8 August 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत वैश्विक शैक्षणिक सहयोग हेतु 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक और ओडिशा घोषणा-पत्र, DGFT की ‘Source from India’ पहल, अनुसंधान एवं विकास में पारदर्शिता लाने हेतु RDI फंड और हितों के टकराव का नया सरकारी ढांचा, जर्मनी में स्थापित अंतर्राष्ट्रीय FAIR मेगा साइंस प्रोजेक्ट के लिए भारत द्वारा निर्मित अत्याधुनिक ‘बीम कैचर’ उपकरण, एमएसएमई क्षेत्र को मजबूती देने वाले MSMED (संशोधन) विधेयक 2026 के पारित होने, डिजिटल अर्थव्यवस्था और वित्तीय समावेशन को समर्पित तीसरे भारत अंतर्राष्ट्रीय फिनटेक महोत्सव, तथा भारतीय कंपनियों व पेशेवरों को लक्षित करने वाले जोखिमों पर आधारित I4C की ‘बॉस स्कैम’ साइबर चेतावनी का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक: ओडिशा घोषणा-पत्र और 5 प्रमुख प्राथमिकताएं
- प्रारंभिक परीक्षा: अंतर्राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, ब्रिक्स (BRICS) संगठन, इसकी संरचना एवं प्रमुख वैश्विक पहलें।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): ब्रिक्स जैसे क्षेत्रीय व वैश्विक समूहों का भारत पर प्रभाव, तथा मानव संसाधन व शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी नीतियां और सुधार।
चर्चा में क्यों?
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता (BRICS Chairship 2026) के तहत 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक भुवनेश्वर (ओडिशा) में संपन्न हुई। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में 13वां ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों का घोषणा-पत्र (Declaration) अपनाया गया। भारत ने इस मंच से शिक्षा के प्रति ‘मानव-केंद्रित और जन-उन्मुख’ (People-Centric & Humanity-First) दृष्टिकोण पर जोर दिया।
मुख्य बिंदु: 5 प्राथमिकताएं और पारंपरिक ज्ञान प्रणाली
1. 13वें घोषणा-पत्र की 5 प्रमुख प्राथमिकताएं
- ECCE और FLN का सुदृढ़ीकरण: प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल (ECCE) और बुनियादी साक्षरता (FLN) को सार्वभौमिक बनाने पर सहमति। इसमें आयु-अनुकूल डिजिटल समाधानों का उपयोग होगा।
- कौशल विकास व TVET सहयोग: ‘BRICS TVET कोऑपरेशन एलायंस’ के जरिए कौशल पहलों को बढ़ावा दिया जाएगा। भारत इसमें एक अंतर्राष्ट्रीय स्किल गैप अध्ययन शुरू करेगा।
- अनुसंधान, नवाचार और AI: शिक्षा में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का सुरक्षित, नैतिक और मानव-केंद्रित उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। साथ ही, विश्वविद्यालय-स्टार्टअप साझेदारी मजबूत होगी।
- योग्यता की पारस्परिक मान्यता (MRQ): ब्रिक्स देशों के बीच डिग्रियों की आपसी मान्यता के लिए एमओयू (MoU) पर काम जारी रहेगा ताकि छात्रों की आवाजाही आसान हो।

- अकादमिक नेतृत्व व रैंकिंग: STEM विषयों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। साथ ही, ‘ब्रिक्स यूनिवर्सिटी ग्लोबल रैंकिंग और मूल्यांकन प्रणाली’ स्थापित करने के विकल्प तलाशे जाएंगे।
2. पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियां
- मार्गदर्शक सिद्धांत: भारत की पहल पर पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों पर अकादमिक सहयोग मजबूत करने का प्रस्ताव स्वीकार किया गया।
- ब्रिक्स नेटवर्क यूनिवर्सिटी: इस विश्वविद्यालय में ‘पारंपरिक और स्वदेशी ज्ञान प्रणाली’ को एक नए अंतर्राष्ट्रीय विषय समूह (International Thematic Group) के रूप में जोड़ने का सुझाव दिया गया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| बैठक का नाम | 13वीं ब्रिक्स शिक्षा मंत्रियों की बैठक (2026)। |
| आयोजन स्थल | भुवनेश्वर, ओडिशा। |
| भारत की थीम (2026) | “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability”। |
| भागीदार देश | भारत, ब्राजील, रूस, चीन, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया, ईरान, इथियोपिया, UAE। |
| प्रमुख भारतीय पहल | अंतर्राष्ट्रीय स्किल गैप अध्ययन। |
| प्रस्तावित रैंकिंग | BRICS University Global Ranking System. |
| मुख्य आगामी कार्यक्रम | 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (12-13 सितंबर 2026, नई दिल्ली)। |
DGFT की ‘Source from India’ पहल: स्टार्टअप्स को वैश्विक बाजार से जोड़ने की तैयारी
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, सरकारी योजनाएं, DGFT और भारतीय अर्थव्यवस्था।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था, व्यापार और निर्यात प्रोत्साहन, स्टार्टअप्स तथा सूचना व संचार प्रौद्योगिकी (ICT) का प्रभाव।
चर्चा में क्यों?
विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। 6 अगस्त 2026 के ट्रेड नोटिस (संख्या 16) के तहत, ‘ट्रेड कनेक्ट ई-प्लेटफॉर्म’ पर उपलब्ध ‘Source from India’ सेवा का दायरा बढ़ा दिया गया है। अब उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) से मान्यता प्राप्त सभी योग्य स्टार्टअप्स इस सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सीधे वैश्विक खरीदारों से जुड़ सकेंगे।
मुख्य बिंदु: नए नियम, ‘स्टार्टअप बैज’ और निर्यात में राहत
1. क्या है ‘Source from India’ और नया बदलाव?
- डिजिटल माइक्रोसाइट: ‘Source from India’ फीचर के जरिए भारतीय निर्यातक अपनी समर्पित डिजिटल प्रोफाइल बना सकते हैं। विदेशी खरीदार यहां सीधे विश्वसनीय भारतीय आपूर्तिकर्ताओं को ढूंढ पाते हैं।
- विशेष पहचान (Start-Up Badge): इस प्लेटफॉर्म पर DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स को एक अनूठा ‘स्टार्ट-अप बैज’ दिया जाएगा। इससे अंतरराष्ट्रीय खरीदार आसानी से उनकी खोज कर सकेंगे।
2. निर्यात मापदंडों में विशेष छूट
- आमतौर पर इस प्लेटफॉर्म पर जुड़ने के लिए पूर्व निर्यात प्रदर्शन (Past Export Performance) अनिवार्य होता है।
- नया नियम: शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए एक विशेष ढील दी गई है।
- यदि किसी DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप के पास सक्रिय आयात-निर्यात कोड (IEC) है और वह अस्वीकृत संस्था सूची (Denied Entity List – DEL) में शामिल नहीं है, तो वह बिना किसी पूर्व निर्यात अनुभव के भी अपनी प्रोफाइल बना सकता है।
3. इसका रणनीतिक महत्व और लाभ
- निर्यात में विविधीकरण: इससे भारत से होने वाले पारंपरिक निर्यातों के अलावा तकनीकी और नवाचार-आधारित उत्पादों का निर्यात बढ़ेगा।
- वैश्विक बाजार तक सीधी पहुंच: बिचौलियों के बिना छोटे और नए स्टार्टअप्स को वैश्विक पहचान मिलेगी।
- स्वचालित पहुंच: जो स्टार्टअप्स पहले से ट्रेड कनेक्ट प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत हैं, उनके डैशबोर्ड पर यह विकल्प स्वतः उपलब्ध हो जाएगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| जारीकर्ता संस्था | विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT), वाणिज्य मंत्रालय। |
| नोडल प्लेटफॉर्म | ट्रेड कनेक्ट ई-प्लेटफॉर्म। |
| मुख्य फीचर | ‘Source from India’ (विदेशी खरीदारों के लिए डिजिटल मार्केटप्लेस)। |
| पात्रता मानदंड | DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स + सक्रिय IEC (जो DEL में न हो)। |
| विशेष पहचान प्रणाली | डिजिटल ‘Start-Up Badge’। |
| मुख्य छूट | बिना पूर्व निर्यात ट्रैक रिकॉर्ड के भी रजिस्ट्रेशन की अनुमति। |
RDI फंड और हितों का टकराव (Conflict of Interest): सरकार ने जारी किया पारदर्शी ढांचा
- प्रारंभिक परीक्षा: अंतर्राष्ट्रीय महत्व एवं राष्ट्रीय स्तर की समसामयिक घटनाएं, DST, TDB, ANRF और सरकारी नीतियां।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): शासन व्यवस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, दीप-टेक (Deep-Tech) नवाचार और RDI फंड।
चर्चा में क्यों?
