6 August 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत जनजातीय समूह (PVTG) हेतु इरुला जनजाति और पीएम-जनमन योजना के तहत आजीविका के नए अवसरों, जम्मू-कश्मीर की पाकल दुल जलविद्युत परियोजना में 210 श्रमिकों के औद्योगिक विवाद के सफल समाधान, कैंसर उपचार के क्षेत्र में लाइट-एक्टिवेटेड नैनो-रोबोट्स द्वारा ब्रेस्ट कैंसर थेरेपी, देश के अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र को गति देने वाले अंतरीक्ष वेंचर कैपिटल फंड, गुजरात व राजस्थान में चांदीपुरा वायरस आउटब्रेक पर केंद्र सरकार की त्वरित कार्रवाई, अंतर्राष्ट्रीय क्लाउडेड लेपर्ड दिवस के अवसर पर भारत द्वारा जारी समर्पित संरक्षण कार्य योजना (CAP), तथा वन संरक्षण योजनाओं व भारत में वन आवरण की नवीनतम स्थिति का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
इरुला जनजाति और पीएम-जनमन योजना: आजीविका के अवसर
- प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय राज्यव्यवस्था (विशेष रूप से पीवीटीजी), सामाजिक विकास और जनजातीय अधिकार।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): समाज के कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं, समावेशी विकास, जनजातीय आजीविका और लघु वन उपज (MFP) का मूल्य संवर्धन।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने राज्य सभा में इरुला जनजाति की आजीविका स्थिति की जानकारी दी। सरकार ‘पीएम-जनमन’ योजना के जरिए तमिलनाडु की इरुला जनजाति समेत अन्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTGs) की सामाजिक और आर्थिक स्थिति सुधार रही है। इस दिशा में ट्राईफेड (TRIFED) के जरिए वन धन विकास केंद्रों (VDVKs) की स्थापना की गई है। इनसे इरुला समुदाय को स्थानीय लघु वन उपज (MFP) के मूल्य संवर्धन और विपणन में सीधी मदद मिल रही है।
मुख्य बिंदु: ट्राईफेड, वन धन विकास केंद्र और इरुला समुदाय का आर्थिक प्रदर्शन
1. PM-JANMAN के तहत TRIFED की पहल
- VDVK की मंजूरी: तमिलनाडु के 7 जिलों (तिरुप्पत्तूर, चेंगलपट्टू, नमक्कल, अरियालूर, नीलगिरी, तिरुवन्नामलाई और कोयंबटूर) में कुल 37 वन धन विकास केंद्र स्वीकृत किए गए हैं।
- वित्तीय आवंटन: इन केंद्रों के लिए ₹120.15 लाख की राशि स्वीकृत की गई है, जिसमें से ₹60.08 लाख जारी हो चुके हैं।
- इरुला समुदाय का कवरेज: कुल स्वीकृत 37 केंद्रों में से 34 VDVKs विशेष रूप से इरुला समुदाय के 2,135 लाभार्थियों को कवर करते हैं।
2. लघु वन उपज (MFP) का मूल्य संवर्धन और बिक्री
- प्रमुख उत्पाद: जंगली शहद, मसाले, काजू, झाड़ू, जड़ी-बूटियां, इमली, रीठा (soap nut), ताड़ के पत्ते और वन रतालू (Forest Yam)।
- आर्थिक प्रभाव: इरुला लाभार्थियों ने मूल्य संवर्धित उत्पादों (Value-added products) की बिक्री से ₹75.89 लाख का राजस्व अर्जित किया है।
- शीर्ष प्रदर्शनकर्ता: नीलगिरी जिले में शहद और मसालों के मूल्य संवर्धन से सर्वाधिक ₹61.79 लाख की बिक्री दर्ज की गई।
3. तमिलनाडु में इरुला जनजाति का जिलावार ब्योरा (34 VDVKs)
| जिला | स्वीकृत VDVK | लाभार्थी संख्या | स्वीकृत निधि (₹ लाख) | जारी निधि (₹ लाख) | प्रमुख उत्पाद | कुल बिक्री (₹ लाख) |
| नीलगिरी | 3 | 360 | 18.00 | 9.00 | शहद और मसाले | 61.79 |
| अरियालूर | 5 | 261 | 13.05 | 6.53 | कच्चा काजू | 11.31 |
