19 August 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत वैश्विक पर्यावरण संरक्षण पहलों को साझा करने हेतु 12वीं ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक और 4 ज्ञान संकलनों (Knowledge Compendiums) का अनावरण, एनसीसी कैडेट्स के साहसिक अभियान NCC ऑल इंडिया गर्ल्स हाई एल्टीट्यूड ट्रेक (‘अपराजिता – पारांग ला 2026’), खेल जगत में उत्कृष्ट योगदान देने वाले खिलाड़ियों के लिए राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2025 की घोषणा, वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बढ़ाने हेतु छत्तीसगढ़ में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम, देश में प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक शहरों के निर्माण के लिए NICDIT की तीसरी शीर्ष बैठक, तथा भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनाने वाली ECMS योजना के तहत 38 नए संयंत्रों के शुभारंभ का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
12वीं ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक: 4 ज्ञान संकलनों का अनावरण
- प्रारंभिक परीक्षा: BRICS, मिशन LiFE, EPR ढांचा, इंटीग्रेटेड वाइल्डफायर मैनेजमेंट, सर्कुलर इकोनॉमी।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय संस्थान और समूह, पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, सतत विकास, जैव विविधता हानि और मरुस्थलीकरण।
चर्चा में क्यों?
भारत की ब्रिक्स (BRICS) अध्यक्षता 2026 के तहत नई दिल्ली में आयोजित 12वीं ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ 4 नए ज्ञान संकलन (Knowledge Compendiums) जारी किए। ये दस्तावेज सतत जीवन शैली (मिशन LiFE आधारित), एकीकृत दावानल प्रबंधन (Wildfire Management), लैंडस्केप-आधारित हरित पहलों और ईपीआर (EPR) व सर्कुलर इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों में ब्रिक्स देशों के सर्वश्रेष्ठ अनुभवों और तकनीकी समाधानों को साझा करते हैं।
मुख्य बिंदु: लॉन्च किए गए 4 प्रमुख ज्ञान संकलन
1. सतत जीवन शैली पर संकलन
- उद्देश्य: ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका और यूएई जैसे ब्रिक्स देशों के सफल केस स्टडीज को एक जगह लाना।
- भारत का योगदान: भारत ने इसमें मिशन LiFE (Lifestyle for Environment), पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम और संभव अभियान को शामिल किया है।
- फोकस: यह नागरिक-केंद्रित व्यवहार परिवर्तन, सर्कुलर इकोनॉमी और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन पर केंद्रित है।
2. एकीकृत दावानल प्रबंधन
- चुनौती: जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान और सूखे के कारण दावानल (Wildfires) का जोखिम तेजी से बढ़ा है।
- दृष्टिकोण: यह संकलन ‘निवारण से तैयारी, और त्वरित चेतावनी से त्वरित कार्रवाई’ के सिद्धांत पर काम करता है।
- समाधान: स्थानीय/स्वदेशी ज्ञान, शुरुआती चेतावनी प्रणाली (Early Warning Systems) और अत्याधुनिक तकनीक का मिलाजुला प्रयोग।
3. लैंडस्केप-आधारित हरित दृष्टिकोण
- अंतर-संबद्ध चुनौतियां: भूमि क्षरण (Land Degradation), मरुस्थलीकरण, जैव विविधता का नुकसान और जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं का एक साथ समाधान निकालना।

- रणनीति: पारिस्थितिकी तंत्र की बहाली (Ecosystem Restoration) के साथ-साथ समुदाय-आधारित आजीविका में सुधार करना।
4. विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) और सर्कुलर इकोनॉमी
- संसाधन दक्षता: वेस्ट मैनेजमेंट में डिजिटल ट्रैसेबिलिटी (Digital Traceability) और रीसाइक्लिंग प्रमाणन लागू करना।