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST), प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) और अनुसंधान नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (ANRF) ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। सरकार ने स्पष्ट किया कि अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) फंड का आवंटन पूरी तरह से पारदर्शी, योग्यता-आधारित (Merit-based) और ‘हितों के टकराव’ (Conflict of Interest – COI) के सख्त नियमों के तहत किया जा रहा है।
मुख्य बिंदु: पारदर्शी मूल्यांकन, सेफगार्ड्स और नियम
1. हितों का टकराव (COI) रोकने के त्रि-स्तरीय उपाय
- पूर्ण प्रकटीकरण और अनुभाग (Disclosure & Recusal): यदि मूल्यांकन समिति के किसी विशेषज्ञ का किसी कंपनी से पेशेवर या निवेश संबंध है, तो उसे इसकी घोषणा करनी होगी। वह उस प्रोजेक्ट की चर्चा और वोटिंग से पूरी तरह अलग (Recuse) रहेगा।
- कठोर TDB नीति: यदि कोई समिति सदस्य किसी कंपनी का संस्थापक, सीईओ या शेयरधारक है, तो वह कंपनी TDB में आवेदन ही नहीं कर सकती।
- सुपर-मेजोरिटी (Supermajority) से निर्णय: प्रोजेक्ट की मंजूरी साधारण बहुमत से नहीं, बल्कि पात्र सदस्यों के विशेष बहुमत (Supermajority) से मिलती है।
- सरकारी अधिकारियों का गैर-वोटिंग अधिकार: तकनीकी योग्यता विशेषज्ञ तय करते हैं। TDB के सदस्य सचिव के पास वोटिंग का अधिकार नहीं होता।
2. वित्तीय सहायता का स्वरूप और मिलान निवेश
- कंपनी को नहीं, प्रोजेक्ट को फंड: RDI फंड कंपनियों को सीधी वित्तीय मदद नहीं देता। यह विशिष्ट शोध और तकनीक विकास परियोजनाओं के लिए सॉफ्ट लोन प्रदान करता है।
- मैचिंग फंड की शर्त: सरकारी सहायता तभी जारी होती है जब कंपनी गैर-सरकारी स्रोतों से मिलान राशि (Matching Investment) जुटा लेती है।
- पूर्व खर्च बाहर: प्रस्ताव जमा करने से पहले किए गए खर्चों को इसमें शामिल नहीं किया जाता।
3. दीप-टेक कंपनियों का महत्व
- इस चरण में चुने गए 22 स्टार्टअप्स दीप-साइंस और संप्रभु तकनीकों (Sovereign Technologies) पर काम कर रहे हैं।
- ये कंपनियां TRL 4 (Technology Readiness Level) से आगे की हैं। इन्हें शुरुआती चरण में बाजार से कर्ज नहीं मिलता, इसलिए एंजेल फंड्स और RDI फंड का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| संबंधित विभाग/संस्थाएं | DST, TDB (1996 में स्थापित) और ANRF। |
| फंड का नाम | RDI फंड (Research, Development and Innovation Fund)। |
| निर्णय प्रक्रिया | स्वतंत्र निवेश समिति द्वारा सुपर-मेजोरिटी से अप्रूवल। |
| TDB सदस्य सचिव भूमिका | गैर-वोटिंग सदस्य (No Voting Rights)। |
| वित्तीय ढांचा | सॉफ्ट लोन + मैचिंग प्राइवेट इन्वेस्टमेंट अनिवार्य। |
| लक्ष्य क्षेत्र | दीप-टेक एवं TRL 4 से ऊपर की तकनीकें। |
FAIR मेगा साइंस प्रोजेक्ट: भारत ने बनाया ‘बीम कैचर’ उपकरण
- प्रारंभिक परीक्षा: अंतर्राष्ट्रीय महत्व की वैज्ञानिक घटनाएं, परमाणु अनुसंधान तथा अंतर्राष्ट्रीय मेगा साइंस प्रोजेक्ट्स।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां, देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और ‘मेक इन इंडिया’ का प्रभाव।
चर्चा में क्यों?
