15 September 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत डिजिटल अर्थव्यवस्था को गति देने वाले भारत में डाटा सेंटर (डिजिटल युग का नया अवसंरचनात्मक आधार), लैटिन अमेरिका के साथ वाणिज्यिक संबंधों को सशक्त बनाने वाले भारत-मर्कोसुर PTA का विस्तार (दक्षिणी अमेरिका के साथ व्यापार को गति), स्वच्छता और जनभागीदारी को बढ़ावा देने वाली केरल की ‘इकोसेंस’ छात्रवृत्ति पहल, सीमा शुल्क व अवैध व्यापार नियंत्रण हेतु DRI का ‘ऑपरेशन डीप मैनिफेस्ट’ (362 मीट्रिक टन पाकिस्तानी सूखे खजूर ज़ब्त), लुप्तप्राय प्रजातियों और तटीय सुचिता के लिए कचरा-मुक्त कच्छ पहल (GIB संरक्षण व तटीय पारिस्थितिकी), रक्षा में तकनीकी स्वावलंबन को दर्शाने वाले भारतीय वायु सेना ड्रोनाथॉन 2026 (‘वायु उत्तम’ और स्वदेशी ड्रोन क्षमताएं), वेस्ट हीट रिकवरी में क्रांतिकारी सफलता थैलियम कॉपर सेलेनाइड में असामान्य ऊष्मा परिवहन, तथा पड़ोसी देश के साथ ऊर्जा साझेदारी सुदृढ़ करने हेतु भारत द्वारा नेपाल को बिजली निर्यात की स्वीकृति का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
भारत में डाटा सेंटर: डिजिटल युग का नया अवसंरचनात्मक आधार
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT), नीतिगत पहलें।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास और अनुप्रयोग, बुनियादी ढांचा (Infrastructure- Digital & Energy), ऊर्जा सुरक्षा और संसाधन दक्षता।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत का डाटा सेंटर उद्योग अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज कर रहा है। वर्ष 2020 में भारत की डाटा सेंटर क्षमता 375 MW थी, जो अगस्त 2026 तक बढ़कर 1.57 GW हो गई है। वर्ष 2030 तक इसके 8 GW तक पहुंचने का अनुमान है। इसमें लगभग 70 अरब डॉलर का निवेश जारी है और 90 अरब डॉलर की नई परियोजनाओं की घोषणा की जा चुकी है।
मुख्य बिंदु: तकनीक, कार्यप्रणाली और नीतिगत ढांचा
1. डाटा सेंटर क्या है और यह कैसे काम करता है?
- परिभाषा: यह एक सुरक्षित भौतिक सुविधा है जहां सर्वर, डेटा स्टोरेज सिस्टम और नेटवर्किंग डिवाइस रखे जाते हैं।
- प्रमुख घटक:
- अविरत बिजली आपूर्ति (UPS): बिना रुके 24/7 बिजली सप्लाई।
- कूलिंग सिस्टम: अत्यधिक गर्मी को नियंत्रित करने के लिए HVAC, लिक्विड कूलिंग और इमर्शन कूलिंग।
- वर्चुअलाइजेशन: एक ही भौतिक सर्वर पर multiple वर्चुअल मशीनें चलाना ताकि क्षमता का पूरा उपयोग हो सके।
2. सरकार द्वारा उठाए गए नीतिगत कदम
- इंफ्रास्ट्रक्चर स्टेटस: बजट 2022-23 में डाटा सेंटरों को ‘इंफ्रास्ट्रक्चर’ का दर्जा दिया गया, जिससे इन्हें कम ब्याज दरों पर दीर्घकालिक ऋण (Cheaper Loans) मिलने लगे।
- टैक्स हॉलिडे: बजट 2026-27 में विदेशी क्लाउड सेवा प्रदाताओं के लिए 2047 तक टैक्स में राहत का प्रावधान किया गया है।

- पूरक योजनाएं:
- सेमीकॉन 2.0: ₹1,27,500 करोड़ के परिव्यय से चिप पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण।
- इण्डिया AI मिशन: ₹10,371.92 करोड़ का बजट, जो AI आधारित डाटा प्रोसेसिंग को गति दे रहा है।
- PLI 2.0 फॉर IT हार्डवेयर: घरेलू स्तर पर सर्वर और नेटवर्किंग उपकरण निर्माण को बढ़ावा।
3. ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण
- ऊर्जा मांग: केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (CEA) के अनुसार, 2031-32 तक डाटा सेंटर क्षेत्र की बिजली मांग 17 GW तक पहुंच सकती है।
