29 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत देश के स्वास्थ्य क्षेत्र को एनीमिया मुक्त बनाने के लिए जहां एक ओर नई व्यापक ‘7x7x7 रणनीति’ की शुरुआत की गई है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण विकास में पारदर्शिता के लिए देश का पहला AI-सक्षम लेखापरीक्षा पोर्टल लॉन्च किया गया है। इसके अतिरिक्त, वैश्विक मंच पर भारत की ‘ब्लू इकोनॉमी’ और ‘डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)’ कूटनीति को सेशेल्स और मॉरीशस के साथ रणनीतिक वार्ताओं में नई मजबूती मिली है।
समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (SSBSK): बाल स्वास्थ्य और देखभाल का नया एकीकृत ढांचा
- GS Paper 2: स्वास्थ्य (Health), सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय; केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाएं (Welfare Schemes) और उनका प्रभाव।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
- केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा द्वारा विज्ञान भवन, नई दिल्ली में 16वें केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण परिषद (CCHFW) सम्मेलन के दौरान “समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम” (SSBSK) का आधिकारिक शुभारंभ किया गया है।
SSBSK की प्रमुख विशेषताएं और रणनीतियां
1. कार्यक्रम का विज़न और एकीकरण
- विज़न: “पहले तीन साल सम्पूर्ण देखभाल”। यह योजना जीवन के पहले 36 महीनों (3 वर्ष) में बच्चे के जीवित रहने, पोषण और शुरुआती मस्तिष्क विकास (Early Brain Development) पर केंद्रित है।
- दो बड़ी योजनाओं का विलय: सरकार ने समुदाय-आधारित दो प्रमुख पहलों— HBNC (गृह-आधारित नवजात देखभाल) और HBYC (छोटे बच्चों के लिए गृह-आधारित देखभाल) को मिलाकर इस सिंगल, मजबूत फ्रेमवर्क का निर्माण किया है।
2. जोखिम-स्तरीकृत दृष्टिकोण
- पहली बार ‘जोखिम वाले’ (At-risk) बच्चों की पहचान कर उनके लिए अतिरिक्त देखभाल (Extra Home Visits) की व्यवस्था की गई है:
- जोखिम वाले नवजात शिशु: पहले 42 दिनों के भीतर 9 बार होम विजिट।
- जोखिम वाले बच्चे: 36 महीने की उम्र तक कुल 8 बार होम विजिट।
3. जमीनी समन्वय और सामुदायिक शिविर
- संयुक्त होम विजिट: देखभाल में निरंतरता लाने के लिए आशा (ASHA), एएनएम (ANM), कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता (AWW) मिलकर संयुक्त रूप से घर का दौरा करेंगे।
- स्क्रीनिंग सत्र:
- हर ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता और पोषण दिवस (VHSND) पर वेल-बेबी सेशन का आयोजन।
- ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिरों’ में हर महीने विशेष शिशु शिविर लगाए जाएंगे।
4. मातृ मानसिक स्वास्थ्य और स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण
- मातृ मानसिक स्वास्थ्य: प्रसव के बाद माताओं के मानसिक स्वास्थ्य (Post-partum mental health) की जांच को इसका एक अनिवार्य हिस्सा बनाया गया है।
- डिजिटल युग की चुनौतियां: बच्चों के अत्यधिक स्क्रीन टाइम (Mobile/TV) से होने वाले नुकसान (जैसे सामाजिक और भावनात्मक कौशल में कमी) को रोकते हुए, पहले 3 वर्षों में शारीरिक खेलों और शुरुआती सीखने (Early learning) को बढ़ावा दिया जाएगा।
5. डिजिटल ट्रैकिंग और शहरी फोकस
- डिजिटल इकोसिस्टम का लाभ: इसे JANANI पोर्टल, U-WIN, MPCDSR, RBSK 2.0 और POSHAN Tracker के साथ लिंक किया जाएगा।
- ABHA और Baal-ABHA: डेटा शेयरिंग और बच्चे की निर्बाध ट्रैकिंग के लिए इन डिजिटल स्वास्थ्य आईडी का उपयोग किया जाएगा।
- शहरी आबादी: प्रवासियों, झुग्गी-झोपड़ियों और वंचित शहरी आबादी के लिए विशेष रूप से तैयार की गई रणनीतियां लागू होंगी।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
योजना और तकनीकी मैट्रिक्स
| अवयव / पोर्टल | मुख्य भूमिका और तथ्य (Core Facts) |
| SSBSK का लक्ष्य समूह | जन्म से लेकर 36 महीने (3 वर्ष) तक के बच्चे। |
| योजनाओं का विलय | HBNC (नवजात देखभाल) + HBYC (छोटे बच्चों की देखभाल) = SSBSK |
