30 June 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के संकलन में ग्रामीण विकास मंत्रालय द्वारा आयोजित ऐतिहासिक ‘राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन’ के बड़े निर्णयों, जैसे मनरेगा (MGNREGS) का स्थान लेने वाली नई ‘VB-GRAM-G’ योजना और महिला सशक्तिकरण हेतु ‘SHE LEAPS’ प्लेटफॉर्म के साथ-साथ पंचायती राज मंत्रालय द्वारा ग्राम सभाओं में कम भागीदारी पर जारी राष्ट्रीय अध्ययन रिपोर्ट को शामिल किया गया है।
सुमन रोडमैप 2030: मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सुरक्षा रणनीति
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीतियां, सरकारी योजनाएं, सतत विकास लक्ष्य (SDG)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): स्वास्थ्य, शिक्षा, मानव संसाधनों से संबंधित सामाजिक क्षेत्र/सेवाओं के विकास और प्रबंधन से संबंधित विषय; आबादी के संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण परिषद (CCHFW) के 16वें सम्मेलन के दौरान ‘सुमन रोडमैप 2030’ लॉन्च किया है। यह नीतिगत ढांचा वर्ष 2030 तक मातृ और नवजात शिशु मृत्यु दर को कम करने के लिए सतत विकास लक्ष्यों (SDG) को प्राप्त करने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

रोडमैप के मुख्य स्तंभ और रणनीतिक दृष्टिकोण
1. जीवन-चक्र दृष्टिकोण (Life-Cycle Approach)
यह रोडमैप RMNCHA+N (प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल, किशोर स्वास्थ्य और पोषण) फ्रेमवर्क के तहत काम करता है। यह गर्भावस्था से पहले (Pre-pregnancy), गर्भावस्था के दौरान, प्रसव और प्रसव के तुरंत बाद की अवधि के हस्तक्षेपों को एक साथ जोड़ता है।
2. उच्च जोखिम वाली गर्भावस्था का 4-चरणीय प्रबंधन
जटिलताओं को रोकने के लिए हाई-रिस्क प्रेगनेंसी की ट्रैकिंग चार स्तरों पर होगी:
- प्रसव पूर्व देखभाल (Antenatal Care)
- तीसरी तिमाही की देखभाल (Third-Trimester Care)
- प्रसव के दौरान देखभाल (Intrapartum Care)
- प्रसवोत्तर अवधि (Postnatal Period)
3. लक्षित भौगोलिक दृष्टिकोण (Differentiated Strategy)
- 13 उच्च-फोकस राज्य: असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल।
- 130 प्रभावित जिले: इन राज्यों के सर्वाधिक प्रभावित 130 जिलों में समयबद्ध और विशेष हस्तक्षेप किए जाएंगे ताकि क्षेत्रीय असमानताओं को दूर किया जा सके।
प्रमुख नीतिगत हस्तक्षेप और तकनीकी नवाचार
उच्च-फोकस राज्यों के लिए विशेष पैकेज
- ASHA कार्यकर्ताओं के पाक्षिक दौरे: गर्भावस्था के 8वें और 9वें महीने में आशा कार्यकर्ता हर दो हफ्ते में घर जाकर खतरे के लक्षणों की पहचान करेंगी।
- अवसंरचना सुदृढ़ीकरण: दुर्गम और जनजातीय क्षेत्रों में ‘बर्थ वेटिंग होम्स’ (Birth Waiting Homes), मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग (MCH Wings), और ‘ऑब्स्टेट्रिक हाई डिपेंडेंसी यूनिट्स’ (Obstetric HDUs) की स्थापना की जाएगी।
- वित्तीय सहायता: प्रसवोत्तर अवधि (Postnatal Period) के दौरान नामित देखभालकर्ताओं को वित्तीय सहायता और आपातकालीन परिवहन के लिए विशेष प्रोत्साहन मिलेगा।
सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सामान्य रणनीतियाँ
- प्री-प्रेगनेंसी केयर: गर्भधारण की योजना बना रही महिलाओं के लिए फोलिक एसिड अनुपूरण (Supplementation) को संस्थागत बनाना।
- सामुदायिक स्वामित्व: स्वास्थ्य सुधारों में स्थानीय भागीदारी बढ़ाने के लिए ‘सुमन पंचायत’ और ‘मदर्स पिकनिक’ जैसी अभिनव पहलें।
- क्लिनिकल और डिजिटल टूल: प्रसव के दौरान रक्तस्राव प्रबंधन के लिए नॉन-न्यूमेटिक एंटी-शॉक गारमेंट्स (NASG) का उपयोग, AI-सक्षम लेबर रूम और जननी पोर्टल के माध्यम से रीयल-टाइम डिजिटल मॉनिटरिंग।
- SSBSK का एकीकरण: प्रसव से लेकर 36 महीने तक के बच्चों की निर्बाध होम-बेस्ड केयर के लिए समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (SSBSK) को जोड़ना।
- संस्थागत तंत्र: शिकायत निवारण के लिए एक केंद्रीयकृत ‘सुमन कॉल सेंटर’ और उत्कृष्ट स्वास्थ्य देखभाल के लिए ‘सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस’ की स्थापना।
रोडमैप के मुख्य लक्ष्य (2030)
- मातृ मृत्यु अनुपात (MMR): राष्ट्रीय स्तर पर MMR को 70 प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों से नीचे लाना।
- शिशु व नवजात मृत्यु दर (IMR & NMR): नवजात और शिशु मृत्यु दर में भारी कमी लाकर रोकने योग्य मौतों को शून्य के स्तर पर पहुंचाना।
- सार्वभौमिक संतृप्ति (Universal Saturation): देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की 100% पहुंच सुनिश्चित करना।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | मुख्य परीक्षा और प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य |
| योजना / रोडमैप | सुमन रोडमैप 2030 |
| नोडल प्रभाग | मातृ स्वास्थ्य प्रभाग, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय |
| मूल फ्रेमवर्क | RMNCHA+N (प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल, किशोर स्वास्थ्य और पोषण) |
| MMR का लक्ष्य | वर्ष 2030 तक < 70 प्रति एक लाख जीवित जन्म |
| निगरानी पोर्टल | जननी पोर्टल (डिजिटल ट्रैकिंग और रिपोर्टिंग हेतु) |
