NCERT Notes Class 7 Science Chapter 2: Exploring Substances: Acidic, Basic, and Neutral के अंतर्गत अम्ल (Acids) और क्षारक (Bases) की पहचान बिना उन्हें चखे, सुरक्षित रूप से प्राकृतिक और कृत्रिम सूचकों (Indicators) जैसे लिटमस पत्र, हल्दी और गुड़हल की पंखुड़ियों की मदद से की जाती है। यह उदासीनीकरण (Neutralisation) की प्रक्रिया को विस्तार से समझाता है—जहाँ अम्ल और क्षार आपस में क्रिया करके एक-दूसरे के प्रभाव को समाप्त कर देते हैं और लवण (Salts) व जल का निर्माण करते हैं।इसमें पेट की अम्लीयता (Acidity in stomach), चींटी के काटने पर राहत, और मृदा उपचार (Soil treatment) जैसे दैनिक जीवन के व्यावहारिक उदाहरणों से इस रासायनिक सिद्धांत की उपयोगिता को सिद्ध किया गया है।
प्रकृति — हमारी विज्ञान प्रयोगशाला (Nature — Our Science Laboratory)
लिटमस एक सूचक के रूप में
लिटमस एक प्राकृतिक अम्ल-क्षार सूचक (Acid-Base Indicator) है।
- स्रोत: यह लाइकेन से प्राप्त होता है।
- उपलब्धता: यह घोल (Solution) और कागजी पट्टियों (Litmus Paper – नीला और लाल) दोनों रूपों में उपलब्ध है।
- कार्यप्रणाली:
- अम्लीय विलयन: नीले लिटमस को लाल कर देता है।
- क्षारीय विलयन: लाल लिटमस को नीला कर देता है।
- उदासीन विलयन: दोनों में से किसी भी लिटमस का रंग नहीं बदलता।
सूचकों के आधार पर पदार्थों का वर्गीकरण
| समूह | लिटमस पर प्रभाव | प्रकृति (Nature) | उदाहरण |
| Group A | नीला लिटमस – लाल | अम्लीय (Acidic) | नींबू रस, आँवला रस, इमली का पानी, सिरका (Vinegar) |
| Group B | लाल लिटमस – नीला | क्षारीय (Basic) | साबुन का घोल, बेकिंग सोडा, चूने का पानी, वाशिंग पाउडर |
| Group C | कोई परिवर्तन नहीं | उदासीन (Neutral) | नल का पानी, शर्करा (चीनी) का घोल, नमक का घोल |
चूने का पानी (Lime Water) कैसे तैयार करें?
- रासायनिक घटक: चूने का पानी कैल्शियम हाइड्रोक्साइड [Ca(OH)_2] का जलीय विलयन है।
- बनाने की विधि: पानी में चूना (कैल्शियम ऑक्साइड – CaO) मिलाकर कुछ समय छोड़ें, फिर ऊपर के द्रव को छान लें।
- नोट: इसे नींबू (Lime fruit) के रस से भ्रमित न करें।
लाइकेन
- सहजीवी संबंध (Symbiosis): लाइकेन कवक (Fungus) और शैवाल (Algae) के परस्पर सहजीवन से बनता है।
- पर्यावरणीय संकेतक (Bio-indicator): यह प्रचुर वर्षा और स्वच्छ हवा वाले क्षेत्रों (चट्टानों व वृक्षों) में उगता है। यह वायु प्रदूषण (विशेषकर SO_2) का संवेदनशील संकेतक है।
अम्लीय और क्षारीय पदार्थों के भौतिक व रासायनिक गुण
- अम्लीय पदार्थ (Acidic Substances):
- स्वाद: खट्टा (Sour)।
- विशेषता: खाद्य अम्लीय पदार्थों में प्राकृतिक अम्ल पाए जाते हैं।
- क्षारीय पदार्थ (Basic Substances):
- स्पर्श: चिकना या साबुन जैसा (Soapy/Slippery)।
- स्वाद: कड़वा (Bitter)।

- अपवाद: कड़वी हर वस्तु क्षार नहीं होती (जैसे—करेला कड़वा है, लेकिन क्षारीय नहीं है)।
खाद्य पदार्थों में पाए जाने वाले प्रमुख अम्ल
| खाद्य पदार्थ | उपस्थित प्रमुख अम्ल |
| नींबू / संतरा | साइट्रिक एसिड |
| आँवला | एस्कॉर्बिक एसिड (Vitamin C) एवं साइट्रिक एसिड |
| इमली | टार्टरिक एसिड |
| टमाटर | साइट्रिक एसिड एवं ऑक्जेलिक एसिड |
| दही | लैक्टिक एसिड |
| सिरका (Vinegar) | एसिटिक एसिड |
लाल गुलाब एक सूचक के रूप में (Red rose as an indicator)
लाल गुलाब की पंखुड़ियों से बना अर्क (Extract) एक प्राकृतिक अम्ल-छार सूचक (Acid-Base Indicator) है।
सूचक बनाना और परीक्षण
- अर्क बनाने की विधि:
- जमीन पर गिरी पंखुड़ियों को पानी से धोएं।
- पंखुड़ियों को कुचलकर गर्म पानी में 5-10 मिनट तक रखें।
- छनित तरल (Filtrate) ही लाल गुलाब का अर्क है।
- रंग परिवर्तन और परिणाम:
- अम्लीय विलयन (Acidic Solution): गुलाब का अर्क लाल/गुलाबी (Shade of Red) हो जाता है। (जैसे नींबू का रस, आंवले का रस)।