- शांति अधिनियम: परमाणु ऊर्जा से हरित बिजली प्रदान करने के लिए स्स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स (SMRs) को बढ़ावा।
- BIS और BEE के हरित मानक (Green Standards):
- PUE (Power Usage Effectiveness): बिजली खपत की दक्षता का माप।
- WUE (Water Usage Effectiveness): पानी के उपयोग की दक्षता।
- CUE (Carbon Usage Effectiveness): कार्बन उत्सर्जन का मापन।
- CER (Cooling Efficiency Ratio): कूलिंग सिस्टम की कार्यकुशलता।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| वर्तमान क्षमता (Aug 2026) | 1.57 Gigawatt (GW) |
| अनुमानित क्षमता (2030) | ~8 GW |
| बुनियादी ढांचे का दर्जा | केंद्रीय बजट 2022-23 में प्रदान किया गया |
| विदेशी क्लाउड कंपनियों को टैक्स छूट | 2047 तक (बजट 2026-27 के तहत) |
| SHANTI Act का संबंध | डाटा सेंटर और AI के लिए न्यूक्लियर पावर (SMRs) का उपयोग |
भारत-मर्कोसुर PTA का विस्तार: दक्षिणी अमेरिका के साथ व्यापार को मिलेगी गति
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह (Regional & Global Blocs)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह, भारत के हितों पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों का प्रभाव, भारत का विदेशी व्यापार।
चर्चा में क्यों?
भारत के केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और मर्कोसुर की वर्तमान अध्यक्ष (Pro Tempore Presidency) संभाल रहे उरुग्वे के विदेश मंत्री मारियो लुबेतकिन ने भारत-मर्कोसुर वरीयता व्यापार समझौते (PTA) के विस्तार के लिए औपचारिक वार्ता शुरू करने की घोषणा की। दोनों पक्षों ने नए संदर्भ शर्तों (Terms of Reference – ToR) को अंतिम रूप देने पर सहमति जताई है। इसके अलावा, सीमा शुल्क प्रक्रियाओं के आधुनिकीकरण और कागज रहित व्यापार के लिए समझौते के पहले अतिरिक्त प्रोटोकॉल पर भी हस्ताक्षर किए गए।
मुख्य बिंदु: सीमा विस्तार, इलेक्ट्रॉनिक सर्टिफिकेशन और रणनीतिक महत्व
1. वर्तमान PTA का ढांचा और विस्तार की आवश्यकता
- मौजूदा स्थिति: 25 जनवरी 2004 को हस्ताक्षरित और 1 जून 2009 से लागू इस PTA में भारत को 450 और मर्कोसुर को 452 टैरिफ लाइनों पर सीमित शुल्क छूट मिलती है।
- सीमित दायरा: यह समझौता केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित है। इसमें सेवाएं और निवेश शामिल नहीं हैं।
- विस्तार का उद्देश्य: टैरिफ कटौती के दायरे को बढ़ाना, गैर-शुल्क बाधाओं को हटाना और अंततः इसे एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) में बदलना।
2. पहला अतिरिक्त प्रोटोकॉल
- ई-ऑरिजिन प्रमाणपत्र (e-CoO): इस प्रोटोकॉल का मुख्य उद्देश्य व्यापार में इलेक्ट्रॉनिक ओरिजिन प्रमाणपत्र के उपयोग को कानूनी मान्यता देना है।
- लागत में कमी: इससे सीमा शुल्क निकासी में लगने वाले समय और लेन-देन लागत (Transaction Costs) में कमी आएगी, जिससे डिजिटल और पेपरलेस ट्रेड संभव होगा।
3. भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक महत्व
- वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का विविधीकरण: लैटिन अमेरिकी देशों के साथ व्यापार बढ़ाने से भारत की निर्भरता पारंपरिक बाजारों पर कम होगी।