| सामुदायिक जुड़ाव | सुमन पंचायत और मदर्स पिकनिक पहलें |
| शिशु सुरक्षा अवधि | SSBSK के तहत जन्म से लेकर 36 महीने तक निरंतर घर पर देखभाल |
राष्ट्रीय बाघ पुनर्परिचय कार्यशाला और भविष्य का रोडमैप
- प्रारंभिक परीक्षा: जैव विविधता, राष्ट्रीय उद्यान और बाघ अभयारण्य (Tiger Reserves), पर्यावरण संरक्षण पहलें।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): संरक्षण (Conservation), पर्यावरण प्रदूषण और क्षरण, वन्यजीव गलियारे (Wildlife Corridors) और प्रजाति पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम (Species Recovery Programmes)।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
28 जून 2026 को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने राजस्थान के अलवर में “बाघ पुनर्परिचय: अवसर और चुनौतियाँ” (Tiger Reintroduction: Opportunities & Challenges) पर राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन किया। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) द्वारा आयोजित इस कार्यशाला में देश के 12 मुख्य वन्यजीव प्रतिपालकों (Chief Wildlife Wardens) और 18 फील्ड निदेशकों ने बाघ-कमी वाले क्षेत्रों (Tiger-deficient Landscapes) में बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए एक वैज्ञानिक रोडमैप पर विचार-विमर्श किया।
कार्यशाला के मुख्य निष्कर्ष और रणनीतिक रोडमैप
1. वैज्ञानिक पुनर्परिचय और स्टॉक पुनर्प्राप्ति ढांचा
- भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के टाइगर सेल ने “बाघ-कमी वाले क्षेत्रों के भंडारण के लिए रोडमैप” (Road Map for Stocking Tiger-deficient Areas) प्रस्तुत किया।
- इसका मुख्य उद्देश्य देश के उन उपयुक्त भौगोलिक क्षेत्रों और टाइगर रिजर्व की पहचान करना है जहाँ बाघों की आबादी कम हो चुकी है, ताकि वहाँ वैज्ञानिक तरीके से बाघों को फिर से बसाया जा सके।
2. शिकार आधार में वृद्धि (Prey Augmentation)
- बाघों के दीर्घकालिक अस्तित्व के लिए केवल बाघों को छोड़ना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके भोजन (शिकार आधार) को बढ़ाना अनिवार्य है।
- कार्यशाला में इन-सिटू (In-situ) शिकार वृद्धि के साथ-साथ गौर (Gaur – भारतीय बिली) और बारासिंघा जैसी प्रजातियों के स्थानांतरण (Translocation) पर विशेष जोर दिया गया ताकि स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र मजबूत हो सके।
3. कम बाघ घनत्व वाले रिज़र्व की तैयारी
देश के जिन टाइगर रिज़र्व में बाघों का घनत्व बहुत कम है, उन्हें भविष्य की रिकवरी के लिए तैयार किया जा रहा है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- बुक्सा – पश्चिम बंगाल
- अचानकमार और उदंती-सीतानदी – छत्तीसगढ़
- इंद्रावती – छत्तीसगढ़
- पलामू – झारखंड
प्रोजेक्ट चीता से सीख
कार्यशाला में ‘प्रोजेक्ट चीता’ पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया। इसे दुनिया का पहला अंतर-महाद्वीपीय बड़े मांसाहारी जीव पुनर्परिचय कार्यक्रम (World’s first inter-continental large carnivore reintroduction) माना जाता है। इस प्रोजेक्ट से मिले अनुभवों और पाठों (जैसे सैटेलाइट ट्रैकिंग, सुरक्षा व्यवस्था और अनुकूलन प्रबंधन) का उपयोग अब भारत में बाघों और अन्य वन्यजीवों के भावी स्थानांतरण और पुनर्प्राप्ति कार्यक्रमों को सुरक्षित बनाने में किया जाएगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | मुख्य तथ्य (Quick Pointers for Prelims) |
| आयोजन स्थल | अलवर, राजस्थान (इसके बाद प्रतिभागियों ने सरिस्का टाइगर रिजर्व का दौरा किया) |
| आयोजक संस्था | राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और MoEFCC |
| तकनीकी भागीदार | भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII – Wildlife Institute of India) |
| शिकार संवर्धन जीव | गौर (Gaur) और बारासिंघा (Prey Augmentation हेतु स्थानान्तरण) |
| कम घनत्व वाले लक्षित रिज़र्व | बुक्सा (WB), अचानकमार, उदंती-सीतानदी, इंद्रावती (Chhattisgarh), पलामू (Jharkhand) |
| केस स्टडीज वाले रिज़र्व | सरिस्का, मुकुंदरा हिल्स, पन्ना, वीरांगना दुर्गावती, सतकोसिया, सिमलीपाल, राजाजी, सह्याद्रि, नवेगांव-नागझिरा |
किसान सारथी प्लेटफॉर्म और डिजिटल कृषि कूटनीति
- प्रारंभिक परीक्षा: प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष कृषि सहायता, सरकारी योजनाएं, ई-प्रौद्योगिकी (E-technology) के माध्यम से किसानों की सहायता।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): सूचना प्रौद्योगिकी (IT) का कृषि में अनुप्रयोग; किसानों की सहायता के लिए ई-तकनीक; कृषि विस्तार सेवाएं (Agricultural Extension Services)।
Why in News?
भारत के सबसे बड़े एकीकृत डिजिटल कृषि-सलाहकार प्लेटफॉर्म ‘किसान सारथी’ ने देश के कृषि पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। जुलाई 2021 में लॉन्च होने के बाद से 25 जून 2026 तक इस प्लेटफॉर्म ने देश के 36 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के 768 जिलों और 6.63 लाख गांवों को अपने नेटवर्क में शामिल कर लिया है।
किसान सारथी प्लेटफॉर्म क्या है?