| चंलगपट्टू | 2 | 107 | 5.35 | 2.67 | जड़ी-बूटियां | 1.46 |
| कोयंबटूर | 10 | 584 | 29.20 | 14.60 | झाड़ू, शहद, रीठा, इमली | 0.47 |
| नमक्कल | 4 | 240 | 12.00 | 6.00 | ताड़ के पत्ते | 0.36 |
| तिरुप्पत्तूर | 2 | 134 | 6.70 | 3.35 | शहद और इमली | 0.29 |
| तिरुवन्नामलाई | 8 | 449 | 22.45 | 11.22 | शहद, वन रतालू, इमली | 0.21 |
| कुल योग | 34 | 2,135 | 106.75 | 53.38 | — | 75.89 |
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| इरुला जनजाति | तमिलनाडु और केरल में पाई जाने वाली एक PVTG (विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह)। |
| पारंपरिक कौशल | सांप और कीड़े पकड़ने व शहद इकट्ठा करने में निपुणता। |
| मूल योजना | पीएम-जनमन (प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान)। |
| कार्यान्वयन एजेंसी | TRIFED (भारतीय जनजातीय सहकारी विपणन विकास संघ)। |
| मुख्य तंत्र | वन धन विकास केंद्र (VDVKs – लघु वन उपज के मूल्य संवर्धन हेतु)। |
पाकल दुल जलविद्युत परियोजना: 210 श्रमिकों के औद्योगिक विवाद का सफल समाधान
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, श्रम कानून और प्रमुख बुनियादी ढांचा परियोजनाएं।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): वैधानिक व नियामक निकाय (श्रम आयुक्त कार्यालय), श्रम अधिकार, औद्योगिक संबंध (Industrial Relations) तथा अवसंरचना और ऊर्जा क्षेत्र।
चर्चा में क्यों?
जम्मू और कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में स्थित पाकल दुल जलविद्युत परियोजना में काम कर रहे 210 श्रमिकों के एक बड़े औद्योगिक विवाद को सफलतापूर्वक सुलझा लिया गया है। भारत सरकार के श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अधीन मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) के कार्यालय के अंतर्गत आने वाले क्षेत्रीय श्रम आयुक्त (केंद्रीय), जम्मू के मध्यस्थता प्रयासों से यह समझौता संभव हुआ है। किसान मजदूर यूनियन, नागसेनी द्वारा की जा रही हड़ताल के बाद हुए इस समझौते से एलएंडटी (L&T) कंस्ट्रक्शन के उप-ठेकेदारों के माध्यम से लगे 210 श्रमिकों को ₹1.12 करोड़ से अधिक (₹1,12,70,560) का अंतिम सेवा लाभ प्राप्त हुआ है।
मुख्य बिंदु: मध्यस्थता प्रयास, वैधानिक लाभ और परियोजना का महत्व
1. औद्योगिक शांति और समझौता
- समझौता तिथि: प्रबंधन और श्रमिक प्रतिनिधियों के बीच 13 जुलाई 2026 को सौहार्दपूर्ण समझौता हुआ।
- वित्तीय लाभ का भुगतान: 30 जुलाई 2026 को श्रमिकों को उनकी बकाया राशि का सीधा भुगतान किया गया।
- शामिल घटक: इस राशि में छंटनी मुआवजा, बोनस, लीव एनकैशमेंट, नोटिस पे और अन्य वैधानिक लाभ शामिल हैं।
2. मध्यस्थता की भूमिका (Role of RLC Central)
- संवैधानिक दायित्व: क्षेत्रीय श्रम आयुक्त ने श्रम कानूनों के पालन और श्रमिकों के कल्याण के लिए प्रबंधन को उनके वैधानिक दायित्वों के प्रति संवेदनशील बनाया।
- किसान मजदूर यूनियन: नागसेनी क्षेत्र की इस यूनियन के प्रतिनिधियों ने सौहार्दपूर्ण बातचीत में मुख्य भूमिका निभाई।
3. पाकल दुल जलविद्युत परियोजना
- स्थान: किश्तवाड़ जिला, केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर।
- नदी: यह परियोजना मरुसूदर नदी पर बनाई जा रही है, जो चिनाब नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है।
