12 September 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत डिजिटल वित्तीय रिकॉर्डों और कानूनी साक्ष्यों के आधुनिकीकरण हेतु बैंकर पुस्तक साक्ष्य अधिनियम, 2026, जलवायु-सक्षम शुष्क कृषि को बढ़ावा देने वाले ड्राईलैंड कांग्रेस 2026 (ICAR और ICRISAT की 50 वर्षों की ऐतिहासिक साझेदारी), भारत के प्राचीन नौवहन और सिंधु घाटी सभ्यता के इतिहास को पुनर्जीवित करने वाले लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC), देश की ऊर्जा सुरक्षा और कोयला उत्पादन में आत्मनिर्भरता को दर्शाने वाले कैप्टिव कोयला खदानों का प्रदर्शन और विकास (मानसून में भी उत्पादन में वृद्धि), तथा छोटे व सीमांत किसानों को वृद्धावस्था में वित्तीय संबल प्रदान करने वाली प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (PM-KMY) के 7 वर्ष का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
बैंकर पुस्तक साक्ष्य अधिनियम, 2026: बैंकिंग रिकॉर्ड के कानूनी ढांचे का आधुनिकीकरण
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, भारतीय शासन और कानूनी सुधार।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप, प्रौद्योगिकी और डिजिटल साक्ष्य का कानूनी ढांचा, बैंकिंग क्षेत्र में सुधार और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस।
चर्चा में क्यों?
भारत सरकार ने डिजिटल युग की जरूरतों को देखते हुए राष्ट्रपति की स्वीकृति प्राप्त बैंकर पुस्तक साक्ष्य अधिनियम, 2026 को लागू करने की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। यह नया कानून 1 अक्टूबर 2026 से प्रभावी होगा और औपनिवेशिक काल के 135 साल पुराने ‘बैंकर पुस्तक साक्ष्य अधिनियम, 1891’ का स्थान लेगा। इस नए कानून का मुख्य उद्देश्य बैंकिंग रिकॉर्ड्स के इलेक्ट्रॉनिक व डिजिटल साक्ष्य को अदालती प्रक्रियाओं में आसान बनाना और देश में वित्तीय क्षेत्र के आधुनिकीकरण के साथ ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देना है।
मुख्य बिंदु: नए कानून की विशेषताएं और प्रभाव
1. आधुनिक तकनीक और डिजिटल रिकॉर्ड को मान्यता
- प्रौद्योगिकी-तटस्थ दृष्टिकोण (Technology-Neutral Approach): यह कानून केवल पारंपरिक रजिस्टरों तक सीमित नहीं है।
- विविध डेटा प्रारूप: इसमें भौतिक, इलेक्ट्रॉनिक, डिजिटल, वर्चुअल और क्लाउड-आधारित बैंकिंग रिकॉर्ड को साक्ष्य माना जाएगा।
2. सरलीकृत प्रमाणन प्रक्रिया
- आसान सत्यापन: अदालती कार्यवाही में बैंकिंग रिकॉर्ड जमा करने के लिए सत्यापन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है।
- डिजिटल हस्ताक्षर: रिकॉर्ड्स को मैनुअल, डिजिटल या इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर के माध्यम से प्रमाणित किया जा सकता है।
3. बैंक अधिकारियों के लिए कानूनी राहत
- विशेष कारण अनिवार्य: यदि बैंक किसी मामले में खुद पक्षकार (Party) नहीं है, तो अदालत बैंक अधिकारियों को समन जारी करने से पहले लिखित में “विशेष कारण” (Special Cause) दर्ज करेगी।
- समय की बचत: इससे बैंक अधिकारियों का अनावश्यक अदालती चक्कर बंद होगा और उनका परिचालन समय बचेगा।
4. वित्तीय क्षेत्र में विस्तार की गुंजाइश
- दायरा बढ़ाने का अधिकार: केंद्र सरकार के पास यह शक्ति होगी कि वह इस कानून के प्रावधानों को अन्य निर्दिष्ट वित्तीय संस्थाओं (Financial Sector Entities) पर भी लागू कर सके।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| नया कानून | बैंकर पुस्तक साक्ष्य अधिनियम, 2026 |
| प्रतिस्थापित कानून | बैंकर पुस्तक साक्ष्य अधिनियम, 1891 |
| राष्ट्रपति की स्वीकृति | 13 अगस्त 2026 |
| लागू होने की तिथि | 1 अक्टूबर 2026 |
| प्रमाणन का तरीका | मैनुअल, डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर |
ड्राईलैंड कांग्रेस 2026: ICAR और ICRISAT की 50 वर्षों की साझेदारी
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, कृषि पारिस्थितिकी, सतत खेती (Sustainable Agriculture)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): मुख्य फसलें, शुष्क भूमि कृषि (Dryland Farming), जलवायु-स्मार्ट कृषि, कृषि में प्रौद्योगिकी और शोध संस्थान।
चर्चा में क्यों?