| Baal-ABHA ID | बच्चों की विशिष्ट डिजिटल स्वास्थ्य पहचान, जिससे उनके स्वास्थ्य रिकॉर्ड और टीकाकरण को ट्रैक किया जाएगा। |
| डिजिटल लिंकेज | U-WIN (टीकाकरण), POSHAN Tracker (पोषण), और JANANI पोर्टल के साथ सीधा जुड़ाव। |
| नवाचार (Innovation) | बच्चों के लिए ‘जोखिम-स्तरीकृत देखभाल’ (Risk-stratified care) और माताओं के लिए ‘प्रसवोत्तर मानसिक स्वास्थ्य जांच’ की शुरुआत। |
दीक्षा और भारत का डिजिटल शिक्षा इकोसिस्टम
- प्रारंभिक परीक्षा: सरकारी योजनाएं, ई-गवर्नेंस, शिक्षा क्षेत्र के डिजिटल बुनियादी ढांचे।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): ई-गवर्नेंस के अनुप्रयोग और मॉडल, शिक्षा और मानव संसाधन से संबंधित मुद्दे, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI)।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
- जून 2026 में पीआईबी (PIB) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, दीक्षा (DIKSHA) प्लेटफॉर्म देश में ‘एक राष्ट्र, एक डिजिटल प्लेटफॉर्म’ के रूप में स्कूली शिक्षा का मुख्य आधार बन चुका है। यह प्लेटफॉर्म ‘पीएम ई-विद्या’ (PM e-Vidya) पहल के तहत दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षा की निरंतरता सुनिश्चित कर रहा है।
दीक्षा प्लेटफॉर्म क्या है?
यह स्कूली शिक्षा के लिए एक राष्ट्रीय डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर है। इसे 2017 में लॉन्च किया गया था। इसे शिक्षा मंत्रालय के तहत NCERT और CIET (केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान) द्वारा संचालित किया जा रहा है।
1. प्रमुख विशेषताएं और समावेशन
- फिजिटल मॉडल (Phygital): भौतिक किताबों को डिजिटल दुनिया से जोड़ा गया है। किताबों पर दिए गए QR-कोड को स्कैन करके छात्र सीधे वीडियो और शिक्षक गाइड तक पहुंच सकते हैं।
- एडवांस्ड लर्निंग टूल्स: इसमें पढ़ाई को रोचक बनाने के लिए 2D/3D एनिमेशन, ऑगमेंटेड रियलिटी (AR) और 614 से अधिक वर्चुअल लैब्स शामिल हैं।
- दिव्यांगों के लिए सुगम: इसमें DAISY फॉर्मेट, टेक्स्ट-टू-स्पीच और भारतीय सांकेतिक भाषा (ISL) के वीडियो दिए गए हैं।
- शिक्षक प्रशिक्षण (Teacher Training): शिक्षकों के प्रोफेशनल डेवलपमेंट के लिए इस पर निष्ठा कार्यक्रम और लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (LMS) को एकीकृत किया गया है।
2. प्लेटफॉर्म की संरचना: फेडेरेटेड आर्किटेक्चर
यह प्लेटफॉर्म किसी एक केंद्रीकृत नियंत्रण पर काम नहीं करता, बल्कि एक विकेंद्रीकृत (Federated) ढांचे पर आधारित है:
- सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अपनी स्थानीय भाषा और पाठ्यक्रम के अनुसार इस पर कंटेंट अपलोड करते हैं।
- कंटेंट का सत्यापन: अपलोड की गई सामग्री की गुणवत्ता और उम्र के अनुकूल होने की जांच CIET-NCERT द्वारा समय-समय पर की जाती है।
3. भाषा और ऑफलाइन पहुंच की बाधाएं दूर
- इंटरनेट के बिना पढ़ाई: छात्र कंटेंट को पहले से डाउनलोड कर ऑफलाइन पढ़ सकते हैं। राज्य सरकारें इसे स्कूलों के ‘स्मार्ट क्लास बोर्ड’ पर प्रीलोड करती हैं।
- बहुभाषी सपोर्ट: यह कुल 135 भाषाओं (128 भारतीय और 7 विदेशी) का समर्थन करता है।
- राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) के तहत NCERT ने कक्षा 1, 2, 3 और 6 की किताबों को 22 आधिकारिक अनुसूचित भाषाओं में अनुवाद करके इस पर उपलब्ध कराया है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| बिंदु | मुख्य तथ्य (Quick Pointers) |
| पूरा नाम | Digital Infrastructure for Knowledge Sharing (DIKSHA) |
| प्रशासनिक मंत्रालय | शिक्षा मंत्रालय (Ministry of Education) |
| मुख्य नोडल निकाय | NCERT और CIET |
| केंद्रीय योजना | यह PM e-Vidya का एक प्रमुख हिस्सा है। |
| भाषा दायरा | कुल 135 भाषाओं का समर्थन; 22 अनुसूचित भाषाओं में NCERT किताबें उपलब्ध। |
| तकनीकी अवयव | ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म, सनबर्ड रजिस्ट्री, चैटबॉट और क्यूआर-कोडेड टेक्स्टबुक्स। |
एनीमिया मुक्त भारत अभियान – नए परिचालन दिशानिर्देश (2026)