- भारत का मॉडल: भारत के बाजार-आधारित EPR ढांचे (Extended Producer Responsibility) और डिजिटल वेस्ट-एक्सचेंज प्लेटफॉर्म का प्रदर्शन।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| बैठक का क्रम | 12वीं ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक (12th BRICS Environment Ministers Meeting) |
| अध्यक्षता (2026) | भारत (India) |
| लॉन्च कुल संकलन | 4 नॉलेज प्रोडक्ट्स (Knowledge Compendiums) |
| भारत की प्रमुख पहलें | मिशन LiFE, SAMBHAV अभियान, केंद्रीय डिजिटल EPR प्लेटफॉर्म |
| सहभागी देश | भारत, ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका, यूएई |
NCC ऑल इंडिया गर्ल्स हाई एल्टीट्यूड ट्रेक: ‘अपराजिता – पारांग ला 2026’
- प्रारंभिक परीक्षा: पारांग ला पास, स्पीति घाटी, चांगथांग पठार, NCC, ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 1 & 2): भारत का भौतिक भूगोल (दर्रे और नदियां), महिला सशक्तिकरण (नारी शक्ति), युवा विकास और राष्ट्रीय एकीकरण।
चर्चा में क्यों?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) के फ्लैगशिप अभियान ‘अपराजिता – पारांग ला 2026’ (All India Girls High Altitude Long Trek) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह 30 दिवसीय अभियान भारत के सबसे चुनौतीपूर्ण और उच्च ऊंचाई वाले ट्रेकिंग मार्गों में से एक पर आयोजित किया जा रहा है। इसका नेतृत्व तीनों सेनाओं (थल, जल और नभ) की महिला अधिकारी कर रही हैं।
मुख्य बिंदु: अभियान की प्रमुख विशेषताएं और सामरिक पहलू
1. अभियान का स्वरूप और मार्ग
- भागीदारी: इस ट्रेक में भारत भर के विभिन्न NCC निदेशालयों से चयनित 28 बालिका कैडेट (Girl Cadets) भाग ले रही हैं। कैडेटों की औसत आयु 19 वर्ष है, जिसमें सबसे कम उम्र की प्रतिभागी 16.5 वर्ष की है।
- भौगोलिक दायरा: यह दल 250 किमी लंबा ट्रेक 30 दिनों में पूरा करेगा। यह मार्ग हिमाचल प्रदेश की स्पीति घाटी (Spiti Valley) को लद्दाख के चांगथांग क्षेत्र से जोड़ता है।
- पारांग ला दर्रा: ट्रेकिंग दल 5,578 मीटर (18,300 फीट) की ऊंचाई पर स्थित पारांग ला पास को पार करेगा।
- प्रमुख पड़ाव: इस ट्रेक के मुख्य स्थलों में किब्बर, डुमला, थलटाक, बोंग्रोजेन, पारांग ला पास, डाक कारज़ोंग, नोरबू सुमडो, कियांगडोम और कोरज़ोक शामिल हैं।
2. अभियान के रणनीतिक और सामाजिक उद्देश्य
- नारी शक्ति का प्रदर्शन: रक्षा मंत्री ने इसे देश की महिलाओं के साहस, दृढ़ संकल्प और बढ़ती क्षमताओं का प्रतीक बताया।
- पर्यावरण और शून्य-अपशिष्ट दृष्टिकोण: अभियान के दौरान हिमालयी पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखने के लिए ‘जीरो-वेस्ट’ दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया गया है।

- एक भारत, श्रेष्ठ भारत: विभिन्न भाषाओं, संस्कृतियों और पृष्ठभूमियों के कैडेटों की एक साझा मिशन में भागीदारी राष्ट्रीय एकीकरण का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करती है।
- तैयारी चरण: अंतिम चयन से पहले कैडेटों के लिए भाभा-पिन वैली क्षेत्र में एक अनुकूलन (Acclimatisation) ट्रेक आयोजित किया गया था।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| अभियान का नाम | अपराजिता – पारांग ला 2026 |
| आयोजक संस्था | राष्ट्रीय कैडेट कोर (NCC) |
| पारांग ला की ऊंचाई | 5,578 मीटर (18,300 फीट) |
| भौगोलिक जुड़ाव | स्पीति घाटी (हिमाचल प्रदेश) – चांगथांग क्षेत्र (लद्दाख) |
| दूरी व समय | 250 किमी लंबा ट्रेक, 30 दिन की अवधि |
| नेतृत्व | तीनों सेनाओं की महिला अधिकारी + 28 बालिका कैडेट |
राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2025: विजेताओं की घोषणा
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय खेल पुरस्कार, अर्जुन पुरस्कार, द्रोणाचार्य पुरस्कार, राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): खेल नीति, सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप, मानव संसाधन विकास।
चर्चा में क्यों?
युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय ने ‘राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2025’ के विजेताओं की आधिकारिक घोषणा की। सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस (सेवानिवृत्त) अरुण कुमार मिश्रा की अध्यक्षता वाली चयन समिति की सिफारिशों के आधार पर सरकार ने इन सम्मानों को अंतिम रूप दिया। इस बार विभिन्न श्रेणियों में उत्कृष्ट एथलीटों, प्रशिक्षकों और खेल विकास में योगदान देने वाले संगठनों को उनके निरंतर प्रदर्शन और खेल भावना के लिए चुना गया है। इन पुरस्कारों में अर्जुन पुरस्कार, द्रोणाचार्य पुरस्कार और राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार जैसे प्रमुख सम्मान शामिल हैं।
मुख्य बिंदु: खेल पुरस्कारों का श्रेणीवार वर्गीकरण
1. उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए अर्जुन पुरस्कार 2025
- पात्रता मापदंड: पिछले 4 वर्षों में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन, नेतृत्व क्षमता, खेल भावना और अनुशासन।
- प्रमुख विजेता:
| खेल | नाम |
| एथलेटिक्स | तेजस्विन शंकर, मोहम्मद अजमल वी, प्रियंका गोस्वामी |
| बैडमिंटन | ट्रीसा जॉली, पुलेला गायत्री गोपीचंद |
| शतरंज | विदित संतोष गुजराती, दिव्या जितेंद्र देशमुख |
| हॉकी | लालरेमसियामी, राजकुमार पाल |
| कबड्डी | सुरजीत, पूजा |
| पैरा-स्पोर्ट्स | रुद्रांश खंडेलवाल (पैरा-शूटिंग), एकता भ्यान (पैरा-एथलेटिक्स) |
| अन्य | नरेंद्र (बॉक्सिंग), धनुष श्रीकांत (डेफ शूटिंग), अरविंद सिंह (रोइंग), अखिल शेवरान (शूटिंग) |
2. अर्जुन पुरस्कार (लाइफटाइम श्रेणी)
- पात्रता मापदंड: सक्रिय खेल जीवन से सेवानिवृत्ति के बाद भी खेल के विकास में योगदान देने वाले खिलाड़ी।
- विजेता: आई. अरुमायनायगम (फुटबॉल)।
3. द्रोणाचार्य पुरस्कार 2025 (प्रशिक्षकों के लिए)
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर खिलाड़ियों को उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए तैयार करने वाले कोचों को यह पुरस्कार दिया जाता है:
- नियमित श्रेणी (Regular Category):
- परवीर सिंह (एथलेटिक्स)
- छोटे लाल यादव (बॉक्सिंग)
- नेहा नंदकुमार चव्हाण (शूटिंग)
- लाइफटाइम श्रेणी (Lifetime Category):
- धर्मेंद्र सिंह यादव (बॉक्सिंग)
- वीरेंद्र कुमार (कुश्ती)
4. राष्ट्रीय खेल प्रोत्साहन पुरस्कार 2025
- पात्रता मापदंड: खेल के प्रचार और विकास में अहम भूमिका निभाने वाले कॉर्पोरेट निकाय या NGO।
- विजेता संस्था: आर्मी पैरालंपिक नोड, पुणे।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| पुरस्कार प्रदाता | युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय (MoYAS) |
| चयन समिति अध्यक्ष | जस्टिस (सेवानिवृत्त) अरुण कुमार मिश्रा |
| आवेदन प्रक्रिया | समर्पित ऑनलाइन पोर्टल से स्व-आवेदन (Self-apply) |
| अर्जुन पुरस्कार का आधार | पिछले 4 वर्षों का निरंतर प्रदर्शन |
| लाइफटाइम अर्जुन पुरस्कार | आई. अरुमायनायगम (फुटबॉल) |
| खेल प्रोत्साहन विजेता | आर्मी पैरालंपिक नोड, पुणे |
छत्तीसगढ़ में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम: डिजिटल बुनियादी ढांचे का विस्तार
- प्रारंभिक परीक्षा: डिजिटल भारत निधि (DBN), संशोधित भारतनेट कार्यक्रम (ABP), नेटवर्क टोपोलॉजी (लीनियर बनाम रिंग टोपोलॉजी)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): ई-गवर्नेंस, सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप, बुनियादी ढांचा (दूरसंचार), समावेशी विकास।
चर्चा में क्यों?
