10 August 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत जन शिकायत निवारण को सुगम बनाने हेतु CPGRAMS का कायाकल्प (एआई तकनीक और ‘समाधान दीदी’ पहल), लखनऊ में CSIR-NBRI द्वारा स्थापित देश के पहले इको-एजुकेशनल हब ‘प्रकृति ज्ञान धाम’, कोच्चि में आयोजित भारत-अमेरिका नौसेना ईओडी (EOD) अभ्यास 2026, शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) को सशक्त बनाने के लिए मुंबई में NUCFDC के नए परिसर के उद्घाटन और ‘सहकार नव-क्रांति’ के शुभारंभ, देश द्वारा 300 GW गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता का ऐतिहासिक मील का पत्थर हासिल करने, तथा 11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक के भोपाल घोषणापत्र के साथ सफल समापन का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
CPGRAMS का कायाकल्प: एआई और ‘समाधान दीदी’ से सुधरी जन शिकायत निवारण प्रणाली
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की नीतियां, ई-गवर्नेस, DARPG और डिजिटल इंडिया पहल।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): शासन व्यवस्था (Governance), ई-गवर्नेस के अनुप्रयोग, पारदर्शिता, जवाबदेही और नागरिक चार्टर।
चर्चा में क्यों?
प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग (DARPG) ने CPGRAMS (सेंट्रलाइज्ड पब्लिक ग्रीवेंस रिड्रेस एंड मॉनिटरिंग सिस्टम) के नए आंकड़े और सुधारों की प्रगति रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म पर लगातार 46 महीनों से हर महीने 1 लाख से अधिक शिकायतों का निपटारा किया जा रहा है। 2014 में शिकायतों के समाधान में औसतन 157 दिन लगते थे, जो 2025-26 में घटकर महज 14-15 दिन रह गए हैं। मई 2026 में लॉन्च किए गए AI वॉइस चैटबॉट “समाधान दीदी” ने इस व्यवस्था को पूरी तरह से डिजिटल और सुलभ बना दिया है।
मुख्य बिंदु: तकनीक, 10-सूत्रीय सुधार और अगला चरण
1. CPGRAMS का विकास और कार्यप्रणाली
- एकल मंच: CPGRAMS एक 24×7 ऑनलाइन पोर्टल है जो केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों, विभागों और राज्य सरकारों को एक साथ जोड़ता है।
- पहुंच में वृद्धि: 5 लाख से अधिक कॉमन सर्विस सेंटर्स (CSCs) के जरिए ग्रामीण नागरिक भी अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- 21 दिनों का नियम: अगस्त 2024 में नए दिशा-निर्देशों के तहत शिकायत निवारण की अधिकतम सीमा 30 दिनों से घटाकर 21 दिन कर दी गई है।
- फीडबैक एवं अपील: शिकायत बंद होने के बाद फीडबैक कॉल सेंटर नागरिक से बात करता है। असंतुष्ट होने पर नागरिक 30 दिनों के भीतर नोडल अपीलीय प्राधिकारी के पास अपील कर सकता है।
2. कौन से मामले CPGRAMS के दायरे से बाहर हैं?