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजनाएं, सरकारी नीतियां, सामाजिक क्षेत्र के विकास से जुड़ी पहलें।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): स्वास्थ्य (Health) और पोषण (Nutrition) से संबंधित मुद्दे; केंद्र और राज्यों द्वारा आबादी के कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं और उनका प्रदर्शन।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
- 29 जून 2026 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण परिषद (CCHFW) की 16वीं बैठक के दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री द्वारा ‘एनीमिया मुक्त भारत (AMB) अभियान’ के नए परिचालन दिशानिर्देश (Operational Guidelines) जारी किए गए। इसके तहत अब इस कार्यक्रम को और अधिक व्यापक, जन-केंद्रित और तकनीक-आधारित बनाते हुए ‘एनीमिया मुक्त भारत अभियान’ में बदल दिया गया है।
एनीमिया मुक्त भारत अभियान की मुख्य रणनीतियाँ
1. 6x6x6 से 7x7x7 रणनीति में बदलाव
पहले से चल रही 6x6x6 रणनीति का विस्तार करते हुए अब इसमें एक नया लाभार्थी समूह, एक नया हस्तक्षेप (Intervention) और एक नया संस्थागत तंत्र जोड़ा गया है:
- 7वां लाभार्थी समूह: जीवन के शुरुआती चरण में एनीमिया से निपटने के लिए कम जन्म वजन वाले (Low Birth Weight – LBW) शिशु (0 से 6 महीने)।
- 7वां हस्तक्षेप (Interventions): ‘ईटिंग राइट’ (Eating Right) दृष्टिकोण, जो दैनिक आदत के रूप में आयरन से भरपूर और विविध आहार के सेवन को बढ़ावा देता है।
- 7वां संस्थागत तंत्र: डिजिटल ट्रैकिंग द्वारा समर्थित एक मजबूत निगरानी और मूल्यांकन (Monitoring & Evaluation) ढांचा।
2. T3 से T4 दृष्टिकोण (Approach)
यह अभियान अब पुरानी T3 रणनीति (Test, Treat, Talk) से आगे बढ़कर T4 दृष्टिकोण पर काम करेगा:
- Test (परीक्षण): हीमोग्लोबिन की जांच को तेज करना।
- Treat (उपचार): राष्ट्रीय प्रोटोकॉल के अनुसार आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया का इलाज।
- Talk (संवाद/परामर्श): स्वस्थ खान-पान की आदतों के लिए लक्षित काउंसलिंग।
- Track (ट्रैकिंग): रेफरल और फॉलो-अप के लिए लाभार्थियों की व्यवस्थित ट्रैकिंग (यह नया चौथा स्तंभ है)।
3. गंभीर एनीमिया के लिए नैदानिक हस्तक्षेप (Clinical Interventions)
- गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं में गंभीर एनीमिया के मामलों और जिन पर सामान्य दवाओं का असर नहीं हो रहा है, उनके लिए फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज़ (FCM) और आयरन सुक्रोज़ का उपयोग करके इंट्रावेनस आयरन थेरेपी (Intravenous Iron Therapy) को शामिल किया गया है।
4. मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम (Digital Integration)
अलग-अलग लाभार्थी समूहों के लिए हीमोग्लोबिन परीक्षण और उपचार के रिकॉर्ड को एकीकृत करने के लिए विभिन्न पोर्टलों का संयोजन किया जाएगा:
- गर्भवती महिलाओं के रिकॉर्ड को जननी (JANANI) पोर्टल के माध्यम से मैप किया जाएगा।
- बच्चों के रिकॉर्ड को RBSK (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) और U-WIN पोर्टलों के माध्यम से दर्ज किया जाएगा।
- ये सभी प्लेटफॉर्म मिलकर एक एकीकृत AMB अभियान पोर्टल (AMB Abhiyaan Portal) में समाहित हो जाएंगे, जिससे डेटा-आधारित सटीक योजना बनाई जा सकेगी।
5. राष्ट्रव्यापी जन भागीदारी अभियान
- इसके तहत केवल दवाओं की आपूर्ति ही नहीं, बल्कि ‘जन चेतना’ के माध्यम से सामुदायिक भागीदारी (Community Participation) को बढ़ावा देकर इसे एक जन आंदोलन का रूप दिया जाएगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक (Component) | मुख्य तथ्य (Quick Pointers for Prelims) |
| नोडल मंत्रालय | केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय। |
| रणनीति का नया नाम | 7x7x7 फ्रेमवर्क (7 लाभार्थी, 7 हस्तक्षेप, 7 संस्थागत तंत्र)। |
| नया जोड़ा गया लाभार्थी समूह | कम जन्म वजन वाले (Low Birth Weight) शिशु (0–6 महीने)। |
