18 August 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत सफाई कर्मचारियों के आर्थिक-सामाजिक सशक्तीकरण हेतु स्वच्छता उद्यमी योजना (SUY) व नमस्ते योजना, भारत और थाईलैंड के बीच द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को मजबूत करने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘मैत्री-XV’, भारत की पहली घास के मैदान और खुला प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र (ONEs) गाइडबुक, कृषि एवं ग्रामीण अर्थव्यवस्था के माध्यम से ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने वाले ‘शक्ति की सप्त धारा’ संकल्प, क्वांटम इंटरनेट व सुरक्षित संचार के क्षेत्र में क्रांतिकारी खोज ‘General Concurrence Percolation’ (GCP) प्रोटोकॉल, तथा पिछले 10 वर्षों में सामाजिक सुरक्षा के दायरे को 25 करोड़ से बढ़ाकर 100 करोड़ लाभार्थियों तक पहुँचाने की ऐतिहासिक उपलब्धि का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
स्वच्छता उद्यमी योजना (SUY): नमस्ते योजना से संवरती सफाई मित्रों की जिंदगी
- प्रारंभिक परीक्षा: स्वच्छता उद्यमी योजना (SUY), नमस्ते योजना, NSKFDC, यांत्रिक स्वच्छता (Mechanized Sanitation)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): समाज का कमजोर वर्ग, सामाजिक न्याय व अधिकारिता, कौशल विकास, मशीनीकरण के माध्यम से मैला ढोने (Manual Scavenging) की प्रथा का उन्मूलन।
चर्चा में क्यों?
सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने नमस्ते योजना के तहत संचालित ‘स्वच्छता उद्यमी योजना’ (SUY) की सफलता का एक मामला प्रस्तुत किया। गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश) के 54 वर्षीय सतीश कुमार ने इस योजना के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त करके संविदा सफाई कर्मचारी (Contractual Worker) से खुद की सीवर सक्शन मशीन के मालिक बनने तक का सफर तय किया।
मुख्य बिंदु: स्वच्छता उद्यमी योजना और नमस्ते योजना की भूमिका
1. यांत्रिक स्वच्छता और स्वरोजगार की ओर कदम
- चुनौती: संविदा पर काम करने वाले सफाई कर्मचारियों के पास आय के सीमित अवसर और मशीनी उपकरणों की कमी होती है।
- समाधान: यह योजना सफाई कर्मचारियों को खुद का स्वच्छता उद्यम (Sanitation Enterprise) शुरू करने के लिए लोन और सब्सिडी प्रदान करती है।
- सुरक्षा व सम्मान: इसका मुख्य लक्ष्य हाथ से मैला ढोने (Manual Scavenging) की प्रथा को पूरी तरह खत्म करके यांत्रिक सफाई (Mechanization) को बढ़ावा देना है।
2. वित्तीय सहायता मॉडल (Financial Assistance Structure)
- राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (NSKFDC): यह संस्था योजना के तहत वित्तीय और सब्सिडी सहायता प्रदान करती है।
- पूंजीगत सब्सिडी (Capital Subsidy): लाभार्थियों को अग्रिम (Upfront) सब्सिडी दी जाती है, जिससे बैंक ऋण का बोझ काफी कम हो जाता है।
- उदाहरण के आंकड़े: 9.55 लाख रुपये की सीवर सक्शन मशीन के प्रोजेक्ट के लिए लाभार्थी को ₹3.64 लाख की पूंजीगत सब्सिडी (NSKFDC द्वारा) और कैनरा बैंक से ₹5.91 लाख का ऋण प्रदान किया गया।
3. सामाजिक-आर्थिक प्रभाव
- आय में बढ़ोतरी: ठेके पर ₹13,000–₹15,000 कमाने वाले कर्मचारी मशीनीकरण के बाद सभी खर्च और EMI काटकर ₹25,000 तक की मासिक बचत कर रहे हैं।
- उद्यमिता को बढ़ावा: यह योजना केवल रोजगार नहीं देती, बल्कि सफाई कर्मचारियों को ‘उद्यमी’ (Entrepreneur) बनाती है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| मूल योजना | NAMASTE (National Action for Mechanised Sanitation Ecosystem) |
| घटक योजना | स्वच्छता उद्यमी योजना (SUY) |
| नोडल एजेंसी | NSKFDC (सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय) |
| मुख्य लक्ष्य | सफाई कर्मचारियों को यांत्रिक उपकरण खरीदने हेतु रियायती ऋण व सब्सिडी देना |
| उद्देश्य | सीवर/सेप्टिक टैंक की शून्य-मानव संपर्क से सफाई |
अभ्यास ‘मैत्री-XV’: भारत-थाईलैंड संयुक्त सैन्य अभ्यास
- प्रारंभिक परीक्षा: अभ्यास मैत्री, 9 गोरखा राइफल्स, भारत-थाईलैंड संबंध, संयुक्त राष्ट्र चार्टर (Chapter VII)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): भारत और उसके पड़ोसी, द्विपक्षीय संबंध, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग और रक्षा कूटनीति (Defense Diplomacy)।
चर्चा में क्यों?