- क्षमता: यह एक 1,000 मेगावाट (MW) की ‘रन-ऑफ-द-रिवर जलविद्युत परियोजना है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| परियोजना का नाम | पाकल दुल जलविद्युत परियोजना। |
| अवस्थिति | किश्तवाड़ जिला, जम्मू और कश्मीर। |
| संबंधित नदी | मरुसूदर नदी (चिनाब नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी)। |
| मध्यस्थता संस्था | क्षेत्रीय श्रम आयुक्त – RLC (Central), जम्मू। |
| संबंधित मंत्रालय | श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (Ministry of Labour & Employment)। |
लाइट-एक्टिवेटेड नैनो-रोबोट्स: ब्रेस्ट कैंसर थेरेपी में नया तकनीकी
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय महत्व की वैज्ञानिक घटनाएं, बायोटेक्नोलॉजी और नैनोटेक्नोलॉजी।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- विकास एवं अनुप्रयोग, रोजमर्रा के जीवन पर इसका प्रभाव, प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण और नई तकनीकों का विकास।
चर्चा में क्यों?
इंस्टीट्यूट ऑफ नैनो साइंस एंड टेक्नोलॉजी (INST), मोहाली के वैज्ञानिकों ने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC), मुंबई के साथ मिलकर प्रकाश-संचालित मल्टीफंक्शनल नैनोबोट्स विकसित किए हैं। यह तकनीक ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में लक्षित थेरेपी को संभव बनाएगी। ‘एसीएस एप्लाइड मटेरियल्स एंड इंटरफेसेस’ जर्नल में प्रकाशित यह शोध बिना किसी ईंधन (fuel-free) के काम करता है। यह तकनीक नियर-इन्फ्रारेड (NIR) प्रकाश से संचालित होकर कैंसर कोशिकाओं को सटीक रूप से नष्ट करती है।
मुख्य बिंदु: नैनोबोट्स की कार्यप्रणाली, वैज्ञानिक विशेषताएं और परीक्षण
1. पारंपरिक कीमोथेरेपी की तुलना में लाभ
- सटीक लक्ष्य: पारंपरिक कीमोथेरेपी स्वस्थ ऊतकों को नुकसान पहुंचाती है। यह नया नैनोबोट केवल कैंसर कोशिकाओं को लक्षित करता है।
- गहरी पैठ: पराबैंगनी (UV) प्रकाश शरीर के भीतर गहराई तक नहीं पहुंच पाता। NIR प्रकाश बिना शरीर को नुकसान पहुंचाए गहरे ऊतकों तक पहुंचता है।
2. तकनीकी कार्यप्रणाली और फोटोटैक्सिस (Phototaxis)
- UCNP तकनीक: अपकनवर्टिंग नैनोपार्टिकल (UCNP) आधारित ये नैनोबोट्स 980 nm नियर-इन्फ्रारेड लेजर से ऊर्जा प्राप्त करते हैं।
- दिशात्मक गति (Phototaxis): पोलिडोपामिन लेजर प्रकाश में स्थानीय गर्मी पैदा करता है। इससे बने तापमान अंतर के कारण नैनोबोट्स लेजर स्रोत की ओर बढ़ते हैं।

- फॉलिक एसिड कोटिंग: कैंसर कोशिकाओं की सतह पर फोलेट रिसेप्टर्स अधिक होते हैं। नैनोबोट्स पर मौजूद फॉलिक एसिड इन्हें तुरंत पहचान लेता है।
3. दोहरी मार: photothermal और photodynamic थेरेपी
- ROS का निर्माण: लेजर की मौजूदगी में नैनोबोट्स रिएक्टिव ऑक्सीजन स्पीशीज (ROS) उत्पन्न करते हैं।
- कैंसर कोशिकाओं का विनाश: यह ROS और गर्मी मिलकर कैंसर ट्यूमर को नष्ट करते हैं।
- सफल परीक्षण: वैज्ञानिकों ने इस थेरेपी का सफल परीक्षण सेल मॉडल और ब्रेस्ट ट्यूमर से पीड़ित चूहों पर किया है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| विकासकर्ता संस्थान | INST मोहाली (DST का स्वायत्त संस्थान) और BARC मुंबई। |
| मुख्य तकनीक | Upconversion Nanoparticles (UCNP) और Phototaxis। |
| प्रकाश तरंगदैर्घ्य | 980 nm नियर-इन्फ्रारेड (NIR) लेजर। |