नई दिल्ली में आयोजित ‘ड्राईलैंड कांग्रेस 2026’ के दूसरे दिन भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और अंतर्राष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (ICRISAT) के बीच 50 वर्षों की ऐतिहासिक साझेदारी का जश्न मनाया गया। इस विशेष सत्र में दोनों संस्थानों के पूर्व और वर्तमान वैज्ञानिकों ने भाग लिया। इसका मुख्य उद्देश्य ‘विकसित भारत 2047’ के तहत शुष्क भूमि कृषि (Dryland Farming) में क्रांति लाना है।
मुख्य बिंदु: रणनीतिक रोडमैप, बीज प्रणाली और युवा-महिला सहभागिता
1. विकसित भारत 2047 के लिए रोडमैप
- साझा क्षमताओं का उपयोग: ICAR और ICRISAT अपनी शोध तकनीकों को मिलाकर शुष्क भूमि में खाद्य व पोषण सुरक्षा पर काम करेंगे।
- अनुसंधान का ज़मीनी प्रभाव: प्रयोगशाला में विकसित तकनीकों को सीधे किसानों तक पहुंचाने और बड़े पैमाने पर लागू करने पर सहमति बनी।
2. तीन प्रमुख विषयगत पैनल
- लचीली शुष्क भूमि कृषि (Resilient Dryland Farming): छोटे किसानों के लिए जलवायु-अनुकूल (Climate-smart) कृषि पद्धतियों पर जोर।
- ग्लोबल साउथ में बीज प्रणाली का कायाकल्प: एशिया और अफ्रीका में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP Model) से गुणवत्तापूर्ण बीजों की आपूर्ति मजबूत करना।
- महिला और युवा-केंद्रित परिवर्तन: शुष्क भूमि कृषि में महिलाओं के नेतृत्व और युवाओं को कृषि-उद्यम (Agri-enterprise) से जोड़ना।
3. एग्रोबायोडायवर्सिटी और स्केलेबल इनोवेशन
- कृषि जैव विविधता (Agrobiodiversity): शुष्क क्षेत्रों को जलवायु संकट से बचाने के लिए स्थानीय कृषि-विविधता का संरक्षण और उपयोग आवश्यक है।

- NABARD और वित्तीय सहायता: नाबार्ड ने व्यक्तिगत नवाचारों के बजाय लैंडस्केप-स्तर (बड़े पैमाने पर) पर तकनीकों को लागू करने पर बल दिया।
ICAR और ICRISAT
1. ICAR (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद)
- स्थापना: 16 जुलाई 1929 (इंपीरियल काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च)।
- मुख्यालय: नई दिल्ली।
- स्वरूप: यह कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग (DARE), कृषि मंत्रालय के तहत एक स्वायत्त निकाय है।
2. ICRISAT (अंतर्राष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान)
- स्थापना: 1972 (अंतर्राष्ट्रीय संगठनों के एक समूह द्वारा)।
- मुख्यालय: पटानचेरु (हैदराबाद, तेलंगाना)।
- जनादेश: अर्ध-शुष्क (Semi-Arid) उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में ग्रामीण विकास और खाद्य सुरक्षा के लिए शोध करना।
- प्रमुख फसलें: चना, अरहर, मूंगफली, ज्वार, बाजरा और फिंगर मिलेट (रागी)।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजित कार्यक्रम | ड्राईलैंड कांग्रेस 2026 (नई दिल्ली) |
| साझेदारी का मील का पत्थर | ICAR-ICRISAT साझेदारी के 50 वर्ष पूरे |
| दृष्टिकोण और लक्ष्य | विकसित भारत 2047 के तहत शुष्क कृषि सुधार |
| ICRISAT का मुख्यालय | पटानचेरु, हैदराबाद (भारत) |
| ICAR की स्थापना | 1929 (मुख्यालय: नई दिल्ली) |
लोथल में राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC): समुद्री इतिहास का पुनरुद्धार