- सूचना का अधिकार (RTI) से जुड़े मामले।
- न्यायालयों में लंबित या विचाराधीन (Subjudice) मामले।
- धार्मिक मुद्दे।

- सरकारी कर्मचारियों के अपने सेवा, वेतन या अनुशासनात्मक कार्यवाही से संबंधित व्यक्तिगत मामले।
3. 10-सूत्रीय सुधार कार्यक्रम और एआई पहल
- CPGRAMS 7.0 और ऑटो-रूटिंग: शिकायतों को संबंधित अधिकारी तक मैन्युअल के बजाय अपने आप ऑटो-रूट किया जाता है।
- ‘समाधान दीदी’ (AI Voice Chatbot): 30 मई 2026 को लॉन्च किया गया यह चैटबॉट भाषिणी प्लेटफॉर्म का उपयोग करता है। नागरिक अपनी बोली या भाषा में बोलकर शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- GRAI इंडेक्स: ‘ग्रीवेंस रिड्रेसल असेसमेंट एंड इंडेक्स’ के जरिए मंत्रालयों के प्रदर्शन की रैंकिंग की जाती है, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ती है।
- बहुभाषी सहायता: अंग्रेजी के अलावा संविधान की 22 अनुसूचियों में शामिल सभी भाषाओं में शिकायत और जवाब की सुविधा है।
4. NextGen CPGRAMS का विज़न
DARPG अब नेक्स्ट-जेनरेशन प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है। इसमें सोशल मीडिया, ईमेल और मोबाइल ऐप्स से सीधे शिकायत दर्ज करने (Omni-channel registration), एआई द्वारा फर्जी या अधूरी शिकायतों की ऑटो-फ्लैगिंग और दिव्यांगजनों के लिए विशेष एक्सेसिबिलिटी फीचर्स शामिल होंगे।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| संचालक विभाग | DARPG (प्रशासकीय सुधार और लोक शिकायत विभाग)। |
| निपटान समय सीमा | अधिकतम 21 दिन (पहले 30 दिन थी)। |
| AI वॉइस चैटबॉट | समाधान दीदी (30 मई 2026 को लॉन्च)। |
| भाषा समर्थन | भाषिणी के जरिए 22 आधिकारिक भाषाएं। |
| संबद्धता | उमंग ऐप और 5 लाख से अधिक CSCs के साथ एकीकृत। |
लखनऊ में देश का पहला ‘इको-एजुकेशनल हब’: CSIR-NBRI ने खोला ‘प्रकृति ज्ञान धाम’
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व के संस्थान, पर्यावरण एवं जैव विविधता संरक्षण, CSIR-NBRI और ‘मेक इन इंडिया’।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, महिला उद्यमिता और अनुसंधान-से-आजीविका मॉडल।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लखनऊ के बंथरा स्थित महर्षि पराशर बायोरिसोर्स सेंटर (MPBC) में देश के पहले ‘इको-एजुकेशनल हब’ (प्रकृति ज्ञान धाम) को राष्ट्र को समर्पित किया। CSIR-NBRI (राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान) द्वारा विकसित यह हब वैज्ञानिक अनुसंधान, पर्यावरण शिक्षा, जैव विविधता संरक्षण और भारत की वनस्पति विरासत का एक अनूठा संगम है। इस अवसर पर मंत्री जी ने विज्ञान को प्रयोगशालाओं से बाहर निकालकर सीधे समाज, किसानों और उद्यमियों की आजीविका (Livelihood) से जोड़ने का आह्वान किया।
मुख्य बिंदु: तकनीक हस्तांतरण, विरासत वृक्ष और प्रमुख आकर्षण
1. ‘प्रकृति ज्ञान धाम’ के प्रमुख आकर्षण व उद्यान
- पावन पथ: यह एक हेरिटेज ट्रेल है, जो आगंतुकों को देश के विभिन्न पारिस्थितिक क्षेत्रों की चुनिंदा वनस्पति प्रजातियों के प्रत्यक्ष दर्शन कराती है।
- इंडियन हेरिटेज गार्डन: इसमें देश के ऐतिहासिक और स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े विरासत वृक्षों का संवर्धन किया गया है।
- बावन इमली (फतेहपुर): 52 स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान से जुड़ा वृक्ष।
- मदर दशहरी (लखनऊ): विश्व प्रसिद्ध दशहरी आम का मातृ वृक्ष।
- पातालपुरी बरगद (प्रयागराज) तथा गांधी जी द्वारा चंपारण (भितिहरवा) में रोपा गया आम का पेड़।
- QR-कोड आधारित ऑडियो सिस्टम: आगंतुक अपने स्मार्टफोन से QR कोड स्कैन करके इन पेड़ों के ऐतिहासिक और वैज्ञानिक महत्व को सुन सकते हैं।
- विभव एनक्लेव: भारत की संकटग्रस्त, दुर्लभ और लुप्तप्राय (Rare, Endangered & Threatened) पौधों की प्रजातियों का संरक्षण क्षेत्र।

