15 August 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत देशभक्ति और जनभागीदारी को समर्पित हर घर तिरंगा अभियान (रसायन और पेट्रोरसायन विभाग), उभरती प्रौद्योगिकियों में युवाओं को सक्षम बनाने हेतु फ्यूचरस्किल्स प्राइम पहल, तथा देश में चिप डिजाइन पारिस्थितिकी तंत्र को गति देने वाले चिप्स टू स्टार्ट-अप्स (C2S) कार्यक्रम, कृषि उत्पादन में दक्षता लाने हेतु प्रौद्योगिकी-संचालित फसल निगरानी प्रणाली (AI, ड्रोन और रिमोट सेंसिंग का एकीकरण), रेल दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मंडल में ‘कवच 4.0’ प्रणाली को मंजूरी, तथा ऐतिहासिक सीख, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय सुरक्षा के परिदृश्य पर केंद्रित विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
हर घर तिरंगा अभियान: रसायन और पेट्रोरसायन विभाग द्वारा स्वतंत्रता दिवस समारोह
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय प्रतीक, हर घर तिरंगा अभियान, ‘वंदे मातरम’ का 150वाँ वर्ष, CIPET।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 1 & 2): आधुनिक भारतीय इतिहास (स्वतंत्रता संग्राम व उसके प्रतीक), राष्ट्रीय एकीकरण, नागरिक कर्तव्य और शासन में सहभागिता।
चर्चा में क्यों?
स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर रसायन और उर्वरक मंत्रालय के रसायन और पेट्रोरसायन विभाग (DCPC) ने नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का आयोजन किया। विभाग के सचिव तेजवीर सिंह के नेतृत्व में वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस वर्ष का यह समारोह ऐतिहासिक दृष्टिकोण से बेहद खास रहा, क्योंकि देश हमारे राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ की रचना के 150 वर्ष पूर्ण होने का गौरवशाली उत्सव मना रहा है। इस दौरान अधिकारियों ने नागरिकों से अपने घरों पर तिरंगा फहराने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।
मुख्य बिंदु: राष्ट्र निर्माण, वंदे मातरम का 150वाँ वर्ष और संस्थागत भागीदारी
1. ‘वंदे मातरम’ का 150वाँ वर्ष और राष्ट्रीय प्रतीक
- ऐतिहासिक संदर्भ: इस वर्ष राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 साल पूरे होने का अवसर है। यह गीत स्वतंत्रता आंदोलन का मुख्य प्रेरणा स्रोत रहा है।
- अभियान का संदेश: नागरिकों से अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने और राष्ट्र निर्माण में व्यक्तिगत योगदान का संकल्प लेने का आह्वान किया गया।
2. CIPET और अधीनस्थ संस्थानों की सक्रिय भूमिका
- व्यापक पहुंच: यह अभियान केवल मुख्यालय तक सीमित नहीं रहा। केंद्रीय पेट्रोरसायन इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (CIPET) के सभी स्वायत्त निकायों, क्षेत्रीय परिसरों और मैदानी कार्यालयों में तिरंगा रैलियाँ निकाली गईं।

- सामूहिक सहभागिता: विभाग के विभिन्न प्रभागों (रसायन, पेट्रोरसायन, वित्तीय और आर्थिक सलाहकार) के अधिकारियों और कर्मचारियों ने मिलकर राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| आयोजक विभाग | रसायन और पेट्रोरसायन विभाग (DCPC), रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय। |
| विशेष ऐतिहासिक अवसर | ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूरे होना। |
| शामिल प्रमुख संस्थान | CIPET (Central Institute of Petrochemicals Engineering & Technology)। |
| आयोजन स्थल | कर्तव्य भवन, नई दिल्ली तथा CIPET के देशव्यापी परिसर। |
फ्यूचरस्किल्स प्राइम: उभरती प्रौद्योगिकियों में डिजिटल कार्यबल का सशक्तीकरण
- प्रारंभिक परीक्षा: डिजिटल इंडिया कार्यक्रम, FutureSkills PRIME, MeitY, NASSCOM, IndiaAI मिशन, NIELIT और C-DAC।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): ई-गवर्नेंस, सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप, कौशल विकास, सूचना प्रौद्योगिकी (IT), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा रोजगार।
चर्चा में क्यों?