- क्षारीय विलयन (Basic Solution): गुलाब का अर्क हरा (Shade of Green) हो जाता है। (जैसे साबुन का घोल)।
- उदासीन विलयन (Neutral Solution): अर्क के रंग में कोई बदलाव नहीं होता।
अन्य प्राकृतिक सूचक
लाल गुलाब के अलावा कई अन्य प्राकृतिक पदार्थों का उपयोग भी अम्ल-छार सूचक के रूप में किया जा सकता है:
- चुकंदर (Beetroot)
- बैंगनी / लाल पत्तागोभी (Purple/Red Cabbage)
- हल्दी (Turmeric)
- जामुन (Indian Blackberry)
- गुड़हल (Red Hibiscus)
हाइड्रेंजिया और मृदा की प्रकृति
- प्राकृतिक आवास: हिमालयी क्षेत्रों और पूर्वोत्तर भारत (North-Eastern States) के ठंडे जलवायु वाले इलाकों में उगता है।

- मृदा-आधारित रंग परिवर्तन:
- अम्लीय मृदा (Acidic Soil): नीले रंग के फूल (Blue Flowers)।
- क्षारीय मृदा (Basic Soil): गुलाबी या लाल रंग के फूल (Pink or Red Flowers)।
- बागवानी प्रयोग: माली मिट्टी के pH (अम्लीय या क्षारीय प्रकृति) में बदलाव करके इन फूलों के रंग को बदल सकते हैं।
प्राकृतिक सूचकों का रंग परिवर्तन
| प्राकृतिक सूचक | अम्लीय माध्यम (Acidic) | क्षारीय माध्यम |
| लाल गुलाब अर्क | लाल / गहरा गुलाबी | हरा |
| हाइड्रेंजिया (मृदा) | नीला | गुलाबी / लाल |
| नीला लिटमस | लाल | कोई बदलाव नहीं |
| लाल लिटमस | कोई बदलाव नहीं | नीला |
हल्दी एक सूचक के रूप में (Turmeric as an indicator)
- हल्दी पेपर बनाना: हल्दी पेस्ट में फ़िल्टर पेपर डुबोकर और सुखाकर ‘हल्दी पेपर स्ट्रिप्स’ तैयार की जाती हैं।
- रंग परिवर्तन और सीमाएं:
- क्षारीय माध्यम (Basic Medium): हल्दी पेपर का रंग पीला से लाल/गहरा भूरा (Red/Reddish-Brown) हो जाता है (जैसे साबुन का घोल, बेकिंग सोडा)।
- अम्लीय व उदासीन माध्यम (Acidic & Neutral): हल्दी पेपर के रंग में कोई बदलाव नहीं होता (पीला ही रहता है)।
- सीमा: हल्दी अम्लीय और उदासीन पदार्थों के बीच अंतर नहीं कर सकती।
- दैनिक जीवन में उदाहरण: कपड़े पर लगा सब्जी का दाग (हल्दी) साबुन लगाने पर लाल हो जाता है क्योंकि साबुन क्षारीय होता है।
‘गोल्डन’ मसाला: हल्दी
- वानस्पतिक पहचान: हल्दी अदरक परिवार (Ginger family) की सदस्य है।
- आयुर्वेदिक महत्व: पारंपरिक चिकित्सा और घरेलू उपचारों में इसके कई स्वास्थ्य लाभों के कारण इसे ‘गोल्डन स्पाइस’ कहा जाता है।
घ्राण सूचक
वे पदार्थ जिनकी गंध (Odour) अम्लीय या क्षारीय माध्यम में बदल जाती है, उन्हें घ्राण सूचक (Olfactory Indicators) कहते हैं।
- उदाहरण: बारीक कटा प्याज, वैनिला, लौंग का तेल।
- व्यवहार (प्याज स्ट्रिप):
- अम्लीय माध्यम (जैसे इमली का पानी): प्याज की गंध बनी रहती है।

- क्षारीय माध्यम (जैसे बेकिंग सोडा): प्याज की विशिष्ट गंध समाप्त या नष्ट हो जाती है।
आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय (P.C. Ray)
- उपाधि: इन्हें “आधुनिक भारतीय रसायन विज्ञान का जनक” (Father of Modern Indian Chemistry) कहा जाता है।
- प्रमुख उपलब्धियाँ:
- 1901 में भारत की पहली फार्मास्युटिकल कंपनी (Bengal Chemicals & Pharmaceutical Works) की स्थापना की।
- ब्रिटेन से रसायन विज्ञान में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।
- सांस्कृतिक योगदान:
- प्राचीन भारतीय वैज्ञानिकों की उपलब्धियों को उजागर करने के लिए भारत में रसायन विज्ञान के इतिहास पर लेखन किया।
- शिक्षा संस्थानों में मातृभाषा (Mother Tongue) को शिक्षा का माध्यम बनाने की वकालत की।
प्राकृतिक बनाम घ्राण सूचक
| सूचक का प्रकार | उदाहरण | अम्लीय माध्यम में प्रभाव | क्षारीय माध्यम में प्रभाव |
| प्राकृतिक सूचक (Turmeric) | हल्दी | पीला (कोई बदलाव नहीं) | लाल / भूरा |
| घ्राण सूचक (Olfactory) | प्याज / वैनिला | गंध बनी रहती है | गंध समाप्त हो जाती है |
क्या होता है जब अम्लीय पदार्थ क्षारीय पदार्थों के साथ मिलते हैं?
