Give The Best…..Take The Best

Indus River System Notes in Hindi Pdf

सिन्धु नदी तंत्र (Indus River System) विश्व के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण नदी बेसिन्स में से एक है, जो मुख्य रूप से पश्चिमी हिमालय क्षेत्र के जल को अरब सागर तक ले जाता है। इस तंत्र की मुख्य नदी सिन्धु है, जो तिब्बत में मानसरोवर झील के निकट से निकलती है। झेलम, चिनाब, रावी, व्यास और सतलज जैसी इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ (पंचनद) उत्तर-पश्चिम भारत की भूमि को उपजाऊ बनाती हैं। यह नदी तंत्र न केवल भूगोल बल्कि कृषि, व्यापार और भारत-पाकिस्तान जल समझौते की दृष्टि से भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है।

इस क्रम की नदियाँ पश्चिमी हिमालय प्रदेश का जल अरब सागर में गिराती हैं। यह संसार की कुछ सबसे बड़ी नदी द्रोणियों में से एक है। इस तंत्र में सिन्धु सबसे बड़ी नदी है तथा झेलम, चिनाब, रावी, व्यास, सतलज व अन्य इसकी सहायक नदियाँ हैं।

  • उद्गम: यह नदी लद्दाख श्रेणी के उत्तरी भाग में (मानसरोवर झील के निकट तिब्बत) 5000 मीटर की ऊँचाई से निकलती है। कैलाश चोटी के दूसरी ओर से ‘सिंगी खंबन’ और दक्षिण की ओर से ‘गरतंग चू’ नदियाँ आकर इसमें मिलती हैं।
  • प्रवाह मार्ग:
    • यह ब्रह्मपुत्र नदी के ठीक विपरीत दिशा में बहती है तथा 350 कि.मी. उत्तर-पश्चिम की ओर बहने के बाद ‘नंगा पर्वत’ (लद्दाख श्रेणी) पर समकोण बनाती हुई मुड़ती है।
    • यह लद्दाख श्रेणी को काटकर ‘गिलगित’ के पास एक गहरा 5181 मी. खड्ड बनाती है और ‘दम चौक’ के निकट भारत में प्रवेश करती है।
    • यह ‘चिल्लास’ (Chilas) के निकट पाकिस्तान (मैदान) में प्रवेश करती है। अटक के पास मैदान में प्रवेश करती है।
  • सहायक नदियाँ:
    • दाँयी ओर से: यहाँ दाँयी ओर से काबुल नदी इसमें मिलती है। दाँयी ओर से मिलने वाली कुछ अन्य सहायक नदियाँ भी हैं—जैसे झोब, कुनार, गोमल, अस्तर, द्रास, श्योक, स्वात, कुर्रम, शिगार, नुब्रा, हुंजा।
    • बाँयी ओर से: मिठानकोट के थोड़ा उत्तर में बाँयों ओर से इसमें पंचनद (सतलज, व्यास, रावी, झेलम, चिनाब), जास्कर (लेह के निकट), शुरू, सुन, आदि नदियाँ आकर मिलती हैं।
  • निकास: कराची से थोड़ा पूर्व में यह अरब सागर में गिरती है।
  • विस्तार व क्षेत्र:
    • कुल लम्बाई: 2880 कि.मी. (भारत में 709 कि.मी.)
    • अपवाह क्षेत्र: 11,65,000 वर्ग कि.मी. (भारत में 3,21,990 वर्ग कि.मी.)
  • भारत-पाकिस्तान के मध्य 19 सितम्बर 1960 को सिन्धु जल समझौता हस्ताक्षरित हुआ था (पं. जवाहर लाल नेहरू और अयूब खान के बीच)।
  • इसके अन्तर्गत सिन्धु और उसकी सहायक, झेलम और चिनाब नदियों के जल का मात्र 20% ही भारत उपयोग कर सकता है, जबकि पूर्वी तीनों (सतलज, रावी और व्यास) नदियों के 80% जल का उपयोग भारत कर सकता है।
  • उद्गम व प्रवाह: यह सिन्धु की सहायक नदी है। यह बेरीनाग (कश्मीर के द. पूर्वी भाग) के निकट ‘शेषनाग झील’ से निकलती है और 212 कि.मी. उत्तर-पश्चिम में बहती हुई ‘वुलर झील’ में मिलती है।
  • विशेषताएँ:
    • इस मार्ग में यह मुख्य हिमालय और पीर पंजाल श्रेणियों के मध्य बहती है।
    • पाकिस्तान सीमा के पास (बारामुला के निकट) 2130 मीटर गहरी घाटी बनाती है। यहीं पर इसमें ‘किशनगंगा’ मिलती है।
