भूमिका | जैविक कार्बन पंप के माध्यम से जलवायु नियंत्रण |
भारत-जापान संयुक्त रक्षा वक्तव्य (2026)
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत-जापान रक्षा अभ्यास (Dharma Guardian, JIMEX, Veer Guardian), UNICORN एंटिना, 2+2 वार्ता, Indo-Pacific Logistics Network (IPLN)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): द्विपक्षीय संबंध, भारत-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा (FOIP), रक्षा उपकरण एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, मेक इन इंडिया और संयुक्त रक्षा उत्पादन।
चर्चा में क्यों?
नई दिल्ली में 20 अगस्त 2026 को भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिनजिरो कोइजुमी के बीच उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक संपन्न हुई। इस दौरान दोनों देशों ने समुद्री सुरक्षा सहयोग पर समझौता ज्ञापन (MoA) पर हस्ताक्षर किए और रक्षा औद्योगिक साझेदारी को गहरा करने का संकल्प लिया।
मुख्य बिंदु: रणनीतिक समझौते, अभ्यास और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण
1. समुद्री सुरक्षा और नया MoA
- MoA पर हस्ताक्षर: दोनों देशों के रक्षा मंत्रालयों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए।
- सहयोग के क्षेत्र: भारतीय नौसेना और जापानी मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स के बीच ‘समुद्री डोमेन जागरूकता’ (MDA) के लिए सूचना साझाकरण, खोज एवं बचाव (SAR), तथा मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) को मजबूत करना।
- लॉजिस्टिक्स support: बंदरगाहों के उपयोग, नौसैनिक जहाजों की मरम्मत और रखरखाव सुविधाओं के पारस्परिक आदान-प्रदान के लिए जल्द ही एक व्यवस्था को अंतिम रूप दिया जाएगा।
2. द्विपक्षीय एवं त्रिपक्षीय सैन्य अभ्यास
- सेना अभ्यास: ‘धर्म गार्जियन’ (स्थल सेना) और ‘JIMEX’ (नौसेना)।
- वायु सेना अभ्यास: भारत में होने वाले ‘वीर गार्जियन 26’ अभ्यास में पहली बार जापानी फाइटर जेट भारत आकर भाग लेंगे।
- त्रिपक्षीय अभ्यास: फरवरी 2026 में भारत, जापान और इंडोनेशिया के बीच पहला त्रिपक्षीय नौसैनिक PASSEX अभ्यास आयोजित हुआ।
- भविष्य का फोकस: मानवरहित प्रणालियों (Unmanned Systems) का एकीकरण और स्पेशल ऑपरेशन्स फोर्सेज के बीच आदान-प्रदान।
3. रक्षा प्रौद्योगिकी एवं संयुक्त निर्माण
- UNICORN प्रोजेक्ट: जहाजों के लिए एकीकृत संचार एंटीना प्रणाली UNICORN दोनों देशों के बीच पहला रक्षा उपकरण हस्तांतरण प्रोजेक्ट है, जिसे जल्द लागू किया जाएगा।
- मेक इन इंडिया: जापान की तकनीकी विशेषज्ञता और भारत की निर्माण क्षमताओं का उपयोग कर नौसैनिक जहाज निर्माण (Naval Shipbuilding) और माइन काउंटरमेजर्स क्षमताओं का विकास किया जाएगा।
- R&D सहयोग: भारत के DRDO और जापान के ATLA के बीच अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों में अनुसंधान और विकास बढ़ाया जाएगा।
- डिफेंस इंडस्ट्री फोरम: रक्षा उद्योगों को जोड़ने के लिए जल्द ही ‘डिफेंस इंडस्ट्री फोरम’ का गठन किया जाएगा।
4. संस्थागत ढांचा और बहुपक्षीय पहल
- निदेशक स्तर का वर्किंग ग्रुप: परिचालन, खुफिया, उपकरण और तकनीक में समन्वय के लिए महानिदेशक/संयुक्त सचिव स्तर के एक विशेष वर्किंग ग्रुप की स्थापना की गई है।
- IPLN टेबलटॉप अभ्यास: इंडो-पैसिफिक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क (IPLN) के तहत दूसरा टेबलटॉप अभ्यास सितंबर 2026 में टोक्यो में आयोजित होगा।
- 2+2 वार्ता: वर्ष 2026 में ही टोक्यो में चौथी भारत-जापान विदेश एवं रक्षा मंत्री (2+2) बैठक आयोजित की जाएगी।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| विशेष रक्षा साझेदार | “विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी” |
| पहला रक्षा हस्तांतरण | UNICORN integrated communications antenna system |
| प्रमुख संयुक्त अभ्यास | धर्म गार्जियन (थल सेना), JIMEX (नौसेना), वीर गार्जियन 26 (वायु सेना) |
| त्रिपक्षीय PASSEX | भारत, जापान और इंडोनेशिया (फरवरी 2026) |
एलायंस AI और स्वदेशी तकनीक: TDB का Fixit प्लेटफॉर्म को समर्थन
- प्रारंभिक परीक्षा: टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB), एजेंटिक एआई, जेनेरेटिव एआई बनाम एजेंटिक एआई, डीप टेक और स्टार्ट-अप।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): भारत में एआई का विकास और राष्ट्रीय एआई रणनीति (National AI Strategy), ई-गवर्नेंस, उद्योग 4.0, एमएसएमई और स्टार्ट-अप पारिस्थितिकी तंत्र, डिजिटल अर्थव्यवस्था।
चर्चा में क्यों?
भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के तहत टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB) ने नई दिल्ली के स्टार्ट-अप M/s One2X Tech Pvt. Ltd. के साथ एक समझौता किया है। इसका उद्देश्य स्वदेशी रूप से विकसित एजेंटिक एआई (Agentic AI) प्लेटफॉर्म Fixit के व्यावसायिक उपयोग (Commercialization) को वित्तीय समर्थन देना है।
मुख्य बिंदु: एजेंटिक एआई, तकनीकी ढांचा और व्यावसायिक उपयोग
1. एजेंटिक एआई क्या है?
- पारंपरिक एआई से अलग: सामान्य एआई (जैसे चैटजीपीटी) केवल जानकारी खोजने, सामग्री बनाने या विश्लेषण करने में मदद करता है।
- स्वायत्त निष्पादन (Autonomous Execution): एजेंटिक एआई सिस्टम सीधे उद्देश्यों को समझते हैं, अगली कार्रवाई तय करते हैं, जुड़े हुए सिस्टम से बातचीत करते हैं और अंतिम परिणाम तक कार्य को स्वायत्त रूप से पूरा करते हैं।
2. ‘Fixit’ प्लेटफॉर्म की तकनीकी विशेषताएं
- मल्टी-एजंट आर्किटेक्चर: इसमें मल्टी-एजंट ऑर्केस्ट्रेशन, प्रासंगिक स्मृति (Contextual Memory), एआई तर्कशास्त्र (Reasoning), और रीइन्फोर्समेंट लर्निंग का उपयोग किया गया है।
- सुरक्षा एवं मानव निगरानी: प्लेटफ़ॉर्म में पूर्व-निर्धारित गार्डरेल्स, ऑडिट क्षमताएं और मानव निगरानी (Human Oversight) शामिल हैं ताकि व्यावसायिक उपयोग के दौरान नियंत्रित वातावरण बना रहे।
3. अनुप्रयोग और ‘एआई कार्यबल’
- राजस्व संचालन (Revenue Operations): यह तकनीक शुरुआत में बाजार विश्लेषण, ग्राहक जुड़ाव, अपॉइंटमेंट शेड्यूलिंग और बिक्री हैंडओवर जैसे जटिल कार्यों को स्वतः पूरा करेगी।
- रियल एस्टेट क्षेत्र: लंबे बिक्री चक्र और एकाधिक ग्राहक संपर्कों के कारण सबसे पहले रियल एस्टेट क्षेत्र में इस तकनीक का उपयोग किया जाएगा।
- एआई कार्यबल का विचार: इसका मुख्य लक्ष्य एक ऐसा ‘एआई कार्यबल’ तैयार करना है जो दोहराव वाले और जटिल कार्यों को संभालेगा, जिससे मानव टीम रचनात्मकता, रणनीति और संबंधों पर ध्यान केंद्रित कर सके।
- एमएसएमई को लाभ: यह प्लेटफ़ॉर्म छोटे व्यवसायों, एमएसएमई और स्टार्ट-अप्स को बड़ी कंपनियों के स्तर पर बिना बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर बनाए काम करने की क्षमता प्रदान करेगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| सहायता प्रदानकर्ता संस्था | टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट बोर्ड (TDB), विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) |
| संबद्ध स्टार्ट-अप | M/s One2X Tech Pvt. Ltd. (नई दिल्ली) |
| प्लेटफ़ॉर्म का नाम | Fixit |
| प्रौद्योगिकी श्रेणी | एजेंटिक एआई (Agentic AI – स्वायत्त निर्णय और निष्पादन प्रणाली) |
| प्रथम व्यावसायिक क्षेत्र | रियल एस्टेट एवं राजस्व संचालन (Revenue Operations) |
कैंसर इलाज में नई क्रांति: ‘स्मार्ट’ कैंसर रोधी दवा RK-251
- प्रारंभिक परीक्षा: जैव प्रौद्योगिकी, RK-251, रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज (ROS), NBDHEX, जेब्राफिश।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां; प्रौद्योगिकी का देशीकरण और नई तकनीक का विकास, स्वास्थ्य एवं दवा क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी का अनुप्रयोग।
चर्चा में क्यों?