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत का इतिहास और कला व संस्कृति (सिंधु घाटी सभ्यता – लोथल), राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 1 & 2): प्राचीन भारतीय स्थापत्य और व्यापारिक मार्ग, भारत की विदेश नीति व सांस्कृतिक कूटनीति (Maritime Diplomacy), सरकारी नीतियां और अवसंरचना।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) सोसायटी की दूसरी गवर्निंग काउंसिल बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में गुजरात के लोथल में बन रहे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की प्रगति की समीक्षा की गई। यह परियोजना भारत के 5,000 साल पुराने समृद्ध समुद्री इतिहास को दुनिया के सामने प्रदर्शित करेगी।
मुख्य बिंदु: परियोजना की प्रगति, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग और चरणबद्ध विकास
1. भौतिक प्रगति और वैधानिक मंजूरी
- फेज 1A की स्थिति: निर्माण कार्य का लगभग 82% भौतिक कार्य पूरा हो चुका है।
- अंतिम समयसीमा: इसे 31 अक्टूबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
- प्रदर्शनी और कलाकृतियां: संग्रहालय में स्थापित करने के लिए 1,492 कलाकृतियां (Artefacts) पूरी तरह तैयार हैं।
- संस्थामूलक ढांचा: NMHC सोसायटी ने आयकर छूट, CSR और नीति आयोग के ‘दर्पण’ पोर्टल पर पंजीकरण पूरा कर लिया है।
2. समुद्री कूटनीति और वैश्विक सहयोग
- 13 देशों के साथ समझौता (MoUs): पुर्तगाल, यूएई, वियतनाम, थाईलैंड, नीदरलैंड, डेनमार्क, ओमान, इजराइल, जर्मनी, दक्षिण कोरिया, इटली, न्यूजीलैंड और सिंगापुर प्रोजेक्ट से जुड़ चुके हैं।
- भविष्य का लक्ष्य: भारत सरकार की योजना 35 से अधिक देशों को इस प्रोजेक्ट में भागीदार बनाने की है।
- सहयोग का स्वरूप: ये देश कलाकृतियों, जहाजों के मॉडल, प्रतिकृतियों (Replicas) और शोध डेटा का आदान-प्रदान करेंगे।
3. भविष्य के चरण और विशेष आकर्षण
- विश्व का सबसे ऊंचा लाइटहाउस संग्रहालय: DGLL (लाइटहाउस और लाइटशिप महानिदेशालय) के सहयोग से निर्मित होगा।
- समुद्री अनुसंधान संस्थान (MRI): भारतीय समुद्री विश्वविद्यालय (IMU) के साथ मिलकर शोध केंद्र बनाया जाएगा।

- अन्य आकर्षण: 5D डोम थिएटर, तटीय राज्यों के मंडप (Coastal States Pavilion), म्यूपार्क, म्यूजोटेल और इको-रिसॉर्ट।
4. बाहरी अवसंरचना और एएसआई का उत्खनन
- कनेक्टिविटी: धोलेरा एक्सप्रेसवे का निर्माण पूरा हो गया है। उच्च गति रेल गलियारे की योजना भी अंतिम चरण में है।
- ASI द्वारा उत्खनन: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा लोथल स्थल पर उत्खनन का 70% कार्य पूरा कर लिया गया है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| प्रोजेक्ट का नाम | राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर (NMHC) |
| स्थान | लोथल, गुजरात |
| संबंधित मंत्रालय | पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय |
| फेज 1A पूरा होने की तिथि | 31 अक्टूबर 2026 |
| वैश्विक साझेदार देश | 13 देश (35+ देशों का लक्ष्य) |
| प्रस्तावित लाइटहाउस | विश्व का सबसे ऊंचा लाइटहाउस संग्रहालय |
कैप्टिव कोयला खदानों का प्रदर्शन और विकास: मानसून में भी उत्पादन में बढ़त
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, आर्थिक विकास और प्राकृतिक संसाधन।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचा (ऊर्जा और खनिज), औद्योगिक नीति और कोयला क्षेत्र के सुधार।
चर्चा में क्यों?