भारत द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित ‘बीम कैचर’ उपकरण की पहली यूनिट जर्मनी स्थित अंतर्राष्ट्रीय मेगा साइंस प्रोजेक्ट FAIR (Facility for Antiproton and Ion Research) स्थल पर पहुंच गई है। यह उपकरण सुपर फ्रैगमेंट सेपरेटर (Super-FRS) का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो रेडियोधर्मी बीम उत्पन्न करने में मदद करता है।
मुख्य बिंदु: स्वदेशी तकनीक, भारतीय योगदान और मेक इन इंडिया
1. बीम कैचर क्या है और इसका तकनीकी महत्व?
- प्राथमिक कार्य: यह उपकरण प्राइमरी हैवी-आयन बीम की बची हुई अत्यधिक ऊर्जा (0.4-1.5 GeV/nucleon) को सोखने का काम करता है।
- डिजाइन चुनौती: बीम से निकलने वाली ऊर्जा ग्रेफाइट और कॉपर अवशोषक (Absorbers) में अत्यधिक उच्च ऊर्जा घनत्व (300 J/g) पैदा करती है। इससे थर्मल शॉक वेव्स बनती हैं।
- शीतलन व सुरक्षा: बीम कैचर में अत्यधिक गर्मी से पिघलन रोकने के लिए वाटर-कूलिंग सिस्टम और रेडियोधर्मी विकिरण से सुरक्षा के लिए 40 टन वजनी आयरन शील्डिंग लगाई गई है।
2. FAIR प्रोजेक्ट में भारत की भागीदारी
- संस्थापक सदस्य: भारत 4 अक्टूबर 2010 को जर्मनी के विसबडेन में सम्मेलन पर हस्ताक्षर कर FAIR का संस्थापक सदस्य बना।
- नोडल एजेंसी: बोसे इंस्टीट्यूट, कोलकाता (DST के तहत) इस परियोजना में भारत की ओर से नोडल संस्थान और शेयरधारक है।
- वित्त पोषण: भारत का योगदान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) और परमाणु ऊर्जा विभाग (DAE) द्वारा 50:50 के अनुपात में दिया जा रहा है।
3. ‘इन-काइंड’ आपूर्ति और भारतीय उद्योग
भारत कैश के साथ-साथ कई महत्वपूर्ण उपकरण भी सप्लाई कर रहा है:
- बीम कैचर: 3 यूनिट्स (डिजाइन: CSIR-CMERI दुर्गापुर; निर्माण: ट्राइडेंट ऑटोकंपोनेंट्स, कानपुर)।
- अल्ट्रा-हाई वैक्यूम चैंबर: 58 यूनिट्स (वैक्यूम तकनीक, बेंगलुरु)।
- पावर कनवर्टर: 524 यूनिट्स (ECIL, हैदराबाद)।
- केबल्स: 932 किमी मल्टी-कोर आईटी व डायग्नोस्टिक केबल्स (सिचेम टेक्नोलॉजीज, चेन्नई)।
- क्रायोजेनिक घटक: आइनॉक्स सीवीए (INOXCVA), वडोदरा।
4. भारतीय उद्योगों के लिए रणनीतिक लाभ
- यह पहल ‘मेक इन इंडिया’ विज़न को साकार करती है।

- इससे भारतीय उद्योगों की क्षमता बढ़ रही है, जिससे वे भविष्य में ITER, TMT, CERN, SKA और LIGO जैसी अन्य वैश्विक मेगा-साइंस परियोजनाओं में भी योगदान दे सकेंगे।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| परियोजना का नाम | FAIR (Facility for Antiproton and Ion Research)। |
| स्थान | डार्मस्टाट (Darmstadt), जर्मनी। |
| भारतीय नोडल संस्थान | बोसे इंस्टीट्यूट, कोलकाता (Bose Institute)। |
| फंडिंग पैटर्न | 50:50 (DST और DAE द्वारा)। |
| बीम कैचर डेवलपर | CSIR-CMERI (दुर्गापुर)। |
| मुख्य वैज्ञानिक प्रयोग | NuSTAR (परमाणु संरचना) और CBM (सम्पीडित बैरिएनिक पदार्थ)। |
MSMED (संशोधन) विधेयक, 2026: संसद में पारित हुआ MSME सुधार कानून
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, MSME क्षेत्र, उदयम पोर्टल और सरकारी नीतियां।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था, औद्योगिक नीति, रोजगार सृजन, व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business) और एमएसएमई का विकास।
चर्चा में क्यों?