- कच्चे माल की उपलब्धता: भारत को इस क्षेत्र से लिथियम, तांबा (Copper), सोयाबीन तेल और कच्चे तेल जैसे महत्वपूर्ण संसाधन आसानी से मिलेंगे।
- निर्यातक क्षेत्रों को लाभ: भारत के रसायन, फार्मास्युटिकल्स, ऑटो कंपोनेंट्स और मशीनरी उद्योग को दक्षिण अमेरिकी बाजार में सीधी पहुंच मिलेगी।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| मूल समझौता (Original Pact) | 2004 में हस्ताक्षर, 1 जून 2009 से लागू |
| व्यापारिक ब्लॉक (Trade Bloc) | MERCOSUR (स्थापना: 1991, असुनसियोन संधि) |
| अध्यक्षता (2026) | उरुग्वे (Pro Tempore Presidency) |
| नया प्रोटोकॉल | पहला अतिरिक्त प्रोटोकॉल (इलेक्ट्रॉनिक सर्टिफिकेशन/e-CoO के लिए) |
| मौजूदा छूट दायरा | भारत: 450 वस्तुएं; मर्कोसुर: 452 वस्तुएं |
| शामिल गैर-सदस्यता | वेनेजुएला (2016 से निलंबित) |
केरल की ‘इकोसेंस’ छात्रवृत्ति पहल: अपशिष्ट प्रबंधन में युवा भागीदारी
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी, स्वच्छ भारत मिशन।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप, स्थानीय स्वशासन, पर्यावरण संरक्षण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन (Solid Waste Management) एवं व्यवहार परिवर्तन।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 (SBM-U 2.0) के तहत केरल की “इकोसेंस” पहल ने राज्य भर के 45,880 से अधिक छात्रों को अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति जागरूक कर छात्रवृत्ति प्रदान की है। इस पहल ने स्कूली छात्रों को केवल सैद्धांतिक ज्ञान देने के बजाय उन्हें ग्रीन ब्रिगेड के रूप में व्यवहारिक कचरा प्रबंधन से जोड़ा है।
मुख्य बिंदु: कार्यान्वयन, चयन और व्यवहारिक मॉडल
1. संस्थागत ढांचा और क्रियान्वयन
- सहयोगी विभाग: यह पहल केरल के स्थानीय स्वशासन विभाग (LSGD) और सामान्य शिक्षा विभाग का एक संयुक्त प्रयास है।
- लक्ष्य: राज्य के 50,000 छात्रों तक पहुंच बनाना, जिसमें से 986 स्थानीय निकायों के 45,880 छात्रों को इस वर्ष चुना गया है।
- पात्र कक्षाएं: उच्च प्राथमिक (कक्षा 6-7), हाई स्कूल (कक्षा 8-9), और उच्चतर माध्यमिक (HS/VHS प्रथम वर्ष) के छात्र।
2. स्थानीय निकायों के अनुसार छात्र चयन और प्रोत्साहन
- ग्राम पंचायत: प्रत्येक पंचायत से 50 छात्र।
- नगर पालिका (Municipality): प्रत्येक नगर पालिका से 75 छात्र।
- नगर निगम (Corporation): प्रत्येक निगम से 100 छात्र।
- प्रोत्साहन: चयनित प्रत्येक छात्र को ₹1,500 की छात्रवृत्ति और ‘स्वच्छता प्रमाण-पत्र’ प्रदान किया जाता है।
3. व्यवहारिक गतिविधियां और प्रत्यक्ष अनुभव
- स्रोत पर पृथक्करण (Segregation at Source): छात्र घरों और स्कूलों में जैविक और अजैविक कचरे को अलग-अलग करना सीखते हैं।
- फील्ड विजिट: छात्रों को सामग्री संग्रह सुविधाओं (MCFs) और संसाधन पुनर्चक्रण सुविधाओं (RRFs) का दौरा कराया जाता है ताकि वे कचरे के प्रसंस्करण को समझ सकें।

- हरित सभाएं: स्कूलों में विशेष बाल हरित सभाओं का आयोजन किया जाता है, जहां छात्र स्थानीय पर्यावरणीय मुद्दों पर चर्चा करते हैं और समाधान खोजते हैं।
- हरित प्रोटोकॉल: स्कूलों में कचरा कम करने, मरम्मत दुकानें (Repair Shops) स्थापित करने, कंपोस्टिंग और स्वैप शॉप जैसे मॉडल लागू किए गए हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| योजना का नाम | इकोसेंस – स्टूडेंट ग्रीन ब्रिगेड स्कॉलरशिप |