भारतीय सेना की 9 गोरखा राइफल्स की टुकड़ी ‘मैत्री-XV’ अभ्यास में भाग लेने के लिए थाईलैंड के लिए रवाना हुई। यह भारत और थाईलैंड की सेनाओं के बीच आयोजित होने वाला 15वां संयुक्त सैन्य अभ्यास है। इसका आयोजन 18 से 31 अगस्त 2026 तक थाईलैंड के सूरत थानी स्थित ‘विभावदी रंगसित कैंप’ में किया जा रहा है। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच अंतर-संचालनीयता (Interoperability) को बढ़ाना और जंगल व अर्ध-शहरी इलाकों में संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत आतंकवाद-रोधी अभियानों की क्षमताओं को मजबूत करना है।
मुख्य बिंदु: अभ्यास ‘मैत्री’ और रणनीतिक महत्व
1. प्रतिभागी दल और सैन्य बल
- सैन्य क्षमता: दोनों देशों की सेनाओं से 85-85 सैनिक इस अभ्यास में भाग ले रहे हैं।
- भारतीय दल: भारत का प्रतिनिधित्व 9 गोरखा राइफल्स के जवान कर रहे हैं।
- थाईलैंड दल: रॉयल थाई आर्मी की 5वीं डिवीजन (25वीं इन्फैंट्री ब्रिगेड, 3rd बटालियन) इसमें शामिल है।
2. मुख्य उद्देश्य और प्रशिक्षण का दायरा
- प्रशिक्षण का माहौल: यह अभ्यास जंगल और अर्ध-शहरी (Semi-Urban) इलाकों में आतंकवाद-रोधी अभियानों पर केंद्रित है।
- UN मैंडेट: यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय VII (Chapter VII) के तहत काउंटर-इंसर्जेंसी/आतंकवाद रोधी ऑपरेशनों में क्षमताओं को निखारता है।

- तकनीकी आदान-प्रदान: इसके तहत फील्ड एक्सरसाइज, कॉम्बैट चर्चाएं और दोनों सेनाओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले आधुनिक हथियारों व तकनीकों का प्रदर्शन शामिल है।
3. इतिहास और द्विपक्षीय संबंध
- शुरुआत: अभ्यास मैत्री की शुरुआत 2006 में हुई थी। यह दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग का प्रमुख स्तंभ है।
- पिछला संस्करण: इसका 14वां संस्करण सितंबर 2025 में उमरोई (मेघालय) के फॉरेन ट्रेनिंग नोड में आयोजित किया गया था।
- इंटरऑपरेबिलिटी: यह अभ्यास दोनों सेनाओं के बीच आपसी समझ, विश्वास और सामरिक तालमेल (Interoperability) को मजबूत करता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| अभ्यास का नाम | मैत्रि-XV, 2026 |
| भाग लेने वाले देश | भारत (भारतीय सेना) और थाईलैंड (रॉयल थाई आर्मी) |
| संस्करण व स्थल | 15वां संस्करण – सूरत थानी, थाईलैंड |
| भारतीय सैन्य दल | 9 गोरखा राइफल्स (85 सैनिक) |
| संस्थापना वर्ष | 2006 से निरंतर आयोजित |
भारत का पहला घास के मैदान और खुला प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र (ONEs) गाइड गाइडबुक: UNCCD COP17 में लॉन्च
- प्रारंभिक परीक्षा: UNCCD COP17, ओपन नेचुरल इकोसिस्टम (ONEs), लैंड डिग्रेडेशन न्यूट्रैलिटी (LDN), ओरान व गौचर भूमि।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): पर्यावरण संरक्षण, जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन, सतत भूमि प्रबंधन (Sustainable Land Management), देहाती समुदाय व आजीविका।
चर्चा में क्यों?