लोकसभा ने सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 [MSMED (Amendment) Bill, 2026] को मंजूरी दे दी। राज्यसभा इसे 3 अगस्त 2026 को ही पारित कर चुकी थी। मूल MSMED अधिनियम 2006 में लागू हुआ था। इसके 20 साल पूरे होने पर आधुनिक तकनीक, व्यापार में सुगमता और बकाए भुगतान (Delayed Payments) की समस्याओं से निपटने के लिए यह नया कानून लाया गया है।
मुख्य बिंदु: कानूनी ढांचा, भुगतान में देरी और गैर-अपराधीकरण
1. MSME सेक्टर की वर्तमान स्थिति
- पंजीकरण में उछाल: ‘उद्यम पोर्टल’ पर पंजीकृत MSMEs की संख्या अप्रैल 2023 के 1.65 करोड़ से बढ़कर 9.16 करोड़ हो चुकी है।
- रोजगार का आधार: यह क्षेत्र भारत में 40 करोड़ से अधिक लोगों को रोजगार देता है और अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है।
2. नए संशोधन के प्रमुख प्रावधान
- वर्गीकरण का वैधानिक आधार: “संयंत्र/मशीनरी में निवेश” और “कारोबार” (Turnover) के दोहरे मानदंड वाले वर्गीकरण को अब कानून में शामिल कर लिया गया है। उदयम पोर्टल को एक स्थायी, मुफ्त और स्वैच्छिक डिजिटल प्लेटफॉर्म की कानूनी मान्यता मिली है।
- भुगतान में देरी (Delayed Payments) पर नकेल:
- ऑनलाइन विवाद समाधान (ODR): सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSEs) के लिए ODR की व्यवस्था की गई है।
- कोर्ट अपील में 50% राशि जमा: यदि कोई खरीदार MSEFC के फैसले के खिलाफ अदालत जाता है और मामला 6 महीने से अधिक लंबित रहता है, तो अदालत खरीदार को बकाया राशि का कम से कम 50% तुरंत भुगतान करने का आदेश देगी।
- कड़ा रिकवरी तंत्र: मध्यस्थता या फैसिलिटेशन काउंसिल के फैसले को ‘भू-राजस्व के बकाए’ (Arrear of Land Revenue) की तरह जिला कलेक्टर के माध्यम से वसूला जाएगा।
3. TReDS प्लेटफॉर्म का अनिवार्य उपयोग
- CPSEs के लिए अनिवार्य: सभी केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (CPSEs) को MSMEs से सामान खरीदने पर बिलों का निपटान TReDS (Trade Receivables Discounting System) प्लेटफॉर्म के जरिए ही करना होगा।
- लिक्विडिटी में सुधार: TReDS पर इनवॉइस डिस्काउंटिंग का वॉल्यूम 2022-23 के ₹40,000 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में ₹3.47 लाख करोड़ हो गया है।
4. तय समय-सीमा और व्यापार सुगमता
- विवाद निपटान के लिए सख्त समय-सीमा:
- पहली पेशी से 90 दिनों के भीतर मध्यस्थता (Mediation) पूरी करना अनिवार्य।
- मध्यस्थता विफल होने पर 30 दिनों में मामला आर्बिट्रेशन को भेजा जाएगा।
- दलीलें पूरी होने के 90 दिनों के भीतर अंतिम फैसला सुनाना होगा।
- गैर-अपराधीकरण (Decriminalisation): आपराधिक सजा और जेल के प्रावधान खत्म कर दिए गए हैं। अब इनकी जगह सिविल पेनल्टी लगेगी। पहली गलती पर केवल ‘चेतावनी’ (Warning) दी जाएगी, जबकि दोबारा गलती करने पर ही जुर्माना लगेगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| विधेयक का नाम | MSMED (संशोधन) विधेयक, 2026 (मूल अधिनियम: 2006)। |
| पंजीकरण पोर्टल | उदयम पोर्टल – नि:शुल्क और स्वैच्छिक (Voluntary)। |
| अदालती शर्त (Delayed Payment) | 6 महीने से अधिक लंबित मामले में न्यूनतम 50% राशि का भुगतान अनिवार्य। |
| बकाया वसूली का तरीका | भू-राजस्व के बकाए के रूप में जिला कलेक्टर द्वारा। |
| TReDS का दायरा | सभी CPSEs के लिए MSME इनवॉइस सेटलमेंट TReDS पर अनिवार्य। |
तीसरा भारत अंतर्राष्ट्रीय फिनटेक महोत्सव: वित्तीय समावेशन से वित्तीय सशक्तिकरण की ओर भारत
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, फिनटेक, नेशनल क्वांटम मिशन और सरकारी पहलें।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम तकनीक और स्टार्टअप्स।
चर्चा में क्यों?