- भैरव एनक्लेव: भारत के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के आधिकारिक ‘राज्य पौधों’ (State Plants) का संग्रह।
- बैम्बूस्टीयम: बांस की 43 स्वदेशी और विदेशी प्रजातियों का केंद्र, जो मृदा संरक्षण और कार्बन सिक्वेस्ट्रेशन में मददगार हैं।
2. शोध से आजीविका: तकनीक और उत्पाद हस्तांतरण
- कुटुंबश्री मिशन (केरल): महिला-नेतृत्व वाली उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए CSIR-NBRI ने 4 हर्बल तकनीकें (हर्बल एंटी-डैंड्रफ हेयर ऑयल, फ्रोटस: लोटस व रुद्र परफ्यूम, और हर्बल नैनो सीरम) केरल के राज्य गरीबी उन्मूलन मिशन को सौंपीं।
- पुरुष प्रजनन स्वास्थ्य दवा: ‘हिमालय’ कंपनी के सहयोग से विकसित हर्बल फॉर्मूलेशन लॉन्च किया गया।
- लो-कॉस्ट फोटोबायोरिएक्टर: कम लागत वाली इस तकनीक का वाणिज्यिक उत्पादन के लिए विटवेक सॉल्यूशंस (लखनऊ) को हस्तांतरण किया गया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| सुविधा का नाम | इको-एजुकेशनल हब (‘प्रकृति ज्ञान धाम’)। |
| स्थान | महर्षि पराशर बायोरिसोर्स सेंटर (MPBC), बंथरा (लखनऊ)। |
| विकासकर्ता संस्था | CSIR-NBRI (राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान)। |
| डिजिटल फीचर | QR-कोड सक्षम ऑडियो सिस्टम (पेड़ों की जानकारी हेतु)। |
| बांस की किस्में | बैम्बूस्टीयम में 43 बांस प्रजातियां प्रदर्शित। |
भारत-अमेरिका नौसेना ईओडी अभ्यास 2026: कोच्चि में विस्फोटक निपटान अभ्यास शुरू
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास, दक्षिण नौसेना कमान (कोच्चि) और समुद्री सुरक्षा पहल।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): सुरक्षा चुनौतियां, रक्षा सहयोग, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और इंटरऑपरेबिलिटी।
चर्चा में क्यों?
भारतीय नौसेना और अमेरिकी नौसेना के बीच द्विपक्षीय विस्फोटक ऑर्डनेंस निपटान (EOD) अभ्यास 2026 का आयोजन 10 से 14 अगस्त 2026 तक दक्षिण नौसेना कमान, कोच्चि में किया जा रहा है। इस 5 दिवसीय सैन्य अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की विशेषज्ञ डाइविंग और EOD टीमों के बीच पेशेवर सहयोग और अंतर-संचालनीयता (Interoperability) को मजबूत करना है।
मुख्य बिंदु: अभ्यास के घटक, उद्देश्य और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1. अभ्यास के प्रमुख घटक और गतिविधियां
- विषय विशेषज्ञ विनिमय (SMEEs): दोनों नौसेनाओं के विशेषज्ञ नवीनतम EOD तकनीकों और उभरती प्रौद्योगिकियों पर अनुभव साझा करेंगे।
- क्रॉस-ट्रेनिंग एवं उपकरण प्रदर्शन: अत्याधुनिक विस्फोटक निपटान उपकरणों का व्यावहारिक प्रदर्शन और संयुक्त प्रशिक्षण किया जाएगा।
- परिदृश्य-आधारित व्यावहारिक अभ्यास: जटिल और वास्तविक युद्ध परिस्थितियों पर आधारित संयुक्त EOD ऑपरेशन्स आयोजित किए जाएंगे।
2. रणनीतिक महत्व और उद्देश्य
- ऑपरेशनल सिनर्जी: दोनों देशों की डाइविंग टीमें एक-दूसरे की परिचालन अवधारणाओं (Operational Concepts) को समझ सकेंगी।
- उभरते खतरों का मुकाबला: समुद्र में बारूदी सुरंगों, अनविस्फोटित आयुधों (UXO) और जटिल विस्फोटक खतरों से प्रभावी ढंग से निपटने की क्षमता में वृद्धि होगी।
- सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान: सुरक्षा मानकों और आधुनिक EOD कार्यप्रणालियों को एक साथ साझा किया जाएगा।
3. पृष्ठभूमि
- भारत और अमेरिकी नौसेना वर्ष 2005 से संयुक्त साल्वेज और EOD अभ्यास का आयोजन कर रही हैं।
- वर्ष 2026 में आयोजित होने वाला यह अभ्यास इस विशेष द्विपक्षीय प्रशिक्षण का 8वां संस्करण है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| अभ्यास का नाम | भारत-अमेरिका नौसेना EOD (Explosive Ordnance Disposal) अभ्यास 2026। |
| आयोजन स्थल | दक्षिणी नौसेना कमान (Southern Naval Command), कोच्चि, केरल। |
| अवधि | 10 से 14 अगस्त 2026 (5 दिन)। |
| भाग लेने वाले दल | दोनों नौसेनाओं की विशेषज्ञ डाइविंग एवं EOD टीमें। |