नई दिल्ली के संचार भवन में छत्तीसगढ़ में संशोधित भारतनेट कार्यक्रम (Amended BharatNet Program – ABP) को लागू करने के लिए एक बहुपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता दूरसंचार विभाग (DoT) के तहत डिजिटल भारत निधि (DBN), छत्तीसगढ़ सरकार, छत्तीसगढ़ स्टेट भारतनेट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (CSBIL), BSNL और चिप्स (CHiPS) के बीच राज्य-नेतृत्व मॉडल (State-led Model) के तहत संपन्न हुआ।
मुख्य बिंदु: परियोजना का दायरा, वित्तीय कवरेज और कार्यान्वयन
1. वित्तीय आवंटन और कवरेज
- वित्तीय सहायता: केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ में इस कार्यक्रम के रोलआउट के लिए ₹3,942 करोड़ की वित्तीय सहायता मंजूर की है।
- ग्राम पंचायत कवरेज: इसके तहत कुल 11,682 ग्राम पंचायतों को कवर किया जाएगा।
- अंतिम छोर की कनेक्टिविटी (Last-Mile Connectivity): मांग के आधार पर 8,328 गांवों को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी, जिससे 3 लाख से अधिक ग्रामीण फाइबर कनेक्शन सक्षम होंगे।
2. नेटवर्क अपग्रेडेशन और टोपोलॉजी
- रिंग टोपोलॉजी में बदलाव: पहले चरण की 4,048 ग्राम पंचायतों को लीनियर (Linear) टोपोलॉजी से हटाकर रिंग टोपोलॉजी में अपग्रेड किया जाएगा, जिससे नेटवर्क की विश्वसनीयता बनी रहे।
- चरण II और नई पंचायतें: इसमें चरण II की 5,964 ग्राम पंचायतें और हाल ही में बनाई गई 1,670 नई ग्राम पंचायतें शामिल हैं।
- कार्यान्वयन एजेंसी: छत्तीसगढ़ में यह परियोजना CSBIL (छत्तीसगढ़ स्टेट भारतनेट इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड) के माध्यम से लागू की जाएगी।
3. सामाजिक-आर्थिक प्रभाव
- यह पहल दूरस्थ क्षेत्रों में ई-गवर्नेंस, ऑनलाइन शिक्षा, टेलीमेडिसिन, डिजिटल भुगतान और नागरिक-केंद्रित सेवाओं की पहुंच को सुगम बनाएगी।
- यह वामपंथी उग्रवाद (LWE) से प्रभावित और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल विभाजन (Digital Divide) को समाप्त करने में मदद करेगी।
डिजिटल भारत निधि (DBN) क्या है?
- वैधानिक पृष्ठभूमि: पूर्व में इसे सार्वभौमिक सेवा दायित्व निधि (USOF) के नाम से जाना जाता था, जिसे भारतीय तार (संशोधन) अधिनियम, 2003 के तहत 1 अप्रैल 2002 से स्थापित किया गया था।
- नया नामकरण: दूरसंचार अधिनियम, 2023 के तहत USOF का नाम बदलकर डिजिटल भारत निधि (DBN) कर दिया गया।
- मंत्रालय: यह संचार मंत्रालय के दूरसंचार विभाग (DoT) का एक संबद्ध कार्यालय (Attached Office) है।
- जनादेश: कम सेवा वाले ग्रामीण, दूरस्थ और शहरी क्षेत्रों में दूरसंचार सेवाओं की पहुंच और वितरण को बढ़ावा देना।
- प्रमुख परियोजनाएं: भारतनेट, 4G सेचुरेशन प्रोजेक्ट, आकांक्षी जिलों और वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल सेवाएं, हिमालयी/सीमावर्ती क्षेत्र और पूर्वोत्तर क्षेत्र की परियोजनाएं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| कार्यक्रम का नाम | संशोधित भारतनेट कार्यक्रम (ABP) |
| मंजूरी तिथि (कैबिनेट) | 4 अगस्त 2023 |
| छत्तीसगढ़ के लिए फंड | ₹3,942 करोड़ |
| ग्राम पंचायत कवरेज | 11,682 ग्राम पंचायतें (4,048 रिंग टोपोलॉजी में अपग्रेड) |
| DBN की उत्पत्ति | दूरसंचार अधिनियम, 2023 द्वारा USOF का नया नाम |
राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास: NICDIT की तीसरी शीर्ष बैठक
- प्रारंभिक परीक्षा: NICDIT, NICDC, ‘भव्य’ योजना, औद्योगिक गलियारे, पीएम गतिशक्ति।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): बुनियादी ढांचा (औद्योगिक गलियारे), विनिर्माण क्षेत्र, पीएम गतिशक्ति फ्रेमवर्क, रोजगार और समावेशी विकास।
चर्चा में क्यों?