| मूल मिशन | स्वच्छ भारत मिशन – शहरी 2.0 (SBM-U 2.0) |
| संबंधित राज्य | केरल |
| छात्रवृत्ति राशि | ₹1,500 प्रति छात्र (साथ में प्रमाण-पत्र) |
| चयन अनुपात | 50 (पंचायत), 75 (नगर पालिका), 100 (नगर निगम) |
| मुख्य मंच | स्कूलों में आयोजित ‘हरित सभाएं’ |
‘ऑपरेशन डीप मैनिफेस्ट’: DRI ने ज़ब्त किए 362 मीट्रिक टन पाकिस्तानी सूखे खजूर
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार नीतियां।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): आंतरिक सुरक्षा के लिए चुनौतियां, संगठित अपराध और अवैध व्यापार, व्यापार प्रतिबंध और राष्ट्रीय सुरक्षा, राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI)।
चर्चा में क्यों?
राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने ‘ऑपरेशन डीप मैनिफेस्ट’ के तहत मुंबई की एक फर्म द्वारा आयातित 362 मीट्रिक टन से अधिक पाकिस्तानी मूल के सूखे खजूर की खेप ज़ब्त की। यह कार्रवाई नासिक के CFS अंबाड (Inland Container Depot/CFS Ambad) पर की गई। इन सामानों को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के जेबेल अली पोर्ट के जरिए ट्रांसशिप करके भारत लाया गया था, ताकि पाकिस्तान पर लगे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष व्यापार प्रतिबंधों को दरकिनार किया जा सके।
मुख्य बिंदु: ऑपरेशन, कार्यप्रणाली और व्यापार प्रतिबंध का उल्लंघन
1. क्या है ‘ऑपरेशन डीप मैनिफेस्ट’?
- उद्देश्य: यह DRI द्वारा चलाया गया एक विशेष अभियान है। इसका मुख्य लक्ष्य तीसरे देशों के रास्ते भारत में पाकिस्तानी माल के अवैध आयात को रोकना है।
- कार्यप्रणाली (Modus Operandi): माल को पहले कराची (पाकिस्तान) से जेबेल अली (UAE) भेजा गया। वहां पाकिस्तानी नागरिकों द्वारा संचालित संस्थाओं ने फर्जी कंट्री ऑफ ओरिजिन सर्टिफिकेट तैयार कर माल को दूसरे कंटेनरों में लोड किया और नासिक भेजा।
2. आयात प्रतिबंध की पृष्ठभूमि (DGFT अधिसूचना)
- पहलगाम आतंकी हमला: इस हमले के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया।
- DGFT अधिसूचना सं. 06/2025-26: विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने 2 मई 2025 से पाकिस्तान से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आने वाले सभी सामानों के आयात और ट्रांजिट पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था।
3. राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक प्रभाव
- सप्लाई चेन सुरक्षा: मिस-डिक्लेरेशन (गलत घोषणा) और फर्जी दस्तावेजों के जरिए आयात प्रतिबंधों को तोड़ने वाले नेटवर्क को ध्वस्त करना।
- राजस्व की क्षति और सुरक्षा जोखिम: तीसरे देश के रास्तों (Transshipment) का इस्तेमाल करके आतंकी फंडिंग और अवैध व्यापार नेटवर्क को बढ़ावा मिलने का जोखिम बना रहता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| विशेष अभियान | ऑपरेशन डीप मैनिफेस्ट (DRI द्वारा संचालित) |
| ज़ब्ती का स्थान | CFS अंबाड, नासिक (महाराष्ट्र) |
| आयातित सामग्री | 362 मीट्रिक टन से अधिक सूखे खजूर (Dry Dates) |
| प्रतिबंध आदेश | DGFT अधिसूचना संख्या 06/2025-26 (2 मई 2025 से लागू) |
| ट्रांजिट पोर्ट | जेबेल अली पोर्ट, UAE (मूल स्रोत: कराची, पाकिस्तान) |
| जांच एजेंसी | राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI – वित्त मंत्रालय) |