| संस्करण | 8वां संस्करण (शुरुआत: वर्ष 2005)। |
| अन्य प्रमुख भारत-अमेरिका नौसैनिक अभ्यास | मालाबार, संगम (MIO/EOD), टाइगर ट्राइम्फ। |
मुंबई में NUCFDC के नए परिसर का उद्घाटन: UCBs के लिए ‘सहकार नव-क्रांति’ का शुभारंभ
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की नीतियां, ई-गवर्नेस, DARPG और डिजिटल इंडिया पहल।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2&3): शासन व्यवस्था (Governance), ई-गवर्नेस के अनुप्रयोग, पारदर्शिता, जवाबदेही और सहकारिता मॉडल।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) मुंबई में आयोजित ‘सहकार नव-क्रांति’ कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर NUCFDC (नेशनल अर्बन कोऑपरेटिव फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) के नए परिसर का उद्घाटन किया गया। इसके साथ ही शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) के लिए साइबर सुरक्षा और डिजिटल बैंकिंग सेवाओं का राष्ट्रीय सेवा बंडल भी लॉन्च किया गया।
मुख्य बिंदु: तकनीक, वित्तीय सुधार और डिजिटल सुरक्षा
1. NUCFDC और ‘Bank in a Box’ मॉडल
- अम्ब्रेला संगठन: NUCFDC देश के लगभग 1,400 शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) का नियामक और तकनीकी अम्ब्रेला ढांचा है, जिसका पूंजी ढांचा ₹306 करोड़ है।
- Bank in a Box (सहकार CBS): छोटे बैंकों को एक एकीकृत प्लेटफॉर्म पर कोर बैंकिंग (CBS), डिजिटल पेमेंट, क्लाउड सेवाएं और रेगुलेटरी अनुपालन बहुत कम खर्च में उपलब्ध कराया जाएगा।
- लागत में कमी: सामूहिक खरीद और साझा इंफ्रास्ट्रक्चर से एकल-शाखा वाले छोटे बैंकों का तकनीकी खर्च काफी कम हो जाएगा।
2. साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक (NFSU के साथ समझौता)
- सुरक्षा संचालन केंद्र (SOC): UCBs को साइबर हमलों से बचाने के लिए 24×7 साइबर निगरानी और सुरक्षा सहायता मिलेगी।
- NFSU के साथ MoU: नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी (NFSU) के सहयोग से बैंकों को ‘MuleHunter’ जैसी एआई तकनीक, डिजिटल फॉरेंसिक सेवाएं और साइबर इंश्योरेंस मुहैया कराया जाएगा।
3. UCBs के लिए हालिया आरबीआई नियामक ढील
- शाखा विस्तार: पात्र बैंकों को बिना अलग अनुमति के 15% तक नई शाखाएं खोलने की छूट मिली।
- पीएसएल लक्ष्य: प्राथमिक क्षेत्रक ऋण (PSL) का लक्ष्य 75% से घटाकर 60% किया गया।
- डोरस्टेप बैंकिंग व अन्य ढील: सभी UCBs के लिए डोरस्टेप बैंकिंग, ₹2 लाख की महिला ऋण सीमा का हटना और एकमुश्त समाधान (OTS) सुविधा का विस्तार।
- सहानुभूतिपूर्ण बैंकिंग: UCBs अब ‘मेंबर लेंडिंग इंस्टीट्यूशंस’ (MLI) के रूप में बिना गारंटी 85% तक क्रेडिट गारंटी कवर प्रदान कर सकते हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| अम्ब्रेला संस्था | NUCFDC (पूंजी: ₹306 करोड़, मुख्यालय: महाराष्ट्र स्थानांतरित)। |
| नया सेवा मॉडल | ‘Bank in a Box’ (एकीकृत डिजिटल व सीबीएस समाधान)। |
| फॉरेंसिक पार्टनर | NFSU (नेशनल फॉरेंसिक साइंसेज यूनिवर्सिटी)। |
| एंटी-फ्रॉड एआई टूल | MuleHunter (फर्जी खातों और डिजिटल फ्रॉड को पकड़ने हेतु)। |
| नया PSL लक्ष्य | शहरी सहकारी बैंकों (UCBs) के लिए 60% (पहले 75% था)। |
| रिलीज हुई पुस्तकें | Operational Risk Management (जी. पी. मिस्त्री) व कॉफी-टेबल बुक। |
भारत ने हासिल किया 300 GW गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता का ऐतिहासिक मील का पत्थर
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्व की पर्यावरण, अक्षय ऊर्जा और जलवायु परिवर्तन संबंधी नीतियां।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): बुनियादी ढांचा (ऊर्जा), पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और विकासशील तकनीक (ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, PLI योजना)।
चर्चा में क्यों?
