7 August 2026 PIB Summary for UPSC in Hindi Pdf के अंतर्गत पिछड़ा वर्ग व वंचित वर्गों के शैक्षणिक सशक्तिकरण हेतु PM-YASASVI योजना, भारत की सामरिक शक्ति को बढ़ाने वाले Agni-4 बैलिस्टिक मिसाइल के सफल परीक्षण, मुंबई में वैश्विक रचनात्मक अर्थव्यवस्था को नया मंच देने वाले BRICS WAVES बाज़ार, ग्रामीण समृद्धि व स्वच्छ ऊर्जा हेतु गोबर्धन योजना, दिल्ली-एनसीआर में सुगम क्षेत्रीय आवागमन के लिए नमो भारत RRTS, जल सुरक्षा व अनुसंधान समर्पित MAHA वॉटर मिशन, वन गुर्जर जनजातीय समुदाय के अधिकारों व चुनौतियों , डिजिटल सुरक्षा हेतु एआई-जनरेटेड डीपफेक पर कसते नए नियामक ढांचे और जयपुर में भारत की अध्यक्षता में संपन्न 10वीं ब्रिक्स उद्योग मंत्रियों की बैठक का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।
PM-YASASVI योजना: OBC, EBC और DNT छात्रों के लिए शीर्ष श्रेणी शिक्षा का माध्यम
- प्रारंभिक परीक्षा: सरकारी योजनाएं, सामाजिक न्याय, कल्याणकारी पहल और समावेशी विकास।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2): केंद्र एवं राज्यों द्वारा जनसंख्या के अति संवेदनशील वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं और उनका प्रदर्शन, मानव संसाधन और शिक्षा से संबंधित विषय।
चर्चा में क्यों?
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय ने PM-YASASVI योजना (टॉप क्लास एजुकेशन घटक) के सफल प्रभाव को रेखांकित किया। कैट (CAT) परीक्षा में 99.5 पर्सेंटाइल हासिल करने वाले एक होनहार छात्र राजन कुमार को इस योजना के तहत ₹15.51 लाख की वित्तीय सहायता दी गई। इसके बल पर उन्होंने बिना किसी वित्तीय दबाव के एक शीर्ष बिजनेस स्कूल से अपना एमबीए (2024–2026) पूरा किया। यह केस स्टडी दर्शाती है कि कैसे यह योजना वंचित वर्गों के मेधावी छात्रों के लिए उच्च शिक्षा की राह आसान बना रही है।
मुख्य बिंदु: योजना की संरचना, उद्देश्य और सामाजिक-आर्थिक प्रभाव
1. PM-YASASVI योजना का परिचय
- पूरा नाम: पीएम यशस्वी (Prime Minister Young Achievers Scholarship Award Scheme for Vibrant India)।
- नोडल मंत्रालय: सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment)।
- लक्षित समूह: अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग (EBC), और गैर-अधिसूचित, घुमंतु व अर्ध-घुमंतु जनजातियां (DNT)।
2. ‘टॉप क्लास एजुकेशन’ घटक का दायरा
- उच्च शिक्षा में वित्तीय सहायता: देश के अधिसूचित शीर्ष संस्थानों (जैसे IITs, IIMs, NITs) में प्रवेश पाने वाले ओबीसी, ईबीसी और डीएनटी छात्रों की पूरी ट्यूशन फीस और अन्य शैक्षणिक खर्चों को यह योजना कवर करती है।
- सामाजिक गतिशीलता (Social Mobility): इसका मुख्य उद्देश्य वित्तीय तंगी के कारण पढ़ाई छोड़ने की मजबूरी को खत्म करना है। यह योजना मेधावी युवाओं को कौशल विकास और बेहतर करियर बनाने का समान अवसर देती है।
3. कौशल विकास और करियर पर प्रभाव
- वित्तीय सुरक्षा मिलने से छात्र केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि लीन सिक्स सिग्मा ग्रीन बेल्ट जैसे पेशेवर प्रमाणपत्रों और व्यावहारिक प्रोजेक्ट्स पर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं।

- यह पहल देश में मानव पूंजी का निर्माण करती है और एक अधिक समावेशी व कुशल अर्थव्यवस्था की नींव रखती है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| योजना का नाम | PM-YASASVI। |
| संबंधित घटक | Top Class Education Scheme for OBC, EBC and DNT Students। |
| मंत्रालय | सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय। |
| लक्षित लाभार्थी | OBC, EBC और DNT समुदायों के मेधावी छात्र। |
| मुख्य प्रावधान | अधिसूचित संस्थानों में उच्च शिक्षा के लिए पूर्ण वित्तीय सहायता/छात्रवृत्ति। |
Agni-4 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय महत्व की घटनाएं, रक्षा प्रौद्योगिकी (Defence Technology) और मिसाइल प्रणाली।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- सुरक्षा के क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक का विकास, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और स्ट्रैटेजिक डिटेंस।
चर्चा में क्यों?