यह भारतीय किसानों को उनकी स्थानीय भाषा में सही समय पर प्रामाणिक और वैज्ञानिक कृषि सलाह प्रदान करने वाला एक अग्रणी डिजिटल प्लेटफॉर्म है।
- संयुक्त पहल: यह इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) तथा कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की एक अनूठी और एकीकृत पहल है।
- कार्यान्वयन एजेंसियां: इसे ‘भारतीय कृषि सांख्यिकी अनुसंधान संस्थान’ (IASRI) और ‘डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन’ (DIC) द्वारा संयुक्त रूप से संचालित किया जा रहा है।
- संस्थागत नेटवर्क: यह ऐप देश भर के 730 से अधिक कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs), 100 से अधिक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) संस्थानों और 65 से अधिक कृषि विश्वविद्यालयों को सीधे किसानों से जोड़ता है।
प्लेटफ़ॉर्म की तकनीकी संरचना और कार्यप्रणाली
1. IIDS तकनीक (Interactive Information Dissemination System)
किसान सारथी प्लेटफॉर्म की रीढ़ IIDS तकनीक है, जो किसानों और कृषि वैज्ञानिकों के बीच द्वि-मार्गी संचार (Two-way Communication) सुनिश्चित करती है।
- इसके तहत किसान वॉयस कॉल, वीडियो कॉल, टेक्स्ट, इमेज और वीडियो चैट के माध्यम से अपनी समस्याओं को विशेषज्ञों के सामने रख सकते हैं।
- KYF (Know Your Farmer) दृष्टिकोण: यह प्रणाली ‘नो योर फार्मर’ दृष्टिकोण पर काम करती है, जिससे वैज्ञानिकों को किसान की प्रोफाइल और उसके खेत के पिछले इतिहास (History) की जानकारी रहती है। इससे सलाह अधिक सटीक और व्यक्तिगत (Personalized) हो जाती है।
2. अन्य राष्ट्रीय डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ एकीकरण
किसानों को अलग-अलग सेवाओं के लिए भटचना न पड़े, इसलिए किसान सारथी को भारत के 5 बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ एकीकृत किया गया है:
- Kisan Call Centre (KCC): तत्काल टेलीफोनिक सहायता के लिए।
- Common Service Centre (CSC): ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल पहुंच बढ़ाने के लिए।
- India Meteorological Department (IMD): सटीक मौसम पूर्वानुमान के लिए।
- MyScheme: सरकारी योजनाओं की पात्रता जांचने के लिए। इस पोर्टल पर वर्तमान में 610 योजनाएं उपलब्ध हैं, जिनमें 102 केंद्रीय योजनाएं हैं (जैसे PM-KISAN)।
- BHASHINI (भाषिनी): स्थानीय भाषाओं में लाइव अनुवाद और संवाद के लिए। इसके जरिए किसान 13 क्षेत्रीय भाषाओं में विशेषज्ञों से सीधा संवाद कर सकते हैं।
कृषि हितधारकों को मिलने वाले लाभ
1. किसानों के लिए (For Farmers)
- व्यापक कवरेज: इसमें केवल अनाज और दालें ही नहीं, बल्कि बागवानी, वृक्षारोपण फसलें, पशुपालन, पोल्ट्री और मत्स्य पालन (Fisheries) जैसे संबद्ध क्षेत्रों के लिए भी स्थान-विशिष्ट सलाह दी जाती है।
- मंडी भाव: किसान आसानी से अपने जिले और राज्य की मंडियों के दैनिक भाव और बाजार के रुझान (Trends) देख सकते हैं।
2. वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं के लिए (For Policymakers & Experts)
- लैब-टू-लैंड ट्रांसफर: प्रयोगशालाओं में होने वाले नए शोधों और तकनीकों को सीधे किसानों के खेतों तक (Lab-to-Land) तेजी से पहुंचाया जा रहा है।
- डेटा-संचालित नीतियां: नीति निर्माताओं को वास्तविक समय के फील्ड इनसाइट्स और डैशबोर्ड एनालिटिक्स मिलते हैं, जिससे साक्ष्य-आधारित (Evidence-based) कृषि योजनाएं बनाना आसान होता है।
प्रगति और लाभार्थी कवरेज (25 जून 2026 तक के आंकड़े)
- पंजीकृत किसान: प्लेटफॉर्म पर कुल 2.95 करोड़ किसान पंजीकृत हैं, जिनमें 56.16 लाख महिला लाभार्थी शामिल हैं।
- पंजीकरण का माध्यम: सबसे अधिक 2.89 करोड़ किसानों ने अपने नजदीकी KVK जाकर पंजीकरण कराया है। इसके बाद किसान कॉल सेंटर (5.35 लाख), मोबाइल ऐप (21,517), वेब पोर्टल (2,416) और CSC (39,193) का स्थान है।
- समाधान: प्लेटफॉर्म अब तक 19.21 लाख से अधिक प्रश्नों का समाधान कर चुका है और 34 राज्यों/यूटी में 351 कृषि वस्तुओं को कवर करते हुए 21,900 विशिष्ट सलाहकार संदेश (Advisories) जारी कर चुका है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | मुख्य तथ्य (Quick Pointers for Prelims) |
| प्लेटफ़ॉर्म का नाम | किसान सारथी (Kisan Sarathi) – जुलाई 2021 में लॉन्च। |
| संबद्ध मंत्रालय | इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) + कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय। |
| कार्यान्वयनकर्ता | IASRI और डिजिटल इंडिया कॉर्पोरेशन (DIC)। |
| मुख्य तकनीक | IIDS (Interactive Information Dissemination System) और KYF दृष्टिकोण। |
| भाषा समर्थन | 13 क्षेत्रीय भाषाओं में लाइव संवाद (भाषिनी प्लेटफॉर्म के सहयोग से)। |
| योजनाओं की उपलब्धता | कुल 610 योजनाएं (102 केंद्रीय और शेष राज्य/UT की योजनाएं)। |
| पहुंच के माध्यम | कॉल सेंटर, CSC, वेब पोर्टल, व्हाट्सएप (WhatsApp) और मोबाइल ऐप। |
TRL कम्पास प्लेटफॉर्म और भारत का डीप-टेक इनोवेशन इकोसिस्टम
- प्रारंभिक परीक्षा: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में भारतीयों की उपलब्धियां, देशज रूप से प्रौद्योगिकी का विकास और नई प्रौद्योगिकियों का विकास।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): सूचना प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, कंप्यूटर, रोबोटिक्स, नैनो-प्रौद्योगिकी, बायो-प्रौद्योगिकी से संबंधित जागरूकता; बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) से संबंधित मुद्दे।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
29 जून 2026 को भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय (OPSA) ने ‘डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया’ (DSCI) के सहयोग से ‘TRL कम्पास प्लेटफॉर्म’ (TRL Compass Platform) लॉन्च किया है। भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) प्रो. अजय कुमार सूद की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में दोनों संस्थाओं के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoUs) पर भी हस्ताक्षर किए गए ताकि देश के अनुसंधान और गहरे तकनीकी (Deep-Tech) नवाचारों को एक साझा राष्ट्रीय मानक प्रदान किया जा सके।
TRL कम्पास प्लेटफॉर्म क्या है और इसकी आवश्यकता क्यों पड़ी?