मंगोलिया की राजधानी उलानबटार में आयोजित UNCCD (संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण रोकथाम अभिसमय) के COP17 में भारत ने अपनी पहली ‘गाइड टू ग्रासलैंड्स एंड अदर ओपन नेचुरल इकोसिस्टम्स (ONEs) ऑफ इंडिया’ जारी की। यह दस्तावेज भारत के घास के मैदानों, सवाना, मरुस्थल और झाड़ियों वाले क्षेत्रों की पारिस्थितिक और सामाजिक-आर्थिक महत्ता को रेखांकित करता है। इसका मुख्य उद्देश्य इन क्षेत्रों को केवल “बंजर भूमि” (Wastelands) के रूप में न देखकर इनके विज्ञान-आधारित संरक्षण को बढ़ावा देना है।
मुख्य बिंदु: खुला प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र (ONEs) और भारत की पहल
1. ‘ओपन नेचुरल इकोसिस्टम’ (ONEs) का महत्व
- ऐतिहासिक उपेक्षा: लंबे समय से इन क्षेत्रों को वनों (पेड़ों) की कमी के कारण “बंजर भूमि” मानकर नजरअंदाज किया गया।
- जैव विविधता का घर: यह क्षेत्र ऐसी अनूठी प्रजातियों को आश्रय देते हैं जो दुनिया में कहीं और नहीं पाई जातीं।
- जलवायु सहनशीलता व कार्बन भंडारण: ये तंत्र मिट्टी में बड़ी मात्रा में कार्बन संचित करते हैं और मृदा व जल संरक्षण प्रक्रिया में मदद करते हैं।
- पारंपरिक संरक्षण (ओरान/गौचर): राजस्थान जैसे राज्यों में ‘ओरान’ या गौचर के नाम से जानी जाने वाली ये भूमियाँ सदियों से स्थानीय समुदायों और चरवाहों (Pastoralists) की आजीविका का आधार रही हैं।
2. गाइडबुक के प्रमुख विषय व सहयोगी संस्थाएं
- गाइडबुक की सामग्री: इसमें हिमालयी व तराई के घास के मैदान, थार व बन्नी परिदृश्य, दक्कन सवाना, बीहड़ (Ravines) और तटीय पारिस्थिकी तंत्र शामिल हैं। इसमें पशुपालन, अग्नि पारिस्थितिकी (Fire Ecology) और कार्बन पृथक्करण पर विषयगत खंड हैं।
- प्रमुख विकासकर्ता संस्थाएं: इसे केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) के तत्वावधान में ATREE (अशोक ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकोलॉजी एंड द एनवायरनमेंट) ने IUCN, ICFRE, ISRO के स्पेस एप्लीकेशन सेंटर (SAC) और CoE-SLM के सहयोग से तैयार किया है।
3. भूमि क्षरण तटस्थता (LDN) और वैश्विक प्रतिबद्धता
- LDN लक्ष्य: यह पहल भारत को अपने भूमि क्षरण तटस्थता (Land Degradation Neutrality) के लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेगी।
- परिदृश्य-स्तरीय योजना: केवल पेड़ लगाने के बजाय स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र की प्रकृति के अनुसार संरक्षण रणनीति बनाने पर जोर दिया गया है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| गाइड का नाम | Guide to Grasslands and Other Open Natural Ecosystems (ONEs) of India |
| लॉन्च का अवसर | UNCCD COP17 (उलानबटार, मंगोलिया) |
| मुख्य नोडल मंत्रालय | पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) |
| सहयोगी संस्थाएं | ATREE, IUCN, CoE-SLM, ICFRE, और SAC (ISRO) |
| प्रमुख ONEs उदाहरण | बन्नी (गुजरात), थार (राजस्थान), दक्कन सवाना, बीहड़ और तराई क्षेत्र |
‘शक्ति की सप्त धारा’ संकल्प: कृषि एवं ग्रामीण विकास से विकसित भारत 2047 का रोडमैप