भारत ने ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज ((Integrated Test Range – ITR) से अपनी मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल ‘Agni-4’ का एक और सफल परीक्षण संपन्न किया। यह परीक्षण देश की सेना के स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड (SFC) के तत्वावधान में आयोजित किया गया था, जिसने मिसाइल के सभी परिचालन और तकनीकी मानकों को सटीकता से सत्यापित किया। यह नियमित यूज़र ट्रायल भारत की रणनीतिक तैयारियों और विश्वसनीय न्यूनतम निवारण की क्षमता को और अधिक मजबूत करता है।
मुख्य बिंदु: परीक्षण विवरण, Agni-4 की विशेषताएं और सामरिक महत्व
1. सफल परीक्षण का दायरा
- परीक्षण स्थल: एकीकृत परीक्षण रेंज (ITR), चांदीपुर, ओडिशा।
- संचालक निकाय: यह सफल परीक्षण भारत के स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड (SFC) के संरक्षण में संपन्न हुआ।
- उद्देश्य: मिसाइल की परिचालन तत्परता और सभी तकनीकी मापदंडों का सत्यापन करना।
2. Agni-4 मिसाइल की प्रमुख तकनीकी विशेषताएं
- मिसाइल का प्रकार: मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM – Medium Range Ballistic Missile)।
- मारक क्षमता (Range): लगभग 4,000 किलोमीटर।
- प्रणोदन (Propulsion): दो-चरण वाला ठोस प्रणोदक (Two-stage solid propellant) इंजन।
- वॉरहेड क्षमता: यह पारंपरिक और परमाणु (Nuclear) दोनों तरह के पेलोड ले जाने में सक्षम है।
- नेविगेशन सिस्टम: इसमें अत्याधुनिक रिंग लेजर गायरो-बेस्ड इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (RINS) और माइक्रो नेविगेशन सिस्टम (MINGS) मौजूद है, जो इसे सटीक निशाना लगाने में मदद करता है।
3. सामरिक महत्व (Strategic Significance)
- न्यूनतम विश्वसनीय निवारक (Credible Minimum Deterrence): यह मिसाइल भारत की “नो फर्स्ट यूज” परमाणु नीति को मजबूती देती है।
- नेटवर्क-केंद्रित क्षमता: यह दूरस्थ लक्ष्यों पर सटीक हमला करने की क्षमता के साथ भारत के सामरिक सुरक्षा घेरे को अभेद्य बनाती है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| मिसाइल का नाम | Agni-4। |
| प्रकार | मध्यम दूरी की सतह-से-सतह पर मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM)। |
| परीक्षण स्थल | ITR चांदीपुर, ओडिशा। |
| मारक क्षमता | ~4,000 किलोमीटर। |
| संचालन निकाय | स्ट्रेटेजिक फोर्सेज कमांड (SFC)। |
| विकासकर्ता | रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO)। |
BRICS WAVES बाज़ार: मुंबई में वैश्विक रचनात्मक अर्थव्यवस्था का नया मंच
- प्रारंभिक परीक्षा: अंतर्राष्ट्रीय संगठन (BRICS), अर्थव्यवस्था और वैश्विक पहल।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): अंतर्राष्ट्रीय संबंध (दक्षिण-दक्षिण सहयोग), भारतीय अर्थव्यवस्था (ऑरेंज इकोनॉमी), रोजगार सृजन और प्रौद्योगिकी।
चर्चा में क्यों?