भारत में प्रयोगशालाओं (Labs) में बहुत सारे शानदार शोध और आविष्कार होते हैं, लेकिन उनमें से अधिकतर बाजार (Market) तक नहीं पहुंच पाते। इसका सबसे बड़ा कारण यह था कि हमारे पास यह मापने का कोई पैमाना नहीं था कि कोई तकनीक व्यावसायिक रूप से उपयोग करने के लिए कितनी तैयार (Mature) है। इसी अंतर को पाटने के लिए ‘TRL कम्पास’ लॉन्च किया गया है।
1. वैश्विक पैमाने का भारतीयकरण (Customised 9-Level Scale)
- यह प्लेटफॉर्म वैश्विक स्तर पर स्वीकृत 9-स्तरीय टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल (TRL) स्केल को भारतीय अनुसंधान और नवाचार इकोसिस्टम की आवश्यकताओं के अनुसार ढालता है।
- यह स्तर 1 (बुनियादी सिद्धांतों का अवलोकन) से लेकर स्तर 9 (वास्तविक परिचालन परिवेश में तकनीक का सफल प्रदर्शन) तक किसी भी तकनीक की परिपक्वता को मापता है।
2. फंडिंग और मूल्यांकन में निष्पक्षता
- अब तक सरकारी फंडिंग के लिए परियोजनाओं का मूल्यांकन काफी हद तक व्यक्तिपरक (Subjective) होता था। TRL कम्पास इसे दस्तावेज़-आधारित और वस्तुनिष्ठ (Objective) मूल्यांकन में बदल देगा।
- यह विशेष रूप से अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) और अनुसंधान, विकास और नवाचार (RDI) फंड जैसी बड़ी राष्ट्रीय पहलों के तहत सार्वजनिक फंडिंग प्राप्त करने वाली परियोजनाओं के लिए एक साझा राष्ट्रीय मानक के रूप में कार्य करेगा।
3. क्षेत्र-विशिष्ट परिशिष्ट (Sector-Specific Focus)
इस प्लेटफ़ॉर्म में वर्तमान में दो सबसे महत्वपूर्ण उभरते क्षेत्रों के लिए विशेष मूल्यांकन प्रश्नावली और गाइड जोड़े गए हैं:
- स्वास्थ्य सेवा और फार्मास्यूटिकल्स (Healthcare & Pharmaceuticals)
- सॉफ्टवेयर (Software)
OPSA और DSCI के बीच समझौते (MoU) के मुख्य बिंदु
तकनीकी मूल्यांकन को जमीन पर उतारने के लिए प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय और डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया मिलकर निम्नलिखित क्षेत्रों पर काम करेंगे:
- प्रौद्योगिकी रडार पद्धति (Technology Radar Methodology): भविष्य की उभरती प्रौद्योगिकियों की पहचान करने, उनका पूर्वानुमान लगाने (Technology Forecasting) और देश की क्षमता का नक्शा (Capability Mapping) तैयार करने के लिए एक आधुनिक ढांचा विकसित करना।
- विशेषज्ञों का पूल तैयार करना: पूरे देश में प्रयोगशालाओं और संस्थानों में तकनीकों की सही जांच करने के लिए प्रशिक्षित मूल्यांकनकर्ताओं (Trained Assessors) का एक राष्ट्रीय पूल बनाना।
- सार्वभौमिक पहुंच: इस पूरे ढांचे, इसकी मूल्यांकन प्रश्नावलियों और मार्गदर्शिका को देश के सभी शोधकर्ताओं, परियोजना जांचकर्ताओं और समीक्षा एजेंसियों के लिए www.trlcompass.in पर खुला (Open-source) कर दिया गया है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | मुख्य परीक्षा और प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य |
| प्लेटफ़ॉर्म का नाम | TRL कम्पास प्लेटफॉर्म (TRL Compass Platform) |
| लॉन्चिंग संस्था | प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय (OPSA) + डेटा सिक्योरिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (DSCI) |
| मूल अवधारणा | 9-स्तरीय टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल (TRL) कार्यप्रणाली |
| संबद्ध राष्ट्रीय निकाय | अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) और RDI फंड |
| लक्षित प्रारंभिक क्षेत्र | स्वास्थ्य सेवा/फार्मास्यूटिकल्स और सॉफ्टवेयर क्षेत्र |
| वेबसाइट पोर्टल लिंक | www.trlcompass.in (शोधकर्ताओं हेतु ओपन एक्सेस) |
प्रोजेक्ट ब्रह्मांक और उत्तर-पूर्व में रणनीतिक कनेक्टिविटी
- प्रारंभिक परीक्षा: भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग, रणनीतिक बुनियादी ढांचा और उत्तर-पूर्वी राज्य।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): सीमावर्ती क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियाँ और उनका प्रबंधन; बुनियादी ढांचा (Infrastructure) – सड़कें, पुल और उत्तर-पूर्व भारत का विकास।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
सीमा सड़क संगठन (BRO) के ‘प्रोजेक्ट ब्रह्मांक’ ने 29 जून 2026 को अरुणाचल प्रदेश के राणाघाट में अपना 16वां स्थापना दिवस (16th Raising Day) मनाया।rugged terrain (उबड़-खाबड़ इलाकों) और कठिन मौसम की चुनौतियों के बावजूद, यह प्रोजेक्ट पिछले 15 वर्षों से देश की सीमाओं को सुरक्षित करने और सुदूर गांवों को मुख्यधारा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
प्रोजेक्ट ब्रह्मांक क्या है और इसका भौगोलिक दायरा क्या है?