कोयला मंत्रालय के अनुसार, मानसून के कठिन मौसम के बावजूद देश की कैप्टिव कोयला खदानों ने उत्पादन और प्रेषण (Dispatch) में मजबूत वृद्धि दर्ज की है। 10 सितंबर 2026 तक चालू वित्त वर्ष में कैप्टिव खदानों का उत्पादन बढ़कर 68.98 मिलियन टन (MT) तक पहुंच गया है, जो पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि से 5% अधिक है।
मुख्य बिंदु: कोयला उत्पादन, डिस्पैच और नई क्षमताएं
1. उत्पादन और प्रेषण के आंकड़े
- हालिया वृद्धि: 10 सितंबर 2026 तक कैप्टिव खदानों ने 68.98 MT कोयला पैदा किया। यह पिछले साल के 65.78 MT से लगभग 3.2 MT अधिक है।
- कोयला डिस्पैच: इस दौरान 75.68 MT कोयला भेजा गया, जिसमें पिछले वर्ष (71.43 MT) की तुलना में 5.94% की बढ़ोतरी हुई।
- सितंबर की स्थिति: 1 से 10 सितंबर 2026 के बीच 4.12 MT उत्पादन हुआ और 4.21 MT डिस्पैच किया गया।
2. समग्र घरेलू कोयला क्षेत्र में योगदान
- कैप्टिव + कमर्शियल शेयर: कैप्टिव और व्यावसायिक खदानें मिलकर देश के कुल कोयला उत्पादन का लगभग 21% हिस्सा बनाती हैं।
- 1 बिलियन टन पार: FY 2025-26 में भारत का कुल घरेलू कोयला उत्पादन 1,039 MT रहा। यह लगातार दूसरा साल है जब उत्पादन 1 बिलियन टन से ऊपर बना हुआ है।
- वार्षिक तुलना: FY 2024-25 में कैप्टिव खदानों का उत्पादन 167.44 MT था। यह FY 2025-26 में बढ़कर 184 MT हो गया (10.10% की वृद्धि)। कमर्शियल खदानों के ~26 MT उत्पादन को मिलाकर यह सेगमेंट 210 MT तक पहुंच गया।
3. नई क्षमता जोड़ना (FY 2026-27 का लक्ष्य)
- नई खदानें: वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान 9 नई कैप्टिव और कमर्शियल खदानों से उत्पादन शुरू करने की योजना है।
- क्षमता बढ़ाना: इन 9 खदानों की कुल पिक रेटेड कैपेसिटी 20.67 MT होगी।
- चालू खदानें: इनमें से 3 खदानों (7.51 MT क्षमता) ने चालू वर्ष में उत्पादन शुरू कर दिया है। बाकी 6 खदानें जल्द शुरू होंगी।
- आगामी लक्ष्य: FY 2026-27 में कैप्टिव खदानों से उत्पादन 190 MT पार करने का अनुमान है। कमर्शियल खदानों को मिलाकर यह आंकड़ा 228 MT से अधिक हो जाएगा।
कैप्टिव और कमर्शियल माइनिंग क्या हैं?
- कैप्टिव माइनिंग: इस व्यवस्था में किसी कंपनी को खदान केवल अपने ही विशिष्ट उद्योगों (जैसे स्टील, पावर, या सीमेंट प्लांट) में कोयले की खपत के लिए दी जाती है। कंपनी इस कोयले को खुले बाजार में नहीं बेच सकती।
- कमर्शियल माइनिंग: इसमें निजी या सार्वजनिक कंपनियां कोयला निकालकर खुले बाजार में किसी भी खरीदार को बेच सकती हैं। सरकार ने 2020 में कोयला क्षेत्र को पूरी तरह कमर्शियल माइनिंग के लिए खोला था।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| कैप्टिव + कमर्शियल योगदान | कुल घरेलू कोयला उत्पादन का ~21% |
| FY 2025-26 में कुल कोयला उत्पादन | 1,039 MT (1 बिलियन टन से अधिक) |
| FY 2026-27 के लिए कैप्टिव लक्ष्य | 190 MT से अधिक |
| FY 2026-27 के लिए संयुक्त लक्ष्य | 228 MT से अधिक |
| नई खदानों की जोड़ने की योजना | 9 खदानें (20.67 MT पिक क्षमता) |
प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (PM-KMY) के 7 वर्ष: किसानों के लिए सामाजिक सुरक्षा कवच
- प्रारंभिक परीक्षा: सामाजिक क्षेत्र की पहलें, कल्याणकारी योजनाएं, और आर्थिक विकास।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): केंद्र सरकार की नीतियां और हस्तक्षेप, कमजोर वर्गों के लिए सुरक्षा योजनाएं, कृषि और छोटे/सीमांत किसानों से जुड़े मुद्दे।
चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री किसान मानधन योजना (PM-KMY) ने अपनी साझेदारी और कार्यान्वयन के 7 वर्ष पूरे कर लिए हैं। 12 सितंबर 2019 को शुरू की गई यह योजना छोटे और सीमांत किसानों (SMFs) को 60 वर्ष की आयु के बाद सामाजिक और वित्तीय सुरक्षा प्रदान करती है। फरवरी 2026 तक इस योजना के तहत देश भर में 24.96 लाख से अधिक किसानों का नामांकन हो चुका है, जिसके लिए सरकार ने ₹540.66 करोड़ का निवेश और आवंटन किया है।