भारतीय वैज्ञानिकों ने RK-251 नाम की एक नई ‘स्मार्ट’ कैंसर दवा तैयार की है, जो शरीर के स्वस्थ हिस्सों को नुकसान पहुंचाए बिना केवल कैंसरग्रस्त कोशिकाओं पर हमला करती है। यह दवा शरीर में यात्रा करते समय निष्क्रिय रहती है और कैंसर कोशिकाओं में पहुंचते ही वहां मौजूद उच्च रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज (ROS) के संपर्क में आकर खुद-ब-खुद सक्रिय हो जाती है। यह लक्षित थेरेपी कैंसर कोशिकाओं को खत्म करने के लिए ‘NBDHEX’ यौगिक जारी करती है, जिससे बालों का झड़ना या कमज़ोरी जैसे पारंपरिक कीमोथेरेपी के घातक दुष्प्रभावों (Side Effects) से बचा जा सकता है।
मुख्य बिंदु: RK-251 दवा, कार्यप्रणाली और परीक्षण
1. विकासकर्ता संस्थान
- आईएएसएसटी: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के स्वायत्त संस्थान ‘इंसटीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी इन साइंस एंड टेक्नोलॉजी’ (गुवाहाटी) के डॉ. असिस बाला।
- आईआईटी-गुवाहाटी: डॉ. के.पी. भाबक के नेतृत्व में यह सहयोगात्मक शोध पूरा हुआ।
- प्रकाशन: यह महत्वपूर्ण शोध अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका ACS- जर्नल ऑफ मेडिसिनल केमिस्ट्री में प्रकाशित हुआ है।
2. दवा की कार्यप्रणाली (How RK-251 Works)
- ROS का उपयोग: कैंसर कोशिकाओं में रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज (ROS) नामक हानिकारक अणुओं का स्तर अधिक होता है।
- सक्रियण और NBDHEX की रिहाई: जैसे ही RK-251 कैंसर कोशिका में प्रवेश करती है, वहां मौजूद उच्च ROS स्तर इस दवा को सक्रिय कर देता है। सक्रिय होते ही यह “NBDHEX” नामक एक शक्तिशाली कैंसर रोधी यौगिक जारी करती है।

- कैंसर प्रोटीन को ब्लॉक करना: यह यौगिक उन लक्षित प्रोटीन्स को अवरुद्ध कर देता है, जिनका उपयोग कैंसर कोशिकाएं जीवित रहने और दवा प्रतिरोध (Drug Resistance) विकसित करने के लिए करती हैं।
3. प्री-क्लिनिकल परीक्षण के परिणाम
- ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर: परीक्षणों में इस दवा ने अत्यधिक आक्रामक ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर कोशिकाओं पर मजबूत प्रभाव दिखाया, जबकि स्वस्थ कोशिकाओं को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया।
- जेब्राफिश पर परीक्षण: जेब्राफिश भ्रूण (Danio rerio) में इस दवा के व्यवहार के अध्ययन से विषैलेपन (Toxicity) का कोई लक्षण नहीं मिला। ROS की उपस्थिति में वांछित प्रतिदीप्ति (Fluorescence) प्रदर्शित हुई, जो आगे के नैदानिक परीक्षणों (Clinical Trials) के लिए इसके सुरक्षित होने का संकेत देती है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| दवा का नाम | RK-251 (Targeted Smart Cancer Drug) |
| विकासकर्ता | IASST गुवाहाटी (DST) एवं IIT-गुवाहाटी |
| मुख्य यौगिक | NBDHEX (कैंसर रोधी यौगिक) |
| सक्रियण का आधार | कैंसर कोशिकाओं में उपस्थित रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज (ROS) |
| परीक्षण मॉडल | जेब्राफिश भ्रूण (Danio rerio) एवं ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर |
वैश्विक डिजिटल क्षमता निर्माण गठबंधन (GDCBA)
- प्रारंभिक परीक्षा: क्षमता निर्माण आयोग (CBC), मिशन कर्मयोगी, GDCBA, iGOT-कर्मयोगी प्लेटफॉर्म।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): शासन और सिविल सेवाएं, ई-गवर्नेंस, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), वैश्विक सहयोग और दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation)।
चर्चा में क्यों?