मुंबई में दो दिवसीय ‘BRICS WAVES बाज़ार’ का भव्य शुभारंभ हुआ। यह आयोजन भारत की अध्यक्षता में संचालित BRICS की थीम “Building for Resilience, Innovation, Cooperation, and Sustainability” के तहत आयोजित किया गया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और महाराष्ट्र सरकार के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य BRICS देशों के बीच ऑडियो-विजुअल, सिनेमा और डिजिटल मीडिया क्षेत्र में व्यापार और सहयोग को बढ़ाना है। इसमें 21 सदस्य व साझेदार देशों के 500 से अधिक प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
मुख्य बिंदु: ऑरेंज इकोनॉमी, वैश्विक जीडीपी और तकनीकी सहयोग
1. ऑरेंज इकोनॉमी और वैश्विक जीडीपी में योगदान
- ग्लोबल प्रभाव: वैश्विक रचनात्मक अर्थव्यवस्था वर्तमान में दुनिया की जीडीपी में 3.1% का योगदान देती है और 1.4 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का सेवा निर्यात उत्पन्न करती है।
- ऑरेंज इकोनॉमी का विचार: यह एक ऐसा मॉडल है जहाँ प्राचीन विरासत, कलात्मक रचनात्मकता और आधुनिक वाणिज्य का मिलन होता है। भारत इसे आर्थिक विकास का प्रमुख इंजन मान रहा है।
2. WAVES बाज़ार के प्रमुख घटक एवं क्षेत्र
- फोकस क्षेत्र: यह मंच फिल्म, टेलीविजन, एनीमेशन, VFX, गेमिंग, म्यूजिक, डिजिटल मीडिया और OTT प्लेटफॉर्म को एक साथ लाता है।

- B2B और सह-उत्पादन (Co-production): इसका उद्देश्य BRICS देशों के बीच बौद्धिक संपदा (IP) अधिकार, कंटेंट फाइनेंसिंग, और डिजिटल परिवर्तन को सुगम बनाना है।
3. भारतीय पहल एवं संस्थागत ढांचा
- सहायक तंत्र: भारत इस साझेदारी को मजबूत करने के लिए ‘इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज’, ‘इंडिया सीन हब’ और क्रिएटर स्किलिंग प्रोग्राम चला रहा है।
- BRICS फिल्म महोत्सव: यह बाजार नवंबर 2026 में होने वाले अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (IFFI) और BRICS फिल्म फेस्टिवल के लिए एक मजबूत व्यावसायिक आधार तैयार करेगा।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| कार्यक्रम का नाम | BRICS WAVES बाज़ार 2026। |
| आयोजन स्थल | मुंबई (महाराष्ट्र)। |
| आयोजक मंत्रालय | सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B) तथा विदेश मंत्रालय (MEA)। |
| कार्यान्वयन एजेंसी | राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम (NFDC)। |
| थीम | “Building for Resilience, Innovation, Cooperation, and Sustainability”। |
| सहभागी देश | BRICS सदस्य और 21 साझेदार देश। |
गोबर्धन योजना: स्वच्छ ऊर्जा और ग्रामीण समृद्धि की ओर भारत का बड़ा कदम
- प्रारंभिक परीक्षा: सरकारी नीतियां, पर्यावरण, ऊर्जा सुरक्षा और समावेशी विकास।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): सरकारी नीतियां, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि अवशिष्ट प्रबंधन, ग्रामीण विकास और सतत विकास लक्ष्य।
चर्चा में क्यों?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘गोबर्धन’ योजना को मंजूरी दी है। इसे ₹23,731 करोड़ के बजट के साथ FY 2026-27 से FY 2035-36 तक लागू किया जाएगा। इस राष्ट्रीय योजना का मुख्य उद्देश्य देश के कृषि अवशेषों, गोबर और जैविक कचरे को कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और जैविक खाद में बदलना है। यह पहल भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है।
गोबर्धन योजना के 6 मुख्य स्तंभ
1. निश्चित खरीद (Assured Offtake):
- सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) संस्थाओं के लिए सीएनजी और पीएनजी सेगमेंट में सीबीजी मिश्रण अनिवार्य किया गया है।
- खरीद का लक्ष्य: FY 2026-27 में 3%, FY 2027-28 में 4% और FY 2028-29 से 5% निर्धारित है।
2. स्थिर मूल्य ढांचा (Pricing Framework):
- सीबीजी उत्पादकों के लिए ₹2,110 प्रति MMBTU की स्थिर कीमत तय की गई है।
- यह दर न्यूनतम 10 वर्षों के लिए लागू रहेगी, जिससे निवेशकों को लंबे समय तक वित्तीय सुरक्षा मिलेगी।
3. पूंजीगत सहायता (Capital Assistance):