कचरा-मुक्त कच्छ: ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) संरक्षण और तटीय पारिस्थितिकी पहल
- प्रारंभिक परीक्षा: पर्यावरण और पारिस्थितिकी, जैव विविधता, संकटग्रस्त प्रजातियां (Threatened Species), मैंग्रोव संरक्षण।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA), तटीय क्षेत्र प्रबंधन (MISHTI योजना)।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने गुजरात के कच्छ जिले के नलिया में ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) आवास का दौरा किया। इस यात्रा के दौरान उन्होंने प्रजाति संरक्षण के लिए सॉफ्ट रिलीज सेंटर और सायारा वन कवच का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने तटीय सुरक्षा के लिए MISHTI योजना और मैंग्रोव पौधारोपण प्रयासों की समीक्षा की।
मुख्य बिंदु: GIB संरक्षण, मियावाकी वन और तटीय पहल
1. ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) संरक्षण के प्रयास
- सॉफ्ट रिलीज सेंटर: नलिया (कच्छ) में GIB के सुरक्षित अनुकूलन और संरक्षण के लिए केंद्र का उद्घाटन किया गया।
- घास के मैदान का जीर्णोद्धार: आक्रामक विदेशी प्रजाति प्रोसोपिस जुलीफ्लोरा को हटाकर 11 वर्ग किमी घास के मैदान को बहाल किया गया।
- शिकारी-रोधी बाड़ (Predator-proof Fencing): 15 वर्ग किमी क्षेत्र को कवर करने के लिए 30 किमी लंबी सुरक्षा बाड़ लगाई गई।
- ‘जम्प-स्टार्ट’ हस्तक्षेप: जंगली मादा GIB के अयोग्य अंडों को ब्रीडिंग प्रोग्राम से प्राप्त योग्य अंडों से बदला गया। दूसरी बार में पैदा हुआ चूजा 3 महीने से अधिक समय तक सुरक्षित जीवित रहा, जो गुजरात में GIB रिकवरी का बड़ा कीर्तिमान है।
2. सायारा वन कवच
- तकनीक: यह 9.46 वर्ग किमी क्षेत्र में मियावाकी तकनीक से विकसित सघन, बहुस्तरीय वन है।
- प्रजातियां: कच्छ की खारी और कम पानी की परिस्थितियों के अनुकूल 47 स्थानीय प्रजातियों के 10,000 से अधिक पौधे लगाए गए हैं।
- पर्यावरणीय लाभ: यह मॉडल स्थानीय तापमान को 1.5–2°C तक कम करने, भूजल पुनर्भरण, और मृदा अपरदन को रोकने में मदद करेगा।
3. तटीय पारिस्थितिकी: मैंग्रोव और MISHTI योजना
- सीमा सुरक्षा बल (BSF) के साथ पौधारोपण: जाखऊ में मैंग्रोव नर्सरी और कोरी क्रीक तथा सिर क्रीक क्षेत्रों में मैंग्रोव विस्तार।
- MISHTI योजना: ‘मैंग्रोव इनिशिएटिव फॉर शोरलाइन हैबिटेट्स एंड टैंगिबल इनकम्स’ के तहत स्थानीय समुदायों को मैंग्रोव संरक्षण और सीवीड खेती से जोड़कर आजीविका देना।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| GIB की IUCN स्थिति | अति संकटग्रस्त (Critically Endangered) |
| सॉफ्ट रिलीज सेंटर | नलिया, कच्छ (गुजरात) |
| आक्रामक प्रजाति | Prosopis juliflora (विलायती बबूल) |
| सायारा वन कवच पद्धति | मियावाकी वनीकरण तकनीक (47 स्थानीय प्रजातियां) |
| तटीय योजना | MISHTI (मैंग्रोव संरक्षण और तटीय आजीविका) |
भारतीय वायु सेना ड्रोनाथॉन 2026: ‘वायु उत्तम’ और स्वदेशी ड्रोन क्षमताएं
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, रक्षा प्रौद्योगिकी (Defence Technology), ड्रोन और स्वायत्त प्रणालियां।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां; प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और नई प्रौद्योगिकियों का विकास, आंतरिक और बाह्य सुरक्षा के लिए ड्रोन तकनीक से जुड़ी चुनौतियां।
चर्चा में क्यों?