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने ‘फ्यूचरस्किल्स प्राइम’ कार्यक्रम की प्रगति रिपोर्ट जारी की। यह पहल MeitY और NASSCOM का एक संयुक्त प्रयास है, जो युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), बिग डेटा, साइबर सुरक्षा और सेमीकंडक्टर डिजाइन जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों में री-स्किल और अप-स्किल कर रही है। अब तक इस पोर्टल पर 34 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने पंजीकरण कराया है, जिनमें से 13 लाख से अधिक को सफलतापूर्वक प्रमाणित किया जा चुका है।
मुख्य बिंदु: डिजिटल कौशल, कार्यबल की स्थिति और पूर्वोत्तर भारत
1. भारत का वैश्विक डिजिटल परिदृश्य
- वैश्विक रैंकिंग: स्टैनफोर्ड एआई इंडेक्स के अनुसार, एआई अपनाने और इकोसिस्टम की तैयारी में भारत अग्रणी देशों में शामिल है।
- सेमीकंडक्टर प्रतिभा: वैश्विक सेमीकंडक्टर डिजाइन कार्यबल का लगभग 20% भाग भारतीय पेशेवरों का है।
2. फ्यूचरस्किल्स प्राइम की प्रमुख विशेषताएं
- नोडल संस्थाएं: यह MeitY और NASSCOM की एक संयुक्त पहल है। C-DAC और NIELIT इसके रिसोर्स सेंटर के रूप में कार्य कर रहे हैं।
- उद्योग-संरेखित पाठ्यक्रम: पोर्टल पर 500 से अधिक पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। इन्हें वैश्विक OEM (Original Equipment Manufacturer) पार्टनर्स के सहयोग से डिजाइन किया गया है।
- समावेशी डिजिटल विकास:
- कुल प्रमाणित उम्मीदवारों में 41% महिलाएं हैं।
- 86% से अधिक प्रतिभागी टियर-2 और टियर-3 शहरों से आते हैं।
- 32,700 से अधिक सरकारी अधिकारियों और 2,360 से अधिक प्रशिक्षकों को भी प्रशिक्षित किया जा चुका है।
3. राज्यवार आंकड़े (शीर्ष प्रदर्शनकर्ता)
- सर्वाधिक प्रमाणित उम्मीदवार (राज्य):
- तमिलनाडु (3,61,336)
- आंध्र प्रदेश (2,44,096)
- कर्नाटक (1,51,701)
- महाराष्ट्र (1,15,703)
- केरल (94,920)
4. पूर्वोत्तर और हिमालयी क्षेत्रों के लिए विशेष पहल
- राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क (NCrF): SSC-NASSCOM ने 17 राज्यों और 2,000 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों के साथ समझौता किया है, ताकि इन पाठ्यक्रमों को अकादमिक पाठ्यक्रम में शामिल किया जा सके।
- IndiaAI मिशन: इस मिशन के तहत NIELIT केंद्रों के माध्यम से 27 ‘IndiaAI डेटा और AI लैब’ स्थापित की गई हैं, जिनमें से 10 पूर्वोत्तर तथा 5 हिमालयी क्षेत्रों में हैं।
- NIELIT का नेटवर्क: NIELIT के कुल 56 केंद्रों में से 22 केंद्र पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थित हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| पहल का नाम | फ्यूचरस्किल्स प्राइम |
| कार्यान्वयन मंत्रालय | इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) + NASSCOM |
| योजना का प्रकार | केंद्रीय क्षेत्र की योजना (Central Sector Scheme) |
| सफलता का स्तर | 34 लाख+ पंजीकृत, 23 लाख+ प्रशिक्षित, 13 लाख+ प्रमाणित। |
| समावेशिता | 41% महिला भागीदारी, 86% टियर-2/3 शहरों से। |
| संबंधित संस्थान | C-DAC, NIELIT, NASSCOM, IndiaAI Mission। |
चिप्स टू स्टार्ट-अप्स (C2S) कार्यक्रम: भारत के सेमीकंडक्टर डिजाइन पारिस्थितिकी तंत्र का सुदृढ़ीकरण
- प्रारंभिक परीक्षा: C2S कार्यक्रम, सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला (SCL मोहाली), EDA टूल्स, MeitY की पहलें।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, स्वदेशी तकनीक, सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र, रोजगार और कौशल विकास।
चर्चा में क्यों?