| नया दृष्टिकोण | T4 (Test, Treat, Talk and Track)। |
| गंभीर मामलों के लिए दवा | फेरिक कार्बोक्सीमाल्टोज़ (FCM) और आयरन सुक्रोज़ (इंट्रावेनस थेरेपी)। |
| एकीकृत डिजिटल पोर्टल | जननी (JANANI), RBSK और U-WIN का AMB अभियान पोर्टल में विलय। |
भारत-सेशल्स संबंध और वैश्विक पर्यावरण नेतृत्व (2026)
- प्रारंभिक परीक्षा: अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार, द्विपक्षीय समझौते, पर्यावरण पहल (मिशन LiFE, ISA)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): भारत और उसके पड़ोसी/विस्तारित पड़ोस के संबंध, द्विपक्षीय समूह और समझौते; पर्यावरण संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और ‘ब्लू इकोनॉमी’ (Blue Economy)।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
- जून 2026 में सेशल्स (Seychelles) के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी द्वारा भारतीय प्रधानमंत्री को सेशल्स के सर्वोच्च राष्ट्रपति सम्मान ‘गार्जियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ (Guardian of the Blue Horizon) से सम्मानित किया गया। यह सम्मान दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर पर दिया गया है। विशेष तथ्य यह है कि यह प्रतिष्ठित सम्मान पाने वाले वे दुनिया के पहले व्यक्ति हैं।
सम्मान के मुख्य कारण और भारत का नेतृत्व
यह पुरस्कार प्रधानमंत्री के ‘हरित नेतृत्व’ (Green Leadership) और वैश्विक मंच पर विकासशील देशों तथा छोटे द्वीपीय देशों के हितों को आगे बढ़ाने के लिए दिया गया है। इसके केंद्र में निम्नलिखित विषय हैं:
1. ब्लू इकोनॉमी और महासागर प्रबंधन
- महासागर संसाधनों के सतत प्रबंधन, जलवायु कार्रवाई (Climate Action) और लघु द्वीपीय विकासशील राज्यों (SIDS – Small Island Developing States) की विकासात्मक आकांक्षाओं को बढ़ावा देने में भारत की अग्रणी भूमिका को मान्यता दी गई है।
2. भारत की वैश्विक पर्यावरणीय पहलें
यह पुरस्कार भारत द्वारा शुरू किए गए वैश्विक पर्यावरण आंदोलनों और संगठनों के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है:
- अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA): सौर ऊर्जा के वैश्विक विस्तार के लिए भारत और फ्रांस की संयुक्त पहल।
- मिशन LiFE (Lifestyle for Environment): पर्यावरण के अनुकूल जीवन शैली अपनाने का वैश्विक जन आंदोलन।
- एक पेड़ माँ के नाम (Plant for Mother): हाल ही में शुरू किया गया राष्ट्रव्यापी और वैश्विक वृक्षारोपण अभियान।
- अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट गठबंधन (IBCA): बाघ, शेर, तेंदुए जैसे 7 बड़े बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण के लिए वैश्विक मंच।
सेशल्स के लिए भारत का महत्व
- यह सम्मान हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में क्षमता निर्माण, सतत विकास पहलों और साझा प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने में भारत की ‘विश्वसनीय भागीदार’ (Trusted Partner) की छवि को मजबूत करता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
पुरस्कार एवं पर्यावरण पहल मैट्रिक्स
| घटक / तथ्य (Component) | मुख्य विवरण (Core Facts for Prelims) |
| पुरस्कार का नाम | ‘गार्जियन ऑफ द बीच होराइजन’ (Guardian of the Blue Horizon) |
| प्रदाता देश | सेशल्स (Seychelles) — हिंद महासागर का एक रणनीतिक द्वीपीय देश। |
| राजनयिक मील का पत्थर | वर्ष 2026 में भारत और सेशल्स के राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे हुए। |
| पूर्व में मिले वैश्विक पर्यावरण पुरस्कार | * एफएओ (FAO) द्वारा एग्रिकोला मेडल (Agricola Medal) * संयुक्त राष्ट्र का ‘चैंपियन ऑफ द अर्थ’ पुरस्कार (UN Champion of the Earth) * सियोल शांति पुरस्कार। |
पीएम फैमिली केयर ट्रैकर और कल्याणकारी योजनाओं का सुदृढ़ीकरण