- प्रारंभिक परीक्षा: शक्ति की सप्त धारा, लखपति दीदी योजना, शी-मार्ट्स, पूसा रोडमैप।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): महिला सशक्तिकरण, स्वयं सहायता समूह (SHG), कृषि उत्पादकता, खाद्य प्रसंस्करण, ग्रामीण विकास, और समावेशी विकास (Inclusive Growth)।
चर्चा में क्यों?
नई दिल्ली के पूसा परिसर में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘शक्ति की सप्त धारा’ संकल्प कार्यक्रम का नेतृत्व किया। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री द्वारा 15 अगस्त 2026 को स्वतंत्रता दिवस भाषण में घोषित ‘शक्ति की सप्त धारा’ के संकल्पों को ‘विकसित भारत 2047’ के लिए एक व्यावहारिक रोडमैप में बदलने पर केंद्रित था। इसमें कृषि अधिकारियों, प्रगतिशील किसानों, लखपति दीदियों और खाद्य प्रसंस्करण निर्यातकों ने भाग लिया।
मुख्य बिंदु: कृषि और ग्रामीण विकास का रणनीतिक रोडमैप
1. लखपति दीदी योजना का नया लक्ष्य
- विस्तार: 3 करोड़ ग्रामीण महिलाओं को लखपति दीदी बनाने के प्रारंभिक लक्ष्य की सफलता के बाद, अब नया लक्ष्य 6 करोड़ लखपति दीदी बनाने का रखा गया है।
- सशक्तिकरण: स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाओं को वित्तीय सहायता, कौशल विकास और बाजार पहुंच प्रदान की जाएगी।
2. बाजार पहुंच और ‘शी-मार्ट्स’
- शी-मार्ट्स की स्थापना: ग्रामीण महिला उद्यमियों द्वारा निर्मित उत्पादों के विपणन के लिए केंद्रीय बजट में ‘She-Marts’ का प्रावधान शामिल किया गया है।
- वैश्विक ब्रांडिंग: योग, आयुर्वेद, हस्तशिल्प और स्थानीय खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े ग्रामीण उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों से जोड़ा जाएगा।
3. कृषि सुरक्षा और खाद्य प्रसंस्करण का सुदृढ़ीकरण
- उर्वरक सब्सिडी: वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद किसानों को रियायती दरों पर उर्वरक आपूर्ति जारी रखने की प्रतिबद्धता।
- निर्यात संवर्धन: कृषि उत्पादकता बढ़ाने के साथ-साथ समुद्री उत्पादों (Seafood) और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के वैश्विक बाजार में निर्यात पर विशेष जोर।
- आत्मनिर्भरता: ईंधन, उर्वरक और खाद्य सुरक्षा के मोर्चे पर देश को दीर्घकालिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| संकल्प का नाम | शक्ति की सप्त धारा |
| आयोजन स्थल | पूसा परिसर, नई दिल्ली |
| संबंधित मंत्रालय | कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय + ग्रामीण विकास मंत्रालय |
| लखपति दीदी नया लक्ष्य | 3 करोड़ – 6 करोड़ ग्रामीण महिलाएं |
| प्रमुख विपणन पहल | She-Marts (महिला स्वयं सहायता समूहों हेतु बाजार केंद्र) |
| लक्ष्य वर्ष | विकसित भारत @2047 |
क्वांटम नेटवर्क के लिए ‘General Concurrence Percolation’ (GCP) प्रोटोकॉल
- प्रारंभिक परीक्षा: क्वांटम तकनीक, क्वांटम एंटैंगलमेंट, परकोलेशन थ्योरी, GCP प्रोटोकॉल।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास और अनुप्रयोग, क्वांटम कंप्यूटिंग और संचार प्रौद्योगिकी, बोस इंस्टीट्यूट का योगदान।
चर्चा में क्यों?