- नए (Greenfield) प्रोजेक्ट्स को क्षमता के आधार पर ₹2 करोड़ प्रति टन/दिन (TPD) तक की मदद मिलेगी।
- मौजूदा (Brownfield) प्लांट के विस्तार के लिए भी वित्तीय सहायता दी जाएगी।
4. पाइपलाइन अवसंरचना का विकास:
- सीबीजी प्लांटों को मुख्य गैस नेटवर्क और सिटी गैस सिस्टम से जोड़ने के लिए बुनियादी ढांचे का निर्माण होगा।
- इससे ट्रांसपोर्टेशन लागत घटेगी और गैस की आपूर्ति आसान होगी।
5. क्रेडिट गारंटी सहायता:
- एमएसएमई (MSME) और ग्रामीण उद्यमियों के लिए लोन लेना आसान बनाने हेतु क्रेडिट गारंटी सिस्टम शुरू किया जाएगा।
- इससे बैंक लोन में जोखिम कम होगा और नए उद्यमियों की भागीदारी बढ़ेगी।
6. इकोसिस्टम चैलेंज फंड:
- जिला स्तर पर कचरा प्रबंधन, फीडस्टॉक मैपिंग और तकनीक सुधार के लिए विशेष फंड बनाया गया है।
- यह जैविक खाद की गुणवत्ता बढ़ाने और जन-जागरूकता फैलाने का काम करेगा।
योजना के प्रमुख लाभ और प्रभाव
- उत्पादन में वृद्धि: देश में सीबीजी उत्पादन में लगभग 10 गुना वृद्धि का अनुमान है।
- ऊर्जा सुरक्षा: जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता कम होगी।
- ग्रामीण आय: किसानों और स्थानीय उद्यमियों को कृषि अवशेष और गोबर बेचने का नया जरिया मिलेगा।
- पर्यावरण संरक्षण: पराली जलाने की समस्या कम होगी और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आएगी।
- जैविक खेती: सीबीजी निर्माण के बाद बचे अवशेष से उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद (FOM/LFOM) बनेगी।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| योजना का नाम | गोबर्धन (National Circular Bioenergy Scheme)। |
| कुल बजट | ₹23,731 करोड़। |
| कार्यान्वयन अवधि | 10 वर्ष (FY 2026-27 से FY 2035-36)। |
| नोडल मंत्रालय | पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय। |
| निश्चित सीबीजी दर | ₹2,110 प्रति MMBTU (न्यूनतम 10 वर्ष हेतु)। |
| सीबीजी मिश्रण लक्ष्य | 2026-27 (3%), 2027-28 (4%), 2028-29 onwards (5%)। |
नमो भारत RRTS: दिल्ली-एनसीआर में क्षेत्रीय आवागमन का नया युग
- प्रारंभिक परीक्षा: बुनियादी ढांचा (Urban Infrastructure), परिवहन, हरित ऊर्जा और सरकारी नीतियां।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 3): बुनियादी ढांचा: ऊर्जा, बंदरगाह, सड़क, विमानपत्तन, रेलवे आदि; शहरीकरण की समस्याएं, उनका समाधान और सतत विकास।
चर्चा में क्यों?
आवास और शहरी मामलों के राज्य मंत्री तोखन साहू ने लोकसभा में भारत के पहले ‘नमो भारत’ रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) कॉरिडोर के क्रियान्वयन और उसकी प्रगति पर लिखित उत्तर दिया। फरवरी 2026 से पूरी तरह चालू हुआ 82.15 किमी लंबा दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ RRTS कॉरिडोर अब तक 3.8 करोड़ से अधिक यात्रियों को सेवा दे चुका है। इसकी समयबद्धता 99% से अधिक रही है। संसद में दी गई जानकारी से इस परियोजना के विस्तार, किराए में छूट, सौर ऊर्जा उपयोग और ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) नीतियों पर कई नए तथ्य सामने आए हैं।
मुख्य बिंदु: बहु-स्तरीय एकीकरण, चरण-1 विस्तार और शहरी विकास नीतियां
1. परिचालन क्षमता और मल्टी-मॉडल एकीकरण
- एकीकरण: दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ कॉरिडोर को 3 मेट्रो लाइनों, 2 रेलवे स्टेशनों और 4 बस टर्मिनलों के साथ जोड़ा गया है।
- मानक: यह एकीकरण DDA के ‘यूनिफाइड ट्रैफिक एंड ट्रांसपोर्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर (प्लानिंग एंड इंजीनियरिंग) सेंटर’ (UTTIPEC) के दिशानिर्देशों के अनुरूप किया गया है।
- मेरठ नेटवर्क: इस 82.15 किमी लंबे कॉरिडोर में मेरठ मेट्रो नेटवर्क का 23 किमी हिस्सा भी शामिल है, जो समान बुनियादी ढांचे पर चलता है।
2. चरण-1 के प्राथमिकता वाले कॉरिडोर और नए DPRs
- प्राथमिकता वाले 3 कॉरिडोर:
- दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ (पूर्णतः संचालित)।
- दिल्ली-गुरुग्राम-अलवर।
- दिल्ली-पानीपत।
- नए प्रस्तावित कॉरिडोर (DPR प्रस्तुत): NCRTC ने दिल्ली से करनाल, दिल्ली से बावल, बावल से बहरोड़ और गाजियाबाद से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) केंद्र सरकार को सौंप दी है।
3. ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) और हरित पहल
- TOD नीतियां: गाजियाबाद और मेरठ के मास्टर प्लान में TOD जोन अधिसूचित किए गए हैं। दिल्ली TOD नीति 2021 के तहत जंगपुरा और सराय काले खां में इन्फ्लुएंस जोन प्लान (IZP) तैयार किए गए हैं।
- स्वचालित TOD कवरेज: दिल्ली TOD नीति 2026 के प्रावधानों के अनुसार, दिल्ली में बनने वाला कोई भी नया RRTS कॉरिडोर स्वतः ही TOD श्रेणी के अंतर्गत माना जाएगा।
- हरित ऊर्जा: स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग के लिए पूरे नेटवर्क में 7.8 MWp क्षमता के रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाए गए हैं।
4. यात्री-अनुकूल किराया संरचना
- बेसिक किराए पर सभी यात्रियों को 35% की छूट दी जा रही है।
- नियमित यात्रियों के लिए लॉयल्टी पॉइंट्स की व्यवस्था शुरू की गई है, जिसका उपयोग किराए में अतिरिक्त छूट प्राप्त करने के लिए किया जा सकता है।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| परियोजना का नाम | नमो भारत RRTS (दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ)। |
| कुल लंबाई | 82.15 किमी (मेरठ मेट्रो का 23 किमी हिस्सा शामिल)। |
| कार्यान्वयन एजेंसी | नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (NCRTC)। |
| सफलता दर | 99% से अधिक समयबद्धता (Punctuality)। |
| सौर ऊर्जा क्षमता | 7.8 MWp (रूफटॉप सोलर)। |
| किराया राहत | मूल किराए पर 35% छूट + लॉयल्टी पॉइंट्स सिस्टम। |
MAHA वॉटर मिशन: जल सुरक्षा और अनुसंधान के लिए भारत की नई पहल
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की घटनाएं, जल संसाधन, पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): सरकारी नीतियां और हस्तक्षेप, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी- अनुसंधान और विकास (R&D), जल संरक्षण, जलवायु परिवर्तन का प्रभाव।
चर्चा में क्यों?
जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने लोकसभा में ‘MAHA वॉटर मिशन’ के कार्यान्वयन पर महत्वपूर्ण विवरण साझा किया। 1 जून 2026 को शुरू किया गया MAHA वॉटर प्रोग्राम (Mission for Advancement in High-impact Areas – Water) अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) और जल शक्ति मंत्रालय की एक संयुक्त पहल है। इसका मुख्य उद्देश्य देश में जल क्षेत्र की गंभीर चुनौतियों का समाधान करने के लिए समाधान-आधारित शोध और नवाचार को बढ़ावा देना है।
मुख्य बिंदु: ANRF, मिशन संरचना और उद्योग सहभागिता
1. ANRF और MAHA फ्रेमवर्क
- स्थापना: अनुसंधान राष्ट्रीय अनुसंधान फाउंडेशन (ANRF) की स्थापना ANRF अधिनियम, 2023 के तहत एक वैधानिक निकाय के रूप में की गई है।
- उद्देश्य: राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) की सिफारिशों के अनुरूप अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता को रणनीतिक दिशा देना।
- MAHA मॉडल: यह बहु-विषयक (multi-disciplinary) और बहु-संस्थगत (multi-institutional) प्रोजेक्ट्स को मिशन मोड में सहायता प्रदान करता है।
2. MAHA वॉटर प्रोग्राम के 5 मुख्य विषय
- जल संसाधन मूल्यांकन और सतत प्रबंधन।
- पेयजल और जल गुणवत्ता (मानव व पारिस्थितिक स्वास्थ्य)।
- जल उपयोग दक्षता (Water Use Efficiency) और सर्कुलर इकोनॉमी।
- जलवायु सहनशीलता और अनुकूलन (Climate Resilience & Adaptation)।
3. कंसोर्टियम मॉडल और उद्योग भागीदारी
- अनिवार्य शर्त: इस कार्यक्रम में अनुसंधान प्रस्तावों के लिए कम से कम एक स्टार्ट-अप, एमएसएमई (MSME) या उद्योग भागीदार का होना अनिवार्य है।
- वित्तीय योगदान: उद्योग भागीदार को कुल परियोजना लागत का 10% नकद योगदान देना होगा।
- पात्र संस्थाएं: इसमें अकादमिक संस्थान, शोध प्रयोगशालाएं, DSIR-SIRO पंजीकृत संगठन और धारा-8 कंपनियां भाग ले सकती हैं।
4. सहायक पहलें और भारत WIN पोर्टल
- भारत WIN पोर्टल: स्टार्ट-अप्स और एमएसएमई की भागीदारी को आसान बनाने और नई जल प्रौद्योगिकियों के विकास को गति देने के लिए यह पोर्टल चालू किया गया है।