- प्रारंभिक परीक्षा: केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण योजनाएं, ई-गवर्नेंस, डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचा (DPI)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): केंद्र और राज्यों द्वारा जनसंख्या के कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं और उनका प्रदर्शन; इन योजनाओं के तंत्र, कानून, संस्थान और निकाय; ई-गवर्नेंस के अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएं और सीमाएं।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
- जून 2026 में केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने गुजरात के गांधीनगर में ‘पीएम फैमिली केयर ट्रैकर’ (PM Family Care Tracker) पायलट प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया। यह डिजिटल पहल प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) और लक्षित कल्याणकारी वितरण (Targeted Welfare Delivery) को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
पीएम फैमिली केयर ट्रैकर के मुख्य बिंदु
1. विज़न और उद्देश्य
- स्वचालित लाभ वितरण: इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि विभिन्न सरकारी योजनाओं (जैसे स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा आदि) का लाभ बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप या देरी के लाभार्थियों तक स्वचालित (Automatically) और समयबद्ध तरीके से पहुंचे।
- चुनौतियों का समाधान: यह प्लेटफार्म मुख्य रूप से तीन बड़ी चुनौतियों का समाधान करेगा—लाभार्थियों की सटीक पहचान, सरकार की पहुंच (Outreach), और कल्याणकारी योजनाओं की जमीनी स्तर पर प्रभावी डिलीवरी।
2. कार्यप्रणाली और तकनीकी ढांचा
- जन्म और मृत्यु पंजीकरण का एकीकरण: इस ट्रैकर को देश के जन्म और मृत्यु पंजीकरण डेटाबेस से पूरी तरह एकीकृत (Integrate) किया जाएगा।
- यूनीक आईडी (Unique ID): इसके तहत प्रत्येक बच्चे को एक यूनीक आईडी और विशिष्ट नंबर प्रदान किया जाएगा। जैसे ही किसी बच्चे का जन्म दर्ज होगा, उसका डेटा सिस्टम में आ जाएगा और वह पात्रता के अनुसार स्वतः ही संबंधित योजनाओं से जुड़ जाएगा।
- एकीकृत निगरानी प्रणाली: यह मंच एक समग्र डेटाबेस तैयार करता है, जिससे नीति निर्माताओं और अधिकारियों को जरूरतमंद व्यक्तियों की पहचान करने और उन पर विशेष ध्यान देने में मदद मिलेगी।
3. सामाजिक और स्वास्थ्य क्षेत्र में एकीकरण
- स्वास्थ्य अवसंरचना की ट्रैकिंग: यह ट्रैकर आयुष्मान भारत (₹5 लाख तक का मुफ्त इलाज), जन औषधि केंद्र (किफायती दवाएं) और बुनियादी स्वास्थ्य ढांचे से जुड़े डेटा को ट्रैक और मॉनिटर करेगा।
- प्रारंभिक चरण से निगरानी: इसके शुभारंभ के अवसर पर बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाई गई और पोषण किट वितरित की गई, जो यह दर्शाती है कि यह ट्रैकर बाल स्वास्थ्य और पोषण संबंधी पहलों की रीयल-टाइम निगरानी करेगा।
4. कल्याणकारी शासन में बदलाव (Welfare Governance)
- पारदर्शिता और डीबीटी: डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के साथ मिलकर यह प्रणाली बिचौलियों की भूमिका को समाप्त करती है और यह सुनिश्चित करती है कि केंद्र सरकार द्वारा जारी की गई शत-प्रतिशत राशि सीधे गरीब परिवारों तक पहुंचे।
- मूलभूत सुविधाओं का एकीकरण: यह ट्रैकर पिछले वर्षों में गरीब परिवारों को प्रदान की गई बुनियादी सुविधाओं (जैसे बिजली, पक्के मकान, नल का जल, शौचालय और मुफ्त खाद्यान्न) के डेटा को एकीकृत कर भविष्य की आवश्यकताओं का सटीक विश्लेषण करेगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | मुख्य तथ्य (Quick Pointers for Prelims) |
| परियोजना का नाम | पीएम फैमिली केयर ट्रैकर (PM Family Care Tracker) |
| प्रायोगिक चरण (Pilot Project) की शुरुआत | गांधीनगर, गुजरात से। |
| मूल अवधारणा | ‘एकत्रित डेटाबेस’ के माध्यम से प्रत्येक बच्चे को एक यूनीक आईडी देना। |
| डेटा का आधार | जन्म और मृत्यु पंजीकरण डेटा का वास्तविक समय (Real-time) एकीकरण। |
| मुख्य तकनीकी लाभ | डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) का सुदृढ़ीकरण और स्वचालित लाभार्थी पहचान। |
भारत-मॉरीशस संबंध और ‘महासागर’ विज़न