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने ‘चिप्स टू स्टार्ट-अप्स’ (C2S) कार्यक्रम की नवीनतम प्रगति रिपोर्ट साझा की। भारत को सेमीकंडक्टर डिजाइन का वैश्विक केंद्र बनाने के उद्देश्य से शुरू किए गए इस कार्यक्रम के तहत अब तक 68,000 से अधिक छात्रों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। इसके अतिरिक्त, देश के विभिन्न संस्थानों में 254 चिप डिजाइन का सफल टेप-आउट किया गया है।
मुख्य बिंदु: C2S कार्यक्रम, उपलब्धियां और आंध्र प्रदेश का प्रदर्शन
1. C2S कार्यक्रम का मूल उद्देश्य
- मानव संसाधन का निर्माण: B.Tech, M.Tech और PhD स्तर पर 85,000 उद्योग-अनुकूल (Industry-ready) इंजीनियर तैयार करना।
- डिजाइन अवसंरचना तक पहुंच: अकादमिक संस्थानों और स्टार्ट-अप्स को महंगे Electronic Design Automation (EDA) टूल्स सुलभ कराना।
- कौशल अंतर को पाटना: देश में सेमीकंडक्टर डिजाइन के क्षेत्र में टैलेंट गैप को समाप्त करना।
2. राष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख उपलब्धियां
- छात्रों का प्रशिक्षण: 68,000+ छात्र अब तक प्रशिक्षित।
- संस्थागत पहुंच: देश के 332 शैक्षणिक संस्थानों को उन्नत EDA टूल्स (Synopsys, Cadence, Siemens EDA आदि) तक पहुंच प्रदान की गई।
- चिप टेप-आउट सफलता: कुल 254 चिप डिजाइन का टेप-आउट पूरा हुआ:
- 175 डिजाइन: SCL मोहाली (180 nm तकनीक नोड) में निर्मित।
- 79 डिजाइन: विदेशी सेमीकंडक्टर फाउंड्रीज में तैयार किए गए।
3. आंध्र प्रदेश राज्य की स्थिति और विशेष शोध परियोजनाएं
- संस्थागत भागीदारी: आंध्र प्रदेश के 23 शैक्षणिक संस्थानों को EDA टूल्स दिए गए (4.34 लाख+ टूल-आवर्स का उपयोग)।
- प्रमुख शोध परियोजनाएं (4 मुख्य केंद्र):
- IIT तिरुपति: क्रिप्टोग्राफिक अनुप्रयोगों के लिए सुरक्षित RISC-V प्रोसेसर का विकास।
- IIITDM कुरनूल: हाई-परफॉरमेंस कंप्यूटिंग के लिए हार्डवेयर एक्सीलेटर।
- NIT आंध्र प्रदेश: एज-IoT के लिए ऊर्जा-कुशल न्यूरोमॉर्फिक प्रोसेसर।
- श्री विष्णु इंजीनियरिंग कॉलेज फॉर विमेन (भीमावरम): एज-AI अनुप्रयोगों के लिए मेमोरी-कुशल सह-प्रसंस्करण इकाई (Co-processing unit)।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| कार्यक्रम का नाम | चिप्स टू स्टार्ट-अप्स (C2S) |
| नोडल मंत्रालय | इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) |
| कुल कार्यबल लक्ष्य | 85,000 विशेषज्ञ (B.Tech, M.Tech, PhD स्तर) |
| प्रशिक्षित छात्र | 68,000+ छात्र |
| EDA टूल्स प्राप्त संस्थान | 332 शैक्षणिक संस्थान |
| कुल टेप-आउट चिप्स | 254 (175 स्वदेशी SCL मोहाली में, 79 विदेशी फाउंड्रीज में) |
| प्रमुख स्वदेशी फाउंड्री | सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला (SCL), मोहाली (180 nm) |
प्रौद्योगिकी-संचालित फसल निगरानी प्रणाली: कृषि में AI, ड्रोन और रिमोट सेंसिंग का एकीकरण
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय पहलें (FASAL, WINDS, YESTECH, Krishi-DSS), Namo Drone Didi, AgriStack, BharatVistaar, NPSS।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): कृषि में प्रौद्योगिकी का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष अनुप्रयोग, ई-प्रौद्योगिकी का किसानों की सहायता में योगदान, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI), आपदा प्रबंधन और फसल बीमा।
चर्चा में क्यों?
कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में प्रौद्योगिकी-संचालित फसल निगरानी प्रणालियों (Technology-driven Crop Monitoring Systems) के क्रियान्वयन की अद्यतन जानकारी साझा की। भारत सरकार उपग्रह (Satellites), ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), रिमोट सेंसिंग, GIS और IoT का उपयोग कर कृषि क्षेत्र को डिजिटल और सटीक (Precision Farming) बना रही है। इस विस्तृत रिपोर्ट में प्रमुख डिजिटल पहलों और उनके प्रत्यक्ष लाभों को रेखांकित किया गया है।
मुख्य बिंदु: रिमोट सेंसिंग, AI, ड्रोन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का एकीकरण
1. रिमोट सेंसिंग और GIS आधारित प्रमुख पहलें
- FASAL (फसल): यह राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर कटाई से पहले उत्पादन का पूर्वानुमान लगाता है। multispectral और SAR उपग्रह डेटा का उपयोग करके 20 राज्यों में 11 प्रमुख फसलों (धान, गेहूं, जूट, कपास, गन्ना, सोयाबीन, तूर, चना, सरसों, मसूर और रबी ज्वार) को कवर करता है।
- MNCFC (महालनोबिस राष्ट्रीय फसल पूर्वानुमान केंद्र): वनस्पति स्थिति, मृदा नमी, सूखा, बाढ़ और ओलावृष्टि के प्रभाव का रिमोट-आधारित डेटा नियमित जारी करता है।
- Krishi-DSS (कृषि निर्णय सहायता प्रणाली): यह भू-स्थानिक (Geospatial) और गैर-भू-स्थानिक डेटा को एकीकृत करता है। इसका उपयोग फसल विविधीकरण, सूखा/बाढ़ निगरानी और बीमा दावों के त्वरित निपटान के लिए किया जाता है।
- YESTECH: PMFBY के तहत यह पहल ग्राम पंचायत स्तर पर उपग्रह-आधारित उपज मॉडल द्वारा धान, गेहूं और सोयाबीन (12 राज्यों में) के दावों का निपटान करती है।
- WINDS: मौसम बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए ब्लॉक स्तर पर स्वचालित मौसम स्टेशन (AWS) और ग्राम पंचायत स्तर पर स्वचालित वर्षा गेज (ARG) स्थापित करने की पहल (वर्तमान में 7 राज्यों में)।
2. कृषि में ड्रोन तकनीक का उपयोग
- SMAM (कृषि यांत्रिकीकरण पर उप-मिशन):
- पूर्वोत्तर राज्यों के कृषि स्नातकों, छोटे व सीमांत किसानों को ‘किसान ड्रोन’ खरीदने पर 50% वित्तीय सहायता।
- अन्य किसानों और कस्टम हायरिंग सेंटरों (CHC) की स्थापना के लिए 40% वित्तीय सहायता।
- योजना के तहत कुल 2,122 ड्रोन स्वीकृत/वितरित।
- नमो ड्रोन दीदी:
- महिला स्वयं सहायता समूहों (SHGs) को किराए पर ड्रोन सेवाएं देने के लिए सक्षम बनाना (खाद व कीटनाशक छिड़काव)।
- उर्वरक विभाग द्वारा 1,094 ड्रोन वितरित; सभी सदस्यों को DGCA से मान्यता प्राप्त संस्थानों (RPTOs) में प्रशिक्षण।
3. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल पहलों का विस्तार
- NPSS (राष्ट्रीय कीट निगरानी प्रणाली): AI और मशीन लर्निंग का उपयोग कर कीटों का पता लगाता है। किसान कीट की तस्वीर खींचकर सलाह प्राप्त कर सकते हैं। वर्तमान में 73 फसलों और 436 कीटों को कवर करता है (35,565 से अधिक सलाह जारी)।
- भारत विस्तार: बहुभाषी AI-संचालित डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)। यह चैटबॉट और फोन लाइन के माध्यम से 18 केंद्रीय योजनाओं, मौसम, मंडी भाव और मृदा स्वास्थ्य पर सलाह देता है। अब तक 5.9 लाख से अधिक किसान लाभान्वित।
- KISAN SARATHI: ICAR द्वारा विकसित ICT मंच, जिसके माध्यम से कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) किसानों को सलाह देते हैं। 2.97 करोड़ से अधिक किसान पंजीकृत।
4. AgriStack और डिजिटल एग्री मिशन
- डिजिटल सेवाएं: PM-KISAN के तहत DBT लक्ष्यीकरण, FCI द्वारा MSP खरीद, उर्वरक बुकिंग और PMFBY दावों के त्वरित पारदर्शी निपटान में सहायता।
- त्वरित सेवाएं: महाराष्ट्र में आपदा राहत वितरण, 30 मिनट के भीतर किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ऋण स्वीकृति।