हाल ही में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत ने 31 जुलाई 2026 तक 300 GW से अधिक गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित बिजली उत्पादन क्षमता हासिल कर ली है। यह ऐतिहासिक मील का पत्थर वर्ष 2030 तक तय किए गए 500 GW के राष्ट्रीय लक्ष्य का 60% से भी अधिक हिस्सा पूरा करता है। देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता में अब स्वच्छ ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़कर 54% से अधिक हो गई है। यह उपलब्धि भारत के ऊर्जा संक्रमण, हरित विकास और जलवायु प्रतिबद्धताओं को तेजी से पूरा करने की दिशा में एक बड़ा रणनीतिक कदम है।
मुख्य बिंदु: क्षमता विभाजन, उत्पादन वृद्धि और घरेलू निर्माण
1. गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता का विभाजन (31 जुलाई 2026 तक)
- कुल स्थापित क्षमता: भारत की कुल बिजली क्षमता (लगभग 552 GW) में गैर-जीवाश्म हिस्सेदारी 54% से अधिक (300.50 GW) हो चुकी है।
- सौर ऊर्जा: 164.59 GW (वर्ष 2014 के 2.8 GW से विशाल वृद्धि)।
- पवन ऊर्जा: 58.14 GW (वर्ष 2014 के 21 GW से बढ़कर)।
- जलविद्युत: 57.24 GW (बड़ी और छोटी परियोजनाएं)।
- बायो-पावर: 11.75 GW।
- परमाणु ऊर्जा (Nuclear Power): 8.78 GW।
2. रिकॉर्ड वार्षिक वृद्धि और पीढ़ीगत उछाल
- 2025-26 में नया रिकॉर्ड: केवल एक वर्ष में 55.29 GW की नई क्षमता जोड़ी गई, जिसमें 44.6 GW सौर और 6 GW पवन ऊर्जा शामिल है।
- उत्पादन में वृद्धि: अक्षय ऊर्जा उत्पादन वर्ष 2014-15 के 190.96 अरब यूनिट (BU) से बढ़कर 2025-26 में 477.79 BU हो गया है।
3. घरेलू विनिर्माण शक्ति और पीएलआई योजना
- ALMM मील का पत्थर: अप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉडल एंड मैन्युफैक्चरर्स (ALMM) के तहत सूचीबद्ध सौर पीवी मॉड्यूल क्षमता 2014 के 2.3 GW से बढ़कर 200 GW पार कर गई है।
- इंडस्ट्रियल डिकार्बोनाइजेशन: राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन (National Green Hydrogen Mission) के माध्यम से भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाया जा रहा है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| कुल गैर-जीवाश्म क्षमता | 300.50 GW (कुल बिजली क्षमता का 54% से अधिक)। |
| 2030 का राष्ट्रीय लक्ष्य | 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता। |
| शीर्ष ऊर्जा स्रोत | सौर ऊर्जा (164.59 GW), पवन ऊर्जा (58.14 GW)। |
| ALMM क्षमता | 200 GW पार (पीएलआई योजना द्वारा समर्थित)। |
| नोडल मंत्रालय | नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE)। |
11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक: भोपाल घोषणापत्र के साथ संपन्न
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय महत्व की सांस्कृतिक घटनाएं, ब्रिक्स, यूनेस्को और प्रमुख विरासत स्थल (सांची व भीमबेटका)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): अंतर्राष्ट्रीय संबंध, BRICS का महत्व, भारत की सांस्कृतिक कूटनीति (Soft Power) और अंतर्राष्ट्रीय संस्थागत सहयोग।
चर्चा में क्यों?