नई दिल्ली में आयोजित तीसरे भारत अंतर्राष्ट्रीय फिनटेक महोत्सव को केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने संबोधित किया। सरकार ने स्पष्ट किया कि जन धन योजना और डिजिटल इंडिया से मिली सफलता के बाद अब भारत का अगला लक्ष्य ‘वित्तीय समावेशन से वित्तीय सशक्तिकरण’ और ‘डिजिटल भुगतान से डिजिटल समृद्धि’ की ओर बढ़ना है।
मुख्य बिंदु: इमर्जिंग तकनीकें, क्वांटम मिशन और स्टार्टअप क्रांति
1. अगले चरण की फिनटेक क्रांति के मुख्य आधार
- उभरती प्रौद्योगिकियां: फिनटेक का अगला दौर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्वांटम टेक्नोलॉजी, साइबर सुरक्षा, मशीन लर्निंग और ब्लॉकचेन पर टिका होगा।
- भरोसेमंद AI (Trusted AI): जिम्मेदार AI का उपयोग करके सुरक्षित, लचीली और नागरिक-केंद्रित वित्तीय सेवाएं देना मुख्य प्राथमिकता है।
- प्रमुख फोकस क्षेत्र: एआई-संचालित वित्तीय सेवाएं, रियल-टाइम सुरक्षित बैंकिंग, उन्नत धोखाधड़ी रोकथाम, क्रॉस-बॉर्डर डिजिटल भुगतान और किफायती वित्तीय समाधान।
2. नेशनल क्वांटम मिशन (NQM) की ऐतिहासिक उपलब्धि
- सफल क्रियान्वयन: नेशनल क्वांटम मिशन के तहत 10 साल में 2,000 किमी सुरक्षित क्वांटम संचार (Quantum Communication) का लक्ष्य रखा गया था।
- 3 साल में 1,000 किमी: भारत ने समय-सीमा से काफी आगे बढ़ते हुए महज तीन वर्षों में 1,000 किलोमीटर से अधिक सुरक्षित क्वांटम संचार नेटवर्क हासिल कर लिया है।

- चार पिलर: यह मिशन 4 वर्टिकल्स पर काम कर रहा है—क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम कम्युनिकेशन, क्वांटम सेंसिंग और क्वांटम मैटेरियल्स।
3. स्टार्टअप्स और रणनीतिक क्षेत्रों का विस्तार
- स्टार्टअप्स में उछाल: पिछले एक दशक में भारत में स्टार्टअप्स की संख्या 350 से बढ़कर लगभग 2.4 लाख हो गई है।
- स्पेस इकोनॉमी का विज़न: निजी क्षेत्र के प्रवेश के बाद भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था (Space Economy) वर्तमान में $9 बिलियन है। इसके इस दशक के अंत से पहले $45 बिलियन तक पहुंचने का अनुमान है।
- जीनोम इंडिया प्रोग्राम: बायोटेक क्षेत्र में फ्रंटियर साइंस का उदाहरण देते हुए बताया गया कि इस कार्यक्रम के तहत 10,000 व्यक्तियों का जीनोम अनुक्रमण पूरा हो चुका है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजन | तीसरा भारत अंतर्राष्ट्रीय फिनटेक महोत्सव (नई दिल्ली)। |
| मुख्य मंत्र/विज़न | Financial Inclusion to Financial Empowerment & Digital Payments to Digital Prosperity. |
| क्वांटम संचार उपलब्धि | 3 साल में >1,000 किमी सुरक्षित क्वांटम संचार स्थापित। |
| स्टार्टअप्स संख्या | लगभग 2.4 लाख (350 से बढ़कर)। |
| अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था लक्ष्य | $9 बिलियन से बढ़ाकर $45 बिलियन (दशक के अंत तक)। |
| जीनोम इंडिया लक्ष्य | 10,000 व्यक्तियों का जीनोम अनुक्रमण पूरा। |
I4C की ‘बॉस स्कैम’ चेतावनी: कंपनियों और सीए पर मंडराया साइबर खतरा
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, साइबर सुरक्षा, MHA, I4C और CERT-In।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): आंतरिक सुरक्षा, साइबर सुरक्षा की चुनौतियां, इंटरनेट नेटवर्क का दुरुपयोग और संचार नेटवर्क की सुरक्षा।
चर्चा में क्यों?