- जल शक्ति हैकाथॉन: व्यावहारिक और फील्ड-रेडी तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया गया।
- प्रौद्योगिकी हस्तांतरण: आरएंडडी (R&D) के परिणामों को राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और संबंधित एजेंसियों के साथ साझा किया जाता है ताकि इन्हें जमीनी स्तर पर लागू किया जा सके।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| कार्यक्रम का नाम | MAHA वॉटर प्रोग्राम (ANRF के तहत)। |
| लॉन्च तिथि | 1 जून 2026। |
| सहयोगी निकाय | ANRF (विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग) + जल शक्ति मंत्रालय। |
| ANRF का आधार | ANRF अधिनियम, 2023 (वैधानिक निकाय)। |
| उद्योग योगदान | कुल परियोजना लागत का 10% (नकद)। |
| तकनीकी पोर्टल | भारत WIN पोर्टल (Bharat WIN Portal)। |
वन गुर्जर जनजातीय समुदाय का मौसमी प्रवास: अधिकार और चुनौतियाँ
- प्रारंभिक परीक्षा: भारतीय राजव्यवस्था, अनुसूचित जातियां व जनजातियां (STs), वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): सामाजिक न्याय: कमजोर वर्गों के लिए कल्याणकारी योजनाएं तथा पर्यावरण, जैव विविधता व पारंपरिक वन अधिकार।
चर्चा में क्यों?
जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके ने लोकसभा में उत्तराखंड के ‘वन गुर्जर’ समुदाय के मौसमी प्रवास (Seasonal Migration) और उनके अधिकारों पर जानकारी साझा की। मंत्रालय ने जून 2025 में उत्तराखंड सरकार और देहरादून, उत्तरकाशी, चमोली, हरिद्वार तथा नैनीताल सहित 9 जिलों के प्रशासन को निर्देश जारी किए थे। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मौसमी प्रवास के दौरान इस घुमंतू समुदाय को उनके पारंपरिक वन अधिकारों से वंचित न किया जाए।
मुख्य बिंदु: वन गुर्जर, मौसमी प्रवास और FRA धारा 3(1)(d)
1. वन गुर्जर कौन हैं?
- समुदाय: यह मुख्य रूप से उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के हिमालयी क्षेत्रों में निवास करने वाला एक घुमंतू पशुपालक (Nomadic Pastoralist) समुदाय है।
- प्रवास पैटर्न: ये मौसम के अनुसार अपने मवेशियों (मुख्यतः भैंसों) के साथ पलायन करते हैं। सर्दियों में ये तराई/भाबर के वनों में रहते हैं और गर्मियों में उच्च हिमालयी बुग्यालों (Alpine Meadows) की ओर चले जाते हैं।
2. कानून और अधिकारों का संरक्षण (Forest Rights Act)
- FRA की धारा 3(1)(d): यह धारा घुमंतू या पशुपालक समुदायों के पारंपरिक मौसमी संसाधनों तक पहुंच और सामुदायिक वन अधिकारों (Community Forest Rights) को कानूनी सुरक्षा प्रदान करती है।
- मंत्रालय का रुख: केंद्र सरकार ने राज्यों को स्पष्ट निर्देश दिया है कि किसी भी पात्र वन गुर्जर को उनके पारंपरिक अधिकारों से बेदखल न किया जाए।
3. प्रशासनिक कदम और चुनौतियाँ
- उत्तराखंड सरकार की कार्रवाई: राज्य के जनजातीय कल्याण विभाग ने 9 संबंधित जिला प्रशासनों को वन गुर्जरों की समस्याओं को प्राथमिकता से हल करने का आदेश दिया है।
- प्रमुख मुद्दे: वनों में प्रवेश की अनुमति न मिलना, चारागाहों की कमी, बेदखली का डर और मौसमी पलायन के दौरान मिलने वाली स्वास्थ्य व शिक्षा सुविधाओं का अभाव।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| जनजाति का नाम | वन गुर्जर। |
| प्रकृति | घुमंतू पशुपालक (Nomadic Pastoralist)। |
| प्रमुख क्षेत्र | उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर। |
| संबद्ध कानून | वन अधिकार अधिनियम (FRA), 2006। |
| मुख्य धारा | धारा 3(1)(d) – मौसमी संसाधनों तक पहुंच का अधिकार। |
| संबंधित राज्य के जिले | देहरादून, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल, आदि (कुल 9 जिले)। |
एआई-जनरेटेड डीपफेक पर कसता शिकंजा: भारत सरकार का नया नियामक ढांचा
- प्रारंभिक परीक्षा: राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, सूचना प्रौद्योगिकी (IT) नियम, एआई गवर्नेंस।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): सरकारी नीतियां व आंतरिक सुरक्षा तथा साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का विनियमन और टेक-गवर्नेंस।
चर्चा में क्यों?