- प्रारंभिक परीक्षा: अंतर्राष्ट्रीय संगठन, भारत और उसके पड़ोसी देश, हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) की रणनीतिक पहलें।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): भारत के हितों पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव, द्विपक्षीय संबंध और क्षेत्रीय समूह।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
- जून 2026 में सेशेल्स के ‘गोल्डन जुबली नेशनल डे’ समारोह के इतर, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री महामहिम डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम से विक्टोरिया (माहे) में मुलाकात की। नवंबर 2024 में मॉरीशस के प्रधानमंत्री के पदभार ग्रहण करने के बाद से दोनों नेताओं के बीच यह चौथी बैठक है, जो दोनों देशों के गहरे रणनीतिक और ऐतिहासिक संबंधों को दर्शाती है।
द्विपक्षीय बैठक के मुख्य बिंदु
1. विशेष आर्थिक पैकेज की समीक्षा
- दोनों नेताओं ने भारत द्वारा मॉरीशस को दिए गए विशेष आर्थिक पैकेज (Special Economic Package) के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा की।
- भारत समर्थित ये द्विपक्षीय परियोजनाएं मॉरीशस के स्वास्थ्य सेवा (Healthcare), कनेक्टिविटी, सतत विकास और ब्लू इकोनॉमी (Blue Economy) के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।
2. नीतिगत अभिसरण (Policy Convergence)
दोनों देशों के बीच की साझेदारी भारत की दो प्रमुख विदेश नीतियों के तहत संचालित हो रही है:
- नेबरहुड फर्स्ट (Neighbourhood First) नीति: पड़ोसियों को प्राथमिकता देने की भारत की कूटनीति।
- विज़न महासागर (Vision MAHASAGAR): इसका पूरा नाम Maritime And Holistic Action for Security And Growth for All in the Region है। यह हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और सामूहिक विकास के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।
3. ग्लोबल साउथ और क्षेत्रीय स्थिरता
- दोनों प्रधानमंत्रियों ने ग्लोबल साउथ (Global South) यानी विकासशील और अल्पविकसित देशों की आकांक्षाओं को वैश्विक मंचों पर उठाने की अपनी साझा प्रतिबद्धता दोहराई।
- इसके साथ ही, हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में शांति, स्थिरता और समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए मिलकर काम करने पर सहमति व्यक्त की।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| बिंदु | मुख्य तथ्य (Quick Pointers for Prelims) |
| बैठक का स्थान | विक्टोरिया, माहे (सेशेल्स) – सेशेल्स के राष्ट्रीय दिवस समारोह के इतर। |
| मॉरीशस के प्रधानमंत्री | डॉ. नवीनचंद्र रामगुलाम (Dr. Navinchandra Ramgoolam)। |
| मुख्य विज़न / नीति | विज़न महासागर (MAHASAGAR) और नेबरहुड फर्स्ट नीति। |
| सहयोग के मुख्य क्षेत्र | स्वास्थ्य सेवा, कनेक्टिविटी, सतत विकास और ब्लू इकोनॉमी। |
भारत-सेशेल्स संबंध – राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष और रणनीतिक साझेदारी
- प्रारंभिक परीक्षा: अंतर्राष्ट्रीय समझौते, भारत और उसके पड़ोसी/साझेदार देश, द्विपक्षीय तथा क्षेत्रीय समूह।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): भारत के हितों पर विकसित और विकासशील देशों की नीतियों और राजनीति का प्रभाव, द्विपक्षीय संबंध, हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भारत की रणनीतिक भूमिका।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
- 27–29 जून 2026 तक प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने सेशेल्स की आधिकारिक राजकीय यात्रा (State Visit) की। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंधों की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक संयुक्त स्मारक लोगो (Commemorative Logo) जारी किया गया और कई ऐतिहासिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
राजकीय यात्रा के मुख्य बिंदु और द्विपक्षीय समझौते
1. द्विपक्षीय वार्ता और सहयोग के क्षेत्र