भारत सरकार के क्षमता निर्माण आयोग (CBC) की पहल ‘ग्लोबल डिजिटल कैपेसिटी बिल्डिंग एलायंस’ (GDCBA) ने अपने सफल 6 महीने पूरे कर लिए हैं। इस गठबंधन की शुरुआत 20 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट’ के दौरान हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य सार्वजनिक क्षेत्र में क्षमता निर्माण और सुशासन के भारतीय मॉडल को वैश्विक स्तर पर साझा करना है।
मुख्य बिंदु: वैश्विक मॉडल, 4 प्रमुख लक्ष्य और आगे का रोडमैप
1. ‘मिशन कर्मयोगी’ का अंतर्राष्ट्रीय विस्तार
- भारतीय मॉडल पर आधारित: यह गठबंधन भारत के राष्ट्रीय सिविल सेवा क्षमता निर्माण कार्यक्रम ‘मिशन कर्मयोगी’ की सफलता पर टिका है।
- योग्यता-आधारित अधिगम: यह व्यक्तिगत प्रशिक्षण के बजाय संस्थागत सुधार, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और सतत सीखने की प्रक्रिया को बढ़ावा देता है।
- ग्लोबल पब्लिक गुड: क्षमता निर्माण को केवल राष्ट्रीय संपत्ति न मानकर एक ‘वैश्विक सार्वजनिक वस्तु’ के रूप में स्थापित किया जा रहा है।
2. GDCBA के 4 मुख्य लक्ष्य
- संस्थागत क्षमता मजबुती: सार्वजनिक क्षेत्र के निकायों को भविष्य की चुनौतियों के अनुकूल बनाना।
- तथ्य-आधारित निर्णय: साक्ष्यों और आंकड़ों पर आधारित क्षमता निर्माण निर्णय लेना।
- वैश्विक समुदाय का निर्माण: शासन और लोक प्रशासन से जुड़े विशेषज्ञों का अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क तैयार करना।
- ज्ञान का भंडार: व्यावहारिक मार्गदर्शन, केस स्टडीज और कार्यान्वयन ज्ञान का वैश्विक रिपॉजिटरी बनाना।
3. 6 महीनों की प्रगति और वैश्विक पहुंच
- देशों की भागीदारी: ब्राजील, श्रीलंका, मॉरीशस, सेशेल्स, भूटान, मालदीव, नाइजर, नाइजीरिया और तजाकिस्तान जैसे 10 से अधिक देशों के साथ संपर्क स्थापित हुआ है।
- सहभागी संख्या: विभिन्न स्तरों के 250 से अधिक लोक सेवक सीधे तौर पर इससे जुड़े हैं।

- भागीदार संस्थाएं: गेट्स फाउंडेशन, विश्व बैंक, NCGG, RIS, यूनिसेफ, राष्ट्रमंडल, BRICS/FICCI, ADBI, ORF, Apolitical और नालंदा विश्वविद्यालय जैसे 25 से अधिक प्रमुख संस्थान इसके भागीदार हैं।
4. आगामी योजनाएं और रोडमैप
- वार्षिक शिखर सम्मेलन: प्रगति को मापने के लिए प्रतिवर्ष एक शिखर सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।
- स्टेट ऑफ कैपेसिटी बिल्डिंग रिपोर्ट: वैश्विक स्तर पर लोक सेवाओं की क्षमता का आकलन करने वाली एक वार्षिक रिपोर्ट जारी की जाएगी।
- तकनीकी कार्य समूह: नीतिगत मंचों, प्लेबुक, टूलकिट और विशेषज्ञों की चर्चाओं के माध्यम से सहयोग को गहरा किया जाएगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| नोडल निकाय | क्षमता निर्माण आयोग (CBC), भारत सरकार |
| शुभारंभ तिथि एवं स्थान | 20 फरवरी 2026, इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट (नई दिल्ली) |
| मूल आधार | मिशन कर्मयोगी एवं iGOT-कर्मयोगी प्लेटफॉर्म |
| मुख्य दृष्टिकोण | “सर्वे भवन्तु सुखिनः” (Welfare for All, Happiness for All) |
| प्रमुख वैश्विक भागीदार | विश्व बैंक, ADBI, यूनिसेफ, गेट्स फाउंडेशन, Apolitical |