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में एआई-जनरेटेड डीपफेक और भ्रामक सामग्री (Misinformation) से निपटने के लिए उठाए गए सुदृढ़ कानूनी व प्रशासनिक कदमों की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की। सरकार ने 10 फरवरी 2026 को IT नियम, 2021 में संशोधन करके एआई-जनरेटेड सामग्री की लेबलिंग को अनिवार्य कर दिया है। इसके अतिरिक्त, अवैध डीपफेक सामग्री को हटाने की समय-सीमा को 36 घंटे से घटाकर मात्र 3 घंटे कर दिया है।
मुख्य बिंदु: कानूनी ढांचा, IT नियम संशोधन और एआई गवर्नेंस
1. 10 फरवरी 2026 के नए IT नियम संशोधन
- AI सामग्री की लेबलिंग: सिंथेटिक मीडिया (SGI) के लिए स्पष्ट वॉटरमार्क/लेबल और ट्रैसेबल मेटाडेटा अनिवार्य है ताकि यूजर असली और नकली में अंतर कर सकें।
- सख्त समय-सीमा (Takedown Timelines):
- कोर्ट या सरकार के आदेश पर गैर-कानूनी सामग्री हटाने की समय-सीमा 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे की गई।
- शिकायत निवारण समय-सीमा 72 घंटे से घटाकर 36 घंटे हुई।
- नग्नता या पहचान की चोरी (NCII/Impersonation) जैसे संवेदनशील मामलों में कार्यवाही का समय 24 घंटे से घटाकर 2 घंटे कर दिया गया।
- सेफ हार्बर की समाप्ति: यदि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (जैसे X, Meta) इन दायित्वों का पालन नहीं करते हैं, तो वे IT अधिनियम की धारा 79 के तहत कानूनी छूट खो देंगे और सीधे जिम्मेदार होंगे।
2. मौजूदा कानूनी और दंडात्मक प्रावधान
- IT अधिनियम, 2000:
- धारा 66C/66D: पहचान की चोरी और छद्मवेश (Impersonation)।
- धारा 66E/67/67A: निजता उल्लंघन और अश्लील सामग्री।
- धारा 69A & 79: कंटेंट ब्लॉकिंग और टेकडाउन आदेश।
- भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023:
- धारा 319: रूप बदलकर धोखा देना।
- धारा 336: जालसाजी और झूठे इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड।
- धारा 353: भ्रामक बयानों या अफवाहों के जरिए सार्वजनिक उपद्रव फैलाना।
- धारा 111: संगठित साइबर अपराध।
3. संस्थागत तंत्र और इंडिया AI मिशन
- IndiaAI गवर्नेंस गाइडलाइंस (5 नवंबर 2025): AI के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के लिए जोखिम-आधारित फ्रेमवर्क जारी।
- डीपफेक डिटेक्शन प्रोजेक्ट्स:
- साक्ष्य: IIT जोधपुर और IIT मद्रास द्वारा विकसित मल्टी-एजेंट फ्रेमवर्क।
- AI विश्लेषक: ऑडियो-विजुअल फर्जीवाड़े को पकड़ने की प्रणाली।
- IIT खड़गपुर: रियल-टाइम वॉइस डीपफेक डिटेक्शन।
- समन्वय प्लेटफार्म & ‘प्रतिबिंब’ मॉड्यूल: I4C द्वारा संचालित, जिसने साइबर अपराधियों की लोकेशन मैपिंग के जरिए अब तक 12,987 गिरफ्तारियां की हैं।
- नागरिक शिकायत केंद्र: राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (cybercrime.gov.in), हेल्पलाइन नंबर 1930 और GAC (ग्रेविअंस अपील कमिटी)।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| नियम संशोधन तिथि | 10 फरवरी 2026 (IT नियम, 2021 में संशोधन)। |
| सामग्री हटाने की समय-सीमा | 36 घंटे से घटाकर 3 घंटे की गई। |
| संवेदनशील शिकायत निपटान | अश्लीलता/पहचान की चोरी पर 2 घंटे के भीतर कार्रवाई। |
| सेफ हार्बर सुरक्षा | IT एक्ट की धारा 79 (अनुपालन न करने पर रद्द)। |
| I4C का टेकडाउन पोर्टल | सहयोग पोर्टल। |
| डीपफेक डिटेक्शन मॉडल | ‘साक्ष्य’ (IIT जोधपुर + IIT मद्रास)। |
| हेल्पलाइन व पोर्टल | 1930 हेल्पलाइन, goc.gov.in (GAC Appeals)। |
10वीं ब्रिक्स उद्योग मंत्रियों की बैठक: जयपुर में भारत की अध्यक्षता का सफल समापन
- प्रारंभिक परीक्षा: अंतर्राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाएं, ब्रिक्स (BRICS) और अंतर्राष्ट्रीय संस्थान।
- मुख्य परीक्षा (GS Paper 2 & 3): द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक समूह तथा औद्योगिक विकास, नवाचार, MSMEs एवं आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन।
चर्चा में क्यों?
भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत 10वीं ब्रिक्स उद्योग मंत्रियों की बैठक जयपुर, राजस्थान में संपन्न हुई। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों ने औद्योगिक विकास को गति देने के लिए एक ऐतिहासिक संयुक्त घोषणा-पत्र (Joint Declaration) स्वीकार किया। भारत की अध्यक्षता का मुख्य विषय “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और निरंतरता का निर्माण” (Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability) रहा। इसके ठीक बाद 7 अगस्त 2026 को जयपुर में ही 16वीं ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों की बैठक भी आयोजित की जा रही है।
मुख्य बिंदु: PartNIR फ्रेमवर्क, स्टार्टअप फंड और नया एक्शन प्लान
1. PartNIR और औद्योगिक सहयोग
- मुख्य मंच: ‘न्यू इंडस्ट्रियल रिवोल्यूशन पर ब्रिक्स पार्टनरशिप’ (PartNIR) औद्योगिक सहयोग का प्रमुख तंत्र बनकर उभरा है।
- संयुक्त घोषणा-पत्र: सदस्य देशों ने केवल संवाद तक सीमित न रहकर व्यावहारिक उपकरणों (Practical Instruments) को लागू करने पर सहमति जताई।
2. प्रमुख प्रस्ताव और अपनाए गए एक्शन प्लान
- ब्रिक्स स्टार्टअप पहल: भारत ने नवाचार-आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए ‘BRICS Incubator Network’ और ‘BRICS Startup Innovation Fund’ की स्थापना का प्रस्ताव रखा।
- सौर ऊर्जा क्षेत्र (Photovoltaic Industry): फोटोवोल्टिक कार्य समूह के लिए शर्तें (ToR) और एक्शन प्लान अपनाया गया, जिससे सौर ऊर्जा निर्माण में संरचनात्मक सहयोग मिलेगा।

- MSME इकोसिस्टम: छोटे और मध्यम उद्योगों को मजबूत करने के लिए SME कार्य समूह के सहयोग ढांचे को अंतिम रूप दिया गया।
- लॉजिस्टिक्स व इंफ्रास्ट्रक्चर: GIS-आधारित बुनियादी ढांचा योजना और सिटी लॉजिस्टिक्स प्लानिंग पर जोर दिया गया।
3. आगामी 16वीं ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों की बैठक
- मुख्य एजेंडा: बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली (WTO केंद्र में), वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Global Value Chains) का विविधीकरण और एमएसएमई की अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में भागीदारी।
- विज़न: यह बैठक भारत के ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य के अनुरूप उभरती अर्थव्यवस्थाओं के साथ व्यापारिक संबंधों को प्रगाढ़ करेगी।
प्रारंभिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
| घटक / बिंदु | महत्वपूर्ण तथ्य |
| बैठक का नाम | 10वीं ब्रिक्स उद्योग मंत्रियों की बैठक (2026)। |
| आयोजन स्थल | जयपुर, राजस्थान। |
| अध्यक्षता देश | भारत (BRICS Chairship 2026)। |
| मुख्य विषय (Theme) | Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability. |
| भारत के दो नए प्रस्ताव | BRICS Incubator Network & BRICS Startup Innovation Fund. |
| नया कार्य समूह ढांचा | Photovoltaic Industry Working Group (ToR & Action Plan). |
| अगली बैठक | 16वीं ब्रिक्स व्यापार मंत्रियों की बैठक (7 अगस्त 2026, जयपुर)। |