हाल ही में भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत 11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक 8 अगस्त 2026 को भोपाल (मध्य प्रदेश) में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस उच्च स्तरीय सम्मेलन का सबसे प्रमुख परिणाम सर्वसम्मति से ‘भोपाल घोषणापत्र’ को अपनाया जाना रहा। यह ऐतिहासिक घोषणापत्र सदस्य और भागीदार देशों के बीच सांस्कृतिक व रचनात्मक सहयोग को गहरा करने के लिए एक व्यावहारिक एवं भविष्योन्मुखी ढांचा प्रदान करता है। इसके साथ ही, सम्मेलन के दौरान कलात्मक आदान-प्रदान, डिजिटल संरक्षण और एआई-संचालित कॉपीराइट सुरक्षा जैसे अहम विषयों पर साझा सहमति बनी।
मुख्य बिंदु: भोपाल घोषणापत्र, ‘Bank of Artists’ व सांस्कृतिक कार्यक्रम
1. बैठक की रूपरेखा और भागीदारी
- अध्यक्षता व थीम: भारत ने “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” विषय के तहत इस वार्ता की मेजबानी की।
- प्रतिनिधिमंडलों का विस्तार: इस बैठक में कुल 14 देशों (10 ब्रिक्स सदस्य + 4 भागीदार देश) के 55 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
- नए भागीदार देश: बेलारूस, क्यूबा, कजाकिस्तान और थाईलैंड ने पार्टनर कंट्री के रूप में भागीदारी की।
2. भोपाल घोषणापत्र के मुख्य स्तंभ
- AI और कॉपीराइट संरक्षण: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सिस्टम में कॉपीराइट कृतियों के उपयोग पर पारदर्शिता, रचनाकारों के अधिकारों की रक्षा और न्यायसंगत मुआवजे का प्रावधान।
- सांस्कृतिक संपत्तियों की वापसी: यूनेस्को के तहत बहुराष्ट्रीय नामांकनों, कलाकृतियों के स्रोत (Provenance) अनुसंधान तथा चोरी या अवैध रूप से ले जाई गई सांस्कृतिक वस्तुओं की वापसी के लिए एआई आधारित ट्रैकिंग टूल का उपयोग।

- पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण: पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों (TKS) और सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों का संरक्षण करना।
- दस्तावेजी विरासत: संग्रहालयों, पुस्तकालयों और अभिलेखागारों के बीच डिजिटलीकरण और संरक्षण में तकनीकी सहयोग।
3. भारत की विशेष पहल: वॉलंटीयर आर्टिस्ट रजिस्ट्री
- भारत ने एक ‘Voluntary Artist Registry’ (ऐच्छिक कलाकार रजिस्ट्री) विकसित करने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट की घोषणा की।
- उद्देश्य: ब्रिक्स देशों के कलाकारों, रचनात्मक पेशेवरों और सांस्कृतिक नेटवर्क को एक साझा मंच पर जोड़ना ताकि उन्हें वैश्विक अवसर मिल सकें।
4. ब्रिक्स सांस्कृतिक उत्सव व विरासत स्थलों का दौरा
- ब्रिक्स कल्चरल फेस्टिवल: 6-7 अगस्त 2026 को भोपाल में “सर्वे भवन्तु सुखिनः” की भावना पर आधारित सांस्कृतिक उत्सव आयोजित हुआ।
- विरासत भ्रमण: विदेशी प्रतिनिधियों को यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों—सांची (बौद्ध स्तूप), भीमबेटका (प्रागैतिहासिक शैलचित्र) और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय (IGRMS) का भ्रमण कराया गया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| बैठक का नाम | 11वीं ब्रिक्स संस्कृति मंत्रियों की बैठक (2026)। |
| आयोजन स्थल | भोपाल, मध्य प्रदेश। |
| मुख्य परिणाम | भोपाल घोषणापत्र को अपनाया गया। |
| भारत की नई पहल | Voluntary Artist Registry (कलाकारों के लिए पायलट प्लेटफॉर्म)। |
| सांस्कृतिक थीम | “सर्वे भवन्तु सुखिनः” (सभी सुखी और शांतिपूर्ण रहें)। |
| भ्रमण किए गए प्रमुख स्थल | सांची (रायसेन), भीमबेटका की गुफाएं और IGRMS (भोपाल)। |