| लक्षित रिसेप्टर | कैंसर कोशिकाओं पर मौजूद फोलेट रिसेप्टर्स । |
| शोध पत्रिका | ACS Applied Materials & Interfaces। |
अंतरीक्ष वेंचर कैपिटल फंड: भारत के स्पेस-टेक स्टार्टअप्स के लिए बड़ा कदम
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की घटनाएं, वैज्ञानिक एवं तकनीकी विकास, स्पेस टेक्नोलॉजी और अर्थव्यवस्था।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- अंतरिक्ष क्षेत्र में उदारीकरण, निजी क्षेत्र की भागीदारी, स्टार्ट-अप्स का वित्तपोषण और भारतीय अर्थव्यवस्था में अवसंरचना/प्रौद्योगिकी का योगदान।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में ‘अंतरीक्ष वेंचर कैपिटल फंड’ (AVCF) की प्रगति पर जानकारी दी। 31 अक्टूबर 2025 को सेबी (SEBI) से मंजूरी मिलने के बाद यह फंड पूरी तरह से चालू हो गया है। IN-SPACe द्वारा इस फंड में अब तक ₹188.93 करोड़ का योगदान दिया जा चुका है, जिसमें चालू वित्त वर्ष (2026-27) का ₹182.87 करोड़ शामिल है। फंड की निवेश समिति ने फंडिंग के लिए पहले ही तीन शुरुआती स्पेस-टेक स्टार्टअप्स का चयन कर लिया है।
मुख्य बिंदु: फंड की संरचना, निवेश रणनीति और आर्थिक प्रभाव
1. SEBI-निबंधित श्रेणी II वैकल्पिक निवेश कोष (AIF)
- श्रेणी: AVCF को SEBI (AIF) नियमों के तहत ‘Category II Alternative Investment Fund’ के रूप में पंजीकृत किया गया है।
- प्राथमिक उद्देश्य: उभरते हुए स्पेस-टेक स्टार्टअप्स को इक्विटी पूंजी प्रदान करना।
- सहायता का दायरा: यह फंड नई तकनीकों के विकास, व्यवसायीकरण (Commercialization) और स्टार्टअप्स के संचालन का विस्तार करने में मदद करेगा।
2. निवेश रणनीति (Investment Strategy)
- खंड 2.7.2 और 2.7.3: फंड की नीति के अनुसार, विकास के विभिन्न चरणों में मौजूद स्पेस स्टार्टअप्स को सीधे वित्तीय सहायता दी जाएगी।
- अनुपालन: सभी निवेश SEBI के नियमों और प्राइवेट प्लेसमेंट मेमोरेंडम (PPM) के तहत किए जाएंगे।
3. अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
- निगरानी: वर्तमान में केवल इस फंड के कारण अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में हुई प्रतिशत वृद्धि का कोई सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।
- दीर्घकालिक आकलन: पोर्टफोलियो में शामिल स्टार्टअप्स के प्रदर्शन के आधार पर समय के साथ अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था पर इसका कुल प्रभाव मापा जाएगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| फंड का नाम | अंतरीक्ष वेंचर कैपिटल फंड (AVCF)। |
| SEBI पंजीकरण | Category II Alternative Investment Fund (AIF)। |
| नोडल एजेंसी / प्रमोटर | IN-SPACe (भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र)। |
| स्वीकृति तिथि | 31 अक्टूबर 2025 (SEBI द्वारा)। |
| कुल योगदान | ₹188.93 करोड़ (24 जुलाई 2026 तक)। |
चांदीपुरा वायरस आउटब्रेक: गुजरात और राजस्थान में केंद्र की बड़ी कार्रवाई
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की घटनाएं, स्वास्थ्य, जीव विज्ञान और मानव रोग।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): स्वास्थ्य क्षेत्र, सरकारी नीतियां, सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति, महामारी प्रबंधन और बायोटेक्नोलॉजी।
चर्चा में क्यों?