सरल शब्दों में, यह सीमा सड़क संगठन (BRO) का एक विशेष रणनीतिक विंग (Project) है, जिसे भारत-चीन सीमा के निकट संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
- स्थापना: इसकी स्थापना 29 जून 2011 को अरुणाचल प्रदेश के पूर्वी सियांग जिले के राणाघाट में हुई थी और यह दिसंबर 2011 से पूरी तरह कार्यात्मक हो गया था।
- भौगोलिक जिम्मेदारी (Geographical Mandate): यह प्रोजेक्ट मुख्य रूप से अरुणाचल प्रदेश और असम के निम्नलिखित सीमावर्ती जिलों को कवर करता है:
- अरुणाचल प्रदेश: सियांग, पूर्वी सियांग, पश्चिमी सियांग, ऊपरी सियांग और शी-योमी (Shi-Yomi) जिले।
- असम: धेमाजी जिले के कुछ हिस्से।
मुख्य इंजीनियरिंग उपलब्धियां और बुनियादी ढांचा
प्रोजेक्ट ब्रह्मांक वर्तमान में 811 किलोमीटर सड़कों और लगभग 86 पुलों (छोटे कल्वर्ट से लेकर बड़े स्टील और आर्च ब्रिज तक) के विकास और रखरखाव का कार्य देख रहा है।
1. ऐतिहासिक इंजीनियरिंग सफलताएं (Major Achievements)
- सियोम नाला पुल: अलोंग-यिंगकियोंग मार्ग पर सियोम नाला के ऊपर 100 मीटर लंबा स्टील आर्च ब्रिज।
- सिमांग नाला पुल: इसी मार्ग पर सिमांग नाला के ऊपर बना 165 मीटर लंबा पीएससी (PSC) ब्रिज।
2. वित्त वर्ष 2025–26 के नए मील के पत्थर
- पुलों का उद्घाटन: सियांग और सियोम घाटियों में 390 मीटर की कुल लंबाई वाले 13 नए पुलों का निर्माण और उद्घाटन किया गया।
- सड़क सुदृढ़ीकरण: 61 किलोमीटर लंबी सड़कों की ब्लैकटॉपिंग (पक्कीकरण) को NHDL (National Highway Double Lane) मानकों के अनुसार अपग्रेड किया गया है।
- हेलीपैड का विकास: भारतीय सशस्त्र बलों की त्वरित आवाजाही और आपातकालीन चिकित्सा सहायता (Medical Evacuation) के लिए रणनीतिक हेलीपैड विकसित किए गए हैं।
सामरिक और सामाजिक-आर्थिक महत्व (Strategic Value)
- सेना के लिए परिचालन सुगमता (Operational Connectivity): यह बुनियादी ढांचा वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के पास तैनात भारतीय सेना और सशस्त्र बलों को भारी वाहनों, हथियारों और रसद की त्वरित आवाजाही की सुविधा प्रदान करता है।
- समावेशी विकास (Lab-to-Land connectivity for Tribes): बार-बार होने वाली भारी बारिश, भूस्खलन और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बाद भी, इस प्रोजेक्ट ने अरुणाचल के सुदूरवर्ती और कटे हुए जनजातीय गांवों को देश की मुख्य सामाजिक-आर्थिक धारा से जोड़ा है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | मुख्य परीक्षा और प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य |
| प्रोजेक्ट का नाम | प्रोजेक्ट ब्रह्मांक |
| मूल संगठन | सीमा सड़क संगठन (BRO – Border Roads Organisation) |
| स्थापना वर्ष | 29 जून 2011 (मुख्यालय: राणाघाट, अरुणाचल प्रदेश) |
| मुख्य कार्यक्षेत्र | सियांग और सियोम घाटियाँ (अरुणाचल प्रदेश और असम का धेमाजी क्षेत्र) |
| प्रमुख नदियाँ/नाले | सियोम नाला और सिमांग नाला |
| सड़क मानक | NHDL (नेशनल हाईवे डबल लेन) विनिर्देश |
अध्याय: 20वां सांख्यिकी दिवस और भारत की SDG प्रगति रिपोर्ट
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्व की सामयिक घटनाएँ, सतत विकास लक्ष्य (SDG), आर्थिक और सामाजिक विकास।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): समावेशी विकास और उससे उत्पन्न विषय; गरीबी, भुखमरी, स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचे से संबंधित विकास मुद्दे; पर्यावरण संरक्षण (रामसर स्थल और नवीकरणीय ऊर्जा)।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
29 जून 2026 को 20वें सांख्यिकी दिवस के अवसर पर, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) पर कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय रिपोर्ट और डेटा पुस्तिकाएं जारी की हैं। इन प्रकाशनों में भारत की जमीनी प्रगति को दर्शाने वाला ‘राष्ट्रीय संकेतक ढांचा (NIF) प्रगति रिपोर्ट 2026’ शामिल है, जो साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।
MoSPI द्वारा जारी किए गए प्रमुख SDG प्रकाशन
मंत्रालय द्वारा जारी की गई चार प्रमुख कड़ियों की सूची इस प्रकार है:
- SDG – राष्ट्रीय संकेतक ढांचा (NIF) प्रगति रिपोर्ट, 2026: यह रिपोर्ट सभी 17 सतत विकास लक्ष्यों की राष्ट्रीय स्तर पर प्रगति की निगरानी के लिए नवीनतम टाइम-सीरीज़ डेटा प्रदान करती है।
- डेटा स्नैपशॉट (NIF प्रगति रिपोर्ट, 2026): यह मुख्य रिपोर्ट का एक संक्षिप्त और यूजर-फ्रेंडली हैंडबुक प्रारूप (संक्षिप्त विवरण) है।
- SDG – राष्ट्रीय संकेतक ढांचा, 2026 (मेटाडेटा के साथ): इसमें सभी राष्ट्रीय संकेतकों की विस्तृत कार्यप्रणाली और उनके व्यापक मेटाडेटा को शामिल किया गया है।
- जीवन का रूपांतरण: SDG के ‘मानव आयाम’ के तहत भारत की उपलब्धियां: यह 2030 के एजेंडे के पांच बुनियादी स्तंभों (People, Planet, Prosperity, Peace, Partnerships) में से पहले स्तंभ ‘People’ (मानव/लोग) पर आधारित एक विशेष बुलेटिन है। यह मुख्य रूप से निम्नलिखित लक्ष्यों पर केंद्रित है:
- SDG 1: गरीबी की समाप्ति (No Poverty)
- SDG 2: शून्य भुखमरी (Zero Hunger)
- SDG 3: अच्छा स्वास्थ्य और कल्याण (Good Health and Well-being)
- SDG 4: गुणवत्तापूर्ण शिक्षा (Quality Education)
- SDG 5: लैंगिक समानता (Gender Equality)
राष्ट्रीय संकेतक ढांचा (NIF) प्रगति रिपोर्ट 2026 के मुख्य आकर्षण
MoSPI द्वारा तैयार किए गए इस ‘राष्ट्रीय संकेतक ढांचे’ (NIF) 2026 में कुल 277 राष्ट्रीय संकेतक शामिल हैं। रिपोर्ट में विभिन्न क्षेत्रों में भारत द्वारा दर्ज की गई महत्वपूर्ण प्रगति के निम्नलिखित प्रामाणिक आंकड़े सामने आए हैं:
1. सामाजिक सुरक्षा और रोजगार
- सामाजिक सुरक्षा का दायरा: सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों (Social Protection Floors) के दायरे में आने वाली जनसंख्या का अनुपात वर्ष 2016 के 22.0% से बढ़कर 2026 में 65.3% हो गया है।
- बेरोजगारी दर में कमी: देश की बेरोजगारी दर वर्ष 2017-18 के 6.1% से गिरकर वर्ष 2025 में 3.1% के ऐतिहासिक निचले स्तर पर आ गई है।