    • कश्मीर में यह परिवहन और व्यापार हेतु अति महत्वपूर्ण है।
  • विलय: पाकिस्तान में ‘झंग’ या त्रिमू के निकट यह चिनाब में मिल जाती है, इस प्रकार यह प्राथमिक रूप से चिनाब की सहायक नदी है।
  • विस्तार: भारत में इसकी लम्बाई 400 कि.मी. तथा अपवाह क्षेत्र 28,490 वर्ग कि.मी. है।
  • उद्गम: यह नदी लाहौल घाटी में ‘बारा-लाचा-ला’ दर्रे से विपरीत दिशा में 4900 मीटर की ऊँचाई से ‘चन्द्र’ और ‘भागा’ नामक दो नदियों के रूप में निकलती है। ये दोनों नदियाँ ‘केलॉग’ के निकट ‘टांडी’ में मिल जाती हैं।
  • प्रवाह व विलय:
    • चम्बा (हिमाचल प्रदेश) जिले में उत्तर-पश्चिम दिशा में 161 कि.मी. बहती है।
    • किश्तवार के निकट एक बड़ा तेज-मोड़ लेकर पीरपंजाल श्रेणी में गहरी कन्दरा बनाकर यह मैदान की ओर बढ़ती है और यहीं से पाकिस्तान में प्रवेश करती है।
  • विशेषता: यह सिन्धु की सबसे बड़ी सहायक नदी है।
  • विस्तार: भारत में इसकी लम्बाई 1180 कि.मी. तथा अपवाह क्षेत्र 26,555 वर्ग कि.मी. है।
  • उद्गम: इसका उद्गम, हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले (कुल्लू पहाड़ियों) में स्थित ‘रोहतांग दर्रे’ के निकट होता है (बंगाहल बेसिन से)।
  • प्रवाह व विलय:
    • यह धौलाधार पर्वतमाला के उत्तरी और पंजाब श्रेणी के दक्षिणी ढालों का जल बहाकर लाती है।
    • यह अपने मार्ग में बड़ी ऊँची श्रेणियों में होकर कन्दराएँ बनाती हुई बहती है।
    • यह बसोली के निकट मैदानी भागों में प्रवेश करती है तथा आगे पाकिस्तान में सराय सिंधु के पास चिनाब में मिल जाती है।
  • विशेषता: यह नदी पंजाब की पंचनदियों में सबसे छोटी है।
  • विस्तार: भारत में इसकी कुल लम्बाई 725 कि.मी. तथा अपवाह क्षेत्र 5,957 वर्ग कि.मी. है।
  • उद्गम: रोहतांग दर्रे के निकट ‘व्यास-कुंड’ से इसका उद्‌गम होता है।
  • प्रवाह व विलय:
    • यह उद्‌गम से 9 कि.मी. दूर ‘कटी’ और ‘लारजी’ दर्रे के निकट महाखड्ड बनाती है।
    • धौलाधार पर्वतमाला को काटकर यह कुल्लू, मण्डी और कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) में बहती हुई अमृतसर और कपूरथला (पंजाब) में बहते हुए ‘हरिके’ के पास सतलज नदी में मिल जाती है।
  • विशेषता: ‘हरिके बराज’ से भारत की सबसे बड़ी नहर ‘इंदिरा गांधी नहर’ निकाली गयी है।
  • विस्तार: भारत में इसकी लम्बाई 470 कि.मी. तथा अपवाह क्षेत्र 25,900 वर्ग कि.मी. है।
  • उद्गम: यह नदी कैलाश पर्वत की दक्षिणी ढालों पर मानसरोवर झील के निकट लगभग 5000 मीटर की ऊँचाई के ‘राक्षसताल’ नामक झील (तिब्बत) से निकलती है।
  • प्रवाह व विलय:
    • यह एक पूर्ववर्ती नदी है, इसे तिब्बत में ‘लांगचेन त्संगपो’ के नाम से जाना जाता है। भारत में प्रवेश के पूर्व यह $400\text{ कि.मी.}$ तक सिन्धु के समानांतर प्रवाहित होती है।
    • यह जास्कर श्रेणी को ‘शिपकी-ला’ दर्रा और शिवालिक श्रेणी को रूपड़ के निकट काटकर गहरे खड्ड बनाती है और यहाँ से मैदान में प्रवेश करती है।
    • कुल्लू घाटी के पास इसमें ‘सिप्ती’ नदी मिल जाती है।
    • आगे ‘हरिके’ के पास व्यास से जल संग्रहित करते हुए, यह मिठानकोट के पास सिन्धु में मिल जाती है।
  • विस्तार: भारत में इसकी लम्बाई 1050 कि.मी. तथा अपवाह क्षेत्र 24,087 वर्ग कि.मी. है।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top