गुजरात और राजस्थान में चांदीपुरा वायरस (CHPV) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक राष्ट्रीय संयुक्त प्रकोप प्रतिक्रिया टीम (NJORT) तैनात की है। यह बहु-विषयक टीम (Multidisciplinary Team) राज्यों को फील्ड असेसमेंट, बीमारियों की रोकथाम और तकनीकी सहायता प्रदान करेगी। इस अभियान में मानव, पशु और पर्यावरण स्वास्थ्य को एक साथ जोड़कर ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण अपनाया जा रहा है।
मुख्य बिंदु: बहु-संस्थागत जांच, वैज्ञानिक शोध और वन हेल्थ दृष्टिकोण
1. संयुक्त टीम (NJORT) की संरचना
- शामिल संस्थाएं: इस टीम में NCDC, ICMR और पशुपालन एवं डेयरी विभाग (DAHD) के शीर्ष विशेषज्ञ शामिल हैं।
- प्रमुख कार्य: यह टीम फील्ड स्तर पर सैंपल कलेक्शन, वेक्टर सर्वे, नैदानिक प्रबंधन और प्रयोगशाला समन्वय को मजबूत करेगी।
- आपातकालीन संचालन: NCDC के पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेशंस सेंटर (PHEOC) को भी इस अभियान के समर्थन में एक्टिव कर दिया गया है।
2. ट्रांसमिशन और वेक्टर्स की गहन जांच
- मुख्य वाहक (Vector): चांदीपुरा वायरस का प्राथमिक वाहक सैंडफ्लाई यानी बालू मक्खी को माना जाता है।
- अन्य वाहकों पर शोध: वैज्ञानिक इस बात की भी जांच कर रहे हैं कि क्या मच्छर, टिक या घुन (Mites) भी इसके प्रसार में भूमिका निभा रहे हैं।

- पशु निगरानी (Animal Surveillance): यह जांचने के लिए कि क्या मवेशी (गाय, भैंस, बकरी) इसके रिज़रवायर हैं, उनके रक्त और दूध के नमूने एकत्र किए गए हैं।
3. जीनोमिक स्टडीज और वैज्ञानिक नेटवर्क
- होल-जीनोम सीक्वेंसिंग: गुजरात बायोटेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर (GBRC) वायरस के आनुवंशिक बदलावों को समझने के लिए सीक्वेंसिंग कर रहा है। शुरुआती विश्लेषण में मामूली जेनेटिक वेरिएशन देखे गए हैं।
- AES निगरानी नेटवर्क: देश के 15 तृतीयक देखभाल अस्पतालों में चल रहा ‘अस्पताल-आधारित AES निगरानी नेटवर्क’ इस बीमारी के पैटर्न को समझने में मदद कर रहा है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| रोगज़नक़ (Pathogen) | चांदीपुरा वायरस (CHPV – Rhabdoviridae परिवार का सदस्य)। |
| प्राथमिक वाहक (Primary Vector) | सैंडफ्लाई (Phlebotomine Sandflies)। |
| मुख्य लक्षण | बुखार, तेज सिरदर्द, उल्टी और एक्यूट एन्सेफलाइटिस सिंड्रोम (AES)। |
| प्रभावित वर्ग | 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में इसका जोखिम सबसे अधिक होता है। |
| समन्वय संस्थाएं | NCDC, ICMR, DAHD और राज्य स्वास्थ्य विभाग। |
अंतर्राष्ट्रीय क्लाउडेड लेपर्ड दिवस: भारत ने जारी किया समर्पित संरक्षण कार्य योजना (CAP)
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की पर्यावरणीय घटनाएं, जैव विविधता और संरक्षण (Biodiversity & Conservation)।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): पर्यावरण, पारिस्थितिकी (Ecology), वन्यजीव संरक्षण, जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन।
चर्चा में क्यों?