बोस इंस्टीट्यूट, कोलकाता (DST का स्वायत्त संस्थान) के वैज्ञानिकों ने क्वांटम नेटवर्क के लिए एक नया ‘General Concurrence Percolation’ (GCP) प्रोटोकॉल विकसित किया है। ‘Physical Review A’ पत्रिका में प्रकाशित यह शोध दूरस्थ क्वांटम स्टेशनों के बीच उलझे हुए कणों (Entangled States) के माध्यम से सुरक्षित और कुशल संचार का नया ढांचा प्रदान करता है।
मुख्य बिंदु: क्वांटम एंटैंगलमेंट और GCP प्रोटोकॉल की क्रियाप्रणाली
1. पारंपरिक चुनौती (Existing Challenge)
- पर्यावरणीय शोर (Noise): वास्तविक दुनिया का शोर लंबी दूरी के क्वांटम संपर्कों को कमजोर कर देता है।
- स्टेशनों का विलोपन: पुरानी थ्योरी (Percolation Models) में मजबूत कनेक्शन बनाने के लिए बीच के स्टेशनों (Intermediate Nodes) को काटना पड़ता था।
- संसाधनों का नुकसान: इस प्रक्रिया से नेटवर्क टोपोलॉजी नष्ट हो जाती थी और भौतिक संसाधन बर्बाद होते थे।
2. GCP प्रोटोकॉल का समाधान (Geometric Routing)
- लघुत्तम मार्ग (Shortest Path): GCP प्रोटोकॉल स्टेशनों को हटाए बिना केवल सबसे छोटे रास्तों पर क्वांटम एंटैंगलमेंट की शक्ति को बढ़ाता है।
- कम शुरुआती आवश्यकता: यह प्रोटोकॉल बहुत कम शुरुआती एंटैंगलमेंट (Lower Threshold) के साथ भी लंबी दूरी का क्वांटम कनेक्शन स्थापित कर सकता है।
- सांख्यिकीय भौतिकी (Percolation Universality): यह विधि सांख्यिकीय भौतिकी की परकोलेशन सार्वभौमिकता श्रेणी का पालन करती है, जो इसकी सैद्धांतिक नींव को मजबूती देती है।
3. भविष्य के क्वांटम इंटरनेट पर प्रभाव
- सघन नेटवर्क: यह कमज़ोर भौतिक ग्रिड को उच्च-क्षमता वाले सघन नेटवर्क में बदल देता है।

- संसाधन बचत: स्टेशनों को नेटवर्क में बनाए रखकर यह क्वांटम इंटरनेट इन्फ्रास्ट्रक्चर को टिकाऊ बनाता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| प्रोटोकॉल का नाम | जनरल कन्करेंस परकोलेशन (GCP) |
| शोध संस्थान | बोस इंस्टीट्यूट, कोलकाता (विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के अंतर्गत) |
| मूल सिद्धांत | क्वांटम यांत्रिकी (Quantum Mechanics) + परकोलेशन थ्योरी (Statistical Physics) |
| मुख्य लाभ | बिना नोड्स/स्टेशनों को नष्ट किए कम थ्रेशोल्ड पर अधिकतम एंटैंगलमेंट प्राप्त करना |
| शोध पत्रिका | फिजिकल रिव्यू A |
10 वर्षों में सामाजिक सुरक्षा: 25 करोड़ से 100 करोड़ का ऐतिहासिक विस्तार
- प्रारंभिक परीक्षा: सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, आयुष्मान भारत योजना, स्टार्ट-अप इंडिया, ₹1 लाख करोड़ इनोवेशन फंड, राष्ट्रीय ड्रोन नीति।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): सामाजिक न्याय, कल्याणकारी योजनाएं, गरीबी व भुखमरी से जुड़े मुद्दे, रोजगार और उद्यमिता, स्टार्ट-अप इकोसिस्टम, समावेशी विकास (Inclusive Growth)।
चर्चा में क्यों?