नई दिल्ली में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास और कार्यान्वयन ट्रस्ट (NICDIT) की तीसरी शीर्ष निगरानी प्राधिकरण (Apex Monitoring Authority) बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास कार्यक्रम (NICDP) और ‘भव्य’ योजना की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक का मुख्य ध्यान परियोजनाओं की केवल मंजूरी देने के बजाय बुनियादी ढांचे के तेजी से निर्माण, भूमि आवंटन और उत्पादन शुरू करने पर रहा।
मुख्य बिंदु: बैठक के प्रमुख निर्णय और योजनाएं
1. FIRE कॉरिडोर्स और ‘टीम इंडिया’ दृष्टिकोण
- FIRE की अवधारणा: माल ढुलाई (Freight), औद्योगिक विकास (Industrial Development), रेलवे और एक्सप्रेसवे के एकीकरण (Convergence) को FIRE कॉरिडोर्स का नाम दिया गया।
- स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) सशक्तिकरण: राज्यों से अपील की गई कि वे परियोजना SPVs को पर्याप्त योजना, विकास और नगर पालिका शक्तियां दें ताकि निर्णय लेने में देरी न हो।
2. ‘भव्य’ योजना
- पूरा नाम: भारत औद्योगिक विकास योजना।
- लक्ष्य: देश भर में 100 प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्कों का विकास करना।
- वर्तमान स्थिति: प्रथम चरण में 20 परियोजनाओं के लक्ष्य के मुकाबले राज्यों से 87 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जो इसकी भारी मांग को दर्शाता है।
- लागू करने वाली संस्था: NICDC को इस योजना के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एजेंसी (PMA) नामित किया गया है।
3. NICDP की वर्तमान प्रगति
- विस्तार: वर्तमान में 13 राज्यों में 7 औद्योगिक गलियारों के तहत 20 स्वीकृत परियोजनाएं शामिल हैं।
- उत्पादन चरण: चार इंडस्ट्रियल स्मार्ट सिटी—धोलेरा, शेंड्रा-बिडकिन, ग्रेटर नोएडा और विक्रम उद्योगपुरी—उत्पादन चरण में प्रवेश कर चुकी हैं।

- निवेश एवं रोजगार: 5,348 एकड़ में 469 भूखंड आवंटित किए जा चुके हैं। इसमें ₹2.21 लाख करोड़ के संभावित निवेश और 1.29 लाख नौकरियों का सृजन अनुमानित है।
NICDIT और NICDC का संस्थागत ढांचा
NICDIT (National Industrial Corridor Development and Implementation Trust)
- प्रकृति: देश में औद्योगिक गलियारों के समन्वित विकास के लिए गठित एक शीर्ष ट्रस्ट।
- प्रशासनिक नियंत्रण: उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (DPIIT), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय।
- भूमिका: औद्योगिक नोड्स में ट्रंक इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण का समर्थन करना और ‘भव्य’ योजना में इक्विटी सपोर्ट देना।
NICDC (National Industrial Corridor Development Corporation)
- प्रकृति: DPIIT के तहत एक विशेष प्रयोजन वाहन (SPV)।
- भूमिका: औद्योगिक गलियारा परियोजनाओं के कार्यान्वयन का समन्वय करना और ‘भव्य’ योजना की कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में कार्य करना।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| शीर्ष संस्था | NICDIT (DPIIT, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत) |
| ‘भव्य’ योजना | 100 प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक पार्क विकसित करने का लक्ष्य |
| PMA (भव्य योजना) | NICDC (नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) |
| उत्पादक स्मार्ट सिटीज | धोलेरा, शेंड्रा-बिडकिन, ग्रेटर नोएडा, विक्रम उद्योगपुरी |
| FIRE कॉरिडोर्स | Freight + Industrial Development + Railways + Expressways |
ECMS योजना से इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को गति: 38 संयंत्र शुरू, आत्मनिर्भरता की ओर कदम
- प्रारंभिक परीक्षा: इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (ECMS), MeitY, आत्मनिर्भर भारत, स्वादेशी मूल्य श्रृंखला।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): भारतीय अर्थव्यवस्था और औद्योगिकीकरण, विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector), आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) का सुदृढ़ीकरण, रोजगार सृजन।
चर्चा में क्यों?