4 अगस्त ‘अंतर्राष्ट्रीय क्लाउडेड लेपर्ड दिवस’ के अवसर पर भारत सरकार ने पूर्वोत्तर भारत में इस दुर्लभ जंगली बिल्ली प्रजाति के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए एक ‘क्लाउडेड लेपर्ड कंजर्वेशन एक्शन प्लान’ (CAP) की घोषणा की है। यह एक्शन प्लान भारत सरकार (पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय), वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF), और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की संयुक्त पहल के तहत तैयार किया गया है। इसे जुलाई 2026 के दूसरे सप्ताह में कोयंबटूर में आयोजित राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (SCNBWL) की 91वीं बैठक के दौरान आधिकारिक रूप से जारी किया गया था।
एक्शन प्लान के प्रमुख स्तंभ एवं रणनीतिक बिंदु
1. 14 प्राथमिकता वाले परिदृश्य (14 Priority Landscapes)
- पूर्वोत्तर भारत में कुल 14 प्राथमिकता वाले संरक्षण क्षेत्रों (Priority Conservation Landscapes) की पहचान की गई है।
- इसका मुख्य उद्देश्य वनों के बीच गलियारों (Corridors) का पुनर्रुद्धार कर निवास स्थान के विखंडन (Habitat Fragmentation) को रोकना और वन्यजीवों की आवाजाही को सुगम बनाना है।
2. संस्थागत ढांचा और योजनाएं
- इस प्रजाति को पर्यावरण मंत्रालय की ‘एकीकृत वन्यजीव आवास विकास’ (IDWH) योजना के तहत संचालित ‘प्रजाति पुनर्प्राप्ति कार्यक्रम’ में शामिल करके इसके संस्थागत ढांचे को मजबूत किया गया है।
- योजना के वैज्ञानिक और तकनीकी रिपोर्ट का निर्माण भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) द्वारा किया गया है।
3. आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक निगरानी
- तकनीकी उपकरण: डेटा संग्रह, वन्यजीव अपराध रोकथाम और अग्रिम पंक्ति के वन कर्मियों की निगरानी दक्षता बढ़ाने के लिए M-STrIPES स्मार्ट मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग किया जा रहा है।
- वैज्ञानिक तकनीकें: आबादी और व्यवहार को सटीक रूप से समझने के लिए कैमरा ट्रैप, ऑक्यूपेंसी सर्वे, आनुवंशिक विश्लेषण, और पर्यावरण डीएनए (eDNA) जैसी तकनीकों को एकीकृत किया गया है।
4. समुदाय, जलवायु और सीमा पार सहयोग
- वन हेल्थ एवं सामुदायिक भागीदारी: स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करते हुए उनके लिए टिकाऊ आजीविका के साधन विकसित करना।
- अंतरराष्ट्रीय सीमा-पार सहयोग (Transboundary Cooperation): नेपाल, भूटान और बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों के साथ संयुक्त संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा देना।
- जलवायु लचीलापन: योजना में जलवायु परिवर्तन से निपटने और आवासों में अनुकूलन क्षमता (Adaptive Management) बढ़ाने के उपायों को जोड़ा गया है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| वैज्ञानिक नाम | Neofelis nebulosa (मुख्यभूमि क्लाउडेड लेपर्ड)। |
| IUCN रेड लिस्ट स्थिति | सुभेद्य (Vulnerable)। |
| वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 | अनुसूची-I (सर्वोच्च कानूनी संरक्षण)। |
| CITES स्थिति | परिशिष्ट-I |
| भौगोलिक आवास (Habitat) | पूर्वोत्तर भारत की पहाड़ियाँ, दक्षिण एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के सदाबहार वर्षावन। |