जब अम्ल और क्षार आपस में मिलते हैं, तो वे एक-दूसरे के प्रभाव को समाप्त कर देते हैं।
- उदासीनीकरण (Neutralisation): अम्ल और क्षार के निश्चित अनुपात में मिलने पर उदासीन (Neutral) घोल बनता है।
- रासायनिक समीकरण:Acid + Base + Salt + Water + Heat
- मुख्य बिंदु: इस अभिक्रिया में लवण (Salt) और जल (Water) बनते हैं तथा ऊष्मा (Heat) निकलती है।
- लिटमस परीक्षण: नीले लिटमस वाले नीबू के रस (अम्लीय) में चूने का पानी (क्षारीय) डालने पर रंग लाल से वापस नीला हो जाता है।
दैनिक जीवन में उदासीनीकरण
उदासीनीकरण प्रक्रिया का उपयोग व्यावहारिक समस्याओं के समाधान में होता है।
Situation 1: लाल चींटी का काटना (Ant Bite)
- कारण: चींटी काटते समय त्वचा में फॉर्मिक अम्ल (Formic Acid) डालती है।
- उपचार: प्रभावित जगह पर नमीयुक्त बेकिंग सोडा (क्षारीय) रगड़ने से अम्ल का प्रभाव समाप्त हो जाता है।
Situation 2: मिट्टी का उपचार (Soil Treatment)
- अम्लीय मृदा (Acidic Soil): रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी अम्लीय हो जाती है। इसका उपचार चूना (Lime – Base) डालकर करते हैं।
- क्षारीय मृदा (Basic Soil): मिट्टी क्षारीय होने पर जैविक पदार्थ (Manure/Compost) मिलाते हैं, जो अम्ल छोड़कर मिट्टी को उदासीन बनाते हैं।
- पोषक तत्वों की कमी: मिट्टी उदासीन होने पर भी यदि पौधे ठीक न हों, तो कारण पोषक तत्वों (Nutrients) की कमी होती है।
Situation 3: औद्योगिक कचरा (Industrial Waste)
- समस्या: कारखानों के अम्लीय कचरे से जल निकायों की मछलियाँ मरने लगती हैं।
- उपचार: जल निकायों में विसर्जित करने से पहले कचरे में क्षारीय पदार्थ मिलाकर उदासीन करते हैं।
संक्षेप में
- पदार्थों का वर्गीकरण: पदार्थ अम्लीय, क्षारीय या उदासीन हो सकते हैं।
- प्राकृतिक सूचक: लाइकेन, लाल गुलाब, गुड़हल, बैंगनी पत्तागोभी और हल्दी का उपयोग सूचक के रूप में होता है।
- लिटमस: अम्ल नीले लिटमस को लाल और क्षार लाल लिटमस को नीला करते हैं।
- गुलाब अर्क: अम्लीय घोल में लाल और क्षारीय घोल में हरा रंग देता है।
- हल्दी: क्षारीय घोल में लाल हो जाती है, अम्लीय और उदासीन में पीली रहती है।
- उदासीनीकरण: अम्ल और क्षार मिलकर लवण, जल और ऊष्मा बनाते हैं।
दैनिक जीवन में उदासीनीकरण
| स्थिति / समस्या | कारण | उपचार (Remedy) | रासायनिक प्रकृति |
| चींटी का काटना | फॉर्मिक अम्ल | नमीयुक्त बेकिंग सोडा | क्षारीय (Base) |
| अम्लीय मिट्टी | रासायनिक उर्वरक | चूना (Lime) | क्षारीय (Base) |
| क्षारीय मिट्टी | प्राकृतिक/रासायनिक कारण | कंपोस्ट / जैविक खाद | अम्लीय (Acidic) |
| औद्योगिक कचरा | कारखानों का अपशिष्ट | क्षारीय पदार्थ | क्षारीय (Base) |