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने ‘इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना’ (ECMS) के तहत 31 नए प्रस्तावों को मंजूरी दी। इसमें ₹6,844 करोड़ का संभावित निवेश शामिल है। नई दिल्ली में ELCINA के सहयोग से आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि ECMS के तहत अब तक मंजूर 106 परियोजनाओं में से 38 संयंत्रों में उत्पादन शुरू हो चुका है। 16 अन्य इकाइयां निर्माण या मशीनरी स्थापना के उन्नत चरणों में हैं।
मुख्य बिंदु: परियोजना का विस्तार, निवेश और रणनीतिक प्रभाव
1. निवेश, उत्पादन और रोजगार का दायरा
- कुल स्वीकृत परियोजनाएं: योजना के तहत अब तक 106 प्रस्तावों (15 राज्यों में फैला क्षेत्र) को मंजूरी दी जा चुकी है।
- कुल स्वीकृत निवेश: ₹69,548 करोड़ का कुल निवेश प्रतिबद्ध है (जो योजना के शुरुआती ₹59,350 करोड़ के लक्ष्य से अधिक है)।
- उत्पादित क्षमता और नौकरियां: इससे लगभग ₹5.34 लाख करोड़ का कुल उत्पादन और 74,628 प्रत्यक्ष नौकरियां (साथ ही 2.5 लाख अप्रत्यक्ष नौकरियां) सृजित होंगी।
2. स्वदेशी विनिर्माण और मांग-आपूर्ति स्थिति
- पहली बार घरेलू विनिर्माण: फिल्टर, कॉइल्स, स्पीकर्स जैसे क्रिटिकल कंपोनेंट्स और एसिटिलीन ब्लैक तथा इलेक्ट्रोलाइट एडिटिव्स जैसे कच्चे माल का भारत में पहली बार उत्पादन होगा।
- मांग से अधिक उत्पादन क्षमता: कई प्रमुख क्षेत्रों में भारत की उत्पादन क्षमता घरेलू मांग को पार कर गई है:
- एनोड सामग्री (Anode Material): मांग का ~110%
- रिले: मांग का 200%
- ऑप्टिकल ट्रांसीवर (Optical Transceiver-SFP): मांग का 350%
3. नए प्रस्तावों के तहत 4 प्रमुख श्रेणियां
| श्रेणी | स्वीकृत उत्पाद / घटक | प्रमुख निवेशक (उदाहरण) |
| सब-असेंबली | कैमरा मॉड्यूल, डिस्प्ले मॉड्यूल, ऑप्टिकल ट्रांसीवर | मिंडा इंस्ट्रूमेंट, स्काईक्वाड, SFO टेक्नोलॉजीज |
| बेयर कंपोनेंट्स | कनेक्टर्स, रिले, ट्रांसड्यूसर, फिल्टर, कैपेसिटर, कॉइल्स, लाउडस्पीकर | सेन्टम इलेक्ट्रॉनिक्स, सिर्मा SGS, एम्फेनॉल |
| आपूर्ति श्रृंखला उत्पाद | Li-ion सेल के लिए एनोड, दुर्लभ मृदा स्थायी चुंबक, एसिटिलीन ब्लैक, कॉपर क्लैड लैमिनेट | एप्सीलोन C2GR, क्वांटम मैग्नेटिक्स, विप्रो ग्लोबल |
| कैपिटल गुड्स | इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण की मशीनरी और उपकरण | ज्योति CNC, VVDN, मित्सुबिशी इलेक्ट्रिक |
ECMS और ELCINA का संक्षिप्त परिचय
1. इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (ECMS)
- मंत्रालय: इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)।
- उद्देश्य: असेंबली से आगे बढ़कर क्रिटिकल कंपोनेंट्स, प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB) और आवश्यक कच्चे माल का स्वदेशी विनिर्माण बढ़ाना।
- रणनीतिक महत्व: आयात निर्भरता घटाना, आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करना और भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स हब बनाना।
2. इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ELCINA)
- स्थापना: वर्ष 1967 (भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स हार्डवेयर का पहला उद्योग संघ)।
- भूमिका: इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बढ़ावा देने और सरकार के साथ उद्योग के मुद्दों पर संवाद स्थापित करने में प्रमुख भूमिका।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| योजना का नाम | इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (ECMS) |
| नोडल मंत्रालय | MeitY (इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय) |
| कुल स्वीकृत निवेश | ₹69,548 करोड़ (106 परियोजनाएं) |
| सक्रिय संयंत्र | 38 संयंत्र चालू |
| उद्योग भागीदार संस्था | ELCINA (स्थापना: 1967) |