- पेशेवर कार्यबल में महिलाएं: पेशेवर और तकनीकी श्रमिकों (Professionals and Technical Workers) के रूप में कार्यरत महिला-पुरुष अनुपात वर्ष 2023-24 के 48.7% से बढ़कर 2025 में 51.3% हो गया है।
2. स्वास्थ्य और लैंगिक सुधार
- मातृ मृत्यु अनुपात (MMR): भारत का MMR वर्ष 2015-17 के 122 प्रति 1,00,000 जीवित जन्मों से घटकर वर्ष 2022-24 में 87 पर आ गया है। (ध्यान दें: सुमन रोडमैप 2030 के तहत इसे 70 से नीचे लाने का लक्ष्य है।)
- जन्म के समय लिंगानुपात (SRB): प्रति 1,000 पुरुषों पर जन्म लेने वाली महिलाओं की संख्या 2015-17 के 896 से सुधरकर 2022-24 में 918 हो गई है।
3. पर्यावरण, नवीकरणीय ऊर्जा और अपशिष्ट प्रबंधन
- प्रति व्यक्ति नवीकरणीय ऊर्जा: देश में स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन क्षमता 2014-15 के 64.04 वॉट प्रति व्यक्ति से तीन गुना बढ़कर 2025-26 में 193.36 वॉट प्रति व्यक्ति हो गई है।
- अपशिष्ट पुनर्चक्रण (Waste Recycling): देश में स्थापित कचरा रीसाइक्लिंग संयंत्रों की संख्या 2019-20 के 829 से बढ़कर 2025-26 में 3,236 हो गई है।
- रामसर स्थल (Ramsar Sites): कुल आर्द्रभूमि (Wetland) क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय महत्व के रामसर स्थलों का प्रतिशत हिस्सा 2016 के 4.15% से दोगुना से अधिक होकर 2026 में 8.66% हो गया है।
4. कृषि एवं अनुवांशिक संसाधन संरक्षण (Genetic Resources)
खाद्य और कृषि के लिए आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण में निरंतर वृद्धि दर्ज की गई है:
- पादप आनुवंशिक संसाधन (Plant): 2014-15 के 4,32,564 से बढ़कर 2025-26 में 4,91,864 हुए।
- पशु आनुवंशिक संसाधन (Animal): 1,40,364 से बढ़कर 3,61,794 हुए।
- मत्स्य आनुवंशिक संसाधन (Fish): 47 से दोगुने से अधिक बढ़कर 105 हो गए हैं।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | मुख्य परीक्षा और प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य |
| राष्ट्रीय सांख्यिकी दिवस | प्रतिवर्ष 29 जून को मनाया जाता है (वर्ष 2026 में 20वां संस्करण था)। |
| नोडल मंत्रालय | सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI)। |
| NIF 2026 के कुल संकेतक | 277 राष्ट्रीय संकेतक (जो सभी 17 SDGs को कवर करते हैं)। |
| सहयोगी संस्थाएं | नीति (NITI) आयोग, संबंधित केंद्रीय मंत्रालय और संयुक्त राष्ट्र (UN) एजेंसियां। |
| बेरोजगारी दर (2025) | 3.1% |
| मातृ मृत्यु अनुपात (MMR) | 87 (अवधि: 2022-24) |
| प्रति व्यक्ति नवीकरणीय ऊर्जा | 193.36 वॉट (2025-26) |
| रामसर स्थल क्षेत्र विस्तार | कुल आर्द्रभूमि का 8.66% (2026 में) |
चिकित्सा उपकरण उद्योग सुदृढ़ीकरण योजना (SMDI) और आत्मनिर्भर भारत
- प्रारंभिक परीक्षा: सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप, भारतीय अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing Sector)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): उदारीकरण का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव, औद्योगिक नीति में परिवर्तन और औद्योगिक विकास पर उनके प्रभाव; स्वास्थ्य अवसंरचना।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
29 जून 2026 को रसायन और उर्वरक मंत्रालय के फार्मास्यूटिकल्स विभाग (Department of Pharmaceuticals) ने ‘चिकित्सा उपकरण उद्योग सुदृढ़ीकरण योजना’ (Scheme for Strengthening of Medical Device Industry – SMDI) के तहत पात्र संस्थाओं से आवेदन (Proposals) आमंत्रित किए हैं। इस योजना का मुख्य उद्देश्य घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देना, आयात पर निर्भरता कम करना, नवाचार का समर्थन करना और चिकित्सा उपकरणों के क्षेत्र में मूल्य श्रृंखला (Value Chain) की गहराई को बढ़ाना है।
SMDI की दो प्रमुख उप-योजनाएं (Sub-Schemes) और वित्तीय प्रोत्साहन
घरेलू उद्योग को वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए इस योजना को दो मुख्य स्तंभों में विभाजित किया गया है:
1. आयात निर्भरता कम करने के लिए सीमांत निवेश योजना (Marginal Investment Scheme for Reducing Import Dependence)
- उद्देश्य: मुख्य घटकों (Key Components), कच्चे माल (Raw Materials), तैयार उपकरणों (Finished Devices) और सहायक उपकरण (Accessories) के स्थानीय स्तर पर उत्पादन को बढ़ावा देना ताकि विदेशों से आयात कम किया जा सके।
- वित्तीय सहायता: इसके तहत चयनित आवेदकों को रीइम्ब्रर्समेंट (प्रतिपूर्ति) के आधार पर ₹10 करोड़ तक की एकमुश्त पूंजीगत सब्सिडी (One-time Capital Subsidy) प्रदान की जाएगी।
2. चिकित्सा उपकरण नैदानिक अध्ययन सहायता योजना (Medical Device Clinical Studies Support Scheme – MDCSS)
- उद्देश्य: चिकित्सा उपकरणों की सुरक्षा, प्रभावकारिता और वैश्विक मानकों पर खरा उतरने के लिए उनके अनुसंधान और नैदानिक परीक्षणों (Clinical Trials) का समर्थन करना।
- वित्तीय सहायता: इसके तहत पात्र आवेदकों को क्लिनिकल इन्वेस्टिगेशन, क्लिनिकल परफॉर्मेंस इवैल्यूएशन, पोस्ट-मार्केट फॉलो-अप स्टडी और पशुओं पर अध्ययन (Animal Studies) आयोजित करने के लिए रीइम्ब्रर्समेंट के आधार पर ₹5 करोड़ तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी।
आवेदन प्रक्रिया और समय-सीमा
- ऑनलाइन पोर्टल: इस योजना के तहत प्रस्तावों को ऑनलाइन पोर्टल http://smdi.lsssdc.in के माध्यम से जमा करना होगा।
- अंतिम तिथि: आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 23 जुलाई 2026 (शाम 6:00 बजे तक) निर्धारित की गई है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | मुख्य परीक्षा और प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य |
| योजना का नाम | चिकित्सा उपकरण उद्योग सुदृढ़ीकरण योजना (SMDI) |
| संबद्ध मंत्रालय | रसायन और उर्वरक मंत्रालय (उर्वरक एवं रसायन मंत्रालय) |
| कार्यान्वयन विभाग | फार्मास्यूटिकल्स विभाग (Department of Pharmaceuticals) |
| उप-योजना 1 (आयात कमी) | ₹10 करोड़ तक की एकमुश्त पूंजीगत सब्सिडी (Reimbursement आधार पर) |