| विशेष शारीरिक क्षमता | ये कुशल पेड़ चढ़ने वाले (Arboreal) होते हैं और अपनी लचीली टखनों की वजह से पेड़ से उल्टा (सिर के बल) नीचे उतर सकते हैं। |
| राज्य प्रतीक | यह मेघालय का राष्ट्रीय/राज्य पशु है। |
वन संरक्षण योजनाएं और भारत में वन आवरण
- प्रारंभिक परीक्षा: पर्यावरण और पारिस्थितिकी, वन नीतियां, जैव विविधता और सरकारी योजनाएं।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): पर्यावरण संरक्षण, वनों का ह्रास, सतत विकास, वन अधिकार अधिनियम (FRA) और पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA)।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने संसद में देश के वन आवरण और संरक्षण योजनाओं पर नया अपडेट दिया। सरकार संयुक्त वन प्रबंधन समितियों (JFMC), इको-डेवलपमेंट समितियों (EDC) और ग्राम सभाओं के माध्यम से स्थानीय समुदायों को वन संरक्षण से जोड़ रही है। इसके साथ ही, ISFR 2023 के नवीनतम आंकड़े, खनन व बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए वन भूमि डायवर्जन के सख्त मानदंड और संरक्षित क्षेत्रों का विस्तार भी सामने रखा गया है।
मुख्य बिंदु: सामुदायिक भागीदारी, प्रमुख योजनाएं और वैधानिक मूल्यांकन
1. सामुदायिक भागीदारी और संस्थागत ढांचा
- सहभागी वन प्रबंधन: राज्यों द्वारा गठित संयुक्त वन प्रबंधन समितियों (JFMCs) और इको-डेवलपमेंट समितियों (EDCs) के जरिए स्थानीय समुदायों को वनों की सुरक्षा, आग नियंत्रण और वृक्षारोपण से जोड़ा गया है।
- वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006: यह कानून पात्र वनवासी समुदायों को अधिकार देता है। ग्राम सभाओं को सामुदायिक वन संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन का वैधानिक अधिकार प्राप्त है।
2. मुख्य वन संरक्षण और वृक्षारोपण योजनाएं
- हरित भारत के लिए राष्ट्रीय मिशन (GIM): degraded वन भूमि के पुनरुद्धार हेतु सहायता।
- प्रतिपूरक वनीकरण कोष (CAMPA): गैर-वानिकी उपयोग के बदले वनीकरण कोष का प्रबंधन।
- नगर वन योजना: शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाना।

- मिश्ती: तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए मैंग्रोव पहल।
- राष्ट्रीय वन अग्नि कार्य योजना, 2018: वन की आग की रोकथाम, तकनीक का उपयोग और वित्तीय सहायता के लिए योजना।
3. खनन और वन भूमि डायवर्जन का मूल्यांकन
- कानूनी ढांचा: वन भूमि के गैर-वानिकी उपयोग और खनन का मूल्यांकन वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत होता है।
- सख्त जांच: प्रत्येक खनन व अवसंरचना प्रस्ताव की जांच स्थल-विशिष्ट पारिस्थितिकी और वन विखंडन को कम करने के आधार पर केस-टू-केस की जाती है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य / विवरण (ISFR 2023 के अनुसार) |
| कुल वन और वृक्ष आवरण | 8,27,356.95 वर्ग किमी (देश के भौगोलिक क्षेत्रफल का 25.17%)। |
| क्षेत्रफल में वृद्धि | ISFR 2021 की तुलना में 1,445.81 वर्ग किमी की बढ़ोतरी हुई है। |
| संरक्षित क्षेत्र | इनकी कुल संख्या बढ़कर 1,134 हो गई है। |
| टाइगर व एलिफेंट रिजर्व | देश में 58 टाइगर्स रिजर्व और 33 एलिफेंट रिजर्व मौजूद हैं। |
| संरक्षित गलियारे (Corridors) | पारिस्थितिक निरंतरता हेतु 32 टाइगर गलियारे और 150 एलिफेंट गलियारे चिन्हित हैं। |