गृह मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करने वाले भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने हाल ही में कॉरपोरेट जगत और वित्तीय पेशेवरों के लिए ‘बॉस स्कैम’ को लेकर एक गंभीर चेतावनी जारी की है। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर व्हाट्सएप वेब टेकओवर और वित्तीय धोखाधड़ी से जुड़ी शिकायतों में आई तीव्र वृद्धि के बाद यह कदम उठाया गया है। इस स्कैम में जालसाज फर्जी बैंक स्टेटमेंट या आरबीआई/एमसीए के नोटिस के नाम से फाइलें भेजकर कंपनियों के अधिकारियों का व्हाट्सएप हैक करते हैं और फिर कर्मचारियों को पैसे ट्रांसफर करने के फर्जी निर्देश देते हैं।
मुख्य बिंदु: स्कैम का तरीका, तकनीकी विश्लेषण और रोकथाम
1. धोखाधड़ी का तरीका
- फर्जी फाइलें: जालसाज व्हाट्सएप या ईमेल पर
.zipफाइलें भेजते हैं। इन फाइलों के नाम “Statement of Account.zip”, “RBI.zip” या “MCA.zip” जैसे होते हैं। - मालवेयर अटैक: इस कम्प्रेस्ड फाइल में विंडोज की
.exeऔर.dllफाइलें होती हैं। कंप्यूटर में खोलते ही ट्रोजन मालवेयर इंस्टॉल हो जाता है, जो व्हाट्सएप वेब सत्र को हैक कर लेता है। - ‘बॉस स्कैम’ निष्पादन: हैक किए गए व्हाट्सएप से सीनियर एग्जीक्यूटिव बनकर वित्तीय कर्मचारियों को फर्जी खातों (Mule Accounts) में पैसे भेजने का मैसेज भेजा जाता है। यह वायरस खुद को शिकार के सभी कॉन्टैक्ट्स में स्वचालित रूप से फॉरवर्ड भी कर देता है।
2. I4C द्वारा उठाए गए ठोस कदम
- जन-जागरूकता व सूचना: I4C ने ‘I4CMHA-G’ एसएमएस हेडर से 58,000 से अधिक संभावित पीड़ितों को अलर्ट भेजा है।
- सुरक्षा उपाय: ‘सहयोग पोर्टल’ के जरिए C2 सर्वरों को जियो-ब्लॉक करके 10,000 से अधिक भारतीयों को साइबर हमले से बचाया गया है।
- एजेंसी समन्वय: मालवेयर के तकनीकी संकेतकों को CERT-In, माइक्रोसॉफ्ट और भारतीय एंटी-वायरस कंपनियों (Quick Heal, K7, Net Protector) के साथ साझा किया गया है।
3. सुरक्षा सलाह और बचाव के नियम
- स्वतंत्र पुष्टि: व्हाट्सएप या ईमेल पर मिलने वाले किसी भी फंड ट्रांसफर निर्देश की पुष्टि सीधे वॉइस कॉल या आमने-सामने की बातचीत से करें।
- लिंक्ड डिवाइसेज जांचें: व्हाट्सएप सेटिंग्स में जा कर अनजान या अप्रयुक्त व्हाट्सएप वेब सेशंस को तुरंत लॉग आउट करें।
- अज्ञात फाइलें न खोलें: आरबीआई या एमसीए कभी भी व्हाट्सएप पर कोई सॉफ्टवेयर, अपडेट या फाइलें नहीं भेजते।
- साइबर शिकायत दर्ज करें: किसी भी साइबर धोखाधड़ी की रिपोर्ट तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन 1930 या www.cybercrime.gov.in पर करें।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| नोडल संस्था | I4C (Indian Cyber Crime Coordination Centre) – गृह मंत्रालय। |
| हमले का नाम | बॉस स्कैम (CEO Impersonation Fraud)। |
| तकनीक | DLL Sideloading के जरिए व्हाट्सएप वेब हैक। |
| आधिकारिक SMS हेडर | I4CMHA-G (I4C अलर्ट भेजने के लिए)। |
| बचाव पोर्टल | सहयोग पोर्टल – C2 सर्वर ब्लॉक करने हेतु। |