मुख्य बिंदु: योजना का ढांचा, पात्रता और कार्यान्वयन
1. योजना का स्वरूप और लाभ
- न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन: 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर लाभार्थी को ₹3,000 प्रति माह (₹36,000 वार्षिक) की निश्चित पेंशन मिलती है।
- पारिवारिक पेंशन (Family Pension): यदि लाभार्थी की मृत्यु हो जाती है, तो उसकी पति/पत्नी (Spouse) को 50% यानी ₹1,500 प्रति माह की पेंशन मिलती है। यह लाभ केवल जीवनसाथी के लिए ही उपलब्ध है।
- असामयिक मृत्यु की स्थिति: यदि 60 वर्ष से पहले किसान की मृत्यु होती है, तो उसका जीवनसाथी योजना को नियमित अंशदान देकर जारी रख सकता है या नियमों के अनुसार योजना से बाहर निकल सकता है।
2. अंशदान मॉडल
- बराबर का योगदान (1:1 Ratio): यह 50:50 की साझेदारी वाली अंशदायी योजना है। जितना योगदान किसान करेगा, उतना ही बराबर योगदान केंद्र सरकार करेगी।

- अंशदान राशि: लाभार्थी की प्रवेश आयु के आधार पर मासिक अंशदान ₹55 से ₹200 तक होता है।
- उदाहरण: 18 वर्ष की आयु में शामिल होने पर ₹55/माह (कुल ₹110) और 40 वर्ष की आयु में शामिल होने पर ₹200/माह (कुल ₹400) जमा करने होंगे।
- PM-KISAN से जुड़ाव: किसान अपनी इच्छा से PM-KISAN योजना से मिलने वाली राशि से ही इस पेंशन के अंशदान को ऑटो-डेबिट कराने का विकल्प चुन सकते हैं।
3. पात्रता और नामांकन
- आयु सीमा: 18 से 40 वर्ष के बीच।
- भूमि की सीमा: 2 हेक्टेयर तक की कृषि योग्य भूमि वाले छोटे और सीमांत किसान (SMFs)।
- कट-ऑफ तिथि: 1 अगस्त 2019 तक राज्य/यूटी के भू-अभिलेखों (Land Records) में नाम होना आवश्यक है।
- नामांकन एजेंसी: कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के माध्यम से डिजिटल और पूरी तरह से पेपरलेस प्रक्रिया।
- फंड मैनेजर: पेंशन फंड का प्रबंधन और भुगतान भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) द्वारा किया जाता है।
4. राज्यवार प्रदर्शन (फरवरी 2026 तक)
- शीर्ष राज्य: हरियाणा 5.75 लाख से अधिक नामांकनों के साथ सबसे आगे है।
- दूसरा स्थान: बिहार (3.46 लाख से अधिक)।
- अन्य प्रमुख राज्य: झारखंड और उत्तर प्रदेश (2.5 लाख से अधिक), तथा छत्तीसगढ़ (2 लाख से अधिक)।

अयोग्यता के मानदंड
योजना का लाभ समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक सीमित रखने के लिए निम्नलिखित श्रेणियों को बाहर रखा गया है:
- अन्य सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभार्थी: NPS, ESIC, EPFO, श्रम योगी मान-धन (PM-SYM), या लघु व्यापारी मान-धन (PM-LVM) में नामांकित व्यक्ति।
- उच्च आर्थिक स्थिति वाले व्यक्ति:
- संस्थागत भू-स्वामी (Institutional Landholders)।
- संवैधानिक पदधारक (Constitutional Post Holders)।
- सांसद, विधायक, नगर निगम के मेयर और जिला पंचायत अध्यक्ष।
- केंद्रीय/राज्य सरकार या सार्वजनिक उपक्रमों (PSEs) के कर्मचारी (नोट: मल्टी-टास्किंग स्टाफ / Class IV / Group D कर्मचारी पात्र हैं)।
- पिछले मूल्यांकन वर्ष में आयकर देने वाले व्यक्ति।
- पंजीकृत पेशेवर (डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, CA, आर्किटेक्ट)।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| योजना की शुरुआत | 12 सितंबर 2019 (केंद्रीय क्षेत्र की योजना) |
| प्रशासनिक मंत्रालय | कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय |
| पेंशन फंड मैनेजर | LIC (भारतीय जीवन बीमा निगम) |
| मासिक पेंशन | ₹3,000 (60 वर्ष की आयु के बाद) |
| पारिवारिक पेंशन | 50% (₹1,500 प्रति माह – केवल पति/पत्नी के लिए) |
| मासिक अंशदान | ₹55 से ₹200 (प्रवेश आयु 18-40 वर्ष) |
| सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला राज्य | हरियाणा (5.75 लाख+ नामांकन) |