प्रधानमंत्री मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी के बीच विक्टोरिया (माहे) में उच्च स्तरीय बैठक हुई। इसमें निम्नलिखित प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी:
- पारंपरिक क्षेत्र: स्वास्थ्य, शिक्षा, क्षमता निर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा, सामाजिक बुनियादी ढांचा और सतत विकास।
- रणनीतिक व समुद्री सुरक्षा: हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में अवैध रूप से मछली पकड़ने (Illegal Fishing), मादक पदार्थों की तस्करी (Drug Trafficking) और समुद्री डकैती (Piracy) जैसी साझा चुनौतियों पर चर्चा की गई।
2. प्रमुख समझौता ज्ञापन (MoUs) और वित्तीय सहायता
यात्रा के दौरान रक्षा, अंतरिक्ष और डिजिटल कनेक्टिविटी सहित कई महत्वपूर्ण समझौतों का आदान-प्रदान किया गया:
- लाइन ऑफ क्रेडिट (LoC): भारत ने सेशेल्स के विकास के लिए ₹1250 करोड़ (INR 1250 Crores) की लाइन ऑफ क्रेडिट देने की घोषणा की।
- समझौते के मुख्य क्षेत्र: क्षमता निर्माण, UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) का विस्तार, स्वास्थ्य, कृषि, नौवहन (Shipping), अंतरिक्ष (Space), प्रत्यर्पण संधि (Extradition) और विकास सहयोग।
- खाद्य और बुनियादी ढांचा सहायता: खाद्य सुरक्षा, व्यावसायिक प्रशिक्षण और रक्षा अवसंरचना से जुड़ी कई नई घोषणाएं की गईं।
3. बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग
- CDRI में शामिल होना: सेशेल्स ने आधिकारिक तौर पर भारत के नेतृत्व वाले ‘कोआलिशन फॉर डिजास्टर रेजिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर’ (CDRI – आपदा प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे के लिए गठबंधन) में शामिल होने की घोषणा की।
4. ऐतिहासिक विधायी संबोधन
- प्रधानमंत्री मोदी ने सेशेल्स की नेशनल असेंबली (संसद) के एक असाधारण सत्र (Extraordinary Sitting) को संबोधित किया।
- वह सेशेल्स की संसद को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने हैं। अपने संबोधन में उन्होंने दोनों देशों के लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय आदान-प्रदान को बढ़ाने पर जोर दिया।
- इसके अतिरिक्त, सेशेल्स के विपक्ष के नेता (Leader of Opposition) एच.ई. मिस्टर बर्नार्ड जॉर्ज ने भी प्रधानमंत्री से मुलाकात की।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| बिंदु / घटक | मुख्य तथ्य (Quick Pointers for Prelims) |
| यात्रा की अवधि | 27–29 जून 2026 (राजकीय यात्रा)। |
| द्विपक्षीय मील का पत्थर | भारत-सेशेल्स राजनयिक संबंधों के 50 वर्ष पूरे। |
| वित्तीय सहायता | ₹1250 करोड़ की लाइन ऑफ क्रेडिट (Line of Credit)। |
| डिजिटल कूटनीति | सेशेल्स में UPI (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) लागू करने के लिए समझौता। |
| नया संगठन जुड़ाव | सेशेल्स अब CDRI (Coalition for Disaster Resilient Infrastructure) का सदस्य बना। |
| ऐतिहासिक उपलब्धि | सेशेल्स की नेशनल असेंबली को संबोधित करने वाले पहले भारतीय पीएम। |
ग्रामीण आंतरिक लेखापरीक्षा पोर्टल (Rural Internal Audit Portal) और डिजिटल गवर्नेंस
- प्रारंभिक परीक्षा: सरकारी योजनाएं, ई-गवर्नेंस, ग्रामीण विकास पहलें।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): ई-गवर्नेंस के अनुप्रयोग, मॉडल, सफलताएं और सीमाएं; पारदर्शिता और जवाबदेही (Transparency & Accountability); संस्थागत और अन्य उपाय।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
- 28 जून 2026 को केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली के पूसा परिसर में आयोजित “राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन” के दौरान ‘ग्रामीण आंतरिक लेखापरीक्षा पोर्टल’ (Rural Internal Audit Portal) लॉन्च किया। यह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सक्षम पोर्टल ग्रामीण विकास मंत्रालय में पारदर्शिता और तकनीक-आधारित सुशासन (Governance) को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
ग्रामीण आंतरिक लेखापरीक्षा पोर्टल क्या है?