- कृषि मैपर: राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन के तहत प्राकृतिक खेतों और क्लस्टरों का जियो-रेफरेंसिंग डेटा कैप्चर करता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| पहल / प्रणाली | नोडल एजेंसी / मंत्रालय | मुख्य कार्य / विशेषता |
| FASAL | कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय | 20 राज्यों में 11 फसलों के लिए उपग्रह आधारित पूर्व-कटाई पूर्वानुमान। |
| YESTECH | PMFBY के अंतर्गत | ग्राम पंचायत स्तर पर उपग्रह से उपज का अनुमान। |
| WINDS | PMFBY के अंतर्गत | ब्लॉक (AWS) और पंचायत स्तर (ARG) पर मौसम स्टेशन नेटवर्क। |
| NPSS | कृषि मंत्रालय | AI-आधारित कीट पहचान प्रणाली (73 फसलें, 436 कीट)। |
| Namo Drone Didi | केंद्रीय क्षेत्र की योजना | SHG महिलाओं को ड्रोन पायलट प्रशिक्षण व 1,094 ड्रोन वितरित। |
| BharatVistaar | कृषि हेतु DPI | AI-संचालित बहुभाषी किसान परामर्श मंच। |
| Krishi MApper | राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन | प्राकृतिक कृषि क्लस्टरों का जियो-टैगिंग ऐप। |
पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मंडल में ‘कवच 4.0’ प्रणाली को मंजूरी
- प्रारंभिक परीक्षा: कवच प्रणाली (Kavach 4.0), स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (ATP), रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (RFID), LTE नेटवर्क।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): बुनियादी ढांचा (रेलवे), स्वदेशी तकनीक, तकनीकी प्रगति का सुरक्षा पर प्रभाव, आपदा प्रबंधन।
चर्चा में क्यों?
भारतीय रेल ने पूर्वोत्तर रेलवे (NER) के इज्जतनगर मंडल में 660 मार्ग किलोमीटर (Route Km) पर कवच संस्करण 4.0 लागू करने की मंजूरी दी। ₹295 करोड़ की अनुमानित लागत वाली यह परियोजना “भारतीय रेलवे के शेष खंडों पर LTE संचार बैकबोन के साथ कवच का प्रावधान” अम्रेला कार्य के तहत स्वीकृत की गई है।
मुख्य बिंदु: तकनीक, कार्यप्रणाली और परिचालन लाभ
1. प्रोजेक्ट का दायरा और बैकबोन
- लागत व विस्तार: ₹295 करोड़ का बजट। इज्जतनगर मंडल का 660 RKM क्षेत्र कवर।
- सपोर्ट तकनीक: LTE (Long-Term Evolution) संचार बैकबोन का उपयोग होगा। इससे ट्रेनों और स्टेशनों के बीच रीयल-टाइम डेटा ट्रांसफर आसान होगा।
2. कवच प्रणाली की कार्यप्रणाली
- SPAD रोकथाम: यह सिग्लन पासिंग ऐट डेंजर की घटनाओं को रोकता है।
- स्वचालित ब्रेक: लोको पायलट द्वारा सिग्नल अनदेखा करने पर सिस्टम खुद ब्रेक लगा देता है।
- आमने-सामने की टक्कर से सुरक्षा: एक ही पटरी पर दो ट्रेनें आने पर यह तकनीक टकराने से पहले स्वतः ब्रेक लगाती है।
3. कठिन मौसम में निर्बाध परिचालन
- घने कोहरे में मदद: दृश्यता कम होने पर भी ट्रेनें अधिकतम अनुमेय गति (Maximum Permissible Speed) से सुरक्षित चल सकती हैं।
- विश्वसनीयता: मानवीय त्रुटि की गुंजाइश खत्म होती है और रेल नेटवर्क की क्षमता बढ़ती है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| प्रणाली का नाम | कवच 4.0 |
| स्वीकृत क्षेत्र | इज्जतनगर मंडल, पूर्वोत्तर रेलवे (660 RKM) |
| परियोजना लागत | ₹295 करोड़ |
| मूल तकनीक | स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन (ATP) प्रणाली |
| संचार नेटवर्क | LTE (Long-Term Evolution) पर आधारित |
| विकासकर्ता निकाय | RDSO (अनुसंधान डिजाइन और मानक संगठन) |
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस: ऐतिहासिक सीख, सभ्यतागत क्षति और राष्ट्रीय सुरक्षा
- प्रारंभिक परीक्षा: विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस (14 अगस्त), ICHR, भारत का स्वतंत्रता संग्राम व विभाजन, महत्वपूर्ण सांस्कृतिक व पुरातात्विक स्थल।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 1 & 2): आधुनिक भारतीय इतिहास (विभाजन और उसके परिणाम), आंतरिक सुरक्षा, राष्ट्रीय एकीकरण, सीमा प्रबंधन और विदेश नीति पर प्रभाव।
चर्चा में क्यों?
‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ (Partition Horrors Remembrance Day) के अवसर पर भारत के उप-राष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने दिल्ली विश्वविद्यालय में आयोजित एक राष्ट्रीय संगोष्ठी को संबोधित किया। यह संगोष्ठी ‘सेंटर फॉर इंडिपेंडेंस एंड पार्टीशन स्टडीज’ (DU) और भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद (ICHR) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित की गई थी। इसका विषय ‘भारत का विभाजन – विस्थापन, पृथक्करण और पुनर्वास की एक कथा’ था।
मुख्य बिंदु: विभाजन के दीर्घकालिक प्रभाव, सभ्यतागत क्षति और राष्ट्रीय सीखें
1. मानव इतिहास का सबसे बड़ा विस्थापन
- अभूतपूर्व त्रासदी: विभाजन केवल राजनीतिक सीमाओं का रेखांकन नहीं था। यह मानव इतिहास के सबसे बड़े सामूहिक विस्थापनों में से एक था।
- सांप्रदायिक सौहार्द का संदेश: स्मृति दिवस मनाने का उद्देश्य पुरानी कड़वाहट या घावों को हरा करना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और शांति के महत्व को समझना है।
2. सभ्यतागत और सांस्कृतिक विरासत का विभाजन
- हजारों साल पुरानी विरासत का विखंडन: जल्दबाजी में खींची गई सीमाओं ने एक अटूट सभ्यतागत भूभाग को बांट दिया।
- प्रमुख सांस्कृतिक व पुरातात्विक स्थलों तक पहुंच बाधित:
- धार्मिक व आध्यात्मिक स्थल: ननकाना साहिब, करतारपुर साहिब, प्राचीन शक्तिपीठ और सिंधु नदी क्षेत्र।
- पुरातात्विक धरोहर: हड़प्पा, मोहनजोदड़ो और तक्षशिला जैसे महत्वपूर्ण स्थल भारत के भौगोलिक क्षेत्र से अलग हो गए।
3. राष्ट्रीय सुरक्षा और आधुनिक विदेश नीति पर असर
- सीमा विवाद और सुरक्षा चुनौतियां: सीमाओं के गलत और जल्दबाजी में हुए सीमांकन ने ऐसे विवाद पैदा किए, जो आज भी भारत की रक्षा नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा को प्रभावित करते हैं।

- नेतृत्व और पूर्व तैयारी की सीख: निर्णय लेते समय जनसुरक्षा प्राथमिक होनी चाहिए। नीतिगत फैसलों के लिए पर्याप्त पूर्व तैयारी आवश्यक है।
4. ऐतिहासिक अभिलेखीकरण और नई पीढ़ी
- सच्चाई का दस्तावेज: भावी पीढ़ियों को पाठ्यपुस्तकों से इतर विभाजन की वास्तविक मानवीय कीमत का पता होना चाहिए।
- मौखिक इतिहास (Oral History): डीयू का ‘सेंटर फॉर इंडिपेंडेंस एंड पार्टीशन स्टडीज’ (स्थापना 2023) अब तक 100 से अधिक विभाजन पीड़ितों के मौखिक संस्मरणों को रिकॉर्ड कर चुका है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| दिवस का नाम | विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस (14 अगस्त) |
| आयोजक संस्थाएं | ICHR (भारतीय इतिहास अनुसंधान परिषद) और दिल्ली विश्वविद्यालय |
| विशेष अध्ययन केंद्र | सेंटर फॉर इंडिपेंडेंस एंड पार्टीशन स्टडीज (DU – स्थापित 2023) |
| विभाजन से प्रभावित प्रमुख हड़प्पा स्थल | हड़प्पा (साहीवाल, पंजाब), मोहनजोदड़ो (सिंध), तक्षशिला (रावलपिंडी) |