| उप-योजना 2 (MDCSS) | क्लिनिकल/पशु अध्ययनों के लिए ₹5 करोड़ तक की वित्तीय सहायता |
| आवेदन पोर्टल | smdi.lsssdc.in (अंतिम तिथि: 23 जुलाई 2026) |
राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (NIIF) तथा भारत में बुनियादी ढांचा वित्तपोषण
- प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचा (Infrastructure) – ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, हवाई अड्डे, रेलवे; निवेश मॉडल (Investment Models)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): बुनियादी ढांचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, हवाई अड्डे, रेलवे आदि; निवेश मॉडल (Investment Models); विकास और रोजगार के लिए संसाधन जुटाना।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
जून 2026 के अंतिम सप्ताह में, प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (NIIF) के नए और आगामी फंडों के लिए ₹30,000 करोड़ के अतिरिक्त निवेश को मंजूरी दी है। इस नई मंजूरी के बाद, NIIF में भारत सरकार की कुल संचयी प्रतिबद्धता (Total Commitment) दोगुनी होकर ₹60,000 करोड़ हो गई है।

राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (NIIF) क्या है?
सरल शब्दों में, NIIF भारत का पहला ‘सोवेरेन एंकर फंड’ (Sovereign Anchored Fund) या संप्रभु धन कोष है, जिसे व्यावसायिक रूप से ‘नेशनल इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर फंड लिमिटेड’ (NIIFL) द्वारा प्रबंधित किया जाता है।
- शेयरहोल्डिंग (Ownership): इसमें भारत सरकार की हिस्सेदारी 49% है, जबकि शेष 51% हिस्सेदारी प्रमुख घरेलू और अंतरराष्ट्रीय संस्थागत निवेशकों के पास है।
- पूंजी प्रबंधन: यह वर्तमान में अपनी विभिन्न निवेश रणनीतियों के तहत लगभग ₹40,000 करोड़ की पूंजी का प्रबंधन कर रहा है और अब तक अपने सफल पोर्टफोलियो निकास (Exits) के माध्यम से निवेशकों को ₹12,000 करोड़ वापस लौटा चुका है।
- वैश्विक साख: NIIF ने दुनिया के सबसे बड़े सॉवरेन वेल्थ फंडों और पेंशन फंडों (जैसे अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी, कनाडा का CPP इन्वेस्टमेंट्स, सिंगापुर का टेमासेक, और ऑस्ट्रेलियासुपर) तथा बहुपक्षीय विकास बैंकों (AIIB, NDB, ADB, JBIC) से निवेश आकर्षित किया है।
NIIF की चार परिचालन निवेश रणनीतियाँ (Investment Strategies)
NIIF मुख्य रूप से चार अलग-अलग फंडों और रणनीतियों के माध्यम से निवेश का संचालन करता है:
- इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (Infrastructure Fund): यह ₹16,000 करोड़ के कोष के साथ भारत का सबसे बड़ा घरेलू बुनियादी ढांचा फंड है। यह परिवहन (सड़क, बंदरगाह, हवाई अड्डे), ऊर्जा (नवीकरणीय ऊर्जा, स्मार्ट मीटर) और डिजिटल बुनियादी ढांचे में बड़े प्लेटफॉर्म बनाता है।
- प्राइवेट मार्केट्स फंड (Private Markets Fund): यह फंड अन्य घरेलू फंडों (Daughter AIFs) में निवेश करता है, जो आगे चलकर किफायती आवास (Affordable Housing), स्वास्थ्य सेवा और उद्यम पूंजी (Venture Capital) में निवेश करते हैं।
- ग्रोथ इक्विटी / रणनीतिक अवसर फंड (Strategic Opportunities Fund): यह विनिर्माण (Manufacturing), वित्तीय सेवाओं और स्वास्थ्य सेवा जैसे उच्च-विकास वाले क्षेत्रों पर केंद्रित है।
- भारत-जापान कोष (India-Japan Fund): यह NIIF का पहला द्विपक्षीय फंड है जो जलवायु, चक्रीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy), ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और भारत-जापान व्यापार गलियारे को बढ़ावा देने पर केंद्रित है।
अतिरिक्त ₹30,000 करोड़ के आवंटन का उद्देश्य
- NIIF इंफ्रास्ट्रक्चर फंड II: इस अतिरिक्त राशि का मुख्य उपयोग NIIF के दूसरे बुनियादी ढांचा-केंद्रित फंड (Successor Fund) को स्थापित करने के लिए किया जाएगा, जिसका लक्षित कोष लगभग ₹30,000 करोड़ होगा।
- लक्षित क्षेत्र: यह नया फंड परिवहन, ऊर्जा, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ शहरी बुनियादी ढांचे (Urban Infrastructure) और ई-मोबिलिटी (E-mobility) जैसे उभरते क्षेत्रों में निवेश को गति देगा।
- नीतिगत संरेखण: इसके निवेश भारत सरकार की प्रमुख योजनाओं जैसे गति शक्ति (Gati Shakti), डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, FAME और PM E-DRIVE के साथ संरेखित हैं।
रणनीतिक सलाहकार की भूमिका
पूंजी लगाने के अलावा, NIIF केंद्रीय विभागों और राज्य संस्थाओं को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) के नए मॉडलों और निवेश विचारों पर रणनीतिक सलाह भी देता है। इसने हाल ही में ‘सामुद्रिक विकास कोष’ (Maritime Development Fund) और ‘अनुसंधान विकास एवं नवाचार कोष’ (RDI Fund) के ढांचे को तैयार करने में महत्वपूर्ण नीतिगत सहयोग दिया है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | मुख्य परीक्षा और प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य |
| संस्था का नाम | राष्ट्रीय निवेश और अवसंरचना कोष (NIIF) |
| प्रकृति | भारत का सोवेरेन एंकर फंड (Sovereign Anchored Fund) |
| स्वामित्व पैटर्न | भारत सरकार: 49% | संस्थागत/वैश्विक निवेशक: 51% |
| नया अतिरिक्त आवंटन | ₹30,000 करोड़ (केंद्रीय कैबिनेट द्वारा जून 2026 में स्वीकृत) |
| कुल सरकारी प्रतिबद्धता | ₹60,000 करोड़ (पिछले ₹30,000 करोड़ को मिलाकर) |
| नया लक्षित फंड | NIIF इंफ्रास्ट्रक्चर फंड II (शहरी बुनियादी ढांचा और ई-मोबिलिटी हेतु) |
| प्रमुख द्विपक्षीय फंड | भारत-जापान फंड (जलवायु और ऊर्जा संक्रमण पर केंद्रित) |
राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन 2026 और ग्रामीण भारत का रूपांतरण
- प्रारंभिक परीक्षा: गरीबी उन्मूलन, रोजगार योजनाएं, सामाजिक क्षेत्र की पहलें, समावेशी विकास।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): शासन व्यवस्था (Governance); सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism); गरीबी और भुखमरी से संबंधित मुद्दे; ग्रामीण विकास और रोजगार सृजन; समावेशी विकास (Inclusive Growth)।
Why in News? (चर्चा में क्यों?)