लाल किले की प्राचीर से 80वें स्वतंत्रता दिवस संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के सामाजिक सुरक्षा कवरेज (Social Security Coverage) के अभूतपूर्व विस्तार को रेखांकित किया। पिछले एक दशक में भारत में सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आने वाले नागरिकों की संख्या 25 करोड़ से बढ़कर 100 करोड़ हो गई है। यह कदम ‘विकसित भारत @2047’ के तहत समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाने के लक्ष्य से जुड़ा है।
मुख्य बिंदु: सामाजिक सुरक्षा और युवा रोजगार का खाका
1. सामाजिक सुरक्षा का अभूतपूर्व विस्तार
- दशक भर में 4 गुना वृद्धि: वर्ष 2014 से पहले केवल 25 करोड़ लोगों के पास सामाजिक सुरक्षा कवर था, जिसे पिछले 10 वर्षों में बढ़ाकर 100 करोड़ कर दिया गया है।
- आयुष्मान भारत (वरिष्ठ नागरिक): 70 वर्ष से अधिक आयु के सभी वरिष्ठ नागरिकों को आयुष्मान भारत योजना के तहत ₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज दिया जा रहा है।
2. युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता का नया पारिस्थितिकी तंत्र
- स्टार्ट-अप इंडिया: देश में 2.5 लाख से अधिक पंजीकृत स्टार्ट-अप्स कार्यरत हैं, जो युवाओं को नौकरी मांगने वाले की जगह नौकरी देने वाला बना रहे हैं।
- इनोवेशन और कौशल विकास: ₹1 लाख करोड़ का इनोवेशन फंड, डिजिटल इंडिया और स्किल इंडिया युवाओं को आधुनिक तकनीकों के लिए तैयार कर रहे हैं।
- उभरते क्षेत्र (Emerging Sectors): स्पेस, एविएशन सेक्टर का उदारीकरण, और राष्ट्रीय ड्रोन नीति से युवाओं के लिए नए रोजगार सृजित हो रहे हैं।
- विमानन क्षेत्र में रोजगार: नए हवाई अड्डों के निर्माण, नए हवाई मार्गों, विमान विनिर्माण और एमआरओ (Maintenance, Repair, and Overhaul – MRO) सुविधाओं के विस्तार से कुशल कार्यबल को रोजगार मिल रहा है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| सामाजिक सुरक्षा दायरा | 25 करोड़ (2014 से पहले) $\rightarrow$ 100 करोड़ (वर्तमान) |
| आयुष्मान भारत (वरिष्ठ नागरिक) | 70+ आयु के नागरिकों को ₹5 लाख/वर्ष तक का स्वास्थ्य कवर |
| पंजीकृत स्टार्ट-अप्स | 2.5 लाख+ (स्टार्ट-अप इंडिया के तहत) |
| इनोवेशन प्रोत्साहन | ₹1 लाख करोड़ का इनोवेशन फंड (अनुसंधान एवं विकास हेतु) |
| प्रमुख नीतिगत सुधार | अंतरिक्ष और विमानन क्षेत्रों का उदारीकरण, राष्ट्रीय ड्रोन नीति |