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित (उपाध्यक्ष, वायु सेना) ने जैसलमेर स्थित पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज में तीन दिवसीय ‘भारतीय वायु सेना ड्रोनाथॉन-2026’ (IAF Dronathon-2026) का उद्घाटन किया। इसका मुख्य लक्ष्य भारतीय रक्षा उद्योग और स्टार्टअप्स के साथ मिलकर मानव रहित हवाई प्रणालियों (UAS) को वास्तविक परिचालन स्थितियों में परखना था।
मुख्य बिंदु: प्रौद्योगिकी, ‘वायु उत्तम’ और ‘IAF UAS रोडमैप’
1. वास्तविक परिचालन परीक्षण और तकनीक
- इवेंट का स्वरूप: इस आयोजन में 20 से अधिक रक्षा कंपनियों, स्टार्टअप्स, MSME और DPSUs ने भाग लिया।
- परीक्षण क्षेत्र: स्वायत्त संचालन (Autonomous Operations), स्वार्म ड्रोन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW), निगरानी और काउंटर-ड्रोन प्रणालियों (CUAS) का प्रदर्शन किया गया।
- रणनीतिक उद्देश्य: तकनीक के केवल सैद्धांतिक प्रदर्शन से आगे बढ़कर इसे युद्ध में तुरंत उपयोग के लायक (Operational Effect) बनाना।
2. स्वदेशी ‘वायु उत्तम’ प्रणाली
- क्या है वायु उत्तम?: यह भारतीय वायु सेना द्वारा पूरी तरह स्वदेशी रूप से विकसित बहु-स्तरीय मानव रहित यातायात प्रबंधन (Unmanned Traffic Management – UTM) प्रणाली है।
- लाइव परीक्षण: पोकरण में लाइव टेस्ट के दौरान इसने सैन्य और नागरिक दोनों तरह के ड्रोन को रियल-टाइम ट्रैक किया।
- दोहरा उपयोग (Dual-Use): यह न केवल अधिक संख्या वाले ड्रोन हवाई क्षेत्र (Congested Airspace) का प्रबंधन करती है, बल्कि अनधिकृत (Rogue) ड्रोन की पहचान भी करती है। इसका उपयोग नागरिक उड्डयन और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में हो सकता है।
3. ‘IAF UAS रोडमैप’ का विमोचन
- उद्योग के लिए स्पष्टता: वायु सेना उपाध्यक्ष ने ‘IAF UAS Roadmap’ जारी किया, जिससे रक्षा उद्योगों और शोध संस्थानों (Academia) को वायु सेना की भविष्य की जरूरतों की सटीक जानकारी मिलेगी।

- पूर्ण ईकोसिस्टम पर जोर: ध्यान केवल एयरफ्रेम बनाने पर नहीं, बल्कि प्रोपल्शन, सेंसर, पेलोड, संचार और इलेक्ट्रॉनिक रक्षा प्रणालियों के संपूर्ण घरेलू विकास पर है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजन का नाम | IAF ड्रोनाथॉन-2026 |
| आयोजन का स्थान | पोकरण फील्ड फायरिंग रेंज, जैसलमेर (राजस्थान) |
| आयोजक | भारतीय वायु सेना (IAF) |
| ‘वायु उत्तम’ | स्वदेशी बहु-स्तरीय अनमैन्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट (UTM) प्रणाली |
थैलियम कॉपर सेलेनाइड में असामान्य ऊष्मा परिवहन: अपशिष्ट ऊष्मा से बिजली निर्माण की नई तकनीक
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की वैज्ञानिक घटनाएं, नवीन सामग्री और तकनीक (New Materials & Technology)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां, देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई तकनीक का विकास, ऊर्जा दक्षता (Energy Efficiency)।
चर्चा में क्यों?
जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (JNCASR), बेंगलुरु के शोधकर्ताओं ने एक नए कॉपर चाल्कोजेनाइड पदार्थ थैलियम कॉपर सेलेनाइड (TlCu_5Se_3) में तरंग-जैसी (wave-like) ऊष्मा परिवहन तंत्र की खोज की। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के तहत काम करने वाले संस्थान की इस खोज को ‘साइंस एडवांसेज’ पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। यह तकनीक उद्योगों से निकलने वाली व्यर्थ ऊष्मा (Waste Heat) को सीधे बिजली में बदलने में मदद करेगी।
मुख्य बिंदु: तकनीक, क्रियाविधि और व्यावहारिक उपयोग
1. क्या है थैलियम कॉपर सेलेनाइड (TlCu_5Se_3)?
- पदार्थ की प्रकृति: यह एक नया टर्नरी कॉपर चाल्कोजेनाइड क्रिस्टलीय ठोस पदार्थ है।
- क्रिस्टल संरचना: इसकी संरचना 3D ‘क्लॉवरलीफ नॉट’ जैसी है। इसमें c-अक्ष के अनुदिश खुली नलिकाएं होती हैं।
- सीमित आयनिक प्रसार (Confined Ion Diffusion): इसमें तांबे (Cu) के परमाणु पूरे क्रिस्टल में अनियंत्रित तरीके से बहने के बजाय सीमित ढांचे में ही गति करते हैं। इससे संरचनात्मक स्थिरता (Structural Stability) बनी रहती है।
2. तरंग-जैसा ऊष्मा परिवहन
- पारंपरिक बनाम नया मॉडल: पारंपरिक क्रिस्टलों में ऊष्मा ‘कणों’ जैसे फोनॉन के माध्यम से बहती है।
- वेव कोहेरेंस: TlCu_5Se_3 में अत्यधिक कंपन संबंधी विचलन के कारण ऊष्मा कणों के रूप में बहने के बजाय अलग-अलग कंपनों के बीच तरंग-जैसी सुसंगतता से गुजरती है।
- अति-निम्न तापीय चालकता (Ultralow Thermal Conductivity): इस तंत्र से जालक तापीय चालकता बहुत घट जाती है। इससे सामग्री पिघले बिना या खराब हुए बिना अत्यधिक ऊष्मा रोककर उसे बिजली में बदल सकती है।
3. व्यावहारिक उपयोग और महत्व
- थर्मोइलेक्ट्रिक प्रदर्शन (zT मान): इसका थर्मोइलेक्ट्रिक फिगर ऑफ मेरिट (zT) 1.7 पाया गया है, जो इस श्रेणी के पदार्थों में सबसे बेहतर में से एक है।

- औद्योगिक उपयोग: इस्पात, सीमेंट संयंत्रों, पावर प्लांट्स, ऑटोमोबाइल, डेटा सेंटर और बैटरी हीट मैनेजमेंट सिस्टम से निकलने वाली बेकार गर्मी को उपयोगी बिजली में बदला जा सकता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| नवीन पदार्थ | थैलियम कॉपर सेलेनाइड (TlCu_5Se_3) |
| खोजकर्ता संस्थान | JNCASR, बेंगलुरु (DST के अधीन) |
| प्रकाशन पत्रिका | साइंस एडवांसेज |
| परिवहन तंत्र | फोनॉन की तरंग-जैसी सुसंगतता |
| zT अंक (दक्षता) | 1.7 (अत्यधिक उच्च थर्मोइलेक्ट्रिक प्रदर्शन) |
भारत द्वारा नेपाल को बिजली निर्यात की स्वीकृति: द्विपक्षीय ऊर्जा सहयोग
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, भारत और उसके पड़ोसी संबंध।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): भारत एवं इसके पड़ोसी संबंध, द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा भारत से जुड़े और/या भारत के हितों को प्रभावित करने वाले करार।
चर्चा में क्यों?
भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय (Ministry of Power) ने नेपाल विद्युत प्राधिकरण (Nepal Electricity Authority) को प्रतिदिन 18 घंटे बिजली निर्यात करने की स्वीकृति प्रदान की। यह मंजूरी 13 सितंबर 2026 से 31 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगी। हाल ही में आई भीषण बाढ़ से नेपाल के जलविद्युत बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। इससे वहां घरेलू बिजली उत्पादन क्षमता घट गई है। संकट की इस घड़ी में नेपाल की बिजली मांग को पूरा करने के लिए भारत ने यह कदम उठाया है।
मुख्य बिंदु: बिजली निर्यात का विवरण और रणनीतिक महत्व
1. बिजली निर्यात की परिचालन सीमाएं
- समय सीमा: रोजाना 18 घंटे (रात 00:00 बजे से शाम 18:00 बजे तक) बिजली की आपूर्ति की जाएगी।
- स्वीकृत मात्रा: कुल 654 मेगावाट (MW) तक की बिजली निर्यात होगी।
- समीक्षा की तारीख: जनवरी 2027 से दी जाने वाली बिजली की मात्रा की समीक्षा दिसंबर 2026 में की जाएगी।
2. प्रेषण लाइनें
- मुजफ्फरपुर – ढालकेबर लाइन: 400 kV D/c (डबल सर्किट) लाइन के माध्यम से अधिकतम 600 MW बिजली भेजी जाएगी।
- टनकपुर – महेंद्रनगर लाइन: 132 kV S/c (सिंगल सर्किट) लाइन के माध्यम से अधिकतम 54 MW बिजली भेजी जाएगी।
3. रणनीतिक और मानवीय महत्व
- आपदा मोचन सहायता: नेपाल में बाढ़ के कारण जलविद्युत स्टेशन प्रभावित हुए हैं। भारत की यह आपूर्ति नेपाल में ऊर्जा संकट को टालेगी।
- ऊर्जा कूटनीति (Energy Diplomacy): यह कदम ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत भारत-नेपाल के बीच दीर्घकालिक द्विपक्षीय ऊर्जा सहयोग को मजबूती देता है।
भारत-नेपाल ऊर्जा संबंध
- नेपाल विद्युत प्राधिकरण (NEA): नेपाल में बिजली उत्पादन, संचरण और वितरण के लिए जिम्मेदार सरकारी निकाय।
- क्रॉस-बॉर्डर पावर ग्रिड: मुजफ्फरपुर (बिहार) – ढालकेबर (नेपाल) लाइन भारत और नेपाल के बीच पहली उच्च क्षमता वाली 400 kV की क्रॉस-बॉर्डर ट्रांसमिशन लाइन है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| अनुमोदनकर्ता मंत्रालय | विद्युत मंत्रालय (Ministry of Power, भारत सरकार) |
| लाभार्थी संस्था | नेपाल विद्युत प्राधिकरण (NEA) |
| निर्यात की समय सीमा | प्रतिदिन 18 घंटे (13 सितंबर से 31 दिसंबर 2026) |
| कुल निर्यात क्षमता | अधिकतम 654 MW (600 MW + 54 MW) |
| मुख्य ट्रांसमिशन लाइन 1 | मुजफ्फरपुर (भारत) – ढालकेबर (नेपाल) 400 kV D/c |
| मुख्य ट्रांसमिशन लाइन 2 | टनकपुर (भारत) – महेंद्रनगर (नेपाल) 132 kV S/c |