यह जोखिम-आधारित (Risk-based) और अनुपालन (Compliance) दोनों प्रकार की ऑडिट के एंड-टू-एंड प्रबंधन के लिए भारत का अपनी तरह का पहला एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म है।

- विकासकर्ता: इसे ग्रामीण विकास मंत्रालय के मुख्य लेखा नियंत्रक कार्यालय (CCA) द्वारा परिकल्पित किया गया है और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के सहयोग से विकसित किया गया है।
- पायलट चरण: इसे पहली बार 1 अप्रैल 2025 को उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू किया गया था, जिसकी सफलता के बाद अक्टूबर 2025 से इसके सभी मुख्य मॉड्यूल पूरे देश में चालू कर दिए गए।
1. पोर्टल के मुख्य उद्देश्य
- पूर्ण डिजिटलीकरण: दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही में सुधार के लिए पूरी आंतरिक ऑडिट प्रक्रिया को कागज रहित (Paperless) बनाना।
- केंद्रीकृत रिपॉजिटरी: ऑडिट इकाइयों, ऑडिट आपत्तियों, ‘कार्रवाई की गई रिपोर्ट’ (ATR) और रिकॉर्ड का एक केंद्रीय डिजिटल डेटाबेस तैयार करना।
- वास्तविक समय की निगरानी: ऑडिट की प्रगति, अनुपालन की स्थिति और अनुमोदन वर्कफ़्लो की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग और विश्लेषण की सुविधा देना।
2. पोर्टल की अनूठी और क्रांतिकारी विशेषताएं
- मैप व्यू के माध्यम से भू-स्थानिक निगरानी (Geospatial Monitoring): इसमें एक ‘मैप व्यू मॉड्यूल’ (Map View Module) दिया गया है, जो पूरे भारत में चल रही ऑडिट गतिविधियों का एक नक्शा-आधारित दृश्य (Visualisation) दिखाता है। यह मॉड्यूल उन ग्रामीण क्षेत्रों/इकाइयों की पहचान करता है जहां कभी ऑडिट नहीं हुआ, जिससे संसाधनों का सही आवंटन सुनिश्चित होता है।
- AI और उन्नत विश्लेषण (Advanced Analytics): इस पोर्टल में जोखिम का आकलन करने, उच्च जोखिम वाली संस्थाओं की पहचान करने, पैटर्न की पहचान (Pattern Recognition) और साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने के लिए AI-संचालित ऑडिट सहायता जोड़ी जा रही है।
- भूमिका-आधारित ढांचा: ऑडिटर्स, ऑडिट होने वाली इकाइयों, राज्य सरकारों, जिला-स्तरीय उपयोगकर्ताओं और प्रमाणित आंतरिक लेखा परीक्षकों के लिए सुरक्षित, अलग-अलग भूमिका-आधारित एक्सेस दिया गया है।
- बहुभाषी और उपयोगकर्ता-अनुकूल: इसे विभिन्न हितधारकों की भाषाई सुगमता के लिए बहुभाषी इंटरफ़ेस के साथ डिज़ाइन किया गया है।
3. राष्ट्रीय मान्यता और अखिल भारतीय विस्तार
- इस पोर्टल की सफलता को देखते हुए, वित्त मंत्रालय (व्यय विभाग) के महालेखा नियंत्रक (CGA) कार्यालय ने दिसंबर 2025 में एक कार्यालय ज्ञापन (OM) जारी कर इस आंतरिक लेखापरीक्षा मॉड्यूल को भारत सरकार के सभी नागरिक मंत्रालयों और विभागों (Civil Ministries & Departments) के कार्यालयों में लागू करने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। अब इसे पूरे सरकारी तंत्र के लिए एक बेंचमार्क प्लेटफॉर्म मान लिया गया है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | मुख्य तथ्य (Quick Pointers for Prelims) |
| पोर्टल का नाम | ग्रामीण आंतरिक लेखापरीक्षा पोर्टल (Rural Internal Audit Portal) |
| प्रशासनिक मंत्रालय | केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय (Ministry of Rural Development) |
| तकनीकी भागीदार | मुख्य लेखा नियंत्रक कार्यालय (CCA) और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) |
| पायलट जिला | चंदौली जिला, उत्तर प्रदेश (1 अप्रैल 2025) |
| विशेष तकनीक | आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) सक्षम और मैप व्यू मॉड्यूल (Geospatial) |
| व्यापक विस्तार | वित्त मंत्रालय के CGA द्वारा सभी नागरिक मंत्रालयों में लागू करने की मंजूरी। |