29 जून 2026 को नई दिल्ली के पूसा कैंपस में आयोजित दो-दिवसीय ‘राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन’ (शीर्षक: ग्रामोदय से राष्ट्रोदय) संपन्न हुआ। इस सम्मेलन की अध्यक्षता केंद्रीय ग्रामीण विकास, कृषि और किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने की। भारतीय इतिहास में पहली बार सभी 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के ग्रामीण विकास मंत्रियों ने एक साझा मंच पर आकर ‘विकसित ग्राम – विकसित भारत’ के रोडमैप पर विचार-विमर्श किया, जो भारत के सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) की एक अनूठी मिसाल है।
सम्मेलन के बड़े नीतिगत निर्णय और घोषणाएं
1. MGNREGS की जगह नई रोजगार योजना: ‘VB-GRAM-G’
- ऐतिहासिक बदलाव: केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि 1 जुलाई 2026 से देश भर में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS) के स्थान पर एक नई व्यापक रोजगार योजना ‘विकसित भारत – VB-GRAM-G’ लागू की जाएगी।
- बजटीय आवंटन: इस नई योजना के सुचारू संचालन और समय पर क्रियान्वयन के लिए सरकार द्वारा ₹95,682 करोड़ की अंतरिम स्वीकृति पहले ही जारी कर दी गई है।
2. लखपति दीदी मिशन का विस्तार और नए डिजिटल प्लेटफॉर्म
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ग्रामीण महिला सशक्तिकरण के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए दो बड़े कदम उठाए गए:
- नया लक्ष्य: ‘लखपति दीदी’ बनाने का राष्ट्रीय लक्ष्य 3 करोड़ से बढ़ाकर 6 करोड़ महिलाएं कर दिया गया है।
- वित्तीय रोडमैप: अगले 5 वर्षों में स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाओं के लिए ₹10 लाख करोड़ के बैंक लिंकेज का रोडमैप तैयार किया गया है।
- नवाचार लॉन्च: सम्मेलन के दौरान ‘लखपति दीदी डैशबोर्ड’ और स्वयं सहायता समूह की महिला उद्यमियों के लिए ‘SHE LEAPS’ (Self Help Entrepreneur – Livelihoods and Enterprise Application for Prosperity and Sustainability) नामक एक एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया गया।
कार्यान्वयन और प्रशासनिक सुधारों पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने ग्रामीण योजनाओं को जमीन पर प्रभावी बनाने के लिए राज्यों को एक ‘प्रशासनिक मंत्र’ दिया, जिसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- अधिकारियों का कार्यकाल: ग्रामीण विकास से जुड़े प्रमुख अधिकारियों के बार-बार होने वाले तबादलों पर रोक लगाई जाए। निरंतरता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए एक अधिकारी को कम से कम 2 से 3 वर्ष की पोस्टिंग दी जानी चाहिए।
- रिक्त पदों को भरना: ग्रामीण विकास विभागों में लंबे समय से खाली पड़े प्रशासनिक और तकनीकी पदों को जल्द से जल्द भरा जाए ताकि योजनाओं की गति धीमी न हो।
- तकनीक और AI का उपयोग: सेवा वितरण (Service Delivery) में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित निगरानी प्रणाली और सोशल ऑडिट (Social Audit) को मजबूत करने का निर्देश दिया गया।
भावी चुनौतियाँ: कम वर्षा और जल संकट का अलर्ट
मौसम विभाग के अनुमानों को देखते हुए केंद्रीय मंत्री ने 14 राज्यों को विशेष रूप से सतर्क रहने की चेतावनी दी है। उन्होंने निर्देश दिया कि यदि मानसून कमजोर रहता है, तो राज्यों को जल संरक्षण संरचनाओं (Water Conservation Structures) को तुरंत मजबूत करना चाहिए और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की मांग बढ़ने पर अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए पहले से तैयारी रखनी चाहिए।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | मुख्य परीक्षा और प्रारंभिक परीक्षा हेतु त्वरित तथ्य |
| सम्मेलन का नाम | राष्ट्रीय ग्रामीण विकास सम्मेलन 2026 (थीम: ग्रामोदय से राष्ट्रोदय) |
| आयोजन स्थल | पूसा कैंपस, नई दिल्ली (जून 2026) |
| नई योजना | VB-GRAM-G (1 जुलाई 2026 से प्रभावी, मनरेगा का स्थान लेगी) |
| नया अंतरिम बजट | ₹95,682 करोड़ (VB-GRAM-G योजना हेतु स्वीकृत) |
| लखपति दीदी का नया लक्ष्य | 6 करोड़ ग्रामीण महिलाएं (पहले 3 करोड़ था) |
| नया महिला उद्यमी पोर्टल | ‘SHE LEAPS’ डिजिटल प्लेटफॉर्म (SHG महिलाओं के सतत आजीविका हेतु) |
| बैंक लिंकेज रोडमैप | आगामी 5 वर्षों में ₹10 लाख करोड़ का वित्तीय समावेशन |